<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>शिवरात्रि Archives - TIS Media</title>
	<atom:link href="https://tismedia.in/tag/%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://tismedia.in/tag/शिवरात्रि/</link>
	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
	<lastBuildDate>Sun, 15 Feb 2026 16:39:34 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/04/cropped-tis-media-logo-scaled-2-32x32.jpg</url>
	<title>शिवरात्रि Archives - TIS Media</title>
	<link>https://tismedia.in/tag/शिवरात्रि/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>महाशिवरात्रि विशेष: नटराज से व्याध कथा तक—आस्था, प्रतीक और संदेश</title>
		<link>https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b7-%e0%a4%a8%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a4%be/13093/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=%25e0%25a4%25ae%25e0%25a4%25b9%25e0%25a4%25be%25e0%25a4%25b6%25e0%25a4%25bf%25e0%25a4%25b5%25e0%25a4%25b0%25e0%25a4%25be%25e0%25a4%25a4%25e0%25a5%258d%25e0%25a4%25b0%25e0%25a4%25bf-%25e0%25a4%25b5%25e0%25a4%25bf%25e0%25a4%25b6%25e0%25a5%2587%25e0%25a4%25b7-%25e0%25a4%25a8%25e0%25a4%259f%25e0%25a4%25b0%25e0%25a4%25be</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Sunil Pokra]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 16:37:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[KOTA NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[शिवरात्रि]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=13093</guid>

					<description><![CDATA[<p>&#160; कोटा  महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव के विविध रूपों, कथाओं और दार्शनिक संदेशों को लेकर देशभर में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण है। शिव को जहां एक ओर नटराज के रूप में सृष्टि के आदिनर्तक माना जाता है, वहीं दूसरी ओर करुणा और क्षमा के प्रतीक देव के रूप में भी उनकी व्यापक &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b7-%e0%a4%a8%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a4%be/13093/">महाशिवरात्रि विशेष: नटराज से व्याध कथा तक—आस्था, प्रतीक और संदेश</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>&nbsp;</p></blockquote>
<p style="text-align: left;"><a href="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260215-WA0048.jpg"><img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-13095" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260215-WA0048.jpg" alt="" width="1080" height="1432" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260215-WA0048.jpg 1080w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260215-WA0048-226x300.jpg 226w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260215-WA0048-772x1024.jpg 772w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260215-WA0048-768x1018.jpg 768w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></a></p>
<p style="text-align: left;">कोटा  महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव के विविध रूपों, कथाओं और दार्शनिक संदेशों को लेकर देशभर में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण है। शिव को जहां एक ओर नटराज के रूप में सृष्टि के आदिनर्तक माना जाता है, वहीं दूसरी ओर करुणा और क्षमा के प्रतीक देव के रूप में भी उनकी व्यापक मान्यता है।</p>
<p>नटराज और तांडव की परंपरा</p>
<p>शैव परंपरा में शिव का नृत्य “तांडव” कहलाता है, जबकि माता पार्वती के नृत्य को “लास्य” कहा गया है। मान्यता है कि जब शिव तांडव करते हैं तो वह सृष्टि, स्थिति और संहार जैसी ब्रह्मांडीय शक्तियों की अभिव्यक्ति होता है। शैव सिद्धांत में शिव को नटराज अर्थात नृत्य के अधिपति के रूप में पूजा जाता है।</p>
<p>भारत के कई प्रमुख मंदिरों में नटराज स्वरूप विशेष रूप से प्रतिष्ठित है। तमिलनाडु के चिदंबरम मंदिर में नटराज की 108 करणों (नृत्य मुद्राओं) की मूर्तियां अंकित हैं। वहीं उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर, वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर, गुजरात के सोमनाथ मंदिर और हिमालय स्थित केदारनाथ मंदिर में भी महाशिवरात्रि पर विशेष पूजन और जागरण आयोजित किए जाते हैं।</p>
<p>व्याध चित्रभानु की कथा</p>
<p>महाशिवरात्रि से जुड़ी एक प्रचलित कथा व्याध (शिकारी) चित्रभानु की है। पौराणिक मान्यता के अनुसार एक शिकारी, जो अनजाने में बिल्व वृक्ष से पत्ते तोड़ते हुए उन्हें शिवलिंग पर गिरा देता है, पूरी रात उपवास और जागरण की स्थिति में रहता है। उसी दौरान उसके भीतर करुणा और परिवर्तन का भाव जागृत होता है। अंततः भगवान शिव प्रकट होकर उसे मोक्ष प्रदान करते हैं।</p>
<p>यह कथा इस विचार को बल देती है कि अनजाने में की गई भक्ति, पश्चाताप और दया भी ईश्वर तक पहुंचती है। कथा में वचन पालन, अहिंसा और करुणा को प्रमुख तत्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है।</p>
<p>कीर्तिमुख और अहंकार का प्रतीक</p>
<p>शिव पुराण में वर्णित जालंधर असुर की कथा में “कीर्तिमुख” का प्रसंग भी आता है। कथा के अनुसार शिव द्वारा उत्पन्न एक प्रचंड शक्ति ने स्वयं को ही भक्षण कर लिया और अंत में केवल मुख शेष रहा। शिव ने उसे “कीर्तिमुख” नाम देकर मंदिरों के द्वार पर स्थान दिया। इसे अहंकार के त्याग का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p>तांडव का दार्शनिक आयाम</p>
<p>शास्त्रों में तांडव को केवल विध्वंस नहीं, बल्कि सृजन और अनुग्रह की ऊर्जा भी बताया गया है। नाट्यशास्त्र में तांडव के अंगहार और 108 करणों का विस्तार से उल्लेख मिलता है। विद्वानों के अनुसार तांडव जीवन के चक्र—जन्म, विकास, विनाश और पुनर्सृजन—का प्रतीक है।</p>
<p>विविधता में एकता का पर्व</p>
<p>देश के विभिन्न तीर्थों—जैसे त्र्यंबकेश्वर मंदिर और पशुपतिनाथ मंदिर—में भी महाशिवरात्रि समान श्रद्धा से मनाई जाती है। कथा और परंपराएं भले स्थानानुसार भिन्न रूप में सुनाई जाएं, लेकिन उनका मूल संदेश करुणा, संयम और आत्मपरिवर्तन ही है।</p>
<p>विद्वानों का मत है कि महाशिवरात्रि केवल अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर भी है। शिव की कथाएं यह संकेत देती हैं कि ईश्वर दंड से अधिक अनुग्रह के प्रतीक हैं। विधि-विधान की पूर्णता से अधिक भाव, पश्चाताप और सद्कर्म को महत्व दिया गया है।</p>
<p>महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु उपवास, रात्रि जागरण और शिवलिंग अभिषेक के माध्यम से भगवान शिव का स्मरण करते हैं। आस्था के साथ-साथ यह पर्व अहंकार त्याग, वचनबद्धता और करुणा के मूल्यों को भी पुनः स्मरण कराता है।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b7-%e0%a4%a8%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a4%be/13093/">महाशिवरात्रि विशेष: नटराज से व्याध कथा तक—आस्था, प्रतीक और संदेश</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
