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	<title>Samajwadi Party Founder Archives - TIS Media</title>
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	<title>Samajwadi Party Founder Archives - TIS Media</title>
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		<title>मुलायम सिंह यादवः सियासी अखाड़े के पहलवान को &#8220;यादवों&#8221; ने ही दी थी पटकनी</title>
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		<pubDate>Mon, 10 Oct 2022 06:31:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Lucknow मुलायम सिंह यादव राजनीति के अखाड़े के पहलवान कहे जाते थे। उन्हें अपने विरोधियों को चित करने में महारत हासिल थी। मुलायम उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे। वह देश के रक्षा मंत्री भी बने। हालांकि, मुलायम के राजनीतिक जीवन में 2 बार ऐसे मौके आए, जब वह प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए। जानिए, &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/mulayam-singh-yadav-missed-chance-twice-becoming-prime-minister/12380/">मुलायम सिंह यादवः सियासी अखाड़े के पहलवान को &#8220;यादवों&#8221; ने ही दी थी पटकनी</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Lucknow</span></strong> मुलायम सिंह यादव राजनीति के अखाड़े के पहलवान कहे जाते थे। उन्हें अपने विरोधियों को चित करने में महारत हासिल थी। मुलायम उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे। वह देश के रक्षा मंत्री भी बने। हालांकि, मुलायम के राजनीतिक जीवन में 2 बार ऐसे मौके आए, जब वह प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए। जानिए, आखिर कैसे प्रधानमंत्री बनने का मुलायम का सपना पूरा न हो सका।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/mulayam-singh-yadav-family-tree/12373/">मुलायम सिंह यादवः अपने पीछे छोड़ गए देश का सबसे बड़ा सियासी कुनबा, जानें पूरे परिवार को</a></strong></p>
<p>पहला मौका 1996 में आया, जब लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी मात मिली थी। कांग्रेस के खाते में 141 सीटें आईं और भाजपा ने 161 सीटें जीती थीं। अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने का निमंत्रण मिला। वह प्रधानमंत्री तो बने लेकिन 13 दिनों बाद ही उनकी सरकार गिर गई। अब कांग्रेस के पास मौका था लेकिन वह खिचड़ी सरकार बनाने के मूड में नहीं थी। तब वीपी सिंह ने भी पीएम बनने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्&#x200d;होंने बंगाल के सीएम ज्&#x200d;योति बसु का नाम आगे बढ़ाया जिसे पोलित ब्&#x200d;यूरो ने नामंजूर कर दिया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/samajwadi-party-founder-mulayam-singh-yadav-lifestyle-net-worth-income-house-car/12376/">मुलायम सिंह यादवः विरासत में मिली थी सिर्फ किसानी, अब महलों से कम नहीं है सैफई के घर</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">हो चुकीं थी शपथ ग्रहण की तैयारियां </span></strong><br />
अब प्रधानमंत्री की रेस में मुलायम और लालू प्रसाद यादव का नाम सबसे आगे था। हालांकि, चारा घोटाले के चलते लालू इससे बाहर हो गए। सबको एक करने का काम वामदल के बड़े नेता हर किशन सिंह सुरजीत को सौंपा गया था। उन्&#x200d;होंने मुलायम के नाम की पैरवी की। बताते हैं कि उनके शपथ ग्रहण की तैयारियां भी कर ली गई थीं। हालांकि, लालू और शरद यादव इसके लिए तैयार नहीं हुए, जिससे बात नहीं बन पाई। इसके बाद एचडी देवगौड़ा को पीएम पद की शपथ दिलाई गई।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/mulayam-singh-yadav-passed-away-former-up-cm-and-samajwadi-party-founder-death/12370/">नहीं रहे मुलायम सिंह यादव: 82 साल की उम्र में निधन, मेदांता अस्&#x200d;पताल में ली अंतिम सांस</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">फिर यादवों ने डाला अड़ंगा </span></strong><br />
एचडी देवगौड़ा के नेतृत्व वाली मिली-जुली सरकार जल्द ही गिर गई। 1999 में फिर चुनाव हुआ। मुलायम सिंह ने संभल और कन्नौज दोनों ही सीटें जीत लीं। पीएम पद के लिए एक बार फिर उनका नाम आगे आया। एक बार फिर दूसरे यादव नेताओं ने अपने हाथ पीछे खींच लिए। ऐसे में यह दूसरा मौका था जब मुलायम के पास आती पीएम की कुर्सी दूर हो गई। बाद में मुलायम ने एक रैली में कहा भी कि लालू प्रसाद यादव, शरद यादव, चंद्र बाबू नायडू और वीपी सिंह के चलते वह प्रधानमंत्री नहीं बन सके।</p>
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		<title>मुलायम सिंह यादवः विरासत में मिली थी सिर्फ किसानी, अब महलों से कम नहीं है सैफई के घर</title>
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		<pubDate>Mon, 10 Oct 2022 06:10:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Lucknow मुलायम सिंह राजनीति से लेकर अपने पारिवारिक मामलों के लिए हमेशा से सुर्खियों में रहे। राजनीति में उनकी भूमिका अहम और दमदार रही। देश के रक्षा मंत्री के पद पर रहने वाले मुलायम सिंह तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नियुक्त हुए। आखिरी बार उन्होंने साल 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ा था। राजनीति के &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Lucknow</span></strong> मुलायम सिंह राजनीति से लेकर अपने पारिवारिक मामलों के लिए हमेशा से सुर्खियों में रहे। राजनीति में उनकी भूमिका अहम और दमदार रही। देश के रक्षा मंत्री के पद पर रहने वाले मुलायम सिंह तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नियुक्त हुए। आखिरी बार उन्होंने साल 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ा था। राजनीति के अलग अगर उनके परिवारिक जीवन पर गौर करें तो वह इटावा के सैफई गांव के रहने वाले हैं। इटावा, मैनपुरी में यादव परिवार का दबदबा रहा है। मुलायम सिंह यादव का यहां पैतृक आवास है। चलिए जानते हैं सपा संरक्षक और यूपी के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव कितनी संपत्ति के मालिक हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, सपा संरक्षक मुलायम सिंह कृषि और लोकसभा से मिलने वाले वेतन के जरिए कमाई करते हैं। 2019 लोकसभा चुनाव के लिए जारी हलफनामे के अनुसार उनके बैंक खाते में 56 लाख रुपये जमा है और लगभग 16 लाख रुपये की नगदी है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/mulayam-singh-yadav-passed-away-former-up-cm-and-samajwadi-party-founder-death/12370/">नहीं रहे मुलायम सिंह यादव: 82 साल की उम्र में निधन, मेदांता अस्&#x200d;पताल में ली अंतिम सांस</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">मुलायम सिंह की कृषि और जमीन</span></strong><br />
पूर्व मुख्यमंत्री इटावा के सैफई के रहने वाले हैं। उनके पास कृषि योग्य करोड़ों की संपत्ति है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुलायम के पास सात करोड़ रुपये से अधिक की कृषि भूमि है। साथ ही 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की गैर कृषि भूमि है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">मुलायम सिंह का घर और गाड़ियां</span></strong><br />
सपा प्रमुख के पास एक टोयोटा कार है, जिसकी कीमत लगभग 17 लाख रुपये से अधिक है। लगभग 50 हजार से ज्यादा कीमत का उनके पास एलिमिनेटर वाहन भी है। घर की बात करें तो मुलायम सिंह का लखनऊ में घर है, जहां वह पत्नी साधना के साथ रहते थे। इटावा में भी उनका एक प्लॉट है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/mulayam-singh-yadav-family-tree/12373/">मुलायम सिंह यादवः अपने पीछे छोड़ गए देश का सबसे बड़ा सियासी कुनबा, जानें पूरे परिवार को</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>मुलायम सिंह की संपत्ति</strong></span><br />
साल 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दिए हलफनामे के मुताबिक, मुलायम सिंह यादव करीब 15 करोड़ से अधिक की संपत्ति के मालिक हैं। नामांकन दाखिल करते समय शपथ पत्र में उन्होंने अपनी चल-अचल संपत्ति 16 करोड़ 52 लाख 44 हजार 300 रुपये बताई थी। हालांकि इसके पहले साल 2014 लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह ने 11 करोड़ रुपये की संपत्ति की घोषणा हलफनामे में बताई थी।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/samajwadi-party-founder-mulayam-singh-yadav-lifestyle-net-worth-income-house-car/12376/">मुलायम सिंह यादवः विरासत में मिली थी सिर्फ किसानी, अब महलों से कम नहीं है सैफई के घर</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>मुलायम सिंह यादवः अपने पीछे छोड़ गए देश का सबसे बड़ा सियासी कुनबा, जानें पूरे परिवार को</title>
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		<pubDate>Mon, 10 Oct 2022 05:36:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>पहलवानी के दांव पेच छोड़ बने शिक्षक, फिर खेली शानदार सियासी पारी  मुलायम सिंह के परिवार में 25 से ज्यादा सदस्य राजनीति में हैं सक्रिय  TISMedia@Lucknow पहलवान और शिक्षक रहे मुलायम ने लंबी सियासी पारी खेली। तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे। केंद्र में रक्षा मंत्री रहे। उन्हें बेहद साहसिक सियासी फैसलों के लिए भी &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/mulayam-singh-yadav-family-tree/12373/">मुलायम सिंह यादवः अपने पीछे छोड़ गए देश का सबसे बड़ा सियासी कुनबा, जानें पूरे परिवार को</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>पहलवानी के दांव पेच छोड़ बने शिक्षक, फिर खेली शानदार सियासी पारी </strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>मुलायम सिंह के परिवार में 25 से ज्यादा सदस्य राजनीति में हैं सक्रिय </strong></span></li>
</ul>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Lucknow</span> </strong>पहलवान और शिक्षक रहे मुलायम ने लंबी सियासी पारी खेली। तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे। केंद्र में रक्षा मंत्री रहे। उन्हें बेहद साहसिक सियासी फैसलों के लिए भी जाना जाता है। देश की राजनीति में मुलायम सिंह यादव का कुनबा सबसे बड़ा है। परिवार के 25 से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो राजनीति में सक्रिय हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि मुलायम के परिवार में कौन-कौन है? इनमें से कौन राजनीतिक रूप से सक्रिय है और कौन राजनीति से दूर है?</p>
<p>शुरुआत मुलायम सिंह यादव के बाबा से करते हैं। उनका नाम मेवाराम था। मेवाराम के दो बेटे थे। सुघर सिंह और बच्चीलाल सिंह। सुघर सिंह के पांच बेटे हुए। इनमें मुलायम सिंह यादव, रतन सिंह, राजपाल सिंह यादव, अभय राम सिंह और शिवपाल सिंह यादव। भाइयों में मुलायम सिंह तीसरे नंबर और शिवपाल सिंह सबसे छोटे हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/mulayam-singh-yadav-passed-away-former-up-cm-and-samajwadi-party-founder-death/12370/">नहीं रहे मुलायम सिंह यादव: 82 साल की उम्र में निधन, मेदांता अस्&#x200d;पताल में ली अंतिम सांस</a></strong></p>
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<p><strong><span style="color: #ff0000;">1. अभय राम यादव</span><span style="color: #ff0000;"> :</span></strong> मुलायम के पांच भाइयों में अभय राम सबसे बड़े थे। धर्मेंद्र यादव उनके बेटे हैं। धर्मेंद्र तीन बार सांसद रह चुके हैं। सबसे पहले 2004 में मैनपुरी से लोकसभा सदस्य चुने गए थे। इसके बाद 2009 और फिर 2014 में बदायूं से जीत हासिल की। 2019 लोकसभा चुनाव में वह हार गए। हाल, ही में आजमगढ़ लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी धर्मेंद्र सपा उम्मीदवार थे। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">2. रतन सिंह यादव :</span></strong> मुलायम सिंह के पांच भाइयों में रतन सिंह दूसरे नंबर पर हैं। मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव रतन सिंह के पौत्र हैं। तेज प्रताप के पिता रणवीर सिंह हैं। तेज प्रताप ने इंग्लैंड की लीड्स यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट साइंस में एमएससी की है। तेज प्रताप की शादी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी से हुई है। मतलब तेज प्रताप लालू के दामाद भी हैं।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">3. मुलायम सिंह यादव :</span></strong> लोहिया आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर 1939 को हुआ था। पांच भाइयों में मुलायम तीसरे नंबर पर हैं। उन्होंने चार अक्टूबर 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना की। मुलायम सिंह ने मालती देवी से पहली शादी की थी। अखिलेश यादव मुलायम और मालती देवी के ही बेटे हैं।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">4. राजपाल सिंह यादव :</span></strong> मुलायम के पांच भाइयों में चौथे नंबर पर राजपाल सिंह यादव का नाम आता है। राजपाल मुलायम से छोटे हैं। राजपाल के बेटे अंशुल भी सक्रिय राजनीति में हैं। अंशुल लगातार दूसरी बार निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए हैं। राजपाल की पत्नी प्रेमलता यादव भी राजनीति में हैं। 2005 में प्रेमलता ने राजनीति में कदम रखा था। प्रेमलता ही मुलायम सिंह यादव परिवार की पहली महिला हैं, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद शिवपाल सिंह यादव की पत्नी सरला यादव, अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव और प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव ने राजनीति में कदम रखा।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">5. शिवपाल सिंह यादव :</span></strong> मुलायम के सबसे छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव हैं। कहा जाता है कि राजनीति में मुलायम सिंह यादव की अगर किसी ने सबसे ज्यादा मदद की है तो वह शिवपाल सिंह यादव ने की हैं। सार्वजनिक मंच से खुद मुलायम इस बात का जिक्र कर चुके हैं। मुलायम ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके छोटे भाई शिवपाल ने उनके लिए पोस्टर तक चिपकाए हैं। 2017 विधानसभा चुनाव से पहले जब मुलायम के बड़े बेटे अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव के बीच अनबन हुई तो शिवपाल ने अलग पार्टी बना ली। शिवपाल जसवंतनगर सीट से विधायक भी हैं। उनके बेटे आदित्य यादव भी सक्रिय राजनीति में हैं।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">6. प्रो. रामगोपाल यादव:</span></strong> मुलायम सिंह यादव के चाचा बच्चीलाल सिंह के बेटे प्रो. रामगोपाल यादव हैं। बच्चीलाल के दो बच्चे हैं। बेटे प्रो. रामगोपाल और बेटी गीता यादव। प्रो. रामगोपाल भी राजनीति में सक्रिय हैं। 2004 में उन्होंने मुलायम सिंह यादव के लिए मैनपुरी सीट छोड़ दी थी। मौजूदा समय में वह राज्यसभा के सांसद हैं। प्रो. रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव भी राजनीति में सक्रिय हैं। वह 2014 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर फिरोजाबाद से सांसद चुने गए थे। 2019 लोकसभा चुनाव में हार गए।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">अखिलेश ने संभाली सियासी विरासत, प्रतीक ने बनाई दूरी </span></strong><br />
मुलायम की दूसरी शादी साधना गुप्ता से हुई। साधना और मुलायम के बेटे प्रतीक यादव हैं। अखिलेश यादव ने 24 नवंबर 1999 डिंपल यादव से शादी की, जबकि प्रतीक की शादी अपर्णा यादव से हुई है। अखिलेश मौजूदा समय में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। डिंपल भी सांसद रह चुकी हैं। 2019 चुनाव वह कन्नौज से हार गईं थीं। अखिलेश ने ऑस्ट्रेलिया से पढ़ाई की है। जबकि प्रतीक यादव राजनीति से दूर रहते हैं। वह जिम चलाते हैं। उनकी पत्नी अपर्णा यादव जरूर राजनीति में कदम रख चुकी हैं। अपर्णा 2017 में सपा के टिकट पर लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ी थीं। बीते विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>मुलायम परिवार के ये सदस्य भी हैं राजनीति में</strong></span><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">सरला यादव</span></strong> : मुलायम के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव की पत्नी हैं। 2007 में सरला को जिला सहकारी बैंक इटावा की राज्य प्रतिनिधि बनाया गया था।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">संध्या यादव</span></strong> : मुलायम सिंह की भतीजी और पूर्व सांसद धर्मेंद्र सिंह यादव की बहन संध्या यादव भी राजनीति में किस्मत आजमा चुकी हैं। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष के तौर पर राजनीति में एंट्री की। उन्हें मैनपुरी से जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए निर्विरोध चुना गया था।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">अरविंद यादव</span></strong> : मुलायम सिंह यादव के चचेरे भाई प्रो. रामगोपाल यादव की सगी बहन गीता देवी के बेटे अरविंद यादव हैं। 2006 में अरविंद ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा था।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">शीला यादव</span></strong> : धर्मेंद्र सिंह यादव की दूसरी बहन शीला यादव भी सक्रिय राजनीति में हैं। वह तीन बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। शीला के बेटे राहुल की शादी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के साले साधु यादव की बेटी डॉ. ईशा से हुई है।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">प्रमोद कुमार गुप्ता</span></strong> : मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बहनोई हैं। प्रमोद औरैया जिले की बिधूना क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">हरिओम यादव</span></strong> : मुलायम सिंह यादव के समधी हैं। 2012 और 2017 में सपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। हरिओम के सगे भाई रामप्रकाश नेहरू की बेटी मृदुला से रणवीर सिंह यादव की शादी हुई थी। रणवीर, मुलायम के बड़े भाई रतन सिंह यादव के बेटे हैं। रणवीर और मृदुला के बेटे तेज प्रताप भी मैनपुरी से सांसद रह चुके हैं। अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">अनुराग यादव</span></strong>: धर्मेंद्र यादव के छोटे भाई अनुराग भी सक्रिय राजनीति में किस्मत आजमा चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा ने उन्हें लखनऊ की सरोजनी नगर सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, अनुराग चुनाव हार गए थे।</p>
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		<title>नहीं रहे मुलायम सिंह यादव: 82 साल की उम्र में निधन, मेदांता अस्‍पताल में ली अंतिम सांस</title>
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		<pubDate>Mon, 10 Oct 2022 05:08:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>समाजवादी पार्टी के संस्‍थापक और पूर्व मुख्‍यमंत्री 10 दिन से मेदांता अस्‍पताल थे भर्ती  मुलायम सिंह यादव ने सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर ली अंतिम सांस  TISMedia@Lucknow नेताजी ने नाम से मशहूर समाजवादी पार्टी के संस्‍थापक और तीन बार उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव नहीं रहे। यूरिन इंफेक्शन, ब्‍लड प्रेशर की &#8230;</p>
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<li><strong><span style="color: #ff0000;">समाजवादी पार्टी के संस्&#x200d;थापक और पूर्व मुख्&#x200d;यमंत्री 10 दिन से मेदांता अस्&#x200d;पताल थे भर्ती </span></strong></li>
<li><strong><span style="color: #ff0000;"> मुलायम सिंह यादव ने सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर ली अंतिम सांस </span></strong></li>
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<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Lucknow</span></strong> नेताजी ने नाम से मशहूर समाजवादी पार्टी के संस्&#x200d;थापक और तीन बार उत्&#x200d;तर प्रदेश के मुख्&#x200d;यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव नहीं रहे। यूरिन इंफेक्शन, ब्&#x200d;लड प्रेशर की दिक्&#x200d;कत और सांस लेने में तकलीफ होने की वजह से दो अक्&#x200d;टूबर को मेदांता अस्&#x200d;पताल में भर्ती कराया गया था। तभी से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। नौ दिन तक मेदांता के आईसीयू और क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) में जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहने के बाद नेताजी ने सोमवार सुबह 8:16 बजे अंतिम सांस ली। 82 साल की उम्र में सोमवार सुबह उनका निधन हो गया।</p>
<p>मुलायम सिंह यादव के निधन से देश भर में उनके समर्थकों और पार्टी लाइन से ऊपर उठकर विभिन्&#x200d;न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़कर काम करने वाले राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है। पिछले कई दिनों से मुलायम सिंह की सेहत को लेकर देश भर में चिंता जताई जा रही थी।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">अखिलेश ने ट्वीट कर दी जानकारी </span></strong><br />
मुलायम सिंह यादव के पुत्र और यूपी के पूर्व मुख्&#x200d;यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार की सुबह ट्वीट के जरिए नेताजी के निधन की पुष्टि की। अखिलेश ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा- &#8216;मेरे आदरणीय पिताजी नहीं रहे।&#8217; मुलायम सिंह यादव के निधन की सूचना मिलते ही मेदांता अस्&#x200d;पताल पर उनके समर्थकों, परिवार के नजदीकी लोगों और राजनीतिक नेताओं-कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी है। बड़ी संख्&#x200d;या में आ रहे लोगों को देखते हुए अस्&#x200d;पताल पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">सियासी गलियारों में शोक की लहर </span></strong><br />
पिछले कई दिनों से मुलायम सिंह की सेहत को लेकर देश भर में चिंता जताई जा रही थी। प्रधानमंत्री नरेन्&#x200d;द्र मोदी और सीएम योगी आदित्&#x200d;यनाथ सहित देश की तमाम राजनीतिक हस्तियां लगातार उनकी सेहत का हाल ले रही थीं। मुलायम सिंह यादव 22 अगस्&#x200d;त से मेदांता अस्&#x200d;पताल में भर्ती थे। मुलायम 1967 में पहली बार विधायक बने थे। वह आठ बार विधायक और 7 बार सांसद रहे। तीन बार यूपी के मुख्&#x200d;यमंत्री और दो बार केंद्र में मंत्री रहे। देश के रक्षा मंत्री रहते मुलायम सिंह यादव ने सीमा पर जाकर सेना का दिल जीत लिया था। मुलायम सिंह सैफई से सत्&#x200d;ता के शिखर तक का सफर बड़े ही संघर्षों के साथ तय किया था।</p>
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