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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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		<title>उत्पाती-अहंकारियों को अच्छे से संभालते हैं बिरलाः मोदी</title>
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		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 14:02:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#8211; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के प्रयासों की सराहना &#8211; बोलेः बड़े घराने के उत्पाती, अहंकारियों को भी अच्छे से संभालते हैं बिरला कोटा। नवंबर 2023 में जब मैं कोटा आया तो मैने कोटा की जनता से वायदा किया था कि कोटा का एयरपोर्ट केवल एक सपना बनकर नहीं रहेगा, &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/pm-modi-fulfills-promise-of-building-airport-in-kota/13293/">उत्पाती-अहंकारियों को अच्छे से संभालते हैं बिरलाः मोदी</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&#8211; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के प्रयासों की सराहना </strong><br />
<strong>&#8211; बोलेः बड़े घराने के उत्पाती, अहंकारियों को भी अच्छे से संभालते हैं बिरला</strong></p>
<p><strong>कोटा</strong>। नवंबर 2023 में जब मैं कोटा आया तो मैने कोटा की जनता से वायदा किया था कि कोटा का एयरपोर्ट केवल एक सपना बनकर नहीं रहेगा, बल्कि उसे साकार करके दिखाया जाएगा। मुझे खुशी है कि आज काम शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के शिलान्यास समारोह को वीडियो संदेश के जरिए संबोधित करते हुए यह बात कही।<br />
पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन पूरे हाड़ौती के लिए नई आशा और उपलब्धि का दिन है। करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपए से बनने जा रहा यह आधुनिक एयरपोर्ट पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति देने वाला है। मैं कोटा और पूरे हाड़ौती क्षेत्र के लोगों को एयरपोर्ट के इस शिलान्यास कार्यक्रम में बहुत शुभकामनाएं देता हूं।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-13295" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/03/FB_IMG_1772890246517.jpg" alt="" width="2048" height="1120" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/03/FB_IMG_1772890246517.jpg 2048w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/03/FB_IMG_1772890246517-300x164.jpg 300w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/03/FB_IMG_1772890246517-1024x560.jpg 1024w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/03/FB_IMG_1772890246517-768x420.jpg 768w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/03/FB_IMG_1772890246517-1536x840.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></p>
<p><strong>तेजी से बढ़ रहा राजस्थान</strong><br />
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले ही हफ्ते ही राजस्थान की यात्रा पर आने का अवसर मिला था। अजमेर की पावन धरती से हमने राजस्थान के विकास से जुड़े हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट का शिलान्यास लोकार्पण किया था। 21 हजार साथियों को नियुक्तियों को भी सौंपे गए। अजमेर यात्रा के कुछ ही दिनों बाद आज कोटा से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को शुरु करने का अवसर मिल रहा है। एक ही हफ्ते में राजस्थान के इन दो बड़े कार्यक्रमों का बड़ा संदेश है। यह बताते हैं कि आज राजस्थान बहुत तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इन्फ्रास्ट्रेक्चर हो, रोजगार के अवसर हों, किसानों और माता बहनों के लिए योजनाएं हो। राजस्थान में हर क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है।</p>
<p><strong>एयरपोर्ट से खुलेंगे विकास के नए अवसर</strong><br />
पीएम मोदी ने कहा कि अब तक कोटा के लोगों को जयपुर जाकर फ्लाइट पकड़नी पड़ती थी। इसमें काफी समय भी लगता था और असुविधा भी होती थी। अब स्थिति बदलने जा रही है। अब कोटा समेत पूरे इलाके में यात्रा भी आसान होगी और व्यापार भी तेजी से बढ़ेगा।<strong><span style="color: #000000;"> उन्होंने कहा कि कोटा केवल शिक्षा का ही नहीं ऊर्जा का भी केंद्र है। कोटा वह अनूठा क्षेत्र है, जहां न्यूक्लियर, कोयला गैस-पानी आधारित सभी क्षेत्रों में बिजली का उत्पादन होता है। कोटा कचौरी का जायका, डोरिया साड़ी, स्टोन और सेंड स्टोन ने दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है। यहां का धनिया बूंदी का बासमती चावल हो। इसकी महक अंतरराष्टीय बाजार तक पहुंची है। यह क्षेत्र अपने परिश्रम और महेनत के लिए जाना जाता है।</span></strong></p>
<p><a href="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-13139 size-medium" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-300x300.jpg" alt="" width="300" height="300" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-300x300.jpg 300w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-1024x1024.jpg 1024w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-150x150.jpg 150w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-768x768.jpg 768w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a></p>
<p><strong>खुलेगी पर्यटन की राह</strong><br />
<span style="color: #993300;"><strong>पीएम मोदी ने कहा कि कोटा हाड़ौती की यह धरती उद्यम और आस्था का भी बड़ा केंद्र है। सदियों से देश दुनिया के श्रद्धालु मथुराधीश जी, केपाटन, गोदावरी और खड़े गणेश जी आते हैं। गरडिया महादेव से दिखने वाला चंबल का दृश्य हर किसी को मंत्र मुग्ध कर देता है। मुकुंदरा और रामगढ़ इस क्षेत्र को वाइल्ड लाइफ टूरिज्म का बड़ा क्षेत्र बनाते हैं।</strong></span> हवाई कनेक्टिविटी शुरू होते ही इसका लाभ सभी को मिलेगा। कोटा वैसे भी कनेक्टिविटी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। दोनों रेलवे स्टेशन डेवलप हो रहे हैं। दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेसवे पूरे क्षेत्र के विकास का द्वार खोल रहा है। बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी के कारण यहां नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं। विशेषतौर पर एग्रोबेस इंडस्ट्री के लिए बड़ा क्षेत्र बनेगा। कोटा एयरपोर्ट पूरे हाड़ौती के क्षेत्र के लिए प्रगति के नए अवसर लेकर आएगा। जब कनेक्टिविटी बढ़ती है तो विकास की संभावनाओं में नई तेजी आती है।</p>
<p><strong>उत्पाती-अहंकारियों को अच्छे से संभालते हैं बिरलाः मोदी</strong><br />
पीएम मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बिरला जितने शानदार सांसद हैं उतने बेहतरीन लोकसभा अध्यक्ष भी हैं। वह संविधान को पूरी तरह समर्पित हैं। संसदीय प्रणाली में निष्ठा रखते हैं। वह किसी पक्ष के सदस्य नहीं है। वह पक्ष और प्रतिपक्ष से ऊपर हैं। शिक्षा की नगरी से आने का ही प्रभाव है कि वह लोकसभा अध्यक्ष के तौर पर वह एक मुखिया की तरह सभी को साथ लेकर चलते हैं। सांसदों को अच्छे से संभाल लेते हैं। उनकी भावनाओं को संभाल लेते हैं। कुछ बड़े घरानों के अहंकारी उत्पाती छात्र आ भी जाते हैं, तो वह अपना हुडदंग करने की आदत तो छोड़ते नहीं है, लेकिन ओम बिरला उन्हें भी अच्छे से संभालते हैं। सभी के कड़वे बोल झेल लेते हैं। हर बार वह मुस्कुराते हैं। एक मीठी हंसी उनके चेहते पर हमेशा रहती है। यह भी एक कारण है कि वह सदन में सर्व प्रिय हैं।<br />
कोटा-बूंदी के लोगों का जीवन बेहतर हो<br />
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के निरंतर प्रयासों की सराहना करना चाहता हूं। उनकी यही कोशिश रही है कि कोटा के लोगों का जीवन बेहतर बने। उन्हें नए अवसर प्राप्त हों। ट्रिपल आईटी का नया कैंपस। सड़कों का विकास। कोटा के लिए वह लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनके कारण ही इस क्षेत्र को नई गति मिल रही है।</p>
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		<title>हाड़ौती की उड़ान: शंभूपुरा में कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शिलान्यास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 13:44:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#8211; लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और उड्यन मंत्री केआर नायडू ने किया शिलान्यास &#8211; पीएम मोदी बोलेः ढाई साल पहले की थी एयरपोर्ट स्थापित करने की घोषणा, अब खत्म होगा दो दशक का इंतजार कोटा। राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना शनिवार को &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&#8211; लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और उड्यन मंत्री केआर नायडू ने किया शिलान्यास </strong><br />
<strong>&#8211; पीएम मोदी बोलेः ढाई साल पहले की थी एयरपोर्ट स्थापित करने की घोषणा, अब खत्म होगा दो दशक का इंतजार</strong></p>
<p><strong>कोटा</strong>। राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना शनिवार को औपचारिक रूप से जमीन पर उतर आई। वीडियो संदेश से शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ढ़ाई साल पहले कोटा बूंदी में एयरपोर्ट स्थापित करने की घोषणा की थी। जिसे आज पूरा करके भी दिखा दिया। एयरपोर्ट की स्थापना हाड़ौती के विकास के नए द्वार खोलेगी।</p>
<p>कोटा के शंभूपुरा में शनिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और उड्यन मंत्री के राम मोहन नायडू ने शनिवार को शंभूपुरा में कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शिलान्यास किया।<br />
करीब 1,500 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनने वाला यह ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट वर्ष 2027 तक तैयार हो जाएगा। शंभूपुरा के पास 440 हेक्टेयर से बड़े भूभाग पर बनने वाले इस एयरपोर्ट में लगभग 45 मीटर चौड़े और 3.2 किलोमीटर लंबे रनवे पर एयरबस (A321) जैसे बड़े विमान उतर सकेंगे। इसके साथ ही आधुनिक यात्री टर्मिनल, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर, विमान पार्किंग एप्रन और सहायक अवसंरचना विकसित की जाएगी। प्रारंभिक चरण में इसकी वार्षिक यात्री क्षमता लगभग 20 लाख यात्रियों की रखी गई है, जिसे भविष्य की मांग को देखते हुए बढ़ाया जा सकेगा।</p>
<p><strong>क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए नया इंजन</strong><br />
समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कोटा-बूंदी एयरपोर्ट केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि पूरे हाड़ौती क्षेत्र की आर्थिक आकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उद्योग, व्यापार और पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधि इस बात को महसूस करते रहे हैं कि बेहतर हवाई कनेक्टिविटी के बिना क्षेत्र की संभावनाएं पूरी तरह सामने नहीं आ पातीं।<br />
उन्होंने कहा कि कोटा देश-विदेश में अपनी पहचान बनाने वाला शहर है, यहां उद्योग है, उर्वर कृषि क्षेत्र है, और सबसे बढ़कर देश का प्रमुख शिक्षा केंद्र है। लाखों विद्यार्थी हर साल यहां आते हैं, लेकिन हवाई कनेक्टिविटी के अभाव में शहर तक पहुंचना उनके लिए समय-साध्य और कठिन बना रहता था। एयरपोर्ट बनने के बाद यह स्थिति बदलेगी और कोटा न केवल देश के प्रमुख शहरों से बल्कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से भी अधिक सहजता से जुड़ सकेगा।<br />
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कोटा-बूंदी में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट स्थापित होने से कोटा बूंदी और हाड़ौती ही नहीं पूरे राजस्थान में विकास के नए द्वार खुलेंगे। एयरपोर्ट के पास ही उद्योगों के लिए 600 हेक्टेयर जमीन औद्योगिक विकास के लिए रीको को दी गई है। जहां आने वाले दिनों में नए उद्योग स्थापित होंगे। ट्रिपल आईटी के विस्तार के साथ ही कोटा आईटी का नया हब भी बनेगा। कोटा-बूंदी निश्चित ही देश का सबसे तेजी से विकसित होता क्षेत्र बनेगा।<br />
जो 75 साल में नहीं हुआ 5 साल में करके दिखाएंगे<br />
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि जो काम पिछली सरकारें 75 साल में भी नहीं कर पाई थीं उन्हें इन पांच सालों में ही करके दिखा देंगे। चम्बल और परवन जैसी हमेशा पानी से भरी रहने वाली नदियों के किनारे रहकर भी इस इलाके के हजारों गांवों में पर्याप्त पानी नहीं था। हर घर तक पीने का पानी और हर खेत तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाकर ही दम लेंगे। जो सपने देखते हैं उन्हें पूरा भी करते हैं।</p>
<p><strong>कोटा बूंदी की उड़ान में नहीं आने देंगे कोई रुकावट</strong><br />
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को विशेष प्राथमिकता दी और प्रशासनिक, आर्थिक तथा भूमि संबंधी बाधाओं को तेजी से दूर किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान तेजी से विकसित हो रहे राज्यों में शामिल है और बुनियादी ढांचे के मजबूत होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है। प्रदेश में सरकार आते ही सिर्फ तीन महीने में एयरपोर्ट के रास्ते में आ रही सारी अड़चनें खत्म कर दीं। आगे भी किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं आने देंगे।</p>
<p><strong>दो साल में पूरा करना होगा काम</strong><br />
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि कोटा-बूंदी में एयरपोर्ट की स्थापना का काम काफी पहले शुरू हो जाता, लेकिन केंद्र सरकार जितनी तेजी से निर्णय ले रही थी, राजस्थान सरकार उतना ही डिले कर रही थी। भजनलाल शर्मा जब मुख्यमंत्री बने तब जाकर उन्होंने सिर्फ तीन महीने में सारी क्लीयरेंस दिलवा दी। नायडू ने कहा कि अब हमारा लक्ष्य है कि किसी भी सूरत में कोटा बूंदी एयरपोर्ट का काम दो साल में पूरा करवाएंगे। बनाना है दो साल में मतलब बनाना ही पड़ेगा इसे। उन्होंने कहा कि कई एयरलाइंस पहले से ही कोटा से उड़ान भरने के लिए तैयार बैठी हैं। इसलिए कनेक्टिविटी की कोई परेशानी नहीं होगी। इसके साथ ही पुराने हवाई अड्डा भी यथावत रहेगा और उस जमीन पर फ्लाइंग ट्रेनिगं सेंटर खोलेंगे। नायडू ने कहा कि मोदी सरकार 40 दिन में एक एयरपोर्ट खोल रही है और एक एयरपोर्ट विकास के हजारों नए रास्ते खोलता है। एक फ्लाइट सौ से ज्यादा लोगों को रोजगार देती है। एयरपोर्ट बनने के बाद रोजगार और उद्योग के लिए देश भर से लोग आएंगे।</p>
<p><strong>जल्दी जेल जाएंगे बड़े मगरमच्छः सीएम</strong><br />
मुख्यमंत्री भजनलाल ने शिलान्यास के मौके पर कहा कि कांग्रेस की सरकार में आए दिन पेपर लीक होते थे, लेकिन दो साल में एक भी पेपर लीक नहीं होने दिया। 5 साल में 4 लाख सरकारी और 6 लाख निजी क्षेत्र में नौकरिया देने का वायदा किया था। सिर्फ दो साल में सरकारी क्षेत्र में ही सवा लाख नौकरी दे चुके हैं। 1 लाख 35 हजार प्रक्रियाधीन हैं। इसके साथ ही एक लाख नौकरियों का कलेंडर निकाल चुके हैं। बजट में 25 हजार और बढ़ गईं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में अपने अपनों को नौकरी मिल जाती थी। फर्जीवाड़ा करने वाले 400 से ज्यादा लोगों को जेल भिजवा चुके हैं। कुछ मगरमच्छ पकड लिए हैं। कुछ और जल्द ही पकड़े जाने वाले हैं। कोई कितना भी बड़ा मगरमच्छ क्यों न हो जेल की सलाखों में जाएगा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-13304" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/03/FB_IMG_1772892475394.jpg" alt="" width="1280" height="952" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/03/FB_IMG_1772892475394.jpg 1280w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/03/FB_IMG_1772892475394-300x223.jpg 300w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/03/FB_IMG_1772892475394-1024x762.jpg 1024w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/03/FB_IMG_1772892475394-768x571.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;"><em>दो दशक की कोशिशों के बाद मिला आकार</em></span></strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;"><em>राजस्थान के नागरिक उड्डयन मंत्री गौतम कुमार दक ने कहा कि कोटा के विकास की संभावनाओं को देखते हुए दो दशक से नए एयरपोर्ट की स्थापना की मांग उठ रही थी। लेकिन, भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और वित्तीय स्वीकृतियां न मिलने के कारण यह परियोजना लंबे समय तक अटकी रही। 21 नवंबर 2023 को कोटा में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट स्थापित करने की घोषणा की थी, जिसके बाद परियोजना को नई गति मिली और अब उसका निर्माण चरण शुरू हो चुका है। दिसंबर 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट का काम शुरू होते ही कोटा बूंदी उत्तर-पश्चिम भारत के उभरते आर्थिक केंद्रों में शामिल हो गया है।</em></span></strong><br />
&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;-<br />
<strong>फैक्ट फाइल</strong><br />
• 1507 करोड़ से होना है कोटा-बून्दी एयरपोर्ट का निर्माण<br />
• 440.646 हैक्टेयर भूमि एएआइ को सौंपी<br />
• 3200 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा होगा रनवे<br />
• 1000 यात्री क्षमता पीक आवर में<br />
• 20,000 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाला होगा टर्मिनल<br />
• ए-321 श्रेणी के विमानों की पार्किंग के लिए बनेंगे 7 एप्रन वे<br />
• दिसम्बर 2027 में शुरू होगी उड़ान<br />
<strong>तब से अब तक ऐसे चली एयरपोर्ट की प्रकिया</strong><br />
• 6 मार्च 2018 : पहली बार कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को लेकर राज्य सरकार व एएआइ में वार्ता।<br />
• 23 मार्च 2018 : राज्य सरकार व एएआइ की वार्ता में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए टेक्नीकल सर्वे पर सहमति।<br />
• 2021 : शंभुपुरा में 500 हैक्टेयर भूमि चिन्हित, एएआइ ने माना उपयुक्त।<br />
• 2021 दिसंबर : वन भूमि के डायवर्जन का प्रस्ताव परिवेश पोर्टल पर सबमिट।<br />
• 3 अगस्त 2022 : 33.408 नॉन फॉरेस्ट लैंड यूआइटी ने एएआइ को आवंटित की।<br />
• 13 दिसंबर 2022 से 25 जनवरी 2023 तक : 500 हैक्टेयर जमीन का टोपोग्राफिक सर्वे और डिमार्केशन करना किया तय।<br />
• 27 जनवरी 2023 : केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 406.678 हैक्टेयर जमीन के डायवर्जन को लेकर इन प्रिंसिपल स्टेज वन क्लियरेंस दी।<br />
• 28 फरवरी 2023 से 18 जून 2023 : मास्टर प्लान के अनुरूप सॉयल टेस्टिंग प्रक्रिया पूरी।<br />
• 18 जून 2023 : वन विभाग की ओर से जमीन घटाने के बाद वापस सर्वे करवाया।<br />
• 19 जुलाई 2024 : राज्य सरकार व एएआई के बीच एमओयू।<br />
• 1 नवंबर 2024 : फॉरेस्ट लैंड की सैकंड स्टेज अप्रूवल।<br />
• 12 नवंबर 2024 : राज्य सरकार ने एएआइ को की जमीन हेंडओवर।<br />
• 26 सितंबर, 2024 : वन विभाग ने दी वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस।<br />
• 21 फरवरी 2025 : निर्माण को लेकर पर्यावरणीय स्वीकृति।<br />
• 2024 दिसंबर : 1507 करोड़ रुपए की डीपीआर मंजूर।<br />
• 6 फरवरी 2025 : 467.67 करोड़ के टेंडर जारी हुए।<br />
• 18 जुलाई 2025 : 283 करोड़ एयर साइड का टेंडर।<br />
• फरवरी 2026 : 393 करोड़ सिटी साइड का टेंडर।</p>
<p><a href="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-medium wp-image-13139" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-300x300.jpg" alt="" width="300" height="300" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-300x300.jpg 300w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-1024x1024.jpg 1024w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-150x150.jpg 150w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-768x768.jpg 768w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a></p>
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		<title>UPSC 2025: अनुज अग्निहोत्री ने किया टॉप, राजस्थान के युवाओं ने रचा इतिहास</title>
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		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 17:46:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>यूपीएससी परीक्षा में राजस्थान के युवाओं ने इतिहास रच डाला। देश को तीसरी बार यूपीएससी टॉपर ही नहीं दिया, बल्कि सफलता की झड़ी लगा दी है। रावतभाटा के अनुज अग्निहोत्री ने यूपीएससी टॉप किया है। जबकि हनुमानगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार राजस्थान पत्रिका से सेवानिवृत्त ब्यूरोचीफ पृथ्वीराज शर्मा &#8220;शूरवीर&#8221; की पुत्री गरिमा शर्मा, नागौर के 21 &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>यूपीएससी परीक्षा में राजस्थान के युवाओं ने इतिहास रच डाला। देश को तीसरी बार यूपीएससी टॉपर ही नहीं दिया, बल्कि सफलता की झड़ी लगा दी है।</p>
<p>रावतभाटा के अनुज अग्निहोत्री ने यूपीएससी टॉप किया है। जबकि हनुमानगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार राजस्थान पत्रिका से सेवानिवृत्त ब्यूरोचीफ पृथ्वीराज शर्मा &#8220;शूरवीर&#8221; की पुत्री गरिमा शर्मा, नागौर के 21 वर्षीय धीरज चौधरी, दौसा के पंकज मीना, मेड़ता सिटी के इरफान खान, खेतड़ी की प्रीती, बूंदी के सौरभ शर्मा, बीकानेर की नमिता सोनी, बालोतरा के पचपदरा के गौरव चोपड़ा, जितेंद्र प्रजापत, पोकरण के प्रवीण रतनू, आईपीएस ज्ञानचंद के बेटे अनुराग सिंह आईपीएस, फलोदी के मयंक पुरोहित, कोटपूतली के हिमांशु निमोरिया, बीकानेर की प्रियंका चौधरी, टोडाभीम के प्रद्युमन मीना, सालग नगर की अनिता देवड़ा, डीग-कुम्हेर के मुदित फ़ौजदार, खंडेला के अभिषेक मीणा, रतनगढ़ की सुनीता डूडी, बामलास रोहिन कुमार, टोंक की साक्षी जैन, प्रिंस मीणा, विराटनगर की दीप्ति वर्मा, टीकरी, महवा तन्वी बमनावत और माड़ाखेड़ा की देवांगी मीना सहित बड़ी संख्या में राजस्थानी युवाओं ने यूपीएससी एग्जाम क्रेक किया है।</p>
<p>@TISMedia परिवार की ओर से सभी युवाओं को सफलता के लिए हार्दिक बधाई और जो तैयारी कर रहे हैं उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं कि 2026 के परीक्षा परिणामों में सफलता की सूची इससे भी बड़ी हो।</p>
<p style="text-align: left; padding-left: 40px;"><a href="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-13139 size-medium" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-300x300.jpg" alt="" width="300" height="300" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-300x300.jpg 300w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-1024x1024.jpg 1024w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-150x150.jpg 150w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1-768x768.jpg 768w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/Picsart_26-02-25_22-00-41-052-1.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a></p>
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		<title>कोटा कोचिंग: दबदबा था, दबदबा है, दबदबा रहेगा</title>
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		<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 06:48:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#8211; एलन के कबीर को परफेक्ट 300 में से 300 स्कोर &#8211; आईआईटी में प्रवेश लेने वाला हर चैथा स्टूडेंट एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट से कोटा। जेईई मेन 2026 के परिणामों में कोटा के कोचिंग संस्थान एलन ने एक बार फिर &#8220;गर्दा&#8221; उड़ा दिया। कोटा कोचिंग ने दुनिया को दिखा दिया कि उनका दबदबा था, दबदबा है &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p dir="ltr"><b>&#8211; एलन के कबीर को परफेक्ट 300 में से 300 स्कोर</b><br />
<b>&#8211; आईआईटी में प्रवेश लेने वाला हर चैथा स्टूडेंट एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट से</b></p>
<p dir="ltr">कोटा। जेईई मेन 2026 के परिणामों में कोटा के कोचिंग संस्थान एलन ने एक बार फिर &#8220;गर्दा&#8221; उड़ा दिया। कोटा कोचिंग ने दुनिया को दिखा दिया कि उनका दबदबा था, दबदबा है और आगे भी कोटा का दबदबा रहेगा।<br />
देशभर में 12 स्टूडेंट्स को ओवरआल 100 पर्सेन्टाइलर घोषित किया गया है, इसमें से 7 स्टूडेंट्स एलन क्लासरूम से हैं।<br />
एलन कोटा के क्लासरूम स्टूडेंट कबीर छिल्लर ने परफेक्ट स्कोर प्राप्त किया है। 100 पर्सेन्टाइल के साथ कबीर ने 300 में से 300 अंक हासिल किए हैं। कबीर पिछले दो साल से एलन कोटा के रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट है। इसके साथ ही क्लासरूम कोर्स से अर्णव गौतम, शुभम कुमार, भावेश पात्रा, अनय जैन, निमय पुरोहित और चिरंजीब कर ने 100 पर्सेन्टाइल स्कोर किया है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स ने 99 पर्सेन्टाइल से अधिक स्कोर किया है। रिजल्ट्स की ऑथेंटिसिटी एवं पारदर्शिता को बरकरार रखते हुए एलन ने इस बार भी अपने रिजल्ट्स को देश की बड़ी ऑडिट फर्म ई-वाई इंडिया से वैलिडेट करवाया है।</p>
<p dir="ltr"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-13105" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260217-WA0001.jpg" alt="" width="1000" height="1250" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260217-WA0001.jpg 1000w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260217-WA0001-240x300.jpg 240w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260217-WA0001-819x1024.jpg 819w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260217-WA0001-768x960.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p><strong>एलन ने फिर साबित किया दबदबा</strong><br />
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से जेईई-मेन जनवरी सेशन का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के सीईओ नितिन कुकरेजा ने बताया कि जेईई मेन 2026 के परिणामों में एलन ने एक बार फिर अपनी एकेडमिक एक्सीलेंस साबित की है। रिजल्ट्स में देशभर में 12 स्टूडेंट्स को ओवरआल 100 पर्सेन्टाइलर घोषित किया गया है, इसमें से 7 स्टूडेंट्स एलन क्लासरूम से हैं। वर्ष 2026 के पहले बड़े परिणाम में एलन स्टूडेंट्स ने रिजल्ट्स की अपनी नियमितता को बरकरार रखते हुए परफेक्ट स्कोर व 100 पर्सेन्टाइल स्कोर किए हैं।</p>
<p><strong>आईआईटी में हर चौथा छात्र एलन का </strong><br />
नितिन कुकरेजा ने बताया कि पिछले दो वर्षों के रिजल्ट्स में आईआईटी में प्रवेश लेने वाला हर चैथा स्टूडेंट एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट से है। जेईई मेन व एडवांस्ड में एलन क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। जेईई-एडवांस्ड के रिजल्ट्स में पिछले दो वर्षों से लगातार एलन से आल इंडिया रैंक-1 के साथ टॉप-100 और ओवरआल बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स क्वालीफाई कर रहे हैं।</p>
<p><strong> 13 लाख से ज्यादा ने दी परीक्षा </strong><br />
जेईई-मेन परीक्षा 2026 यह परीक्षा 21 से 29 जनवरी के मध्य हुई, जिसमें 13 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने 21 से 28 जनवरी के मध्य बीई-बीटेक की परीक्षा दी है। परिणामों में 13 लाख विद्यार्थियों के 7 डेसीमल में एनटीए स्कोर जारी किए गए हैं। टोटल एनटीए स्कोर के साथ-साथ सब्जेक्टवाइज फीजिक्स, कैमेस्ट्री, मैथ्स के एनटीए स्कोर जारी किए हैं। ये एनटीए स्कोर विद्यार्थियों के अपनी शिफ्ट में बैठने वाले कुल विद्यार्थियों एवं स्वयं के बराबर व स्वयं से कम रॉ स्कोर के आधार पर जारी किए जाते हैं।</p>
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		<title>लोकेंद्र सिंह राजावत बने भाजपा प्रदेश प्रवक्ता</title>
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		<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 13:45:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर। भारतीय जनता पार्टी राजस्थान ने संगठनात्मक मजबूती की दिशा में बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए लोकेंद्र सिंह राजावत को प्रदेश प्रवक्ता नियुक्त किया है। यह नियुक्ति प्रदेश अध्यक्ष श्री मदन राठौड़ के निर्देशानुसार की गई है, जिससे स्पष्ट है कि पार्टी अब जमीनी संघर्ष से निकले, राष्ट्रवादी सोच वाले और बेबाक बोलने वाले &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>जयपुर। भारतीय जनता पार्टी राजस्थान ने संगठनात्मक मजबूती की दिशा में बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए लोकेंद्र सिंह राजावत को प्रदेश प्रवक्ता नियुक्त किया है। यह नियुक्ति प्रदेश अध्यक्ष श्री मदन राठौड़ के निर्देशानुसार की गई है, जिससे स्पष्ट है कि पार्टी अब जमीनी संघर्ष से निकले, राष्ट्रवादी सोच वाले और बेबाक बोलने वाले चेहरों को आगे ला रही है।</p>
<p>लोकेंद्र सिंह राजावत छात्र राजनीति से लेकर युवा मोर्चा तक संघर्ष की तपिश में तपे हुए नेता हैं। वे भारतीय जनता युवा मोर्चा में कोटा जिले के जिलाध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे अहम पदों पर रहते हुए संगठन को नई धार दे चुके हैं। कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने वाले क्रांतिकारी युवाओं में शामिल रहकर उन्होंने राष्ट्रभक्ति को केवल नारे नहीं, बल्कि कर्म से सिद्ध किया है।</p>
<p>संघ की मजबूत वैचारिक पृष्ठभूमि, आक्रामक शैली और स्पष्ट राष्ट्रवादी सोच के कारण लोकेंद्र सिंह राजावत को पार्टी का एक तेज-तर्रार और निर्भीक चेहरा माना जाता है। उनकी नियुक्ति से यह तय माना जा रहा है कि अब भाजपा की नीतियों और उपलब्धियों को विपक्षी दुष्प्रचार के खिलाफ और अधिक आक्रामकता के साथ रखा जाएगा।</p>
<p>अपनी नियुक्ति पर लोकेंद्र सिंह राजावत ने लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, भाजपा शीर्ष नेतृत्व एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री मदन राठौड़ के प्रति आभार जताते हुए कहा कि पार्टी ने जो जिम्मेदारी सौंपी है, वह उसे सड़क से लेकर मीडिया तक पूरी मजबूती, तथ्य और राष्ट्रवादी तेवर के साथ निभाएंगे।</p>
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		<title>सेवा, सम्मान और विश्वास का प्रतीक बनेगा रामाश्रय भवन &#8211; बिरला</title>
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		<pubDate>Sun, 25 Jan 2026 14:54:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज परिसर में लगभग 27 करोड़ रुपये की लागत से रामाश्रय भवन, अत्याधुनिक बीएसएल-3 लैब और फाइब्रोस्कैन मशीन का शिलान्यास एवं शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रामाश्रय भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना, सम्मान और सेवा का सजीव &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/lok-sabha-speaker-om-birla-laid-the-foundation-stone-for-development-projects-worth-rs-27-crore-at-nmch-kota/13043/">सेवा, सम्मान और विश्वास का प्रतीक बनेगा रामाश्रय भवन &#8211; बिरला</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज परिसर में लगभग 27 करोड़ रुपये की लागत से रामाश्रय भवन, अत्याधुनिक बीएसएल-3 लैब और फाइब्रोस्कैन मशीन का शिलान्यास एवं शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रामाश्रय भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना, सम्मान और सेवा का सजीव प्रतीक है।</p>
<p>लोकसभा अध्यक्ष ने 18 वर्ष पूर्व जेके लोन अस्पताल से जुड़ा अनुभव साझा करते हुए कहा कि इलाज के दौरान दूर-दराज़ गांवों से आए परिजनों को अक्सर खुले आसमान के नीचे रहना पड़ता है। गर्मी, सर्दी और बरसात में भी वे अस्पताल के आसपास इसलिए ठहरे रहते हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत मरीज तक पहुंच सकें। वर्षों से देखी गई यही पीड़ा आज रामाश्रय भवन के रूप में साकार हो रही है। देश में पहली बार इस तरह के दो सर्वसुविधायुक्त रामाश्रय भवन कोटा में बनाए जा रहे हैं।</p>
<p>जेके लोन अस्पताल के बाद अब मेडिकल कॉलेज परिसर में 11.76 करोड़ से चार मंजिला वातानुकूलित भवन बनेगा, जिसमें 767 बेड की सुविधा होगी। यहां तीमारदारों के लिए नि:शुल्क ठहराव और भोजन के साथ डॉर्मिट्री, किचन-डाइनिंग, लिफ्ट, लॉकर तथा महिलाओं के लिए पृथक व्यवस्थाएं उपलब्ध रहेंगी। मेडिकल कॉलेज में 14 करोड़ रूपए की लागत से प्रदेश की दूसरी बीएसएल-3 लैब स्थापित की जाएगी। इससे कोरोना, निपाह, मंकीपॉक्स, वेस्ट नाइल जैसे संक्रामक रोगों की जांच और अनुसंधान कोटा में ही संभव हो सकेगा।</p>
<p>बिरला ने कहा कि मेडिकल कॉलेज परिसर में करोड़ों रूपए के विकास कार्य प्रगति पर हैं। करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से कॉटेज वार्ड का निर्माण होने जा रहा है, मदर एंड चाइल्ड केयर हॉस्पिटल भी जल्द शुरू होगा। लीवर रोगों की बढ़ती समस्या को देखते हुए फाइब्रोस्कैन मशीन स्थापित की गई है तथा मोबाइल हेल्थ यूनिट के माध्यम से गांव-गांव जांच अभियान चलाने की योजना है। वहीं बीएसएल-3 लैब से गंभीर संक्रामक रोगों की जांच और शोध को नई दिशा मिलेगी। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोविड काल में चिकित्सकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा की और कोटा में कभी ऑक्सीजन की कमी नहीं आने दी गई। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास कठिन समय में निभाई गई जिम्मेदारियों से बनता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में कैंसर अस्पताल, अतिरिक्त 300 बेड का अस्पताल और अन्य चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। लक्ष्य है कि आने वाले दो वर्षों में कोटा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश के अग्रणी शहरों में शामिल हो, जहां हर जरूरतमंद को निःशुल्क, गुणवत्तापूर्ण और सम्मानजनक इलाज मिल सके।</p>
<p>कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि कोटा ही नहीं, पूरे संभाग और आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज आते हैं। ऐसे में रामाश्रय भवन का निर्माण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस पहल से प्रेरणा लेकर प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी रामाश्रय भवनों का निर्माण होना चाहिए, ताकि इलाज के लिए आने वाले परिजनों को राहत मिल सके।</p>
<p>लाडपुरा विधायक कल्पना देवी ने कहा कि जब कोई व्यक्ति दूर-दराज़ गांवों से अपने बीमार परिजन को इलाज के लिए शहर लाता है, तो उसकी चिंता केवल बीमारी तक सीमित नहीं रहती। ठहरने, भोजन और सुरक्षा की चिंता उसे भीतर तक झकझोर देती है। इन्हीं व्यावहारिक कठिनाइयों को समझते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने रामाश्रय की कल्पना की, जो आज मूर्त रूप ले रही है।<br />
इस अवसर पर शहर जिलाध्यक्ष राकेश जैन, मंडल अध्यक्ष रामचंद्र नागर, अक्षय चौधरी, पन्नालाल बंजारा, मंडल प्रतिनिधि सिम्पल शर्मा, बृजमोहन गौड़, संभागीय आयुक्त अनिल अग्रवाल, मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. संगीता सक्सेना, अधीक्षक डॉ. निलेश जैन सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>आईएफडब्ल्यूजे की बारां जिला कार्यकारिणी घोषित</title>
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		<pubDate>Sun, 25 Jan 2026 04:56:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>बारां। पत्रकारों के राष्ट्रीय स्तर के संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (आईएफडब्ल्यूजे) के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ के निर्देशानुसार व संभाग प्रभारी फिरोज खान की सहमति से संगठन के बारां जिला अध्यक्ष लक्ष्मीचंद नागर के द्वारा जिला कार्यकारिणी की घोषणा की गई है। जिला कार्यकारिणी में संरक्षक राकेश गुप्ता बारां, जिला अध्यक्ष लक्ष्मीचंद &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>बारां। पत्रकारों के राष्ट्रीय स्तर के संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (आईएफडब्ल्यूजे)<br />
के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ के निर्देशानुसार व संभाग प्रभारी फिरोज खान की सहमति से संगठन के बारां जिला अध्यक्ष लक्ष्मीचंद नागर के द्वारा जिला कार्यकारिणी की घोषणा की गई है।</p>
<p>जिला कार्यकारिणी में संरक्षक राकेश गुप्ता बारां, जिला अध्यक्ष लक्ष्मीचंद नागर बारां, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुकेश नामा केलवाड़ा, राजेन्द्र नामा बारां, उपाध्यक्ष जावेद खान नाहरगढ़, गजेन्द्र गौतम कवाई, चंद्रप्रकाश गेरा छबड़ा, राजीव भार्गव शाहबाद,<br />
महासचिव जयप्रकाश शर्मा बोहत को बनाया गया है।</p>
<p>जबकि सचिव पद पर हरिओम तिवारी अंता, प्रदीप गौतम छीपाबड़ौद, सहसचिव- अरविन्द गौतम सीसवाली, भानू चौधरी भंवरगढ़, संगठन सचिव राजेन्द्र श्रृंगी नाहरगढ़, कमल चौहान अंता- कोषाध्यक्ष राजेश पंकज बारां, प्रवक्ता चतुर्भुज पंकज बारां, कार्यकारणी सदस्य ओम नागर सीसवाली, भगवान कुशवाह नाहरगढ़, प्रदीप शर्मा अटरू, प्रियरंजन किशनगंज को बनाया गया है।</p>
<p>अध्यक्ष लक्ष्मीचंद नागर ने बताया कि जिला कार्यकारिणी का जल्द विस्तार किया जाएगा। साथ ही जल्द ब्लॉक अध्यक्ष भी घोषित किये जायेंगे।</p>
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		<title>प्रेरणाः एक शिक्षक जिसने अपने पुरखों को कर दिया “अमर”</title>
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		<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 17:12:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आप अपने पुरखों को कैसे याद रखते हैं, यह बेहद निजी फैसला हो सकता है। लेकिन दुनिया उन्हें कैसे याद करे यह न सिर्फ आप तय करते हैं, बल्कि आपका व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों मिलकर सुनिश्चित करते हैं। विश्व की सभी प्रचीन सभ्यताओं में पूर्वजों की स्मृतियों को सहेजकर रखने और खास अवसरों पर उनका &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>आप अपने पुरखों को कैसे याद रखते हैं, यह बेहद निजी फैसला हो सकता है। लेकिन दुनिया उन्हें कैसे याद करे यह न सिर्फ आप तय करते हैं, बल्कि आपका व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों मिलकर सुनिश्चित करते हैं।</p>
<p>विश्व की सभी प्रचीन सभ्यताओं में पूर्वजों की स्मृतियों को सहेजकर रखने और खास अवसरों पर उनका स्मरण करने की परंपरा रही है। भारतीय संस्कृति में यह परंपरा निजी स्मृतियों और संस्मरणों से कुछ आगे की यात्रा तय करती दिखाई देती है। इतिहास गवाह है कि पुरखों की निशानियां संभालकर रखने के लिए भारतीयों को विशेषतौर पर पहचाना जाता है। इतना ही नहीं जब यह स्मृतियां जन कल्याण का हिस्सा बन जाती हैं तो पूर्वजों की थाथी पुनर्जीवित हो उठती है। भारतीय परंपराओं का जनकल्याण से बेहद करीब का रिश्ता रहा है। यही वजह है कि जब-जब पूर्वजों का जिक्र छिड़ा कहीं बाबड़ियां, कहीं तालाब तो कहीं धर्मशालाएं तामीर हो उठीं।</p>
<p>भारतीय समाज का तानाबाना बेहद मजबूती से गढ़ा गया है। विश्व का शायद एकमात्र समाज होगा जिसने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि पूर्वजों की स्मृतियों को चिरकाल के लिए स्थाई बनाने की जब भी चाह उभरी, हमने शैक्षणिक प्रोत्साहन की राह चुनी। स्कूलों की स्थापना से लेकर भावी संततियों को उच्च और श्रेष्ठ शिक्षा प्रदान करने के लिए सामर्थनुसार वजीफों और पारतोषिकों का चलन शुरू हुआ। नाम लेना उचित न होगा, लेकिन भारत वर्ष का बच्चा बच्चा जानता है कि तमाम ऐसी विभूतियां आर्थिक और सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर इन शिक्षण संस्थाओं, वजीफों और पारितोषिकों के कारण राष्ट्रीय ही नहीं अंतररार्ष्ट्रीय पटल पर खूब चमकीं।</p>
<p>शिक्षक का पुत्र जब शिक्षक बनता है तो उसकी अभिलाषा यही होती है कि कोई भी शिक्षा से वंचित न रहने पाए। जो सक्षम नहीं हैं उनकी आर्थिक मदद की जा सके और जो काबिल हैं उन्हें पुरस्कृत कर सम्मानित मंच दिया जा सके।</p>
<p>खेती किसानी पर निर्भर परिवार के बच्चों के लिए 60-70 के दशक में उच्च शिक्षा किसी सपने से कम न थी। रजनीश चंद्र अग्निहोत्री ने खुद के बूते न सिर्फ अपने इस सपने को पूरा किया बल्कि, वर्ष 1970 में कानपुर यूनिवर्सिटी से एमएससी जुलॉजी में टॉप कर गोल्डमैडेल भी हासिल किया। विज्ञान के क्षेत्र में कुछ कर दिखाने के सुनहरे अवसर अब उनका दरवाजा खटखटा रहे थे, लेकिन रजनीश चंत्र अग्निहोत्री ने पद, पैसा और सम्मान तीनों को परे धकेल शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प लिया। उन्होंने अवसरों से वंचित भावी भविष्य को गढ़ने के लिए शिक्षक बनने की राह चुनी। हालांकि उनके सहपाठी और शिक्षक इस फैसले से बेहद नाराज थे। बावजूद उसके रजनीश का फैसला मील का पत्थर साबित हुआ।</p>
<p>पहले शिक्षक और फिर प्रधानाचार्य के रूप में उन्होंने न सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों का सफलता पूर्वक निर्वहन किया, बल्कि यूपी के तराई के इलाके में लखीमपुर खीरी से लेकर हरदोई तक उनकी ख्याति फीस देने वाले मास्साब के तौर पर फैल गई। अपनी तनख्वाह से वह आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित समाज के बच्चों की न सिर्फ फीस भरते, बल्कि उनके लिए स्लेट-खड़िया से लेकर कलम-दवात और किताब कॉपियों तक का बंदोबस्त करते। परीक्षाओं के दिनों में तो उनका घर चलता फिरती धर्मशाला हो जाता। दर्जनों बच्चे उनके घर में ही डेरा डाले रहते।</p>
<p>रजनीश चंद्र अग्निहोत्री ने सिर्फ सामाजिक सरोकारों को ही जीवंत नहीं किया, बल्कि अपने परिवार को भी सरोकार और संस्कारों से भर दिया। जिस दौर में महिला शिक्षा अकल्पनीय लगने लगी थी खास तौर पर ग्रामीण अंचल में उन्होंने अपनी पत्नी बिंदेश्वरी अग्निहोत्री को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया। बिंदेश्वरी के सिर पर सिर्फ उनके तीन बच्चों महेंद्र, सुबोध और अनूप की ही जिम्मेदारी न थी, उनके पति की जगाई शिक्षा की अलख के कारण उनका घर बच्चों से हमेशा भरा रहता। जिनके लालन-पालन के साथ-साथ पठन-पाठन का आधारभूत कार्य भी वही संभालती। बावजूद इसके उन्होंने हिंदी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा हासिल करने में सफलता पाई।</p>
<p>उच्च शिक्षित और समाज को समर्पित माता-पिता के सेवा कर्मों का फल था जो रजनीश और बिंदेश्वरी के तीनों बच्चों ने न सिर्फ उच्च शिक्षा प्राप्त की, बल्कि पिता की राह पर चलते हुए शिक्षा क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित की। उनके बड़े पुत्र डॉ. महेंद्र अग्निहोत्री लखनऊ विश्वविद्यालय में फिजिक्स के प्रोफेसर हैं। वहीं मंझले पुत्र डॉ. सुबोध अग्निहोत्री राजस्थान के इकलौते मुक्त विश्वविद्यालय वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा में पत्रकारिता विभाग के निदेशक एवं प्रोफेसर हैं। प्रोफेसर सुबोध ने शिक्षण क्षेत्र में ही नहीं पत्रकारिता में भी अपना कलम का लोहा मनवाया है। वह बीबीसी के बेस्ट यंग रिपोर्टर जैसे अवार्डों से नवाजे जा चुके हैं। जबकि छोटे बेटे अनूप अग्निहोत्री दिल्ली की एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।</p>
<p><strong>जहां चाह, वहां राह</strong><br />
वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (वीएमओयू) आने के बाद प्रोफेसर सुबोध अग्निहोत्री इस बात से खासे परेशान थे कि तमाम सुविधाएं होने के बावजूद विश्वविद्यालय में छात्र संख्या बेहद कम क्यों हैं? भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) के चेयरमैन और तत्कालीन कुलपति प्रो. विनय पाठक के समक्ष अपनी चिंता जाहिर की तो प्रो. पाठक इस समस्या के समाधान के लिए कई नवाचारों पर विमर्श करने लगे। वीएमओयू में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए प्रो. पाठक ने दाखिला प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। प्रो. विनय पाठक और प्रो. सुबोध अग्निहोत्री, डॉ. पातांजलि मिश्र, एसबी सिंह और सौरभ पांडे के साथ-साथ उनकी पूरी टीम ने सबसे पहले पूरे राजस्थान में बच्चों को घर बैठे आसान तरीके से दाखिला देने का रास्ता निकाला। इसके बाद पाठ्य सामग्री को डिजिटलाइज करने और परीक्षा परिणामों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए नए पदक दिए जाने की शुरुआत की।</p>
<p><strong>पुरखों को कर दिया “अमर”</strong><br />
प्रो. विनय पाठक की प्रेरणा और मार्गदर्शन ने प्रो. सुबोध को एक नई राह दिखाई। ऐसी राह जिस पर चल कर उन्होंने अपने पुरखों को हमेशा के लिए अमर कर दिया। दरअसल हुआ यह कि प्रो. पाठक ने मेधावी विद्यार्थियों को पुरुस्कृत करने की जो योजना शुरू की वह आर्थिक भंवर में फंसती दिखाई दी। दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्रों को सम्मानित करने के लिए विशिष्ट पदक दिए जाने थे। एक बार शुरू हुआ यह नवाचार आगे चलकर कहीं बंद न हो जाए इसलिए एक लाख रुपए प्रति पदक विश्वविद्यालय के विशेष खाते में जमा करवाया जाना था। जिसके ब्याज से हर वर्ष पदक एवं प्रमाण पत्र का खर्चा उठाया जाता।</p>
<p>मामला फंसता देख प्रो. सुबोध अग्निहोत्री ने एक नहीं बल्कि दीक्षांत समारोह में दो विशिष्ट पदक दिए जाने की राह बना दी। रजनीश और बिंदेश्वरी के पुत्रों प्रोफेसर महेंद्र, प्रोफेसर सुबोध और अनूप अग्निहोत्री ने तय किया कि उनकी दिवंगत माताजी स्वर्गीय श्री बिंदेश्वरी अग्निहोत्री के नाम से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म ( पत्रकारिता में स्नातकोत्तर) के टॉपर को विशिष्ट पदक प्रदान किया जाएगा। जिसका समस्त खर्च वह लोग उठाएंगे। आनन-फानन मे एक-सवा लाख रुपए जमा कर दिए गए।</p>
<p>सुबोध अग्निहोत्री यहीं न रुके। जब उनके विषय में स्नातकोत्तर स्तर पर अव्वल आने वाले विद्यार्थी को कुलपति और कुलाधिपति के हाथों से विशिष्ट मैडेल पहनाया जाएगा तो फिर स्नातक के टॉपर को क्यों नहीं&#8230;? इसी संकल्प के साथ उन्होंने अपने मौसेरे भाई और अंतरराष्ट्रीय दवा कारोबारी अश्विनी त्रिपाठी की रजामंदी लेकर अपने मौसाजी की स्मृति में बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (पत्रकारिता में स्नातक) के टॉपर के लिए स्वर्गीय करुणा शंकर त्रिपाठी विशिष्ट पदक की शुरुआत की करवाई। दरअसल अश्विनी भी अपनी मौसी पास रहकर पढ़े बढ़े हैं। तो भाइयों और परिवार का यह प्रेम और लगाव यहां भी साथ हो लिया।</p>
<p><strong>ऐतिहासिक साबित हुआ कदम</strong><br />
प्रो. विनय पाठक की इच्छा शक्ति का ही परिणाम था जो वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में मेधावी विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए ऐसे ऐतिहासिक कदम उठाए जा सके। वीएमओयू पत्रकारिता विभाग द्वारा वर्ष 2014 में एमजे और बीजे के टॉपर विद्यार्थियों के लिए पुरस्कार योजना की शुरुआत हुई। हालांकि साल 2019 के पाद बाद से एमजे के लिए दिए जाने वाले मेडल तकनीकी कारणों से नहीं दिया जा रहा है क्योंकि कोर्स स्थगीत चल रहा है। जबकि बीजे का मेडल लगातार दिया जा रहा है। इन पदकों से पत्रकारिता के विद्यार्थियों को नई पहचान और प्रेरणा मिल रही है। इन दोनों मेडल के लिए विवि में एक-एक लाख एक हज़ार रुपए की धनराशि की एफडी करवाई गई थी जिसके ब्याज से पदक तैयार किए जाते हैं। इस नावाचार का नतीजा यह निकला कि न सिर्फ विश्वविद्यालय में छात्र संख्या बढ़ी बल्कि राजस्थान ही नहीं देश भर से विद्यार्थी दाखिला लेने आने लगे। देश का शायद ही कोई ऐसा विश्वविद्यालय या संस्थान होगा जिसमें पत्रकारिता का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता हो और वहां वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में पढ़ा हुआ छात्र या छात्रा शिक्षक न हो।</p>
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		<title>दुनिया तबाह करने फिर निकला “सफेद कबूतर”…!</title>
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		<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 08:57:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>एक पादरी था&#8230; स्ट्रांग्स। नस्लीय श्रेष्ठता का तगड़ा पैरोकार&#8230;। अमेरिकन्स और इसाइयो के अलावा वह न तो किसी को सभ्य मानता था और न ही श्रेष्ठ&#8230;। पादरी स्ट्रांग्स के नस्लीय श्रेष्ठता के कीड़े ने अमेरिकन्स को ऐसा काटा कि उसका जहर आज भी उनकी रगों में कुलाचें मार रहा है। यदि यह कहा जाए कि &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/us-attacks-venezuela-captures-president-nicolas-maduro-reason-tension-donald-trump-caribbean-country-oil-gas/13013/">दुनिया तबाह करने फिर निकला “सफेद कबूतर”…!</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>एक पादरी था&#8230; स्ट्रांग्स। नस्लीय श्रेष्ठता का तगड़ा पैरोकार&#8230;। अमेरिकन्स और इसाइयो के अलावा वह न तो किसी को सभ्य मानता था और न ही श्रेष्ठ&#8230;। पादरी स्ट्रांग्स के नस्लीय श्रेष्ठता के कीड़े ने अमेरिकन्स को ऐसा काटा कि उसका जहर आज भी उनकी रगों में कुलाचें मार रहा है। यदि यह कहा जाए कि स्ट्रांग्स की मौत के सैकड़ों साल बाद भी पूरा यूरोप इस महामारी का शिकार है तो गलत नहीं होगा।</p>
<p>लोकतंत्र, स्वतंत्रता और स्वाधीनता के तथाकथित पैरोकार व्यापार और आर्थिक हितों का जिक्र आने भर से भरभराकर गिर जाते हैं। दुनिया को दिखाने के लिए अमेरिका अपने पूर्व राष्ट्रपति जेम्स मोनरो के नाम पर मोनरो सिद्धांत की डीगें हाकता है। जिसमें औपनिवेशिकतावादी विचारधारा से दूर रहने का संकल्प लिया गया था, लेकिन क्यूबा से लेकर हवाई, फिलिपीन्स, वियतनाम, आस्ट्रिया, ईरान, ईराक, लीबिया, सीरिया, अफगानिस्तान और फिलिस्तीन से लेकर वेनेजुएला तक इसकी धज्जियां उड़ते हुआ पूरी दुनिया ने देखी हैं।</p>
<p><strong>धुरियों में बंटी दुनिया</strong><br />
शीत युद्ध के बाद दुनिया साफ तौर पर तीन धुरियों में बंट चुकी है। पहली दुनिया वह जिसने शक्ति से समस्त केंद्रों चाहे वह राजनैतिक हो, आर्थिक हों या सामाजिक सभी पर कब्जा कर रखा है और दूसरी दुनिया वह इसके लिए लड़ रही है। जबकि तीसरी दुनिया का हाल तो इतना बुरा है कि उसे सिर उठाने तक की इजाजत नहीं है।</p>
<p>राजनीतिक विचारधारा के आधार पर समझें तो <strong>फर्स्ट वर्ल्ड</strong> अमेरिका और उसके पूंजीवादी सहयोगी जिन्हें NATO देश कहा जाता है, शामिल हैं। जबकि <strong>सेकंड वर्ल्ड</strong> सोवियत संघ और उसके साम्यवादी सहयोगी (पूर्वी यूरोप, चीन, क्यूबा) थे। जबकि <strong>थर्ड वर्ल्ड</strong> वो देश थे जो किसी भी गुट का हिस्सा नहीं थे, अक्सर नव-स्वतंत्र और अविकसित (भारत, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका) थे। लेकिन तकनीकि के साथ तेजी से हुए बदलावों के चलते अब यह शब्द अब अप्रचलित हो गए हैं। अब सिर्फ और सिर्फ विकसित या विकासशील देशों या ग्लोबल साउथ/नॉर्थ की बात की जाती है, लेकिन &#8220;फर्स्ट वर्ल्ड प्रॉब्लम्स&#8221; जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>तीनों </strong><strong>&#8216;</strong><strong>वर्ल्ड</strong><strong>&#8216; </strong><strong>की परिभाषा:</strong></p>
<ul>
<li><strong>फर्स्ट वर्ल्ड (प्रथम विश्व):</strong>
<ul>
<li><strong>विशेषता:</strong> पूंजीवादी, औद्योगिक, कथित लोकतांत्रिक (मुख्यतः)।</li>
<li><strong>उदाहरण:</strong> संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी यूरोप (यू.के., फ्रांस, जर्मनी), कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया।</li>
<li><strong>गठबंधन:</strong> नाटो (NATO)।</li>
</ul>
</li>
<li><strong>सेकंड वर्ल्ड (द्वितीय विश्व):</strong>
<ul>
<li><strong>विशेषता:</strong> साम्यवादी (Communist), केंद्रीकृत अर्थव्यवस्था, एकदलीय शासन।</li>
<li><strong>उदाहरण:</strong> सोवियत संघ, पूर्वी जर्मनी, पोलैंड, क्यूबा, चीन</li>
<li><strong>गठबंधन:</strong> वारसा संधि (Warsaw Pact)।</li>
</ul>
</li>
<li><strong>थर्ड वर्ल्ड (तृतीय विश्व):</strong>
<ul>
<li><strong>विशेषता:</strong> किसी भी गुट से असंलग्न (Non-Aligned), अक्सर गरीब, विकासशील, पूर्व-औपनिवेशिक देश।</li>
<li><strong>उदाहरण:</strong> भारत (गुटनिरपेक्ष आंदोलन का हिस्सा), अफ्रीका के अधिकांश देश, मध्य पूर्व, लैटिन अमेरिका।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-13015 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/01/us1.jpg" alt="us attacks venezuela, venezuela, venezuela president, nicolas maduro, donald-trump, caribbean country, oil, gas" width="740" height="419" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/01/us1.jpg 740w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/01/us1-300x170.jpg 300w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/01/us1-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 740px) 100vw, 740px" /></p>
<p><strong>बवाल क्यों&#8230;?</strong><br />
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो कि लगातार दुनिया में शांति लाने के दावों के साथ अपने लिए नोबेल की भीख मांगता रहता है के निशाने पर वेनेजुएला या कोई दूसरा देश यूं ही नहीं आता। उसके पीछे विशुद्ध मुनाफे की सोच होती है। अमेरिका ने जिन देशों को भी तबाह किया है वह सभी मुल्क प्राकृतिक संसाधनों से लबरेज थे और अमेरिका अपना भंडार भरने के लिए उन पर अघोषित कब्जा चाहता था। खाड़ी देशों के तेल से लेकर वियतनाम की सामरिक और कृषि शक्ति उसे ललचाती रही। पाकिस्तान को पुचकार कर यही कोशिश वह भारत को कमजोर करने के लिए करता रहा है, लेकिन पहले इंदिरा गांधी और फिर अटल बिहारी वाजपेयी के दृढ़ संकल्पों ने भारत को परमाणु सक्षम राष्ट्र बनाकर उन नापाक मंसूबों पर हमेशा के लिए पानी फेर दिया है। भारत में सरकार चाहे किसी भी दल की हो, लेकिन हिंदुस्तानी जनता विदेशी हमला किसी का भी बर्दास्त नहीं करेगी यह यहां के राजनेताओं को अच्छी तरह से पता है। यही वजह है कि अमेरिकी घुसपैठ कभी भी कामियाब नहीं हो सकी।</p>
<p><strong>बात वेनेजुएला की&#8230;!</strong><br />
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच विवाद का केंद्र बीते तीन दशकों से &#8216;तेल&#8217; रहा है। दरअसल, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा सिद्ध तेल भंडार है, जो कि इस दक्षिण अमेरिकी देश को जबरदस्त तौर पर समृद्ध करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा वेनेजुएला में सोना और गैस के भी भंडार हैं। 1990 के दशक और इससे पहले तक वेनेजुएला की खुली अर्थव्यवस्था में अमेरिका की कंपनियां भी सम्मिलित रही थीं।</p>
<p>दोनों देशों के बीच विवाद की पहली चिंगारी 1999 में भड़की जब वेनेजुएला में वामपंथी राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज की सरकार सत्ता में आई। शावेज ने वेनेजुएला में गरीबी को मुद्दा बनाकर चुनाव जीता और देश के तेल को अपने लोगों की भलाई में लगाने का वादा कर पूरे देश के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इसका असर यह हुआ कि वेनेजुएला के तेल उद्योग में अमेरिकी कंपनियों की भूमिका घट गई। इस बीच वेनेजुएला की वाम सरकार ने क्यूबा, रूस और चीन के साथ ईरान से करीबी बढ़ा ली, जो सीधे तौर पर अमेरिका की शक्ति को चुनौती देने के कदम के तौर पर देखा जाने लगा।</p>
<p>दोनों देशों के रिश्ते तब और खराब हो गए, जब ह्यूगो शावेज के खिलाफ 2002 में तख्तापलट की असफल कोशिश हुई। वेनेजुएला सरकार ने इसके पीछे तब अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद से दोनों देशों की दूरियां लगातार बढ़ती चली गईं। 2013 में ह्यूगो शावेज की मौत के बाद निकोलस मादुरो वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने। तबसे लेकर अब तक वेनेजुएला की विदेश नीति अमेरिका के प्रति जैसी की तैसी ही बनी हुई है। हालांकि, अमेरिका लगातार वेनेजुएला पर अपने तेल सेक्टर को खोलने का दबाव बनाने के लिए तरह-तरह के प्रतिबंध लगाता रहा है। इससे वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ा है।</p>
<p>अमेरिकी अधिकारियों ने कई मौकों पर खुले तौर पर कहा है कि वेनेजुएला का तेल वॉशिंगटन का है, और वे अमेरिकी कंपनियों के फायदे के लिए वेनेजुएला के तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण को पलटवाना चाहते हैं। ओबामा और बाइडन जैसे डेमोक्रेट नेताओं के अंतर्गत अमेरिका ने कूटनीतिक तौर पर वेनेजुएला पर दबाव बनाया। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने 2017 में वेनेजुएला पर तेल प्रतिबंध लगाए और 2019 में उन्हें और कड़ा कर दिया। इससे वेनेजुएला की कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचने की क्षमता बाधित हुई। अब अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला पर कार्रवाई को और सख्त कर दिया है और हवाई हमलों की भी शुरुआत कर दी है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-13016 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/01/us2.jpg" alt="us attacks venezuela, venezuela, venezuela president, nicolas maduro, donald-trump, caribbean country, oil, gas" width="762" height="417" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/01/us2.jpg 762w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/01/us2-300x164.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 762px) 100vw, 762px" /></p>
<p><strong>अमेरिका के लिए वेनेजुएला क्यों जरूरी?</strong><br />
वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका में स्थित है, जो कि अमेरिका के काफी करीब है। इस देश के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जिसे 303 अरब बैरल से भी ज्यादा आंका जाता है। कई प्रतिबंधों की वजह से यह अब तक अनछुआ भंडार है। इसके अलावा वेनेजुएला में सोना और गैस का भी जबरदस्त भंडार है। यूं तो वेनेजुएला की ओर से इन पदार्थों का निर्यात न के बराबर है, लेकिन अगर अमेरिका की इस तक पहुंच होती है तो ट्रंप प्रशासन को मध्य पूर्व (भारत के पश्चिम एशिया) में तेल की खरीद पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वह सीधे वेनेजुएला के तेल भंडार का दोहन कर के अपने ऊर्जा बाजार को आगे बढ़ा सकता है और अपने तेल रिजर्व को सुरक्षित भी रख सकता है।</p>
<p>इसके अलावा वेनेजुएला में बीते वर्षों में जिस तरह से भूराजनीतिक घटनाक्रम बदले हैं, वह भी अमेरिका के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। दरअसल, वेनेजुएला के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण होने के बाद से चीन और रूस ने वेनेजुएला से रिश्ते बढ़ाए हैं और उसे अरबों डॉलर की सहायता मुहैया कराई है। कई बार यह सहायता वेनेजुएला के तेल के लिए ही दी गई है। दूसरी तरफ वेनेजुएला ने रूस, चीन, ईरान और क्यूबा से हथियार और सुरक्षा के लिए कई उपकरण भी हासिल किए हैं। ऐसे में ट्रंप सरकार वेनेजुएला पर दबाव बनाकर एक बार फिर पूरे दक्षिण अमेरिका में अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश में है।</p>
<p><strong>अमेरिका के आरोप</strong><br />
अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि वेनेजुएला की निकोलस मादुरो सरकार अमेरिका में ड्रग्स (विशेष रूप से फेंटेनाइल और कोकीन) की तस्करी में शामिल है। ट्रंप प्रशासन ने इसे एक राष्ट्रीय आपातकाल मानते हुए वेनेजुएला को निशाना बनाने की कोशिश की है। ट्रंप ने आरोप लगाया है कि मादुरो के शासन में वेनेजुएला के लाखों नागरिकों को अमेरिका आने को मजबूर होना पड़ा है, जिससे अमेरिका में प्रवासी संकट बढ़ा है। इन लोगों के 2013 से ही देश छोड़कर भागने का दावा किया गया है। अमेरिका ने वेनेजुएला के दो आपराधिक समूहों- ट्रेन डी अरागुआ और कार्टेल डी लॉस सोलेस (जिसका नेतृत्व कथित तौर पर मादुरो करते हैं) को विदेशी आतंकवादी संगठन (फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन) के तौर पर चिह्नित किया है।</p>
<p><strong>वेनेजुएला का जवाब </strong><br />
वेनेजुएला सरकार उन आरोपों को सिरे से खारिज करती है, जिसके तहत उस पर अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी और अपने नागरिकों के दमन का आरोप लगाया जाता है। वेनेजुएला का आरोप है कि ड्रग्स के दावों को सिर्फ एक बहाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन या तख्तापलट करके वेनेजुएला की विशाल तेल संपत्ति पर अमेरिका कब्जा कर सके।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ?</strong><br />
कानूनी विशेषज्ञों ने इस मामले में ट्रंप प्रशासन की कार्रवाइयों पर चिंता जताई है, उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय महासागर क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाना अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है। अमेरिका की ओर से बिना सबूत दिए वेनेजुएला की नावों पर हमला न्याय से परे जाकर हत्याओं के जैसी स्थिति है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भी आंशिक नौसैनिक नाकाबंदी की आलोचना की है और इसे वेनेजुएला के खिलाफ अवैध सशस्त्र आक्रामकता बताया है।</p>
<p><strong>तानाशाह ट्रंप&#8230;!</strong><br />
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप विशुद्ध कारोबारी हैं। सत्ता की आड़ में अपने परिवार का कारोबार बढ़ाने के लिए वह क्या कर रहे हैं अमेरिकन्स को छोड़ किसी से नहीं छिपा। इतना ही नहीं कभी कनाड़ा तो कभी पनामा पर कब्जे का ऐलान करना यह साबित करने के लिए काफी है कि उनकी सोच पादरी स्ट्रांग्स की श्रेष्ठता और विस्तारवाद से कितना मेल खाती है। ट्रंप को नोबल पुरस्कार मिलेगा या नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन उनकी शांति की सफेद कबूतर दुनिया को फिर से खून में नहलाने के लिए निकल पड़ा है यह तय है। अमेरिका ही नहीं दुनिया के किसी भी देश की ऐसी विस्तारवादी सोच का खुले तौर पर विरोध होना चाहिए ताकि किसी भी देश का लोकतंत्र और उस देश के नागरिकों की स्वतंत्रता एवं संप्रभुता पर आंच न आए।</p>
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