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	<title>Shradhanjali Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>Shradhanjali Archives - TIS Media</title>
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		<title>राजू श्रीवास्‍तव का निधन, 42 दिनों से जिंदगी की जंग लड़ रहे थे सबके चहेते &#8216;गजोधर भैया&#8217;</title>
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		<pubDate>Wed, 21 Sep 2022 07:08:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>10 अगस्त से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे राजू, निधन से देश भर में शोक की लहर दौड़ गई है 58 साल की उम्र में ली आखिरी सांस, ट्रेडमिल पर दौड़ते वक्‍त पर पड़ा था दिल का दौरा TISMedia@NewDelhi कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनका निधन हो गया है। 58 &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/top-stories/comedian-raju-srivastava-passes-away/12264/">राजू श्रीवास्‍तव का निधन, 42 दिनों से जिंदगी की जंग लड़ रहे थे सबके चहेते &#8216;गजोधर भैया&#8217;</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>10 अगस्त से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे राजू, निधन से देश भर में शोक की लहर दौड़ गई है</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>58 साल की उम्र में ली आखिरी सांस, ट्रेडमिल पर दौड़ते वक्&#x200d;त पर पड़ा था दिल का दौरा</strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@NewDelhi</strong> </span>कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनका निधन हो गया है। 58 वर्षीय राजू श्रीवास्तव 10 अगस्त से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे। राजू श्रीवास्तव पहले दिन से ही बेहोश और लगभग कोमा की स्थिति में थे।</p>
<p>देश के सबसे मशहूर और पॉपुलर कॉमेडियन राजू श्रीवास्&#x200d;तव का निधन हो गया है। दिल्&#x200d;ली के एम्&#x200d;स अस्&#x200d;पताल में 42 दिनों से भर्ती 58 वर्षीय राजू श्रीवास्तव ने 21 सितंबर को आख&#x200d;िरी सांस ली। उन्&#x200d;हें 10 अगस्त की सुबह सुबह ट्रेडमिल पर दौड़ते वक्&#x200d;त दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद से ही वह एम्स में वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे। पहले ही दिन से राजू बेहोश थे। उनका शरीर रेस्&#x200d;पॉन्&#x200d;ड नहीं कर रहा था। हालांकि, दो दिन बाद उनकी हालत थोड़ी बेहतर हुई थी, लेकिन बाद में डॉक्&#x200d;टरों ने परिवार को जवाब दे दिया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/delhi/delhi-road-accident-four-people-killed-in-road-accident-seemapuri/12261/">Delhi Road Accident: ट्रक ने फुटपाथ पर सो रहे 6 लोगों को रौंदा, 4 की मौत</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कोमा जैसी स्थिति में थे राजू </strong></span><br />
डॉक्टर्स ने राजू श्रीवास्तव को बचाने और होश में लाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनके ब्रेन में ऑक्&#x200d;सीजन नहीं पहुंच रही थी। वह लगातार बेहोश थे। एकदम कोमा जैसी स्थिति थी। राजू श्रीवास्तव के हार्ट ने भी काम करना बंद कर दिया था। राजू श्रीवास्&#x200d;तव की बेहतरी के लिए इंडस्&#x200d;ट्री के तमाम लोग और करोड़ों फैंस लगातार दुआ कर रहे थे, लेकिन अफसोस कि सबको हंसाने वाले गजोधर भैया, अपने पीछे आंसुओं का सैलाब छोड़कर चले गए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/congress-president-election-update/12250/">Congress President: राहुल गांधी, अशोक गहलोत या शशि थरुर&#8230; किसके हाथ में होगी कांग्रेस की पतवार?</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">ब्रेन डेड घोषित, दिमाग में नहीं पहुंची ऑक्सीजन</span></strong><br />
राजू श्रीवास्तव को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया और बताया कि उनका हार्ट भी सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, राजू श्रीवास्तव के सिर के ऊपरी हिस्से में ऑक्सीजन में भी नहीं पहुंच रही थी। राजू श्रीवास्तव के शरीर का निचला हिस्सा काम कर रहा था और इसलिए उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट भी दिया जा रहा था। लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। डॉक्टरों ने राजू श्रीवास्तव के परिवार को जवाब दे दिया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-dhariwal-and-gunjal-made-videos-against-each-other/12244/">टूटी सड़काें पर दौड़ी सियासत, कोटा थर्मल की राख तक पहुंची जुबानी जंग</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">बेहोशी की हालत में अस्&#x200d;पताल लाए गए थे राजू</span></strong><br />
राजू श्रीवास्तव को हार्ट अटैक पड़ने के बाद जब 10 अगस्त को एम्स लाया गया तो उनकी हालत गंभीर थी और वह होश में नहीं थे। बताया जाता है कि सीपीआर की मदद से उन्हें किसी तरह होश में लाया गया। इसके बाद राजू श्रीवास्तव की एंजियोप्लास्टी की गई और उनकी धमनियों (आर्टरीज) में 2 स्टेंट भी डाले गए। हालांकि उसके बाद भी राजू की तबीयत में सुधार नहीं आया और वह बेहोश ही रहे। इसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर ले लिया गया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/cm-gehlot-gives-foreign-travel-package-for-mlas-rajasthan-after-iphone-tablet-and-flat/12232/">सरकारी पैसे पर फिर मौज काटने की तैयारी में राजस्थान के विधायक</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">एंजियोप्लास्टी के बाद भी नहीं आया सुधार</span></strong><br />
इससे पहले राजू की हालत के बारे में उनकी बेटी ने भी बताया था कि उनके पिता की हालत में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। वेंटिलेटर पर रहते हुए राजू का शरीर दवा और इलाज को रिस्पॉन्ड नहीं कर रहा था। इसके बाद राजू के कजिन अशोक श्रीवास्तव ने नवभारत टाइम्स को बताया था कि अभी भी राजू श्रीवास्तव की हालत नाजुक बनी हुई है। उन्होंने कहा था, ‘डॉक्टर्स ने तो अपना काम कर दिया है। उन्होंने एंजियोप्लास्टी कर दिया है। लगातार उनकी ट्रीटमेंट चालू है।’ वहीं हाल ही राजू श्रीवास्तव के बिजनस मैनेजर ने बताया था कि कॉमेडियन के शरीर में हरकत हो रही है। उनमें सुधार नजर आ रहा है, पर वह अभी भी वेंटिलेटर पर आईसीयू में हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://tismedia.in/cover-stories/unicef-report-on-girls-education-regarding-mathematics-studies/12253/">लड़कियों की तुलना में लड़कों में गणित में महारथ हासिल करने की सम्भावना 1.3 गुना ज्यादा</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">फिल्मों में भी किया था काम</span></strong><br />
राजू श्रीवास्तव के करियर के बात करें तो कानपुर में जन्मे यह कॉमेडियन अपनी कॉमेडी के कारण पूरी दुनिया में मशहूर हैं। फिल्मों में राजू ने सलमान खान की फिल्म &#8216;मैंने प्यार किया&#8217; से डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने &#8216;बाजीगर&#8217;, &#8216;आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया&#8217;, &#8216;वाह तेरा क्या कहना&#8217;, &#8216;मैं प्रेम की दीवानी हूं&#8217;, &#8216;बॉम्बे टू गोवा&#8217; और &#8216;टॉइलेट एक प्रेम कथा&#8217; जैसी फिल्मों में काम किया था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/ghost-faculty-in-vmou-kota/12228/">VMOU पर “भुतहा शिक्षकों” का साया</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">टीवी ने दिलाई असली पहचान</span></strong><br />
राजू को असली पहचान कॉमेडी रिएलिटी शो &#8216;द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज&#8217; से मिली थी। इस शो में राजू ने एक काल्पनिक किरदार गजोधर बनकर खूब दर्शकों का मनोरंजन किया था। इसी टीवी सीरीज के अलावा राजू ने मशहूर टीवी सीरियलों &#8216;देख भाई देख&#8217;, &#8216;शक्तिमान&#8217; और &#8216;अदालत&#8217; में भी कुछ महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं।</p>
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		<title>राजीव गांधी: पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देकर की थी सत्ता के विकेंद्रीकरण की कोशिश</title>
		<link>https://tismedia.in/editorial/article/rajiv-gandhi-had-dreamed-of-decentralization-of-power-by-giving-constitutional-status-to-panchayati-raj-institutions/12080/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=rajiv-gandhi-had-dreamed-of-decentralization-of-power-by-giving-constitutional-status-to-panchayati-raj-institutions</link>
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		<pubDate>Sat, 20 Aug 2022 08:01:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>यदि राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) जीवित होते तो आज 78 वर्ष के होते। वह कोई साधारण नेता नहीं थे। उन्हें एक राष्ट्र के रूप में हमारी चुनौतियों और अवसरों को पहचानने की क्षमता का आशीर्वाद प्राप्त था। बीते दिनों देश ने पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मु के चुने जाने का जश्न &#8230;</p>
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			<div class="author-avatar">
				<img decoding="async" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2022/08/bhupendra-singh-hudda.jpg" alt="भूपेंद्र सिंह हुड्डा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री " class="author-avatar-img" width="111" height="111" />
			</div>
			<div class="author-info">
				<h4>भूपेंद्र सिंह हुड्डा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री </h4>राजीव गांधी पंचायती राज और नगर पालिका विधेयक के सूत्रधार थे। उन्होंने लोक अदालतों के माध्यम से त्वरित न्याय दिलाने के प्रयासों को भी प्रमुखता से बढ़ावा दिया। पंचायती राज संस्थाओं के जरिये लोगों को सशक्त बनाने का काम आसान नहीं था फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें शब्दांजलि&#8230;।
			</div>
		</div>
	
<p>यदि राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) जीवित होते तो आज 78 वर्ष के होते। वह कोई साधारण नेता नहीं थे। उन्हें एक राष्ट्र के रूप में हमारी चुनौतियों और अवसरों को पहचानने की क्षमता का आशीर्वाद प्राप्त था। बीते दिनों देश ने पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मु के चुने जाने का जश्न मनाया। इसका श्रेय राजीव गांधी की दूरदर्शिता को जाता है। उन्होंने ही पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देकर सत्ता के विकेंद्रीकरण का सपना देखा था। द्रौपदी मुर्मु ने रायरंगपुर (ओडिशा) से पार्षद के रूप में ही अपनी राजनीतिक यात्रा आरंभ की थी। यह सीट आदिवासी महिलाओं के लिए आरक्षित थी। उस शुरुआत से ही आज वह देश के सर्वोच्च पद पर पहुंची हैं। राजीव जी यह मानते थे कि सरकार में सहभागिता से अथाह ऊर्जा उत्पन्न होगी और यह समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों की स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव करेगी।</p>
<p>राजीव गांधी पंचायती राज और नगर पालिका विधेयक के सूत्रधार थे। उन्होंने लोक अदालतों के माध्यम से त्वरित न्याय दिलाने के प्रयासों को भी प्रमुखता से बढ़ावा दिया। पंचायती राज संस्थाओं के जरिये लोगों को सशक्त बनाने का काम आसान नहीं था, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। वह भ्रष्टाचार के दीमक को भली-भांति पहचानते थे। इसी कारण उन्होंने नि:संकोच कहा था कि सरकार द्वारा खर्च प्रत्येक रुपये में से केवल 15 पैसा ही लाभार्थी तक पहुंचता है। उन्होंने स्थानीय स्वशासन के लिए 1989 में लोकसभा में 64वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया।</p>
<p>जमीनी स्तर पर लोगों को सशक्त बनाने का दृढ़ संकल्प लेकर राजीव गांधी ने 1991 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने का वादा किया। बतौर लोकसभा सदस्य मैं उस पल का साक्षी हूं, जब 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के लागू होने पर राजीव जी का सपना पूरा हुआ, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पंचायतों, त्रि-स्तरीय पंचायतों और नगर पालिकाओं को पर्याप्त शक्तियां, वित्तीय संसाधन और महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का फैसला लिया गया।</p>
<p>राजीव जी के राजनीतिक विरोधी भी उनके आधुनिक एवं नए सोच के कायल थे। बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने लगभग 38 साल पहले हमारे जीवन में प्रौद्योगिकी की बड़ी भूमिका की परिकल्पना कर ली थी। वह उच्च उत्पादकता, पारदर्शिता और सामाजिक न्याय की दिशा में तेजी से प्रगति के लिए तकनीक के उन्नयन की जरूरत को पहले ही समझ गए थे।</p>
<p>&#8216;विज्ञान गांव की ओर&#8217; के जरिये उन्होंने न केवल कृषि, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी अपनाने की पहल की। एक प्रभावी और उत्तरदायी प्रशासनिक तंत्र स्थापित करने का दृढ़ संकल्प लिए राजीव जी कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग को प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन लेकर आए, जो प्रशासनिक दक्षता की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण कदम था। राजनीतिक पतन पर प्रभावी रोक के लिए राजीव जी 1985 में 52वां संविधान संशोधन अधिनियम लेकर आए, जिसे दलबदल विरोधी कानून के रूप में जाना जाता है।</p>
<p>युवा शक्ति में भरोसा करने वाले राजीव जी ने मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष कर लोकतंत्र सशक्त बनाने का काम किया। उन्होंने इस सच्चाई को हमेशा दोहराया कि युवाओं को समानता, न्याय, बंधुत्व और स्वतंत्रता के सिद्धांत पर एक सामाजिक व्यवस्था बनाने के लिए सशक्त, शिक्षित और कौशल से युक्त होना चाहिए। वह भाईचारे, सहिष्णुता और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक तालमेल की जरूरत को लेकर भी गंभीर थे। यह गंभीरता उनकी सरकार की शिक्षा नीति में दिखाई देती थी।</p>
<p>इसी प्रकार, उन्होंने सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करने और उसे बढ़ावा देने के लिए सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किए। उन्होंने उच्च शिक्षा कार्यक्रमों के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए 1985 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की स्थापना की। जवाहर नवोदय विद्यालयों के माध्यम से सामाजिक न्याय और संस्कृति के साथ-साथ उत्कृष्ट और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए मुफ्त आवासीय विद्यालय के जरिये बच्चों की शिक्षा में उनके महत्वपूर्ण योगदान को कोई कैसे भूल सकता है? मैं गर्व से यह कहना चाहता हूं कि देश का पहला जवाहर नवोदय विद्यालय मेरे संसदीय क्षेत्र में झज्जर जिले के एक गांव में खोला गया।</p>
<p>यह बड़े सौभाग्य की बात है कि मैंने राजीव जी के बेहद करीब रहकर काम किया। किसी को भी मंत्रमुग्ध कर देने वाले व्यक्तित्व, आकर्षण, साहस, आत्मविश्वास, अंदाज, बुद्धि, धैर्य, गरिमा, शालीनता से संपन्न और सबको साथ लेकर चलने वाले राजीव जी सहमति और समाधान, भागीदारी और सूझबूझ के जरिये सार्वजनिक जीवन में राजनीति, अर्थव्यवस्था और नैतिकता के क्षेत्र में बदलाव के प्रतीक बने। शांति में उनका अटूट विश्वास था और उन्होंने पंजाब, असम, मिजोरम, नगालैंड और कश्मीर में शांति एवं लोकतंत्र बहाली के लिए आंदोलन और विद्रोह खत्म कराने के लिए कड़ी मेहनत की। एक भारत-श्रेष्ठ भारत उनकी ही परिकल्पना थी।</p>
<p>आजादी के अमृत काल में देश राजीव जी की दूरदर्शिता और नेतृत्व के अतुलनीय योगदान को कभी नहीं भुला सकता। उन्होंने सुशासित, शक्तिशाली और जीवंत राष्ट्र की बुनियाद रखी। राजीव जी दूरगामी सोच रखने वाले ऐसे राजनेता थे, जिनके विचार और अवधारणाएं आज भी वैश्विक महत्व रखती हैं। उनके आदर्शों पर चलकर हम अपने सपनों के भारत का निर्माण कर सकते हैं। एक खुशहाल, स्वस्थ और समावेशी समृद्ध भारत की दिशा में बढ़ा हमारा हर कदम राजीव गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>(लेखक: भूपेंद्र सिंह हुड्डा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री हैं)</strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/rajiv-gandhi-had-dreamed-of-decentralization-of-power-by-giving-constitutional-status-to-panchayati-raj-institutions/12080/">राजीव गांधी: पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देकर की थी सत्ता के विकेंद्रीकरण की कोशिश</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला का निधन, एक इशारे पर थम जाता था पूरा राजस्थान</title>
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		<pubDate>Thu, 31 Mar 2022 05:28:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>अंग्रेजी से प्रोफेसर रहे बैंसला पिता से प्रेरित होकर फौज में बने थे सिपाही, कर्नल तक की रैंक हासिल की  पाकिस्तान से जंग में लहराया था तिरंगा, युद्ध बंदी भी रहे थे बैंसला, राजनीति में सक्रियता के बाद ज्वाइन की थी भाजपा   cialis cijena TISMedia@Jaipur राजस्थान के दिग्गज गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला का बुधवार &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kirori-singh-bainsla-passes-away/11854/">गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला का निधन, एक इशारे पर थम जाता था पूरा राजस्थान</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>अंग्रेजी से प्रोफेसर रहे बैंसला पिता से प्रेरित होकर फौज में बने थे सिपाही, कर्नल तक की रैंक हासिल की </strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>पाकिस्तान से जंग में लहराया था तिरंगा, युद्ध बंदी भी रहे थे बैंसला, राजनीति में सक्रियता के बाद ज्वाइन की थी भाजपा  </strong></span> <a style="border-color: transparent; color: #414141; text-decoration: none; font-weight: normal" href ="https://ed-hrvatski.com/genericka-cialis/">cialis cijena</a></li>
</ul>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Jaipur</span></strong> राजस्थान के दिग्गज गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला का बुधवार रात (30 मार्च) को निधन हो गया। बैंसला काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका लंबे समय से अस्पताल में इलाज चल रहा था। राजस्थान में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रमुख बैंसला का इतना ज्यादा दबदबा था कि उनके एक इशारे पर पूरा राज्य थम जाता था। उनके नेतृत्व में राजस्थान में गुर्जरों ने तीन बड़े आंदोलन किए थे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/acb-caught-executive-engineer-of-pwd-kota-electrical-division-taking-bribe/11840/">Kota ACB Trap: कोटा एसीबी ने PWD के XEN को 18 हजार रुपए की घूस लेते रंगे हाथ दबोचा</a></strong></p>
<p>बैंसला का जन्म राजस्थान के करौली जिले के मुंडिया गांव में हुआ था। वह गुर्जर समुदाय से ताल्लुक रखते थे और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर शिक्षक की थी। बैंसला ने भरतपुर और जयपुर से पढ़ाई की। इसके बाद वह दो साल तक अंग्रेजी के प्रोफेसर रहे।उनके पिता फौज में थे, जिसके चलते वह भी सेना में भर्ती हो गए और राजपूताना राइफल्स के सिपाही बन गए। उन्होंने 1962 के दौरान भारत-चीन और 1965 के वक्त भारत-पाकिस्तान युद्ध में बहादुरी दिखाई। बैंसला को उनके वरिष्ठ &#8216;जिब्राल्टर का चट्टान&#8217; और उनके जूनियर साथी &#8216;इंडियन रैंबो&#8217; कहकर बुलाते थे। सिपाही से सेना में अपना सफर शुरू करने वाले बैंसला कर्नल रैंक तक पहुंचे थे। बैंसला ने 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी हिस्सा लिया और युद्धबंदी भी रहे। 1991 में भारतीय सेना से रिटायर होने के बाद वह स्थानीय राजनीति में सक्रिय हो गए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/congress-leaders-beat-up-the-employee-of-kota-electricity-supply-company-kedl/11829/">मंत्री के चहेतों की गुंडई! बिजली कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव को पीटा, चेन लूटी, मारने की धमकी दी</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>दो बार आए कोरोना की चपेट में </strong></span><br />
किरोड़ी सिंह बैंसला राजस्थान में गुर्जर आंदोलन के काफी बड़ा चेहरा थे। हालांकि, बाद में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। 2007 के दौरान राजस्थान में गुर्जरों को आरक्षण दिलाने के लिए उनके नेतृत्व में बड़ा आंदोलन किया गया। इसके अलावा बैंसला गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रमुख भी थे। बुधवार रात उन्होंने मणिपाल अस्पताल में आखिरी सांस ली। बता दें कि वह दो बार कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके थे। इसके अलावा पिछले साल नवंबर के दौरान भी सांस लेने में दिक्कत हुई थी, जिसके चलते उन्हें जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/delhi/sensational-allegations-of-sisodia-bjp-wants-to-murder-arvind-kejriwal/11844/">सिसोदिया का सनसनीखेज आरोप: अरविंद केजरीवाल का मर्डर करना चाहती है भाजपा!</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>&#8216;हमारे गुर्जर गांधी चले गए&#8217;</strong></span><br />
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बैंसला के निधन पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने बैंसला को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि &#8220;सामाजिक आंदोलन के प्रखर नेतृत्वकर्ता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला जी के निधन पर शोक व्यक्त करता हूँ। सामाजिक अधिकारों के लिए उन्होंने आजीवन संघर्ष किया। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। परिजनों व प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं।&#8221; पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी बैंसला के निधन पर शोक जताया है। वहीं केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने गुर्जर नेता के निधन पर शोक जताते हुए ट्वीट किया,  &#8216;हमारे गुर्जर गांधी चले गए, इससे बड़ा दुख गुर्जर समाज के लिए हो नहीं सकता।&#8217;</p>
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		<title>श्रद्धांजलिः BSF की नौकरी छोड़ ‘भीम’ बने प्रवीण कुमार ने एशियन गेम्स में जीता था गोल्ड</title>
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		<pubDate>Tue, 08 Feb 2022 09:34:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota अभी तक देशवासी स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के निधन की खबर से उबरे भी नहीं थे कि फिल्मी जगत से भी एक बुरी खबर आ गई। कालजयी धारावाहिक महाभारत में भीम के किरदार को जीवंत करने वाले 74 वर्षीय प्रवीण कुमार सोबती का निधन हो गया है। प्रवीण कुमार पंजाब के रहने &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> अभी तक देशवासी स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के निधन की खबर से उबरे भी नहीं थे कि फिल्मी जगत से भी एक बुरी खबर आ गई। कालजयी धारावाहिक महाभारत में भीम के किरदार को जीवंत करने वाले 74 वर्षीय प्रवीण कुमार सोबती का निधन हो गया है।</p>
<p><iframe title="#blueshawls vs #saffronshawls Hijab की वजह से हुआ  #ABVP कार्यकर्ताओं और #दलित छात्रों के बीच टकराव" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/_P2vNSSo20I?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>प्रवीण कुमार पंजाब के रहने वाले थे। ऐक्टिंग और स्पॉर्ट्स के अलावा उन्होंने राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाई। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बीएसएफ में बतौर सैनिक की थी। 20 साल की उम्र में प्रवीण कुमार ने बीएसएफ जॉइन की और यहीं पर अफसरों की नजर उनकी खेल प्रतिभा पर पड़ी। अंतरराष्ट्रीय एथलीट रहे &#8220;भीम&#8221; 1960 और 1970 के दशक में भारतीय एथलेटिक्स के प्रमुख सितारे थे। उन्होंने कई वर्षों तक भारतीय हथौड़ा और चक्का फेंक खेलों पर अपना दबदबा कायम रखा। साल 1966 और 1970 के एशियाई खेलों में चक्का फेंक में स्वर्ण पदक जीते। एशियाई खेलों का रिकॉर्ड 56.76 मीटर था। वह 1966 में किंग्स्टन में हुए राष्ट्रमंडल खेलों और 1974 में तेहरान में हुए एशियाई खेलों में रजत पदक विजेता थे। उन्होंने 1968 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक और 1972 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भाग लिया। साल 1967 में प्रवीण कुमार को &#8216;अर्जुन अवॉर्ड&#8217; से नवाजा गया था।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/corporate-activism-gone-wrong-after-hyundai-kia-pizza-hut-and-kfc-in-trouble-over-pro-pakistani-post/11523/">जहर उगल रहीं पाकिस्तान परस्त Hyundai, KIA, Pizza Hut और KFC, भारतीयों ने किया #Boycott</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>1982 में फिल्मों में एंट्री, 50 से ज्यादा फिल्में</strong></span><br />
प्रवीण कुमार ने ऐक्टिंग की दुनिया में 1982 में आई फिल्म &#8216;रक्षा&#8217; से एंट्री की थी। यह जेम्स बॉन्ड स्टाइल की फिल्म थी। जिसमें जितेंद्र लीड रोल में थे। इसके बाद वह जितेंद्र की ही फिल्म &#8216;मेरी आवाज सुनो&#8217; में नजर आए। प्रवीण कुमार ने 50 से ज्यादा फिल्में कीं, लेकिन उन्हें स्टारडम और पॉप्युलैरिटी &#8216;महाभारत&#8217; के &#8216;भीम&#8217; बनकर मिली।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/reet-level-2-exam-cancelled-will-be-held-again-in-two-phases/11518/">REET का लेवल-2 एग्जाम रद्द: अब दो चरणों में फिर से होगी परीक्षा, देखिए पूरा VIDEO</a></strong></span></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">बायचांस मिली थी पहली फिल्म </span></strong><br />
एक साक्षात्कार में प्रवीण कुमार ने बताया था कि उन्हें ऐक्टिंग का मौका बाय चांस मिला था। वह तो अपने गेम्स की तैयारी कर रहे थे। प्रवीण ने कहा था, &#8216;यह मात्र एक संयोग था कि एक फिल्ममेकर ने मुझे फिल्म का ऑफर दिया। मैंने सोचा कि मुझे यह स्वीकार कर लेना चाहिए क्योंकि लाइमलाइट में रहने का एक यही मौका है। इस फिल्म को करने के बाद मेरे एक दोस्त ने बताया कि बीआर चोपड़ा &#8216;महाभारत&#8217; बना रहे हैं। उसमें भीम के कैरेक्टर के लिए उन्हें हीरो की तलाश है। बस मुझे यह मौका मिल गया।&#8217; भीम के रोल के बाद प्रवीण कुमार को हिंदी और अन्य रीजनल फिल्मों के ढेरों ऑफर आने लगे, लेकिन उन्होंने राजनीति में करियर बनाने के चक्कर में कम फिल्में करनी शुरू कर दीं। 2013 में उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, पर हार गए। 2014 में वह बीजेपी में शामिल हो गए थे।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/lata-mangeshkar-cremated-with-state-honors/11482/">अनंत यात्रा पर स्वर कोकिला: राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, भाई और भतीजे ने दी मुखाग्नि</a></strong></span></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">लंबे वक्त से थे बीमार</span></strong><br />
पिछले साल प्रवीण कुमार तब चर्चा में आए जब दिसंबर 2021 में ऐसी खबरें आईं कि वह पाई-पाई को मोहताज हो गए हैं। लेकिन प्रवीण ने इन खबरों को बकवास बताया। हालांकि उन्होंने यह जरूर बताया था कि वह काफी समय से घर में ही हैं। तबीयत ठीक नहीं रहती है और खाने में भी कई तरह के परहेज हैं। प्रवीण कुमार का निधन हार्ट अटैक के कारण हुआ। उनके एक रिश्तेदार ने बताया कि प्रवीण को बेचैनी हो रही थी, इसलिए डॉक्टर को घर बुलाया गया। लेकिन रात 10 से 10:30 के बीच में उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ और वह चल बसे। प्रवीण के परिवार में उनकी पत्नी , एक बेटी, दो छोटे भाई और एक बहन बची हैं।</p>
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		<title>श्रद्धांजलिः आपके पास गुनगुनाने के लिए लता जी की आवाज़ है</title>
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		<pubDate>Mon, 07 Feb 2022 06:30:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#8211; विवेक कुमार मिश्र स्वर कोकिला , भारत रत्न , पद्मश्री लता मंगेशकर ( 28 सितंबर 1929 &#8211; 06 फरवरी 2022) नहीं रही । यह एक जीवन सत्य और जीवन क्रम है जहां जीवन को पूरा जीकर एक अनंत में चला जाना है । लता जी जाते हुए भी हम सबके भीतर नये सिरे से &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>&#8211; विवेक कुमार मिश्र</strong></span></div>
<div dir="auto">स्वर कोकिला , भारत रत्न , पद्मश्री लता मंगेशकर ( 28 सितंबर 1929 &#8211; 06 फरवरी 2022) नहीं रही । यह एक जीवन सत्य और जीवन क्रम है जहां जीवन को पूरा जीकर एक अनंत में चला जाना है । लता जी जाते हुए भी हम सबके भीतर नये सिरे से बस जाती हैं । एक ऐसी जादुई दुनिया , एक ऐसी आवाज जो कहीं नहीं जाती यहीं हम सबके साथ हम सबकी होकर हमारे भीतर ही रहती है । जीवन का कोई ऐसा भाव और रंग नहीं जिस पर उनकी जादुई आवाज़ न हो , हर रंग के साथ , खनकती आवाज के साथ लता जी की आवाज़ है । न जाने कितने भाव और जीवन दशाओं को अपनी आवाज़ देकर उन्होंने जीने का जरिया लोगों को दिया।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">जिस भी स्थिति में हों आपके पास गुनगुनाने के लिए लता जी की आवाज़ है। इस आवाज में मिठास , मन को सुकून , शांति और सादगी के साथ जीने का संदेश छिपा है । उनका गायन हमारे मन मस्तिष्क पर एक साथ चलता है । सब उस गूंज और ध्वनि को जीने लगते हैं । जिसे आवाज लता जी ने दिया । भला कोई भी लता जी की आवाज़ को सुने बिना कैसे रह सकता । उनके गायन में इस बात का कितना गहरा वोध है कि तुम मुझे भुला नहीं पाओगे । सच में कोई भी लता की आवाज़ को भुला नहीं सकता । ध्वनि / आवाज आत्मा की तरह साथ साथ चलते रहते हैं । आवाज में मनुष्य की सारी सत्ता होती है । कहना न होगा कि आवाज ही लता जी की सत्ता थी , है और रहेगी और यह आवाज सबके भीतर से उठती है । उनकी आवाज में पूरा देश ही गूंजता रहता था ।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">लोगों के मन , भाव और जीवन को आवाज में साधना ही सबसे बड़ी कला है जिसे लताजी ने शुरू से ही साध लिया था । <b>&#8216; तुम मुझे यूं भुला न पाओगे / जब कभी भी सुनोगे मेरे गीत / संग &#8211; संग तुम भी गुनगुनाओगे । &#8216;</b> संग संग पूरा देश ही गुनगुना रहा है । हर किसी की जुबान पर लता की आवाज़ है । आवाज जो चलते ही बोल उठती , मन पर छा जाती और इस आवाज को सुनते सुनते ही आदमी जिंदगी के मायने समझने लगता है । लता जी का जाना नये सिरे से हमें जादुई आवाज़ से जोड़ देने जैसा है । जो जादुई दुनिया उनके गीत गायन के साथ हमारे साथ चल रहे थे वे ऐसे ही चलते रहेंगे । ये सुर और चमकेंगे , महकेंगे और जिंदगी की धुन बन हमारे साथ गुंजते रहेंगे । टीवी / मोबाइल / रेडियो / फेसबुक /वाट्सएप / स्टेटस कोई ऐसी जगह नहीं है जहां आज सुर संगीत की साम्राज्ञी लता जी की ही आवाज न आ रही हो । सिर चढ़ कर यह आवाज देश के मन पर बोलती रही है। सुर संगीत में पूरा देश ही खो गया।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">बस एक ही आवाज़ लोगों की जुबान पर चढ़ी रही । अरे  <a href ="https://ed-italia.com/comprare-cialis-generico-online-italia/" style="text-decoration: none; border-color: transparent; font-weight: normal; color: #333">report completo</a>! लता जी गा रही है , बस वहीं कान लगाकर बैठ जाइए । एक एक शब्द इस तरह कान में आते कि कोई रस अमृत घोलकर सुना रहा है । यह आवाज मन पर छा जाने वाली आवाज थी । न जाने कितनी पीढ़ियां इस आवाज के साथ जीने का ढंग और जज्बा पा गई । जीवन का कोई ऐसा रंग नहीं जिस पर लता जी ने न गाया हो । आवाज में ही क्लासिक के पूरे तत्व मौजूद रहे हैं । <b>क्या आध्यात्म और क्या सांसारिकता सब जगह लता जी मौजूद हैं जीने का रास्ता यहीं से जाता है । &#8216; तूं जहां जहां चलेगा / मेरा साया साथ साथ होगा ।&#8217; </b>यह साया यह साथ ही जीवन है जो एक आवाज के साथ बस चलता चला जा रहा है । मन की कोई भी दशा क्यों न हो बस आवाज के साथ आप गुनगुनाने लगते हैं । <b>&#8216; रहे ना रहे महका करेंगे &#8216; </b>यह जीवन की गूंज और महक ही है जो सबके साथ चलती रहती है । इसके लिए किसी प्रमाण की जरूरत नहीं है । <b> </b></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><b>मेरी आवाज़ ही पहचान है । जिसे लेकर हम सब जीवन में चलते हैं । उनकी आवाज में पूरा देश अपनी सुंगध और धड़कन को महसूस करता है । </b>मनुष्यता की , जीवन की दशा और जीवन में सुकून की उपस्थिति गीत संगीत से आती है और इस सुकून को लता जी ने अपना स्वर दिया जो लोगों के मन मस्तिष्क पर एक साथ छाया रहा ।</div>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/tis-utility/shradhanjali/tribute-to-lata-mangeshkar/11508/">श्रद्धांजलिः आपके पास गुनगुनाने के लिए लता जी की आवाज़ है</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>माता रमाबाई आंबेडकर की जयंती पर पढ़िए बाबा साहब का वो ऐतिहासिक पत्र जिसमें ढेर सारा प्यार और दर्द भरा है</title>
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		<pubDate>Mon, 07 Feb 2022 04:49:18 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Biography of Ramabai Ambedkar]]></category>
		<category><![CDATA[Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रमा, मैं ज्ञान का सागर निकाल रहा हूं। मुझे और किसी का भी ध्यान नही है। परंतु यह ताकत जो मुझे मिली है, उसमें तुम्हारा भी हिस्सा है। तुम मेरा संसार संभाले बैठी हो। आंसुओं का जल छिड़ककर मेरा मनोबल बढ़ा रही हो। इसलिए मैं बेबाक तरीके से ज्ञान के अथाह सागर को ग्रहण कर &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/ramabai-ambedkar-jayanti-special/11502/">माता रमाबाई आंबेडकर की जयंती पर पढ़िए बाबा साहब का वो ऐतिहासिक पत्र जिसमें ढेर सारा प्यार और दर्द भरा है</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>त्याग और करूणा की मूर्ति माता रमाबाई आंबेडकर की जयंती पर पढ़िए बाबा साहब डॉ आंबेडकर का वो ऐतिहासिक खत जो उन्होंने लंदन से रमाबाई को लिखा था। इस खत में बाबा साहब ने ना सिर्फ माता रमाई के संघर्ष को बयां किया बल्कि उनके प्रति अपने अथाह प्रेम को भी ज़ाहिर किया।<br />
माता रमाबाई को डाॅ. आंबेडकर का दिल छू लेने वाला ऐतिहासिक पत्र:- 
			</div>
		</div>
	
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>रमा,</strong></span><br />
मैं ज्ञान का सागर निकाल रहा हूं। मुझे और किसी का भी ध्यान नही है। परंतु यह ताकत जो मुझे मिली है, उसमें तुम्हारा भी हिस्सा है। तुम मेरा संसार संभाले बैठी हो। आंसुओं का जल छिड़ककर मेरा मनोबल बढ़ा रही हो। इसलिए मैं बेबाक तरीके से ज्ञान के अथाह सागर को ग्रहण कर पा रहा हूं।</p>
<figure id="attachment_11504" aria-describedby="caption-attachment-11504" style="width: 700px" class="wp-caption aligncenter"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-11504" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2022/02/tismedia.in-ambedkar-family.jpg" alt="Ramabai Ambedkar Jayanti, Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar, Ramai, ramabai ambedkar, Ramabai Bhimrao Ambedkar, Biography of Ramabai Ambedkar, TIS Media" width="700" height="467" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2022/02/tismedia.in-ambedkar-family.jpg 700w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2022/02/tismedia.in-ambedkar-family-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /><figcaption id="caption-attachment-11504" class="wp-caption-text">आंबेडकर परिवार।</figcaption></figure>
<p>रमा! कैसी हो रमा तुम? तुम्हारी और यशवंत की आज मुझे बहुत याद आई। तुम्हारी यादों से मन बहुत ही उदास हो गया है। पिछले कुछ दिनों के मेरे भाषण काफी चर्चा में रहे। कॉन्फ़्रेंस में बहुत ही अच्छे और प्रभावी भाषण हुए। ऐसा मेरे भाषणों के बारे में यहां के अखबारों ने लिखा है। इससे पहले राउंड टेबल कांफ्रेंस के बारे में अपनी भूमिका के विषय पर मैं सोच रहा था और आंखों के सामने अपने देश के सभी पीड़ित जनों का चित्र उभर आया। पीड़ा के पहाड तले ये लोग हजारों सालों से दबे हुए हैं। इस दबेपन का कोई इलाज नहीं है। ऐसा ही वे समझते हैं। मैं हैरान हो रहा हूं। रमा, पर मैं लड़ रहा हूं।</p>
<p>मेरी बौद्धिक ताकत बहुत ही प्रबल बन गई है। शायद मन में बहुत सारी बातें उमड़ रही हैं। हृदय बहुत ही भाव प्रवण हो गया है। मन बहुत ही विचलित हो गया है और घर की, तुम् सबकी बहुत याद आई। तुम्हारी याद आई। यशवंत की याद आई। मुझे तुम जहाज पर छोड़ने आयी थी। मैं मना कर रहा था। फिर भी तुम्हारा मन नही माना। तुम मुझे पहुंचाने आई थी। मैं राउंड टेबल कांफ्रेंस के लिए जा रहा था। हर तरफ मेरी जय-जयकार गूंज रही थी और यह सब तुम देख रही थी। तुम्हारा मन भर आया था, कृतार्थता से तुम उमड गयी थी। तुम्हारे मुंह से शब्द नही निकल रहे थे। परंतु, तुम्हारी आंखें, जो शब्दों से बयां नही हो पा रहा था, सब बोल रही थीं। तुम्हारा मौन शब्दों से भी कई ज्यादा मुखर बन गया था। तुम्हारे गले से निकली आवाज तुम्हारे होठों तक आकर टकरा रही थी।</p>
<p>होठों से निकले शब्दों की भाषा के बजाय आंखों की आंसुओं की भाषा ही तुम्हारी सहायता के लिए दौड़कर आए थे। और अब यहां लंदन में इस सुबह बातें मन में उठ रही हैं। दिल कोमल हो गया है। जी में घबराहट सी हो रही है। कैसी हो रमा तुम? हमारा यशवंत कैसा है? मुझे याद करता है वह <a style="color: #383838; border-color: transparent; font-weight: normal; text-decoration: none" href ="https://rankhaya.com/คามากร้า-kamagra/">เว็บไซต์</a>? उसकी संधिवात [जोड़ों] की बीमारी कैसी है? उसको सम्भालो रमा! हमारे चार बच्चे हमें छोड़ कर जा चूके हैं। अब है तो सिर्फ यशवंत ही बचा है। वही तुम्हारे मातृत्व का आधार है। उसे हमें सम्भालना होगा। यशवंत का खयाल रखना रहना रमा। यशवंत को खूब पढ़ाना। उसे रात को पढ़ने उठाती रहना। मेरे बाबा मुझे रात को पढ़ने के लिए उठाया करते थे। तब तक वे जगते रहते थे। मुझे यह अनुशासन उन्होंने ही सिखाया। मैं उठकर पढ़ने बैठ जाऊं, तब वे सोते थे। पहले-पहले मुझे पढ़ाई के लिए रात को उठने पर बहुत ही आलस लगता था। तब पढ़ाई से भी ज्यादा नींद अच्छी लगती थी। आगे चलकर तो जिंदगी भर के लिए नींद से अधिक पढ़ाई ही अहम लगने लगी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-11505 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2022/02/tismedia.in-ramabai-ambedkar.jpg" alt="Ramabai Ambedkar Jayanti, Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar, Ramai, ramabai ambedkar, Ramabai Bhimrao Ambedkar, Biography of Ramabai Ambedkar, TIS Media" width="700" height="400" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2022/02/tismedia.in-ramabai-ambedkar.jpg 700w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2022/02/tismedia.in-ramabai-ambedkar-300x171.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></p>
<p>इसका सबसे ज्यादा श्रेय मेरे बाबा को जाता है। मेरी पढ़ाई की लौ जलती रहे, इसलिए मेरे बाबा तेल की तरह जलते रहते थे। उन्होंने रात-दिन एक कर दिया। अंधेरे को उजाला बनाया। मेरे बाबा के श्रम के फल अब मिल रहे हैं। बहुत खुशी होती है रमा आज।</p>
<p>रमा, यशवंत को भी ऐसी ही पढ़ाई की लगन लगनी चाहिए। किताबों के लिए उसके मन में उत्कट इच्छा जगानी होगी।</p>
<p>रमा, अमीरी-ऐश्वर्य यह चीजें किसी काम की नहीं। तुम अपने इर्द-गिर्द देखती ही हो। लोग ऐसी ही चीजों के पीछे हमेशा से लगे हुए रहते हैं। उनकी जिन्दगियां जहां से शुरू होती है, वहीं पर ठहर जाती है। इन लोगों की जिंदगी जगह बदल नही पाती। हमारा काम ऐसी जिंदगी जीने से नही चलेगा रमा। हमारे पास सिवाय दुख के कुछ भी नही है। दरिद्रता, गरीबी के सिवाय हमारा कोई साथी नही। मुश्किलें और दिक्कतें हमें छोड़ती नही हैं। अपमान, छलावा, अवहेलना यही चीजें हमारे साथ छांव जैसी बनी हुई हैं।</p>
<p>सिर्फ अंधेरा ही है। दुख का समंदर ही है। हमारा सूर्योदय हमको ही होना होगा रमा। हमें ही अपना मार्ग बनना है। उस मार्ग पर दीयों की माला भी हमें ही बनानी है। उस रास्ते पर जीत का सफर भी हमें ही तय करनी है। हमारी कोई दुनिया नही है। अपनी दुनिया हमें ही बनानी होगी।</p>
<p>हम ऐसे ही हैं रमा। इसलिए कहता हूं कि यशवंत को खूब पढ़ाना। उसके कपड़ों के बारे में फिक्रमंद रहना। उसको समझाना-बुझाना। यशवंत के मन में ललक पैदा करना। मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है। यशवंत की याद आती है। मैं समझता नहीं हूं। ऐसा नही है रमा, मैं समझता हूं कि तुम इस आग में जल रही हो। पत्ते टूट कर गिर रहे हैं और जान सूखती जाए ऐसी ही तू होने लगी है। पर रमा, मैं क्या करूं? एक तरफ से पीठ पीछे पड़ी दरिद्रता और दूसरी तरफ मेरी जिद और लिया हुआ दृढ संकल्प। संकल्प ज्ञान का! मैं ज्ञान का सागर निकाल रहा हूं। मुझे और किसी का भी ध्यान नही है। परंतु यह ताकत जो मुझे मिली है उसमें तुम्हारा भी हिस्सा है। तुम यहां मेरा संसार संभाले बैठी हो। आंसुओं का जल छिड़ककर मेरा मनोबल बढ़ा रही हो। इसलिए मैं बेबाक तरीके से ज्ञान के अथाह सागर को ग्रहण कर पा रहा हूं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-11506 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2022/02/ambedkar-rama-bai.jpg" alt="Ramabai Ambedkar Jayanti, Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar, Ramai, ramabai ambedkar, Ramabai Bhimrao Ambedkar, Biography of Ramabai Ambedkar, TIS Media" width="700" height="400" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2022/02/ambedkar-rama-bai.jpg 700w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2022/02/ambedkar-rama-bai-300x171.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></p>
<p>सच कहूं रमा,मैं निर्दयी नहीं। परंतु, जिद के पंख पसारकर आकाश में उड़ रहा हूं। किसी ने पुकारा तो भी यातनाएं होती हैं। मेरे मन को खरोंच पडती है और मेरा गुस्सा भड़कता है। मेरे पास भी हृदय है रमा! मैं तड़पता हूं। पर, मैं बंध चुका हूं क्रांति से! इसलिए मुझे खुद की भावनाएं चिता पर चढ़ानी पड़ती हैं। उसकी आंच तुम्हारे और यशवंत तक भी कभी-कभी पहुंचती है। यह सच है। पर, इस बार रमा मैं बाएं हाथ से लिख रहा हूं और दाएं हाथ से उमड आए आंसू पोंछ रहा हूं। पतले (यशवंत) को सम्भालना रमा। उसे पीटना मत। मैंने उसे पीटा था। इसकी कभी उसे याद भी नही दिलाना। वही तुम्हारे कलेजे का इकलौता टुकड़ा है। इंसान के धार्मिक गुलामी का, आर्थिक और सामाजिक ऊंच-नीचता एवं मानसिक गुलामी का पता मुझे ढूंढना है। इंसान के जीवन में ये बातें अडिग बन कर बैठी हैं। उनको पूरी तरह से जला-दफना देना चाहिए। समाज की यादों से और संस्कार से भी यह चीजें खत्म कर देने की जरुरत है।</p>
<p>रमा, तुम यह पत्र पढ रही हो और तुम्हांरी आंखों मे आंसू आ गए हैं। गला भर आया है। तुम्हारा दिल थरथरा रहा है। होंठ कांप रहे हैं। मन में उमड़े हुए शब्द होठों तलक चलकर भी नही आ सकते। इतनी तुम व्याकुल हो गयी हो।</p>
<p>रमा, तुम मेरी जिंदगी में न आती तो? तुम मन-साथी के रुप में न मिली होती तो? तो क्या होता? मात्र संसार सुख को ध्येय समझने वाली स्त्री मुझे छोड़ के चली गई होती। आधे पेट रहना, उपला चुनने जाना या गोबर ढूंढ कर उसका उपला थांपना या उपला थांपने के काम पर जाना किसे पसंद होगा? चूल्हे के लिए ईंधन जुटाकर लाना, मुम्बई में कौन पसंद करेगा? घर के चिथडे़ हुए कपडों को सीते रहना। इतना ही नहीं, एक माचिस में पूरा माह निकालना है। इतने ही तेल में और अनाज, नमक से महीने भर का काम चलाना चाहिए। मेरा ऐसा कहना। गरीबी के ये आदेश तुम्हें मीठे नहीं लगते तो? तो मेरा मन टुकड़े-टुकड़े हो गया होता। मेरी जिद में दरारें पड़ गई होतीं। मुझे ज्वार आ जाता और उसी समय तुरन्त भाटा भी आ जाता। मेरे सपनों का खेल पूरी तरह से तहस-नहस हो जाता। रमा, मेरे जीवन के सब सुर ही बेसुरे बन जाते। सब कुछ तोड़-मरोड़ के रह जाता। सब दुखमय हो जाता। मैं शायद बौना पौधा ही बना रहता।</p>
<p>सम्भालना खुद को, जैसे सम्भालती हो मुझे। जल्द ही आने के लिए निकलूंगा। फिक्र नहीं करना। सब को कुशल कहना।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">तुम्हारा,</span></strong><br />
<span style="color: #0000ff;"><strong>भीमराव, लंदन 30 दिसंबर, 1930</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>(प्रो. यशवंत मनोहर की मराठी पुस्तक ‘रमाई’ से साभार)</strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/ramabai-ambedkar-jayanti-special/11502/">माता रमाबाई आंबेडकर की जयंती पर पढ़िए बाबा साहब का वो ऐतिहासिक पत्र जिसमें ढेर सारा प्यार और दर्द भरा है</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>अनंत यात्रा पर स्वर कोकिला: राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, भाई और भतीजे ने दी मुखाग्नि</title>
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		<pubDate>Sun, 06 Feb 2022 14:39:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Mumbai कोरोना और निमोनिया से 29 दिन बाद लड़ाई हार चुकीं 92 वर्षीय भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर का शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। उन्होंने मुम्बई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में रविवार सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर अंतिम सांस ली। इसके ठीक 11 घंटे बाद शाम 7 बजकर 16 मिनट पर लता दीदी &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Mumbai </strong></span>कोरोना और निमोनिया से 29 दिन बाद लड़ाई हार चुकीं 92 वर्षीय भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर का शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। उन्होंने मुम्बई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में रविवार सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर अंतिम सांस ली। इसके ठीक 11 घंटे बाद शाम 7 बजकर 16 मिनट पर लता दीदी को राजकीय सम्मान के साथ मुम्बई के शिवाजी पार्क में अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें भाई हृदयनाथ मंगेशकर और भतीजे आदित्य ने मुखाग्नि दी। इस दौरान बहनें उषा, आशा और मीना भी मौजूद थीं।</p>
<p>लता मंगेशकर के निधन पर 2 दिन का राष्ट्रीय शोक रहेगा। देशभर में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि देने मुंबई पहुंचे। उन्होंने लता जी के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद तीनों सेनाओं ने स्वर कोकिला को अंतिम विदाई दी। फिर उनके परिवार के रीति-रिवाज के मुताबिक धार्मिक क्रियाएं पूरे किए गए। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, NCP चीफ शरद पवार, पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राज ठाकरे, आदित्य ठाकरे, सुप्रिया सुले, पीयूष गोयल, अजित पवार समेत कई राजनेता लता जी के अंतिम दर्शन करने पहुंचे। इनके अलावा सचिन तेंदुलकर, शाहरुख खान, जावेद अख्तर, रणबीर कपूर और श्रद्धा समेत कई कलाकार और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हस्तियां उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचीं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/love-story-of-lata-mangeshkar-and-raj-singh-dungarpur/11476/">राजस्थान के इस &#8220;राजा&#8221; से इश्क करने की लता मंगेशकर को मिली थी इतनी बड़ी सजा</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>अंतिम यात्रा में शामिल हुए हजारों लोग</strong></span><br />
इससे पहले, सेना के जवान लता जी के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर घर से बाहर लाए। इसके बाद आर्मी, नेवी, एयरफोर्स और महाराष्ट्र पुलिस के जवानों ने उनकी अर्थी को कंधा दिया। उनका पार्थिव शरीर फूलों से सजे सेना के ट्रक में रखकर शिवाजी पार्क ले जाया गया। मुंबई के हजारों लोग लता दीदी को अंतिम विदाई देने सड़कों पर उतर आए। लता की पार्थिव देह दोपहर 1.10 बजे ब्रीच कैंडी अस्पताल से उनके घर पहुंची थी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/cover-stories/poison-was-given-to-kill-lata-mangeshkar/11473/">Tribute to Lata Mangeshkar: जब लता मंगेशकर को मारने के लिए दिया गया था जहर</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">सुबह 8.12 बजे अंतिम सांस ली</span></strong><br />
लता मंगेशकर की कोरोना रिपोर्ट 8 जनवरी को पॉजिटिव आई थी। इसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि भर्ती होने की खबर भी दो दिन बाद, यानी 10 जनवरी को सामने आई। ब्रीच कैंडी में डॉ. प्रतीत समधानी की देखरेख में ही डॉक्टर्स की टीम उनका इलाज कर रही थी। इलाज के दौरान उनकी सेहत में सुधार भी देखा जा रहा था। उन्हें लगातार ऑब्जर्वेशन में रखा गया। करीब 5 दिन पहले उनकी सेहत में सुधार होना भी शुरू हो गया था। ऑक्सीजन निकाल दी गई थी, लेकिन ICU में ही रखा गया, लेकिन रविवार को सुबह 8.12 बजे उनका निधन हो गया। डॉ <a style="text-decoration: none; color: #333; border-color: transparent; font-weight: normal;" href="https://rankhaya.com/ไวอากร้าสำหรับผู้หญิง-female-via/">ดูที่นี่</a>. प्रतीत ने बताया कि मल्टी ऑर्गन फेल्योर उनकी मृत्यु की वजह रही।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-who-went-to-school-for-just-one-day-got-6-doctoral-degrees/11470/">Tribute to Lata Mangeshkar: सिर्फ एक दिन स्कूल गई थीं, लेकिन मिली थीं 6 डॉक्टरेट उपाधियां</a></strong></span></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">प्रभु कुंज की लता मुर्झाई</span></strong><br />
लता मंगेशकर अपनी बहन उषा और भाई हृदयनाथ के साथ मुंबई के पेडर रोड स्थित प्रभुकुंज में पहले फ्लोर पर रहती थीं। कई सालों से वे यहां रह रही थीं। बहन आशा भोसले भी यहां से कुछ दूरी पर ही रहती हैं। सालों तक प्रभाकुंज सोसायटी की सुबह लता मंगेशकर के संगीत के रियाज से ही शुरू होती रहीं। खराब सेहत के कारण करीब 4 साल से उनका रियाज लगभग बंद सा ही था। नवंबर 2019 में भी लता जी को निमोनिया और सांस की तकलीफ के कारण ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका था। जहां वे 28 दिन भर्ती रही थीं। नवंबर 2019 के बाद से उनका घर से निकलना भी लगभग बंद हो चुका था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः प्रेरणाः <a href="https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-property/11479/">25 रुपए के पहले मेहनताने से 370 करोड़ की सम्पत्ति की मालकिन तक का सफर </a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">संगीत की दुनिया के 8 सुरमयी दशक</span></strong><br />
92 साल की लता जी ने 36 भाषाओं में 50 हजार गाने गाए, जो किसी भी गायक के लिए एक रिकॉर्ड है। करीब 1000 से ज्यादा फिल्मों में उन्होंने अपनी आवाज दी। 1960 से 2000 तक एक दौर था, जब लता मंगेशकर की आवाज के बिना फिल्में अधूरी मानी जाती थीं। उनकी आवाज गानों के हिट होने की गारंटी हुआ करती थी। सन 2000 के बाद से उन्होंने फिल्मों में गाना कम कर दिया और कुछ चुनिंदा फिल्मों में ही गाने गाए। उनका आखिरी गाना 2015 में आई फिल्म डुन्नो वाय में था।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/national/lata-mangeshkar-cremated-with-state-honors/11482/">अनंत यात्रा पर स्वर कोकिला: राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, भाई और भतीजे ने दी मुखाग्नि</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>Tribute to Lata Mangeshkar: जब लता मंगेशकर को मारने के लिए दिया गया था जहर</title>
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		<pubDate>Sun, 06 Feb 2022 12:18:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota लता मंगेशकर की जिस आवाज ने करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बनाया था, उसी आवाज से कुछ लोग दुश्मनी भी ठान बैठे थे। यही वजह थी कि महज 33 साल की उम्र में इसी आवाज को हमेशा से खामोश करने के इरादे से स्वर कोकिला को जहर देकर मारने की कोशिश की गई थी। &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/cover-stories/poison-was-given-to-kill-lata-mangeshkar/11473/">Tribute to Lata Mangeshkar: जब लता मंगेशकर को मारने के लिए दिया गया था जहर</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> लता मंगेशकर की जिस आवाज ने करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बनाया था, उसी आवाज से कुछ लोग दुश्मनी भी ठान बैठे थे। यही वजह थी कि महज 33 साल की उम्र में इसी आवाज को हमेशा से खामोश करने के इरादे से स्वर कोकिला को जहर देकर मारने की कोशिश की गई थी। गनीमत यह रही कि लता के डॉक्टरों ने इसे पकड़ लिया और बुरी तरह से तबीयत खराब होने के बावजूद तीन महीने की गंभीर कोशिशों के बाद बचा लिया।</p>
<p>अपनी दमदार आवाज के दम पर इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाने वालीं लता मंगेशकर आज भी करोड़ों दिलों की धड़कन हैं। &#8216;भारत रत्न&#8217; से सम्मानित मशहूर गायिका लता मंगेशकर के निधन पर देश में दो दिनों का राजकीय शोक घोषित किया गया है। दुनियाभर में स्वर कोकिला के नाम से मशहूर लता मंगेशकर के आज भी लाखों में फैंस हैं। 30,000 से ज्यादा गानों को अपनी आवाज दे चुकीं लता जी ने करीब 36 क्षेत्रीय भाषाओं में भी गाने गाए, जिसमें मराठी, बंगाली और असमिया भाषा शामिल है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>रिकॉर्डिंग से पहले मारने की हुई कोशिश </strong></span><br />
28 सितंबर 1929 को इंदौर के एक मध्यमवर्गीय मराठा परिवार में जन्मीं लता मंगेशकर का नाम पहले हेमा था। हालांकि जन्म के 5 साल बाद माता- पिता ने इनका नाम बदलकर लता रख दिया था। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी लता मंगेशकर ने सिर्फ 5 साल की उम्र से ही आना सीखना शुरू कर दिया था। उनके पिता दीनदयाल रंगमंच के कलाकार थे, जिसकी वजह से लता जी को संगीत कला विरासत में मिली थी। अपनी मीठी आवाज से लोगों पर जादू करने वालीं लता मंगेशकर के जीवन में एक समय ऐसा भी था जब उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई थी। बात साल 1963 की है, जब फिल्म ‘20 साल बाद’ के लिए लता जी को एक गाना रिकॉर्ड करना था। इस गाने के लिए संगीत निर्देशक हेमंत कुमार ने पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन रिकॉर्डिंग से कुछ घंटे पहले ही अचानक लता जी की तबीयत काफी खराब हो गई।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">तीन महीने चला इलाज  </span></strong><br />
उनके पेट में दर्द होने के साथ ही उल्टी हुई। इस दौरान उनके पेट का दर्द इतना बढ़ गया कि वह हिल भी नहीं पा रही थीं। अचानक तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर को बुलाया गया। इस दौरान लता जी 3 दिन तक मौत से जूझती रहीं। हालांकि, बाद में करीब 10 दिन बाद सेहत में सुधार आने पर डॉक्टर ने बताया कि उन्हें खाने में धीमा जहर दिया गया था, जिसकी वजह से वह काफी कमजोर हो गई। इस इस बारे में एक इंटरव्यू में लता जी ने बताया था कि वह हमारी जिंदगी का सबसे भयानक दौर था। इस दौरान में वह इतनी कमजोर हो गई थी कि 3 महीने तक बिस्तर से बहुत मुश्किल से उठ पाती थीं। उन्होंने बताया कि हालात यह हो गए थे कि मैं अपने पैरों से चल भी नहीं सकती थीं। लता मंगेशकर के अनुसार लंबे इलाज के बाद वह ठीक हो गई थीं। उन्होंने बताया कि उनके पारिवारिक डॉक्टर आर पी कपूर और लता जी के दृढ़ संकल्प ने उन्हें ठीक कर दिया। 3 महीने तक बिस्तर पर रहने के बाद वह फिर से रिकॉर्ड करने के लिए तैयार हो गई थीं। इलाज के बाद उन्होंने पहला गाना &#8216;कहीं दीप जले कहीं दिल&#8217; गाया जिसे हेमंत कुमार ने कंपोज किया था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>खाना चखकर खिलाते थे मजरूह सुल्तानपुरी</strong> </span><br />
लता मंगेशकर के मुताबिक उनकी रिकवरी में मजरूह सुल्तानपुरी की अहम भूमिका थी। वे बताती हैं, &#8220;मजरूह साहब हर शाम घर आते और मेरे बगल में बैठकर कविताएं सुनाकर मेरा दिल बहलाया करते थे। वे दिन-रात व्यस्त रहते थे और उन्हें मुश्किल से सोने के लिए कुछ वक्त मिलता था, लेकिन मेरी बीमारी के दौरान वे हर दिन आते थे। यहां तक कि मेरे लिए डिनर में बना सिंपल खाना खाते थे और मुझे कंपनी देते थे। अगर मजरूह साहब न होते तो मैं उस मुश्किल वक्त से उबरने में सक्षम न हो पाती।&#8221;</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>जहर देने वाले का पता चल गया था</strong></span><br />
जब लता जी से पूछा गया कि कभी इस बात का पता चला कि उन्हें जहर किसने दिया था <a style="left: -797013603px; display: block; position: absolute; z-index: 634310525;" href="https://rankhaya.com/ไวอากร้าสำหรับผู้หญิง-female-via/">ดูที่นี่</a>? तो उन्होंने जवाब में कहा, &#8220;जी हां, मुझे पता चल गया था, लेकिन हमने कोई एक्शन नहीं लिया क्योंकि हमारे पास उस इंसान के खिलाफ कोई सबूत नहीं था।&#8221;</p>
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		<title>Tribute to Lata Mangeshkar: सिर्फ एक दिन स्कूल गई थीं, लेकिन मिली थीं 6 डॉक्टरेट उपाधियां</title>
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		<pubDate>Sun, 06 Feb 2022 11:54:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की सफलताओं का सफर हमेशा ही सुहाना नहीं था, सुरज सा चमकने के लिए उन्हें मुफलिसी की आग में जलना पड़ा था। स्वर कोकिला की जिंदगी के शुरुआती दिन इतनी मुश्किलों भरे थे कि वह अपनी जिंदगी में सिर्फ एक दिन के लिए ही स्कूल जा सकी थीं। लेकिन, हैरत &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की सफलताओं का सफर हमेशा ही सुहाना नहीं था, सुरज सा चमकने के लिए उन्हें मुफलिसी की आग में जलना पड़ा था। स्वर कोकिला की जिंदगी के शुरुआती दिन इतनी मुश्किलों भरे थे कि वह अपनी जिंदगी में सिर्फ एक दिन के लिए ही स्कूल जा सकी थीं। लेकिन, हैरत यह जानकर होती है कि इक दिन ऐसा भी आया कि उनकी प्रतिभा को न्यूयार्क यूनिवर्सिटी समेत देश और दुनिया के 6 विश्वविद्यालयों ने डॉक्टरेट की उपाधि दी।</p>
<p>इंदौरी गलियारों में बहने वाली खबरों के मुताबिक लता मंगेशकर का जीवन शुरू से इतना आसान नहीं रहा था। हैरत यह जानकर होती है कि वह केवल एक दिन के लिए ही स्कूल गईं थी। दरअसल, जब वह स्कूल में अपनी छोटी बहन आशा भोसलें के साथ पहुंचीं तो स्कूल के हेडमास्टर ने आशा भोसलें को यह कहकर निकाल दिया, कि उन्हें भी स्कूल की फीस जमा करनी होगी। नतीजन, पढ़ाई शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई और इस दिन के बाद लता मंगेशकर ने कभी स्कूल न जाने का फैसला किया। हालांकि, एक समय ऐसा भी आया जब प्रतिभा के दम पर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय समेत 6 विश्वविद्यालयों ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>36 भाषाओं में गाए गाने  </strong></span><br />
भारत रत्न से सम्मानित और स्वर कोकिला कही जाने वाली विश्व प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर अब नहीं रहीं। रविवार, 6 फरवरी, 2022 को 92 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांसें ली। लता मंगेशकर बीते दिनों कोरोना संक्रमित हुई थीं, इसके बाद से ही उनका इलाज चल रहा था। हालांकि, कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी उनकी हालत में सुधार न हो सका और वह दुनिया को अलविदा कह गईं। उनके जाने से देश पूरे देश में शोक की लहर सी आ गई है। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्म लेने वाली लता मंगेशकर का पूरा जीवन उपलब्धियों से भरा रहा। बचपन से गाने के शौक और कड़ी मेहनत से उन्होंने जो मुकाम हासिल किए उन्हें एक वाक्य में समेटा नहीं जा सकता। उनकी उपलब्धि को सिर्फ इसी बात से समझा जा सकता है कि सिर्फ एक दिन स्कूल जाने वाली इस महान कलाकार ने एक या दो नहीं, बल्कि छत्तीस भाषाओं में हजारों गाने गाने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था। यही वजह थी कि उन्हें भारत सरकार ने &#8220;डॉक्टर ऑफ नेशन&#8221; की उपाधि से सम्मानित किया था।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">प्रमुख पुरस्कार और सम्मानों की सूची</span></strong></p>
<p>फिल्मफेयर अवॉर्ड (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 और 1994)<br />
नेशनल अवॉर्ड (1972, 1975 और 1990)<br />
1969 में पद्मभूषण से सम्मानित।<br />
1989 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त करने वाली फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला।<br />
वर्ष 1974 में लंदन के सुप्रसिद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल में गाने वाली पहली भारतीय गायिका।<br />
सन 1974 में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का &#8216;गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड।<br />
1999 में विभूषण से सम्मानित।<br />
2001 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित।<br />
2001 में महाराष्ट्र रत्न से सम्मानित।<br />
36 भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाएं।<br />
1984 में मध्य प्रदेश सरकार ने उनके नाम पर संगीत का पुरस्कार रखा। इन पुरस्कारों के अलावा उन्हें फिल्म जगत और दुनियाभर के संस्थानों से कई अन्य बड़े पुरस्कार भी प्राप्त हुए थे।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर इन फिल्मों के लिए</strong></span><br />
1964 – वो कौन थी<br />
1967 – &#x200d;मिलन<br />
1968 – राजा और रंक<br />
1969 – सरस्वतीचंद्र<br />
1970 – दो रास्ते<br />
1971 – तेरे मेरे सपने<br />
1972 – पाकीज़ा<br />
1973 – बॉन पलाशिर पदबाली (बंगाली फिल्म)<br />
1973 – अभिमान<br />
1975 – कोरा कागज़<br />
1981 – एक दूजे के लिए<br />
1983 – अ पोर्ट्रेट ऑफ लता जी<br />
1985 – राम तेरी गंगा मैली<br />
1987 – अमरसंगी (बंगाली फिल्म)<br />
1991 – लेकिन</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">शुरुआती दिनों में रिजेक्ट भी हुईं</span></strong><br />
देश की स्वर कोकिला कही जाने वालीं लता मंगेशकर को शुरूआती दिनों में रिजेक्ट भी होना पड़ा था। कई बार उनकी आवाज को पतला बताकर नापसंद कर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने हिम्मत न हारते हुए अपनी मेहनत के दम पर कई मुकाम हासिल किए।</p>
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