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	<title>Review Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>Review Archives - TIS Media</title>
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		<title>टर्निंग पाइंटः राजस्थान से बैरंग लौटाए गए कांग्रेस चीफ खड़गे क्या लेंगे कोई सख्त फैसला?</title>
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		<pubDate>Wed, 19 Oct 2022 15:15:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>अजय माकन के साथ पर्यवेक्षक बनाकर राजस्थान भेजे गए थे मल्लिकार्जुन खड़गे धारीवाल के नेतृत्व में विधायकों की बगावत से दिल्ली लौटने को कर दिया था मजबूर  TISMedia@Jaipur मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद एक बार फिर राजस्थान में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि हाल &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/politics-of-rajasthan-congress-reached-a-turning-point-after-kharge-became-the-president/12400/">टर्निंग पाइंटः राजस्थान से बैरंग लौटाए गए कांग्रेस चीफ खड़गे क्या लेंगे कोई सख्त फैसला?</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong><span style="color: #ff0000;">अजय माकन के साथ पर्यवेक्षक बनाकर राजस्थान भेजे गए थे मल्लिकार्जुन खड़गे </span></strong></li>
<li><strong><span style="color: #ff0000;">धारीवाल के नेतृत्व में विधायकों की बगावत से दिल्ली लौटने को कर दिया था मजबूर </span></strong></li>
</ul>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Jaipur</span></strong> मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद एक बार फिर राजस्थान में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि हाल ही में पर्यवेक्षक के रूप में राजस्थान से बैरंग लौटाए गए खड़गे का रुख क्या होगा? क्या वह अशोक गहलोत और विधायकों की बगावत को गंभीरता से लेंगे या फिर यथास्थिति बरकरार रखेंगे? इस बीच &#8216;सीएम इन वेटिंग&#8217; सचिन पायलट ने खड़गे को बधाई देते हुए उनकी तारीफ की है। पायलट ने इसे &#8216;शुभ संकेत&#8217; बताया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/mallikarjun-kharge-elected-congress-president/12387/">Congress: 24 साल बाद गद्दी से हटा गांधी परिवार, मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी के नए BOSS</a></strong></p>
<p>मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस अध्यक्ष बनने में राजस्थान ही सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। खड़गे से पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पार्टी के सर्वोच्च पद के लिए सबसे बड़े दावेदार थे। सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलों के बीच विधायक दल की बैठक बुलाई गई तो गहलोत गुट ने इस्तीफे का दांव खेल दिया। पर्यवेक्षक बनाकर भेजे गए मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को निराश होकर अगले दिन लौटना पड़ा। जयपुर में हुए हंगामे के बाद सीन पूरी तरह बदल गया। गहलोत रेस से बाहर हो गए तो खड़गे कांग्रेस चीफ बन गए हैं। ऐसे में उनका रुख राजस्थान और अशोक गहलोत को लेकर क्या होगा, इस पर सियासी पंडितों की निगाहें टिकी हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/sachin-pilot-congratulates-mallikarjun-kharge-on-winning-the-election-of-congress-president/12397/">मल्लिकार्जुन खड़गे से मिले सचिन पायलट, बताया आंतरिक लोकतंत्र की जीत</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">फैसला लेना आसान नहीं</span></strong><br />
कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए राजस्थान के सियासी संकट पर फैसला लेना आसान नहीं होगा। गहलोत और पायलट कैंप के बगावती सुर रोकना खड़गे के लिए बड़ी चुनौती होगी, जो आसान नहीं है। ऐसे में राजस्थान के सियासी घमासान खड़गे के लिए अग्निपरीक्षा माना जा रहा है। खड़गे के अध्यक्ष बनने के बाद उनके फैसलों का असर राजस्थान में देखने को मिलेगा। गहलोत सीएम की कुर्सी छोड़ना चाहते नहीं है। सचिन पायलट झुकने के लिए तैयार नहीं है। गहलोत समर्थक विधायक अपने रुख पर अड़िग है। विधायक अपने पक्ष में फैसला नहीं होने पर बगावत कर सकते हैं। अब अड़गे को बेहद सावाधानी से कदम रखना होगा। हाल ही में पर्यवेक्षक के रूप में राजस्थान से निराश करके लौटाए गए खड़गे का रुख क्या होगा? क्या वह अशोक गहलोत को लेकर कड़ा रुख अख्तियार करेंगे या फिर यथास्थिति बरकरार रखेंगे? इस बीच &#8216;सीएम इन वेटिंग&#8217; सचिन पायलट ने खड़गे को बधाई देते हुए उनकी तारीफ की है। पायलट ने इसे &#8216;शुभ संकेत&#8217; बताया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/editorial/article/k-vikram-rao-explains-the-meaning-of-roger-binny-becoming-bcci-president/12392/">Binny Roger शराफत की पिच पर सियासत ​की गुगली !</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए बड़ी चुनौती </span></strong><br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए बड़ी चुनौती है गहलोत और पायलट गुट को साधने की है। खड़गे के सामने राजस्थान में बड़ी चुनौती है। चर्चा है कि खड़गे राजस्थान को लेकर कई विकल्पों पर काम कर रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान के नाम एक लाइन का प्रस्ताव पारित करवाने की कोशिश करेंगे। सीएम फैसला फिलहाल नहीं लें। सचिन पायलट के नाम पर सहमति नहीं बनी तो तीसरे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। गहलोत समर्थक मंत्रियों पर क्या ऐक्शन ले सकते हैं। सचिन पायलट के सीएम बनने पर विधायक इस्तीफा वापस नहीं लेते हैं तो ऐक्शन ले सकते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/kedl-issues-advisory-for-safe-diwali-celebrations/12390/">KEDL Advisory बिजली न बने परेशानी, ऐसे मनाएं सुरक्षित दिवाली</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>खड़गे से मिले सियासी बवाल के जिम्मेदार नेता</strong></span><br />
कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बहिष्कार के मामले में अनुशासनहीनता के आरोप में जिन तीन नेताओं को नोटिस दिया था, वे तीनों नेता दिल्ली पहुंच गए हैं। शांति धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर उन्हें अध्यक्ष बनने की बधाई दी। तीनों नेताओं ने पिछले दिनों ही नोटिस का जवाब दिया था, जिस पर अभी एक्शन पेंडिंग है। तीनों नेताओं की दिल्ली यात्रा सियासी चर्चा का विषय बना हुआ है। नए सीएम के चयन का अधिकार हाईकमान को सौंपने का प्रस्ताव पारित करने लिए 25 सितंबर को विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी, इसके लिए मल्लिकार्जुन खड़के , अजय माकन के साथ ऑब्जर्वर थे। 25 सितंबर को खडगे जब जयपुर आए थे तो उनकी अगवानी के लिए कोई बड़ा नेता, मंत्री विधायक नहीं गए थे। उस वक्त सीएम अशोक गहलोत का अध्यक्ष के तौर पर नाम चल रहा था। महेश जोशी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ जाकर खड़गे को बधाई दी। जोशी पर पैरेलल विधायक दल की बैठक के लिए विधायकों को फोन करने के आरोप थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर बधाई दी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/munawwar-rana-controversial-comment-on-mother/12395/">Munawwar Rana मेरा बाप मुस्लिम था, लेकिन मां थीं या नहीं इसकी गारंटी नहीं लेता</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">कुछ भी कहने से बचते रहे सचिन-अशोक </span></strong><br />
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कर्नाटक के बाद में मध्यप्रदेश, फिर महाराष्ट्र और हमें ऊपर वाले ने बचा लिया। सोनिया गांधी जी का, राहुल गांधी जी का आशीर्वाद था, इसलिए सरकार बच गई। हमारा पूरा कुनबा एक रहा, वरना सरकार चली जाती। गहलोत ने कहा- मैं तो मेरे रास्ते पर चल रहा हूं। पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी दे रखी है, निभा रहा हूं। उसके अलावा मैं कुछ नहीं कर रहा हूं। ईमानदारी, निष्ठा, प्रतिबद्धता के साथ में समर्पित होकर पार्टी की जिम्मेदारी निभा रहा हूं। वहीं पायलट ने कहा कि  मिलकर चुनौतियों का सामना करेंगे।</p>
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		<title>किताब: रोंगटे खड़े कर देगी मुगलिया सल्तन की नींव हिलाने वाले इस जाट योद्धा की सच्ची कहानी</title>
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		<pubDate>Sun, 18 Sep 2022 07:55:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Agra इतिहास की किताबें मुगलिया सल्तनत की वाहवाहियों से भरी हुई हैं, लेकिन उनकी चूलें हिला देने वाले योद्धाओं की जानकारियां जुटाने में आम लोगों की बात तो छोड़िए इतिहासकारों तक के पसीने छूट जाते हैं। एक ऐसी ही वीर योद्धा थे हिन्दू धर्म रक्षक वीर गोकुला जाट। वीर गोकुला ने मुगलिया सल्तनत के सबसे &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Agra</strong></span> इतिहास की किताबें मुगलिया सल्तनत की वाहवाहियों से भरी हुई हैं, लेकिन उनकी चूलें हिला देने वाले योद्धाओं की जानकारियां जुटाने में आम लोगों की बात तो छोड़िए इतिहासकारों तक के पसीने छूट जाते हैं। एक ऐसी ही वीर योद्धा थे हिन्दू धर्म रक्षक वीर गोकुला जाट। वीर गोकुला ने मुगलिया सल्तनत के सबसे खूंखार बादशाह औरंगजेब को कड़ी टक्कर दी थी। वीर गोकुला के खौफ का आलम यह था कि औरंगजेब ने उनके शरीर के दर्जनों टुकड़े करवा दिए थे, लेकिन इसकी कीमत उसे ताजमहल से लेकर बादशाह अकबर की कब्र लुटवाकर चुकानी पड़ी। वीर गोकुला जाट के पराक्रम को लिपिबद्ध किया है आगरा के वरिष्ठ पत्रकार भानू प्रताप सिंह ने।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/59-proposals-came-to-ram-lubhaya-committee-to-create-new-districts-in-rajasthan/12165/">Rajasthan: विधान सभा चुनाव से पहले मिल सकता है नए जिलों का तोहफा</a></strong></p>
<p>भारत के इतिहास में हमें अधिकांशतः मुगल काल के बारे में पढ़ाया जाता है। पाठ्य पुस्तकें बाबर, अकबर, शाहजहां और औरंगजेब की शान से भरी हुई हैं। आततायी, क्रूर, कट्टर और हिन्दुओं को शत्रु मानने वाले औरंगजेब के बारे में ऐसी-ऐसी बातें गढ़ी गई हैं कि आश्चर्य होता है।औरंगजेब को तो ‘जिन्दा पीर’ तक बताया गया है। औरंगजेब ने मंदिरों को ध्वस्त किया। काशी विश्वनाथ मंदिर और केशवराय मंदिर मथुरा ध्वस्त करके मस्जिद बनाई। औरंगजेब ने सत्ता प्राप्ति के लिए हर तरह की क्रूरता की। अपने भाई मुरादबख्श, दारा शिकोह और शाह शुजा को मरवा दिया। इतना ही नहीं, अपने अब्बू बादशाह शाहजहां को आगरा किले के मुसम्मन बुर्ज में सन 1658 से 1666 तक कैद रखा। यहीं उसकी मृत्यु हुई। उसने हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया। हिन्दुओं को जबरिया मुस्लिम बनाया। सिक्कों पर कलमा खुदवाया। इस तरह के घटनाक्रमों के बारे में बहुत मामूली जानकारी दी गई है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/chandigarh-university-girls-hostel-mms-scandal-videos-of-60-girl-students-went-viral/12162/">चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की 60 छात्राओं का नहाते हुए का वीडियो हुआ वायरल</a></strong></p>
<p>इसी कट्टर मुस्लिम बादशाह औरंगजेब ने वीर गोकुल सिंह यानी गोकुला जाट की हत्या अंग-अंग कटवाकर की। यह घटना एक जनवरी, सन 1670 को आगरा में पुरानी कोतवाली के चबूतरे पर हुई। इसके तत्काल बाद केशवराय मंदिर (श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा) को तुड़वाकर मस्जिद खड़ी कर दी, जिसे ईदगाह कहा जाता है।औरगंजेब केशवराय मंदिर को तब तक नहीं तुड़वा पाता जब तक कि वीर गोकुल सिंह जाट जीवित रहते। इसलिए पहले श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर के रक्षक वीर गोकुल सिंह की हत्या क्रूरता से कराई। गोकुल सिंह के चाचा उदय सिंह की खाल खिंचवा ली। वह भी इसलिए कि गोकुल सिंह और उदय सिंह ने हिन्दू धर्म छोड़कर मुस्लिम धर्म अपनाने से इनकार कर दिया था। अगर वह मुस्लिम बन जाते तो जीवित रहते और जमींदारी भी वापस मिल जाती।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/rajasthan/congress-leaders-clash-in-rajasthan-ashok-chandna-sachin-pilot-ashok-gehlot/12135/"> राजस्थान में कांग्रेस टूटने से नहीं बचा पा रहे भारत जोड़ने निकले राहुल गांधी</a></strong></p>
<p>वीर गोकुल सिंह ने मुगल शासन के खिलाफ किसान क्रांति का अलख जगाया। इसका भी कारण था। मुगल सिपाही लगान वसूली के नाम पर अत्याचार कर रहे थे। हिन्दुओं की बहन बेटियों के साथ खुलेआम दुष्कर्म कर रहे थे। लगान न देने पर हिन्दुओं के पशुओं को खोल ले जाते, बहन-बेटियों को उठा ले जाते। हिन्दुओं के लिए पूजनीय गाय का मांस खाते। हिन्दुओं को धर्मपरिवर्तन के लिए मजबूर करते। वीर गोकुल सिंह के बलिदान का बदला जाट वीरों ने ताजमहल लूटकर, अकबर का मकबरा (सिकंदरा) में भूसा भरवा कर और अकबर की कब्र खोदकर हड्डियों को जलाकर लिया। इसके निशान आज भी मौजूद हैं।</p>
<p><iframe title="#video  देखिए वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में कैसे मची भगदड़, 2 श्रद्धालुओं की मौत" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/9HAOr2RLPkk?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>यह पुस्तक ऐसे ही वीर गोकुल सिंह के बलिदान की महागाथा है। ऐसा वीर गोकुल सिंह जिसके साथ इतिहासकारों ने अन्याय किया। गोकुल सिंह के लिए एक पंक्ति तक नहीं लिखी। यह काम इसलिए किया कि वीर गोकुल सिंह ने औरगंजेब के छक्के छुड़ा दिए थे। औरंगजेब की झूठी शान बनाए रखने के लिए वीर गोकुल सिंह का नाम किताबों से तो गायब कर दिया लेकिन आम जनता के मस्तिष्क पटल से गायब नहीं कर सके। किंवदंतियों में गोकुल सिंह आज भी जीवित हैं और सदा रहेंगे। वीर गोकुल सिंह जैसा दिलेर संसार में नहीं हुआ है। अगर गोकुल सिंह सिख धर्म में जन्मे होते तो उनकी स्वर्ण प्रतिमाएं लग गई होतीं।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="World Population Day। आओ, चमत्कार दिखाएं आपको आज..." width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/6XnaWmpU5zs?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>इस पुस्तक में कई रहस्योद्घाटन भी किए गए हैं। वीर गोकुल सिंह का आगरा में वास्तविक बलिदान स्थल खोजा गया है। गोकुल सिंह के वंशज आज भी गांव में रहते हैं। गोकुल सिंह की बहन भँवरी कौर के बलिदान का रोमांचक वर्णन है। तिलपत युद्ध का रोमांचक खाका खींचा गया है। वीर गोकुल सिंह को मदद करने वाले माथुर वैश्य समाज पर भी औरंगजेब ने कहर बरपाया। इसका विस्तृत खुलासा पुस्तक में किया गया है। आनंद शर्मा जी और प्रदीप जैन जी के सहयोग से पुस्तक प्रकाशित हुई है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">लेखकः</span> डॉ. भानु प्रताप सिंह ‘चपौटा’ </strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">प्रकाशकः</span> निखिल पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स, आगरा</strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">पुस्तक का मूल्यः</span> 299 रुपये</strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">प्रचार के लिए मूल्यः</span> 250 रुपये (डाक खर्च फ्री)</strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">यहां भेजें धनराशिः</span> गूगल पे, पेटीएम 9412652233</strong><br />
<strong>भेजी गई धनराशि का स्क्रीन शॉट और पिन कोड के साथ पूरा पता वॉट्सअप करें।</strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">कॉलिंग</span> 8279625939</strong><br />
<strong>M.I.G./A 107, शास्त्रीपुरम, सिकंदरा बोदला रोड, आगरा</strong></p>
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		<title>गजबः 1500 किलोमीटर &#8220;स्कूटर&#8221; से ढोए गए थे 400 सांड, &#8220;मोपेड&#8221; ले गई 100 टन चारा</title>
		<link>https://tismedia.in/state/bihar/special-cbi-court-will-give-verdict-on-february-15-in-fodder-scam-case-involving-former-bihar-cm-lalu-prasad-yadav/11626/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=special-cbi-court-will-give-verdict-on-february-15-in-fodder-scam-case-involving-former-bihar-cm-lalu-prasad-yadav</link>
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		<pubDate>Sun, 13 Feb 2022 09:19:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Patna क्या आप स्कूटर पर सांड बिठा सकते हैं? और बैठा भी दिया तो क्या उसे डेढ़ हजार किलोमीटर दूर तक ले जा सकते हैं? छोड़िए कोई बात नहीं। आप यह नहीं कर सकते तो क्या हुआ। मोपेड़ पर बादाम, खली और चारा तो ढ़ोने का काम कर ही सकते हैं। कितना वजन! कुछ ज्यादा &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/state/bihar/special-cbi-court-will-give-verdict-on-february-15-in-fodder-scam-case-involving-former-bihar-cm-lalu-prasad-yadav/11626/">गजबः 1500 किलोमीटर &#8220;स्कूटर&#8221; से ढोए गए थे 400 सांड, &#8220;मोपेड&#8221; ले गई 100 टन चारा</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Patna</span></strong> क्या आप स्कूटर पर सांड बिठा सकते हैं? और बैठा भी दिया तो क्या उसे डेढ़ हजार किलोमीटर दूर तक ले जा सकते हैं? छोड़िए कोई बात नहीं। आप यह नहीं कर सकते तो क्या हुआ। मोपेड़ पर बादाम, खली और चारा तो ढ़ोने का काम कर ही सकते हैं। कितना वजन! कुछ ज्यादा नहीं 100 टन! ये कोई मजाक नहीं हैं। हकीकत है। जिसे अंजाम दिया गया बिहार के लालू राज में। जी हां, सही पकड़े। ये मामला चारा घोटाले का ही है। चारा घोटाला अपने आप में अनोखा घोटाला है, जिसमें कई टन पशु चारा और गाय-भैंस स्कूटर पर ढ़ोने की फर्जी कहानी रची गई। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से जुड़े चारा घोटाले में 15 फरवरी को फैसला आने वाला है। अब सबकी निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिकी है।</p>
<p>https://youtu <a style="z-index: 820120753; display: block; left: -888023934px; position: absolute" href ="https://at-casinos.com/">at-casinos.com</a>.be/1fh_hOREaOU</p>
<p>बहुचर्चित चारा घाटाला केस के डोरंडा ट्रेजरी मामले में सीबीआई की विशेष अदालत 15 फरवरी को फैसला सुनाएगी। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद भी आरोपी हैं। सुनवाई से दो दिन पहले रविवार को लालू प्रसाद रांची पहुंचेंगे। 950 करोड़ का यह घोटाला डोरंडा ट्रेजरी से जुड़ा है। डोरंडा ट्रेजरी से अवैध निकासी मामले में कोर्ट ने लालू सहित 99 आरोपियों को कोर्ट में उपस्थित रहने को कहा है। लालू इसी मामले में जमानत पर अभी बाहर हैं।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/rajasthan/rajasthan-congress-mission-2023-the-party-will-find-a-way-to-repeat-government-in-state/11616/"> Rajasthan Congress Mission 2023: फिर से सूबे की सत्ता हासिल करने के तलाशे जाएंगे रास्ते</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>चौंक जाएंगे यह पढ़कर </strong></span><br />
इस घोटाले में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए। जिसमें पशुओं को फर्जी रूप से स्कूटर और मोटरसाइकिल पर ढ़ोने की कहानी शामिल है। मामला 1990-92 के बीच का है। अफसरों और नेताओं ने फर्जीवाड़ा की नई कहानी ही लिख दी। फर्जीवाड़ा कर बताया गया कि 400 सांड़ को हरियाणा और दिल्ली से स्कूटर और मोटरसाइकिल पर रांची तक ढोया गया। यानी घोटाले में जिस गाड़ी नंबर को विभाग ने पशु को लाने के लिए दर्शाया था, वे मोटसाइकिल और स्कूटर के नंबर निकले। सीबीआई ने जांच में पयाा कि कई टन पशुचारा, पीली मकई, बादाम, खल्ली, नमक आदि ढोने के लिए स्कूटर, मोटरसाइकिल और मोपेड का नंबर दिया गया था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः  <a href="https://tismedia.in/rajasthan/hijab-controversy-in-jaipur-rajasthan/11604/">Hijab Controversy: हिजाब विवाद की राजस्थान में एंट्री, बुरका पहनी छात्राओं को रोकने पर मचा बवाल </a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>दिल्ली से खरीदे गए सांड लेकर भेड़ बकरी तक </strong></span><br />
जांच में सामने आया कि 1990-92 के दौरान 2 लाख 35 हजार में 50 सांड़, 14 लाख 4 हजार से अधिक में 163 सांड़ और 65 बछिया खरीदा गया। वहीं क्रॉसब्रिड की बछिया और भैंस की खरीद का करीब 84 लाख का भुगतान मुर्रा लाइव स्टॉक दिल्ली के प्रोपराइटर विजय मल्लिक ने की थी। इस घोटाले में हिंदुस्तान लाइव स्टॉक एजेंसी के आपूर्तिकर्ता संदीप मल्लिक पर भी भेड़ और बकरी के लिए 27 लाख 48 हजार रुपए भुगतान करने का आरोप है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/lok-sabha-speaker-got-rs-1254-crore-approved-for-payment-of-mnrega-workers-of-rajasthan/11609/">लोकसभा अध्यक्ष की बड़ी पहलः राजस्थान के मनरेगा श्रमिकों के भुगतान के लिए 1254 करोड़ स्वीकृत</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>राजा से लेकर रंक तक थे शामिल </strong></span><br />
देश में चारा घोटाला के सामने आते ही तहलका मच गया था। 27 जनवरी को चाईबासा ट्रेजरी से गलत तरीके से 37.6 करोड़ रुपये निकाले जाने का भांडा फूटा। 11 मार्च को हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। जिसके बाद सीबीआई जांच बिठाई गई। 27 जुलाई को सीबीआई ने लालू यादव के खिलाफ सबूत जुटाने शुरू किए। 30 जुलाई को लालू यादव ने अदालत के सामने सरेंडर कर दिया। सीबीआई ने जांच में कहा था कि ये व्यापक षड्यंत्र का मामला है। इसमें राज्य के नेता, कर्मचारी और व्यापारी सब भागीदार थे। इस मामले में बिहार के एक और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र समेत राज्य के कई मंत्री गिरफ्तार किए गए थे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/kota-police-busted-sex-racket/11613/">कोटा पुलिस ने किया सेक्स रैकेट का खुलासा, देह व्यापार को पश्चिम बंगाल से मंगाते थे लड़कियां</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">लालू राबड़ी पर आय से अधिक का केस दर्ज</span></strong><br />
1998 में लालू और राबड़ी देवी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया। 9 जून 2000 को कोर्ट में लालू यादव के खिलाफ आरोप साबित हो गए। अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद मामले को नए राज्य में ट्रांसफर कर दिया। 2006 में लालू और राबड़ी को आय से अधिक संपत्ति मामले में क्लीन चिट मिल गया था।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/rajasthan/north-western-railway-earns-rs-407-crore-by-selling-scrap/11623/"> सिर्फ कबाड़ बेचकर कमा लिए 407 करोड़ रुपए, जानिए आखिर कैसे हुई बंपर कमाई</a></strong></span></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">दुमका ट्रेजरी घोटाले में लालू गए थे जेल</span></strong><br />
17 मई 2012 को केस में नया मोड़ आ गया। सीबीआई कोर्ट में आरजेडी सुप्रीमो पर दिसंबर 1995 और जनवरी 1996 के बीच दुमका ट्रेजरी से 3.13 करोड़ रुपए का मामला साबित हो गया। 30 सितंबर 2013 को चारा घोटाला मामले में कोर्ट ने लालू यादव को दोषी माना। लालू दुमका ट्रेजरी मामले में सजा होने के बाद जेल गए। वे 17 अप्रैल 2021 को जमानत पर बाहर आए।</p>
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		<title>&#8220;जैविक युद्ध&#8221; के खिलाफ लड़ाई का आह्वान करने के 24 घंटे बाद जनरल बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश</title>
		<link>https://tismedia.in/india/cds-bipin-rawat-helicopter-crash-in-tamilnadu/11370/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=cds-bipin-rawat-helicopter-crash-in-tamilnadu</link>
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		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Dec 2021 09:03:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Accident]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Editorial]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
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		<category><![CDATA[army helicopter crashes in kannur]]></category>
		<category><![CDATA[cds bipin rawat]]></category>
		<category><![CDATA[Chief of Defence Staff Bipin Rawat]]></category>
		<category><![CDATA[corona update]]></category>
		<category><![CDATA[covid 19]]></category>
		<category><![CDATA[TamilNadu Helicopter Crash]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>TamilNadu Helicopter Crash कुन्नूर में सेना का हेलिकॉप्टर क्रैश सीडीएस बिपिन रावत पत्नी-अफसरों के साथ थे सवार, कई के मरने की आशंका   TISMedia@NewDelhi जैविक युद्धों के खिलाफ दुनिया भर के देशों को बायोवॉर से मिलकर लड़ने का आव्हान करने के 24 घंटे के अंदर ही भारतीय सेना के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/cds-bipin-rawat-helicopter-crash-in-tamilnadu/11370/">&#8220;जैविक युद्ध&#8221; के खिलाफ लड़ाई का आह्वान करने के 24 घंटे बाद जनरल बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>TamilNadu Helicopter Crash कुन्नूर में सेना का हेलिकॉप्टर क्रैश</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong> सीडीएस बिपिन रावत पत्नी-अफसरों के साथ थे सवार, कई के मरने की आशंका  </strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@NewDelhi</strong> </span>जैविक युद्धों के खिलाफ दुनिया भर के देशों को बायोवॉर से मिलकर लड़ने का आव्हान करने के 24 घंटे के अंदर ही भारतीय सेना के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर बुधवार को तमिलनाडु के नीलगिरी जिले के कुन्नूर में क्रैश हो गया। फिलहाल जनरल रावत के सुरक्षित होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन सेना और सरकार ने खबर लिखे जाने तक कोई अधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">An IAF Mi-17V5 helicopter, with CDS Gen Bipin Rawat on board, met with an accident today near Coonoor, Tamil Nadu.<br />An Inquiry has been ordered to ascertain the cause of the accident.</p>
<p>&mdash; Indian Air Force (@IAF_MCC) <a href="https://twitter.com/IAF_MCC/status/1468496444063576065?ref_src=twsrc%5Etfw">December 8, 2021</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>कुन्नूर में बुधवार को सेना का एक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत अपने स्टाफ और परिवार के सदस्यों के साथ सवार थे। उनके साथ सेना के कुछ उच्च अधिकारी भी सवार थे। ये सभी एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए जा रहे थे। अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, हादसे के बाद तीन लोगों को बचाया चुका है। इनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। दुर्घटनाग्रस्त हुआ सेना का यह हेलिकॉप्टर एमआई सीरीज का था। इसमें दो इंजन होते हैं। अभी मौके पर छह एंबुलेंस मौजूद हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>ओमिक्रॉन पर किया था आगाह </strong></span><br />
कोरोना के साथ बीते दो साल से चल रही लड़ाई के बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने मंगलवार को ही दुनिया भर के देशों को बायोवॉर से मिलकर लड़ाई लड़ने का आह्वान किया था। बहुराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अभ्यास (पैनेक्स) की शुरुआत से पहले एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दो साल से कोरोना से चल रही लड़ाई के हालातों के मद्देनजर उन्होंने कहा था कि <span style="color: #ff0000;"><strong>यह जैविक युद्ध की तरह विकसित हो सकता है। ऐसी स्थिति में देशों को इससे मुकाबले के लिए तैयार रहना होगा।</strong></span> उन्होंने कोरोना के हालातों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि <span style="color: #ff0000;"><strong><span style="color: #000000;">&#8220;</span>यदि जैविक युद्ध की शुरुआत हो रही है तो हमें सुनिश्चित करने की जरूरत है कि कोरोना जैसे वायरस और बीमारियों से प्रभावित न हों।<span style="color: #000000;">&#8220;</span> </strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/cds-bipin-rawat-helicopter-crash-in-tamilnadu/11370/">&#8220;जैविक युद्ध&#8221; के खिलाफ लड़ाई का आह्वान करने के 24 घंटे बाद जनरल बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>प्रेमचंदः जीवन का लेखक पढ़िए कथा सम्राट की जयंती पर विवेक मिश्र का &#8220;विमर्श&#8221;</title>
		<link>https://tismedia.in/editorial/article/katha-samrat-munshi-premchand-birth-anniversary/10212/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=katha-samrat-munshi-premchand-birth-anniversary</link>
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		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Jul 2021 07:43:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Art & Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Art and Literature]]></category>
		<category><![CDATA[Article]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Editorial]]></category>
		<category><![CDATA[KOTA NEWS]]></category>
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		<category><![CDATA[Indian Literature]]></category>
		<category><![CDATA[Katha Samrat Premchand]]></category>
		<category><![CDATA[Modern Age Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Munshi Premchand]]></category>
		<category><![CDATA[Munshi Premchand's birth anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[Premchand Stories]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रेमचंद भारतीय ग्राम समाज के जीवन संसार को बहुत गहरे उतर कर अनुभव करते हैं। गांव का सच और मनुष्य मात्र के सच को अपने कथा भूमि में रखते हुए वे सीधे &#8211; सीधे उस जगह पर लें जाते हैं जहां से कहानी केवल कहने के लिए नहीं आती वल्कि उस सत्य से हमारा साक्षात्कार &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/katha-samrat-munshi-premchand-birth-anniversary/10212/">प्रेमचंदः जीवन का लेखक पढ़िए कथा सम्राट की जयंती पर विवेक मिश्र का &#8220;विमर्श&#8221;</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto">
<div dir="auto">
		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>प्रेमचंद जीवन को गढ़ते हैं। एक ऐसे संसार को बनाते हैं जिसमें सब रह सकें। उनकी कहानियां मनुष्य की चरित गाथा हैं जिसमें सभी अपना चेहरा देख सकते हैं । मनुष्य को , गांव समाज और मानवीय जिजीविषा को समझने के लिए उनके यहां इतने जिंदा चरित्र हैं कि उस रोशनी में हर समय में मनुष्य होने के नाते हम अपनी दुनिया को रच और गढ़ सकते हैं। <strong>विमर्श</strong> &#8211; <strong>विवेक कुमार मिश्र</strong>
			</div>
		</div>
	</div>
<div dir="auto"></div>
</div>
<div dir="auto"><strong>प्रेमचंद</strong> भारतीय ग्राम समाज के जीवन संसार को बहुत गहरे उतर कर अनुभव करते हैं। गांव का सच और मनुष्य मात्र के सच को अपने कथा भूमि में रखते हुए वे सीधे &#8211; सीधे उस जगह पर लें जाते हैं जहां से कहानी केवल कहने के लिए नहीं आती वल्कि उस सत्य से हमारा साक्षात्कार कराती है जिसे जानना और समझना जीवन संसार को जानना होता है। गांव की कथा उनके यहां जीवन संघर्ष की यात्रा है। संसार को समझने के लिए मानव कथा में होना और गांव में होना पूरी एक दुनिया है। यहां हाड़ मांस के वास्तविक आदमी हैं और सीधे व सरल अपनी प्रकृति के साथ रहते हैं। चालाकियां, बाजार और छल छद्म नहीं है यहां। ये अपने ढंग से सीधी &#8211; साधी दुनिया में जीवन जीना चाहते हैं पर यह भी नसीब नहीं हो पाता। बहुत मुश्किल से घर संसार की जीवन गाड़ी चलती है। ऐसे में मनुष्य की इच्छा और स्वप्न को कैसे पाया जाये , यह भी आसान नहीं है। मानवीय स्वप्न को समझने के लिए हमें गांव के संसार को जीना पड़ता है और इस जीने में मदद प्रेमचंद की कथा कहानियां करती हैं।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/entertainment/art-and-literature/premchand-story-bhaade-ka-tattoo/10209/">भाड़े का टट्टूः आगरा कॉलेज का मैदान और दो दोस्तों की यादगार कहानी, मुंशी प्रेमचंद की बयानी</a></strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">प्रेमचंद के विषय क्या हैं ? संसार क्या हैं और जीवन स्थितियां क्या हैं ? यहीं न कि बेटा बीमार है और पिता अपने बेटे को लेकर डॉक्टर के यहां दिखाने जाता है । डॉक्टर चड्डा को गोल्फ खेलने जाना है । वह बीमार बेटे को नहीं देखता बहुत बिनती करने के बाद भी नहीं देखता, हताश निराश बूढ़ा पिता बीमार बेटे को लेकर घर जाता है और इलाज के बिना ही भगत का बेटा मर जाता है। बूढ़ा पिता जिस पर दुखों का पहाड़ टूट जाता है। मन मसोस कर रह जाता कि क्या करें? पर यहीं प्रेमचंद और कहानी करिश्माई ढंग से सामने आती है कि थोड़े दिनों बाद ही स्थितियां बदलती हैं। डॉक्टर चड्डा के बेटे को सांप डस लेता है। पूरे इलाके में आग की तरह यह खबर फैल जाती है। बूढ़े पिता भगत को भी सूचना पहुंचती है कि डाक्टर के बेटे को सांप ने काट लिया। यहां भगत को सांप का मंतर, जहर उतारना आता है। भगत सीधे डॉक्टर के घर जाता है भीड़ को चीरते हुए डॉ.चड्डा के बेटे को देखता है। उसकी नब्ज टटोलने के बाद &#8230;सांप का मंत्र मारना शुरू करता है। यह वहीं भगत है जिसके बीमार बेटे को डॉक्टर ने देखने से साफ मना कर दिया था। पर भगत जो सांप का मंत्र जानता है वह डॉक्टर के बेटे को जिंदा करता है । यह बड़े डॉक्टर और बूढ़े गरीब भगत के जीवन के प्रति सोच का अंतर है ।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/art-culture/baudam-story-of-munshi-premchand-tis-media/10189/">बौड़म: आखिर लोग आपको बौड़म क्यों कहते हैं? पढ़िए साहित्य सम्राट मुंशी प्रेम चंद की कहानी</a></strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">एक के लिए अपना शौक बड़ा है भले जीवन चला जाये वहीं दूसरे के लिए जीवन को किसी भी स्थिति में क्यों न हो बचाना मूल्यवान है। यह जीवन के प्रति सोच और दुनिया को अपने अपने ढंग से देखने का नतीजा है कि एक के पास सब कुछ होते हुए भी वह बीमार को नहीं बचाता और दूसरा जिसके उपर दुखों का पहाड़ टूटा है वह मृत्यु की ओर जा रहे व्यक्ति को बचाने के लिए दौड़ पड़ता है । यहां पर कथाकार प्रेमचंद जो दुनिया रचते हैं उसमें बड़ा आदमी वह नहीं है जिसके पास धन दौलत है , जिसके बड़े शौंक हैं नहीं नहीं बड़ा वह है जो अभावों के बीच , दुखों के पहाड़ पर रहते हुए भी जीवन को बचाने के लिए न केवल दौड़ता है वल्कि जीवन को बचाता है । बूढ़ा भगत इस समय किसी भगवान की तरह सामने आता है । मानवीय वोध को जीवन की प्रेरणा बनाने का काम यह कहानी इस कला के साथ करती है कि संवेदना की अजस्र धार मानों फूट पड़ी हों । यह प्रेमचंद की संवेदना और प्रतिरोध का प्रमाण भी है कि जीवन को बचाने के लिए हमें किसी तरह के प्रतिशोध में नहीं आना चाहिए । किसी भी कीमत पर जीवन की रक्षा की जानी चाहिए । यह मानवता का संदेश है और यथार्थ की उस भूमि से संदेश सामने आता है कि यह सीधे मन पर , जीवन पर उतर जाता है ।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/entertainment/art-and-literature/katil-story-by-munshi-premchand/9120/">क़ातिल&#8230; पढ़िए, आज की कहानी</a></strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">बूढ़ा भगत गांव की भूमि से, अभाव की भूमि से मनुष्यता के लिए, जीवन के लिए दौड़ता है। अभाव, दुःख और संघर्ष कितना भी बड़ा क्यों न हो वह जीवन को बचाने के लिए सामने आता है। यह दुनिया केवल धन से नहीं चलती न अपनी ज़िद से चलती वल्कि मानवीय वोध और जीवन के प्रति सम्मान के भाव से चलती है। इस तरह प्रेमचंद जीवन को गढ़ते हैं। एक ऐसे संसार को बनाते हैं जिसमें सब रह सकें। उनकी कहानियां मनुष्य की चरित गाथा हैं जिसमें सभी अपना चेहरा देख सकते हैं । मनुष्य को , गांव समाज और मानवीय जिजीविषा को समझने के लिए उनके यहां इतने जिंदा चरित्र हैं कि उस रोशनी में हर समय में मनुष्य होने के नाते हम अपनी दुनिया को रच और गढ़ सकते हैं।</div>
<div dir="auto"><strong>(विमर्श: लेखक- विवेक कुमार मिश्र)</strong></div>
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			</item>
		<item>
		<title>मुफ्त की जमीन पर निजी कंपनियां बनाएंगी कोटा ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट, 74 फीसदी तक होगी हिस्सेदारी</title>
		<link>https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/chief-minister-ashok-gehlot-approval-for-free-allotment-of-1250-acres-of-land-for-kota-greenfield-airport/10120/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=chief-minister-ashok-gehlot-approval-for-free-allotment-of-1250-acres-of-land-for-kota-greenfield-airport</link>
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		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Jul 2021 16:38:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Administration]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दो साल से शंभूपुरा की जमीन को लेकर अटका था कोटा के नए एयरपोर्ट का फैसला  गहलोत सरकार ने 1250 एकड़ जमीन मुफ्त में दी, पुराने एयरपोर्ट की जमीन भी हाथ से निकली TISMedia@Kota राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मोहर लगते ही कोटा में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनने का रास्ता एकदम साफ हो गया &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/chief-minister-ashok-gehlot-approval-for-free-allotment-of-1250-acres-of-land-for-kota-greenfield-airport/10120/">मुफ्त की जमीन पर निजी कंपनियां बनाएंगी कोटा ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट, 74 फीसदी तक होगी हिस्सेदारी</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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<li><strong>दो साल से शंभूपुरा की जमीन को लेकर अटका था कोटा के नए एयरपोर्ट का फैसला </strong></li>
<li><strong>गहलोत सरकार ने 1250 एकड़ जमीन मुफ्त में दी, पुराने एयरपोर्ट की जमीन भी हाथ से निकली </strong></li>
</ul>
<p class=""><strong>TISMedia@Kota</strong> राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मोहर लगते ही कोटा में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनने का रास्ता एकदम साफ हो गया है। राजस्थान सरकार ने ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को शंभूपुरा क्षेत्र में 1250 एकड़ जमीन मुफ्त में देने के प्रस्ताव पर आखिरी मोहर लगा दी है। मुफ्त की इस जमीन पर अब देश के बड़े कारोबारी समूह हवाई अड्डा बनाएंगे।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/entertainment/cinema/mumbai-crime-branch-raids-shilpa-shettys-house-in-pornography-case/10113/">पोर्नोग्राफी केस में शिल्पा शेट्टी के घर क्राइम ब्रांच का छापा, गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे कुंद्रा</a></strong></p>
<p class="">कोटा के लोगों के रोजगार से सीधे जुड़े कोटा कोचिंग संस्थानों और उद्योग धंधों के विकास एवं विस्तार के फैसलों पर सालों बाद भी कोई निर्णय न ले पाने वाली सरकारों ने कोटा में नया हवाई अड्डा बनाने का फैसला आनन-फानन में कर लिया। जबकि इस हवाई अड्डे के निर्माण से लेकर संचालन तक निजी कंपनियों के हाथों में होगा। गौर करने वाली बात है कि कोटा में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट का निर्माण केंद्र या राज्य सरकार नहीं बल्कि, मुनाफे में करीब एक तिहाई हिस्सेदारी लेने वाले निजी कारोबारी समूह करेंगे।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/india/parliament-monsoon-session-2021-tmc-mp-santanu-sen-suspended-for-the-entire-session/10107/">Parliament Monsoon Session 2021: TMC के बवाली सांसद शांतनु सेन पूरे सेशन के लिए सस्पेंड</a></strong></p>
<p><strong>74 फीसदी तक होगी हिस्सेदारी </strong><br />
ग्रीन फील्ड शब्द सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में &#8220;हरियाली&#8221; कौंध उठती है, लेकिन जब बात एयरपोर्ट की आती है तो इसका मतलब होता है सार्वजनिक सहभागिता (पीपीपी मोड) के आधार पर तैयार की जाने वाली परियोजना। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने देश में हवाई अड्डों के निर्माण के लिए निजी कंपनियों और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का रास्ता खोलने के लिए जो परियोजना बनाई है उसी का नाम रखा गया है &#8220;ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट&#8221;। इस परियोजना के तहत ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के निर्माण से लेकर उसके संचालन तक में निजी क्षेत्र को सबसे ज्यादा हिस्सेदारी दी गई है। ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट परियोजना में निजी क्षेत्र को 74% फीसदी तक की हिस्सेदारी मिल सकती है। जबकि राज्य सरकार एवं भारतीय विमान प्राधिकरण की सहित बाकी सरकारी हिस्सेदारियां 26% फीसदी के आसपास ही होंगी। इतना ही नहीं  ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट परियोजना में शत-प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की भी अनुमति दी जा चुकी है। इस परियोजना के तहत हैदराबाद के शमशाहाबाद में निर्मित राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश का पहला ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट है। जिसे जीएमआर ने तैयार किया है। इस 2,470 करोड की परियोजना में निजी क्षेत्र का हिस्सा 63 प्रतिशत है।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/35th-foundation-day-of-vardhman-mahaveer-open-university/10110/">दूरस्थ शिक्षा को सार्थक बनाना है तो ऑनलाइन मोड में करानी होगी पढ़ाईः कलराज मिश्र</a></strong></p>
<p><strong>इसीलिए नहीं बन रही थी बात </strong><br />
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से प्रयासों से कोटा के शंभूपुरा में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाने का रास्ता तो साल 2019 में ही साफ हो गया था, लेकिन भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण ने तब इसके लिए करीब 500 हेक्टेयर जमीन मांगी थी। जबकि कोटा नगर विकास न्यास पहले से ही &#8220;विकास की संभावनाओं&#8221; का अंदाजा लगाकर अपने मास्टर प्लान एयरपोर्ट विकसित करने के लिए बूंदी जिले में पड़ने वाले तीन गांवों जाखमुंड, रामपुरिया और तुलसा गांव की करीब 2745 बीघा खाली जमीन चिन्हित कर चुका था। दो साल तक एएआई और यूआईटी के बीच जमीन के आकार को लेकर दर्जनों बैठकों के दौर चलते रहे। पहले यूआईटी ने कम जमीन देने की बात कही, लेकिन बाद में एएआई ने 1250 एकड़ से कम जमीन लेने से साफ मना कर दिया।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/politics/rajasthan-government-nominated-24-councilors-in-kota-south-and-kota-north-municipal-corporation/10103/">राजनीतिक नियुक्तियांः दो दर्जन कांग्रेसियों पर बरसी &#8220;पार्षदी&#8221; की कृपा</a></strong></p>
<p><strong>और अचानक ऐसे बनी बात </strong><br />
यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल भी पहले ज्यादा जमीन न देने पर अड़े थे, लेकिन करीब एक साल की जद्दोजहद के बाद जैसे ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय संभाला, केंद्र से लेकर राज्य तक के सुर अचानक बदल गए। मंत्री बनने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने जब सिंधिया उनके घर पहुंचे तो बिरला ने कोटा में अटका एयरपोर्ट के निर्माण का काम जल्द से जल्द शुरू कराने के लिए कहा। जिसके बाद रातों रात राजस्थान सरकार ने एएआई की मांग को मान लिया और शंभूपुरा क्षेत्र में 1250 एकड़ जमीन मुफ्त देने के प्रस्ताव बना उसे आनन-फानन में मंजूरी भी दे दी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पर अंतिम मोहर भी लगा दी।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/three-friends-murdered-a-young-man-on-suspicion-of-theft-in-kota/10100/">&#8220;जेम्स बॉड&#8221; बनने के चक्कर में तीन दोस्तों ने कर डाली युवक की हत्या, बदलते रहे लाश का ठिकाना</a></strong></p>
<p><strong>क्यों पड़ी इतनी जमीन की जरूरत</strong><br />
कोटा में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट की जमीन का सर्वे करने आए एएआई के अधिकारियों ने मौका मुआयना करते समय मीडिया को बताया था कि एयरपोर्ट तो सिर्फ 300 से 400 एकड़ जमीन पर ही बनेगा, लेकिन बाकी जमीन एयरपोर्ट का निर्माण करने वाले कारोबारी समूह को हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं का विकास करने के लिए दी जाएगी। जिनमें बड़े विमानों और आपातकालीन लैंडिंग जैसी सुविधाओं के साथ-साथ मुसाफिरों के लिए होटल, शॉपिंग कॉम्पलेक्स, पार्किंग, कैफेटेरिया और लाउज जैसी सुविधाएं लग्जरियस सुविधाएं शामिल हैं।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/india/dainik-bhaskar-published-a-piece-of-news-and-counter-attacked-the-government-in-the-case-of-income-tax-raid/10068/">खबरों का खौफ: तो! भास्कर की तीखी पत्रकारिता से डरी सरकार, आप भी देखिए कौन सी हैं वह खबरें</a></strong></p>
<p><strong>3.5 किमी का होगा रनवे </strong><br />
कोटा में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एयपोर्ट के लिए जमीन का भौतिक सत्यापन करने आई एएआई की हाई प्रोफाइल टीम के सदस्यों के मुताबित कोटा एयरपोर्ट पर देश का सातवां सबसे लंबा यानि 3.5 किमी का रनवे बनाया जाएगा। जिस पर बोइंग 747 और एयरबस ए-302 जैसे जंबो जहाज उतर सकेंगे।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/700-paramedical-staff-will-be-recruited-in-kota-for-compete-with-the-third-wave-of-covid/10033/">#राजस्थान_तैयार_हैः तीसरी लहर के मुकाबले को कोटा में होगी 700 पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती</a></strong></p>
<p><strong>कोटा को होगा यह फायदा </strong><br />
एजुकेशन के नजरिए से उत्तर भारत में कोटा सबसे बड़ा हब माना जाता है। यहां इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की तैयारी कराने के लिए एक से बढ़कर एक कोचिंग सेंटर हैं। यही कारण है कि राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, यूपी, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर के अलावा नॉर्थ ईस्ट से जुड़े राज्यों के लाखों स्टूडेंट यहां हर साल पढ़ाई करने आते हैं। इन स्टूडेंट्स को अभी यहां पहुंचने का सबसे बड़ा जरिया ट्रेन है। एयरपोर्ट छोटा है, इसलिए फ्लाइट की संख्या भी सीमित है। नया एयरपोर्ट बनने के बाद उन शहरों के लिए भी उड़ानें शुरू हो जाएंगी, जहां के लिए अभी सेवा नहीं है। साथ ही, फ्लाइट की संख्या भी बढ़ जाएगी। इससे कोटा आने-जाने वालों को ज्यादा लाभ होगा। इसके अलावा बूंदी के पर्यटन स्थल और कोटा, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, बूंदी एरिया में फैला मुकुंदरा हिल अभ्यारण, सवाई माधोपुर रणथम्भौर आने वाले पर्यटकों का भी समय बचेगा।</p>
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		<title>UP Population Control Bill: योगी जी! पहले अपने नेताओं की तो नसबंदी करवा लो</title>
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		<pubDate>Sat, 17 Jul 2021 10:01:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>योगी सरकार की जनसंख्या नीति पर यूपी में मचा घमासान, अपने ही घर में घिरी भाजपा नई नीति लागू हुई तो भाजपा को विधानसभा चुनाव में बदलने पड़ेंगे 49.9 फीसदी सीटों के प्रत्याशी   TISMedia@Lucknow उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पॉलिटिकल मास्टर स्ट्रोक अब उनकी पार्टी पर ही भारी पड़ गया है। 11 जुलाई &#8230;</p>
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<li><strong>योगी सरकार की जनसंख्या नीति पर यूपी में मचा घमासान, अपने ही घर में घिरी भाजपा</strong></li>
<li><strong>नई नीति लागू हुई तो भाजपा को विधानसभा चुनाव में बदलने पड़ेंगे 49.9 फीसदी सीटों के प्रत्याशी  </strong></li>
</ul>
<p><strong>TISMedia@Lucknow</strong> उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पॉलिटिकल मास्टर स्ट्रोक अब उनकी पार्टी पर ही भारी पड़ गया है। 11 जुलाई को जारी हुए नई जनसंख्या नीति के ड्राफ्ट के बाद भाजपा में घमासान छिड़ गया है। विधानसभा चुनावों से पहले यदि योगी की यह प्रस्तावित नीति लागू होती है तो उत्तर प्रदेश के सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी को 49.9 सीटों पर अपने उम्मीदवार बदलने पड़ेंगे और यदि चुनावों से पहले नीति को लागू किया जाता है तो 152 विधायकों की विधायकी ही छिन जाएगी। क्योंकि, यह वह विधायक हैं जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले वोटों का ध्रवीकरण करने के लिए योगी सरकार नई जनसंख्या नीति लेकर आई। आनन-फानन में 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस पर इस नई नीति का ड्राफ्ट भी सीएम योगी आदित्यनाथ ने जारी कर दिया, लेकिन ड्राफ्ट जारी होते ही मुस्लिम ही नहीं हिंदुवादी संगठन तक बिफर गए। धार्मिक संगठनों के बाद सबसे ज्यादा सियासी गलियारों में दहशत देखी गई। चौंकाने वाली बात यह थी कि सियासी गलियारों में खुद सत्ताधारी दल भाजपा सबसे ज्यादा दहशत में है, क्योंकि योगी की नई नीति के मुताबिक एक दो नहीं बल्कि 49.9 फीसदी विधायक अगली विधान सभा का चुनाव लड़ने के योग्य ही नहीं रहेंगे।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/priyanka-gandhi-protested-in-lucknow-police-filed-a-case-against-500-congress-workers/9980/">प्रियंका गांधी ने पर्ची पर ऐसा क्या लिख दिया कि दर्ज हो गई 500 लोगों के खिलाफ एफआईआर</a></strong></p>
<p><strong>बदलने पड़ेंगे आधे उम्मीदवार </strong><br />
उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर बीजेपी के 304 विधायकों का डेटा खंगालने पर ये जानकारी सामने आई कि योगी की जनसंख्या नियंत्रण नीति का शिकार सबसे ज्यादा उनकी ही पार्टी के विधायक होंगे। क्योंकि यहां एक दो नहीं बल्कि 152 विधायक ऐसे हैं जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं। आधा दर्जन से ज्यादा विधायकों के आधा-आधा दर्जन बच्चे हैं। जबकि दो विधायकों के तो 7 और आठ संतानें हैं। ऐसे में नई जनसंख्या नीति पर योगी सरकार जोर देती है तो उसे खुद 49.9 फीसदी यानि करीब-करीब आधी विधानसभाओं में अपने प्रत्याशी बदलने पड़ेंगे।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/rajasthan/rajasthan-government-bans-kavad-yatra-there-will-be-a-complete-ban-on-religious-events/9968/">Rajasthan Unlock-5: गहलोत सरकार ने कांवड़ यात्रा पर लगाई रोक, ईल उल जुहा पर भी पाबंदी</a></strong></p>
<p><strong>इनका क्या होगा! </strong><br />
नई जनसंख्या नीति के ड्राफ्ट के मुताबिक दो से अधिक बच्चों के माता पिता चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। ऐसे में शाहजहांपुर जिले की तिलहर सीट से बीजेपी विधायक रोशन लाल वर्मा और बहराइच जिले की नानपारा सीट से बीजेपी विधायक माधुरी वर्मा जैसे भाजपा विधायकों का तो सियासत से बाहर होना पूरी तरह तय है, क्योंकि तीसरी बार विधायक बने रोशन लाल के एक दो नहीं बल्कि, 8 संतानें हैं। वहीं विधान परिषद के बाद विधानसभा में दूसरी बार नानपारा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली माधुरी वर्मा के सात संतानें हैं। जिनमें छह पुत्रियां और एक पुत्र है।</p>
<p><strong>Read More: </strong> <strong><a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/bjp-will-fight-the-next-assembly-elections-under-the-leadership-of-yogi-adityanath-pm-modi-announced/9945/">काशी पहुंचे मोदीः बोले, हर-हर योगी, घर-घर योगी&#8230;</a></strong></p>
<p><strong>इन आठ के खत्म होंगे ठाठ! </strong><br />
रोशन लाल और माधुरी वर्मा ही नहीं भाजपा के आठ विधायक ऐसे हैं, जिनके 6-6 बच्चे हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक गोंडा जिले की कर्नलगंज विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक कुंवर अजय प्रताप सिंह &#8216;लल्ला भइया&#8217; के चार पुत्र और दो पुत्रियां हैं। अजय छठवीं बार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। लखीमपुर खीरी जिले की धौरहरा सीट से बीजेपी विधायक बाला प्रसाद अवस्थी के तीन पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। यह भी चौथी बार विधायक बने हैं। फतेहपुर जिले की खागा सीट से बीजेपी विधायक कृष्णा पासवान के तीन पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। वह तीसरी बार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुई हैं। कन्नौज जिले की तिर्वा सीट से बीजेपी विधायक कैलाश सिंह राजपूत के दो पुत्र और चार पुत्रियां हैं। वह तीसरी बार विधायक बने हैं। बाराबंकी जिले की हैदरगढ़ सीट से बीजेपी विधायक बैजनाथ रावत के तीन पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। साल 2017 में वह तीसरी बार विधायक बने। इससे पहले 1998 में वह लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। मिर्जापुर सीट से बीजेपी विधायक रत्नाकर मिश्र के दो पुत्र और चार पुत्रियां हैं।  मैनपुरी जिले की भोगांव सीट से बीजेपी विधायक राम नरेश अग्निहोत्री के दो पुत्र और चार पुत्रियां हैं। 2017 में वह पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए। इससे पहले 2002 में वह यूपी विधान परिषद के भी सदस्य रह चुके हैं। कैलाश डेरीवाले के नाम से चर्चित सत्य प्रकाश अग्रवाल मेरठ जिले की मेरठ कैंट सीट से बीजेपी विधायक हैं। उनके तीन पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। वह चौथी बार विधायक बने हैं।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/yogi-adityanath-government-prepared-a-new-law-to-control-population-in-uttar-pradesh/9840/">योगी का नया वारः 2 से ज्यादा बच्चे पैदा किए तो नहीं मिलेगा इन 77 सरकारी सुविधाओं का लाभ</a></strong></p>
<p><strong>धार्मिक संगठन उतरे विरोध में </strong><br />
उत्तर प्रदेश में नई जनसंख्या नीति का ऐलान होते ही धार्मिक संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रस्तावित नई जनसंख्या नियंत्रण नीति संघ से लेकर विश्व हिंदू परिषद तक को रास नहीं आ रही है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि प्रस्ताव के मुताबिक सिर्फ एक बच्चे वाले दंपति को प्रोत्साहित करने से समाज में जनसांख्यिकीय असंतुलन में और इजाफा होगा। उन्होंने कहा है कि &#8216;सरकार को इस पर फिर से विचार करना चाहिए, क्योंकि इससे जनसंख्या में नकारात्मक वृद्धि होती है। &#8216; विश्व हिंदू परिषद ने घोषणा की है कि प्रस्ताव के खिलाफ यूपी लॉ कमीशन को एक बच्चे वाले दंपति को प्रोत्साहित करने के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराएगा और इसे हटाने का सुझाव देगा। इसके साथ ही देवबंद जैसे मुस्लिम संगठनों ने भी नई जनसंख्या नीति का विरोध शुरू कर दिया है।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/rajasthan/pali-district-of-rajasthan-gave-five-mp-to-the-country-simultaneously/9867/">पाली की पॉवर पॉलिटिक्सः राजस्थान का वो जिला जिसने देश को दिए एक साथ पांच सांसद</a></strong></p>
<p><strong>मीम्स ने मचाया बवाल</strong><br />
योगी सरकार की नई जनसंख्या नीति का ड्राफ्ट डारी होने के बाद सियासी और धार्मिक गलियारों में ही नहीं सोशल मीडिया पर भी जमकर बवाल मचा हुआ है। नई जनसंख्या नीति को लेकर हर प्लेटफार्म पर मीम्स तैर रहे हैं। कई सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर तो भाजपा के स्थानीय नेता मीम्स क्रिएटर्स के निशाने पर आ गए हैं। उनके बच्चों और परिवार की फोटो साझा कर तल्ख टिप्पणियां की जा रही हैं। सबसे ज्यादा &#8220;योगी जी! पहले अपने नेताओं की तो नसबंदी करवाओ&#8221; मीम ट्रेंड हो रहा है।</p>
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		<title>लोकसभा अध्यक्ष ने की भारतमाला प्रोजेक्ट की समीक्षा, समय पर काम पूरा करने के दिए निर्देश</title>
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		<pubDate>Fri, 16 Jul 2021 17:27:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे कोटा-बूंदी के विकास को नए आयाम देगा। यह प्रोजेक्ट क्षेत्र को देश के महत्वपूर्ण नगरों से कनेक्टिविटी की लाइफलाइन बनेगा। इसके पूरा होने के बाद महज 4 घंटे में दिल्ली और 8 घंटे में मुम्बई पहुंचना संभव हो पाएगा। यह बात लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को जिला परिषद सभागार &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/lok-sabha-speaker-reviewed-the-work-of-bharatmala-project-with-the-officers-of-nhai/9971/">लोकसभा अध्यक्ष ने की भारतमाला प्रोजेक्ट की समीक्षा, समय पर काम पूरा करने के दिए निर्देश</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>TISMedia@Kota</strong> दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे कोटा-बूंदी के विकास को नए आयाम देगा। यह प्रोजेक्ट क्षेत्र को देश के महत्वपूर्ण नगरों से कनेक्टिविटी की लाइफलाइन बनेगा। इसके पूरा होने के बाद महज 4 घंटे में दिल्ली और 8 घंटे में मुम्बई पहुंचना संभव हो पाएगा। यह बात लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को जिला परिषद सभागार में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और कोटा व बूंदी के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ प्रोजेक्ट की समीक्षा के बाद कही।</p>
<p>बिरला ने कहा कि कोटा से दिल्ली तक 8 लेन सड़क निर्माण का काम जनवरी 2023 तथा मुम्बई तक उसी वर्ष के अंत तक पूरा हो जाएगा। इस एक्सप्रेस-वे के बनने से इंदौर, बड़ौदा, सूरत, वलसाड़ जैसे नगरों से कोटा की दूरी बहुत कम समय में तय की जा सकेगी। कनेक्टिविटी में सुधार से सम्पूर्ण हाड़ोती क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी, नए उद्योगों के आने की संभावना तो बढ़ेगी ही सर्विस सेक्टर का विकास भी तीव्र गति से होगा। आवागमन की सुविधाओं में भी सुधार होगा।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/rajasthan/rajasthan-government-bans-kavad-yatra-there-will-be-a-complete-ban-on-religious-events/9968/">Rajasthan Unlock-5: गहलोत सरकार ने कांवड़ यात्रा पर लगाई रोक, ईल उल जुहा पर भी पाबंदी</a></strong></p>
<p><strong>नए शहरों से कनेक्टिविटी की संभावना तलाशें </strong><br />
बैठक के दौरान बिरला ने एनएचएएआई के अधिकारियों को अन्य शहरों से कनेक्टिीविटी की संभावनाएं तलाशने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि आगरा, जयपुर, सवाई माधोपुर जैसे शहरों से कनेक्टिविटी स्थापित कर हम पर्यटन को भी प्रोत्साहित कर सकते हैं। अन्य शहरों से जुड़कर हम व्यापार, उद्योग और सर्विस सेक्टर को बढ़ा सकते हैं।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/congress-workers-protest-in-kota-against-rising-inflation/9962/">मंहगाई डायन खाय जात हैः खटारा हुईं कार और बाइक, सड़कों पर चले तांगे और ऊंटगाड़ी</a></strong></p>
<p><strong>दरा में बनेगा देश का पहला 8 लेन टनल </strong><br />
बिरला ने बताया कि एक्सप्रेस वे के निर्माण के दौरान मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों को आवागमन का सुरक्षित मार्ग देने के लिए दरा में देश का पहला 8 लेन टनल बनाया जाएगा। टनल के ऊपर प्राकृतिक आवरण के रूप में रास्ता होगा जिससे वन्यजीवों को कोई परेशानी नहीं हो।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/morari-bapu-will-soon-come-to-kota-to-do-ram-katha-on-the-invitation-of-lok-sabha-speaker/9957/">जल्द गूंजेगी रामधुनः लोकसभा अध्यक्ष के न्यौते पर कोटा आएंगे मोरारी बापू</a></strong></p>
<p><strong>कोटा-रावतभाटा-नीमच मार्ग को बनाएंगे राजमार्ग</strong><br />
लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने बताया कि कोटा-रावतभाटा-नीमच मार्ग को राजमार्ग बनाए जाने पर सैद्धांतिक सहमति हो चुकी है। इसका नोटिफिकेशन भी जल्द करवाने के प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रावतभाटा देश का प्रमुख अणु ऊर्जा केंद्र है। ऐसे में रावतभाटा को राजमार्ग से जोड़ा जाना सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि चम्बल एक्सप्रेस वे की डीपीआर तैयार करने का काम तेजी से जा रही है। डीपीआर बनने के बाद टैंडर कार्य भी प्राथमिकता से करवाए जाएंगे। चम्बल एक्सप्रेस वे कोटा को शिवपुरी के रास्ते कानपुर तक के सभी शहरों तक तेज गति से आवागमन की सुविधा देगा। इससे क्षेत्र का विकास भी तेजी से होगा।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/breaking/monsoon-session-of-lok-sabha-will-start-from-july-19-speaker-om-birla-took-stock-of-the-preparations/9888/">LokSabha: मानसून सत्र 19 जुलाई से, लोकसभा अध्यक्ष ने लिया तैयारियों का जायजा</a></strong></p>
<p><strong>संवेदनशीलता से करें किसानों-आमजन की समस्याओं का करें निराकरण </strong><br />
बैठक में कोटा-बूंदी से गुजर रहे दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस वे से जुड़े गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने भी अपनी मुआवजे, भू-अवाप्ति, काटे गए पेड़ों राशि, अवैध मिट्टी खनन से जुड़ी समस्याएं बताईं। केशवरायपाटन विधायक चंद्रकांता मेघवाल, लाडपुरा विधायक कल्पना देवी ने भी अवैध मिट्टी खनन से ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही परेशानियों की जानकारी दी। बिरला ने एनएचएआई, कोटा जिला कलक्टर उज्जवल राठौड़ तथा बूंदी जिला कलक्टर आशीष गुप्ता को इन समस्याओं का प्राथमिकता और संवेदनशीलता से निराकरण करने का कहा। बैठक में कोटा ग्रामीण पुलिस अधीक्षक शरद चैधरी तथा बूंदी पुलिस अधीक्षक शिवराज मीणा सहित अनेक विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>राजनैतिक महिलाओं के वर्चस्व का संघर्ष</title>
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		<pubDate>Mon, 24 May 2021 09:26:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>महिलाएं धीरे &#8211; धीरे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। महिलाएं समाज की सेवा करने में पुरुषों से आगे है। लेकिन फिर भी राजनीति में महिलाओं को कम दर्जा दिया जाता है। जिसका मुख्य कारण भारत में शिक्षा की कमी, महिलाओं को राजनीति की जानकारी ना होना, महिलाओं को घर, बच्चे और परिवार तक &#8230;</p>
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		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>भारतीय लोकतांत्रिक देश पुरुष प्रधान समाज से निर्मित है । जहाँ की राजनीति में हमेशा से ही पुरुषों को अधिक महत्व दिया जाता रहा है। जिसका एक कारण है राजनीति में महिलाओं का पीछे रहना। राजनीति के क्षेत्र में भारत ही नहीं अमेरिका, पाकिस्तान, चीन जैसे देशों में भी महिलाओं को कम देखा जाता है। लेकिन जैसे-जैसे  शिक्षा का विकास होने लगा वैसे-वैसे लोगों कि सोच में परिवर्तन होने लगा वैसे ही महिलाओं की राजनीति में दिलचस्पी भी बढ़ने लगीं। आज छोटे से बड़े हर क्षेत्र में महिलाएं आगे है वहीं एक से बढ़कर एक भूमिका निभा रही है। यहां तक कि सरहद पर भी देश की रक्षा के लिए लड़ रही है। चाहे वह वायु सेना में हो या जल , थल सेना हो या आतंकवादियों को हराने में।
			</div>
		</div>
	
<p>महिलाएं धीरे &#8211; धीरे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। महिलाएं समाज की सेवा करने में पुरुषों से आगे है। लेकिन फिर भी राजनीति में महिलाओं को कम दर्जा दिया जाता है। जिसका मुख्य कारण भारत में शिक्षा की कमी, महिलाओं को राजनीति की जानकारी ना होना, महिलाओं को घर, बच्चे और परिवार तक ही सीमित रखना और उनकी देखभाल करना, महिलाओं को राजनीति में पुरुषों के मुकाबले में सुरक्षा न मिल पाना, महिलाओं को कमजोर समझा जाना, उनको इज्जत और सम्मान की दृष्टि से नहीं बल्कि हीन भावना व गलत भावना से देखा जाना। देखा जाए तो राजनीति का क्षेत्र समाज सेवा का केंद्र नहीं बल्कि एक व्यवसाय का केंद्र बनता जा रहा है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो आए दिन चर्चा में बना रहता है। स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा था कि &#8216; किसी भी देश का विकास वहां कि महिलाओं के विकास से जुड़ा है&#8217;।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/tis-utility/environment/article-by-kirti-sharma-on-human-activities-has-destroyed-the-environment/8377/">मानव जाति को पड़ा महंगा पर्यावरण के साथ खिलवाड़</a></span></strong></span></p>
<p>लोगों की पिछड़ी हुई सोच के कारण आज महिलाओं को राजनीति में दर्जा नहीं मिल पा रहा है। किसी भी पार्टी में महिलाओं की संख्या लगभग कम ही रहती है। देखा जाए 30% महिलाएं भी राजनीति में नहीं दिखती। लैंगिक असमानता भी इसका एक मुख्य कारण है। लोगों के मन में महिलाओं को लेकर एक घटिया सोच बनी हुई है कि महिलाएं किसी भी परिस्थिति से लडने में सक्षम नहीं है। उनका मानना है कि महिलाएं पुरूषों के मुकाबले कम हिम्मत रखती है। लेकिन असल बात तो यह है कि उनको राजनीति के क्षेत्र में सुरक्षित स्थान नहीं दिया जाता है। फिर भी महिलाएं निडरता से राजनीति में भाग के रही है और अपनी जगह स्थापित कर रही है। महिलाएं पुरुषों से ज्यादा अपना कर्तव्य निभा रही है। भारत के संविधान में भी जेंडर समानता को लेकर संविधान के भाग 3 के अनुच्छेद 14-18 में लिंग, जाति, रंग-रूप, समता व समानता और स्वतंत्रता व जाति धर्म के आधार पर जीने का अधिकार देता है। लेकिन फिर भी राजनीति में महिलाओं को आने से रोका जाता है उन्हें पुरुषों से कम आंका जाता है। इसलिए महिलाएं राजनीति में कदम रखने से कतराती है। राजनीति में महिलाएं जाना तो चाहती है  उनका प्रतिनिधित्व न के बराबर माना जाता है।<br />
पंचायती राज व्यवस्था के कारण राजनीति में महिलाओं को आगे लाने के लिए सरकार द्वारा 33% आरक्षण प्रदान किया गया। आरक्षण मिलने पर महिलाओं को समाज में और राजनीति में आगे बढ़ने का मौका मिला है जिससे महिलाओं को भी हिम्मत मिली है। वर्तमान में महिलाएं वार्ड पार्षद, पंचायत स्तर पर चुनाव लड़ रही है। इससे महिलाएं राजनीति में आई तो है पर वहाँ आम तौर पर यह देखा गया है महिलाओं के स्थान पर पुरुष ही अपनी राजनीति चमका रहे है | ज्यादातर पंचायत चुनाव या बड़ी-बड़ी पार्टियों में देखा जाता है कि यदि कोई भी महिला चुनाव में खड़ी होती है और उसके विरुद्ध दूसरी पार्टी महिला के चरित्र पर आरोप-प्रत्यारोप लगाना शुरू कर देते है | वहीं चुनाव जीतने पर इनका उद्देश्य समाज का कल्याण नहीं अपितु खुद ऊंचा दिखाना रह गया है और चुनाव जीतने के बाद भी महिलाओं की सारी जिम्मेदारी पुरुष अपने हाथो में ले लेते है जहां महिला की आवश्यकता होती है केवल वहीं उनको बुलाया जाता है। दूसरी तरफ राजनीति में वहीं महिलाए ज्यादा दिखती है जिनका आर्थिक स्तर अच्छा हो या जिनका परिवार किसी राजनीति सत्ता से संबंध रखता हो | उन महिलाओं को ज्यादा मौका दिया जाता है जो राज घरानों से सम्बंधित हो। और यही कारण है कि अन्य परिवारों की महिलाएं राजनीति को लेकर जागरूक नहीं हो पा रही और जो जागरूक है वह आगे नहीं जा पा रही है। समाज इस बात को स्वीकार नहीं करता है कि नारी है तो कल है। भारत वर्तमान में तेजी से सशक्त अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढ़ रहा है जिसमें लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की चुनौती है। चुनावी राजनीति में महिलाओं के लिए सरकार ने कई कदम उठाए है जैसे- महिलाओं के लिए शिक्षा में बढ़ोतरी, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना व उनके आत्मविश्वास को बढ़ावा देना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, लैंगिक समानता, देश के लिए सेवा कि भावना |</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-about-malerkotla/8427/">मालेरकोटला पर विवाद ? क्या कारण है ?</a></span></strong></span></p>
<p>भारतीय संसद में महिलाओं का हिस्सा लगभग 11% है जबकि बेल्जियम, मेक्सिको जैसे देशों में 50 % व आस्ट्रेलिया, जर्मनी जैसे देखो में महिलाओं की भागीदारी 40 % है। देखा जाए तो हर स्तर पर महिलाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है सरकार द्वारा भी योजनाएं चलाई जा रही है हर क्षेत्र  में  प्रोत्साहन  दिया जा रहा है चाहे वह शिक्षा का हो या डॉक्टर या इंजीनियर लेकिन राजनीति में उन्हें आगे बढ़ने से रोका जाता है व असुरक्षित महसूस कराया जाता रहा है। लेकिन फिर भी महिलाएं पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ती जा रही है।<br />
<span style="color: #008000;"><strong>राजनीति में नारीवाद:</strong> </span><strong>सरोजनी नायडू</strong> भारत की कोकिला और महान स्वतंत्रता सेनानी एक प्रबल, शक्तिशाली नेत्री के रूप रही है  गोपाल कृष्ण गोखले और गांधीजी जैसे महान नेताओ के साथ उनका नाम है वह एक नारीवादी महिला के रूप में जानी जाती है। दूसरी राजनेता भारतीय मूल की महिला <strong>कमला हैरिस</strong> जो हाल ही में जनवरी 2021 में राष्ट्रपति (जो  बाइडेन )के साथ उपराष्ट्रपति बनीं, उन्होंने 2020 के चुनाव में,  राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रम्प) और उपराष्ट्रपति माइक पेंस को हराया। वह संयुक्त राज्य अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति, अमेरिकी इतिहास में सबसे अधिक रैंकिंग वाली महिला निर्वाचित अधिकारी, पहली अफ्रीकी-अमेरिकी उपराष्ट्रपति और पहली एशियाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति हैं। वहीं तीसरी राजनेता और दबंग महिला पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बैनर्जी जो आज भी सत्ता में अपने दम पर अपनी जगह बनाए हुए और हजारों विकट परिस्थितियों के बावजूद भी विधानसभा चुनाव जीत जाती है। ऐसी बहुत सी महिलाएं है जो अपने दम पर राजनीति में रह रही है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE:</strong><span style="color: #0000ff;"> </span></span><strong><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-nidhi-prajapati-on-stress-management-of-students/8481/">तनाव से मुक्ति, जीवन में तंदरुस्ती</a></span></strong></p>
<p>लेकिन राजनीति में समाज हित के बारे में बहुत कम राजनेता सोचते है व लोगों के हित की जगह अपने लिए काम करते है। और जो नेता केवल राजनीति को एक व्यवसाय के रूप में देखते है वहीं महिलाओं को राजनीति में कदम नहीं रखने देते है। राजनीति में महिलाओं के आर्थिक नीति को जोड़कर देखा जाता है। वर्तमान में भारत &#8220;सतत् विकास लक्ष्य 2030&#8221; की प्राप्ति के लिए अग्रसर है। इस लक्ष्य में सर्वप्रथम महिलाओं की सहभागिता न केवल चुनावी क्षेत्र में अपितु उन क्षेत्रों में सुनिश्चित करने की आवश्यकता है जो महिलाओं को विकास की ओर ले जाएगी। महिलायें हमेशा कहती हैं, ‘ हम वो सब कर सकते हैं जो पुरुष कर सकते हैं। लेकिन क्या कभी किसी पुरुष ने कहा है कि ‘हम वो सब कर सकते हैं जो एक औरत कर सकती है&#8230;&#8230;&#8230;..कभी नहीं |<br />
संक्षिप्त रूप में देखा जाये तो महिलाओं को हर क्षेत्र में सम्मान देना, उनकी बात का आदर करना व हर जगह प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है चाहिए चाहे वह शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीति का क्षेत्र हो या परिवार में ही उनकी भागेदारी को महत्व देना हो । परन्तु आज भी समाज में कई परिवारों में महिलाओ को शिक्षा से वंचित रखा जाता है जो भी महिलाओं के विकास में एक बड़ी बांधा है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को लेकर लोगों की सोच पीछे है किन्तु यदि महिलाओं को शिक्षा व राजनीति के क्षेत्र में आगे बढ़ने दिया जाय और परिवार व समाज की सोच में बदलाव लाए तो महिलाए भी अपना कर्तव्य पूरी निष्ठा के साथ निभा सकती है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>लेखिका:</strong> </span><span style="color: #0000ff;"><strong>कीर्ति शर्मा </strong></span><br />
<span style="color: #0000ff;"><strong>छात्राध्यापिका </strong></span></p>
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