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	<title>National News Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>National News Archives - TIS Media</title>
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		<title>PM मोदी की चेतावनी&#8230; &#8220;कभी सफल नहीं होंगे&#8221;</title>
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		<pubDate>Sun, 29 Jan 2023 12:16:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश में मतभेदों को बोने और विभाजन पैदा करने के प्रयासों के प्रति देशवासियों को आगाह करते हुए विश्वास दिलाया कि इस तरह के प्रयास कभी सफल नहीं होंगे। बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री के बीच पीएम मोदी की यह चेतावनी खास मायने रखती है। दिल्ली छावनी के करियप्पा &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">नई दिल्ली.</span></strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश में मतभेदों को बोने और विभाजन पैदा करने के प्रयासों के प्रति देशवासियों को आगाह करते हुए विश्वास दिलाया कि इस तरह के प्रयास कभी सफल नहीं होंगे। बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री के बीच पीएम मोदी की यह चेतावनी खास मायने रखती है।</p>
<p>दिल्ली छावनी के करियप्पा मैदान में राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एकता का मंत्र ही भारत के लिए श्रेष्ठता हासिल करने का एकमात्र तरीका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवाओं के कारण पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। उनकी सरकार ने डिजिटल, स्टार्ट-अप और इनोवेशन क्रांतियों की शुरुआत की है। इससे युवा लाभान्वित हो रहे हैं। यह भारत के युवाओं के लिए नए अवसरों का समय है। हर कोई यह मान रहा है कि भारत का समय आ गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/odisha-health-minister-naba-das-shot-by-asi-gopal-das/12508/">ओडिशा के हेल्थ मिनिस्टर को पुलिस कर्मी ने मारी गोली, हालत नाजुक</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">देश तोड़ने के तलाशे जा रहे बहाने </span></strong><br />
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने वाले एनसीसी कैडेटों को संबोधित करते हुए कहा कि देश को तोड़ने के बहाने ढूंढे जाते हैं। भारत माता के बच्चों के बीच विभाजन पैदा करने के लिए भांति-भांति की बातें निकालकर मां भारती की संतानों के बीच दूध में दरार डालने की कोशिशें हो रही हैं। इस तरह के प्रयासों के बावजूद, भारत के लोगों के बीच कभी मतभेद नहीं होंगे।&#8221; प्रधानमंत्री ने कहा, &#8220;मां के दूध में कभी दरार नहीं हो सकती। एकता का मंत्र ही इसका उपचार है। एकता का मंत्र प्रतिज्ञा के साथ-साथ भारत की ताकत भी है। यह एकमात्र तरीका है, जिससे भारत वैभव हासिल करेगा।&#8221; ऐसा माना जा रहा है कि 2002 के गुजरात दंगों पर बीबीसी की डाक्यूमेंट्री को लेकर उठे विवाद की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी आई है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/sonam-wangchuk-on-hunger-strike/12504/">&#8216;रियल रेंचो&#8217; सोनम वांगचुकः माइनस 40 डिग्री में करने वाले थे अनशन, नजरबंद </a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">&#8216;युवा ऊर्जा और उत्साह से भरे हुए&#8217;</span></strong><br />
पीएम मोदी ने गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने वाले एनसीसी कैडेटों की सराहना की और कहा कि देश के लिए प्राथमिकता हमेशा युवा होंगे। युवा ऊर्जा और उत्साह से भरे हुए हैं. युवाओं के पास अपार अवसर हैं. केंद्र सरकार अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्रों में निजी भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है, जहां स्टार्ट-अप काफी प्रगति कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में सुधारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पहले आयात की जाने वाली असॉल्ट राइफलें, अब देश के भीतर निर्मित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि तेजी से सीमा के बुनियादी ढांचे का काम हो रहा है और यह युवाओं के लिए अवसरों और संभावनाओं की एक नई दुनिया खोलेगा। पीएम मोदी ने कहा कि यह देश की बेटियों के लिए भी अपार संभावनाओं का समय है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पिछले आठ वर्षों में महिलाओं की संख्या दोगुनी देखी है। तीनों सशस्त्र सेनाओं में सरहदों पर महिलाओं की तैनाती का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को नौसेना में नाविकों के रूप में भर्ती किया गया है और सशस्त्र बलों में लड़ाकू भूमिकाओं में भी प्रवेश करना शुरू कर दिया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/india/padma-awhttps://tismedia.in/india/padma-awards-2023/12489/ards-2023/12489/">Padma Awards 2023 : पद्म अवार्ड का ऐलान, मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण, देखें पूरी लिस्ट</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">बेटियों की भागीदारी में लगातार वृद्धि</span></strong><br />
पीएम मोदी ने कहा, &#8220;महिला कैडेटों के पहले बैच ने पुणे में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रशिक्षण शुरू कर दिया है और 1500 छात्राओं को सैनिक स्कूलों में भर्ती कराया गया है, जिन्हें पहली बार छात्राओं के लिए खोला गया था।&#8221; प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय कैडेट कोर में भी पिछले एक दशक में बेटियों की भागीदारी में लगातार वृद्धि देखी गई है। इस मौके पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, एनसीसी महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल गुरबीरपाल सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मनोज पांडे, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल आर हरिकुमार, चीफ ऑफ एयर स्टाफ वीआर चौधरी और रक्षा सचिव गिरधर अरमाने मौजूद थे।</p>
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		<title>कौन हैं भारत के वो 21 परमवीर जिनके नाम पर रखे गए अंडमान-निकोबार के 21 द्वीपों के नाम</title>
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		<pubDate>Mon, 23 Jan 2023 12:25:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia @NewDelhi पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के 21 सबसे बड़े द्वीपों का नामकरण किया। इन द्वीपों का नाम 21 परमवीर चक्र से सम्मानित 21 परमवीरों के नाम पर रखा गया है। पहले इन द्वीपों का कोई नाम नहीं था, लेकिन अब ये द्वीप देश के महानायकों के &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia @NewDelhi</span></strong> पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के 21 सबसे बड़े द्वीपों का नामकरण किया। इन द्वीपों का नाम 21 परमवीर चक्र से सम्मानित 21 परमवीरों के नाम पर रखा गया है। पहले इन द्वीपों का कोई नाम नहीं था, लेकिन अब ये द्वीप देश के महानायकों के नाम से जाने जाएंगे। आइए जानते हैं परमवीर चक्र से सम्मानित इन योद्धाओं के बारे में।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12427 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/somnath.jpg" alt="" width="600" height="348" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/somnath.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/somnath-300x174.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1. मेजर सोमनाथ शर्मा</strong></span><br />
मेजर सोमनाथ शर्मा देश पहले परमवीर हैं। मेजर शर्मा ने आजादी के बाद जम्मू कश्मीर में पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ लड़ते हुए शहादत दी थी। बात, तीन नवंबर 1947 की है। मेजर सोमनाथ शर्मा की कमांड में 4 कुमाऊं की एक कंपनी को वडगाम जाने का आदेश मिला। इस दौरान करीब 500 दुश्मन सैनिकों ने, श्रीनगर हवाई पट्टी पर मेजर शर्मा की टुकड़ी पर तीन तरफ से हमला बोल दिया। मेजर सोमनाथ शर्मा अत्यंत बहादुरी के साथ खुले मैदान में दौड़-दौड़ कर अपनी टुकड़ियों के पास जाते रहे, कुशलतापूर्वक दुश्मनों पर गोलाबारी करते रहने का निर्देश देते रहे। इसी दौरान उनके नजदीक एक मोर्टार शेल आकर फटा जिससे वे वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर सोमनाथ शर्मा के इस प्रेरणादायी नेतृत्व ने उनके सैनिकों को उनकी मृत्यु के कई घंटो बाद भी लड़ते रहने के लिए प्रेरित किया और शत्रु के आक्रमण को रोके रखा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12427 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/somnath.jpg" alt="" width="600" height="348" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/somnath.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/somnath-300x174.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">2. नायक जदुनाथ सिंह</span></strong><br />
नायक जदुनाथ सिंह जम्मू और कश्मीर में नौशेरा के नजदीक तैन धार में चौकी कमांडर थे। छह फरवरी 1948 को दुश्मन सैनिकों ने उनकी चौकी पर हमला बोल दिया। वह और उनकी टुकड़ी दुश्मन द्वारा लगातार किए गए तीन हमलों से अपनी चौकी को बचाने में कामयाब रहे। तीसरे हमले के अंत तक चौकी पर मौजूद 27 जवानों में से 24 जवान शहीद अथवा घायल हो चुके थे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, एक स्टेन गन के साथ, उन्होंने अकेले ही शत्रुओं का सामना किया जिससे डर कर हमलावर भाग खड़े हुए। अदम्य साहस और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की बिल्कुल परवाह न करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12422 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/rane.jpg" alt="" width="600" height="346" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/rane.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/rane-300x173.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">3. सेकंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे</span></strong><br />
आठ अप्रैल 1948 को बॉम्बे सैपर्स के सेकंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे नौशेरा-राजौरी रोड के माइल 26 पर बारूदी सुरंगों और सड़क के अवरोधों को हटाने वाले दल की कमान संभाले हुए थे। दुश्मन ने उस क्षेत्र में भारी गोलाबारी शुरु कर दी जिसके कारण बारूदी सुरंग हटाने वाले दल के दो सदस्य वीरगति को प्राप्त हुए और पांच घायल हो गए। घायल होने के बावजूद सेकंड लेफ्टिनेंट राणे कुशलतापूर्वक एक विशालकाय स्टूअर्ट टैंक के नीचे गए और उसके साथ-साथ रेंगने लगे। वे टैंक के खतरनाक पहियों के अनुरूप रेंगते रहे और टैंक के ड्राइवर को एक रस्सी द्वारा संकेत देते हुए उसे बारूदी सुरंगों से सुरक्षित निकाल ले गए। इस तरह उन्होंने आगे बढ़ते भारतीय टैंकों को एक सुरक्षित रास्ता प्रदान किया। दुश्मन के सामने विशिष्ट बहादुरी और अदम्य वीरता प्रदर्शित करने के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12420 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/peru.jpg" alt="" width="600" height="355" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/peru.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/peru-300x178.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">4. कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह</span></strong><br />
18 जुलाई 1948 को 6 राजपूताना राइफल्स के सी एच एम पीरू सिंह को जम्मू कश्मीर के तिथवाल में शत्रुओं द्वारा अधिकृत एक पहाड़ी पर आक्रमण कर उस पर कब्जा करने का काम सौंपा गया। हमले के दौरान उन पर एम एम जी से भारी गोलीबारी की गई और हथगोले फेंके गए। उनकी टुकड़ी के आधे से अधिक सैनिक मारे गए या घायल हो गए। सी एच एम पीरू सिंह ने अपने बचे हुए जवानों को लड़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया और घायल होने के बावजूद दुश्मन के एम एम जी युक्त दो बंकरों को बर्बाद कर दिया। अचानक उन्हें पता चला कि उनकी टुकड़ी में इकलौते वे ही जीवित बचे हैं। जब दुश्मनों ने उन पर एक और हथगोला फेंका, वे लहुलुहान चेहरे के साथ रेंगते हुए आगे बढ़े और अंतिम सांस लेने से पहले उन्होंने दुश्मन के ठिकाने को नष्ट कर दिया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12417 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/karam.jpg" alt="" width="600" height="371" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/karam.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/karam-300x186.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">5. लांस नायक करम सिंह</span></strong><br />
13 अक्तूबर 1948 को 1 सिख रेजीमेंट के लांस नायक करम सिंह जम्मू-कश्मीर की रिचमर गली में एक टुकड़ी की कमान संभाले हुए थे। दुश्मन ने बंदूकों और मोर्टारों से भारी गोलाबारी द्वारा हमला शुरु किया जिससे पोस्ट के सभी बंकर बर्बाद हो गए। बुरी तरह घायल होते हुए भी लांस नायक करम सिंह एक से दूसरे बंकर में जाकर अपने साथियों की मदद करते रहे और उन्हें लड़ने के लिए प्रेरित करते रहे। दुश्मन ने उस दिन आठ बार आक्रमण किया। हर एक हमले के दौरान लांस नायक करम सिंह ने अपने साथियों को प्रोत्साहित किया और उनका जोश बढ़ाया। रीछमार गली को बचाने के लिए उनकी टुकड़ी ने दुश्मनों पर जवाबी हमला करते हुए गुत्थम-गुत्था की लड़ाई में अपने हथियार के बैनट से प्रहार किया। अत्यधिक प्रतिकूल परिस्थितियों में विशिष्ट साहस और अदम्य वीरता के लिए लांस नायक करम सिंह को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12423 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/salariya.jpg" alt="" width="600" height="361" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/salariya.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/salariya-300x181.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">6. कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया</span></strong><br />
पांच दिसंबर 1961 को 3/1 गोरखा राइफल्स को संयुक्त राष्ट्र संघ मिशन कार्य के दौरान एलिजाबेथविले में कटंगी सैनिकों द्वारा लगाए गए सड़क के अवरोधों को हटाने का आदेश मिला। जब कैप्टन सलारिया ने गोरखा कंपनी के साथ मिलकर अवरोध को हटाने का प्रयास किया तो उन्हें दुश्मन के भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। दुश्मन ने उनके दल पर स्वचालित हथियारों से भारी गोलाबारी की। कैप्टन सलारिया के सैनिकों ने दुश्मन पर संगीनों, खुखरी और हथगोलों से आक्रमण कर 40 दुश्मनों को मार डाला और उनकी दो कारों को नष्ट कर दिया। कैप्टन सलारिया ने गर्दन पर गंभीर जख्म होते हुए भी तब तक लड़ाई जारी रखी जब तक कि वे अपने जख्मों के कारण वीरगति को प्राप्त नहीं हो गए। उनकी बहादुरी और साहसपूर्ण कार्रवाई से दुश्मन बुरी तरह हतोत्साहित हो गया और अधिक संख्या में होने के बावजूद वहां से भाग खड़ा हुआ। इस तरह एलिजाबेथविले में स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय को बचा लिया गया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12412 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/dhan-singh.jpg" alt="" width="600" height="365" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/dhan-singh.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/dhan-singh-300x183.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>7. मेजर धन सिंह थापा</strong></span><br />
1/8 गोरखा राइफल्स के मेजर धन सिंह थापा लद्दाख में एक अग्रिम चौकी की कमान संभाले हुए थे। 20 अक्तूबर 1962 को चीन के सैनिकों ने उनकी चौकी पर तोपों और मोर्टारों से बमबारी शुरु करने के बाद भारी सैन्यबल के साथ आक्रमण कर दिया। उनके नेतृत्व में, दुश्मनों की तुलना में बहुत कम संख्या में होते हुए भी भारतीय सैनिकों ने आक्रमण को नाकाम कर दिया और दुश्मनों को भारी क्षति पहुंचाई। दुश्मन ने दूसरी बार आक्रमण किया और इस बार भी उनका हमला विफल रहा। चीनी सैनिकों ने तीसरी बार आक्रमण किया, इस बार उनकी इन्फैंट्री की सहायता के लिए टैंक भी थे। भारतीय सैनिकों की संख्या काफी कम रह गयी थी, फिर भी उन्होंने अंतिम दम तक मुकाबला किया। मेजर धन सिंह थापा ने चीनी सैनिकों द्वारा काबू में किए जाने से पूर्व आमने-सामने के मुकाबले में अनेक दुश्मन सैनिकों को मार गिराया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12416 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/jogindar.jpg" alt="" width="600" height="346" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/jogindar.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/jogindar-300x173.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">8. सूबेदार जोगिंदर सिंह</span></strong><br />
23 अक्तूबर 1962 भारत-चीन युद्ध के दौरान सूबेदार जोगिन्दर सिंह की 1 सिख बटालियन की प्लाटून ने बूमला, अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के दो आक्रमणों को विफल कर दिया। इसमें दुश्मनों को भारी क्षति पहुचीं। उनकी प्लाटून के तब तक आधे जवान शहीद हो चुके थे। सूबेदार जोगिन्दर सिंह बुरी तरह घायल हो गए थे लेकिन उन्होंने अपना मोर्चा छोड़ने से इनकार कर दिया। जब उनकी प्लाटून पर चीनी सैनिकों ने तीसरी बार आक्रमण किया तब भी उनके प्रेरणादायक नेतृत्व में उनकी प्लाटून अपने स्थान पर ही डटी रही। सूबेदार जोगिन्दर ने खुद एक मशीन गन को संभाला और अनेक दुश्मन सैनिकों को मार गिराया। आखिर में उनका गोला-बारूद समाप्त हो गया। सूबेदार जोगिन्दर ने अपने जवानों को प्रेरित किया और संगीनों की लड़ाई में उनका नेतृत्व किया। इस महासंग्राम में संख्या में अधिक शत्रु सैनिकों से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12426 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/setan.jpg" alt="" width="600" height="355" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/setan.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/setan-300x178.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">9. मेजर शैतान सिंह</span></strong><br />
मेजर शैतान सिंह जम्मू कश्मीर के लद्दाख सेक्टर में लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर रेजांग ला में कुमाऊं रेजिमेंट की तेरहवीं बटालियन की एक कंपनी की कमान संभाले हुए थे। 18 नवंबर 1962 को बहुत बड़ी संख्या मे चीनी सैनिकों ने उनके ठिकाने पर जबरदस्त हमला किया। मेजर शैतान सिंह इस ऑपरेशन के दौरान पूरी तरह हावी रहे और इस विकट स्थिति में व्यक्तिगत खतरा उठाते हुए एक प्लाटून पोस्ट से दूसरे तक जाकर अपने सैनिकों का मनोबल बनाए रखा। गंभीर रूप से जख्मी होने के बावजूद वह अपने सैनिकों को प्रेरित करते हुए उनका नेतृत्व करते रहे। सैनिक भी अपने अफसर के बहादुरीपूर्ण उदाहरण का अनुकरण करते हुए वीरतापूर्वक लड़े और दुश्मनों को भारी क्षति पहुंचाई। जब उनके सैनिकों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास किया तो उन्होंने मना कर दिया और अपनी अंतिम सांस तक उन्हें लड़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करते रहे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12428 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/tarapor.jpg" alt="" width="600" height="367" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/tarapor.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/tarapor-300x184.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">10. लेफ्टिनेंट कर्नल ए बी तारापोर</span></strong><br />
लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशीर बुरजोरजी तारापोर 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान स्यालकोट सेक्टर में पूना हॉर्स रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे। 11 सितंबर 1965 को 17 पूना हॉर्स पर दुश्मन के बख्तरबंद टैंको द्वारा भारी जवाबी हमला किया गया। रेजिमेंट ने शत्रु के हमले को नाकाम कर दिया और अपनी जगह डटे रहकर वीरतापूर्वक फिल्लौरा पर आक्रमण कर दिया। घायल होने के बावजूद लेफ्टिनेंट कर्नल तारापोर ने सुरक्षित स्थान पर ले जाए जाने से मना कर दिया और वजीरवाली, जसोरन तथा बुतुर-डोगरांडी पर कब्जा करने में अपनी रेजिमेंट का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व से प्रेरित होकर पूना हॉर्स ने 60 पाकिस्तानी टैंकों को ध्वस्त कर दिया। इस लड़ाई के दौरान, लेफ्टिनेंट कर्नल तारापोर के टैंक पर एक गोला आकर टकराया जिससे टैंक में आग लग गई और वे शूरवीर की तरह वीरगति को प्राप्त हुए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12413 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/hamid.jpg" alt="" width="600" height="358" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/hamid.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/hamid-300x179.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">11. सी क्यू एम एच अब्दुल हमीद</span></strong><br />
सी क्यू एम एच अब्दुल हमीद 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खेम करन सेक्टर में चौथी ग्रेनेडियर्स में सेवारत थे। 10 सितंबर 1965 को पाकिस्तानी सेना ने पैटन टैंकों के साथ खेम करन सेक्टर पर हमला कर दिया। एक जीप पर लगी आर सी एल गन टुकड़ी की कमान संभाले सी क्यू एम एच अब्दुल हमीद बगल में पोजिशन लेने के लिए बढ़े। दुश्मनों की भीषण गोलाबारी और टैंकों की बमबारी के बीच उन्होंने दुश्मन के अग्रिम टैंक को ध्वस्त कर दिया और फुर्ती से अपनी पोजिशन बदलते हुए दूसरे टैंक को भी नष्ट कर दिया। तब तक वे दुश्मन के टैंकों की नजर में आ चुके थे और उनकी जीप पर भीषण गोलीबारी होने लगी। सी क्यू एम एच अब्दुल हमीद बिना किसी डर के अपने स्थान पर डटे रहे और गोलाबारी करते रहे तथा अपनी टुकड़ी को प्रेरित करते रहे। गंभीर रूप से घायल होने से पहले उन्होंने सात पाकिस्तानी टैंकों को ध्वस्त कर दिया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12409 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/akka.jpg" alt="" width="600" height="359" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/akka.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/akka-300x180.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">12. लांस नायक अलबर्ट एक्का</span></strong><br />
1971 के भारत-पाक युद्ध में गंगासागर मे दुश्मन के प्रतिरक्षा ठिकानों पर आक्रमण के दौरान लांस नायक अलबर्ट एक्का चौदहवीं गार्ड्स की अग्रिम कंपनी में तैनात थे। चार दिसंबर 1971 को लांस नायक एक्का ने देखा कि दुश्मन की मशीनगन की गोलीबारी से उनकी कंपनी को बहुत नुकसान हो रहा है। अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की पूरी तरह उपेक्षा करते हुए उन्होंने दुश्मन के बंकर पर धावा बोल दिया और दो दुश्मन सैनिकों को ढेर कर दिया। अचानक एक इमारत से मीडियम मशीनगन से गोलीबारी होने लगी। बुरी तरह जख्मी होने के बावजूद वह रेंगते हुए आगे बढ़े और हथगोला फेंककर एक सैनिक को मार डाला। एम एम जी से गोलीबारी जारी थी लेकिन लांस नायक एक्का ने उत्कृष्ट वीरता का प्रदर्शन करते हुए बंकर में घुसे और दुश्मन को मार गिराया। इस तरह उन्होंने आक्रमण की सफलता सुनिश्चित की।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12425 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/sekho.jpg" alt="" width="600" height="383" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/sekho.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/sekho-300x192.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">13. फ्लाइंग अफसर निर्मल जीत सिंह सेखों</span></strong><br />
14 दिसंबर 1971 को भारत-पाक युद्ध के दौरान दुश्मन के छह सेबर वायुयानों ने श्रीनगर एअरफील्ड पर भारी गोलाबारी की। आक्रमण के दौरान उड़ान भरने के प्रयास में अपनी जान जोखिम मे डाल कर 18वीं स्क्वाड्रन के फ्लाइंग अफसर निर्मल जीत सिंह सेखों, जो एक लड़ाकू विमान पायलट थे, ने उड़ान भरी और दो आक्रमणकारी सेबर लड़ाकू जहाजों से भिड़ गए। उन्होंने एक विमान पर अविश्वसनीय कुशलता दिखाते हुए प्रहार किया और दूसरे विमान को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस समय तक पाक वायुसेना के चार सेबर विमान अपने साथियों के बचाव में आ गए। इस हवाई लड़ाई के दौरान उनके वायुयान को एक सेबर ने मार गिराया और वे वीरगति को प्राप्त हुए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12414 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/hoshiyar.jpg" alt="" width="600" height="342" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/hoshiyar.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/hoshiyar-300x171.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">14. मेजर होशियार सिंह</span></strong><br />
15 दिसंबर 1971 को भारत-पाक युद्ध के दौरान मेजर होशियार सिंह तीसरी ग्रेनेडियर्स की एक कंपनी की कमान संभाले हुए थे और उन्हें जरपाल में दुश्मन के एक ठिकाने पर कब्जा करने का आदेश मिला। हमले के दौरान उनकी कंपनी पर भीषण गोलाबारी हुई। उन्होंने निडरता से हमले का नेतृत्व किया और एक भयानक मुठभेड़ के बाद लक्षित ठिकाने पर कब्जा कर लिया। दुश्मन ने जवाबी कार्रवाई मे एक के बाद एक कई आक्रमण किए। घायल होने के बावजूद वे एक मोर्चे से दूसरे मोर्चे तक कार्रवाई करते हुए अपने सैनिकों को प्रेरित करते रहे और दुश्मनों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया। तभी दुश्मन का एक गोला, मध्यम मशीन गन वाली पोस्ट के पास आकर फटा जिससे वहां के सैनिक जख्मी हो गए और मशीन गन निष्क्रिय हो गई। मशीन गन के महत्व को समझते हुए मेजर होशियार सिंह तुरंत वहां पहुंचे और उसे स्वयं संचालित कर दुश्मन को गंभीर क्षति पहुंचाई। हमले का मुंह तोड़ जवाब दिया गया और दुश्मन वहां से भाग खड़े हुए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12418 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/khetrapal.jpg" alt="" width="600" height="363" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/khetrapal.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/khetrapal-300x182.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">15. सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल</span></strong><br />
16 दिसंबर 1971 को भारत-पाक युद्ध के दौरान पूना हॉर्स ‘ए’ स्क्वाड्रन के सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल मदद के आकस्मिक आव्हान पर शकरगढ़ सेक्टर में ‘बी’ स्क्वाड्रन की मदद के लिए बढ़े। मजबूत ठिकानों और आर सी एल गन वाले मोर्चों से उनके टैंको पर भारी गोलाबारी की गई। दुश्मन के आक्रमण को विफल करते हुए वे ‘बी’ स्क्वाड्रन के पास पहुंचे और दुश्मन के साथ घमासान युद्ध में शामिल हो गए। इस युद्ध में शत्रु के दस टैंक ध्वस्त हो गए जिसमें से चार टैंकों को स्वयं सेकंड लेफ्टिनेंट खेत्रपाल ने ध्वस्त किया। इस कार्रवाई में वे बुरी तरह से घायल हो गए और उन्हें पीछे हटने का आदेश दिया गया परंतु उन्होंने आदेश को मानने से मना कर दिया। उनके सेंचुरियन टैंक ‘फामागुस्ता’ पर दुश्मन का दूसरा गोला गिरने और उनके वीरगति को प्राप्त होने से पूर्व उन्होंने शत्रु के एक और टैंक को ध्वस्त कर दिया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12410 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/bana-singh.jpg" alt="" width="600" height="359" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/bana-singh.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/bana-singh-300x180.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">16. नायब सूबेदार बाना सिंह</span></strong><br />
26 जून 1987 को जम्मू एवं कश्मीर लाइट इंफेंट्री की आठवीं बटालियन के नायब सूबेदार बाना सिंह स्वेच्छा से उस कार्यबल में शामिल हुए जिसे 21,000 फीट की ऊंचाई पर दुश्मन द्वारा सियाचिन ग्लेशियर में पाक सेना के कब्जे में कैद चौकी को छुड़ाने का कार्य सौंपा गया था। सियाचिन की भयंकर जलवायु के साथ तीव्र बर्फीले तूफान, -50 डिग्री सेल्सियस के लगभग तापमान और ऑक्सीजन की कमी जीवित रहने के लिए सबसे बड़ा खतरा थे। नायब सूबेदार बाना सिंह और उनके जवानों ने शून्य दृश्यता की स्थितियों में जोखिमपूर्ण मार्ग से बर्फ की 457 मीटर ऊंची दीवार पर चढ़ाई की, चोटी पर पहुंचे और हथगोले फेंककर दुश्मन के बंकर को ध्वस्त कर दिया। वह और उनके दल ने संगीनों के साथ आक्रमण किया और कुछ पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया जबकि बाकियों ने डर कर चोटी से छलांग लगा ली।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12421 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/ramaswami.jpg" alt="" width="600" height="363" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/ramaswami.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/ramaswami-300x182.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">17. मेजर रामास्वामी परमेश्वरन</span></strong><br />
25 नवंबर 1987 को ऑपरेशन पवन के दौरान जब महार रेजिमेंट की आठवीं बटालियन के मेजर रामास्वामी परमेश्वरन श्रीलंका में एक तलाशी अभियान से लौट रहे थे। इसी दौरान परमेश्वरन के सैन्य दल पर आतंकवादियों ने घात लगाकर आक्रमण किया। धैर्य और सूझ-बूझ से उन्होंने आतंकवादियों को पीछे से घेरा और उन पर हमला कर दिया जिससे आतंकी पूरी तरह से स्तब्ध रह गए। आमने-सामने की लड़ाई में एक आतंकवादी ने उनके सीने में गोली मार दी। निडर होकर मेजर परमेश्वरन ने आतंकवादी से राइफल छीन ली और उसे मौत के घाट उतार दिया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में भी वे निरंतर आदेश देते रहे और अपनी अंतिम सांस तक अपने साथियों को प्रेरित करते रहे। उनकी इस वीरतापूर्ण कार्रवाई के परिणाम स्वरूप पांच आतंकवादी मारे गए और भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद किए गए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12419 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/pandy.jpg" alt="" width="600" height="344" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/pandy.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/pandy-300x172.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">18. लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे</span></strong><br />
आपरेशन विजय के दौरान 11 गोरखा राइफल्स की पहली बटालियन के लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे को जम्मू कश्मीर के बटालिक में खालूबार रिज को दुश्मनों से खाली कराने का काम सौंपा गया। तीन जुलाई 1999 को उनकी कंपनी जैसै ही आगे बढ़ी दुश्मन ने उन पर भारी गोलाबारी शुरु कर दी। उन्होंने निडरतापूर्वक दुश्मन पर आक्रमण कर चार सैनिकों को मार डाला और दो बंकर तबाह कर दिए। कंधे और पैरों में जख्म होने के बावजूद वे पहले बंकर के निकट पहुंचे और भीषण मुठभेड़ में दो अन्य सैनिकों को मारकर बंकर खाली करा दिया। मस्तक पर प्राणघातक जख्म लगने से पहले एक के बाद एक बंकर पर कब्जा करने में वह अपने दल का नेतृत्व करते रहे। उनके अदम्य साहस से प्रोत्साहित होकर उनके सैनिकों ने दुश्मन पर हमला जारी रखा और अंततः पोस्ट पर कब्जा कर लिया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12429 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/yogendra.jpg" alt="" width="600" height="375" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/yogendra.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/yogendra-300x188.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">19. ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव</span></strong><br />
आपरेशन विजय के दौरान अठारहवीं ग्रेनेडियर्स के ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव घातक प्लाटून के सदस्य थे। इस प्लाटून को जम्मू कश्मीर के द्रास में टाइगर हिल टॉप पर कब्जा करने का काम सौंपा गया था। तीन जुलाई 1999 को दुश्मन की भारी गोलाबारी के बीच अपनी टीम के साथ योगेंद्र ने बर्फीली खड़ी चट्टान पर चढ़ाई की और वहां स्थित बंकर को ध्वस्त कर दिया जिससे प्लाटून उस खड़ी चट्टान पर चढ़ने में कामयाब हो गई। पेट के निचले हिस्से और कंधे में तीन गोलियां लगने के बावजूद अतुलनीय ताकत का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने दूसरे बंकर पर हमला कर उसे भी ध्वस्त कर दिया और तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार डाला। उनके शौर्यपूर्ण कारनामे से प्रेरित होकर प्लाटून को नया साहस मिला तथा उसने अन्य ठिकानों पर हमला कर दिया और अंततः टाइगर हिल टॉप पर वापस कब्जा कर लिया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12424 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/sanajay.jpg" alt="" width="600" height="365" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/sanajay.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/sanajay-300x183.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>20. राइफलमैन संजय कुमार</strong></span><br />
ऑपरेशन विजय के दौरान, राइफलमैन संजय कुमार चार जुलाई 1999 को जम्मू-कश्मीर की मुशकोह घाटी में खड़ी चट्टान क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए 13 JAK RIF की एक कंपनी के प्रमुख स्काउट थे। चट्टान पर चढ़ने के बाद, वह एक बंकर से दुश्मन की गोलाबारी की चपेट में आ गए। आमने-सामने की लड़ाई में, उन्होंने तीन घुसपैठियों को मार गिराया और खुद गंभीर रूप से घायल हो गए। अचानक, दुश्मनों ने एक यूनिवर्सल मशीन गन पीछे छोड़ कर भागना शुरू कर दिया। राइफलमैन संजय कुमार ने यूएमजी को उठाया और भाग रहे दुश्मन को मार गिराया। उनकी बहादुरी भरी कार्रवाई ने उनके साथियों को दुश्मन पर हमला करने और ऊंची चोटी पर कब्जा करने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12411 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/batrajpg.jpg" alt="" width="600" height="345" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/batrajpg.jpg 600w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2023/01/batrajpg-300x173.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">21. कैप्टन विक्रम बत्रा</span></strong><br />
आपरेशन विजय के दौरान 13 जैक राइफल्स के कैप्टन विक्रम बत्रा को प्वाइंट 5140 पर कब्जा करने का कार्य सौंपा गया। दस्ते का नेतृत्व करते हुए उन्होंने निडरतापूर्वक आमने-सामने की लड़ाई मे चार शत्रु सैनिकों को मार गिराया। सात जुलाई 1999 को उनकी कंपनी को प्वाइंट 4875 पर कब्जा करने का कार्य सौंपा गया। आमने-सामने की भीषण मुठभेड़ में उन्होंने पांच शत्रु सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। गंभीर रूप से जख्मी हो जाने के बावजूद, उन्होंने जवाबी आक्रमण मे अपने सैनिकों का नेतृत्व किया। वीरगति प्राप्त करने से बत्रा ने पहले दुश्मनों की भीषण गोलाबारी के बीच सैन्य दृष्टि से असंभव कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उनके इस निडरतापूर्ण कार्य से प्रेरित होकर उनके जवानों ने दुश्मनों का सफाया करते हुए प्वाइंट 4875 पर कब्जा कर लिया।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/know-the-story-of-great-soldiers-of-india-who-got-paramveer-chakra/12408/">कौन हैं भारत के वो 21 परमवीर जिनके नाम पर रखे गए अंडमान-निकोबार के 21 द्वीपों के नाम</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>जहां बनी थी आजाद भारत की पहली सरकार, परमवीरों के नाम से जाने जाएंगे अंडमान-निकोबार के 21 द्वीप</title>
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		<pubDate>Mon, 23 Jan 2023 11:28:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia @NewDelhi हिंदुस्तान की जिस जमीं पर आजाद भारत की पहली सरकार मिली थी उसे अब नई पहचान मिलेगी। जी हां, हम बात कर रहे हैं अंडमान निकोबार द्वीप समूह की। जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद भारत की पहली सरकार बनाई थी। आज नेताजी के जन्म दिन पर इस सरजमीं को मोदी सरकार &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia @NewDelhi</span></strong> हिंदुस्तान की जिस जमीं पर आजाद भारत की पहली सरकार मिली थी उसे अब नई पहचान मिलेगी। जी हां, हम बात कर रहे हैं अंडमान निकोबार द्वीप समूह की। जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद भारत की पहली सरकार बनाई थी। आज नेताजी के जन्म दिन पर इस सरजमीं को मोदी सरकार ने नई पहचान दी। यह पहचान थी हिंदुस्तान की संप्रुत्ता के लिए लड़ते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर देने और युद्धों में अदम्य साहस दिखाने वाले परमवीरों के नाम। जिस पर इन द्वीपों को पहचाना जाएगा।</p>
<p>अंडमान-निकोबार के 21 द्वीपों को सोमवार को देश के परमवीरों, यानी परमवीर चक्र विजेताओं का नाम मिल गया। इनमें भारत-चीन जंग में पैर से मशीनगन चलाने वाले मेजर शैतान सिंह, कारगिल जंग के हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा और मनोज कुमार पांडेय जैसे महान योद्धाओं के नाम पर द्वीपों के नाम रखे गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस प्रोग्राम से जुड़े। PM मोदी ने कहा- अंडमान की धरती पर ही सबसे पहले तिरंगा लहराया गया था। आजाद भारत की पहली सरकार यहीं बनी थी। आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिवस भी है। इस दिन को हम पराक्रम दिवस के तौर पर मना रहे हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>इन 21 द्वीपों के नाम परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर</strong></span><br />
<strong>1. INAN 198-</strong> नायक जदुनाथ सिंह (भारत-पाक युद्ध 1947)<br />
<strong>2. INAN 474-</strong> मेजर राम राघोबा राणे (भारत-पाक युद्ध 1947)<br />
<strong>3. INAN 308-</strong> ऑनरेरी कैप्टन करम सिंह (भारत-पाक युद्ध 1947)<br />
<strong>4. INAN 370-</strong> मेजर सोमनाथ शर्मा (भारत-पाक युद्ध 1947)<br />
<strong>5. INAN 414-</strong> सूबेदार जोगिंदर सिंह (भारत-चीन युद्ध 1962)<br />
<strong>6. INAN 646-</strong> लेफ्टिनेंट कर्नल धन सिंह थापा (भारत-चीन युद्ध 1962)<br />
<strong>7. INAN 419-</strong> कैप्टन गुरबचन सिंह (भारत-चीन युद्ध 1962)<br />
<strong>8. INAN 374-</strong> कम्पनी हवलदार मेजर पीरू सिंह (भारत-पाक युद्ध 1947)<br />
<strong>9. INAN 376-</strong> लांस नायक अलबर्ट एक्का (भारत-पाक युद्ध 1971)<br />
<strong>10. INAN 565-</strong> लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशिर तारापोर (भारत-चीन युद्ध 1962)<br />
<strong>11. INAN 571-</strong> हवलदार अब्दुल हमीद (भारत-पाक युद्ध 1965)<br />
<strong>12. INAN 255-</strong> मेजर शैतान सिंह (भारत-चीन युद्ध 1962)<br />
<strong>13. INAN 421-</strong> मेजर रामास्वामी परमेश्वरन (श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के शहीद 1987)<br />
<strong>14. INAN 377-</strong> फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों (भारत-पाक युद्ध 1971)<br />
<strong>15. INAN 297-</strong> सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल (भारत-पाक युद्ध 1971)<br />
<strong>16. INAN 287-</strong> मेजर होशियार सिंह (भारत-पाक युद्ध 1971)<br />
<strong>17. INAN 306-</strong> कैप्टन मनोज पांडेय (कारगिल युद्ध 1999)<br />
<strong>18. INAN 417-</strong> कैप्टन विक्रम बत्रा (कारगिल युद्ध 1999)<br />
<strong>19. INAN 293-</strong> नायक सूबेदार बाना सिंह (सियाचिन में पाकिस्तान से पोस्ट छीनी 1987)<br />
<strong>20. INAN 193-</strong> कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव (कारगिल युद्ध 1999)<br />
<strong>21. INAN 536-</strong> सूबेदार मेजर संजय कुमार (कारगिल युद्ध 1999)</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/21-islands-of-andaman-and-nicobar-will-get-the-names-of-param-vir-chakra-awarded-soldiers/12405/">जहां बनी थी आजाद भारत की पहली सरकार, परमवीरों के नाम से जाने जाएंगे अंडमान-निकोबार के 21 द्वीप</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>Munawwar Rana मेरा बाप मुस्लिम था, लेकिन मां थीं या नहीं इसकी गारंटी नहीं लेता</title>
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		<pubDate>Wed, 19 Oct 2022 14:17:18 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Munawwar Rana Controversial Statement]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Lucknow माँ पर शेर कहें और मुनव्वर राना न याद आएं&#8230; ऐसा कभी नहीं हो सकता, लेकिन उनकी इसी शौहरत पर अब विवादों का साया मंडराने लगा है। आलम यह है कि अक्सर कर विवादों में रहने वाला मुनव्वर राना अब मां की शान में भी गुस्ताखी कर बैठे। विवाद उनके हालिया बयान से शुरु &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Lucknow</span></strong> माँ पर शेर कहें और मुनव्वर राना न याद आएं&#8230; ऐसा कभी नहीं हो सकता, लेकिन उनकी इसी शौहरत पर अब विवादों का साया मंडराने लगा है। आलम यह है कि अक्सर कर विवादों में रहने वाला मुनव्वर राना अब मां की शान में भी गुस्ताखी कर बैठे। विवाद उनके हालिया बयान से शुरु हुआ है। जिसमें उन्होंने कहा कि &#8221;मैं बहुत ईमानदारी से कहता हूं कि मेरा बाप मुसलमान था, इसकी मैं गारंटी लेता हूं। लेकिन मेरी मां भी मुसलमान थीं, इसकी गारंटी नहीं ले सकता।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/kedl-issues-advisory-for-safe-diwali-celebrations/12390/">KEDL Advisory बिजली न बने परेशानी, ऐसे मनाएं सुरक्षित दिवाली</a></strong></p>
<p>मशहूर शायर मुनव्वर राना ने अजीबोगरीब बयान दिया है। उन्होंने यूपी में बीजेपी द्वारा पासमांदा मुस्लिमों को जोड़ने के लिए हुए सम्मेलन पर बयान दिया, जिसमें उन्होंने अपनी मां तक का जिक्र कर दिया। एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान जब मुनव्वर राना से बीजेपी के पसमांदा सम्मेलन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पसमांदा का मतलब समाज में पिछड़े हुए लोग होते हैं। इस्लाम में पसमांदा का कोई अर्थ नहीं था। अरब में भी कोई जाति के बारे में नहीं जानता था, लेकिन जब हिंदुस्तान आए तो इस रंग में रंग गए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/mallikarjun-kharge-elected-congress-president/12387/">Congress: 24 साल बाद गद्दी से हटा गांधी परिवार, मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी के नए BOSS</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">&#8216;बाप मुसलमान था, लेकिन मां थीं, यह गारंटी नहीं लेता&#8217;</span></strong><br />
इसी दौरान उन्होंने आगे अजीबोगरीब उदाहरण देते हुए कहा, &#8221;मैं बहुत ईमानदारी से कहता हूं कि मेरा बाप मुसलमान था, इसकी मैं गारंटी लेता हूं। लेकिन मेरी मां भी मुसलमान थीं, इसकी गारंटी नहीं ले सकता। क्योंकि मेरा फर्स्ट फादर जो इंडिया में आया, चाहे समरकंद, अफ्रीका, अरब या कहीं से भी आया हो, वह फौज के साथ आया था और फौजें बगल में बीवियां लेकर नहीं चलतीं। ऐसे में मां भी मुसलमान थीं, इसकी गारंटी नहीं ले सकता।&#8221; मशहूर शायर ने आगे कहा कि फर्स्ट फादर यहां आए तो अपने तौर-तरीके व अच्छी विचारधारा से पूरे देश में फैलते चले गए। इसके बाद यहां के ठुकराए लोगों ने उन लोगों को देखा कि ये किस तरह के लोग हैं तो फिर इस्लाम कबूल करना शुरू कर दिया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/editorial/article/k-vikram-rao-explains-the-meaning-of-roger-binny-becoming-bcci-president/12392/">Binny Roger शराफत की पिच पर सियासत ​की गुगली !</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान</span></strong><br />
हालांकि, यह कोई पहली बार नहीं है, जब मुनव्वर राना ने विवादित और अजीबोगरीब बयान दिया हो। इससे पहले भी वह कई बार विवादित बयान दे चुके हैं। कुछ महीने पहले उन्होंने ज्ञानवापी मामले में सर्वे कराए जाने से नाराज जज के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल कर दिया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि जज ने जो कह दिया वही सही। वह भगवान से भी बड़े हैं। हालांकि, इसके बाद उनकी भाषा बदल गई और अपशब्द कहने लगे। राना ने कहा था, &#8221;जज ने जो बोलना था बोल दिया, जज से बड़ा कोई नहीं है, महादेव छोटे हैं, जज बड़ा है।&#8221; जब उनसे कहा गया कि अभी कोई फैसला नहीं आया है एक पक्ष दावा कर रहा है तो राना ने कहा, &#8221;जब एक **** जज फैसला खराब कर सकता है तो इसके बाद रह क्या जाता है। यदि मैं बादशाह होता, प्रधानमंत्री होता तो उस जज को अरेस्ट करवा लेता, जिन्होंने केस किया है, उन्हें अरेस्ट करवा लेता।&#8221;</p>
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		<title>इट हैपंस ओनली इन इंडिया: &#8216;मेरा डेथ सर्टिफिकेट खो गया है&#8230; मिले तो लौटा देना&#8217;</title>
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		<pubDate>Sat, 24 Sep 2022 05:07:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@NewDelhi अखबार में छपा एक विज्ञापन इन दिनों इंटरनेट पर खूब शेयर किया जा रहा है। जी हां, आप भी हैरान होंगे कि आखिर किसी न्यूजपेपर में छपे एडवरटाइजमेंट में लोगों की इतनी क्या दिलचस्पी हो सकती है। यूं तो हर दिन अखबारों में हजारों विज्ञापन छपते होंगे। लेकिन इसकी बात ही कुछ निराली है। &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/newspaper-advertisement-viral-on-social-media-man-lost-death-certificate/12308/">इट हैपंस ओनली इन इंडिया: &#8216;मेरा डेथ सर्टिफिकेट खो गया है&#8230; मिले तो लौटा देना&#8217;</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@NewDelhi</strong></span> अखबार में छपा एक विज्ञापन इन दिनों इंटरनेट पर खूब शेयर किया जा रहा है। जी हां, आप भी हैरान होंगे कि आखिर किसी न्यूजपेपर में छपे एडवरटाइजमेंट में लोगों की इतनी क्या दिलचस्पी हो सकती है। यूं तो हर दिन अखबारों में हजारों विज्ञापन छपते होंगे। लेकिन इसकी बात ही कुछ निराली है। दरअसल, इस ऐड के जरिए एक जिंदा शख्स ने बताया है कि उसने अपना डेथ सर्टिफिकेट खो दिया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/cover-stories/know-about-pfi-and-why-nia-raids-across-the-country/12301/">NIA Raid on PFI: क्या है PFI और इसके ठिकानों पर NIA ने क्यों की देश भर में छापेमारी</a></strong></p>
<p>है ना यह होश उड़ा देने वाली खबर! लोग इस बात से हैरान हैं कि आखिरकार किसी जीवित व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट कैसे बन सकता है। और अगर गलती से बन भी गया तो उसके खो जाने की सूचना किसी अखबार के विज्ञापन में कैसे छप सकती है, जबकि एडवरटाइजमेंट छपवाने वाला शख्स खुद यह दावा कर रहा हो कि उसने अपना ही मृत्य प्रमाणपत्र खो दिया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/nia-and-ed-raid-on-pfi/12282/">PFI के खिलाफ 10 राज्यों में NIA और ED की छापेमारी, 100 से ज्यादा संदिग्ध गिरफ्तार</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">बाजार में खोया डेथ सर्टिफिकेट</span></strong><br />
असम के होजाई जिले स्थित लामडिंग के सिमुलताला के रहने वाले रंजीत कुमार चक्रवर्ती ने यह ऐड दिया है। इसमें लिखा है, &#8216;मैंने अपना डेथ सर्टिफिकेट खो दिया है। 07/09/2022 को लामडिंग बाजार में सुबह करीब 10:00 बजे यह मुझसे खो गया।&#8217; इसके साथ ही उन्होंने डेथ सर्टिफिकेट का रजिस्ट्रेशन नंबर और अपना नाम भी लिखा है। साथ ही विज्ञापन में उनका पूरा पता दिया गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/congress-president-election-update/12250/">Congress President: राहुल गांधी, अशोक गहलोत या शशि थरुर&#8230; किसके हाथ में होगी कांग्रेस की पतवार?</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">&#8216;क्या स्वर्ग से शख्स मांग रहा अपना डेथ सर्टिफिकेट&#8217;</span></strong><br />
सोशल मीडिया पर लोग इस विज्ञापन को लेकर खूब मजे ले रहे हैं। कई सारे मजेदार मीम्स शेयर किए जा रहे हैं। IPS अधिकारी रुपीन शर्मा ने इस पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, &#8216;इट हैपंस ओनली इन इंडिया।&#8217; वहीं, दूसरे लोग इस पर मजे लेते हुए कह रहे हैं कि क्या इस शख्स ने स्वर्ग से अपना डेथ सर्टिफिकेट खोने की सूचना दी है। कुछ यूजर्स यह पूछ रहे हैं कि अगर उन्हें खोया हुआ डेथ सर्टिफिकेट मिल भी गया तो उसे देने के लिए कहां जाएंगे।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/newspaper-advertisement-viral-on-social-media-man-lost-death-certificate/12308/">इट हैपंस ओनली इन इंडिया: &#8216;मेरा डेथ सर्टिफिकेट खो गया है&#8230; मिले तो लौटा देना&#8217;</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<item>
		<title>PFI के खिलाफ 10 राज्यों में NIA और ED की छापेमारी, 100 से ज्यादा संदिग्ध गिरफ्तार</title>
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		<pubDate>Thu, 22 Sep 2022 03:31:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@NewDelhi आतंकवाद के खिलाफ अभियान में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। खबर है कि जांच एजेंसियों ने करीब 10 राज्यों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI पदाधिकारियों के आवास और दफ्तरों पर रेड की है। इस दौरान 100 से ज्यादा कैडर को गिरफ्तार किया है। इस &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@NewDelhi</span></strong> आतंकवाद के खिलाफ अभियान में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। खबर है कि जांच एजेंसियों ने करीब 10 राज्यों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI पदाधिकारियों के आवास और दफ्तरों पर रेड की है। इस दौरान 100 से ज्यादा कैडर को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद कर्नाटक, केरल में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध किया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://tismedia.in/india/attacks-on-temples-are-not-tolerated-india-shows-attitude-to-uk-canada/12275/">मंदिरों पर हमले बर्दाश्त नहीं: भारत ने UK-कनाडा को दिखाए तेवर, सिख कट्टरपंथियों पर भी नजर</a></strong></p>
<p>खबर है कि NIA ने आतंकवाद में फंडिंग, ट्रैनिंग कैंप करने में शामिल लोगों के आवास और आधिकारिक ठिकानों पर तलाशी की है। NIA की रेड उत्तर प्रदेश, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान और तमिलनाडु में जारी है। समाचार एजेंसियों ने सूत्रों के हवाले से बताया कि जांच एजेंसियों ने करीब 10 राज्यों में प्रदेश पुलिस के साथ मिलकर 100 से ज्यादा कैडर्स को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा NIA ने तमिलनाडु में भी कोयंबटूर, कुड्डलोर, रामनाद, दिंडुगल, थेनी और थेनकाशी समेत कई जगहों पर PFI के पदाधिकारियों के आवास पर रेड की है। इसके अलावा राजधानी चेन्नई में PFI के प्रदेश मुख्यालय में भी तलाशी जारी है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://tismedia.in/entertainment/comedian-raju-srivastava-profile/12267/">Raju Srivastava Profile: कानपुर का सत्यप्रकाश कैसे बना राजू श्रीवास्तव, पिता थे मशहूर कवि</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कोटा बांरा में भी छापे </strong></span><br />
एनआईए की टीम बुधवार को ही कोटा पहुंच गई थी। एजेंसी के कई अधिकारी सर्किट हाउस और डाक बंगले में रुके हैं। इसके अलावा बारां में भी डाक बंगला और सर्किट हाउस एनआईए अधिकारियों के लिए बुक किया गया है। एनआईए टीम में आईपीएस अधिकारी आशीष बत्रा और रवि चौधरी के साथ-साथ आईजी स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। कोटा में पीएफआई ने बड़ी रैली का आयोजन किया था। माना जा रहा है कि इसके बाद से ही कोटा में पीएफआई की गतिविधियां एनआईए के रडार पर आ गई थीं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-dhariwal-and-gunjal-made-videos-against-each-other/12244/">टूटी सड़काें पर दौड़ी सियासत, कोटा थर्मल की राख तक पहुंची जुबानी जंग</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>चेयरमैन पर भी शिकंजा</strong></span><br />
जांच एजेंसियों ने पीएफआई के प्रदेश और जिला स्तरीय नेताओं के घर पर रेड की है। साथ ही इस बार एजेंसियों ने मलप्पुरम जिले के मंजेरी में पार्टी के चेयरमैन सलाम परद भी शिकंजा कसा है। सलाम के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में पार्टी कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन जारी है। गुरुवार को बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://tismedia.in/top-stories/comedian-raju-srivastava-passes-away/12264/">राजू श्रीवास्&#x200d;तव का निधन, 42 दिनों से जिंदगी की जंग लड़ रहे थे सबके चहेते &#8216;गजोधर भैया&#8217;</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">रविवार को भी पड़े थे छापे</span></strong><br />
रविवार को भी NIA ने आंध्र प्रदेश के अलग-अलग जिलों में रेड की थी। उस दौरान PFI सदस्यों को पूछताछ के लिए ले जाया गया था। जांच एजेंसी ने हिंसा भड़काने और गैर कानूनी गतिविधियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की थी। उस दौरान NIA अधिकारियों की 23 टीमों में निजामाबाद, कुर्नूल, गुंटूर और नेल्लोर जिले में करीब 38 ठिकानों तलाशी ली थी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/national/nia-and-ed-raid-on-pfi/12282/">PFI के खिलाफ 10 राज्यों में NIA और ED की छापेमारी, 100 से ज्यादा संदिग्ध गिरफ्तार</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<item>
		<title>Delhi Road Accident: ट्रक ने फुटपाथ पर सो रहे 6 लोगों को रौंदा, 4 की मौत</title>
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		<pubDate>Wed, 21 Sep 2022 04:43:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@NewDelhi दिल्ली के सीमापुरी इलाके में एक अनियंत्रित ट्रक ने सड़क किनारे सो रहे 6 लोगों को रौंदा दिया। इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। जबकि, दो लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह भी पढ़ेंः Congress President: राहुल गांधी, अशोक &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/state/delhi/delhi-road-accident-four-people-killed-in-road-accident-seemapuri/12261/">Delhi Road Accident: ट्रक ने फुटपाथ पर सो रहे 6 लोगों को रौंदा, 4 की मौत</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@NewDelhi</strong></span> दिल्ली के सीमापुरी इलाके में एक अनियंत्रित ट्रक ने सड़क किनारे सो रहे 6 लोगों को रौंदा दिया। इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। जबकि, दो लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/congress-president-election-update/12250/">Congress President: राहुल गांधी, अशोक गहलोत या शशि थरुर&#8230; किसके हाथ में होगी कांग्रेस की पतवार?</a></strong></p>
<p>पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में मंगलवार आधी रात एक बड़ा हादसा हो गया। एक ट्रक ने डिवाइडर पर सो रहे छह लोगों को रौंद दिया। हादसे के बाद आरोपित ट्रक छोड़कर मौके से फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बुरी तरह से जख्मी हुए लोगों को जीटीबी अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां डाक्टरों ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-dhariwal-and-gunjal-made-videos-against-each-other/12244/">टूटी सड़काें पर दौड़ी सियासत, कोटा थर्मल की राख तक पहुंची जुबानी जंग</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सभी की हुई पहचान </strong></span><br />
दिल्ली पुलिस ने मृतकों की पहचान सीमापुरी निवासी करीम (52), छोटे खान (25), शाह आलम (38), शालीमार गार्डन निवासी राहुल (45) के रूप में हुई है। हादसे में घायल तुलसी निकेतन निवासी मनीष (16), ताहिरपुर निवासी प्रदीप (30) का अस्पताल में इलाज चल रहा है। जिला पुलिस उपायुक्त आर सत्यसुंदरम ने बताया कि मंगलवार रात 1:51 बजे पुलिस को सूचना मिली थी कि सीमापुरी बस डिपो के पास डिवाइडर पर सो रहे छह लोगों पर ट्रक चढ़ा दिया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/cm-gehlot-gives-foreign-travel-package-for-mlas-rajasthan-after-iphone-tablet-and-flat/12232/">सरकारी पैसे पर फिर मौज काटने की तैयारी में राजस्थान के विधायक</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>ट्रक ड्राइवर हुआ फरार </strong></span><br />
पुलिस मौके पर पहुंची तो एक ट्रक खड़ा था, जिसका चालक फरार था। दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, पुलिस सभी घायलों व मृतकों को एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया। रास्ते में एक और व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि अस्पताल में भर्ती के बाद चौथे घायल ने भी दम तोड़ दिया। बाकी दो लोगों का इलाज चल रहा है। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है, कई टीमें आरोपित की तलाश में लगाई गई है।</p>
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		<title>Congress President: राहुल गांधी, अशोक गहलोत या शशि थरुर&#8230; किसके हाथ में होगी कांग्रेस की पतवार?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Sep 2022 03:36:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर राहुल गांधी, अशोक गहलोत और शशि थरुर का नाम चल रहा है चर्चाओं में  TISMedia@NewDelhi कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर कल से चुनावी प्रक्रिया शुरु हो जाएगी। ऐसे में अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई है। फिलहाल तक राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और कांग्रेस सांसद &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/national/congress-president-election-update/12250/">Congress President: राहुल गांधी, अशोक गहलोत या शशि थरुर&#8230; किसके हाथ में होगी कांग्रेस की पतवार?</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर राहुल गांधी, अशोक गहलोत और शशि थरुर का नाम चल रहा है चर्चाओं में </strong></span></li>
</ul>
<p>TISMedia@NewDelhi कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर कल से चुनावी प्रक्रिया शुरु हो जाएगी। ऐसे में अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई है। फिलहाल तक राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और कांग्रेस सांसद शशि थरूर कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस में शामिल माने जा रहे हैं। वहीं राहुल गांधी के नाम पर सस्पेंस बना हुआ है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-dhariwal-and-gunjal-made-videos-against-each-other/12244/"> टूटी सड़काें पर दौड़ी सियासत, कोटा थर्मल की राख तक पहुंची जुबानी जंग</a></strong></p>
<p>कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने सोमवार को पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की। इस बारे में उन्होंने तो कोई जानकारी नहीं दी, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उन्हें सोनिया से पार्टी अध्यक्ष पद के आगामी चुनाव में उतरने की मंजूरी मिल गई है। अगले कुछ दिनों में वह अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर सकते हैं। इसके साथ-साथ सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत भी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की जगह इस बात पर जोर दे रहे हैं कि राहुल ही यह पद संभाल लें। वह इसके लिए राहुल को मनाने की कोशिश भी कर रहे हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/tis-utility/religion/shardiya-navratri-2022-shubh-muhurat-and-puja-vidhi/12194/">Navratri 2022: इस दिन से शुरू हो रही है नवरात्रि, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजन विधि</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>राहुल गांधी के फेसबुक पोस्ट से लोग लगा रहे कयास </strong></span><br />
अब राहुल गांधी को लेकर आपके मन में सवाल होगा। इसका जवाब भी आप खुद राहुल गांधी के फेसबुक पोस्ट से आप अनुमान लगा सकते हैं। फेसबुक पर राहुल गांधी ने लिखा है कि जब नाव बीच मंझधार में फंस जाए, तब पतवार अपने हाथ में लेनी ही पड़ती है। ना रुकेंगे, ना झुकेंगे, भारत जोड़ेंगे&#8217;। तो क्या इसका ये अर्थ निकाला जाए कि राहुल गांधी फिर से कांग्रेस अध्यक्ष के लिए अपनी दावेदारी ठोकेंगे यानी पार्टी की पतवार अपने हाथ में लेंगे?</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/death-of-one-who-attempted-self-immolation-in-nayapura-police-station/12237/">Kota: काग्रेंसी पार्षद और पुलिस से परेशान नयापुरा थाने में आत्मदाह करने वाले युवक की मौत</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>राहुल गांधी के पक्ष में 7 राज्यों में प्रस्ताव पास</strong></span><br />
कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए राहुल गांधी चुनाव लड़ेंगे या नहीं इस पर अभी साफ तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। लेकिन उनकी दावेदारी मजबूत है इसमें कोई शक नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव से पहले 7 राज्यों की कांग्रेस कमेटियों ने राहुल गांधी को पार्टी की कमान सौंपने का प्रस्ताव पास किया है। हाल ही में महाराष्ट्र, बिहार,जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी ने इसका प्रस्ताव पास किया, जबकि राजस्थान, गुजरात और छत्तीसगढ़ पहले ही इसे मंजूरी दे चुके हैं। कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए 23 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी, जबकि 17 अक्टूबर को चुनाव प्रस्तावित है।</p>
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		<title>पीएम मोदी की चेतावनीः कोरोना का अभी खतरा टला नहीं है, रहें सावधान&#8230; देश को किया संबोधित</title>
		<link>https://tismedia.in/india/pm-modi-warns-that-the-danger-of-corona-is-not-over-yet-be-careful/10971/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=pm-modi-warns-that-the-danger-of-corona-is-not-over-yet-be-careful</link>
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		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Oct 2021 07:22:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@NewDelhi कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में भारत लगातार ताकतवर होता जा रहा है। महज 9 महीने में ही देश में 1 अरब से ज्यादा कोरोना टीकों का लक्ष्य हासिल हुआ है। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी आज देश को संबोधित किया। देश को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि 100 करोड़ टीके &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/pm-modi-warns-that-the-danger-of-corona-is-not-over-yet-be-careful/10971/">पीएम मोदी की चेतावनीः कोरोना का अभी खतरा टला नहीं है, रहें सावधान&#8230; देश को किया संबोधित</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@NewDelhi</strong></span> कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में भारत लगातार ताकतवर होता जा रहा है। महज 9 महीने में ही देश में 1 अरब से ज्यादा कोरोना टीकों का लक्ष्य हासिल हुआ है। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी आज देश को संबोधित किया। देश को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि 100 करोड़ टीके लगना हमारे लिए आंकड़ा नहीं है बल्कि सामर्थ्य का प्रतीक है। देश बड़े लक्ष्य तय करना और उसे हासिल करना बखूबी जानता है लेकिन इसके लिए हमें सतत सावधान रहने की जरूरत है। हमें अपने त्योहारों को पूरी सतर्कता के साथ ही मनाना है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/lakhimpur-kheri-violence-skm-suspends-yogendra-yadav-over-visiting-bjp-workers-house/10968/">लखीमपुर हिंसा: योगेंद्र यादव को भाजपा कार्यकर्ता का घर जाना पड़ा भारी, एसकेएम ने किया निलंबित</a></strong></p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश ने एक तरफ कर्तव्य का पालन किया तो दूसरी तरफ उसे बड़ी सफलता भी मिली। भारत ने कल 100 करोड़ वैक्सीन डोज का कठिन लेकिन असाधारण लक्ष्य प्राप्त किया। इस उपलब्धि के पीछे 130 करोड़ देशवासियों की कर्तव्यशक्ति लगी है इसलिए ये सफलता हर देशवासी की सफलता है। उन्होंने कहा कि क्या भारत इतने लोगों को टीका लगा पाएगा कि महामारी को फैलने से रोक सके? भांति-भांति के सवाल थे, लेकिन आज ये 100 करोड़ वैक्सीन डोज, हर सवाल का जवाब दे रही है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/bsp-supremo-mayawati-attacks-opposition-parties/10965/">कांग्रेस काे समझना होगा कि उसके बुरे दिन चल रहे हैं: मायावती</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>रिकॉर्ड वैक्सीनेशन ने दिया जवाब </strong></span><br />
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब 100 साल की सबसे बड़ी महामारी आई, तो भारत पर सवाल उठने लगे। क्या भारत इस वैश्विक महामारी से लड़ पाएगा? भारत दूसरे देशों से इतनी वैक्सीन खरीदने का पैसा कहां से लाएगा? भारत को वैक्सीन कब मिलेगी? सबको साथ लेकर देश ने ‘सबको वैक्सीन-मुफ़्त वैक्सीन’ का अभियान शुरू किया। गरीब-अमीर, गांव-शहर, दूर-सुदूर, देश का एक ही मंत्र रहा कि अगर बीमारी भेदभाव नहीं नहीं करती तो वैक्सीन में भी भेदभाव नहीं हो सकता! इसलिए ये सुनिश्चित किया गया कि वैक्सीनेशन अभियान पर वीआईपी कल्चर हावी न हो। उन्होंने कहा कि 100 करोड़ वैक्सीन डोज़ का एक प्रभाव ये भी होगा कि अब दुनिया भारत को कोरोना से ज़्यादा सुरक्षित मानेगी। एक फॉर्मा हब के रूप में भारत को जो स्वीकृति मिली है उसे और मज़बूती मिलेगी। पूरा विश्व आज भारत की इस ताकत को देख रहा है और महसूस कर रहा है। पीएम ने कहा कि भारत का पूरा वैक्सीनेशन प्रोग्राम विज्ञान की कोख में जन्मा है, वैज्ञानिक आधारों पर पनपा है और वैज्ञानिक तरीकों से चारों दिशाओं में पहुंचा है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/shivpal-yadav-announced-that-psp-will-not-merge-with-sp/10923/">UP Assembly Election 2022: भतीजे के आगे नहीं झुकेंगे चाचा&#8230;</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>देश के सामर्थ्य का प्रतिबिंब</strong></span><br />
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि आज कई लोग भारत के वैक्सीनेशन प्रोग्राम की तुलना दुनिया के दूसरे देशों से कर रहे हैं। भारत ने जिस तेजी से 100 करोड़ का, 1 बिलियन का आंकड़ा पार किया, उसकी सराहना भी हो रही है। लेकिन, इस विश्लेषण में एक बात अक्सर छूट जाती है कि हमने ये शुरुआत कहां से की। दुनिया के दूसरे बड़े देशों के लिए वैक्सीन पर रिसर्च करना, वैक्सीन खोजना, इसमें दशकों से उनकी एक्सपर्टाइज थी। भारत, अधिकतर इन देशों की बनाई वैक्सीन्स पर ही निर्भर रहता था। उन्होंने कहा कि हमारे देश ने एक तरफ कर्तव्य का पालन किया, तो दूसरी तरफ उसे सफलता भी मिली. कल भारत ने 100 करोड़ वैक्सीन डोज का कठिन लेकिन असाधारण लक्ष्य प्राप्त किया है। 100 करोड़ वैक्सीन डोज केवल एक आंकड़ा ही नहीं, ये देश के सामर्थ्य का प्रतिबिंब भी है। इतिहास के नए अध्याय की रचना है। ये उस नए भारत की तस्वीर है, जो कठिन लक्ष्य निर्धारित कर, उन्हें हासिल करना जानता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/narendra-modi-changed-the-vocabulary-of-politics-in-20-years/10844/">जानिए कैसे हुए ईजाद: मोदी युग, गोदी मीडिया, मार्गदर्शक मंडल, जीरो फिगर और 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>स्वदेशी अपनाओ, देश बढ़ाओ</strong></span><br />
उन्होंने कहा कि देश में वैक्सीनेशन के 100 करोड़ का आंकड़ा पार करना एक असाधारण लक्ष्य है। इसके लिए पूरे देश की सराहना हो रही है। भारत के वैक्सीन अभियान की तुलना दुनिया के किसी भी देश से नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर मेरे देश की वैक्सीन मुझे सुरक्षा दे सकती है तो मेरे देश का उत्पादक, मेरे देश में बने सामान, मेरी दिवाली और भी भव्य बना सकते हैं। हमें हर छोटी से छोटी चीज जो मेड इन इंडिया हो, जिसे बनाने में किसी भारतवासी का पसीना बहा हो, उसे खरीदने पर जोर देना चाहिए और ये सबके प्रयास से ही संभव होगा। इससे पहले देश के नाम अपने संबोधन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने ट्विटर अकाउंट की डीपी बदल दी। नई डीपी इमेज में पीएम मोदी ने 100 करोड़ वैक्सीनेशन के रिकॉर्ड को दर्शाया है। डीपी में 100 करोड़ टीकाकरण का आंकड़ा छूने को लेकर देशवासियों को बधाई दी है।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/pm-modi-warns-that-the-danger-of-corona-is-not-over-yet-be-careful/10971/">पीएम मोदी की चेतावनीः कोरोना का अभी खतरा टला नहीं है, रहें सावधान&#8230; देश को किया संबोधित</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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