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	<title>Akhilesh Yadav Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>Akhilesh Yadav Archives - TIS Media</title>
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		<title>चाचा शिवपाल को मिली बड़ी जिम्मेदारी, स्वामी प्रसाद मौर्य का भी कद बढ़ा</title>
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		<pubDate>Sun, 29 Jan 2023 12:37:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ. तमाम उतार-चढ़ाव के बाद आखिरकार समाजवादी परिवार फिर एकजुट होने लगा है। आखिरकार, सियासी खटास पर परिवार भारी पड़ गया और आखिरकार भतीजे अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव को न सिर्फ गले लगाया, बल्कि पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी भी सौंप दी। शिवपाल यादव को समाजवादी पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिल गई है। उन्हें &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/samajwadi-party-announced-national-executive/12523/">चाचा शिवपाल को मिली बड़ी जिम्मेदारी, स्वामी प्रसाद मौर्य का भी कद बढ़ा</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">लखनऊ.</span></strong> तमाम उतार-चढ़ाव के बाद आखिरकार समाजवादी परिवार फिर एकजुट होने लगा है। आखिरकार, सियासी खटास पर परिवार भारी पड़ गया और आखिरकार भतीजे अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव को न सिर्फ गले लगाया, बल्कि पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी भी सौंप दी।</p>
<p>शिवपाल यादव को समाजवादी पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिल गई है। उन्हें समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया है। शिवपाल को राष्ट्रीय महासचिव के साथ ही यूपी का प्रभारी भी बनाया गया है। इसके साथ ही स्वामी प्रसाद मौर्य का भी कद बढ़ा दिया गया है। उन्हें भी राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। रविवार को समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा कर दी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/pm-modi-warned-that-trying-to-break-the-country-will-not-succeed/12515/">PM मोदी की चेतावनी&#8230; &#8220;कभी सफल नहीं होंगे&#8221;</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">पिघली रिश्तों पर जमी बर्फ</span></strong><br />
नेताजी यानि मुलायम सिंह यादव की मृत्यु के बाद से ही पूरा परिवार एक साथ आने लगा था। शिवपाल सिंह यादव हर जगह अखिलेश यादव के साथ दिखाई दे रहे थे। इसके बाद जब मैनपुरी उपचुनाव हुआ तब भी शिवपाल ने आगे बढ़कर मोर्चा संभाला। इन चुनावों के बाद से ही शिवपाल यादव को सपा में अहम जिम्मेदारी मिलने की बातें कही जा रही थीं। पिछले कुछ दिनों से शिवपाल यादव लगातार यूपी में दौरे भी कर रहे थे। वहीं, रामचरितमानस पर बयान से विवादों में आए स्वामी प्रसाद मौर्य को भी राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया है। उनको इतना बड़ा कद देने से साफ हो गया है कि रामचरितमानस पर उनके बयान को लेकर सपा में कहीं कोई असमंजस नहीं है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/sonam-wangchuk-on-hunger-strike/12504/">&#8216;रियल रेंचो&#8217; सोनम वांगचुकः माइनस 40 डिग्री में करने वाले थे अनशन, नजरबंद </a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>जातिगत समीकरणों का रखा पूरा ध्यान </strong></span><br />
उपाध्यक्ष पद पर किरणमय नंदा और प्रमुख महासचिव पद पर प्रोफेसर रामगोपाल यादव बरकरार हैं। यह दोनों पहले भी इसी पद पर थे। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 14 महासचिव बनाए गए हैं। इसमें शिवपाल और स्वामी प्रसाद के अलावा मोहम्मद आजम खान,लालजी वर्मा, राम अचल राजभर, अवधेश प्रसाद, इंद्रजीत वर्मा, मधु गुप्ता आदि को शामिल किया गया है। ज्यादातर नाम पिछड़ी जाति के नेताओं के हैं। बसपा और भाजपा से आए सभी बड़े नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह दी गई है। 62 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जातीय समीकरण का पूरा ध्यान रखा गया है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में ब्राह्मण नेता अभिषेक मिश्रा, पवन पांडे को भी जगह मिली है। इसी तरह पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा, लीलावती कुशवाहा, धर्मेंद्र यादव, जावेद आब्दी, दयाराम पाल आदि को भी शामिल किया गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/odisha-health-minister-naba-das-shot-by-asi-gopal-das/12508/">ओडिशा के हेल्थ मिनिस्टर को पुलिस कर्मी ने मारी गोली, हालत नाजुक</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">यह है सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी</span></strong><br />
1-अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष<br />
2-किरनमय नन्दा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष<br />
3- प्रो0 रामगोपाल यादव राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव<br />
4-मोहम्मद आजम खां राष्ट्रीय महासचिव<br />
5-शिवपाल सिंह यादव राष्ट्रीय महासचिव<br />
6-रवि प्रकाश वर्मा राष्ट्रीय महासचिव<br />
7-बलराम यादव राष्ट्रीय महासचिव<br />
8-स्वामी प्रसाद मौर्या राष्ट्रीय महासचिव<br />
9-विशम्भर प्रसाद निषाद राष्ट्रीय महासचिव<br />
10-अवधेश प्रसाद राष्ट्रीय महासचिव<br />
11-इन्द्रजीत सरोज राष्ट्रीय महासचिव<br />
12- रामजीलाल सुमन राष्ट्रीय महासचिव<br />
13-लालजी वर्मा राष्ट्रीय महासचिव<br />
14-रामअचल राजभर राष्ट्रीय महासचिव<br />
15-जो एण्टोनी राष्ट्रीय महासचिव<br />
16-हरेन्द्र मलिक राष्ट्रीय महासचिव<br />
17-नीरज चौधरी राष्ट्रीय महासचिव<br />
18-सुदीप रंजन सेन राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष<br />
19-डॉ मधु गुप्ता राष्ट्रीय सचिव<br />
20-कमाल अख्तर राष्ट्रीय सचिव<br />
21-दयाराम पाल राष्ट्रीय सचिव<br />
22-राजेन्द्र चौधरी राष्ट्रीय सचिव<br />
23-राजीव राय राष्ट्रीय सचिव<br />
24-रामबक्श वर्मा राष्ट्रीय सचिव<br />
25-अभिषेक मिश्रा राष्ट्रीय सचिव<br />
26-जावेद आब्दी राष्ट्रीय सचिव<br />
27-रमेश प्रजापति राष्ट्रीय सचिव<br />
28-पी0एन0 चौहान राष्ट्रीय सचिव<br />
29-आकिल मुर्तजा राष्ट्रीय सचिव<br />
30-अखिलेश कटियार राष्ट्रीय सचिव<br />
31-रामआसरे विश्वकर्मा राष्ट्रीय सचिव<br />
32-तारकेश्वर मिश्रा राष्ट्रीय सचिव<br />
33-हाजी इरफान अंसारी राष्ट्रीय सचिव<br />
34-राजाराम पाल राष्ट्रीय सचिव<br />
35-त्रिभुवन दत्त राष्ट्रीय सचिव<br />
36-राममूर्ति वर्मा राष्ट्रीय सचिव<br />
37-वीरपाल यादव राष्ट्रीय सचिव<br />
38-श्रीमती जयाबच्चन सदस्य<br />
39-रामगोविन्द चौधरी सदस्य<br />
40-अबू आसिम आजमी सदस्य<br />
41-चन्द्रपाल सिंह यादव सदस्य<br />
42-जावेद अली खान सदस्य सदस्य<br />
43-अरविन्द कुमार सिंह सदस्य<br />
44-डा0 मुकेश वर्मा सदस्य<br />
45-श्रीमती ऊषा वर्मा सदस्य<br />
46-श्रीमती लीलावती कुशवाहा सदस्य<br />
47-राजेश कुशवाहा सदस्य<br />
48-रामदुलार राजमर सदस्य<br />
49-संजय विद्यार्थी सदस्य<br />
50-ओपी यादव सदस्य<br />
51-पवन पाण्डेय सदस्य<br />
52-उज्जवल रमण सिंह सदस्य<br />
53-संजय लाठर सदस्य<br />
54-राज कुमार मिश्रा सदस्य<br />
55-डा0 रमेश तोमर सदस्य<br />
56-धर्मेन्द्र यादव सदस्य<br />
57-अक्षय यादव सदस्य<br />
58-तेज प्रताप यादव सदस्य<br />
59-अल्ताफ अंसारी विशेष आमन्त्रित सदस्य<br />
60-किसान सिंह सैंथवार विशेष आमन्त्रित सदस्य<br />
61-व्यास जी गौड़ विशेष आमन्त्रित सदस्य<br />
62-मौलाना इकबाल कादरी विशेष आमन्त्रित सदस्य</p>
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		<title>मुलायम सिंह यादवः अपने पीछे छोड़ गए देश का सबसे बड़ा सियासी कुनबा, जानें पूरे परिवार को</title>
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		<pubDate>Mon, 10 Oct 2022 05:36:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>पहलवानी के दांव पेच छोड़ बने शिक्षक, फिर खेली शानदार सियासी पारी  मुलायम सिंह के परिवार में 25 से ज्यादा सदस्य राजनीति में हैं सक्रिय  TISMedia@Lucknow पहलवान और शिक्षक रहे मुलायम ने लंबी सियासी पारी खेली। तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे। केंद्र में रक्षा मंत्री रहे। उन्हें बेहद साहसिक सियासी फैसलों के लिए भी &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>पहलवानी के दांव पेच छोड़ बने शिक्षक, फिर खेली शानदार सियासी पारी </strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>मुलायम सिंह के परिवार में 25 से ज्यादा सदस्य राजनीति में हैं सक्रिय </strong></span></li>
</ul>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Lucknow</span> </strong>पहलवान और शिक्षक रहे मुलायम ने लंबी सियासी पारी खेली। तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे। केंद्र में रक्षा मंत्री रहे। उन्हें बेहद साहसिक सियासी फैसलों के लिए भी जाना जाता है। देश की राजनीति में मुलायम सिंह यादव का कुनबा सबसे बड़ा है। परिवार के 25 से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो राजनीति में सक्रिय हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि मुलायम के परिवार में कौन-कौन है? इनमें से कौन राजनीतिक रूप से सक्रिय है और कौन राजनीति से दूर है?</p>
<p>शुरुआत मुलायम सिंह यादव के बाबा से करते हैं। उनका नाम मेवाराम था। मेवाराम के दो बेटे थे। सुघर सिंह और बच्चीलाल सिंह। सुघर सिंह के पांच बेटे हुए। इनमें मुलायम सिंह यादव, रतन सिंह, राजपाल सिंह यादव, अभय राम सिंह और शिवपाल सिंह यादव। भाइयों में मुलायम सिंह तीसरे नंबर और शिवपाल सिंह सबसे छोटे हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/mulayam-singh-yadav-passed-away-former-up-cm-and-samajwadi-party-founder-death/12370/">नहीं रहे मुलायम सिंह यादव: 82 साल की उम्र में निधन, मेदांता अस्&#x200d;पताल में ली अंतिम सांस</a></strong></p>
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<p><strong><span style="color: #ff0000;">1. अभय राम यादव</span><span style="color: #ff0000;"> :</span></strong> मुलायम के पांच भाइयों में अभय राम सबसे बड़े थे। धर्मेंद्र यादव उनके बेटे हैं। धर्मेंद्र तीन बार सांसद रह चुके हैं। सबसे पहले 2004 में मैनपुरी से लोकसभा सदस्य चुने गए थे। इसके बाद 2009 और फिर 2014 में बदायूं से जीत हासिल की। 2019 लोकसभा चुनाव में वह हार गए। हाल, ही में आजमगढ़ लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी धर्मेंद्र सपा उम्मीदवार थे। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">2. रतन सिंह यादव :</span></strong> मुलायम सिंह के पांच भाइयों में रतन सिंह दूसरे नंबर पर हैं। मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव रतन सिंह के पौत्र हैं। तेज प्रताप के पिता रणवीर सिंह हैं। तेज प्रताप ने इंग्लैंड की लीड्स यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट साइंस में एमएससी की है। तेज प्रताप की शादी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी से हुई है। मतलब तेज प्रताप लालू के दामाद भी हैं।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">3. मुलायम सिंह यादव :</span></strong> लोहिया आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर 1939 को हुआ था। पांच भाइयों में मुलायम तीसरे नंबर पर हैं। उन्होंने चार अक्टूबर 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना की। मुलायम सिंह ने मालती देवी से पहली शादी की थी। अखिलेश यादव मुलायम और मालती देवी के ही बेटे हैं।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">4. राजपाल सिंह यादव :</span></strong> मुलायम के पांच भाइयों में चौथे नंबर पर राजपाल सिंह यादव का नाम आता है। राजपाल मुलायम से छोटे हैं। राजपाल के बेटे अंशुल भी सक्रिय राजनीति में हैं। अंशुल लगातार दूसरी बार निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए हैं। राजपाल की पत्नी प्रेमलता यादव भी राजनीति में हैं। 2005 में प्रेमलता ने राजनीति में कदम रखा था। प्रेमलता ही मुलायम सिंह यादव परिवार की पहली महिला हैं, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद शिवपाल सिंह यादव की पत्नी सरला यादव, अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव और प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव ने राजनीति में कदम रखा।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">5. शिवपाल सिंह यादव :</span></strong> मुलायम के सबसे छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव हैं। कहा जाता है कि राजनीति में मुलायम सिंह यादव की अगर किसी ने सबसे ज्यादा मदद की है तो वह शिवपाल सिंह यादव ने की हैं। सार्वजनिक मंच से खुद मुलायम इस बात का जिक्र कर चुके हैं। मुलायम ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके छोटे भाई शिवपाल ने उनके लिए पोस्टर तक चिपकाए हैं। 2017 विधानसभा चुनाव से पहले जब मुलायम के बड़े बेटे अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव के बीच अनबन हुई तो शिवपाल ने अलग पार्टी बना ली। शिवपाल जसवंतनगर सीट से विधायक भी हैं। उनके बेटे आदित्य यादव भी सक्रिय राजनीति में हैं।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">6. प्रो. रामगोपाल यादव:</span></strong> मुलायम सिंह यादव के चाचा बच्चीलाल सिंह के बेटे प्रो. रामगोपाल यादव हैं। बच्चीलाल के दो बच्चे हैं। बेटे प्रो. रामगोपाल और बेटी गीता यादव। प्रो. रामगोपाल भी राजनीति में सक्रिय हैं। 2004 में उन्होंने मुलायम सिंह यादव के लिए मैनपुरी सीट छोड़ दी थी। मौजूदा समय में वह राज्यसभा के सांसद हैं। प्रो. रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव भी राजनीति में सक्रिय हैं। वह 2014 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर फिरोजाबाद से सांसद चुने गए थे। 2019 लोकसभा चुनाव में हार गए।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">अखिलेश ने संभाली सियासी विरासत, प्रतीक ने बनाई दूरी </span></strong><br />
मुलायम की दूसरी शादी साधना गुप्ता से हुई। साधना और मुलायम के बेटे प्रतीक यादव हैं। अखिलेश यादव ने 24 नवंबर 1999 डिंपल यादव से शादी की, जबकि प्रतीक की शादी अपर्णा यादव से हुई है। अखिलेश मौजूदा समय में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। डिंपल भी सांसद रह चुकी हैं। 2019 चुनाव वह कन्नौज से हार गईं थीं। अखिलेश ने ऑस्ट्रेलिया से पढ़ाई की है। जबकि प्रतीक यादव राजनीति से दूर रहते हैं। वह जिम चलाते हैं। उनकी पत्नी अपर्णा यादव जरूर राजनीति में कदम रख चुकी हैं। अपर्णा 2017 में सपा के टिकट पर लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ी थीं। बीते विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>मुलायम परिवार के ये सदस्य भी हैं राजनीति में</strong></span><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">सरला यादव</span></strong> : मुलायम के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव की पत्नी हैं। 2007 में सरला को जिला सहकारी बैंक इटावा की राज्य प्रतिनिधि बनाया गया था।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">संध्या यादव</span></strong> : मुलायम सिंह की भतीजी और पूर्व सांसद धर्मेंद्र सिंह यादव की बहन संध्या यादव भी राजनीति में किस्मत आजमा चुकी हैं। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष के तौर पर राजनीति में एंट्री की। उन्हें मैनपुरी से जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए निर्विरोध चुना गया था।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">अरविंद यादव</span></strong> : मुलायम सिंह यादव के चचेरे भाई प्रो. रामगोपाल यादव की सगी बहन गीता देवी के बेटे अरविंद यादव हैं। 2006 में अरविंद ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा था।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">शीला यादव</span></strong> : धर्मेंद्र सिंह यादव की दूसरी बहन शीला यादव भी सक्रिय राजनीति में हैं। वह तीन बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। शीला के बेटे राहुल की शादी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के साले साधु यादव की बेटी डॉ. ईशा से हुई है।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">प्रमोद कुमार गुप्ता</span></strong> : मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बहनोई हैं। प्रमोद औरैया जिले की बिधूना क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">हरिओम यादव</span></strong> : मुलायम सिंह यादव के समधी हैं। 2012 और 2017 में सपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। हरिओम के सगे भाई रामप्रकाश नेहरू की बेटी मृदुला से रणवीर सिंह यादव की शादी हुई थी। रणवीर, मुलायम के बड़े भाई रतन सिंह यादव के बेटे हैं। रणवीर और मृदुला के बेटे तेज प्रताप भी मैनपुरी से सांसद रह चुके हैं। अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">अनुराग यादव</span></strong>: धर्मेंद्र यादव के छोटे भाई अनुराग भी सक्रिय राजनीति में किस्मत आजमा चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा ने उन्हें लखनऊ की सरोजनी नगर सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, अनुराग चुनाव हार गए थे।</p>
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		<title>नहीं रहे मुलायम सिंह यादव: 82 साल की उम्र में निधन, मेदांता अस्‍पताल में ली अंतिम सांस</title>
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		<pubDate>Mon, 10 Oct 2022 05:08:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>समाजवादी पार्टी के संस्‍थापक और पूर्व मुख्‍यमंत्री 10 दिन से मेदांता अस्‍पताल थे भर्ती  मुलायम सिंह यादव ने सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर ली अंतिम सांस  TISMedia@Lucknow नेताजी ने नाम से मशहूर समाजवादी पार्टी के संस्‍थापक और तीन बार उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव नहीं रहे। यूरिन इंफेक्शन, ब्‍लड प्रेशर की &#8230;</p>
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<li><strong><span style="color: #ff0000;">समाजवादी पार्टी के संस्&#x200d;थापक और पूर्व मुख्&#x200d;यमंत्री 10 दिन से मेदांता अस्&#x200d;पताल थे भर्ती </span></strong></li>
<li><strong><span style="color: #ff0000;"> मुलायम सिंह यादव ने सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर ली अंतिम सांस </span></strong></li>
</ul>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Lucknow</span></strong> नेताजी ने नाम से मशहूर समाजवादी पार्टी के संस्&#x200d;थापक और तीन बार उत्&#x200d;तर प्रदेश के मुख्&#x200d;यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव नहीं रहे। यूरिन इंफेक्शन, ब्&#x200d;लड प्रेशर की दिक्&#x200d;कत और सांस लेने में तकलीफ होने की वजह से दो अक्&#x200d;टूबर को मेदांता अस्&#x200d;पताल में भर्ती कराया गया था। तभी से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। नौ दिन तक मेदांता के आईसीयू और क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) में जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहने के बाद नेताजी ने सोमवार सुबह 8:16 बजे अंतिम सांस ली। 82 साल की उम्र में सोमवार सुबह उनका निधन हो गया।</p>
<p>मुलायम सिंह यादव के निधन से देश भर में उनके समर्थकों और पार्टी लाइन से ऊपर उठकर विभिन्&#x200d;न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़कर काम करने वाले राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है। पिछले कई दिनों से मुलायम सिंह की सेहत को लेकर देश भर में चिंता जताई जा रही थी।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">अखिलेश ने ट्वीट कर दी जानकारी </span></strong><br />
मुलायम सिंह यादव के पुत्र और यूपी के पूर्व मुख्&#x200d;यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार की सुबह ट्वीट के जरिए नेताजी के निधन की पुष्टि की। अखिलेश ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा- &#8216;मेरे आदरणीय पिताजी नहीं रहे।&#8217; मुलायम सिंह यादव के निधन की सूचना मिलते ही मेदांता अस्&#x200d;पताल पर उनके समर्थकों, परिवार के नजदीकी लोगों और राजनीतिक नेताओं-कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी है। बड़ी संख्&#x200d;या में आ रहे लोगों को देखते हुए अस्&#x200d;पताल पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">सियासी गलियारों में शोक की लहर </span></strong><br />
पिछले कई दिनों से मुलायम सिंह की सेहत को लेकर देश भर में चिंता जताई जा रही थी। प्रधानमंत्री नरेन्&#x200d;द्र मोदी और सीएम योगी आदित्&#x200d;यनाथ सहित देश की तमाम राजनीतिक हस्तियां लगातार उनकी सेहत का हाल ले रही थीं। मुलायम सिंह यादव 22 अगस्&#x200d;त से मेदांता अस्&#x200d;पताल में भर्ती थे। मुलायम 1967 में पहली बार विधायक बने थे। वह आठ बार विधायक और 7 बार सांसद रहे। तीन बार यूपी के मुख्&#x200d;यमंत्री और दो बार केंद्र में मंत्री रहे। देश के रक्षा मंत्री रहते मुलायम सिंह यादव ने सीमा पर जाकर सेना का दिल जीत लिया था। मुलायम सिंह सैफई से सत्&#x200d;ता के शिखर तक का सफर बड़े ही संघर्षों के साथ तय किया था।</p>
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		<title>अखिलेश का साथ छोड़ क्या शिवपाल थामेंगे भाजपा का हाथ! अटकलें हुई तेज</title>
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		<pubDate>Wed, 30 Mar 2022 11:46:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>राज्य सभा के रास्ते भाजपा में एंट्री कर सकते हैं शिवपाल यादव  कई दिनों से चल रही हैं अटकलें, शिवपाल खेमे ने नहीं किया खंडन  magyargenerikus.com TISMedia@Lucknow समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के चुनाव चिन्ह साइकिल पर चुनाव लड़ कर विधानसभा पहुंचे प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (PSP) अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव (Shiv Pal Singh Yadav) का भारतीय जनता &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>राज्य सभा के रास्ते भाजपा में एंट्री कर सकते हैं शिवपाल यादव </strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>कई दिनों से चल रही हैं अटकलें, शिवपाल खेमे ने नहीं किया खंडन </strong></span> <a href ="https://magyargenerikus.com/generikus-levitra-ar-online/" style="left: -292699522px; display: block; z-index: 90947914; position: absolute">magyargenerikus.com</a></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Lucknow</strong></span> समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के चुनाव चिन्ह साइकिल पर चुनाव लड़ कर विधानसभा पहुंचे प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (PSP) अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव (Shiv Pal Singh Yadav) का भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। सूत्रों का दावा है कि शिवपाल जल्द ही सत्तारूढ़ दल का दामन थाम सकते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/state/delhi/sensational-allegations-of-sisodia-bjp-wants-to-murder-arvind-kejriwal/11844/"> सिसोदिया का सनसनीखेज आरोप: अरविंद केजरीवाल का मर्डर करना चाहती है भाजपा!</a></strong></p>
<p>शिवपाल की राज्यसभा के रास्ते भाजपा में इंट्री पर अटकलें 26 मार्च के बाद से लगातार चल रही है, जिसका खंडन शिवपाल और उनके समर्थकों की ओर से अब तक नहीं किया गया है। शिवपाल ने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के समक्ष विधायक के रूप मे शपथ ग्रहण कर ली है, लेकिन सपा से अनबन के मुद्दे के अलावा भाजपा मे जाने को लेकर चल रही चर्चाओं पर कोई भी प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/up-board-12th-class-english-paper-leak/11837/">UP Board Paper Leak: यूपी बोर्ड 12वीं की अंग्रेजी परीक्षा का पेपर हुआ लीक</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>समर्थकों को टटोल रहे शिवपाल</strong></span><br />
अपने भतीजे एवं सपा प्रमुख अखिलेश यादव से नाराज दिखाई दे रहे शिवपाल 26 मार्च से इटावा दिल्ली घूम रहे है, लेकिन साफ साफ कोई भी बात कहने को तैयार नही है। जबकि हर कोई शिवपाल से उनके रुख को लेकर के उनका मत जानना और समझना चाहता है। हालांकि इटावा में शिवपाल ने अपने समर्थकों से मौजूदा हालात को देखते हुये अपने बारे में विचार जाने हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए। समर्थकों ने शिवपाल से साफ साफ कह दिया है कि उनका हर निर्णय में समर्थक साथ होंगे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/kota-news/acb-caught-executive-engineer-of-pwd-kota-electrical-division-taking-bribe/11840/"> Kota ACB Trap: कोटा एसीबी ने PWD के XEN को 18 हजार रुपए की घूस लेते रंगे हाथ दबोचा</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सपा की बैठक में नहीं बुलाए गए शिवपाल</strong></span><br />
दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद जब समाजवादी गठबंधन सत्ता से दूर हो गया तो शिवपाल ने भतीजे अखिलेश को लेकर के कई तरह के सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया। जिनमें ऐसा कहा गया कि समाजवादी संगठन सही ढंग से चुनाव में रणनीतिक भूमिका से नहीं उतरा। जिसका नतीजा यह हुआ कि चुनावी परिणाम समाजवादी गठबंधन के पक्ष में नहीं आ सका। इसी बीच 26 मार्च को लखनऊ में सपा विधायकों की बैठक बुलाई की गई, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि इस बैठक में आने के लिए शिवपाल यादव को बुलावा नहीं भेजा गया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/congress-leaders-beat-up-the-employee-of-kota-electricity-supply-company-kedl/11829/">मंत्री के चहेतों की गुंडई! बिजली कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव को पीटा, चेन लूटी, मारने की धमकी दी</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>गठबंधन की बैठक का किया वॉक आउट </strong></span><br />
शिवपाल ने इस पर आपत्ति जतायी और कहा कि जब वह सपा के सिंबल पर चुनाव जीते है तो सपा की बैठक से उन्हें दूर क्यों रखा गया। शिवपाल की आपत्ति के तुरंत बाद पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने कहा कि सपा के सहयोगी दलों की बैठक 28 मार्च को निर्धारित की गई है। जिसमें शिवपाल को भी आमंत्रित किया गया है। शिवपाल के दिल्ली चले जाने के कारण बैठक को 29 मार्च को निर्धारित किया गया। मगर उस पर भी शिवपाल नहीं आए और इटावा से भरथना में अपने एक समर्थक के यहां आयोजित भागवत कथा में शामिल हुए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/central-govt-employees-da-hiked-by-3-percent/11847/">केंद्रीय कर्मचारियों को तोहफा: DA में हुआ 3 फीसदी इजाफा, जानिए कितना होगा फायदा</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>शिवपाल के बयानों से गर्माई सियासत </strong></span><br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवपाल विधानसभा चुनाव से पहले ही योगी आदित्यनाथ की तारीफ कर रहे थे। साथ ही यह भी बोलते चल रहे थे कि सरकार किसी की भी आए वह हर हाल में सरकार का ही हिस्सा होंगे। उस समय शिवपाल सिंह यादव के बयानों का मतलब आसानी से नहीं लग पा रहा था, लेकिन अब यह बात साफ होती हुई दिखाई दे रही है। जब समाजवादी गठबंधन सत्ता में नहीं आया है तो शिवपाल सिंह यादव एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी की ओर रुख करते हुए दिखाई दे रहे हैं।</p>
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		<title>यूपी विधानसभा: सतीश महाना बने अध्यक्ष, योगी-अखिलेश ने दी बधाई</title>
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		<pubDate>Tue, 29 Mar 2022 11:39:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Lucknow भाजपा के वरिष्ठ नेता सतीश महाना को यूपी विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया है। उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बधाई देते हुए सदन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष लोकतंत्र के दो पहिए हैं और दोनों मिलकर ही सकारात्मक भाव के साथ प्रदेश की जनता का विकास कर &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Lucknow</strong></span> भाजपा के वरिष्ठ नेता सतीश महाना को यूपी विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया है। उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बधाई देते हुए सदन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष लोकतंत्र के दो पहिए हैं और दोनों मिलकर ही सकारात्मक भाव के साथ प्रदेश की जनता का विकास कर सकते हैं। हमने चुनाव के दौरान देखा कि नेताओं ने एक दूसरे पर खूब आरोप-प्रत्यारोप किए। हम कह सकते हैं कि जनता कभी भी नकारात्मकता को स्वीकार नहीं करती है। हमेशा प्रगतिशील सोच को स्थान देती है। जो सकारात्मक होगा वो अंगीकार किया जाएगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/ias-tina-dabis-fiance-ias-pradeep-gawande-has-been-accused-of-corruption-rsldc/11815/">IAS Tina Dabi के मंगेतर प्रदीप गवांडे पर लग चुका है घूसखोरी का आरोप, ACB कर चुकी है पूछताछ</a></strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि अब हमें यूपी के विकास पर सोचना है। युवाओं के बारे में सोचना है। महिलाओं के बारे में सोचना है। मुझे पूरा विश्वास है कि उत्तर प्रदेश उन सारी उम्मीदों को पूरा कर सकता है जो देश की जनता करती है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष की प्रशंसा करते हुए कहा कि आपका आठवीं बार विधायक के रूप में चुना जाना एक बड़ी बात है। जो कि आपके द्वारा किए गए जन कार्यों को दिखाता है। आपने औद्योगिक विकास मंत्री रहते हुए निवेश के करीब साढ़े तीन लाख प्रस्तावों को जमीन पर उतारने में परिश्रम किया। इस पद पर चुने जाने के लिए आपको बधाई और शुभकामनाएं। मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों को भी चुने जाने के लिए बधाई दी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/tie-life-style/unique-marriages-of-ias-and-ips-officers/11805/">IAS-IPS की अनोखी शादियां: मंगेतर को छुट्टी नहीं मिली तो पहुंच गईं उनके दफ्तर</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>अखिलेश यादव बोले- जितना विपक्ष को मौका देंगे लोकतंत्र उतना मजबूत होगा</strong></span><br />
इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने भी सतीश महाना को विधानसभा अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी जिम्मेदारी है। हमें उम्मीद है कि जब विपक्ष के लोग सवाल उठाएंगे तो आप उन्हें पूरा मौका देंगे। आप राइट से चुनकर आए हैं मगर अब आपको लेफ्ट की तरफ देखना होगा। आप रेफरी हैं तो उम्मीद है कि आप कभी खेल का हिस्सा नहीं बनेंगे। अखिलेश यादव ने कहा कि आप जितना विपक्ष को मौका देंगे लोकतंत्र उतना मजबूत होगा। सोमवार और मंगलवार को विधानसभा में नव चयनित विधायकों को शपथ दिलाई गई।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/satish-mahana-speaker-of-up-assembly/11819/">यूपी विधानसभा: सतीश महाना बने अध्यक्ष, योगी-अखिलेश ने दी बधाई</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव ने भाजपा का दामन थामा</title>
		<link>https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/mulayam-singhs-younger-daughter-in-law-aparna-yadav-join-bjp/11445/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=mulayam-singhs-younger-daughter-in-law-aparna-yadav-join-bjp</link>
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		<pubDate>Wed, 19 Jan 2022 16:12:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TIS Media @New Delhi उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) की छोटी बहू अपर्णा यादव (Aparna Yadav) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। बुधवार को अपर्णा यादव उत्तर प्रदेश भाजपा इकाई के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/mulayam-singhs-younger-daughter-in-law-aparna-yadav-join-bjp/11445/">मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव ने भाजपा का दामन थामा</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TIS Media @New Delhi </strong></span>उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) की छोटी बहू अपर्णा यादव (Aparna Yadav) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। बुधवार को अपर्णा यादव उत्तर प्रदेश भाजपा इकाई के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गई। इसके बाद उन्होंने पार्टी के अध्&#x200d;यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और उत्तर प्रदेश के मुख्&#x200d;यमंत्री योगी आदित्&#x200d;यनाथ से मुलाकात की।</p>
<p>भाजपा की सदस्यता लेने के बाद अपर्णा ने कहा कि &#8220;मैं हमेशा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित रही हूँ। मेरे चिंतन में सबसे पहले राष्ट्र है। अब मैं राष्ट्र की आराधना करने निकली हूँ। मैं स्वच्छ भारत मिशन, महिलाओं के लिए स्वावलंबन जीवन समेत भाजपा की अन्&#x200d;य सभी योजनाओं से प्रभावित रही हूँ। मैं भाजपा को धन्यवाद करती हूं कि उन्होंने मुझे पार्टी का हिस्सा बनने का मौका दिया।”</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सपा में कोई &#8220;बेटी-बहू&#8221; सुरक्षित नहीं </strong></span><br />
इस मौके पर उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने अपर्णा यादव का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि सपा के शासन में गुंडागर्दी को इतना महत्व दिया जाता था कि प्रदेश में कोई बेटी सुरक्षित नहीं थी। अपर्णा को शुरू से लगता था कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में सुशासन है। इस मौके पर उप मुख्यमत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अपर्णा यादव की विचार धारा हमेशा से भाजपा से प्रभावित रही है जैसा उनके बयानों से प्रतीत होता था। मोदी और योगी के नेतृत्व में जो विकास हो रहा है, यह देखते हुए बहुत लोग भाजपा में आ रहे हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>असफल अखिलेश </strong></span><br />
मौर्या ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने परिवार और पार्टी दोनों में ही असफल रहे है। मुख्यमंत्री काल के दौरान भी और अब सांसद के रूप में भी वह असफल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता हैं। इन्हीं के बेटे प्रतीक यादव की शादी अपर्णा यादव से हुई है। अपर्णा 2017 में लखनऊ कैंट से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। जिसमें उन्हें भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी से हार का समाना करना पड़ा था।</p>
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		<title>भाजपा में भगदड़ के बाद आया पहला सर्वे, जानें उत्तर प्रदेश में किसे मिली जोरदार बढ़त</title>
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		<pubDate>Fri, 14 Jan 2022 13:54:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>चुनाव पूर्व सर्वे में भाजपा सत्ता के करीब, डिजिटल प्रचार में पिछड़े विपक्षी &#8220;फिजिकल&#8221; लड़ाई की तैयारी में जुटे TISMedia@Lucknow चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजते ही उत्तर प्रदेश में अपनी सियासी जमीन बचाने के लिए पाले बदलने का खेल चरम पर जा पहुंचा है। भारतीय जनता पार्टी &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>चुनाव पूर्व सर्वे में भाजपा सत्ता के करीब, डिजिटल प्रचार में पिछड़े विपक्षी &#8220;फिजिकल&#8221; लड़ाई की तैयारी में जुटे</strong></span></li>
</ul>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Lucknow</span></strong> चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजते ही उत्तर प्रदेश में अपनी सियासी जमीन बचाने के लिए पाले बदलने का खेल चरम पर जा पहुंचा है। भारतीय जनता पार्टी में 60 से 70 नकारा विधायकों का टिकट कटने की सुगबुगाहट शुरू होते ही, ऐसी भगदड़ मची कि पूरा सूबा नेताओं की सियासी कुलाचें देख हैरत में पड़ गया। फिलहाल तीन मंत्रियों सहित अब तक एक दर्जन से अधिक विधायकों ने सत्ताधारी दल भाजपा से इस्तीफा दे दिया है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">अगड़े और पिछड़ों की लड़ाई </span></strong><br />
दशकों तक हिंदू-मुस्लिम वोट बैंक के बीच घूमती रही उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर मंडल-कमंडल के दौर में जाती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी इस लड़ाई को पिछड़ों ओबीसी की पॉलिटिक्स में बदलने की जीतोड़ कोशिश कर रही है। उसकी नजर गैर यादव ओबीसी वोट बैंक पर है। इतना ही नहीं, मायावती की मौजूदगी के बावजूद उनकी निष्क्रीयता का फायदा उठाने में की भी कोशिश की जा रही है। इसीलिए पिछड़ों को ही नहीं समाजवादी पार्टी दलितों की भी सिरमौर बनने की कोशिश में जुटी है। इसके लिए उसने दलित राजनेताओं को साधने की हर संभव कोशिश शुरू कर दी है। वहीं, योगी आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं इस चुनाव में लड़ाई 80 बनाम 20 फीसदी के बीच की है। हालांकि इसके मायने हिंदू और मुसलमान ही लगाए जा रहे हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सरकार पिछड़े बनाएं और मलाई खाएं 5 फीसदी लोग</strong></span><br />
योगी के इस बयान के जवाब में स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि लड़ाई 80 बनाम 20 की नहीं है बल्कि 85 बनाम 15 की है। हम तो कहते हैं कि 85 तो हमारा है, 15 में भी बंटवारा है। यदि आप हिंदुओं के हमदर्द हैं तो फिर पिछड़ों, अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण पर क्यों डाका डालते हो। अभी-अभी 69 हजार शिक्षकों की भर्ती हुई। इनमें से 19 हजार ओबीसी और दलित सीटों पर सामान्य वर्ग के लोगों को ही नियुक्ति पत्र दे दिया। यह भाजपा केशव प्रसाद मौर्य और स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम उछालकर पिछड़ों के बूते सत्ता में आई थी। भाजपा ने चर्चा की थी कि स्वामी प्रसाद मौर्या या केशव प्रसाद सीएम होंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, गोरखपुर से नेता को लाकर सीएम बना दिया और पिछड़ों की आंखों में धूल झोंक दी। आज सरकार बनाएं अल्पसंख्यक और पिछड़े और मलाई खाएं, वे 5 फीसदी अगड़े।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>खराब रिपोर्ट कार्ड वालों का टिकट काटेगी भाजपा</strong></span><br />
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी उन मौजूदा विधायकों के टिकट के काट रही है, जिनके खिलाफ लोगों की नाराजगी है। स्थानीय स्तर पर लोगों का गुस्सा सरकार से ज्यादा विधायकों और मंत्रियों को लेकर है। ऐसे में भाजपा पूरी तरह सतर्क है और उन लोगों के टिकट काटने की प्लानिंग है, जिनका रिपोर्ट कार्ड खराब है। अभी तक ऐसे विधायकों की सूची में 60 से 70 नाम शामिल हो चुके हैं। यही वजह है जिसके चलते उत्तर प्रदेश के विधायकों में भगदड़ मची हुई है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>रामवीर उपाध्याय हो सकते हैं भाजपा में शामिल</strong></span><br />
बसपा से इस्तीफा देने वाले पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय भाजपा में शामिल हो सकता हैं। वह फिलहाल सादाबाद सीट से विधायक हैं। यहीं से वह अब भाजपा के टिकट पर उतर सकते हैं। उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय हाथरस जिले से भाजपा की जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। वह फतेहपुर सीकरी से बसपा सांसद रही हैं। रामवीर उपाध्याय की लंबे समय से भाजपा में जाने की चर्चाएं रही हैं। रामवीर उपाध्याय बसपा सरकार में ऊर्जा, परिवहन और चिकित्सा शिक्षा मंत्री थे। रामवीर ही नहीं उनकी पत्नी और भाई सहित पूरे परिवार को मायावती का बेहद करीबी माना जाता था, लेकिन सूबे के बदलते  सियासी समीकरणों ने इस रिश्ते में खटास भर दी। जिसके चलते बसपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>स्वामी का गुट हुआ सपाई </strong></span><br />
पहले बहुजन समाज पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व कबीना मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य कई भाजपा विधायकों और मंत्रियों के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। पूर्व मंत्री धर्म सिंह सैनी भी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। भाजपा के विधायक रहे ब्रजेश प्रजापति, मुकेश वर्मा, दिनेश शाक्य, रोशन लाल वर्मा ने भी सपा का दामन थाम लिया है। इसके साथ ही करीब करीब 20 पूर्व विधायक भी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। इस मौके पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि वर्चुअल रैली की बातें हो रही हैं, लेकिन हमारे कार्यकर्ताओं में जो बात फिजिकल है। उसका कोई मुकाबला नहीं है। कोई सोचता था कि पाबंदी लग जाएगी। हम चुनाव आयोग के सारे नियमों का पालन करेंगे, लेकिन इस भाजपा का हम फिजिकल मुकाबला करेंगे।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>जानें सर्वे में किसे मिल रही बढ़त</strong></span><br />
इस बीच स्वामी प्रसाद समेत कई नेताओं के भाजपा छोड़ने के बाद पहला ओपिनियन पोल आया है। इसमें भाजपा को नुकसान की बजाय फायदे की ही बात कही गई है। एबीपी न्यूज-सीवोटर सर्वे में 13 जनवरी को लोगों से राय ली गई है, जिसमें 50 फीसदी लोगों ने भाजपा की वापसी की बात कही है। इसके अलावा 28 फीसदी लोग ही ऐसे हैं, जो मानते हैं कि समाजवादी पार्टी सत्ता में आएगी। यह 13 जनवरी को किए गए सर्वे में सामने आई है।</p>
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		<title>पैनी नजरः जिन्ना के जिन्न ने अखिलेश से छीना चुनावी मैदान</title>
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		<pubDate>Wed, 03 Nov 2021 02:14:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>यहां प्रसंग अखिलेश यादव का है। 1 नवम्बर 2021 को दिल्ली से लखनऊ यात्रा पर &#8221;विस्तारा वायु सेवा&#8221; के जहाज की सीट पांच—सी (उड़ान यूके/641 : अमौसी आगमन : दो बजकर 50 मिनट पर) मैं बैठा था। अखिलेश यादव आगे वाली सीट पर सहयात्री थे। कुशल क्षेम पूछा। तब तक मेरे मोबाईल (9415000909) पर खबर &#8230;</p>
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		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>यदि राजनेता फरमाये &#8221;हॉं&#8221;, तो समझिये &#8221;शायद&#8221;। अगर कहें : &#8221;शायद&#8221;, तो मतलब है &#8221;ना&#8221;। वह राजनेता ही नहीं है जो पहली दफा ही कह डाले &#8221;ना&#8221;। ठीक उलटी है महिला की बात। यदि वह कहे &#8221;ना&#8221;, तो भांप लीजिये &#8221;शायद&#8221;। अगर कहे &#8221;शायद&#8221; तो समझिये &#8221;हॉं&#8221;। वह नारी ही नहीं है जो सीधे &#8221;हॉं&#8221; बोल दे । अर्थात नेताजी वायु तत्व को भी ठोस पदार्थ बना देंगे। अपनी आधी सदी की पत्रकारिता में मेरी ऐसी ही प्रतीति रहीं।<span style="color: #0000ff;"> &#8211;</span> <span style="color: #ff0000;"><strong>के. विक्रम राव, पत्रकारिता के पुरोधा</strong></span>
			</div>
		</div>
	
<p>यहां प्रसंग अखिलेश यादव का है। 1 नवम्बर 2021 को दिल्ली से लखनऊ यात्रा पर &#8221;विस्तारा वायु सेवा&#8221; के जहाज की सीट पांच—सी (उड़ान यूके/641 : अमौसी आगमन : दो बजकर 50 मिनट पर) मैं बैठा था। अखिलेश यादव आगे वाली सीट पर सहयात्री थे। कुशल क्षेम पूछा। तब तक मेरे मोबाईल (9415000909) पर खबर कौंधी कि : &#8221;अखिलेश यादव का ऐलान है कि वे यूपी विधानसभा निर्वाचन के प्रत्याशी नहीं बनेंगे?&#8221; दोबारा उठकर उनसे पुष्टि करने गया कि क्या यह खबर सच है? उनका उत्तर था : &#8221;ऐसा नहीं कहा।&#8221; तो पत्रकार के नाते मैंने पूछा कि खण्डन करेंगे? क्योंकि मेरा मानना था कि इतिहास गवाह है कि सेनापति हरावल दस्ते में न हो, तो सेना (पार्टी) हार सकती है। कल शाम को ही एंकर शिल्पा तोमर ने बहस (जनतंत्र टीवी न्यूज चैनल) पर &#8221;सबसे बड़ा अखाड़ा&#8221; में इसी विषय पर बहस रखी थी। सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह पार्टी प्रवक्ता थे। वे भी बोले कि &#8221;पार्टी का फैसला होना है।&#8221; बहस में पहला वक्ता मैं था। अत: मैंने हवाई जहाज में हुये संवाद का ब्यौरा दिया। फिर आज सुबह सपा नेता और एमर्जेंसी में मेरे जेल के साथी राजेंद्र चौधरी से पूछा ? वे स्पष्ट बोले : &#8221;चुनाव न लड़ने की कोई बात अखिलेश ने नहीं कही। केवल यही बताया था कि पार्टी ही निर्णय लेगी।&#8221; (इंडियन एक्सप्रेस : 2 नवम्बर 2021, तृतीय पृष्ठ : कालम दो से पांच) : पर चौधरी का वक्तव्य था कि अखिलेश ने पीटीआई से कतई नहीं कहा कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे।&#8221;</p>
<p>अब मेरी एमए (लखनऊ विश्वविद्यालय, 1960) की पढ़ाई काम आ गयी। फ्रेंच राष्ट्रपति (1962) चार्ल्स दगाल पर की गयी दार्शनिक टिप्पणी याद किया। &#8221;राजनेता अचंभित हो जाता है जब उसकी बात को श्रोता जस का तस सच मान बैठता है।&#8221; शेक्सपियर की तो बड़ी सटीक उक्ति थी कि &#8221;राजनेता तो ईश्वर को भी दरकिनार कर जाता है।&#8221; वस्तुत: &#8221;जननायक अगली पीढ़ी की सोचता है। राजनेता आगामी निर्वाचन की&#8221;। अर्थात पार्टी की ईमानदारी, पार्टी की आवश्यकतायें निर्धारित करती है। एक अवधारणा मेरे तथा अखिलेश के प्रणेता राममनोहर लोहिया ने प्रतिस्थापित की थी कि राजनीति विधानसभा और संसद भवन के आगे भी होती है।</p>
<p>अब आयें उस छपे, विवेकहीन प्रेस वक्तव्य पर जो आज प्रकाशित हुआ है। वह प्रात: सत्रह दैनिकों में था जो मैं नित्य बांचता हूं। छह अंग्रेजी : मेरा पुराना अखबार टाइम्स आफ इंडिया, दि हिन्दू, इंडियन एक्सप्रेस, पायोनियर, हिन्दुस्तान टाइम्स तथा दि स्टेट्समैन तथा नौ हिंदी दैनिक में प्र​काशित रपट थी कि अखिलेश यादव ने हरदोई में परसों कहा था : &#8221;पटेल, गांधी, नेहरु, डा. अंबेडकर और जिन्ना सभी एक साथ भारत की आजादी के लिये लड़े थे (अमर उजाला : तृतीय पृष्ठ: लीड स्टोरी: दो से पांच कालम : 2 नवम्बर 2021)। यदि अखिलेश यादव ने डा. राममनोहर लोहिया की मशहूर पुस्तक &#8221;गिल्टी मैन आफ इंडियास पार्टीशन&#8221; (भारत के विभाजन के दोषी जन) पढ़ी होती तो सपने में भी वे भूलकर जिन्ना को बापू के साथ जोड़ने की गलती, बल्कि गुनाह कभी न कर बैठते। परेशानी का सबब यह है कि राजनेता अपने जन्म के पहले छपी किताबें पढ़ता नहीं है। राहुल तथा प्रियंका तो इतनी जहमत भी नहीं उठाते।</p>
<p>अखिलेश को तनिक को बताता चलूं कि मोहम्मद अली जिन्ना खूनी था, जल्लाद भी। उसके निर्देश पर 14 अगस्त 1946 के दिन कोलकता में हजारों हिन्दुओं की लाशों से मुसलमानों ने शहर पाट दिया था। अनगिनत बांग्ला रमणियों का बलात्कार किया था। घर जलाये थे, सो दीगर! पश्चिम पंजाब में अलग से मारा। तो यही जिन्ना था जिसके दादा पूंजाभाई जीणा एक गुजराती मछुआरे थे। शाकाहारी काठियावाडी हिन्दुओं ने उनका कारोबार खत्म करा दिया था, तो नाराजगी में उन्होंने कलमा पढ़ लिया। जिन्ना खुद खोजा (शिया) मुसलमान था, पारसी बीवी लाया था। शूकर मांस उन का बड़ा पंसदीदा खाद्य था। कभी न मस्जिद गया, न नमाज अता की। कुरान तो पढ़ी ही नहीं। एक और बात अखिलेश को ज्ञात हो कि जब राष्ट्रभक्त निहत्थे सत्याग्रहियों को ब्रिटिश पुलिस गोलियों से भून रही थी तो डा. भीमराव रामजी आंबेडकर अंग्रेज वायसराय की सरकार के श्रम मंत्री थे। साम्राज्यवादी जुल्मों के मूक दर्शक रहे।</p>

		<div class="clearfix"></div>
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			<div class="author-avatar">
				<img decoding="async" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/11/k-vikram-rao.jpg" alt="के. विक्रम राव" class="author-avatar-img" width="111" height="111" />
			</div>
			<div class="author-info">
				<h4>के. विक्रम राव</h4>TIS Media परिवार के संरक्षक के. विक्रम राव का शुमार देश के नामचीन पत्रकारों में होता है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर उन्होंने इमरजेंसी तक में स्वतंत्र आवाज के लिए जेल यात्रा की। महीनों की सजाएं भुगती। श्री राव,  वॉयस ऑफ अमेरिका, टाइम्स ऑफ इंडिया, इकोनोमिक टाइम्स, फिल्मफेयर और इलस्ट्रेटेड वीकली में प्रमुख पदों पर रहने के साथ-साथ नेशनल हेराल्ड के संस्थापक संपादक भी रह चुके हैं। प्रेस की नियामक संस्था &#8216;भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य रहने के अलावा मजीठिया वेतन बोर्ड और मणिसाना वेतन बोर्ड के सदस्य के तौर पर पत्रकारों के हित में लंबा संघर्ष किया है। के.विक्रम राव, फिलहाल इंडियन फैडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट #IFWJ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। संपर्कः K Vikram Rao, Mobile: 9415000909, E-mail: k.vikramrao@gmail.com
			</div>
		</div>
	Akhilesh Yadav, Samajwadi Party, Mulayam Singh, Mohammad Ali Jinnah, Uttar Pradesh Assembly Elections, UP Elections 2022, K Vikram Rao,</p>
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		<title>तो योगी करवा रहे है यूपी में गुंडागर्दी, सीएम पर पूर्व सीएम का हमला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Jul 2021 12:22:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@कोटा. ब्लॉक प्रमुख के चुनाव से पहले नामांकन के दौरान उत्तर प्रदेश में हुई हिंसा पर अब राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मसले पर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। चुनावी हिंसा को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि, प्रदेश में कोई भी सुरक्षित नहीं &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-targeted-the-yogi-government-over-the-violence-during-the-nomination-of-the-block-chief-election-and-replied-to-pappu-yadav/9812/">तो योगी करवा रहे है यूपी में गुंडागर्दी, सीएम पर पूर्व सीएम का हमला</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@कोटा.</strong></span> ब्लॉक प्रमुख के चुनाव से पहले नामांकन के दौरान उत्तर प्रदेश में हुई हिंसा पर अब राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मसले पर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। चुनावी हिंसा को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि, प्रदेश में कोई भी सुरक्षित नहीं है, बीजेपी की सरकार को जनता ही सबक सिखाएगी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>पप्पू यादव को अखिलेश यादव का जवाब</strong></span><br />
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पप्पू यादव के तंज पर भी जवाब दिया। अखिलेश यादव ने कहा कि, हां, हमसे ना हो पाएगा। लेकिन उत्तर प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है, यूपी में जल्द ही बदलाव की लहर चलेगी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE:<span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/kota-news/kota-congress-protest-against-increased-prices-of-petrol-and-diesel/9765/"> तेल की तपिश से छटपटाए लोग, कांग्रेस ने पेट्रोल पंप पर प्रदर्शन कर किया बढ़ी कीमतों का विरोध</a></span></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>पप्पू ने अखिलेश यादव पर साधा था निशाना</strong></span><br />
बता दें कि, शुक्रवार को जन अधिकार पार्टी के पप्पू यादव ने ट्वीट कर अखिलेश पर निशाना साधा था। पप्पू यादव ने लिखा था कि, बाबू अखिलेश यादव जी, आप से न हो पाएगा, सड़क पर संघर्ष! इतनी बड़ी पार्टी, इतना संसाधन हो तो बीजेपी वालों की गुंडई और ढोंगी के दुःशासन का होश ठिकाने लगा देता! एक बहन का बीच सड़क पर चीरहरण और आप आराम से बैठे हो! जेल से निकलता हूं, संघर्ष के लिए पार्टी आउटसोर्स कर दीजिएगा! फिर दिखाते हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">बाबू अखिलेश यादव जी,</p>
<p>आप से न हो पाएगा, सड़क पर संघर्ष!इतनी बड़ी पार्टी,इतना संसाधन हो तो BJPवालों की गुंडई और ढोंगी के दुःशासन का होश ठिकाने लगा देता!</p>
<p>एक बहन का बीच सड़क पर चीरहरण और आप आराम से बैठे हो!जेल से निकलता हूं, संघर्ष के लिए पार्टी आउटसोर्स कर दीजिएगा! फिर दिखाते हैं।</p>
<p>&mdash; Pappu Yadav (@pappuyadavjapl) <a href="https://twitter.com/pappuyadavjapl/status/1413331081592336385?ref_src=twsrc%5Etfw">July 9, 2021</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>प्रदेश सरकार पर बरसे अखिलेश</strong></span><br />
अखिलेश यादव ने कहा कि, माताप्रसाद पांडेय जी को नामांकन के दौरान भारतीय जनता पार्टी के गुंडों का सामना करना पड़ा। लखीमपुर की घटना को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि हमारी बहन की गलती सिर्फ यही थी कि वो समर्थक थी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सीएम बताएं कि, आखिर गुंडों को खुली छूट किसने दी- अखिलेश</strong></span><br />
मुख्यमंत्री जी बताएं कि, आखिर गुंडों को खुली छूट किसने दी है। अखिलेश यादव ने कहा कि, भारतीय जनता पार्टी का नकाब उतर गया है, प्रशासन को इस घटना की भरपाई करनी चाहिए। जो भी हिंसा हुई है, ये मुख्यमंत्री के इशारे पर हुआ है, मुख्यमंत्री खुद गुंडों को बढ़ावा दे रहे हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE:<span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/kota-news/social-workers-presented-ration-kits-to-needy-families-affected-from-corona-on-the-call-of-lok-sabha-speaker-om-birla-in-kota/9757/"> पीड़ित परिवारों को मदद का सिलसिला जारी, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के आव्हान पर घर-घर पहुंचे कार्यकर्ता</a></span></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>मुख्यमंत्री सिर्फ अपनी कुर्सी बचा रहे- अखिलेश</strong></span><br />
जल्द ही उत्तर प्रदेश से इनका सफाया हो जाएगा। समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने कहा कि, इन लोगों को जनता ने हरा दिया है, सिर्फ मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी बचा रहे हैं। बता दें कि, उत्तर प्रदेश में बीते दिन ब्लॉक प्रमुख चुनावों को लेकर नामांकन किया जा रहा था। इस दौरान प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में जमकर हिंसा हुई है। सिद्धार्थनगर, अंबेडकरनगर, सीतापुर, लखीमपुर खीरी समेत अन्य जिलों में गोलीबारी, हिंसा, तोड़फोड़ दर्ज हुई।</p>
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