<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Mamata Banerjee Archives - TIS Media</title>
	<atom:link href="https://tismedia.in/tag/mamata-banerjee/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://tismedia.in/tag/mamata-banerjee/</link>
	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
	<lastBuildDate>Thu, 28 Oct 2021 06:37:27 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/04/cropped-tis-media-logo-scaled-2-32x32.jpg</url>
	<title>Mamata Banerjee Archives - TIS Media</title>
	<link>https://tismedia.in/tag/mamata-banerjee/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>गलतफहमी में जी रहे राहुल गांधी, नहीं समझ रहे मोदी की ताकत: प्रशांत किशोर</title>
		<link>https://tismedia.in/national/rahul-gandhi-not-understanding-modis-power-says-prashant-kishore/11252/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=rahul-gandhi-not-understanding-modis-power-says-prashant-kishore</link>
					<comments>https://tismedia.in/national/rahul-gandhi-not-understanding-modis-power-says-prashant-kishore/11252/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Oct 2021 06:36:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[CM West Bengal]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[Goa Assembly Elections]]></category>
		<category><![CDATA[Mamata Banerjee]]></category>
		<category><![CDATA[PM Modi]]></category>
		<category><![CDATA[Prashant Kishor]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul Gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[गोवा इलेक्शन]]></category>
		<category><![CDATA[पीएम मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रशांत किशोर]]></category>
		<category><![CDATA[भाजपा]]></category>
		<category><![CDATA[ममता बनर्जी]]></category>
		<category><![CDATA[राहुल गांधी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11252</guid>

					<description><![CDATA[<p>बोले प्रशांतः हो सकता है लोग मोदी को हटा दें, मगर भाजपा फिर भी कहीं नहीं जा रही फिलहाल ममता बनर्जी के लिए पर्दे के पीछे रहकर गोवा में काम कर रहे हैं प्रशांत किशोर TISMedia@Panaji पर्दे के पीछे रहकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए गोवा जीतने की रणनीति बना रहे चुनावी रणनीतिकार &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/national/rahul-gandhi-not-understanding-modis-power-says-prashant-kishore/11252/">गलतफहमी में जी रहे राहुल गांधी, नहीं समझ रहे मोदी की ताकत: प्रशांत किशोर</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>बोले प्रशांतः हो सकता है लोग मोदी को हटा दें, मगर भाजपा फिर भी कहीं नहीं जा रही</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>फिलहाल ममता बनर्जी के लिए पर्दे के पीछे रहकर गोवा में काम कर रहे हैं प्रशांत किशोर</strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Panaji</strong></span> पर्दे के पीछे रहकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए गोवा जीतने की रणनीति बना रहे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की समझ पर ही सवाल उठा दिया है। गोवा दौरे पर गए प्रशांत किशोर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि &#8220;भारतीय राजनीति में अगले कई दशकों तक बीजेपी का दबदबा रहने वाला है और मोदी युग के अंत का इंतजार करना कांग्रेस नेता राहुल गांधी की गलती है। उनका मानना कि अगले कई दशकों तक भाजपा से लड़ना होगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/covid19-death-cases-today-in-india/11247/">CORONA: 24 घंटों में 733 ने तोड़ा दम &#8220;मौत&#8221; ने फिर बढ़ाई चिंता</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कई दशकों तक करना पड़ेगा भाजपा का सामना </strong></span><br />
हिंदुस्तान की सियासत पर दशकों तक भाजपा के दबदबे की भविष्यवाणी करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि राहुल गांधी संभवतः किसी वहम में हैं कि भाजपा केवल मोदी लहर तक ही सत्ता मे रहने वाली है। उन्होंने कहा, &#8220;भाजपा चाहे जीते या हारे, मगर वह भारतीय राजनीति के केंद्र में रहेगी। ठीक वैसे ही जैसे कांग्रेस के 40 साल थे। भाजपा कहीं नहीं जा रही। एक बार आप भारत में 30 प्रतिशत वोट पा लेते हैं, तो आप इतनी जल्दी कहीं नहीं जा रहे। इसलिए इस चक्रव्यूह में कभी न फंसे कि लोग गुस्सा हो रहे हैं और वे मोदी को उखाड़ फेकेंगे। हो सकता है लोग मोदी को हटा दें, मगर भाजपा फिर भी कहीं नहीं जा रही। आपके अगले कई दशकों तक भाजपा का सामना करना पड़ेगा।&#8221;</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/encounter-again-in-up-stf-shot-two-shooters-of-mukhtar-ansari/11242/">यूपी में फिर Encounter: मुख्तार अंसारी के दो शूटर STF ने किए ढ़ेर</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>मोदी की ताकत समझें राहुल </strong></span><br />
प्रशांत किशोर इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि &#8220;राहुल गांधी के साथ यही दिक्कत है। संभवतः, वह सोचते हैं कि यह कुछ वक्त की बात है, जब तक लोग मोदी को सत्ता से बेदखल न कर दें। यह नहीं होने वाला। जब तक आप नरेंद्र मोदी की ताकत समझ नहीं लेते और उनकी मजबूती को मान नहीं लेते, तब तक आप उनका सामना नहीं कर पाएंगे। मुझे जो परेशानी दिखती है वह यह है कि लोग पीएम मोदी की ताकतों को समझने में अधिक समय नहीं दे रहे, वे ये नहीं समझ रहे कि मोदी इतने लोकप्रिय कैसे हो रहे हैं। यदि आपको यह पता होगा, तब ही आप उनका सामना कर सकेंगे।&#8221;</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/yogi-adityanath-government-withdrew-3-lakh-cases-filed-during-the-corona-period/11198/">Uttar Pradesh: कोरोना काल में दर्ज 3 लाख मुकदमे लिए वापस</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>तलाशना होगा मोदी के सम्मोहन का तोड़ </strong> </span><br />
प्रशांत किशोर ने कहा, &#8216;आप कांग्रेस के किसी भी नेता के पास चले जाइए, वे कहेंगे कि यह कुछ वक्त की बात है, लोग तंग आ रहे हैं, सत्ता विरोधी लहर आएगी और लोग पीएम मोदी को हटा देंगे। मुझे इसपर संदेह है, यह नहीं होने जा रहा है।&#8217; प्रशांत किशोर ने यह उदाहरण भी दिया कि कैसे मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दामों में इतना इजाफा कर दिया और उनके विरुद्ध जनता में कोई बड़ा आक्रोश तक नहीं दिखा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/now-congress-member-will-have-to-give-an-affidavit-not-to-criticize-party-on-public-forum/11171/">Congress: पार्टी ज्वाइन करनी है तो देना होगा &#8220;मुंह बंद&#8221; रखने का हलफनामा</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>दोनों के बीच बड़ा फर्क </strong></span><br />
प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच का फर्क बताते हुए कहा कि “पीएम मोदी जांबाज और जोखिम उठाने वालों में से हैं, जबकि राहुल स्टेटस क्वॉइस्ट (यथास्थिति बनाए रखने में यकीन रखने वाले) हैं।”  कांग्रेस को न सिर्फ यह अंतर खत्म करना होगा, बल्कि घर की लड़ाई को भी खत्म करना पड़ेगा।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/national/rahul-gandhi-not-understanding-modis-power-says-prashant-kishore/11252/">गलतफहमी में जी रहे राहुल गांधी, नहीं समझ रहे मोदी की ताकत: प्रशांत किशोर</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/national/rahul-gandhi-not-understanding-modis-power-says-prashant-kishore/11252/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अब &#8220;BSF&#8221; पर राज्यों ने जताया एतराज, सीमा सुरक्षा पर मचाई रार</title>
		<link>https://tismedia.in/national/punjab-and-mamta-banerjee-protest-on-the-jurisdiction-of-bsf/11183/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=punjab-and-mamta-banerjee-protest-on-the-jurisdiction-of-bsf</link>
					<comments>https://tismedia.in/national/punjab-and-mamta-banerjee-protest-on-the-jurisdiction-of-bsf/11183/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Oct 2021 03:36:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Border Security Force]]></category>
		<category><![CDATA[Government of India]]></category>
		<category><![CDATA[Jurisdiction of BSF]]></category>
		<category><![CDATA[Mamata Banerjee]]></category>
		<category><![CDATA[punjab]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[पंश्चिम बंगाल]]></category>
		<category><![CDATA[ममता बनर्जी]]></category>
		<category><![CDATA[सीमा सुरक्षा बल]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11183</guid>

					<description><![CDATA[<p>बोली बनर्जीः बंगाल में चलेगा बंगाल का कानून TISMedia@NationalDesk केंद्र सरकार ने पांच राज्यों में सीमा सुरक्षा बल का दायरा बढ़ाकर 50 किलोमीटर तक कर दिया है। इस फैसले का पंजाब सबसे ज्यादा विरोध कर रहा है। अब पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी खुलकर केंद्र सरकार के फैसले का विरोध करते हुए &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/national/punjab-and-mamta-banerjee-protest-on-the-jurisdiction-of-bsf/11183/">अब &#8220;BSF&#8221; पर राज्यों ने जताया एतराज, सीमा सुरक्षा पर मचाई रार</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>बोली बनर्जीः बंगाल में चलेगा बंगाल का कानून</strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@NationalDesk</strong> </span>केंद्र सरकार ने पांच राज्यों में सीमा सुरक्षा बल का दायरा बढ़ाकर 50 किलोमीटर तक कर दिया है। इस फैसले का पंजाब सबसे ज्यादा विरोध कर रहा है। अब पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी खुलकर केंद्र सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में बंगाल का कानून ही चलेगा। केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ टीएमसी पहले केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आपत्ति जता चुकी हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/now-congress-member-will-have-to-give-an-affidavit-not-to-criticize-party-on-public-forum/11171/">Congress: पार्टी ज्वाइन करनी है तो देना होगा &#8220;मुंह बंद&#8221; रखने का हलफनामा</a></strong></p>
<p>सीएम ममता ने कहा कि बीएसएफ का दायरा बढ़ाया जाना संघीय ढांचे में दखल देने का प्रयास है। साथ ही उन्होंने कहा कि अनावश्यक भ्रम पैदा करने की जरूरत नहीं है, कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है। सिलीगुड़ी में प्रशासनिक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, &#8220;पंजाब की तरह हम भी सीमा सुरक्षा बल का दायरा बढ़ाए जाने का विरोध कर रहे हैं। हमारा सीमावर्ती इलाका पूरी तरह से शांतिपूर्ण है. लॉड एंड ऑर्डर पुलिस का विषय है, ऐसे में बीएसएफ का दायरा बढ़ाए जाने से बाधा उत्पन्न होगी। राज्य सरकार, राज्य के कानून के साथ जाएगी।&#8221;</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/tis-utility/technology/facebook-is-spreading-lies-and-hatred-in-india-revealed-in-the-report/11146/">खुलासाः facebook बना फेकबुक, भारत में फैला रहा झूठ और नफरत</a></strong></p>
<p>ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की सीमा पर कोई समस्या नहीं है. यहां विभाजन की राजनीति नहीं चलेगी। पहाड़ से लेकर जंगल तक सभी एक हैं। किसी को यहां दंगा लगाने नहीं देंगे। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर पूर्वी राज्यों से बंगाल आने वाले लोगों पर निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया। टीएमसी ने कहा है कि गृह मंत्रालय की अधिसूचना बीएसएफ को 50 किलोमीटर के दायरे में बंगाल में छापेमारी, गिरफ्तारी और जब्ती करने का बहाना देती है और यह पुलिस और कानून व्यवस्था के मामले में राज्य के अधिकारों के विपरीत है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/lok-sabha-speaker-said-accountability-of-social-media-should-also-be-fixed/11167/">सोशल मीडिया की जवाबदेही हो सुनिश्चित: लोक सभा अध्यक्ष</a></strong></p>
<p>केंद्र ने पांच राज्यों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को अंतरराष्ट्रीय सीमा से मौजूदा 15 किलोमीटर के बजाए 50 किलोमीटर तक के क्षेत्र में तलाशी लेने, जब्ती करने और गिरफ्तार करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही उत्तर पूर्व के पांच राज्यों समेत केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर और लेह लद्दाख के पूरे क्षेत्र में अब बीएसएफ इस अधिकार का इस्तेमाल कर सकेगी। दरअसल, बंगाल की बांग्लादेश के साथ 2,216 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। सीमा पर घुसपैठ और तस्करी एक बड़ी समस्या है। बीएसएफ का मानना है कि बीएसएफ का दायरा बढ़ने पर बांग्लादेश से होने वाली तस्करी और घुसपैठ पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/national/punjab-and-mamta-banerjee-protest-on-the-jurisdiction-of-bsf/11183/">अब &#8220;BSF&#8221; पर राज्यों ने जताया एतराज, सीमा सुरक्षा पर मचाई रार</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/national/punjab-and-mamta-banerjee-protest-on-the-jurisdiction-of-bsf/11183/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बलि का बकराः जो पार्षदी का चुनाव तक नहीं जीत सका, भाजपा ने उसे ममता के मुकाबले में उतारा</title>
		<link>https://tismedia.in/india/west-bengal-by-elections-priyanka-tibrewal-of-bjp-will-give-fight-to-mamta-banerjee-from-bhawanipur-seat/10638/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=west-bengal-by-elections-priyanka-tibrewal-of-bjp-will-give-fight-to-mamta-banerjee-from-bhawanipur-seat</link>
					<comments>https://tismedia.in/india/west-bengal-by-elections-priyanka-tibrewal-of-bjp-will-give-fight-to-mamta-banerjee-from-bhawanipur-seat/10638/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Sep 2021 11:48:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Citizen Journalist]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[STATE]]></category>
		<category><![CDATA[TIS Utility]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[VTalk]]></category>
		<category><![CDATA[Bengal Election 2021]]></category>
		<category><![CDATA[Bharatiya Janata Party]]></category>
		<category><![CDATA[bhawanipur west bengal]]></category>
		<category><![CDATA[Mamata Banerjee]]></category>
		<category><![CDATA[Priyanka Tibrewal]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[Trinamool Congress]]></category>
		<category><![CDATA[West Bengal by-election]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=10638</guid>

					<description><![CDATA[<p>30 सितंबर को है पश्चिम बंगाल में विधानसभा का उपचुनाव, ममता की जीत हुई लगभग तय  नगर निगम से लेकर विधान सभा का चुनाव बुरी तरह हार चुकी प्रियंका को भाजपा ने बनाया प्रत्याशी  TISMedia@Kolkata पश्चिम बंगाल की सियासी जमीन भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद रोचक प्रयोगशाला बन गई है। नगर निगम से लेकर &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/west-bengal-by-elections-priyanka-tibrewal-of-bjp-will-give-fight-to-mamta-banerjee-from-bhawanipur-seat/10638/">बलि का बकराः जो पार्षदी का चुनाव तक नहीं जीत सका, भाजपा ने उसे ममता के मुकाबले में उतारा</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>30 सितंबर को है पश्चिम बंगाल में विधानसभा का उपचुनाव, ममता की जीत हुई लगभग तय </strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>नगर निगम से लेकर विधान सभा का चुनाव बुरी तरह हार चुकी प्रियंका को भाजपा ने बनाया प्रत्याशी </strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kolkata</strong></span> पश्चिम बंगाल की सियासी जमीन भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद रोचक प्रयोगशाला बन गई है। नगर निगम से लेकर विधानसभा चुनावों में मुंह की खाने के बाद भाजपा ने पश्चिम बंगाल के उप चुनावों में चौंकाने वाला प्रयोग किया है। दरअसल, विधान सभा चुनाव हारने के बाद भी मुख्यमंत्री बनी ममता बनर्जी के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन चुके उप चुनावों में भाजपा ने दीदी के मुकाबले में एक ऐसे प्रत्याशी को उनके सामने उतारा है जिसने विधानसभा चुनाव तो दूर की बात नगर निगम तक का चुनाव बुरी तरह हारा है। वह भी तब जब कांग्रेस ने ममता बनर्जी के खिलाफ चुनावों में प्रत्याशी न उतारने का ऐलान कर सीधे तौर पर वॉक ओवर दिया है।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में 30 सितंबर को विधानसभा के उपचुनाव हैं। इस चुनाव में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी भवानीपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी हैं और संवैधानिक नियमों के मुताबिक मुख्यमंत्री बने रहने के लिए यह चुनाव जीतना उनके लिए अनिवार्य है। ऐसे में ममता की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने चुनाव मैदान ही छोड़ दिया। मुकाबले में बची एक मात्र बड़ी पार्टी भाजपा ने भी इस सीट से एक ऐसा प्रत्याशी प्रियंका टिबरेवाल को उतारा है जिसके खाते में नगर निगम के चुनावों से लेकर विधानसभा के चुनावों तक में सिर्फ और सिर्फ हार ही लिखी हुई है।</p>
<p><strong>Read More:  कांग्रेस की प्रतिज्ञाः वचन निभाएंगे हम&#8230; सियासी जमीन तलाश रहीं प्रियंका का बड़ा दांव</strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>प्रियंका टिबरेवाल: कौन हैं ?</strong></span><br />
भवानीपुर सीट से भाजपा की प्रत्याशी बनाई गईं प्रियंका टिबरेवाल पेशे से वकील हैं। साल 2014 में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन की थी। अगले ही साल यानि वर्ष 2015 में प्रियंका ने बीजेपी उम्मीदवार के रूप में वार्ड संख्या 58 (एंटली) से कोलकाता नगर परिषद का चुनाव लड़ा, लेकिन उन्&#x200d;हें तृणमूल कांग्रेस के स्वप्न समदार के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था। बावजूद इसके अगस्त 2020 में उन्हें पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता युवा मोर्चा का उपाध्यक्ष बना दिया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो की कानूनी सलाहकार रह चुकी प्रियंका पर बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में भी दांव लगाया था। उन्हें कोलकाता की एंटली विधानसभा सीट से भाजपा ने उम्मीदवार बनाया था, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के स्वर्ण कमल साहा के हाथों 58,257 मतों से भारी पराजय का सामना करना पड़ा था। इसके बाद टिबरेवाल ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में हुई हिंसा को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/case-filed-against-javed-akhtar-in-lucknow-court-hearing-will-be-held-on-september-16/10632/">जावेद अख्तर! हाजिर हों&#8230; लखनऊ में दर्ज हुआ मुकदमा, 16 सितंबर को होगी सुनवाई</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>जीत जरूरी और आसान भी </strong></span><br />
विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने वाली ममता बनर्जी को बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने हरा दिया था। बावजूद इसके वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बन गईं। बंगाल का सीएम बने रहने के लिए अब उनका उपचुनाव जीतना जरूरी है। इसीलिए उन्होंने भवानीपुर से दांव खेला है। भवानीपुर को ममता का गढ़ माना जाता है और वह यहां से दो बार पहले भी चुनाव जीत चुकी हैं। ममता के लिए भवानीपुर की सीट खाली करने वाले विधायक सोभन देब चट्टोपाध्याय को तृणमूल कांग्रेस ने खरदाहा विधानसभा सीट से मैदान में उतारा है।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/uttar-pradesh-government-occupied-land-of-jauhar-university-azam-khan/10628/">योगी ने तोड़ी आजम खान की &#8220;रीढ़&#8221; जौहर यूनिवर्सिटी की 70 एकड़ जमीन पर यूपी सरकार का कब्जा</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कहां-कहां होंगे चुनाव?</strong></span><br />
चुनाव आयोग ने 30 सितंबर को पश्चिम बंगाल के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव कराने का फैसला किया है. इसी तारीख को पश्चिम बंगाल के समसेरगंज, जंगीपुर और पिपली (ओडिशा) में भी उपचुनाव होंगे। केंद्रीय चुनाव आयोग ने 4 सितंबर को पश्चिम बंगाल और ओडिशा में विधानसभा के उपचुनावों की तारीखों का एलान किया था। जबकि नतीजे 3 अक्टूबर को घोषित होंगे। उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग ने नामांकन से पहले और बाद के जुलूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। प्रचार के लिए बाहरी स्थानों पर 50 फीसदी लोगों की मौजूदगी हो सकेगी, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दलों के लिए अधिकतम 20 स्टार प्रचारक होंगे और मतदान खत्म होने से पहले 72 घंटे के दौरान प्रचार पर पाबंदी रहेगी।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/kisan-andolan-mission-up-election/10624/">Mission UP: योगी का रास्ता रोकने में जुटे 85 किसान संगठन, 27 सितंबर को &#8220;बंद&#8221; से शक्ति प्रदर्शन</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>भाजपा की रणनीति: खेला होबे&#8230; </strong></span><br />
भवानीपुर में ममता बनर्जी को घेरने के लिए बीजेपी ने दोहरी रणनीति बनाई है। बीजेपी ने बैरकपुर के सांसद अर्जुन सिंह को भवानीपुर का ऑब्जर्वर बनाया है। भवानीपुर का इंचार्ज महामंत्री संजय सिंह को बनाया गया है। हर एक वार्ड के लिए बीजेपी ने एक-एक विधायक को जिम्मेदारी दी है। एक्टर रुद्रनिल घोष को कैम्पेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। ऐसे में यदि इत्तफाक के भाजपा चुनाव जीत जाती है तो राष्ट्रीय राजनीति में भविष्य तलाश रही ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जाएगा और यदि भाजपा चुनाव हार जाती है तो उसके पास कहने के लिए होगा कि कोई बड़ा चेहरा मैदान में नहीं उतारा था। वहीं सियासी पंडितों की मानें तो भाजपा का एक धड़ा ममता बनर्जी के साथ भविष्य की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है। ऐसे में उन्हें चुनाव जिता कर वॉक ओवर इस धड़े की रणनीति भी हो सकता है।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/west-bengal-by-elections-priyanka-tibrewal-of-bjp-will-give-fight-to-mamta-banerjee-from-bhawanipur-seat/10638/">बलि का बकराः जो पार्षदी का चुनाव तक नहीं जीत सका, भाजपा ने उसे ममता के मुकाबले में उतारा</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/india/west-bengal-by-elections-priyanka-tibrewal-of-bjp-will-give-fight-to-mamta-banerjee-from-bhawanipur-seat/10638/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आखिर राजनीतिक दलों से क्या चाहते हैं लोग</title>
		<link>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-bachan-singh-sikarvar-on-what-public-want-from-political-parties/8547/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=article-by-dr-bachan-singh-sikarvar-on-what-public-want-from-political-parties</link>
					<comments>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-bachan-singh-sikarvar-on-what-public-want-from-political-parties/8547/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 May 2021 10:40:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Article]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Article By Dr Bachan Singh Sikarwar]]></category>
		<category><![CDATA[Article On What Public Want From Political Parties]]></category>
		<category><![CDATA[Assam]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[Elections]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Articles]]></category>
		<category><![CDATA[hindi news]]></category>
		<category><![CDATA[Kerala]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Mamata Banerjee]]></category>
		<category><![CDATA[political News]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[Puducherry]]></category>
		<category><![CDATA[Tamil Nadu]]></category>
		<category><![CDATA[the inside stories]]></category>
		<category><![CDATA[TISMedia]]></category>
		<category><![CDATA[West Bengal]]></category>
		<category><![CDATA[West Bengal News]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=8547</guid>

					<description><![CDATA[<p>यहाँ उल्लेखनीय है जिस ईवीएम और केन्द्रीय चुनाव आयोग पर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी घोर अविश्वास व्यक्त करती आयी हैं, उसने उनकी झोली सीटों से भर दी है। फिर भी अपनी हार को लेकर वह चुनाव आयोग के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय जाने की धमकी दे रही हैं। ऐसे ही तमिलनाडु में तीसरी बार सत्ता &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-bachan-singh-sikarvar-on-what-public-want-from-political-parties/8547/">आखिर राजनीतिक दलों से क्या चाहते हैं लोग</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>हाल में देश के पाँच राज्यों में हुए विधानसभा के चुनावों के परिणाम आ ही गए हैं। इनमें केवल दो राज्यों तमिलनाडु और केन्द्र शासित राज्य पुडुचेरी में ही सत्ता बदली है, शेष तीन राज्यों असम, पश्चिम बंगाल और केरल में जनता ने पहले से सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों में ही अपना पुनः विश्वास व्यक्त किया है। इनमें से कुछ राज्यों में विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के चुनावी परिणामो कों लेकर अधिकतर चुनावी पण्डितों के अनुमान गलत साबित हुए हैं। जहाँ पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल काँग्रेस(टीएमसी) को जितनी सीटें पर सफलता मिली हैं, उतने का अनुमान उनके चुनाव रणनीतिकार प्रशान्त किशोर के सिवाय किसी को नहीं था। हालाँकि वह ममता बनर्जी की पराजय के बारे में भविष्यवाणी करने में अवश्य विफल रहे हैं।
			</div>
		</div>
	
<p>यहाँ उल्लेखनीय है जिस ईवीएम और केन्द्रीय चुनाव आयोग पर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी घोर अविश्वास व्यक्त करती आयी हैं, उसने उनकी झोली सीटों से भर दी है। फिर भी अपनी हार को लेकर वह चुनाव आयोग के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय जाने की धमकी दे रही हैं। ऐसे ही तमिलनाडु में तीसरी बार सत्ता पाने की उम्मीद लगा रही अन्ना डीएमके नेतृत्व वाले गठबन्धन को जितनी सीटों पर कामयाबी मिली है, उतनी का किसी ने अन्दाज नहीं लगाया था। यद्यपि इस राज्य में द्रमुक (डीएमके) के स्टालिन को भी आशा से अधिक सफलता मिली है, जिनकी पार्टी पिछले दस साल से सत्ता से बाहर थी। यद्यपि व्यक्ति केन्द्रित दोनों राजनीतिक दलों को वर्तमान में अपने स्थापित नेता एम. करुणानिधि और जयललित की अनुपस्थित चुनाव लड़ना पड़ा है, तथापि स्तालिन ने इस भारी चुनावी सफलता मजबूत नेता के रूप में स्वयं का स्थापित कर दिखाया है। केरल में एल.डी.एफ. की वापसी भी चैंकाने वाली है, क्योंकि इस राज्य में हर पाँच साल में जनता चुनाव में सत्ता बदलती आयी है, किन्तु इस बार उसने परम्परा बदल डाली है। पाडुचेरी में काँग्रेस -द्रमुक के सत्ता में आने के आसार कम ही नजर आ रहे थे। परिणाम भी लगभग वैसा ही आया है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-mamata-banerjee-and-narada-chit-fund-case/8542/">ममता दीदी का &#8221;खेला&#8221; चालू छे !</a></span></strong></span></p>
<p>यद्यपि इन राज्यों के लोगों के निर्णय पर किसी को भी प्रश्न उठाने का अधिकार नहीं है, तथापि चुनाव के दौरान इन राज्यों में सत्तारूढ़ दल में असम में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एन.डी.ए.), पश्चिम बंगाल में तृणमूल काँग्रेस तथा केरल में वामपन्थी लोकतांत्रिक गठबन्धन (एलडीएफ) की सरकारों पर प्रतिपक्षीय राजनीतिक दलों ने उनकी नीतियों से लेकर कामकाज पर कई तरह के गम्भीर आरोप भी लगाए थे। फिर भी उनकी अनदेखी करते हुए वहाँ की जनता अगले पाँच साल के सत्ता सम्हालने के लिए उन्हें ही बेहतर मानते चुना। यह सवाल दूसरे राज्यों के लोगों को सोचने-विचारने पर अवश्य विवश करता है। असम में मुख्य विपक्षी दल काँग्रेस ने तत्कालीन राजग सरकार पर ‘नागरिकता संशोधन विधेयक’ (सी.ए.ए.) तथा एन.आर.सी. को राज्य के लोगों विशेष रूप से मुसलमानों को उग्र आन्दोलन के लिए पूरी शक्ति से भड़काया। इसमें उसका साथ कई कट्टर इस्लामिक संगठनों के नेताओं उसकी खुलकर मदद की। परिमाणमतः असम में मुसलमानों ने जगह उग्र और हिंसक आन्दोलन किये। यह राज्य कई महीने तक उस हिंसक आन्दोलन से ग्रस्त रहा है। इसमें जहाँ असमियाँ हिन्दुओं को सीएए के माध्यम से लगभग डेढ़ करोड़ बांग्लादेश से आए बंगला भाषी हिन्दुओं को नागरिकता मिलने से अपनी असमिया अस्मिता को खतरा दिखायी दे रहा था, तो दूसरी बांग्लादेशी मुसलमानों को भारत से खदेड़े जाने। उस समय उग्र आन्दोलन को देखते हुए तत्कालीन सरकार ने अपनी ओर से सीएए और एनआरसी पर शान्त रहना ही उचित समझा। लेकिन इस विधानसभा के चुनाव के समय काँग्रेस ने इस मुद्दे को फिर हवा दी और सत्ता में आने के बाद सीएए को खत्म करने का वादा भी किया। उससे भी आगे बढ़कर उद्योगपति राजनीतिक नेता बदरूद्दीन अजमल ने अपनी राजनीतिक पार्टी ‘युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रण्ट’(यूडीएफ) का काँग्रेस से गठजोड़ तैयार किया। सत्तारूढ़ भाजपा के सामने की कड़ी चुनौती दी। उन्होंने अपनी चुनावी सभाओं में खुले आम कहा कि इस बार लुंगी-टोपी वालों की सरकार बनेगी। ऐसा कहकर मजहबी आधार पर ध्रुवीकरण करने की पुरजोर कोशिश की। लेकिन उनकी पार्टी को मुस्लिम बहुल इलाकों में ही कुछ कामयाबी मिली। वह और उनकी साथी काँग्रेस से सत्ता के गणित से बहुत दूर गई। इस चुनावी नतीजे से स्पष्ट है कि राज्य की अधिकांश जनता सीएए और एनआरसी के पक्ष में है, जिसमें असम की अस्मिता और देश की सुरक्षा भी निहित है। इस तरह असम की जनता एक बार फिर भाजपा की अगुवाई वाले राजग पर भरोसा जताया है। इसका एक बड़ा कारण सरकार का सभी वर्गों और सभी क्षेत्र के विकास पर बगैर भेदभाव के ध्यान दिया जाना रहा है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/vikram-rao-of-veteran-journalist-reviewing-india-palestine-israel-relations/8487/">बड़ा सवालः इस्राइल से भारत की यारी पर इतना खौफ क्यों ?</a></span></strong></span></p>
<p>अब चर्चा करते हैं पश्चिम बंगाल की जहाँ भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य की कुल 42 सीटों में 18 पर सफलता पायी थी, जिसमें तृणमूल काँग्रेस को 22 और 2 सीटों पर काँग्रेस का कामयाबी मिली थी। लोकसभा की सफलता के आधार पर भाजपा इस विधानसभा चुनाव में वर्तमान 3सीटों से एकदम 200 से अधिक जीतने की घोषणा करती फिर रही थी।ऐसा करने के लिए उसने पूरी शक्ति झौंक दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश नड्डा, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, वरिष्ठ नेता शहनवाज हुसैन, उ.प्र.के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत तमाम नेताओं की सभाएँ करायी गईं। इस बीच चुनावी हिंसा के कई घटनाएँ हुई, इनमें भाजपा समेत दूसरे दलों के कार्यकर्ता मारे गए। इन घटनाओं के लिए टीएमसी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगते रहे, पर यह सिलसिला रुका नहीं। कभी ममता बनर्जी ने खुलकर राजनीतिक हिंसा और उसके करने वालों की खुलकर निन्दा तक नहीं की। इसी कारण चुनाव आयोग ने आठ चक्रों में इस राज्य चुनाव कराने का निर्णय लिया था, जिसकी ममता बनर्जी और दूसरे राजनीतिक दलों ने बहुत आलोचना की थी। उसने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर केन्द्र की जनहितकारी योजनाओं यथा-आयुष्मान स्वास्थ्य योजना, किसान सम्मान निधि आदि, को राज्य में लागू न करना, अल्पसंख्यक तुष्टीकरण, हिन्दुओं की हर तरह से उपेक्षा,राजनीतिक हिंसा, स्त्रियों की असुरक्षा, कोयला घोटाला, हर काम में दलाली (टोलाबाजी), गायों की तस्करी में मदद, अपरमित भ्रष्टाचार, घुसपैठिये बांग्लादेशी और रोहिग्या मुसलमानों को संरक्षण देकर देश की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे गम्भीर आरोप लगाए। यहाँ तक कि हिन्दुओं को अपने धार्मिक पर्व-उत्सवों यथा -दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा में प्रतिबन्ध लगाने से लेकर मुल्ला-मौलवियों को सरकार से वेतन तथा मुहर्रहम के जुलूस को तरजीह देने के आरोप भी लगाए। इतना ही नहीं, अपने भ्रष्टाचार में लिप्त भतीजे को न केवल राजनीति में अनावश्यक बढ़ावा देना,बल्कि उसके और उसकी पत्नी के भ्रष्टाचार करने के प्रमाण भी दिये। इस बीच उनके सांसद भतीजे और उसकी पत्नी ,तृणमूल के दूसरे नेताओं से पूछताछ की गई। बंगाल का हर तरह का विकास कर इसे फिर से ‘सोनार बंगला’बनाने का विश्वास दिलाया। फिर भी पश्चिम बंगाल के लोगों ने भाजपा के तमाम आरोपों, उसके सुशासन तथ सर्वांगीण विकास करने के वादे की अनदेखी करते हुए ममता बनर्जी के बंगाल की अस्मिता, बंगाल की बेटी, भाजपा को बाहरी लोगों की पार्टी और उनकी सरकार की जैसी भी कार्यशैली है,उसे बेहतर मानते हुए उन्हें जमकर वोट दिया। उसने भाजपा के प्रत्याशी केन्द्रीय मंत्रियों, सांसदों, पूर्व मंत्रियों, अभिनेता, अभिनेत्रियों को हराने में कोई कोताही नहीं की। ऐसे केरल में एलडीएफ सरकार के मुख्यमंत्री पी.विजयन की महिला अधिकारी के सोने की तस्करी में पकड़े जाने और उसके कई बार सरकार खर्चे पर जाने के कारण उनके इस तस्करी सम्मिलित होने के साथ-साथ राज्य में लव जिहाद, हिन्दुओं की असुरक्षा, राजनीतिक हिंसा, भ्रष्टाचार समेत कई आरोप भाजपा ने लगाए थे, पर इस राज्य की जनता ने एक बार फिर उन्हें सत्ता की कमान सौंप कर भाजपा आरोपों का दरकिनार कर दिया है। इस चुनाव में भाजपा अपने इकलौती सीट भी गंवा बैठी है, जिसने विधानसभा चुनाव जीतने पर देश में ‘मेट्रोमैन’ के नाम से विख्यात मुरलीधरन को मुख्यमंत्री बनाये जाने की घोषणा की थी, पर वह ही चुनाव हार गए। इस राज्य में वामपन्थियों की राजनीतिक हिंसा के सबसे अधिक शिकार भाजपा ,आर.एस.एस.,काँग्रेस आदि के नेता और कार्यकर्ता रहे हैं। अब आते हैं तमिलनाडु की सियासत पर। यहाँ हर पाँच साल के बाद सत्ता बदलने की परम्परा रही है,पर जयललिता ने यह इस रवायत को तोड़ा था।उनके निधन के बाद अन्नाद्रमुक में गुटबाजी शुरू हो गई, फिर मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने बेहतर तरीके से शासन चलाया। उन्होंने कोरोना संकट में पहले भी राज्य की जनता का हर तरह से ख्याल रखा था। इस बार भी वैसा ही कर रहे थे, किन्तु जनता ने पता नहीं,क्यों सियासी बदलाव करना जरूरी समझा, जबकि द्रमुक के नेताओं पर भ्रष्टाचार के काले दाग लगे हैं। अब जहाँ इस चुनाव में भाजपा असम में अपनी सत्ता बचाने और पश्चिम बंगाल में भले ही उसके अपनी सरकार बनाने का अरमान पूरा न हुआ हो, पर उसने 3से 77 सीट पाकर मुख्य और दमदार विपक्षी दल की हैसियत हासिल कर ली है। पुडुचेरी में उसे मिलजुल कर सत्ता में शामिल होने का अवसर भी मिल गया है,लेकिन काँग्रेस पश्चिम बंगाल में महज 1 सीट पा सकी है, जिसकी पिछली विधानसभा में 44 सीटें थी। इसके बाद भी वह पश्चिम बंगाल में अपने अस्तित्व की चिन्ता भूलाकर भाजपा की हार का जश्न मानने में जुटी है। उसका केरल और असम में सत्ता में आने का ख्वाब -ख्वाब ही रह गया, जहाँ हर नए विधानसभा के पश्चात् सत्ता बदलती आयी है। पाडुचेरी में उसका गठबन्धन सत्ता से दूर रह गया। फिर वह अपनी पराजय के कारण पर विचार सुधरने को तैयार नहीं है। यही उसकी बदकिस्मती है। अब वामदल सिर्फ केरल तक सीमित रह गए हैं, पश्चिम बंगाल में उनका लगभग सूपड़ा-साफ हो गया है। वैसे जनता कैसे-कैसे लोगों को चुनती है,ऐसे-ऐसे लोगों को धूल चटा देती है,यह सोच कर हैरानी होती है। इन पाँच राज्यों के विधान सभा चुनावों के परिणामों को दृष्टिगत रखते यह अनुमान लगाना मुश्किल की जनता आखिर क्या सोचकर अपना वोट/मत देती है?</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>(डाॅ.बचन सिंह सिकरवार, देश के कई प्रमुख हिंदी अखबारों में संपादकीय जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। देश और दुनिया के प्रमुख समाचार पत्रों में राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय मसलों एवं समसामयिक विषयों पर उनके बेबाक लेख चार दशकों के निरंतर प्रकाशित हो रहे हैं। डॉ. सिकरवार नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट (इंडिया) के संस्थापक सदस्य भी हैं।)</strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-bachan-singh-sikarvar-on-what-public-want-from-political-parties/8547/">आखिर राजनीतिक दलों से क्या चाहते हैं लोग</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-bachan-singh-sikarvar-on-what-public-want-from-political-parties/8547/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ममता दीदी का &#8221;खेला&#8221; चालू छे !</title>
		<link>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-mamata-banerjee-and-narada-chit-fund-case/8542/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=article-by-k-vikram-rao-on-mamata-banerjee-and-narada-chit-fund-case</link>
					<comments>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-mamata-banerjee-and-narada-chit-fund-case/8542/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 May 2021 08:39:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Article]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Article By K Vikram Rao]]></category>
		<category><![CDATA[Article On Mamata Banerjee And Narada Chit Fund Case]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Articles]]></category>
		<category><![CDATA[hindi news]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Mamata Banerjee]]></category>
		<category><![CDATA[Mamata Banerjee Strike]]></category>
		<category><![CDATA[Narada Chit Fund Scam]]></category>
		<category><![CDATA[political News]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[the inside stories]]></category>
		<category><![CDATA[TISMedia]]></category>
		<category><![CDATA[West Bengal News]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=8542</guid>

					<description><![CDATA[<p>सारे मसले से जुड़े चन्द तथ्यों का उल्लेख पहले हो जाये। भले ही सोनिया—कांग्रेस तथा अन्य दल आज भाजपा के विरुद्ध लामबंद हो जाये, पर याद रहे कि यही कांग्रेस पार्टी थी जिसने 2011 में विधानसभा के निर्वाचन में कुख्यात नारद चिट फण्ड घोटाले पर ममता बनर्जी को घेरा था। तब कोलकाता हाईकोर्ट में सोनिया—कांग्रेस &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-mamata-banerjee-and-narada-chit-fund-case/8542/">ममता दीदी का &#8221;खेला&#8221; चालू छे !</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>भारतीय गणराज्य से बंगभूमि के  &#8221;मुक्ति&#8221; का संघर्ष विप्र—विदुषी ममता बंधोपाध्याय ने तेज कर दिया है। यूं भी &#8221;आमी बांग्ला&#8221; बनाम &#8221;तू मि बाहरी&#8221; के नारे पर उनकी तृणमूल कांग्रेस पार्टी विधानसभा का चुनाव गत माह लड़ी थी। अत: अब अपने अधूरे एजेण्डे को अंजाम देने में प्राणपण से वे जुट गयीं हैं।
			</div>
		</div>
	
<p>सारे मसले से जुड़े चन्द तथ्यों का उल्लेख पहले हो जाये। भले ही सोनिया—कांग्रेस तथा अन्य दल आज भाजपा के विरुद्ध लामबंद हो जाये, पर याद रहे कि यही कांग्रेस पार्टी थी जिसने 2011 में विधानसभा के निर्वाचन में कुख्यात नारद चिट फण्ड घोटाले पर ममता बनर्जी को घेरा था। तब कोलकाता हाईकोर्ट में सोनिया—कांग्रेस ने याचिका दाखिल की थी कि ममता के खिलाफ भ्रष्टाचार के इल्जाम में सीबीआई द्वारा जांच के आदेश पारित करें। उस वक्त मार्क्सवादी तथा अन्य वामपंथी पार्टियां भी कांग्रेस के सुर में सुर मिला रहीं थीं। यह दिलचस्प बात दीगर है कि इन दोनों आलोचक पार्टियों का एक भी विधायक, सात दशकों में पहली बार, गत माह जीता ही नहीं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/vikram-rao-of-veteran-journalist-reviewing-india-palestine-israel-relations/8487/"><strong>बड़ा सवालः इस्राइल से भारत की यारी पर इतना खौफ क्यों ?</strong></a></span></p>
<p>उसी दौरान कोलकता हाईकोर्ट ने (17 मार्च 2017) नारद चिट फण्ड के मामले की तहकीकात सीबीआई के सुपुर्द कर दिया। ममता बनर्जी ने सर्वोच्च न्यायालय में इस आदेश को निरस्त करने की (21 मार्च 2017) अपील की। मगर वह खारिज हो गयी। जांच चलती रही। सोनिया—कांग्रेस ने जांच और उचित दण्ड का आग्रह दोहराया। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद ही उसने मांग की थी कि तृणमूल—कांग्रेस के दोषी नेताओं को जेल भेजा जाये। कांग्रेस की इस मांग के बाद ममता शासन भी तत्काल हरकत में आ गया। पचास—वर्ष पूर्व सीबीआई को प्रदत्त बंगाल के कार्यक्षेत्र के निर्णय को उन्होंने निरस्त कर दिया। अर्थात इस केन्द्रीय ब्यूरो से बंगाल स्वतंत्र हो गया। मगर उच्चतम न्यायालय के आदेश से कार्यवाही रोकी नहीं गयी।</p>
<p>कल सरकारी पार्टी के विधायकों ने कोलकता की सड़कों पर ताण्डव किया, राजभवन पर धावा बोला, दिनरात व्यस्त रहने वाला महानगर रेंगने पर विवश कर दिया गया। यह सब अखबारों में आज सुबह छप चुका है।</p>
<p>इस तकरार की नायिका &#8221;वीरांगना&#8221; ममता बनर्जी ने छह घंटे तक भारत सरकार के कार्यालय भवन निजाम पैलेस के समक्ष धरना दिया। उनका स्वयं का कार्यालय राइटर्स बिल्डिंग ठप रहा। कोरोना का राहत कार्य थम गया। दो हजार तृणमूल पार्टी कार्यकर्ताओं ने लाकडाउन को तोड़कर, बिना मास्क लगाये, पूरी राजधानी को रेहन पर रख दिया।</p>
<p>ममता बनर्जी  के पैर की हड्डी भी खूब फुर्ती से काम पर रही थी। राज्य पुलिस बनाम केन्द्रीय बल वाला नजारा बन गया था। स्वयं प्रदेश के काबीना मंत्री भारत सरकार के आदेशों को बाधित करते रहे। राज्य के कानून मंत्री स्वयं सीबीआई अदालत में डटे रहे। दोषी मंत्रियों को जमानत मिल गयी। तत्काल हाईकोर्ट ने उसे रद्द कर मंत्रियों और विधायकों को जेल भेज दिया। स्वयं मुख्य न्यायाधीश राजेश बिन्दल ने मुख्यमंत्री द्वारा धरना की भर्त्सना की। सीबीआई ने मांग की कि मुकदमा बंगाल के बाहर चलाया जाये।</p>
<p>इसी बीच बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष विमान बनर्जी ने संवैधानिक पहलू उठाया कि विधायकों तथा मंत्रियों को बिना उनकी अनुमति के क्यों गिरफ्तार कर लिया गया है? बिहार और उत्तर प्रदेश के विधानसभाई अधिकारियों के अनुसार ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है कि विधायक को हिरासत में लेने के पूर्व स्पीकर की अनुमति ली जाये।</p>
<p>अब ममता बनर्जी के &#8221;जनवादी&#8221; अभियान पर तनिक विचार कर लें। वे बोलीं थीं कि उनके काबीना मंत्रियों की गिरफ्तारी स्पष्टता गत माह के जनादेश का अपमान है। राजनीति शास्त्र का यह नया नियम और परिभाषा बंगाल की मुख्यमंत्री ने निरुपित कर दिया है। यदि यह मान भी लिया जाये तो भ्रष्टाचार की परिभाषा वोटर करेंगे, न कि न्यायाधीशजन। अर्थात जो जीता वही ईमानदार है। अगर इसे स्वीकार कर ले तो माफिया सरगना मियां मोहम्मद मुख्तार अंसारी, जो कई बार विधायक बने, को जेल में रखना गैरकानूनी है। उनके द्वारा भाजपाई विधायक कृष्णानन्द राय की हत्या राजनीतिक रुप से औचित्यपूर्ण है। अत: अब विधि—विधान की दिशा और अर्थ केवल मतपेटियां तय करेंगी।</p>
<p>ममता बनर्जी के आज के महाकालीवाले रौद्र रुप को देखकर चालीस वर्ष पूर्व उनका युवाजोश से भरा जनांदोलकारी दौर याद आता है। वे तब युवा कांग्रेस में थीं। मार्क्सवादी कम्युनिस्टों ने राज्य और पार्टी में सीमा रेखा मिटा दी थी। वहीं जो इन्दिरा गांधी ने 1975 में इमरजेंसी काल में किया था। तब यह बहादुर लड़ाकन पांच रुपये की हवाई स्लिपर, बीस रुपये वाली सूत की सफेद नीले बार्डरवाली साड़ी पहनकर हुगली में आग लगाती थी।  काली बाड़ी के निकट एक झोपड़ीनुमा मकान में रहती थीं। वहीं उनकी मां भी जिनका चरण स्पर्श प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी करते थे।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-about-malerkotla/8427/">मालेरकोटला पर विवाद ? क्या कारण है ?</a></span></strong></span></p>
<p>बंगाल तब के मसीहा ज्योति बसु विशाल, भव्य भवन में अध्यासी थे। उनका पुत्र चन्दन उद्योगपति बन रहा था। इस अनीश्वरवादी कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री की पत्नी धर्मप्राण थी, कालीपूजा करती थी। हर धर्मोत्सव में सक्रिय रहती थी। तब बंगाल की जनता ममता में तारक का रुप देखती थी। ममता ने संकल्प लिया था कि माकपा तथा वामपंथ को बंगाल की खाड़ी में डूबो देंगी। गत माह यही कर दिखाया। विधानसभा में कांग्रेस और कम्युनिस्टों का नामलेवा, तर्पण करने वाला भी नहीं रहा।</p>
<p>इसीलिये अचंभा होता है कि ऐसी न्यायार्थ योद्धा बनीं ममता क्यों नारद चिट फंड घोटाले में आमजन के मेहनत की कमाई को लूटने वालों की हिमायती बनीं ? फिर कहावत याद आई कि ब्राह्मण मरता है तो ब्रह्म—राक्षस बनता है। शायद नियति का यही नियम है। इससे बंगाल अछूता नहीं रहा।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>(<span style="color: #ff0000;"><a style="color: #ff0000;" href="https://tismedia.in/">TIS Media</a></span> परिवार के संरक्षक<span style="color: #ff0000;"> <a style="color: #ff0000;" href="https://www.facebook.com/profile.php?id=100001609306781">के. विक्रम राव</a> </span>का शुमार देश के नामचीन पत्रकारों में होता है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर उन्होंने इमरजेंसी तक में स्वतंत्र आवाज के लिए जेल यात्रा की। महीनों की सजाएं भुगती। श्री राव,  वॉयस ऑफ अमेरिका, टाइम्स ऑफ इंडिया, इकोनोमिक टाइम्स, फिल्मफेयर और इलस्ट्रेटेड वीकली में प्रमुख पदों पर रहने के साथ-साथ नेशनल हेराल्ड के संस्थापक संपादक भी रह चुके हैं। प्रेस की नियामक संस्था &#8216;भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य रहने के अलावा मजीठिया वेतन बोर्ड और मणिसाना वेतन बोर्ड के सदस्य के तौर पर पत्रकारों के हित में लंबा संघर्ष किया है। <span style="color: #ff0000;"><a style="color: #ff0000;" href="https://www.facebook.com/profile.php?id=100001609306781">के.विक्रम राव</a>,</span> फिलहाल इंडियन फैडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट <span style="color: #ff0000;">#IFWJ</span> के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)</strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-mamata-banerjee-and-narada-chit-fund-case/8542/">ममता दीदी का &#8221;खेला&#8221; चालू छे !</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-mamata-banerjee-and-narada-chit-fund-case/8542/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ममता ने मारा गोल, फाउल करके</title>
		<link>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-west-bengal-election-and-why-mamata-banerjee-is-not-appropriate-for-becoming-pm-of-india/7783/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=article-by-k-vikram-rao-on-west-bengal-election-and-why-mamata-banerjee-is-not-appropriate-for-becoming-pm-of-india</link>
					<comments>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-west-bengal-election-and-why-mamata-banerjee-is-not-appropriate-for-becoming-pm-of-india/7783/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 May 2021 08:04:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Article]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[STATE]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Article By K Vikram Rao]]></category>
		<category><![CDATA[Article On Indian Political Parties]]></category>
		<category><![CDATA[Article On West Bengal Elections]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[covid 19]]></category>
		<category><![CDATA[Election News]]></category>
		<category><![CDATA[Elections In West Bengal]]></category>
		<category><![CDATA[Future Of Indian Politics]]></category>
		<category><![CDATA[hindi news]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Mamata Banerjee]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra Modi]]></category>
		<category><![CDATA[political News]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[the inside stories]]></category>
		<category><![CDATA[TISMedia]]></category>
		<category><![CDATA[West Bengal News]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=7783</guid>

					<description><![CDATA[<p>इसी परिवेश में ममता बनर्जी के चुनाव प्रबंधक प्रशान्त किशोर की उक्ति के भिन्न अभिप्रायों को समझना होगा। वे बोले : &#8221;भाजपा के जय श्रीराम के जवाब में चण्डीपाठ हमारा नारा था।&#8221; अर्थात् हिन्दू वोट हेतु ममता को बधोपाध्याय (बनर्जी का संस्कृत) बनना पड़ा। अपना विप्र वर्ण प्रचारित करना था। गोत्र शाण्डिल्य को उच्चारित करना &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-west-bengal-election-and-why-mamata-banerjee-is-not-appropriate-for-becoming-pm-of-india/7783/">ममता ने मारा गोल, फाउल करके</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>पश्चिम बंगाल विधानसभा में 2 मई 2021 संपन्न हुये मतदान के सिलसिले में कई पहलू उभरते है, कई वाजिब प्रश्न उठते हैं। इन पर राष्ट्र को गौर करना पड़ेगा यदि देश का फिर एक और विभाजन नहीं होने देना है तो। अगर सेक्युलर तथा उदार गणतंत्र संजोये रखना है तो। अर्थात् मजहब का सियासत में घालमेल रोकना है तो।
			</div>
		</div>
	
<p>इसी परिवेश में ममता बनर्जी के चुनाव प्रबंधक प्रशान्त किशोर की उक्ति के भिन्न अभिप्रायों को समझना होगा। वे बोले : &#8221;भाजपा के जय श्रीराम के जवाब में चण्डीपाठ हमारा नारा था।&#8221; अर्थात् हिन्दू वोट हेतु ममता को बधोपाध्याय (बनर्जी का संस्कृत) बनना पड़ा। अपना विप्र वर्ण प्रचारित करना था। गोत्र शाण्डिल्य को उच्चारित करना था। इसी श्रृंखला में नंदीग्राम में शिवालय जाना लाजिमी था। यहीं ममता पर भाजपा के कथित अराजक तत्वों ने उनकी कार का दरवाजा झटके से मारा था। उससे मुख्यमंत्री के टांग और नितम्ब पर चोट लगी थी। हड्डी घायल हो गयी थी। परिणाम स्वरुप ममता के बायें टांग पर प्लास्टर चढ़ाया गया। पहियेदार गाड़ी पर सवार होकर चुनाव प्रचार करना पड़ा। वोटरों की हमदर्दी बटोरने का यह बड़ा मारु साधन मिल गया था। हालांकि जिस दिन चुनाव परिणाम घोषित हुये तत्क्षण ममता भली चंगी हो गयीं। टांगों पर चलने लगी। सारा दर्द लुप्त हो गया। आखिरी वोट भी 53वें दिन पड़ चुका था। एक मिलती जुलती वारदात हुयी थी मार्च 1977 में जब अमेठी चुनाव क्षेत्र में गौरीगंज के आगे कांग्रेसी प्रत्याशी संजय गांधी पर गोली &#8221;चली&#8221; थी। हालांकि फिर भी संजय हार गये। हमदर्दी नहीं मिली। जांच में गोलीकाण्ड बनावटी पाया गया था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-pawan-saxena-on-west-bengal-election-and-indian-political-parties/7701/"><strong>अब दिल्ली आइये दीदी&#8230;</strong></a></span></p>
<p>ममता द्वारा चुनाव अभियान के दो तथ्यों पर हर पंथनिरपेक्ष और लोकतंत्रप्रेमियों का विचलित होना स्वाभाविक है। पश्चिम बंगाल के 27 प्रतिशत मुस्लिम वोट हेतु तृणमूल कांग्रेस ने जो प्रहसन रचा, वह बड़ा चिन्ताजनक है। ताज्जुब तो इस तथ्य पर होता है कि सात सदी पुराने फरफरा शरीफ (मौलाना अबू बकर सिद्दीकी) के वंशवाले जनाब पीरजादा अब्बासी सिद्दीकी द्वारा गठित (इंडियन सेक्युलर फ्रंट), वामपंथी और सोनिया—कांग्रेसी वाले महाजोत की अपील को नजरअंदाज कर मुसलमान मतदाताओं के बहुलांश ने तृणमूल कांग्रेस का समर्थन किया। इसका भावार्थ यही कि पश्चिम बंगाल के मुसलमानों का एजेण्डा है कि भारत के भीतर नया बांग्लादेश बने। तृणमूल कांग्रेस इन मुसलमानों का पहला प्यार साबित हुयी।</p>
<p>मजहब पर इतना जघन्य ध्रुवीकरण किसी भी चुनाव में आजतक नहीं हुआ। कई अर्थों में ममता ने इस आरोप को सही दिखाया कि वे देश—तोड़क तथा समाज—ध्वंसक अभियान से परहेज नहीं करेंगी। मुसलमान घुसपैठिये तो उनका वोट बैंक हैं ही। भाजपायी हिन्दुवाद का शायद उनका ऐसा ही जवाब था। पर घातक तो यह भारतीय राष्ट्रवाद के लिये रहा। इसी संदर्भ में एक नीति यह भी है कि पारम्परिक तौर पर चुनाव में पराजय की जिम्मेदारी स्वीकार कर पार्टी पुरोधा त्यागपत्र देता है। अमित शाह और जेपी नड्डा से ने पेशकश तक नहीं की।</p>
<p>अब अति महत्वपूर्ण मसला उठता है कि पराजित प्रत्याशी ममता बनर्जी क्या मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी? कानूनन तो यह संभव है। संविधान की धारा 164(4) के अनुसार बिना सदन के सदस्य रहे छह माह तक मंत्री बने रह सकते हैं। अत: ममता बनर्जी भी मुख्यमंत्री भी शपथ ले सकतीं हैं। पर प्रश्न यहां नैतिकता का है। ममता तो नैतिकता की देवी होने का दावा करतीं हैं। आचार, व्यवहार और मर्यादा का तकाजा है कि वह जनादेश जीतकर ही मुख्यमंत्री पद संभाले। नन्दीग्राम के मतदाताओं द्वारा खारिज किये गये इस राजनेता को बंगाल के सर्वोच्च जनवादी पद पर नहीं बैठना चाहिये। वह वोटरों द्वारा परित्यक्ता है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-vivek-mishra-on-covid-19-taught-us-how-we-should-behave-and-what-we-should-do-for-our-society/7697/"><strong>कोरोना से लड़ेगा इंडिया जीतेगा इंडिया: आओ मिलकर बेहतर जहान बनाएं</strong></a></span></p>
<p>हालांकि उनके पार्टीजन जवाहरलाल नेहरु का दृष्टांत पेश कर सकते हैं। इस लोकशाहीवाले सिद्धांत का उल्लंघन तब किया गया था। उनकी कांग्रेस पार्टी के नेता चन्द्रभानु गुप्ता को यूपी का मुख्यमंत्री बनाया। वे दो—दो बार यूपी विधानसभा का चुनाव हार चुके थे। पहली बार तो लखनऊ (पूर्व) से वे मार्च 1957 में कांग्रेस के प्रत्याशी बनकर लड़े थे। तब यूपी सरकार के काबीना मंत्री थे। उन्हें प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के बाबू त्रिलोकी सिंह ने हराया था। फिर बुन्देलखण्ड के मौदाहा रियासत की रानी साहिबा राजेन्द्र कुमारी को इन्ही प्रजा सोशलिस्टों ने उपचुनाव में लड़ाया और गुप्ताजी दोबारा हार गये। फिर भी प्रधानमंत्री नेहरु ने गुप्ताजी को नामित कर दिया। संपूर्णानन्द की जगह यूपी के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलायी गयी। ऐसे कई उदाहरण कांग्रेस इतिहास से कई मिल जायेंगे। मगर प्रश्न रहेगा कि जनवादी सिद्धांत के अनुसार एक पराजित प्रत्याशी को मुख्यमंत्री बनना चाहिये? ममता से यही सवाल है, सदाचार के आधार पर।</p>
<p>अब कई निष्णात और ज्ञानीजन टीएमसी के पक्ष में अभूतपूर्व चुनावी चित्र रंग रहे हैं। उन्हें  ताजा आंकड़े भी देखना चाहिये। मतदान का गणित स्पष्ट हो जायेगा। ममता की पार्टी को पश्चिम बंगाल की विधानसभा में 2011 के चुनाव में 184 सीटें मिलीं थीं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के साढ़े तीन दशक के राज का उन्होंने खात्मा किया था। फिर पिछले 2016 के चुनाव में तृणमूल के 211 विधायक रहे। कल के परिणाम में उन्हें 217 सीटें मिलीं हैं। पांच वर्षों में मात्र सात—आठ विधायक ही बढ़े हैं। वोट प्रतिशत भी 48 था जो 2016 की तुलना में मात्र पांच फीसदी ज्यादा था। तो क्या करिश्मा कर दिखाया ?</p>
<p>ममता ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर आरोप लगाया कि तीन रिटायर्ड सरकारी नौकर सदस्य नामित होकर मतदान का निर्णय करेंगे? तो इस बांग्ला राजनेता ममता बनर्जी के को याद दिला दिया जाये कि उनकी पुरानी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राज में भारत के प्रधान न्यायाधीश थे सुधिरंजन दास, उनके दामाद थे नेहरु काबीना के कानून मंत्री अशोक कुमार सेन। उनके सगे भाई थे सुकुमार सेन जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे। तीनों उच्च सरकारी पद एक ही कुटुम्ब में सीमित था। तब केवल राममनोहर लोहिया ने इस घृणास्पद वंशवाद का मसला उठाया था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/five-decades-of-watergate-scandal/7600/"><strong>वॉटरगेट कांड: हिंदुस्तानी अखबारों में है इतना दम! जो सत्ता के शीर्ष को दे सके ऐसी चुनौती</strong></a></span></p>
<p>अखबारों की आज सुर्खियां हैं कि ममता के रुप में भारतीय प्रतिपक्ष को एक सर्वमान्य राष्ट्रस्तरीय पुरोधा मिल गया। वही पुरानी पत्रकारी अतिशयोक्ति। भला जो महिला बंगाल को ही राष्ट्र माने, उसे भारत से भी बड़ा समझे, क्या वह मलयाली, नागा, लदृाखी, पंजाबी आदि विविध राजनेताओं का समर्थन कभी हासिल कर पायेंगी ?  ऐसी क्षेत्रवादी प्रवृत्ति का नेता बस एक प्रदेश का होकर रह जाता है। समूचे भारत का कभी नहीं। बंगपुत्री ममता बनर्जी हुगली तट और बंगाल की खाड़ी के मध्यस्थल को ही अपनी दुनिया मानती है। याद आता है रेलमंत्री के पद पर रहते जब ममता बनर्जी बजाये रेल भवन मुख्यालय के, सियालदह स्टेशन से राष्ट्र के रेल के चलाती थीं। गोमुख से चली पवित्र भागीरथी बहते—बहते कोलकता पहुंचते हीं गंदली हुगली बन जाती है। फिर गंगासागर में समुद्र में गिरती है। मगर ममता इस गंगा को सिर्फ हुगली ही मानेंगी क्योंकि वह उनके राज्य में बस इतना ही भाग गंगा का बहता है। तो क्या ऐसी संकीर्णदिल महिला भारत की पीएम लायक होंगी?</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>(<span style="color: #ff0000;"><a style="color: #ff0000;" href="https://tismedia.in/">TIS Media</a></span> परिवार के संरक्षक<span style="color: #ff0000;"> <a style="color: #ff0000;" href="https://www.facebook.com/profile.php?id=100001609306781">के. विक्रम राव</a> </span>का शुमार देश के नामचीन पत्रकारों में होता है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर उन्होंने इमरजेंसी तक में स्वतंत्र आवाज के लिए जेल यात्रा की। महीनों की सजाएं भुगती। श्री राव,  वॉयस ऑफ अमेरिका, टाइम्स ऑफ इंडिया, इकोनोमिक टाइम्स, फिल्मफेयर और इलस्ट्रेटेड वीकली में प्रमुख पदों पर रहने के साथ-साथ नेशनल हेराल्ड के संस्थापक संपादक भी रह चुके हैं। प्रेस की नियामक संस्था &#8216;भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य रहने के अलावा मजीठिया वेतन बोर्ड और मणिसाना वेतन बोर्ड के सदस्य के तौर पर पत्रकारों के हित में लंबा संघर्ष किया है। <span style="color: #ff0000;"><a style="color: #ff0000;" href="https://www.facebook.com/profile.php?id=100001609306781">के.विक्रम राव</a>,</span> फिलहाल इंडियन फैडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट <span style="color: #ff0000;">#IFWJ</span> के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)</strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-west-bengal-election-and-why-mamata-banerjee-is-not-appropriate-for-becoming-pm-of-india/7783/">ममता ने मारा गोल, फाउल करके</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-west-bengal-election-and-why-mamata-banerjee-is-not-appropriate-for-becoming-pm-of-india/7783/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अब दिल्ली आइये दीदी&#8230;</title>
		<link>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-pawan-saxena-on-west-bengal-election-and-indian-political-parties/7701/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=article-by-dr-pawan-saxena-on-west-bengal-election-and-indian-political-parties</link>
					<comments>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-pawan-saxena-on-west-bengal-election-and-indian-political-parties/7701/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 May 2021 08:48:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Article]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[STATE]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Article On Indian Political Parties]]></category>
		<category><![CDATA[Article On West Bengal Elections]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[covid 19]]></category>
		<category><![CDATA[Election News]]></category>
		<category><![CDATA[Elections In West Bengal]]></category>
		<category><![CDATA[Future Of Indian Politics]]></category>
		<category><![CDATA[hindi news]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Mamata Banerjee]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra Modi]]></category>
		<category><![CDATA[political News]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul Gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[the inside stories]]></category>
		<category><![CDATA[TISMedia]]></category>
		<category><![CDATA[West Bengal News]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=7701</guid>

					<description><![CDATA[<p>लोकसभा चुनाव में मोदी के सामने संयुक्त विपक्ष का मजबूत चेहरा बनकर उभर सकती हैं ममता बनर्जी, मोदी के लिए वाटरलू बन सकता है बंगाल का चुनाव, अब सारी जिम्मेदारी यूपीए की  यह लेख एक पॉलिटिकल हाईपोथीसिस है यानी राजनीतिक परिकल्पना। जिसमें हम उपलब्ध तर्को, तथ्यों को जोड़कर एक सिरे में पिरोकर आगे की पटकथा &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-pawan-saxena-on-west-bengal-election-and-indian-political-parties/7701/">अब दिल्ली आइये दीदी&#8230;</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>आज मेरा कौतुहल सीमित था। सिर्फ इतना कि बंगाल कौन जीतेगा। नतीजे आ गए। दीदी जीत गईं। आंकड़ों की गुणा-भाग को अलग से समझियेगा। मैं जरा जल्दी में हूं। भविष्य तलाशने की। हां, एक खास बात और – अगर आप लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष को नापसंद करते हैं तो यहां लिखी लाइनें शायद आपके लिए नहीं हैं। जब तक आप अपना पसंददीदा न्यूज चैनल देखिये, हम अपनी बात को आगे बढ़ाते हैं।
			</div>
		</div>
	
<h5><span style="color: #ff0000;">लोकसभा चुनाव में मोदी के सामने संयुक्त विपक्ष का मजबूत चेहरा बनकर उभर सकती हैं ममता बनर्जी, मोदी के लिए वाटरलू बन सकता है बंगाल का चुनाव, अब सारी जिम्मेदारी यूपीए की </span></h5>
<p>यह लेख एक पॉलिटिकल हाईपोथीसिस है यानी राजनीतिक परिकल्पना। जिसमें हम उपलब्ध तर्को, तथ्यों को जोड़कर एक सिरे में पिरोकर आगे की पटकथा को समझने की कोशिश करेंगे। दिल्ली का अश्वमेघ बंगाल में रुक गया है। फिलहाल। लेकिन क्या यह दिल्ली दरबार की हार है। सच कहें तो यह कहना सच नहीं। एक तो आज की दिल्ली आसानी से हार नहीं मानती, और दूसरा उसके पास कम से कम राजनीतिक मुद्दों के लिए ही सही पर हमेशा  प्लान ए, बी, सी, डी तो जरूर होता है। तीन सीटों वाली दो अंकों तक जा पहुंची है। बाम वाले राम हो गए हैं। सरकार भले ही ना बनी हो, पर बड़े कमाल तो मोदी सेना ने भी किए ही हैं। खैर, इन बारीकियों को फिर परखेंगे अभी तो बात देश की जमीन पर पड़े, अंतिम सांसे ले रहे जर्जर विपक्ष के पुनर्जीवन पर केंद्रित करते हैं।</p>
<p>कहते हैं घायल शेरनी की सांसे भी दहाड़ से तेज होती हैं। अपने जीवन का सबसे खूंरेंजी चुनाव लड़के घायल ममता लड़खड़ाते कदमों से ही सही तीसरी बार राइटर्स बिल्डिंग पहुंच गई हैं मगर क्या उनके सपनों में 7 लोक कल्याण मार्ग नहीं आता होगा। बताते चलें यह दिल्ली का वह पता है जहां प्रधानमंत्री रहते हैं और इसे पहले 7 रेसकोर्स कहा जाता था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-vivek-mishra-on-covid-19-taught-us-how-we-should-behave-and-what-we-should-do-for-our-society/7697/"><strong>कोरोना से लड़ेगा इंडिया जीतेगा इंडिया: आओ मिलकर बेहतर जहान बनाएं</strong></a></span></p>
<p>हो सकता है, आज यह अनुमान आपको थोड़ा ज्यादा लगे, अतिश्योक्त, लेकिन अगर हम एक – एक करके ममता बनर्जी के राजनीतिक ट्रेक को डीकोड करें तब समझ सकेंगे कि वह कैसी हैं और उनको दिल्ली क्यों पहुंचना चाहिए। थोड़ा फ्लैशबैक में चलते हैं। जनवरी के जाड़े, तारीख दो जनवरी और सन् 1985, पश्चिम बंगाल से एक खबर आई – 29 साल की एक लड़की जिसका नाम ममता बनर्जी है, उसने बामपंथ के उस वक्त के सबसे बड़े दरख्त सोमनाथ चटर्जी को चुनाव हरा दिया है। चिल्ला जाड़ों में भी दिल्ली की सियासी जमात के माथे पर पसीना आ गया था। ममता बनर्जी की राजनीति की बुनियाद बामपंथ के विरोध पर खड़ी हो चुकी थी। 1996 कांग्रेस नेतृत्व यानी सीताराम केसरी ने सोमेन मित्रा को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया। दीदी उस वक्त युवक कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। सोमेन बाबू से उनकी नहीं पटी। वजह थी सोमेन के बामपंथी दोस्त। वह अपने प्रदेश अध्यक्ष को तरबूज कहतीं, यानी बाहर से हरा और अंदर से लाल। सोमेन मित्रा सीताराम केसरी गुट से आते थे। केसरी मित्रा की मदद से दोबारा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए, यह महत्वाकांक्षी दीदी को पसंद नहीं था। जब कांग्रेस का 80 वां अधिवेशन कोलकाता में हुआ, सामने लाखों की भीड़ के साथ ममता की रैली हुई। ममता बनर्जी ने रैली में आने वाले हरेक को असली जमीनी कांग्रेसी बताया। यानी ग्रासरूट कांग्रेसी। यही से बनी तृणमूल कांग्रेस। कांग्रेस ने ममता को छह साल के लिए निकाल दिया, वह जार्ज फर्नाडीज के साथ मिलकर एनडीए में चली गईं। अटल जी की सरकार में मंत्री बनीं। यशवंत सिन्हा की बात मानें तो कांधार हाईजैक के वक्त उन्होंने खुद को मंत्री के रुप में आतंकियों को सौंप कर आम यात्रियों की रिहाई का प्रस्ताव भी दिया। आज के वक्त में अगर कोई ऐसा करता तब यह जोरदार ब्रांडिंग का मास्टर स्ट्रोक होता, खैर, वह वक्त ऐसा नहीं था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/madeinkota/pride-of-kota/covid-care-center-at-kota-university-running-with-the-help-of-allen-career-institute-and-health-department/7694/"><strong>खुशनुमा और सकारात्मक माहौल से जीतेंगे जंग</strong></a></span></p>
<p>वह एनडीए में रहीं मगर सोनिया गांधी से उनके रिश्ते हमेशा गर्मजोशी से भरे रहे। सोनिया गांधी की मजबूरी यूपीए – वन में लेफ्ट लिबरल ताकतों का दबदबा था, जिसने ममता से दूरी को बनाये रखा। इसीलिए जब 2009 में कांग्रेस और लेफ्ट के रास्ते अलग हुए ममता फिर कांग्रेस के साथ आ गईं। वह गठजोड़ की राजनीति में माहिर हो चुकी थीं। 2011 में पश्चिम बंगाल (West Bengal) की जनता ने उनको राइटर्स बिल्डिंग पहुंचा दिया। वह मुख्यमंत्री बन गईं। पहली बार और फिर 2016 में दूसरी बार और अब 2021 में जीत – तीसरी बार।</p>
<p>चुनाव से ठीक पहले विभिन्न राजनीतिक दलों को भाजपा (BJP) विरोध के नाम पर जोड़ना। शरद पवार से मदद मांगना। ठीक चुनाव के बीच भाजपा की राजनीति के खिलाफ देश के प्रमुख विपक्षी दलों को चिट्ठी लिखना, यह बताता है कि उनका दिमाग आगे का रास्ता बना चुका है। रही बात कांग्रेस की तो दस जनपथ, उनके लिए नरम महसूस होता है। उनके चोट लगने पर जब पश्चिम बंगाल कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे अधीर रंजन ने मजाक उड़ाया तब कांग्रेस नेतृत्व ने उनके भी पर कतर दिये। राहुल गांधी भी पश्चिम बंगाल के चुनाव में सिर्फ औपचारिक उपस्थिति लगाते ही दिखे।</p>
<p>दीदी, अपनी आदत के मुताबिक दुश्मन के हमले का इंतजार नहीं करतीं। उनकी आक्रामकता ही उनका सबसे बड़ा हथियार है। चुनाव निपट चुका है, अब हमला करने की बारी उनकी है। वह जानती हैं कि कोरोना की मौतें, सरकारी नाकामी, नीतियों की विफलतायें, तबाह अर्थव्यवस्था, असंतुष्ट किसान और बेरोजगार – देश में ऐसी भी असंख्य आंखें हैं जो मोदी का विकल्प तलाश रही हैं। उनकी सादा सफेद साड़ी, हवाई चप्पल और स्ट्रीट फाइटर का मिजाज यह विकल्प हो सकता है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा की चुनावी मशीनरी ने चुनावों को पूरी तरह से व्यक्ति केंद्रित कर दिया है। पर्सनालिटी ब्रांडिंग ही वह वजह है कि उनके लिए काम करने वाले या उनके समर्थक जब यह सवाल पूछते हैं कि मोदी नहीं तो कौन..। इसका आत्मविश्वास से भरा जवाब किसी के पास नहीं होता। कांग्रेसी भी जानते हैं कि नए जमाने की भाजपा की टेक्नोलाजी ने उनके सबसे बड़े नेता राहुल गांधी का नाम कम से कम किसी चमत्कार से तो कोसों दूर पहुंचा ही दिया है। मीडिया की भाषा में इसे टीना इफेक्ट कहते हैं। यानी देयर इज नो आल्टरनेटिव, जिसका कोई विकल्प ना हो। अब अगर 2024 की चुनावी जमीन पर विपक्ष वास्तव में खड़ा होना चाहता है तब उसे यूपीए का पुनर्गठन करना होगा। ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री पद के लिए पहले से ही उम्मीदवार घोषित करना होगा। हांलाकि विपक्षी दलों के लिए यह फैसला कई समझौतों, अहंकारों के आग के दरिया से गुजर के जाने के बराबर होगा लेकिन बड़ी लड़ाई कुर्बानी तो मांगती ही है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/impact-of-increase-in-inflation-due-to-covid-19-in-india/7661/"><strong>ये कैसी विडंबना</strong><strong>, </strong><strong>महंगाई भी तिल-तिल मार रही !</strong></a></span></p>
<p>हो सकता है ऐसा हो, या ऐसा ना भी हो। किसी दावे के साथ ऐसा नहीं कह सकता। बस इतना बता सकता हूं कि आज से ठीक तीन दिन बाद पांच मई है। अब से ठीक दौ सौ साल पहले इस दिन नेपोलियन बोनापार्ट की मौत हुई थी। वाटरलू की हार के बाद। नेपोलियन एक साधारण योद्धा से शासक बना था। फ्रांस और यूरोप के बाद पूरी दुनिया को जीतना चाहता था। हार उसे बर्दाश्त नहीं थी। वह खुद को सुधारक कहता मगर इतिहास ने उसे अधिनायकवादी तानाशाह माना। वह वाटरलू की ऐसी छोटी सी लड़ाई हार गया था जो उसके लिए कुछ नहीं थी – जस्ट पीनट्स, यानी मूंगफली के दाने के बराबर। यहां यह प्रसंग इसलिए कि इतिहास निर्मम होता है, पर फिलहाल तो हम यहां भविष्य की बात कर रहे हैं।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong><span style="color: #ff0000;">डॉ. पवन सक्सेना – </span>पत्रकार एवं लेखक पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीएचडी हैं तथा सक्रिय पत्रकारिता का 22 वर्षो का अनुभव है। अमर उजाला, दैनिक जागरण समेत कई मीडिया हाउस को सेवायें दे चुके हैं।</strong></span><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>संप्रति – संपादक – लीडर पोस्ट। (Editor – Leader Post)</strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-pawan-saxena-on-west-bengal-election-and-indian-political-parties/7701/">अब दिल्ली आइये दीदी&#8230;</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-pawan-saxena-on-west-bengal-election-and-indian-political-parties/7701/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बंगाल चुनावः ममता की बुलेटप्रूफ कार में मौज काट रहे थे अफसर, चुनाव आयोग ने किया निलंबित</title>
		<link>https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/politics/election-commission-suspends-two-officers-who-were-negligent-in-protecting-mamta-banerjee/5227/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=election-commission-suspends-two-officers-who-were-negligent-in-protecting-mamta-banerjee</link>
					<comments>https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/politics/election-commission-suspends-two-officers-who-were-negligent-in-protecting-mamta-banerjee/5227/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Mar 2021 05:41:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[STATE]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[Election Commission of India]]></category>
		<category><![CDATA[Mamata Banerjee]]></category>
		<category><![CDATA[Nandigram]]></category>
		<category><![CDATA[the inside stories]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[TMC]]></category>
		<category><![CDATA[Trinamool Congress]]></category>
		<category><![CDATA[West Bengal]]></category>
		<category><![CDATA[West Bengal Assembly Elections 2021]]></category>
		<category><![CDATA[West Bengal Elections]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=5227</guid>

					<description><![CDATA[<p>कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा में लापरवाही का बड़ा खुलासा हुआ है। आलम यह था कि बेहद संवेदनशील हो चुके चुनावी माहौल में भी सफर करने के लिए ममता बनर्जी को साधारण कार दी गई थी। जबकि उनके लिए आवंटित की गई वीवीआईपी वाली बुलेट प्रूफ कार में अफसर मौज काट &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/politics/election-commission-suspends-two-officers-who-were-negligent-in-protecting-mamta-banerjee/5227/">बंगाल चुनावः ममता की बुलेटप्रूफ कार में मौज काट रहे थे अफसर, चुनाव आयोग ने किया निलंबित</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कोलकाता.</strong> पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा में लापरवाही का बड़ा खुलासा हुआ है। आलम यह था कि बेहद संवेदनशील हो चुके चुनावी माहौल में भी सफर करने के लिए ममता बनर्जी को साधारण कार दी गई थी। जबकि उनके लिए आवंटित की गई वीवीआईपी वाली बुलेट प्रूफ कार में अफसर मौज काट रहे थे। मामले का खुलासा होते ही तीन आला अफसरों पर केंद्रीय केंद्रीय निर्वाचन आयोग की गाज गिर गई।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota/rajasthan-police-dgp-m-l-lather-press-conference-in-kota/5216/">खाकी पर दाग : सवालों से घिरे राजस्थान पुलिस के डीजीपी</a></strong></p>
<p><strong>10 मार्च को घायल हुई थीं ममता </strong><br />
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी 10 मार्च को नंदीग्राम में चुनाव अभियान के दौरान कार का दरवाजा टकराने से घायल हो गई थी। दुर्घटना के बाद पश्चिम बंगाल की सियासत में तूफान आ गया। ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर उनके खिलाफ साजिश रचने तक का आरोप लगा डाला। ममता ने घटना की जानकारी देते हुए कहा था कि नंदीग्राम में विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए गई थी। रेयापेरा के पास जब मंदिर से वापस लौट रही थी तो चार-पांच लोगों ने धक्&#x200d;का मार दिया। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस दौरान उनके आसपास कोई पुलिस कर्मी मौजूद नहीं था। वहीं भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें नौटंकी तक करार दे दिया, लेकिन पांच दिन बाद घटना को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/fir-against-sp-chief-akhilesh-yadav-and-20-party-workers-over-moradabad-journalists-attack/5220/">उत्तर प्रदेशः पत्रकारों की पिटाई भाजपा की साजिश…!</a></strong></p>
<p><strong>सुरक्षा में हुई थी बड़ी चूक </strong><br />
ममता के साथ हुई धक्कामुक्की के बाद केंद्रीय चुनाव आयोग ने सफाई दी थी कि 10 मार्च को पूर्वी मिदनापुर के बिरुलिया बाजार में बनर्जी पर किसी ने जानबूझकर हमला नहीं किया था और ना ही उनके खिलाफ कोई साजिश रचे जाने के सबूत मिले हैं, लेकिन जब मामले ने सियासी तूल पकड़ा तो आयोग को पूरी घटना की गहनता से जांच करानी पड़ी। जांच में खुलासा हुआ कि उस दिन ममता बनर्जी की सुरक्षा में बड़ी चूक हुई थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे डायरेक्टर सीएम सिक्योरिटी विवेक सहाय घटना के वक्त वीवीआईपी के लिए आवंटित की गई कार में मौज काट रहे थे। जबकि वीवीआईपी यानि ममता बनर्जी को साधारण कार दे दी गई थी।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota/initiative-of-lok-sabha-speaker-om-birla-kotas-disabled-people-will-get-help-equipment/5000/">लोक सभा अध्यक्ष दिव्यांगों को बांटेंगे डेढ़ करोड़ से अधिक के सहायता उपकरण</a></strong></p>
<p><strong>अब गिरी अफसरों पर गाज </strong><br />
ममता की सुरक्षा में बड़ी चूक का खुलासा होते ही केंद्रीय चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री के सुरक्षा निदेशक विवेक सहाय को हटा दिया है। इसके साथ ही उनके अक्रामक व्यवहार की भी कड़ी आलोचना की है। इतना ही नहीं सीएम की सुरक्षा में लापरवाही के लिए पूर्वी मिदनापुर के पुलिस अधीक्षक प्रवीण प्रकाश को भी जिम्मेदार माना है। आयोग ने उन्हें निलंबित कर दिया है। जबकि,  जिलाधिकारी विवु गोयल को ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। अफसरों पर हुई कार्रवाई के बाद ममता और भी अक्रामक हो गई है।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/politics/election-commission-suspends-two-officers-who-were-negligent-in-protecting-mamta-banerjee/5227/">बंगाल चुनावः ममता की बुलेटप्रूफ कार में मौज काट रहे थे अफसर, चुनाव आयोग ने किया निलंबित</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/politics/election-commission-suspends-two-officers-who-were-negligent-in-protecting-mamta-banerjee/5227/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
