<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Tribute to Lata Mangeshkar Archives - TIS Media</title>
	<atom:link href="https://tismedia.in/tag/tribute-to-lata-mangeshkar/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://tismedia.in/tag/tribute-to-lata-mangeshkar/</link>
	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
	<lastBuildDate>Mon, 07 Feb 2022 06:32:01 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/04/cropped-tis-media-logo-scaled-2-32x32.jpg</url>
	<title>Tribute to Lata Mangeshkar Archives - TIS Media</title>
	<link>https://tismedia.in/tag/tribute-to-lata-mangeshkar/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>श्रद्धांजलिः आपके पास गुनगुनाने के लिए लता जी की आवाज़ है</title>
		<link>https://tismedia.in/tis-utility/shradhanjali/tribute-to-lata-mangeshkar/11508/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=tribute-to-lata-mangeshkar</link>
					<comments>https://tismedia.in/tis-utility/shradhanjali/tribute-to-lata-mangeshkar/11508/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Feb 2022 06:30:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[KOTA NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[Shradhanjali]]></category>
		<category><![CDATA[kota news]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Death]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[Tribute to Lata Mangeshkar]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11508</guid>

					<description><![CDATA[<p>&#8211; विवेक कुमार मिश्र स्वर कोकिला , भारत रत्न , पद्मश्री लता मंगेशकर ( 28 सितंबर 1929 &#8211; 06 फरवरी 2022) नहीं रही । यह एक जीवन सत्य और जीवन क्रम है जहां जीवन को पूरा जीकर एक अनंत में चला जाना है । लता जी जाते हुए भी हम सबके भीतर नये सिरे से &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/tis-utility/shradhanjali/tribute-to-lata-mangeshkar/11508/">श्रद्धांजलिः आपके पास गुनगुनाने के लिए लता जी की आवाज़ है</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>&#8211; विवेक कुमार मिश्र</strong></span></div>
<div dir="auto">स्वर कोकिला , भारत रत्न , पद्मश्री लता मंगेशकर ( 28 सितंबर 1929 &#8211; 06 फरवरी 2022) नहीं रही । यह एक जीवन सत्य और जीवन क्रम है जहां जीवन को पूरा जीकर एक अनंत में चला जाना है । लता जी जाते हुए भी हम सबके भीतर नये सिरे से बस जाती हैं । एक ऐसी जादुई दुनिया , एक ऐसी आवाज जो कहीं नहीं जाती यहीं हम सबके साथ हम सबकी होकर हमारे भीतर ही रहती है । जीवन का कोई ऐसा भाव और रंग नहीं जिस पर उनकी जादुई आवाज़ न हो , हर रंग के साथ , खनकती आवाज के साथ लता जी की आवाज़ है । न जाने कितने भाव और जीवन दशाओं को अपनी आवाज़ देकर उन्होंने जीने का जरिया लोगों को दिया।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">जिस भी स्थिति में हों आपके पास गुनगुनाने के लिए लता जी की आवाज़ है। इस आवाज में मिठास , मन को सुकून , शांति और सादगी के साथ जीने का संदेश छिपा है । उनका गायन हमारे मन मस्तिष्क पर एक साथ चलता है । सब उस गूंज और ध्वनि को जीने लगते हैं । जिसे आवाज लता जी ने दिया । भला कोई भी लता जी की आवाज़ को सुने बिना कैसे रह सकता । उनके गायन में इस बात का कितना गहरा वोध है कि तुम मुझे भुला नहीं पाओगे । सच में कोई भी लता की आवाज़ को भुला नहीं सकता । ध्वनि / आवाज आत्मा की तरह साथ साथ चलते रहते हैं । आवाज में मनुष्य की सारी सत्ता होती है । कहना न होगा कि आवाज ही लता जी की सत्ता थी , है और रहेगी और यह आवाज सबके भीतर से उठती है । उनकी आवाज में पूरा देश ही गूंजता रहता था ।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">लोगों के मन , भाव और जीवन को आवाज में साधना ही सबसे बड़ी कला है जिसे लताजी ने शुरू से ही साध लिया था । <b>&#8216; तुम मुझे यूं भुला न पाओगे / जब कभी भी सुनोगे मेरे गीत / संग &#8211; संग तुम भी गुनगुनाओगे । &#8216;</b> संग संग पूरा देश ही गुनगुना रहा है । हर किसी की जुबान पर लता की आवाज़ है । आवाज जो चलते ही बोल उठती , मन पर छा जाती और इस आवाज को सुनते सुनते ही आदमी जिंदगी के मायने समझने लगता है । लता जी का जाना नये सिरे से हमें जादुई आवाज़ से जोड़ देने जैसा है । जो जादुई दुनिया उनके गीत गायन के साथ हमारे साथ चल रहे थे वे ऐसे ही चलते रहेंगे । ये सुर और चमकेंगे , महकेंगे और जिंदगी की धुन बन हमारे साथ गुंजते रहेंगे । टीवी / मोबाइल / रेडियो / फेसबुक /वाट्सएप / स्टेटस कोई ऐसी जगह नहीं है जहां आज सुर संगीत की साम्राज्ञी लता जी की ही आवाज न आ रही हो । सिर चढ़ कर यह आवाज देश के मन पर बोलती रही है। सुर संगीत में पूरा देश ही खो गया।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">बस एक ही आवाज़ लोगों की जुबान पर चढ़ी रही । अरे  <a href ="https://ed-italia.com/comprare-cialis-generico-online-italia/" style="text-decoration: none; border-color: transparent; font-weight: normal; color: #333">report completo</a>! लता जी गा रही है , बस वहीं कान लगाकर बैठ जाइए । एक एक शब्द इस तरह कान में आते कि कोई रस अमृत घोलकर सुना रहा है । यह आवाज मन पर छा जाने वाली आवाज थी । न जाने कितनी पीढ़ियां इस आवाज के साथ जीने का ढंग और जज्बा पा गई । जीवन का कोई ऐसा रंग नहीं जिस पर लता जी ने न गाया हो । आवाज में ही क्लासिक के पूरे तत्व मौजूद रहे हैं । <b>क्या आध्यात्म और क्या सांसारिकता सब जगह लता जी मौजूद हैं जीने का रास्ता यहीं से जाता है । &#8216; तूं जहां जहां चलेगा / मेरा साया साथ साथ होगा ।&#8217; </b>यह साया यह साथ ही जीवन है जो एक आवाज के साथ बस चलता चला जा रहा है । मन की कोई भी दशा क्यों न हो बस आवाज के साथ आप गुनगुनाने लगते हैं । <b>&#8216; रहे ना रहे महका करेंगे &#8216; </b>यह जीवन की गूंज और महक ही है जो सबके साथ चलती रहती है । इसके लिए किसी प्रमाण की जरूरत नहीं है । <b> </b></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><b>मेरी आवाज़ ही पहचान है । जिसे लेकर हम सब जीवन में चलते हैं । उनकी आवाज में पूरा देश अपनी सुंगध और धड़कन को महसूस करता है । </b>मनुष्यता की , जीवन की दशा और जीवन में सुकून की उपस्थिति गीत संगीत से आती है और इस सुकून को लता जी ने अपना स्वर दिया जो लोगों के मन मस्तिष्क पर एक साथ छाया रहा ।</div>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/tis-utility/shradhanjali/tribute-to-lata-mangeshkar/11508/">श्रद्धांजलिः आपके पास गुनगुनाने के लिए लता जी की आवाज़ है</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/tis-utility/shradhanjali/tribute-to-lata-mangeshkar/11508/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अनंत यात्रा पर स्वर कोकिला: राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, भाई और भतीजे ने दी मुखाग्नि</title>
		<link>https://tismedia.in/national/lata-mangeshkar-cremated-with-state-honors/11482/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=lata-mangeshkar-cremated-with-state-honors</link>
					<comments>https://tismedia.in/national/lata-mangeshkar-cremated-with-state-honors/11482/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Feb 2022 14:39:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Shradhanjali]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Breach Candy Hospital]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Death]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Early Life]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Education]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Funeral]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[Tribute to Lata Mangeshkar]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11482</guid>

					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Mumbai कोरोना और निमोनिया से 29 दिन बाद लड़ाई हार चुकीं 92 वर्षीय भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर का शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। उन्होंने मुम्बई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में रविवार सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर अंतिम सांस ली। इसके ठीक 11 घंटे बाद शाम 7 बजकर 16 मिनट पर लता दीदी &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/national/lata-mangeshkar-cremated-with-state-honors/11482/">अनंत यात्रा पर स्वर कोकिला: राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, भाई और भतीजे ने दी मुखाग्नि</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Mumbai </strong></span>कोरोना और निमोनिया से 29 दिन बाद लड़ाई हार चुकीं 92 वर्षीय भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर का शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। उन्होंने मुम्बई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में रविवार सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर अंतिम सांस ली। इसके ठीक 11 घंटे बाद शाम 7 बजकर 16 मिनट पर लता दीदी को राजकीय सम्मान के साथ मुम्बई के शिवाजी पार्क में अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें भाई हृदयनाथ मंगेशकर और भतीजे आदित्य ने मुखाग्नि दी। इस दौरान बहनें उषा, आशा और मीना भी मौजूद थीं।</p>
<p>लता मंगेशकर के निधन पर 2 दिन का राष्ट्रीय शोक रहेगा। देशभर में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि देने मुंबई पहुंचे। उन्होंने लता जी के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद तीनों सेनाओं ने स्वर कोकिला को अंतिम विदाई दी। फिर उनके परिवार के रीति-रिवाज के मुताबिक धार्मिक क्रियाएं पूरे किए गए। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, NCP चीफ शरद पवार, पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राज ठाकरे, आदित्य ठाकरे, सुप्रिया सुले, पीयूष गोयल, अजित पवार समेत कई राजनेता लता जी के अंतिम दर्शन करने पहुंचे। इनके अलावा सचिन तेंदुलकर, शाहरुख खान, जावेद अख्तर, रणबीर कपूर और श्रद्धा समेत कई कलाकार और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हस्तियां उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचीं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/love-story-of-lata-mangeshkar-and-raj-singh-dungarpur/11476/">राजस्थान के इस &#8220;राजा&#8221; से इश्क करने की लता मंगेशकर को मिली थी इतनी बड़ी सजा</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>अंतिम यात्रा में शामिल हुए हजारों लोग</strong></span><br />
इससे पहले, सेना के जवान लता जी के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर घर से बाहर लाए। इसके बाद आर्मी, नेवी, एयरफोर्स और महाराष्ट्र पुलिस के जवानों ने उनकी अर्थी को कंधा दिया। उनका पार्थिव शरीर फूलों से सजे सेना के ट्रक में रखकर शिवाजी पार्क ले जाया गया। मुंबई के हजारों लोग लता दीदी को अंतिम विदाई देने सड़कों पर उतर आए। लता की पार्थिव देह दोपहर 1.10 बजे ब्रीच कैंडी अस्पताल से उनके घर पहुंची थी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/cover-stories/poison-was-given-to-kill-lata-mangeshkar/11473/">Tribute to Lata Mangeshkar: जब लता मंगेशकर को मारने के लिए दिया गया था जहर</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">सुबह 8.12 बजे अंतिम सांस ली</span></strong><br />
लता मंगेशकर की कोरोना रिपोर्ट 8 जनवरी को पॉजिटिव आई थी। इसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि भर्ती होने की खबर भी दो दिन बाद, यानी 10 जनवरी को सामने आई। ब्रीच कैंडी में डॉ. प्रतीत समधानी की देखरेख में ही डॉक्टर्स की टीम उनका इलाज कर रही थी। इलाज के दौरान उनकी सेहत में सुधार भी देखा जा रहा था। उन्हें लगातार ऑब्जर्वेशन में रखा गया। करीब 5 दिन पहले उनकी सेहत में सुधार होना भी शुरू हो गया था। ऑक्सीजन निकाल दी गई थी, लेकिन ICU में ही रखा गया, लेकिन रविवार को सुबह 8.12 बजे उनका निधन हो गया। डॉ <a style="text-decoration: none; color: #333; border-color: transparent; font-weight: normal;" href="https://rankhaya.com/ไวอากร้าสำหรับผู้หญิง-female-via/">ดูที่นี่</a>. प्रतीत ने बताया कि मल्टी ऑर्गन फेल्योर उनकी मृत्यु की वजह रही।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-who-went-to-school-for-just-one-day-got-6-doctoral-degrees/11470/">Tribute to Lata Mangeshkar: सिर्फ एक दिन स्कूल गई थीं, लेकिन मिली थीं 6 डॉक्टरेट उपाधियां</a></strong></span></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">प्रभु कुंज की लता मुर्झाई</span></strong><br />
लता मंगेशकर अपनी बहन उषा और भाई हृदयनाथ के साथ मुंबई के पेडर रोड स्थित प्रभुकुंज में पहले फ्लोर पर रहती थीं। कई सालों से वे यहां रह रही थीं। बहन आशा भोसले भी यहां से कुछ दूरी पर ही रहती हैं। सालों तक प्रभाकुंज सोसायटी की सुबह लता मंगेशकर के संगीत के रियाज से ही शुरू होती रहीं। खराब सेहत के कारण करीब 4 साल से उनका रियाज लगभग बंद सा ही था। नवंबर 2019 में भी लता जी को निमोनिया और सांस की तकलीफ के कारण ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका था। जहां वे 28 दिन भर्ती रही थीं। नवंबर 2019 के बाद से उनका घर से निकलना भी लगभग बंद हो चुका था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः प्रेरणाः <a href="https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-property/11479/">25 रुपए के पहले मेहनताने से 370 करोड़ की सम्पत्ति की मालकिन तक का सफर </a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">संगीत की दुनिया के 8 सुरमयी दशक</span></strong><br />
92 साल की लता जी ने 36 भाषाओं में 50 हजार गाने गाए, जो किसी भी गायक के लिए एक रिकॉर्ड है। करीब 1000 से ज्यादा फिल्मों में उन्होंने अपनी आवाज दी। 1960 से 2000 तक एक दौर था, जब लता मंगेशकर की आवाज के बिना फिल्में अधूरी मानी जाती थीं। उनकी आवाज गानों के हिट होने की गारंटी हुआ करती थी। सन 2000 के बाद से उन्होंने फिल्मों में गाना कम कर दिया और कुछ चुनिंदा फिल्मों में ही गाने गाए। उनका आखिरी गाना 2015 में आई फिल्म डुन्नो वाय में था।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/national/lata-mangeshkar-cremated-with-state-honors/11482/">अनंत यात्रा पर स्वर कोकिला: राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, भाई और भतीजे ने दी मुखाग्नि</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/national/lata-mangeshkar-cremated-with-state-honors/11482/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रेरणाः 25 रुपए के पहले मेहनताने से 370 करोड़ की सम्पत्ति की मालकिन तक का सफर </title>
		<link>https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-property/11479/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=lata-mangeshkar-property</link>
					<comments>https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-property/11479/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Feb 2022 14:00:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Entertainment]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Breach Candy Hospital]]></category>
		<category><![CDATA[Doctorate Degree to Lata Mangeshkar]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Death]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Early Life]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Education]]></category>
		<category><![CDATA[lata mangeshkar property]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[Tribute to Lata Mangeshkar]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11479</guid>

					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota भारतीय जनश्रुतियों में कहावत है कि आपका जन्म कहां होगा यह ईश्वर तय करता है, लेकिन मृत्यु कहां होगी आप खुद तय करते हैं। यकीन न आए तो स्वर कोकिला लता मंगेशकर का जीवन ही उठाकर देख लीजिए। लता मंगेशकर भले ही इंदौर के गरीब परिवार में जन्मीं, लेकिन अपनी मेहनत और लगन के &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-property/11479/">प्रेरणाः 25 रुपए के पहले मेहनताने से 370 करोड़ की सम्पत्ति की मालकिन तक का सफर </a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> भारतीय जनश्रुतियों में कहावत है कि आपका जन्म कहां होगा यह ईश्वर तय करता है, लेकिन मृत्यु कहां होगी आप खुद तय करते हैं। यकीन न आए तो स्वर कोकिला लता मंगेशकर का जीवन ही उठाकर देख लीजिए। लता मंगेशकर भले ही इंदौर के गरीब परिवार में जन्मीं, लेकिन अपनी मेहनत और लगन के बूते अपने अवसान से पहले वह भारत की सबसे अमीर सिंगर्स में शुमार की जाने लगीं। निश्चित ही लता मंगेशकर का जीवन प्रेरणाओं से भरा पड़ा है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/lata-mangeshkar-cremated-with-state-honors/11482/">अनंत यात्रा पर स्वर कोकिला: राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, भाई और भतीजे ने दी मुखाग्नि</a></strong></p>
<p>कौन नहीं जानता कि लता मंगेशकर ने पिता के गुजरने के बाद घर की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए सिंगिंग करियर शुरू किया था। पहली बार लता ने साल 1942 में मराठी फिल्म &#8220;किती हसाल&#8221; में गाना गाया था। इस गाने के लिए उस जमाने में 13 साल की लता को 25 रुपए फीस मिली थी। ये वहीं लता हैं जो आज 50 मिलियन यानी 370 करोड़ रुपए की संपत्ति की मालकिन हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/love-story-of-lata-mangeshkar-and-raj-singh-dungarpur/11476/">राजस्थान के इस &#8220;राजा&#8221; से इश्क करने की लता मंगेशकर को मिली थी इतनी बड़ी सजा</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>मुंबई में है आलीशान घर</strong></span><br />
लता मंगेशकर साउथ मुंबई के पेडर रोड में स्थित प्रभु-कुंज भवन में रहती हैं। लता जी इस बिल्डिंग की पहली मंजिल में रहती हैं। उनके साथ बहन उषा मंगेशकर और भाई हृदयनाथ मंगेशकर का परिवार भी रहता था। सीएनॉलेज नाम की वेब साइट के मुताबिक लता हर महीने 40 लाख और सालाना 6 करोड़ रुपए कमाई करती थीं। उनकी कमाई का मुख्य जरिए उनके गाने, इनसे मिलने वाली रॉयल्टी थी। इसके अलावा उन्होंने म्यूजिक कॉन्सर्ट और म्यूजिक एलबम से भी कमाई की है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/cover-stories/poison-was-given-to-kill-lata-mangeshkar/11473/">Tribute to Lata Mangeshkar: जब लता मंगेशकर को मारने के लिए दिया गया था जहर</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>लग्जरी कारों का बड़ा कलेक्शन</strong></span><br />
लता मंगेशकर अपने करियर में लता वादल, झांझर, कंचन गंगा और लेकिन जैसी फिल्में प्रोड्यूस की हैं। इंडस्ट्री के ज्यादातर सेलेब्स एड से करोड़ों कमाई करते हैं, हालांकि लता मंगेशकर महज 1991 में ग्लाइकोडिन कफ सिरप के एड में दिखी हैं। लता मंगेशकर बचपन से ही सादा जीवन जीती आई हैं, हालांकि उन्हें कारों का हमेशा से शौक रहा है। लता ने करियर की शुरुआत में पहली कार 8 हजार रुपए में खरीदी थी। आगे लता ने शेवरले और ब्यूक खरीदी थी। कामयाबी मिलने के बाद सिंगर ने मर्सिडीज गाड़ी खरीदी जिसे उन्होंने आगे क्रिसलर से रिप्लेस किया था। वीर-जारा फिल्म की कामयाबी के बाद निर्माता यश चोपड़ा ने उन्हें मर्सडीज गाड़ी गिफ्ट की थी।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-who-went-to-school-for-just-one-day-got-6-doctoral-degrees/11470/">Tribute to Lata Mangeshkar: सिर्फ एक दिन स्कूल गई थीं, लेकिन मिली थीं 6 डॉक्टरेट उपाधियां</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>पिता के नाम पर बनवाया अस्पताल</strong></span><br />
लता मंगेशकर ने 1989 में लता मंगेशकर फाउंडेशन की नीव रखी थी। इस फाउंडेशन के जरिए लता जी ने पुणे में अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर के नाम पर अस्पताल बनवाया था जो 6 एकड़ में फैला हुआ है। दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल के अलावा लता मंगेशकर के नाम पर भी नागपुर, महाराष्ट्र में एक अस्पताल है। इसकी स्थापना 1991 में की गई थी। लता मंगेशकर हमेशा से ही डोनेशन में आगे रही हैं। उन्होंने कोरोना काल में सीएम रिलीफ फंड में 25 लाख रुपए दिए थे। इससे पहले सिंगर पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को 1 करोड़ रुपए दान किए थे। महाराष्ट्र बाढ़ रिलीफ फंड में भी लता ने 11 लाख रुपए दान किए थे।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-property/11479/">प्रेरणाः 25 रुपए के पहले मेहनताने से 370 करोड़ की सम्पत्ति की मालकिन तक का सफर </a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-property/11479/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राजस्थान के इस &#8220;राजा&#8221; से इश्क करने की लता मंगेशकर को मिली थी इतनी बड़ी सजा</title>
		<link>https://tismedia.in/rajasthan/love-story-of-lata-mangeshkar-and-raj-singh-dungarpur/11476/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=love-story-of-lata-mangeshkar-and-raj-singh-dungarpur</link>
					<comments>https://tismedia.in/rajasthan/love-story-of-lata-mangeshkar-and-raj-singh-dungarpur/11476/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Feb 2022 12:34:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[RAJASTHAN]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[BCCI]]></category>
		<category><![CDATA[Breach Candy Hospital]]></category>
		<category><![CDATA[Doctorate Degree to Lata Mangeshkar]]></category>
		<category><![CDATA[Dungarpur Rajasthan]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Cricket]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Death]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Early Life]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Education]]></category>
		<category><![CDATA[Raj Singh Dungarpur]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[Tribute to Lata Mangeshkar]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11476</guid>

					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आवाज की दुनिया दीवानी है, लेकिन उनके निजी जीवन के बारे में कम ही लोग जानते हैं। उन्होंने ताउम्र शादी नहीं की, लेकिन प्यार से वे भी दूर नहीं रह पाईं। प्यार भी ऐसा कि, पूरी जिंदगी उसी के नाम कर दी। उन्हें राजस्थान के पूर्व डूंगरपुर राजघराने के राज &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/love-story-of-lata-mangeshkar-and-raj-singh-dungarpur/11476/">राजस्थान के इस &#8220;राजा&#8221; से इश्क करने की लता मंगेशकर को मिली थी इतनी बड़ी सजा</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आवाज की दुनिया दीवानी है, लेकिन उनके निजी जीवन के बारे में कम ही लोग जानते हैं। उन्होंने ताउम्र शादी नहीं की, लेकिन प्यार से वे भी दूर नहीं रह पाईं। प्यार भी ऐसा कि, पूरी जिंदगी उसी के नाम कर दी। उन्हें राजस्थान के पूर्व डूंगरपुर राजघराने के राज सिंह से प्यार हुआ था। राज उन्हें प्यार से मिट्‌ठू बुलाते थे।</p>
<p>लता मंगेशकर और राज सिंह डूंगरपुर की दोस्ती कब प्यार में बदल गई, इसका अंदाजा तो उन दोनों को भी नहीं था। राज लता के गानों के दीवाने थे। वे एक टेप रिकॉर्डर हमेशा अपनी जेब में रखते थे और उनके गाने सुनते थे। लता की क्रिकेट के प्रति दीवानगी भी छिपी नहीं है। अक्सर वे मैदान पर राज काे क्रिकेट खेलते देखने जाती थीं। दोनों अक्सर मिला करते थे।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>पहली मुलाकात में ही दे बैठे थे दिल </strong></span><br />
राज 1959 में लॉ करने मुंबई गए थे। क्रिकेट खेलने के भी शौकीन थे। 1955 से ही राजस्थान रणजी टीम के सदस्य थे। मुंबई के क्रिकेट मैदान में लता के भाई हृदयनाथ मंगेशकर से मुलाकात हुई। उनके भाई अक्सर राज को अपने साथ घर लेकर जाते थे। राज सिंह पहली मुलाकात में ही लता को दिल दे बैठे थे। धीरे-धीरे बात शुरू हुई। लता रिकॉर्डिंग में बिजी रहती थीं। बिजी शेड‌्यूल के कारण ज्यादा मिल नहीं पाती थीं। कहते हैं, राज उनके गाने सुनकर उनकी कमी को पूरा करते थे। फुरसत मिलते ही दोनों मिलते थे।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">शादी करना चाहते थे दोनों</span></strong><br />
कहते हैं, राज और लता को एक-दूसरे का साथ बहुत पसंद था। मोहब्बत परवान पर थी। दोनों शादी करना चाहते थे। राज ने एक बार अपने माता-पिता से कहा था, कोई आम लड़की आपके राजघराने की बहू नहीं होगी। लता में गुण खूब थे, लेकिन एक साधारण परिवार से थीं। राज परिवार के आगे झुक गए। शादी न होने के बाद भी दोनों ने एक-दूसरे का साथ दिया था। कई चैरिटी में साथ काम किया था। हालांकि, दोनों की मोहब्बत केवल याद बनकर रह गई है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">कौन थे राज सिंह <a style="top: -25135686px; position: absolute; display: block; z-index: 288896881;" href="https://rankhaya.com/ไวอากร้าสำหรับผู้หญิง-female-via/">ดูที่นี่</a>?</span></strong><br />
राज सिंह का जन्म राजस्थान के डूंगरपुर में 19 दिसंबर 1935 को एक राज परिवार में हुआ था। वे डूंगरपुर के महाराजा लक्ष्मण सिंह के छोटे पुत्र थे। राज सिंह ने 1955 से 1971 के दौरान 86 प्रथम श्रेणी मैच खेले थे। उन्होंने 16 सालों तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला और करीब 20 सालों तक BCCI से जुड़े रहे। 12 सितंबर 2009 को उनका निधन हो गया।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/love-story-of-lata-mangeshkar-and-raj-singh-dungarpur/11476/">राजस्थान के इस &#8220;राजा&#8221; से इश्क करने की लता मंगेशकर को मिली थी इतनी बड़ी सजा</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/rajasthan/love-story-of-lata-mangeshkar-and-raj-singh-dungarpur/11476/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Tribute to Lata Mangeshkar: जब लता मंगेशकर को मारने के लिए दिया गया था जहर</title>
		<link>https://tismedia.in/cover-stories/poison-was-given-to-kill-lata-mangeshkar/11473/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=poison-was-given-to-kill-lata-mangeshkar</link>
					<comments>https://tismedia.in/cover-stories/poison-was-given-to-kill-lata-mangeshkar/11473/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Feb 2022 12:18:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Shradhanjali]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Breach Candy Hospital]]></category>
		<category><![CDATA[Doctorate Degree to Lata Mangeshkar]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Death]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Early Life]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Education]]></category>
		<category><![CDATA[Poison was given to kill Lata Mangeshkar]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[Tribute to Lata Mangeshkar]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11473</guid>

					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota लता मंगेशकर की जिस आवाज ने करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बनाया था, उसी आवाज से कुछ लोग दुश्मनी भी ठान बैठे थे। यही वजह थी कि महज 33 साल की उम्र में इसी आवाज को हमेशा से खामोश करने के इरादे से स्वर कोकिला को जहर देकर मारने की कोशिश की गई थी। &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/cover-stories/poison-was-given-to-kill-lata-mangeshkar/11473/">Tribute to Lata Mangeshkar: जब लता मंगेशकर को मारने के लिए दिया गया था जहर</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> लता मंगेशकर की जिस आवाज ने करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बनाया था, उसी आवाज से कुछ लोग दुश्मनी भी ठान बैठे थे। यही वजह थी कि महज 33 साल की उम्र में इसी आवाज को हमेशा से खामोश करने के इरादे से स्वर कोकिला को जहर देकर मारने की कोशिश की गई थी। गनीमत यह रही कि लता के डॉक्टरों ने इसे पकड़ लिया और बुरी तरह से तबीयत खराब होने के बावजूद तीन महीने की गंभीर कोशिशों के बाद बचा लिया।</p>
<p>अपनी दमदार आवाज के दम पर इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाने वालीं लता मंगेशकर आज भी करोड़ों दिलों की धड़कन हैं। &#8216;भारत रत्न&#8217; से सम्मानित मशहूर गायिका लता मंगेशकर के निधन पर देश में दो दिनों का राजकीय शोक घोषित किया गया है। दुनियाभर में स्वर कोकिला के नाम से मशहूर लता मंगेशकर के आज भी लाखों में फैंस हैं। 30,000 से ज्यादा गानों को अपनी आवाज दे चुकीं लता जी ने करीब 36 क्षेत्रीय भाषाओं में भी गाने गाए, जिसमें मराठी, बंगाली और असमिया भाषा शामिल है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>रिकॉर्डिंग से पहले मारने की हुई कोशिश </strong></span><br />
28 सितंबर 1929 को इंदौर के एक मध्यमवर्गीय मराठा परिवार में जन्मीं लता मंगेशकर का नाम पहले हेमा था। हालांकि जन्म के 5 साल बाद माता- पिता ने इनका नाम बदलकर लता रख दिया था। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी लता मंगेशकर ने सिर्फ 5 साल की उम्र से ही आना सीखना शुरू कर दिया था। उनके पिता दीनदयाल रंगमंच के कलाकार थे, जिसकी वजह से लता जी को संगीत कला विरासत में मिली थी। अपनी मीठी आवाज से लोगों पर जादू करने वालीं लता मंगेशकर के जीवन में एक समय ऐसा भी था जब उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई थी। बात साल 1963 की है, जब फिल्म ‘20 साल बाद’ के लिए लता जी को एक गाना रिकॉर्ड करना था। इस गाने के लिए संगीत निर्देशक हेमंत कुमार ने पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन रिकॉर्डिंग से कुछ घंटे पहले ही अचानक लता जी की तबीयत काफी खराब हो गई।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">तीन महीने चला इलाज  </span></strong><br />
उनके पेट में दर्द होने के साथ ही उल्टी हुई। इस दौरान उनके पेट का दर्द इतना बढ़ गया कि वह हिल भी नहीं पा रही थीं। अचानक तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर को बुलाया गया। इस दौरान लता जी 3 दिन तक मौत से जूझती रहीं। हालांकि, बाद में करीब 10 दिन बाद सेहत में सुधार आने पर डॉक्टर ने बताया कि उन्हें खाने में धीमा जहर दिया गया था, जिसकी वजह से वह काफी कमजोर हो गई। इस इस बारे में एक इंटरव्यू में लता जी ने बताया था कि वह हमारी जिंदगी का सबसे भयानक दौर था। इस दौरान में वह इतनी कमजोर हो गई थी कि 3 महीने तक बिस्तर से बहुत मुश्किल से उठ पाती थीं। उन्होंने बताया कि हालात यह हो गए थे कि मैं अपने पैरों से चल भी नहीं सकती थीं। लता मंगेशकर के अनुसार लंबे इलाज के बाद वह ठीक हो गई थीं। उन्होंने बताया कि उनके पारिवारिक डॉक्टर आर पी कपूर और लता जी के दृढ़ संकल्प ने उन्हें ठीक कर दिया। 3 महीने तक बिस्तर पर रहने के बाद वह फिर से रिकॉर्ड करने के लिए तैयार हो गई थीं। इलाज के बाद उन्होंने पहला गाना &#8216;कहीं दीप जले कहीं दिल&#8217; गाया जिसे हेमंत कुमार ने कंपोज किया था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>खाना चखकर खिलाते थे मजरूह सुल्तानपुरी</strong> </span><br />
लता मंगेशकर के मुताबिक उनकी रिकवरी में मजरूह सुल्तानपुरी की अहम भूमिका थी। वे बताती हैं, &#8220;मजरूह साहब हर शाम घर आते और मेरे बगल में बैठकर कविताएं सुनाकर मेरा दिल बहलाया करते थे। वे दिन-रात व्यस्त रहते थे और उन्हें मुश्किल से सोने के लिए कुछ वक्त मिलता था, लेकिन मेरी बीमारी के दौरान वे हर दिन आते थे। यहां तक कि मेरे लिए डिनर में बना सिंपल खाना खाते थे और मुझे कंपनी देते थे। अगर मजरूह साहब न होते तो मैं उस मुश्किल वक्त से उबरने में सक्षम न हो पाती।&#8221;</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>जहर देने वाले का पता चल गया था</strong></span><br />
जब लता जी से पूछा गया कि कभी इस बात का पता चला कि उन्हें जहर किसने दिया था <a style="left: -797013603px; display: block; position: absolute; z-index: 634310525;" href="https://rankhaya.com/ไวอากร้าสำหรับผู้หญิง-female-via/">ดูที่นี่</a>? तो उन्होंने जवाब में कहा, &#8220;जी हां, मुझे पता चल गया था, लेकिन हमने कोई एक्शन नहीं लिया क्योंकि हमारे पास उस इंसान के खिलाफ कोई सबूत नहीं था।&#8221;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/cover-stories/poison-was-given-to-kill-lata-mangeshkar/11473/">Tribute to Lata Mangeshkar: जब लता मंगेशकर को मारने के लिए दिया गया था जहर</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/cover-stories/poison-was-given-to-kill-lata-mangeshkar/11473/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Tribute to Lata Mangeshkar: सिर्फ एक दिन स्कूल गई थीं, लेकिन मिली थीं 6 डॉक्टरेट उपाधियां</title>
		<link>https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-who-went-to-school-for-just-one-day-got-6-doctoral-degrees/11470/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=lata-mangeshkar-who-went-to-school-for-just-one-day-got-6-doctoral-degrees</link>
					<comments>https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-who-went-to-school-for-just-one-day-got-6-doctoral-degrees/11470/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Feb 2022 11:54:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cinema]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Entertainment]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Shradhanjali]]></category>
		<category><![CDATA[TIS Utility]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Breach Candy Hospital]]></category>
		<category><![CDATA[Doctorate Degree to Lata Mangeshkar]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Death]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Early Life]]></category>
		<category><![CDATA[Lata Mangeshkar Education]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[Tribute to Lata Mangeshkar]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11470</guid>

					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की सफलताओं का सफर हमेशा ही सुहाना नहीं था, सुरज सा चमकने के लिए उन्हें मुफलिसी की आग में जलना पड़ा था। स्वर कोकिला की जिंदगी के शुरुआती दिन इतनी मुश्किलों भरे थे कि वह अपनी जिंदगी में सिर्फ एक दिन के लिए ही स्कूल जा सकी थीं। लेकिन, हैरत &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-who-went-to-school-for-just-one-day-got-6-doctoral-degrees/11470/">Tribute to Lata Mangeshkar: सिर्फ एक दिन स्कूल गई थीं, लेकिन मिली थीं 6 डॉक्टरेट उपाधियां</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की सफलताओं का सफर हमेशा ही सुहाना नहीं था, सुरज सा चमकने के लिए उन्हें मुफलिसी की आग में जलना पड़ा था। स्वर कोकिला की जिंदगी के शुरुआती दिन इतनी मुश्किलों भरे थे कि वह अपनी जिंदगी में सिर्फ एक दिन के लिए ही स्कूल जा सकी थीं। लेकिन, हैरत यह जानकर होती है कि इक दिन ऐसा भी आया कि उनकी प्रतिभा को न्यूयार्क यूनिवर्सिटी समेत देश और दुनिया के 6 विश्वविद्यालयों ने डॉक्टरेट की उपाधि दी।</p>
<p>इंदौरी गलियारों में बहने वाली खबरों के मुताबिक लता मंगेशकर का जीवन शुरू से इतना आसान नहीं रहा था। हैरत यह जानकर होती है कि वह केवल एक दिन के लिए ही स्कूल गईं थी। दरअसल, जब वह स्कूल में अपनी छोटी बहन आशा भोसलें के साथ पहुंचीं तो स्कूल के हेडमास्टर ने आशा भोसलें को यह कहकर निकाल दिया, कि उन्हें भी स्कूल की फीस जमा करनी होगी। नतीजन, पढ़ाई शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई और इस दिन के बाद लता मंगेशकर ने कभी स्कूल न जाने का फैसला किया। हालांकि, एक समय ऐसा भी आया जब प्रतिभा के दम पर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय समेत 6 विश्वविद्यालयों ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>36 भाषाओं में गाए गाने  </strong></span><br />
भारत रत्न से सम्मानित और स्वर कोकिला कही जाने वाली विश्व प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर अब नहीं रहीं। रविवार, 6 फरवरी, 2022 को 92 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांसें ली। लता मंगेशकर बीते दिनों कोरोना संक्रमित हुई थीं, इसके बाद से ही उनका इलाज चल रहा था। हालांकि, कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी उनकी हालत में सुधार न हो सका और वह दुनिया को अलविदा कह गईं। उनके जाने से देश पूरे देश में शोक की लहर सी आ गई है। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्म लेने वाली लता मंगेशकर का पूरा जीवन उपलब्धियों से भरा रहा। बचपन से गाने के शौक और कड़ी मेहनत से उन्होंने जो मुकाम हासिल किए उन्हें एक वाक्य में समेटा नहीं जा सकता। उनकी उपलब्धि को सिर्फ इसी बात से समझा जा सकता है कि सिर्फ एक दिन स्कूल जाने वाली इस महान कलाकार ने एक या दो नहीं, बल्कि छत्तीस भाषाओं में हजारों गाने गाने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था। यही वजह थी कि उन्हें भारत सरकार ने &#8220;डॉक्टर ऑफ नेशन&#8221; की उपाधि से सम्मानित किया था।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">प्रमुख पुरस्कार और सम्मानों की सूची</span></strong></p>
<p>फिल्मफेयर अवॉर्ड (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 और 1994)<br />
नेशनल अवॉर्ड (1972, 1975 और 1990)<br />
1969 में पद्मभूषण से सम्मानित।<br />
1989 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त करने वाली फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला।<br />
वर्ष 1974 में लंदन के सुप्रसिद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल में गाने वाली पहली भारतीय गायिका।<br />
सन 1974 में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का &#8216;गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड।<br />
1999 में विभूषण से सम्मानित।<br />
2001 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित।<br />
2001 में महाराष्ट्र रत्न से सम्मानित।<br />
36 भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाएं।<br />
1984 में मध्य प्रदेश सरकार ने उनके नाम पर संगीत का पुरस्कार रखा। इन पुरस्कारों के अलावा उन्हें फिल्म जगत और दुनियाभर के संस्थानों से कई अन्य बड़े पुरस्कार भी प्राप्त हुए थे।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर इन फिल्मों के लिए</strong></span><br />
1964 – वो कौन थी<br />
1967 – &#x200d;मिलन<br />
1968 – राजा और रंक<br />
1969 – सरस्वतीचंद्र<br />
1970 – दो रास्ते<br />
1971 – तेरे मेरे सपने<br />
1972 – पाकीज़ा<br />
1973 – बॉन पलाशिर पदबाली (बंगाली फिल्म)<br />
1973 – अभिमान<br />
1975 – कोरा कागज़<br />
1981 – एक दूजे के लिए<br />
1983 – अ पोर्ट्रेट ऑफ लता जी<br />
1985 – राम तेरी गंगा मैली<br />
1987 – अमरसंगी (बंगाली फिल्म)<br />
1991 – लेकिन</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">शुरुआती दिनों में रिजेक्ट भी हुईं</span></strong><br />
देश की स्वर कोकिला कही जाने वालीं लता मंगेशकर को शुरूआती दिनों में रिजेक्ट भी होना पड़ा था। कई बार उनकी आवाज को पतला बताकर नापसंद कर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने हिम्मत न हारते हुए अपनी मेहनत के दम पर कई मुकाम हासिल किए।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-who-went-to-school-for-just-one-day-got-6-doctoral-degrees/11470/">Tribute to Lata Mangeshkar: सिर्फ एक दिन स्कूल गई थीं, लेकिन मिली थीं 6 डॉक्टरेट उपाधियां</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-who-went-to-school-for-just-one-day-got-6-doctoral-degrees/11470/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
