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	<title>Article By Dr Dheeraj Soni Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>Article By Dr Dheeraj Soni Archives - TIS Media</title>
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		<title>निश्चित उद्देश्य और एकाग्रता के साथ युवा अपना भविष्य रचे</title>
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		<pubDate>Sun, 16 May 2021 09:03:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>युवा पीढ़ी के किस्से कहानियां यहाँ तक की जिंदगी के अद्भुत पल भी मोबाइल में ही बंद हो कर रहे गये है। ऐसे में ये सपना देखना की उनका कल कैसा होगा वह अंधकार में है वे आज की तो छोड़ो कल की भी एक सुरक्षित योजना नहीं बना पा रहे है। उनके सामने अपने &#8230;</p>
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		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>आज का युवा कल का नागरिक है, परन्तु आजकल युवा पीढ़ी की सोच तुरंत दान और महाकल्याण पर ही आधारित हो गयी है। न ही वो काम करना चाहते है न उसके परिणाम पर अधिक ध्यान देना ही नहीं चाहते  है। आज के परिवेश को ना जाने क्या हो गया है? सोच कर बड़ा ही आश्चर्य होता है कि जिस युवा पीढ़ी पर सब को नाज़ हुआ करता था आज उसी की सोच पर हमें स्वयं ही पछतावा होता नज़र आता है। नये-नये खोज के परिणाम हमारे सामने आये तो सही लेकिन कभी ना सोचा था कि उसके साथ-साथ उसके दुष्परिणाम भी हमारे सामने होंगे। युवा मोबाइल के चंद अक्षरों को पढ़ व टाइप कर अपनी ज़िन्दगी को चलाये जा रहा है। रिश्ते की समझ नहीं रह गई है। रिश्ते की गहराई को समझने वाले माता-पिता को आज की संताने विलन और न जाने क्या-क्या समझने लगी है? किससे कहे, यहाँ अपना कुछ भी समझ नहीं आता ?
			</div>
		</div>
	
<p>युवा पीढ़ी के किस्से कहानियां यहाँ तक की जिंदगी के अद्भुत पल भी मोबाइल में ही बंद हो कर रहे गये है। ऐसे में ये सपना देखना की उनका कल कैसा होगा वह अंधकार में है वे आज की तो छोड़ो कल की भी एक सुरक्षित योजना नहीं बना पा रहे है। उनके सामने अपने भविष्य और करियर की साफ तस्वीर ही नहीं है | युवा ये निश्चय ही नहीं कर पा रहा है की उसे भविष्य में करना क्या है ? सुरक्षा के लिये सीमा पर तैनात सुरक्षा प्रहरी देश की खातिर अपनी जान को खतरे में डाल कर देश को सुरक्षित रखे हुये है। इन युवाओं से प्रश्न पूछना चाहिए की आपने ज़रा सा भी इनके जज्बे को सलाम किया है? क्या कभी किस शहीद की याद में आंसू बहा कर उनके गम में अपना गम मिला कर देखा? युवा की संवेदना केवल सोशल मीडिया पर केवल वाक् युद्ध करने तक सीमित रह गई है | यह समय का बदलाव ही तो है जिसने हमें इस दौर पर आज लाकर खड़ा कर दिया है। बार-बार यही ख्याल ध्यान में आता है कि ना जाने कब वो पुराने दिन वापस लौट कर आयेंगे और हमारा जीवन फिर उन पुराने दिनों की और लौट आयेगा।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">READ MORE:<span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/entertainment/art-and-literature/main-kahanikar-nahin-jebkatra-hoon-story-by-saadat-hasan-manto/8328/">मैं कहानीकार नहीं, जेबकतरा हूँ : सआदत हसन मंटो</a></span></span></strong></p>
<p>युवा पीढ़ी को चाहिए की वे घर के अपने जीवित भगवान को पहले पूजे क्योंकि अपने मंदिर में रखे भगवान को बाद में भी पूज सकते है। घर के भगवान हमारे माता-पिता है उनके प्रति हमारी अटूट आस्था होनी चाहिये ताकि उनका आशीर्वाद हमें हमारे जीवन में आगे बढ़ने के लिये हमेशा हमारा मार्गदर्शन करता रहे | चाहे कुछ भी हो जाये घर के इन भगवान को कभी ना रूठने ना दे। युवाओं को चाहिए की बचपन में जिन माता-पिता ने आपका हाथ थामा था आज उनके इस बुढ़ापे में उनका हाथ थाम कर सिर्फ यह कहना कि आप उनके साथ है। उनका बुढ़ापा काटने के लिये यही शब्द पर्याप्त है। क्योंकि इस अवस्था में उन्हें ना तो पैसों का और ना कोई दूसरा लालच उनके मन में होता है। उनके हाथ हमेशा आपके लिये दुआ में उठेगें। आधुनिकता की दौर में हम शामिल तो हो लेकिन अपने फर्ज को निभाने से कभी पीछे ना हटे। आज का समय इतना बदल चुका है। लोगों के लिये रिश्ते कुछ कागज के चंद टुकड़ों के तरह से ही बनकर रह गये है। जो कुछ ही क्षण में ही बिखर के रह जाते है, इसलिये उन रिश्तों की अहमियत समझे जिन्हें आपको अपनी ज़िन्दगी में निभाना है। सोच ऐसी रखो कि सामने वाले को आपके ऊपर गर्व महसूस हो। हर रिश्ता अपने आप में पवित्र होता है बस आपकी सोच अच्छी होनी चाहिये और आपको उस रिश्ते को देखने का नजरिया सकारात्मक होना चाहिये। माता-पिता के द्वारा निर्धारित रिश्तों को निभाने की अहमियत हम सभी में आवश्यक रूप से होनी चाहिये।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-16-may/8322/">16 मई: दिन जब सिक्किम बना देश का 22वां राज्य</a></span></span></strong></p>
<p>किसने क्या कहा और क्यों कहा यह सोचने पर ध्यान देने से अच्छा है कि हम केवल अपने कर्म पर ही ध्यान दे ताकि हमारी नज़र हमेशा सफलता की ओर रहे जिसमें हमारे प्रयासों से सफलता हमारे कदमों को अवश्य चूमें | सुनो सबकी, लेकिन सही सोच को अपने दिमाग से सोचो कि सही क्या है, वरना दूसरों को सोच से ऐसा ना हो जाये कि हमारा जीवन पूर्णतया ख़राब हो जाये | वक़्त का दस्तूर है कि वक़्त पर सलाह देने वाले तो बहुत मिल जायेगें लेकिन वक़्त ख़राब होने पर तमाशा देखने वाले और तमाशा देख तालियाँ बजानेवाले ही रह जायेंगे। एक सीमा तक दोस्तों की दोस्ती भी अच्छी है। जिस अवस्था में इस दोस्ती की शुरुआत होती है उसे कहते है लकड़पन की अवस्था जिसमें हर तरह के दोस्त मिल जाते है जो चाहे तो आपकी दुनिया को बदल दे और चाहे तो आपकी दुनिया को ही उजाड़ कर रख दे। इस संसार में ऐसे दोस्त मिलना भी बहुत मुश्किल है जो आपके आंसूओं को एक ही नज़र में तुरंत पहचान ले और आपके दुःख में कंधे से कंधे मिलाकर खडा हो जाना उसका सिर्फ इतना करना ही आधी परेशानियों को दूर करने के समान हो जायेगा। एक बार अच्छे दोस्त से दोस्ती हो जाये तो इसे निभाना दोनों ही दोस्तों का काम है। एक दूसरे पर विश्वास होना भी जरुरी भी है। विश्वास के आधार पर ही दोस्ती पूरे जीवन पर निभाई जा सकती है। सोच अच्छी होनी चाहिये ताकि किसी के भी सामने आपकी दोस्ती की मिसाल दी जा सके |कुछ रिश्ते और उनकी सोच समय से पहले ही बड़ी हो गयी है। जीवन ने कुछ ना कुछ ऐसा समय से पहले ही दिखा और सिखा दिया कि उनका बस यही कहना होता है कि बहुत हो गया अब तो भगवान माफ़ करे, उनकी कब तक ऐसे ही परीक्षा होती रहेगी, कभी तो उन परीक्षाओं का अंत आयेगा | परिणामों के इंतज़ार में ज़िन्दगी यूँ ही चलती जा रही है। जिंदगी के इस सबक में उनकी सोच बहुत ही अधिक बदल चुकी है। जिस पर विश्वास किया उसी से धोखा मिला और ना जाने क्या-क्या आरोप-प्रत्यारोप का सामना करना पड़ा जाता है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/kota-news/stress-management-committee-of-kota-a-unique-initiative-to-improve-mental-health-of-corona-patients-and-their-families/8249/">ये हौसला कैसे झुकेः कोरोना के आगे हथियार डाल चुके लोगों को लड़ना सिखा रहे “कर्मवीर”</a></span></span></strong></p>
<p>आज का समय वक़्त के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का है और इसके साथ-साथ अपनी सोच को भी संकीर्णता के पर्दे से बाहर निकलने का है। माना कि युवा पीढ़ी की सोच बदल चुकी है, लेकिन उसे बदलने में कहीं ना कहीं कुछ जिम्मेदारी हमारे वातावरण की भी हो जाती है। इसलिये हमें अपनी सोच में अपनी समझ को भी शामिल अवश्य कर लेना चाहिये। स्क्रीन और रियल लाइफ में अंतर को समझे और अच्छी तरह से समझाएं कि जो सब कुछ स्क्रीन पर दिखाई दे रहा है वो रियल लाइफ में भी हो ऐसा हर बार संभव नहीं होता है। इसलिये इन दोनों लाइफ को अपने जीवन में अलग ही रखे ताकि आपका अपना जीवन सुखमय बन सके। युवाओं का दौर है लेकिन इसका जो भी मायने हो, उसे हमें हर हाल में सुरक्षित रखना ही होगा और इसके साथ ही एक नया कल हमारे सुनहरे भविष्य के लिये हमारा बाहें फैलाये इंतज़ार कर रहा होगा बस उसका इंतज़ार कीजिये उसका फ़ल अवश्य ही मीठा होगा चाहे कुछ पल की देरी ही सही कोई बात नहीं एक नई सोच एक नया आयाम हमें जरुर देगी। बस आप से अपेक्षा है कि आप अपने जीवन में कभी भी अपने मार्ग से भटके नहीं और एक निश्चित उद्देश्य को ध्यान में रखते हुये आगे बढते जाये सफलता अवश्य ही मिलेगी, सोच अच्छी रखे।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">लेखक:</span><span style="color: #0000ff;"> डॉ. धीरज सोनी </span></strong><br />
<strong><span style="color: #0000ff;">प्राचार्य व निदेशक सोनी क्लासेज</span></strong></p>
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		<title>फिर भी ना हारे हौसला, चाहे जितनी मुश्किल हो जिंदगी</title>
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		<pubDate>Thu, 06 May 2021 13:04:22 +0000</pubDate>
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		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>जिंदगी ना जाने कैसी हो गयी है ना इस पल का पता ना ही आने वाले का पता और ना जाने कौनसा पल जिंदगी का आखिरी हो कुछ कहा नहीं जा सकता है। ऐसा लगता है कि मानो उधार की जैसी जिंदगी हो गयी है, उधार पूरा और जिंदगी ख़तम। वो ईश्वर जिसने इस सृष्टि की रचना की थी तो शायद उसने भी न सोचा होगा कि ऐसा भी वक़्त आयेगा कि हम अपनों के साथ हो कर भी उनसे बहुत दूर हो जायेंगें। ईश्वर ने इसलिए तो परिवार बनाये थे एक दूसरे के साथ सुख और दुःख बाँट सके और न जाने कैसा वक़्त आ गया है अंतिम पलों में कोई साथ ही नहीं दे पा रहा है। वही कहावत सही साबित हो रही है कि अकेले ही आये है और अकेले ही जा रहे है। ना तो अपनों को अपनों का कंधा नसीब हो रहा है, एक अनजाना व्यक्ति ही अंतिम समय में साथ दे रहा है।
			</div>
		</div>
	
<p>कोरोना का कहर इस कदर इस दुनिया में छा गया है कि कोई आपस में एक दूसरे से मिलने से डरने लगा है। एक अलग सा संदेह उसके मन में चलता रहता है कि में जिस व्यक्ति से मिल रहा हूँ वो सुरक्षित तो है ना। इस अनजाने डर से हम एक दूसरे से दूर होते जा रहे है। हर व्यक्ति या तो अपने आप को बचाना चाहता है या फिर दूसरे की सुरक्षा चाहता है। ऐसा लगने लगा है जैसे कि हवा में ही जहर घुल गया है। इसी कारण व्यक्ति बाहर निकलने से डर रहा है।</p>
<p>एक आसान दिखने वाली ज़िन्दगी आज इतनी मुश्किल हो गयी है एक सांस के लिये आज दर दर भटकना पढ़ रहा है। बड़ा ही मुश्किल दौर चल रहा है जो बच गया है वही सिकंदर बन रहा है। लोगों को आक्सीजन ही समय समय पर नहीं मिल पा रही है लेकिन उसकी कालाबाजारी का सच लोगों के सामने आ रहा है। ऐसे लोगों ने क्या अपने जीवन के बारे में सोचा है कि कभी हमारे साथ भी ऐसा हो सकता था? सच्चाई एक न एक दिन सामने तो आनी है जब असहास होगा कि जीवन में सब कुछ पैसा नहीं होता कुछ इंसानियत भी होती है जो वक़्त बे वक़्त काम आ ही जाती है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-lalit-gautam-on-unemployment-due-to-covid-19-in-india/7884/"><strong>रोजगार पर कोरोना का कहर</strong></a></span></p>
<p>कैसी तो लोगों की सोच हो गयी है कि अपनेपन का आभास दिखाने वाले अवसर मिल नहीं पा रहा है और जिन्हें मिल रहा है उसमें उन्हें किसी न किसी प्रकार का स्वार्थ दिख रहा है। कुछ तो ऐसे भी जो इस महाबीमारी में भी अपनी जान की परवाह न कर दूसरों के लिये अपनी जान पर खेल रहे है। जिनका कोई सहारा नहीं है वो उनका सहारा बन रहे है। ऐसे लोगों की दुआ ही उनके उज्जवल भविष्य में सार्थक साबित होगी ऐसा विश्वास मन में बना हुआ है। इन लोगों से कभी आप धन्यवाद नहीं हमेशा आशीर्वाद मांगो जो हमेशा आपके साथ रहे।</p>
<p>जो बच्चे अपने माता-पिता से दूर है किसी न किसी कारण से या भविष्य निर्माण को लेकर या रोज़गार की तलाश में वो उनसे मिल नहीं पा रहे है वक़्त का कैसा सितम आज आ गया है कि जिस पिता ने अपने लाडले को इतने नाजों से पाला आज वो ही अपने पिता को बेसहारा छोड़कर चला गया है वो भी इस कोरोना की लहर का शिकार बन गया या फिर उसके माता-पिता दोनों ही स्थिति में एक दूसरे के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाये। जो कल साथ थे आज वे एक दूसरे से हमेशा-हमेशा के लिये बिछुड़ गये कैसी आपदा आ पड़ी है।</p>
<p>पेट भर खाना खाना भी मुश्किल हो गया है आये दिन लोगों को इतना ज्यादा संघर्ष करना पड़ रहा है कि लोग दाने-दाने को तरस रहे है। जिन लोगों से उम्मीद की वो सहारा बनेगा वो ही आज इस कठिन समय बेसहारा कर रहे है। इस स्थिति वे दूसरों में सहारा तलाश कर रहे है। लेकिन इस विपदा में कुछ ही लोग आगे आ रहे है और कुछ तो केवल मौके का फायदा उठाने में लग गये है। प्राइवेट संस्थाओं में काम करने वाले इसका शिकार अधिक हो गये है। एक तो कोरोना का कहर और दूसरा उनका इस विपदा में समय पर वेतन न देना। कभी &#8211; कभी तो ऐसा लगता है कोरोना का सबसे अधिक असर उन पर ही पड़ा है।</p>
<p>ऐसा भी क्या पैसा कमाया कि अंतिम समय में कुछ भी काम नहीं आया है। अपनों का साथ पाने के लिये जीवन भर उसमें आस तलाश करते रहे और आज जब अंतिम समय ऐसा आया कि अपने ही लोग पास नहीं आ पाये। सब कुछ भूल गये इस आसान ज़िन्दगी को जीते-जीते यह भूल गये थे कि कभी ऐसा भी समय आएगा कि जीवन जीना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जायेगा।</p>
<p>वक़्त का ना जाने कैसा सितम आ गया है कौन सा एक नशा हवा में घुल गया है न जाने कब और किस पर असर कर जाये कुछ कहा नहीं जा सकता है आज है कल न हो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। इसलिए हर पल खुश रहो और खुशनुमा पलों को याद करो जो आपने अपने परिवार के साथ बिताये है। छोटी-छोटी बातों में खुशियों की तलाश करो हो सकता है कि वो खुशियाँ ही आपके दुःख को भुलाने में आपकी मदद कर सके।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-shobha-kanwar-on-what-teachers-parents-and-children-should-do-in-this-covid-19-situation/7880/"><strong>कोरोना काल मे बच्चे व शिक्षक की भूमिका</strong></a></span></p>
<p>बड़ी ही अजीब ज़िन्दगी हो गयी सभी की न जाने किस-किस के उधार पर चल रही है और ना जाने किस जन्म में वो उधार भी चुक पायेगा। वक़्त के साथ और सावधानी से चलने में ही भलाई है और उसके साथ ही अपने जीवन को हमें सुधारने की आवश्यकता है और उस पर अमल करने की आवश्यकता है। अपने संकट मोचन को हमेशा याद करते रहे हो और जब भी अपने घर से बाहर निकलो तो उन्हें नमन कर निकलो कि हे प्रभु आप ऐसा कवच मेरे और जिससे से भी मैं मिलूं उसके चारों और बना दो ताकि आपका यह कवच इस महाबीमारी से हमारी रक्षा करे। आज के समय ऐसा बन गया है कि घर में रहे और सुरक्षित रहे और किसी के लिये भी किसी प्रकार के दुःख का कारण ना बने और जरूरत पर जरुरतमंदो का आगे बढ़ कर साथ दे सके। ऐसी ही आशीर्वाद बनाये रखना प्रभु।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">लेखक &#8211;</span> <span style="color: #0000ff;">डॉ. धीरज सोनी</span></strong></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-dheeraj-soni-on-how-uncertain-life-has-become-due-to-covid-19/7892/">फिर भी ना हारे हौसला, चाहे जितनी मुश्किल हो जिंदगी</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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