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	<title>Vardhman Mahaveer Open University Archives - TIS Media</title>
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	<title>Vardhman Mahaveer Open University Archives - TIS Media</title>
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		<title>प्रेरणाः एक शिक्षक जिसने अपने पुरखों को कर दिया “अमर”</title>
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		<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 17:12:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आप अपने पुरखों को कैसे याद रखते हैं, यह बेहद निजी फैसला हो सकता है। लेकिन दुनिया उन्हें कैसे याद करे यह न सिर्फ आप तय करते हैं, बल्कि आपका व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों मिलकर सुनिश्चित करते हैं। विश्व की सभी प्रचीन सभ्यताओं में पूर्वजों की स्मृतियों को सहेजकर रखने और खास अवसरों पर उनका &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>आप अपने पुरखों को कैसे याद रखते हैं, यह बेहद निजी फैसला हो सकता है। लेकिन दुनिया उन्हें कैसे याद करे यह न सिर्फ आप तय करते हैं, बल्कि आपका व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों मिलकर सुनिश्चित करते हैं।</p>
<p>विश्व की सभी प्रचीन सभ्यताओं में पूर्वजों की स्मृतियों को सहेजकर रखने और खास अवसरों पर उनका स्मरण करने की परंपरा रही है। भारतीय संस्कृति में यह परंपरा निजी स्मृतियों और संस्मरणों से कुछ आगे की यात्रा तय करती दिखाई देती है। इतिहास गवाह है कि पुरखों की निशानियां संभालकर रखने के लिए भारतीयों को विशेषतौर पर पहचाना जाता है। इतना ही नहीं जब यह स्मृतियां जन कल्याण का हिस्सा बन जाती हैं तो पूर्वजों की थाथी पुनर्जीवित हो उठती है। भारतीय परंपराओं का जनकल्याण से बेहद करीब का रिश्ता रहा है। यही वजह है कि जब-जब पूर्वजों का जिक्र छिड़ा कहीं बाबड़ियां, कहीं तालाब तो कहीं धर्मशालाएं तामीर हो उठीं।</p>
<p>भारतीय समाज का तानाबाना बेहद मजबूती से गढ़ा गया है। विश्व का शायद एकमात्र समाज होगा जिसने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि पूर्वजों की स्मृतियों को चिरकाल के लिए स्थाई बनाने की जब भी चाह उभरी, हमने शैक्षणिक प्रोत्साहन की राह चुनी। स्कूलों की स्थापना से लेकर भावी संततियों को उच्च और श्रेष्ठ शिक्षा प्रदान करने के लिए सामर्थनुसार वजीफों और पारतोषिकों का चलन शुरू हुआ। नाम लेना उचित न होगा, लेकिन भारत वर्ष का बच्चा बच्चा जानता है कि तमाम ऐसी विभूतियां आर्थिक और सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर इन शिक्षण संस्थाओं, वजीफों और पारितोषिकों के कारण राष्ट्रीय ही नहीं अंतररार्ष्ट्रीय पटल पर खूब चमकीं।</p>
<p>शिक्षक का पुत्र जब शिक्षक बनता है तो उसकी अभिलाषा यही होती है कि कोई भी शिक्षा से वंचित न रहने पाए। जो सक्षम नहीं हैं उनकी आर्थिक मदद की जा सके और जो काबिल हैं उन्हें पुरस्कृत कर सम्मानित मंच दिया जा सके।</p>
<p>खेती किसानी पर निर्भर परिवार के बच्चों के लिए 60-70 के दशक में उच्च शिक्षा किसी सपने से कम न थी। रजनीश चंद्र अग्निहोत्री ने खुद के बूते न सिर्फ अपने इस सपने को पूरा किया बल्कि, वर्ष 1970 में कानपुर यूनिवर्सिटी से एमएससी जुलॉजी में टॉप कर गोल्डमैडेल भी हासिल किया। विज्ञान के क्षेत्र में कुछ कर दिखाने के सुनहरे अवसर अब उनका दरवाजा खटखटा रहे थे, लेकिन रजनीश चंत्र अग्निहोत्री ने पद, पैसा और सम्मान तीनों को परे धकेल शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प लिया। उन्होंने अवसरों से वंचित भावी भविष्य को गढ़ने के लिए शिक्षक बनने की राह चुनी। हालांकि उनके सहपाठी और शिक्षक इस फैसले से बेहद नाराज थे। बावजूद उसके रजनीश का फैसला मील का पत्थर साबित हुआ।</p>
<p>पहले शिक्षक और फिर प्रधानाचार्य के रूप में उन्होंने न सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों का सफलता पूर्वक निर्वहन किया, बल्कि यूपी के तराई के इलाके में लखीमपुर खीरी से लेकर हरदोई तक उनकी ख्याति फीस देने वाले मास्साब के तौर पर फैल गई। अपनी तनख्वाह से वह आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित समाज के बच्चों की न सिर्फ फीस भरते, बल्कि उनके लिए स्लेट-खड़िया से लेकर कलम-दवात और किताब कॉपियों तक का बंदोबस्त करते। परीक्षाओं के दिनों में तो उनका घर चलता फिरती धर्मशाला हो जाता। दर्जनों बच्चे उनके घर में ही डेरा डाले रहते।</p>
<p>रजनीश चंद्र अग्निहोत्री ने सिर्फ सामाजिक सरोकारों को ही जीवंत नहीं किया, बल्कि अपने परिवार को भी सरोकार और संस्कारों से भर दिया। जिस दौर में महिला शिक्षा अकल्पनीय लगने लगी थी खास तौर पर ग्रामीण अंचल में उन्होंने अपनी पत्नी बिंदेश्वरी अग्निहोत्री को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया। बिंदेश्वरी के सिर पर सिर्फ उनके तीन बच्चों महेंद्र, सुबोध और अनूप की ही जिम्मेदारी न थी, उनके पति की जगाई शिक्षा की अलख के कारण उनका घर बच्चों से हमेशा भरा रहता। जिनके लालन-पालन के साथ-साथ पठन-पाठन का आधारभूत कार्य भी वही संभालती। बावजूद इसके उन्होंने हिंदी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा हासिल करने में सफलता पाई।</p>
<p>उच्च शिक्षित और समाज को समर्पित माता-पिता के सेवा कर्मों का फल था जो रजनीश और बिंदेश्वरी के तीनों बच्चों ने न सिर्फ उच्च शिक्षा प्राप्त की, बल्कि पिता की राह पर चलते हुए शिक्षा क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित की। उनके बड़े पुत्र डॉ. महेंद्र अग्निहोत्री लखनऊ विश्वविद्यालय में फिजिक्स के प्रोफेसर हैं। वहीं मंझले पुत्र डॉ. सुबोध अग्निहोत्री राजस्थान के इकलौते मुक्त विश्वविद्यालय वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा में पत्रकारिता विभाग के निदेशक एवं प्रोफेसर हैं। प्रोफेसर सुबोध ने शिक्षण क्षेत्र में ही नहीं पत्रकारिता में भी अपना कलम का लोहा मनवाया है। वह बीबीसी के बेस्ट यंग रिपोर्टर जैसे अवार्डों से नवाजे जा चुके हैं। जबकि छोटे बेटे अनूप अग्निहोत्री दिल्ली की एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।</p>
<p><strong>जहां चाह, वहां राह</strong><br />
वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (वीएमओयू) आने के बाद प्रोफेसर सुबोध अग्निहोत्री इस बात से खासे परेशान थे कि तमाम सुविधाएं होने के बावजूद विश्वविद्यालय में छात्र संख्या बेहद कम क्यों हैं? भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) के चेयरमैन और तत्कालीन कुलपति प्रो. विनय पाठक के समक्ष अपनी चिंता जाहिर की तो प्रो. पाठक इस समस्या के समाधान के लिए कई नवाचारों पर विमर्श करने लगे। वीएमओयू में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए प्रो. पाठक ने दाखिला प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। प्रो. विनय पाठक और प्रो. सुबोध अग्निहोत्री, डॉ. पातांजलि मिश्र, एसबी सिंह और सौरभ पांडे के साथ-साथ उनकी पूरी टीम ने सबसे पहले पूरे राजस्थान में बच्चों को घर बैठे आसान तरीके से दाखिला देने का रास्ता निकाला। इसके बाद पाठ्य सामग्री को डिजिटलाइज करने और परीक्षा परिणामों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए नए पदक दिए जाने की शुरुआत की।</p>
<p><strong>पुरखों को कर दिया “अमर”</strong><br />
प्रो. विनय पाठक की प्रेरणा और मार्गदर्शन ने प्रो. सुबोध को एक नई राह दिखाई। ऐसी राह जिस पर चल कर उन्होंने अपने पुरखों को हमेशा के लिए अमर कर दिया। दरअसल हुआ यह कि प्रो. पाठक ने मेधावी विद्यार्थियों को पुरुस्कृत करने की जो योजना शुरू की वह आर्थिक भंवर में फंसती दिखाई दी। दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्रों को सम्मानित करने के लिए विशिष्ट पदक दिए जाने थे। एक बार शुरू हुआ यह नवाचार आगे चलकर कहीं बंद न हो जाए इसलिए एक लाख रुपए प्रति पदक विश्वविद्यालय के विशेष खाते में जमा करवाया जाना था। जिसके ब्याज से हर वर्ष पदक एवं प्रमाण पत्र का खर्चा उठाया जाता।</p>
<p>मामला फंसता देख प्रो. सुबोध अग्निहोत्री ने एक नहीं बल्कि दीक्षांत समारोह में दो विशिष्ट पदक दिए जाने की राह बना दी। रजनीश और बिंदेश्वरी के पुत्रों प्रोफेसर महेंद्र, प्रोफेसर सुबोध और अनूप अग्निहोत्री ने तय किया कि उनकी दिवंगत माताजी स्वर्गीय श्री बिंदेश्वरी अग्निहोत्री के नाम से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म ( पत्रकारिता में स्नातकोत्तर) के टॉपर को विशिष्ट पदक प्रदान किया जाएगा। जिसका समस्त खर्च वह लोग उठाएंगे। आनन-फानन मे एक-सवा लाख रुपए जमा कर दिए गए।</p>
<p>सुबोध अग्निहोत्री यहीं न रुके। जब उनके विषय में स्नातकोत्तर स्तर पर अव्वल आने वाले विद्यार्थी को कुलपति और कुलाधिपति के हाथों से विशिष्ट मैडेल पहनाया जाएगा तो फिर स्नातक के टॉपर को क्यों नहीं&#8230;? इसी संकल्प के साथ उन्होंने अपने मौसेरे भाई और अंतरराष्ट्रीय दवा कारोबारी अश्विनी त्रिपाठी की रजामंदी लेकर अपने मौसाजी की स्मृति में बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (पत्रकारिता में स्नातक) के टॉपर के लिए स्वर्गीय करुणा शंकर त्रिपाठी विशिष्ट पदक की शुरुआत की करवाई। दरअसल अश्विनी भी अपनी मौसी पास रहकर पढ़े बढ़े हैं। तो भाइयों और परिवार का यह प्रेम और लगाव यहां भी साथ हो लिया।</p>
<p><strong>ऐतिहासिक साबित हुआ कदम</strong><br />
प्रो. विनय पाठक की इच्छा शक्ति का ही परिणाम था जो वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में मेधावी विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए ऐसे ऐतिहासिक कदम उठाए जा सके। वीएमओयू पत्रकारिता विभाग द्वारा वर्ष 2014 में एमजे और बीजे के टॉपर विद्यार्थियों के लिए पुरस्कार योजना की शुरुआत हुई। हालांकि साल 2019 के पाद बाद से एमजे के लिए दिए जाने वाले मेडल तकनीकी कारणों से नहीं दिया जा रहा है क्योंकि कोर्स स्थगीत चल रहा है। जबकि बीजे का मेडल लगातार दिया जा रहा है। इन पदकों से पत्रकारिता के विद्यार्थियों को नई पहचान और प्रेरणा मिल रही है। इन दोनों मेडल के लिए विवि में एक-एक लाख एक हज़ार रुपए की धनराशि की एफडी करवाई गई थी जिसके ब्याज से पदक तैयार किए जाते हैं। इस नावाचार का नतीजा यह निकला कि न सिर्फ विश्वविद्यालय में छात्र संख्या बढ़ी बल्कि राजस्थान ही नहीं देश भर से विद्यार्थी दाखिला लेने आने लगे। देश का शायद ही कोई ऐसा विश्वविद्यालय या संस्थान होगा जिसमें पत्रकारिता का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता हो और वहां वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में पढ़ा हुआ छात्र या छात्रा शिक्षक न हो।</p>
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		<item>
		<title>युवाओं को स्टार्टअप के लिए तैयार करे राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय: राज्यपाल</title>
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		<pubDate>Thu, 30 Oct 2025 02:48:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर का किया लोकार्पण, रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने पर दिया जोर  फैशन डिजाइनिंग, फाइन आर्ट्स, विजुअल इफेक्ट्स जैसे गैर इंजीनियरिंग विषय शुरू करने पर जताई खुशी  कोटा। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं की रूचि स्वयं का उद्योग स्थापित करने में रहती है। युवाओं की इस रूचि को &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/governor-inaugurates-rtu-student-activity-center/12975/">युवाओं को स्टार्टअप के लिए तैयार करे राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय: राज्यपाल</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर का किया लोकार्पण, रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने पर दिया जोर </strong></li>
<li><strong>फैशन डिजाइनिंग, फाइन आर्ट्स, विजुअल इफेक्ट्स जैसे गैर इंजीनियरिंग विषय शुरू करने पर जताई खुशी </strong></li>
</ul>
<div>कोटा। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं की रूचि स्वयं का उद्योग स्थापित करने में रहती है। युवाओं की इस रूचि को ध्यान में रखकर राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा अपने विद्यार्थियों को उद्यमी बनाने की दिशा में कार्य करते हुए नवाचारों को बढ़ावा दे। उन्होंने कहा कि यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इस तरह से तैयार किया जाए कि यहां से निकलकर वे अपना स्टार्टअप शुरू कर सकें और नौकरी ढूंढने की बजाय रोजगार देने वाले बनें।</div>
<div></div>
<div>बागडे बुधवार को राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति एवं विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता सहित अन्य शिक्षकों के साथ संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय से पिछले कई वर्षों में ऐसे छात्र निकले होंगे जिन्होंने अपना उद्योग स्थापित किया होगा या किसी बड़ी कम्पनी में अच्छे पद पर होंगे। विश्वविद्यालय द्वारा ऐसे होनहार विद्यार्थियों का उदाहरण अन्य विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत कर उन्हें उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया जाए।</div>
<div></div>
<div>विश्वविद्यालय में अनुसंधान गतिविधियों पर चर्चा के दौरान राज्यपाल ने कहा कि शोध करने वाले छात्र अपनी पीएचडी का विषय ऐसा चुने जो समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी हो। शोध के लिए चुना गया विषय उनके जीवन में बदलाव लाए ताकि शोध में व्यतीत किया गया समय फलदाई हो। उन्होंने विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप फैशन डिजाइनिंग, फाइन आर्ट्स, विजुअल इफेक्ट्स जैसे गैर इंजीनियरिंग कार्यक्रम शुरू करने की सराहना की।</div>
<div></div>
<div><img decoding="async" class="size-full wp-image-12978 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2025/10/rtu.jpg" alt="" width="700" height="421" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2025/10/rtu.jpg 700w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2025/10/rtu-300x180.jpg 300w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /></div>
<div></div>
<div><strong>स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर का किया लोकार्पण</strong></div>
<div>राज्यपाल ने राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा में नवनिर्मित स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि प्रैक्टिकल ज्ञान के अभाव में डिग्री का कोई उपयोग नहीं है। इसलिए, विद्यार्थी केवल पाठ्यपुस्तक पढ़कर डिग्री हासिल करने की अपेक्षा व्यावहारिक एवं प्रैक्टिकल ज्ञान प्राप्त करने पर अधिक ध्यान दें। उन्होंने कहा कि इस सेंटर के माध्यम से विद्यार्थी के कला-कौशल में इतना निखार लाया जाए कि वे विद्यार्थी बाहर जाकर राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय की अलग पहचान कायम करें। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि विद्यार्थियों में विशेष स्किल को निखारने में यह सेंटर उपयोगी साबित होगा। उन्होंने नवनिर्मित सेंटर के उद्घाटन के लिए सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।</div>
<div></div>
<div>अधिकारियों ने शैक्षणिक उत्कृष्टता में सुधार के लिए उठाए गए कदमों, विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं संबद्ध महाविद्यालयों में अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों, विभिन्न संस्थानों के साथ किए गए एमओयू, विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों, नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की दिशा में उठाए गए कदमों, उद्यमिता कौशल में सुधार एवं रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों आदि के बारे में जानकारी भी दी। इस अवसर पर राज्यपाल के सलाहकार उच्च शिक्षा प्रो. कैलाश सोडाणी, ओएसडी उच्च शिक्षा डॉ. कुलदीप मिश्रा, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी, कुलसचिव श्रीमती भावना शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिष्ठाता उपस्थित रहे।</div>
<div></div>
<div><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-12976 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2025/10/crf.jpg" alt="" width="700" height="595" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2025/10/crf.jpg 700w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2025/10/crf-300x255.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></div>
<div></div>
<div><strong>रिवर फ्रंट भी निहारा   </strong><br />
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने चंबल रिवर फ्रंट का भ्रमण कर इसका सौंदर्य निहारा। उन्होंने नयापुरा घाट से प्रवेश करते हुए सिंह घाट, साहित्य घाट उत्सव घाट, चंबल माता घाट, मुकुट महल सहित विभिन्न घाटों और वहां बनी कलाकृतियां का अवलोकन किया और इसके सौंदर्य को अपने मोबाइल में भी कैद किया। विभिन्न लोक कलाकारों द्वारा दी गई प्रस्तुतियों और फव्वारों का सौंदर्य भी निहारा। इस अवसर पर जिला कलेक्टर एवं कोटा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  पियूष समारिया, पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम, प्राधिकरण आयुक्त ममता तिवारी, सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</div>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/governor-inaugurates-rtu-student-activity-center/12975/">युवाओं को स्टार्टअप के लिए तैयार करे राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय: राज्यपाल</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>सुयोग्य, क्षमतावान युवा तैयार करें विश्वविद्यालय-राज्यपाल</title>
		<link>https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/governor-haribhau-bagde-said-that-universities-should-prepare-capable-and-competent-youth/12972/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=governor-haribhau-bagde-said-that-universities-should-prepare-capable-and-competent-youth</link>
		
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		<pubDate>Thu, 30 Oct 2025 02:20:53 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[VMOU]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में शिक्षकों के साथ राज्यपाल ने किया संवाद  समय से परीक्षा परिणाम घोषित करने और नए पाठ्यक्रम शुरू करने का दिया निर्देश  कोटा। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति और नवाचारों के माध्यम से सुयोग्य और क्षमतावान युवा तैयार करने में जुटें। विद्यार्थियों को &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/governor-haribhau-bagde-said-that-universities-should-prepare-capable-and-competent-youth/12972/">सुयोग्य, क्षमतावान युवा तैयार करें विश्वविद्यालय-राज्यपाल</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में शिक्षकों के साथ राज्यपाल ने किया संवाद </strong></li>
<li><strong>समय से परीक्षा परिणाम घोषित करने और नए पाठ्यक्रम शुरू करने का दिया निर्देश </strong></li>
</ul>
<p>कोटा। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति और नवाचारों के माध्यम से सुयोग्य और क्षमतावान युवा तैयार करने में जुटें। विद्यार्थियों को जीवन कौशलों में दक्ष बनाया जाए ताकि वे समाज और राष्ट्रहित में अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें।</p>
<p>राज्यपाल बुधवार को वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलपति एवं विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता शिक्षकों के साथ संवाद कर रहे थे। संवाद के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों की विस्तार से जानकारी ली और निर्देश दिए कि परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद जल्द से जल्द दीक्षांत समारोह आयोजन कर डिग्रियों का वितरण किया जाए ताकि विद्यार्थियों को कॅरियर निर्माण में किसी तरह की बाधा ना आए। विश्वविद्यालय के शैक्षिक उन्नयन एवं शैक्षणेतर गतिविधियों के संबंध में उन्होंने मार्गदर्शन किया।</p>
<p><strong>बचपन को गढने में भी हो भागीदारी</strong><br />
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों में विविध विकास कार्यों के साथ-साथ वहां की विद्यालयी शिक्षण व्यवस्था में भी भागीदार बना जाए। ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ज्ञान और समृद्ध अनुभव मिलेंगे तो उनकी नींव मजबूत होगी, क्षमताओं का विकास होगा। उच्च अध्ययन स्तर तक आते-आते उनके बौद्धिक विकास के आयाम विशिष्ट ही होंगे। वे जिस क्षेत्र में जाएंगे वहां अपनी प्रतिभा के बल पर सर्वश्रेष्ठ कर पाएंगे। इस तरह विश्वविद्यालय श्रेष्ठ एवं सुयोग्य नागरिकों का निर्माण कर पाएंगे। विश्वविद्यालय होनहार विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों के अनुभवों से भी लाभान्वित करें। साथ ही अध्यनरत विद्यार्थियों को भी सेमिनार इत्यादि शैक्षणिक और शैक्षणेतर गतिविधियों में अवसर दिए जाएं जिनसे उनकी प्रतिभा का निखार हो सके।</p>
<p><strong>प्रत्येक विद्यार्थी रोपे एक पौधा, करे सार -संभाल</strong><br />
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को प्रवेश के समय परिसर में पौधारोपण के लिए प्रेरित किया जाए और वह अध्ययनकाल के दौरान उसकी सार-संभाल भी करे जिससे एक अपनत्व भाव विश्वविद्यालय के प्रति पैदा हो सके और इस छोटे से कदम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी भागीदारी हो सकेगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध पर्याप्त खाली जमीन का उपयोग रुचि, कौशल विकास की गतिविधियों के लिए किया जाए। इससे शारीरिक और बौद्धिक क्षमता का विकास हो सकेगा।</p>
<p><strong>समाज को दिशा देने वाला हो शोध कार्य</strong><br />
विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों पर राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि शोध करने वाले छात्र पीएचडी के लिए ऐसे सार्थक विषय चुनेॅ जो समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी हो। उनका शोध कार्य समाज और राष्ट्र के लिए ज्ञान और प्रेरणा का स्रोत बने।<br />
उन्होंने विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप किए गए प्रावधानों, नवाचारों, शैक्षणिक उत्कृष्टता व उन्नयन के लिए उठाए गए कदमों, संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों, संसाधनों वित्तीय स्थिति इत्यादि की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा निर्देश दिए।</p>
<p>बैठक में राज्यपाल के सलाहकार उच्च शिक्षा प्रो. कैलाश सोडाणी, कुलगुरु प्रो. बी एल वर्मा, ओएसडी उच्च शिक्षा डॉ कुलदीप मिश्रा, प्रोफेसर सुबोध कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिष्ठाता उपस्थित रहे।विश्वविद्यालय के एकादमिक निदेशक एवं नियंत्रक प्रो. बी अरुण कुमार ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से विस्तार से विविध जानकारियां साझा कीं। आभार प्रदर्शन नियंत्रक वित्त महेश चंद मीणा ने किया। कार्यक्रम संचालन प्रो. क्षमता चौधरी ने किया।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/governor-haribhau-bagde-said-that-universities-should-prepare-capable-and-competent-youth/12972/">सुयोग्य, क्षमतावान युवा तैयार करें विश्वविद्यालय-राज्यपाल</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>VMOU में होगी अब AI और साइबर सिक्योरिटी की पढ़ाई</title>
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		<pubDate>Thu, 25 Sep 2025 11:08:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>कुलगुरू प्रोफेसर वर्मा ने विद्यापीठों के निदेशकों की बैठक कर दिए दिशा-निर्देश विदेशी भाषाएं भी पढ़ाई जाएंगी, बड़े संस्थानों से होगा एमओयू कोटा। वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर बीएल वर्मा ने गत दिवस समस्त विद्यापीठों के निदेशकों के साथ एक बैठक कर आगामी अकादमिक सत्र के लिए योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए दिशा &#8230;</p>
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<li><strong>कुलगुरू प्रोफेसर वर्मा ने विद्यापीठों के निदेशकों की बैठक कर दिए दिशा-निर्देश</strong></li>
<li>
<h6><strong>विदेशी भाषाएं भी पढ़ाई जाएंगी, बड़े संस्थानों से होगा एमओयू</strong></h6>
</li>
</ul>
<p><strong>कोटा</strong>। वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर बीएल वर्मा ने गत दिवस समस्त विद्यापीठों के निदेशकों के साथ एक बैठक कर आगामी अकादमिक सत्र के लिए योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए दिशा निर्देश जारी किए।</p>
<p>प्रोफेसर वर्मा ने बताया कि वीएमओयू में आने वाले समय में वोकेशनल पाठ्यक्रमों की शुरूआत की जाएगी जिसके आधार पर राज्य के युवाओं को रोजगार मिल सकेंगे। इसके अलावा उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के अन्य उत्कृष्ट संस्थानों के साथ एमओयू करेगा जिससे अकादमिक विषयों पर ज्ञान के आदान-प्रदान में सहयोग मिलेगा।</p>
<p>प्रोफेसर वर्मा ने बताया कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय फ्रेंच और स्पेनिश भाषा में पाठ्यक्रम आरंभ करेगा जिससे विदेशी सैलानियों के आने पर यहां के युवाओं को गाइड बनने का अच्छा अवसर मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि होटल और टूरिज्म प्रबंध से जुड़े कार्यक्रमों को भी तैयार किया जाएगा जिससे युवा शक्ति को नौकरी के जल्द अवसर प्राप्त हो सकेंगे। सभी विद्यापीठ सेमिनारों का भी आयोजन करेंगी जिससे बौद्धिक ज्ञान के आदान-प्रदान और विमर्श को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>विश्वविद्यालय अपने यहां प्लेसमेंट सेल भी स्थापित करेगा साथ ही पूर्व विद्यार्थियों यानी एलुमिनाई से मदद के लिए भी द्वार खोले जा रहे हैं। बंद पड़े पीजी डिप्लोमा कार्यक्रमों में जरूरी पाठ्यक्रमों को डिप्लोमा में परिवर्तित कर संचालित किया जाएगा। बकौल प्रोफेसर वर्मा, विश्वविद्यालय एआई और साइबर सुरक्षा के अलावा अकाउंटिंग और ऑडिट में डिप्लोमा जैसे नए कार्यक्रम तैयार करने की दिशा में कार्य कर रहा है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अपना न्यूजलेटर भी ऑनलाइन प्रकाशित करेगा जिससे विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की गतिविधियों की सूचना मिलती रहेगी। इसके अलावा संकाय सदस्यों की कमी को भी जल्द पूरा कराने के प्रयासों पर जोर दिया जाएगा। कुलगुरू प्रोफेसर वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार सभी संकाय सदस्य अपने पाठ्यक्रमों को नवीनीकृत करें।</p>
<p>बैठक में निदेशक संकाय प्रोफेसर बी अरूण कुमार, प्रो सुबोध कुमार, प्रो क्षमता चौधरी, प्रो अनुराधा दुबे, प्रो कीर्ति सिंह, प्रो अनुरोध गोधा आदि मौजूद रहे।</p>
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		<title>VMOU पर “भुतहा शिक्षकों” का साया</title>
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		<pubDate>Tue, 20 Sep 2022 03:51:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p> बीएड की शुरुआत से ही खाली पड़ा है प्रोफेसर का पद, दो शिक्षकों के भरोसे चल रहा विभाग TISMedia@Kota वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) के शिक्षा संकाय (School of Education) में दाखिला लेने वाले छात्रों पर सालों से भुतहा शिक्षकों (Ghost Faculty) का साया मंडरा रहा है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (National Council for Teacher &#8230;</p>
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<li><span style="color: #ff0000;"><strong> बीएड की शुरुआत से ही खाली पड़ा है प्रोफेसर का पद, दो शिक्षकों के भरोसे चल रहा विभाग</strong> </span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) के शिक्षा संकाय (School of Education) में दाखिला लेने वाले छात्रों पर सालों से भुतहा शिक्षकों (Ghost Faculty) का साया मंडरा रहा है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (National Council for Teacher Education) के नियमों के मुताबिक बीएड की पढ़ाई कराने के लिए किसी भी संकाय में कम से कम 7 शिक्षक होना अनिवार्य है, लेकिन यहां न सिर्फ तीन शिक्षकों के बूते परिषद की मान्यता में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है, बल्कि हर साल 1000 विद्यार्थियों को पढ़ाने के नाम पर उनके भविष्य के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/kota-news/education-kota-news/students-protested-in-vmou-kota/12213/"> अव्यवस्थाओं से जूझता वर्धमान महावीर खुला विवि, छात्रों ने किया प्रदर्शन</a></strong></p>
<p>वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (वीएमओयू) की सतत शिक्षा विद्यापीठ ने साल 2000 में बीएड पाठ्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके लिए एनसीटीई ने 21 अगस्त 2000 को सशर्त मान्यता भी प्रदान कर दी। शर्तों के मुताबिक मान्यता मिलने के बाद 2 साल के अंदर विश्वविद्यालय शिक्षक भर्ती से लेकर छात्रों को दी जानने वाली सभी सुविधाएं जुटा लेगा। लेकिन, दो दशक बीत जाने के बाद भी अनिवार्य शर्तों को भी पूरा नहीं किया जा सका।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/rajasthan-gangster-sandeep-vishnoi-shot-dead-in-nagaur-court/12216/">Rajasthan: गैंगस्टर संदीप विश्नोई को कोर्ट के बाहर दिनदहाड़े गोलियों से भूना, मौके पर ही मौत</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">एक सुनहरा दौर</span></strong><br />
साल 2013 में प्रो. विनय पाठक ने जब वीएमओयू के कुलपति की जिम्मेदारी संभाली तो उन्होंने न सिर्फ विश्वविद्यालय की चरमरा चुकी व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया बल्कि, युवाओं को रोजगार देने वाले पाठ्यक्रमों को खोलने और उन्हें ज्यादा से ज्यादा छात्रों तक पहुंचाने की व्यापक शुरुआत की। नतीजन, बीएड और एमएड पाठ्यक्रमों की जरूरत को देखते हुए उन्होंने सतत शिक्षा विद्यापीठ का विस्तार करते हुए शिक्षा विद्यापीठ की अलग से स्थापना की। इतना ही नहीं एनसीटीई के नियमों की शर्तों को पूरा करने के लिए स्कूल ऑफ एजुकेशन में शिक्षकों एवं सहयोगी स्टाफ की भर्ती करने के साथ ही छात्रों के लिए जरूरी संसाधनों जैसे वीडियो-ऑडियो लेक्चर और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रेक्चर की भी स्थापना की।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/pushkar-mla-reached-rajasthan-vidhan-sabha-with-cow/12209/">सियासतः गाय लेकर विधानसभा पहुंचे विधायक, रस्सी छुड़ाकर भागी</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">विद्यापीठ बन गई, लेकिन शिक्षक नहीं जुटा सके </span></strong><br />
प्रो. पाठक के कुलपति रहने के दौरान ही शिक्षा विद्यापीठ की प्रोफेसर दामीना चौधरी सेवानिवृत हो गईं, लेकिन प्रो. पाठक के प्रयासों से उन्होंने छात्रहित में पे माइनस पैंशन पर काम करना जारी रखा। इसी दौरान प्रो. पाठक ने प्रोफेसर के खाली पद के लिए नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू कर दी, लेकिन उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद न सिर्फ प्रो. दामीना चौधरी ने विवि छोड़ दिया, बल्कि शिक्षक नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई। इसी दौरान एसोसिएट प्रोफेसर और विद्यापीठ के निदेशक डॉ. रजनी रंजन सिंह की नियुक्ति शकुंतला देवी विशेषजन विश्वविद्यालय लखनऊ में हो गई और यह पद भी खाली हो गया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/tis-utility/religion/shardiya-navratri-2022-shubh-muhurat-and-puja-vidhi/12194/">Navratri 2022: इस दिन से शुरू हो रही है नवरात्रि, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजन विधि</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">सिर्फ तीन शिक्षकों के हवाले पूरी विद्यापीठ</span></strong><br />
एनसीटीई के नियमों के मुताबिक वीएमओयू में बीएड पाठ्यक्रम चलाने के लिए शिक्षा विद्यापीठ में कम से कम 7 शिक्षकों, जिनमें से एक प्रोफेसर, दो एसोसिएट और चार असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति अनिवार्य है। लेकिन, फिलहाल हालत यह है कि यहां सिर्फ तीन शिक्षक ही कार्यरत हैं। जिनमें से एक दो साल के लिए चाइल्ड केयर लीव पर हैं। विद्यापीठ में एसोसिएट प्रोफेसर के एक पद पर डॉ. अनिल जैन और असिस्टेंट प्रोफेसर के दो पदों पर डॉ. कीर्ति सिंह और डॉ. अखिलेश शर्मा नियुक्त हैं। डॉ. जैन विद्यापीठ के निदेशक हैं। वहीं एक अन्य असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पातांजलि मिश्र की नियुक्ति हाल ही में कानपुर विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर होने के बाद यह पद भी खाली हो गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/kota-news/vmou-kota-students-protested-in-vardhman-mahaveer-open-university-kota/11992/"> VMOU: अराजकता के खिलाफ छात्रों ने बोला हल्ला, कुलपति को घेरा</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">मान्यता पर मंडराया खतरा </span></strong><br />
एनसीटीई के नियमों की पालना न होने के कारण अब वीएमओयू के बीएड पाठ्यक्रम की मान्यता खत्म होने का खतरा भी मंडराने लगा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2022-24 में बीएड दाखिलों के लिए विद्यार्थियों से न सिर्फ आवेदन भरवा लिए, बल्कि प्रवेश परीक्षा आयोजित कर उसके परिणाम तक जारी कर दिए गए। इतना ही नहीं दाखिले की प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने के लिए प्रथम चरण के लिए चयनित अभ्यार्थियों की 20 सितंबर 2022 से काउंसलिंग का नोटिस भी निकाल दिया गया है। काउंसलिगं के बाद चयनित विद्यार्थियों को उसी दिन फीस भी जमा करनी होगी। जो उनके लिए मुसीबत का सबब बन सकता है क्योंकि असल हालात यह हैं कि शिक्षकों की न्यूनतम संख्या भी पूरी न होने के कारण अब परिषद पाठ्यक्रम की मान्यता वापस ले सकती है या फिर शिक्षकों की भर्ती होने तक दाखिलों पर रोक लगा सकती है। पाठ्यक्रम की मान्यता को लेकर संकट और भी इसलिए बढ़ गया है क्योंकि कुलपति प्रो. रतन लाल गोदारा का कार्यकाल अगस्त महीने में खत्म हो चुका है और नए कुलपति की नियुक्ति न होने तक फिलहाल विश्वविद्यालय प्रभारी कुलपति के भरोसे चल रहा ऐसे में उनके लिए शिक्षा विद्यापीठ में शिक्षकों की नई नियुक्ति करना तो दूर की बात खाली पदों को भरने के लिए विज्ञापन तक निकालना असंभव हो जाएगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/diwali-2022-crackers-ban-in-india/12187/">Diwali 2022: सूनी रहेगी दिवाली, नहीं होगी आतिशबाजी</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">10 हजार छात्रों का भविष्य दांव पर </span></strong><br />
वीएमओयू के बीएड पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को एक हजार रुपए की फीस देनी पड़ती है और एक सत्र में 10 हजार से ज्यादा छात्र आवेदन करते हैं। ऐसे में मान्यता का संकट खड़ा होता है तो न सिर्फ छात्रों का भविष्य अधर में लटक जाएगा, बल्कि उनकी फीस भी विवि में अटक जाएगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/education-kota-news/vmou-vice-chancellor-prof-rl-godara-accused-of-irregularities-governor-sets-up-high-level-inquiry/11284/">VMOU: कुलपति पर घोटाले की आंच, राज्यपाल ने बिठाई उच्च स्तरीय जांच</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">भुतहा शिक्षक या फर्जीवाड़ा </span></strong><br />
शिक्षा संकाय में शिक्षकों के आधे से ज्यादा पद खाली होने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन मान्यता की खानपूर्ति करने के लिए एनसीटीई को भेजे जाने वाली रिपोर्ट में इन्हें भरा हुआ दिखाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि सालों से खाली पड़े पदों पर आखिर काम कौन कर रहा है और वो लोग कौन हैं जो छात्रों को पढ़ा रहे हैं? विश्वविद्यालय सूत्रों के मुताबिक वीएमओयू प्रशासन इसके लिए घोस्ट फैकल्टी का सहारा ले रहा है। नियमों की खानपूर्ति के लिए प्रशासन ने विवि परिसर में ही भुतहा शिक्षक तैयार कर रखे हैं। यह वह शिक्षक हैं जिनकी नियुक्तियां तो दूसरे विभागों में की गई हैं, लेकिन उन्होंने बीएड की भी डिग्री हासिल कर रखी है। उनके नाम पर ही विवि हर साल सैकड़ों छात्रों के भविष्य के साथ न सिर्फ खिलवाड़ कर रहा है, बल्कि कागजी कार्यवाही पूरी करने के लिए इन लोगों को शिक्षा संकाय में भी कार्यरत दिखा दिया जाता है। जबकि असलियत यह है कि बीएड के किसी भी शैक्षणिक कार्यक्रम की बात तो दूर अन्य गतिविधियों में भी इनकी मौजूदगी नहीं दिखाई पड़ती। क्योंकि यह खुद स्टाफ की कमी से जूझ रहे अपने विभागों में ओवर बडन हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/228-lakhs-rupees-disappeared-from-the-financial-accounts-of-vmou/11301/">VMOU: खजाने में लगी 228.91 लाख की सेंध, न खजाना मिल रहा है न खजांची</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>एनसीईटी की आंख में झोंकी धूल </strong></span><br />
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीएड पाठ्यक्रम की मान्यता बचाए रखने के लिए अन्य विभागों में कार्यरत शिक्षकों को शिक्षा विद्यापीठ में दिखा रखा है। सूत्रों के मुताबिक अर्थशास्त्र के शिक्षक डॉ &#8211; सुरेंद्र कुलश्रेष्ठ, प्राणी शास्त्र के संदीप हुड्डा, अंग्रेजी विभाग की डॉ क्षमता चौधरी और गणित के शिक्षक रवि गुप्ता को विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षा विद्यापीठ में दिखाकर एनसीईआरटी से मान्यता हासिल की है। ऐसा करके वीएमओयू प्रशासन ने न सिर्फ छात्रों की आंख में धूल झोंकी है, बल्कि बीएड की मान्यता देने वाली एजेंसी एनसीटीई के साथ भी फर्जीवाड़ा किया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/vmou-personal-data-of-30-lakh-students-suspected-to-be-leaked/12008/">VMOU: 30 लाख छात्रों का पर्सनल डाटा बेचने की साजिश, फोन, आधार और बैंक डिटेल भी शामिल</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>उधारी से चला रहे काम </strong></span><br />
वीएमओयू शिक्षा विद्यापीठ के निदेशक डॉ. अनिल कुमार जैन से जब इस बाबत बात की गई तो उन्होंने बताया कि विभाग में अभी चार फैकल्टी हैं। एक फैकल्टी कानपुर यूनिवर्सिटी चली गई हैं, लेकिन जब तक उनका कंफरमेशन नहीं आ जाएगा तब तक उन्हें वीएमओयू में ही कार्यरत माना जाएगा। 3 पद खाली हैं। नया कुलपति आते ही भर्ती करवाई जाएगी। एनसीटीई से बीएड की मान्यता के लिए 7 शिक्षक होना जरूरी है। फिलहाल विश्वविद्यालय में कार्यरत शिक्षकों के जरिए बीएड डिग्री पाठ्यक्रम का संचालन किया जा रहा है।</p>
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		<title>अव्यवस्थाओं से जूझता वर्धमान महावीर खुला विवि, छात्रों ने किया प्रदर्शन</title>
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		<pubDate>Mon, 19 Sep 2022 09:42:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) में व्याप्त अराजकताओं के खिलाफ पूरे प्रदेश भर से आए छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया कि न तो परीक्षाएं समय पर हो रही हैं और न ही परीक्षा परिणाम जारी किए जा रहे हैं। जिन विद्यार्थियों की परीक्षाएं पूरी हो &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/education-kota-news/students-protested-in-vmou-kota/12213/">अव्यवस्थाओं से जूझता वर्धमान महावीर खुला विवि, छात्रों ने किया प्रदर्शन</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong> </span>वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) में व्याप्त अराजकताओं के खिलाफ पूरे प्रदेश भर से आए छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया कि न तो परीक्षाएं समय पर हो रही हैं और न ही परीक्षा परिणाम जारी किए जा रहे हैं। जिन विद्यार्थियों की परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं उनके असाइनमेंट तक के नंबर नहीं जुड़ पा रहे। जिसके चलते हजारों छात्र भर्तियों में शामिल होने से वंचित हो चुके हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/pushkar-mla-reached-rajasthan-vidhan-sabha-with-cow/12209/">सियासतः गाय लेकर विधानसभा पहुंचे विधायक, रस्सी छुड़ाकर भागी</a></strong></p>
<p>परीक्षाओं और उनके परिणाम घोषित किए जाने को लेकर वीएमएयू में बीते एक साल से अराजकता का माहौल व्याप्त है। जिससे आजिज आकर बीते छह महीने में सोमवार को चौथी बार छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करना पड़ा। सोमवार को सुबह ही प्रदेश भर के छात्र कोटा में जुटे। छात्रों ने पहले विश्वविद्यालय परिसर के बाहर धरना दिया और फिर जब उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई तो प्रदर्शन करते हुए कुलपति कार्यालय तक जा पहुंचे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/man-dies-after-being-hit-by-train-in-kota/12206/">Kota ट्रेन की चपेट में आने से युवक की मौत, नहीं हो सकी पहचान  </a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>छात्रों के आरोप </strong></span><br />
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप था कि ना तो परीक्षाएं समय पर हो रही हैं ना ही परिणाम आ रहे हैं। विवि में साल में दो बार जून और दिसंबर मेे परीक्षाएं होती हैं लेकिन कोविड के कारण जून 2021 की परीक्षाएं जनवरी 2022 में हुई हैं, जबकि दिसंबर 2021 की परीक्षाएं भी छह महीने देरी से शुरू हुई। जिससे हर कोर्स की अवधि छह से आठ माह बढ़ गई है और छात्र अन्य विवि के छात्रों से पिछड़ते जा रहे हैं और और इन छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है । छात्रों ने कहा कि आगामी सभी भर्तियों को देखते हुए दिसम्बर 2021 सत्रांत और जून 2022 सत्रांत की परीक्षा समय पर आयोजित कर इनके परिणाम समय पर निकाले जाए, क्योंकि चयन बोर्ड का नियम है कि परीक्षा तिथि से पूर्व अभ्यर्थी की डिग्री पूरी हो जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के सत्रीय गृहकार्य जमा करवाने के बाद उनके अंक नहीं जोड़े जा रहे हैं इससे रिजल्ट अधूरा रह गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/radheshyam-meena-was-referred-from-jaipur-to-delhi/12198/">नयापुरा थाने में आत्मदाह करने वाले युवक की हालत गंभीर, जयपुर से दिल्ली किया रैफर</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">मूल्यांकन में गलतियों की भरमार</span></strong><br />
छात्रों के मुताबिक संत्राक परीक्षा के जो परिणाम जारी किए जा रहे हैं उसमें हजारों छात्रों की उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में त्रुटियां हैं और छात्र फिर से परिणाम जारी करने की मांग कर रहे हैं। आंतरिक मूल्यांकन को समय पर जमा करवाए जाने के बाद भी विवि उसे जमा नहीं होना बता रहा है। कई परीक्षाओं के परिणाम में शून्य अंक दिया जाना। समय पर स्टडी मैटेरियल नहीं मिल रहा। संभाग स्तरीय रीजनल सेंटर के जरिए समय पर सूचना नहीं मिल रही।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/tis-utility/religion/shardiya-navratri-2022-shubh-muhurat-and-puja-vidhi/12194/">Navratri 2022: इस दिन से शुरू हो रही है नवरात्रि, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजन विधि</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">यह भी गिनाई समस्याएं </span></strong><br />
विवि के सभी हेल्पलाइन नंबर और सभी रीजनल सेंटर के उपलब्ध हेल्पलाइन नंबर पर सम्पर्क नहीं होता। समय पर परीक्षा की सूचनाएं नहीं मिलना। रिवेल्यूएशन फॉर्म और डिफाल्टर फॉर्म की फीस अधिक है। इसके साथ ही जिन विद्यार्थियों ने मर्सी अपील की है उनकी जानकारी तक उन्हें नहीं मिल पा रही। कई विषयों में कैम्प आयोजन की अवधि 80 दिन की है, इसे कम करने की मांग छात्र कर रहे हैं क्योंकि जॉब वाले स्टूडेंट्स के लिए 80 दिन का अवकाश लेना संभव नहीं है। विवि की ओर से प्रायोगिक कैम्प मुख्यत संभाग मुख्यालयों पर आयोजित किए जाते हैं लेकिन राजस्थान के क्षेत्रफल को देखते हुए जिला स्तर पर इनका आयोजन किए जाने की मांग छात्र कर रहे हैं।</p>
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		<title>VMOU: राजभवन के आदेशों की कुलपति गोदारा ने की फिर अवहेलना, बनाईं मनमानी कमेटियां</title>
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		<pubDate>Fri, 17 Jun 2022 15:20:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>कार्यकाल के अंतिम दिनों में ले रहे नीतिगत फैसले, मनमानी जांच कमेटियां बनाने में जुटे कुलपति गोदारा राजभवन ने 1 फरवरी और 3 जून को पत्र भेजकर लगाई थी रोक, राजभवन के आदेशों को भी बताया धत्ता  TISMedia@Kota चौतरफा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आरएल गोदारा अब पूरी &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/vmou-vice-chancellor-r-l-godara-again-disobeyed-the-orders-of-raj-bhavan/12046/">VMOU: राजभवन के आदेशों की कुलपति गोदारा ने की फिर अवहेलना, बनाईं मनमानी कमेटियां</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>कार्यकाल के अंतिम दिनों में ले रहे नीतिगत फैसले, मनमानी जांच कमेटियां बनाने में जुटे कुलपति गोदारा</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>राजभवन ने 1 फरवरी और 3 जून को पत्र भेजकर लगाई थी रोक, राजभवन के आदेशों को भी बताया धत्ता </strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> चौतरफा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आरएल गोदारा अब पूरी मनमानी पर उतारू हैं। राजभवन के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अगर उनके गलत कामों का विरोध किया जाता है तो उसे बेइज्जत करते हैं और बाहरी व्यक्तियों से फाइलों का परीक्षण करावाकर उसे नोटिस देते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/highly-confidential-files-of-vmou-leaked-to-third-party/12044/">नाथी का बाड़ा: VMOU से चोरी हो रहीं अति गोपनीय पत्रावलियां, रोकने को रजिस्ट्रार ने निकाला आदेश</a></strong></p>
<p>शुक्रवार शाम को कुलपति गोदारा ने राजभवन द्वारा नीतिगत फैसले करने पर जो रोक लगाई गई थी, उस आदेश को एक बार फिर तार-तार कर डाला। कुलपति गोदारा ने एमपीडी विभाग में किताबों को छापने वाली कंपनी सरस्वती प्रेस मथुरा के बकाए के भुगतान के लिए 20 जनवरी 2022 को हुई प्रबंध मंडल की 100वीं बैठक में सूचित किया था कि एक आंतरिक कमेटी गठित कर भुगतान के मामले में तथ्यात्मक गणना व टिप्पणी को अगली प्रबंध मंडल की बैठक में विचार के लिए रखा जाएगा। इस बाबत कुलपति गोदारा ने प्रोफेसर यूसी सांखला की अध्यक्षता में एक भारी-भरकम 10 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। गौर करने वाली बात यह है कि बोर्ड की बैठक में आंतरिक स्तर पर कमेटी बनाने की बात कही गई थी, लेकिन इसमें तीन बाहरी सदस्यों को रखा गया। इनमें प्रोफेसर सांखला के अलावा संपत लाल सोनगरा और वीएमओयू एलुमिनाई एसोशिएसन के अध्यक्ष अरूण त्यागी को भी कुलपति गोदारा ने जबरन सदस्य बनाया। जबकि त्यागी विश्वविद्यालय के कर्मचारी नहीं हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/vmou-personal-data-of-30-lakh-students-suspected-to-be-leaked/12008/">VMOU: 30 लाख छात्रों का पर्सनल डाटा बेचने की साजिश, फोन, आधार और बैंक डिटेल भी शामिल</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>बैठक का मुद्दा ही बदल डाला</strong></span><br />
कमेटी की फरवरी से अब तक छह बैठकें आयोजित की गई थीं, लेकिन तथ्यात्मक गणना और टिप्पणी का काम छोड़कर बाकी सारा काम किया गया। 17 जून 2022 को विश्वविद्यालय में हुई इस कमेटी की बैठक में कुलपति के दबाव में बैठक का ‘टर्म आफ रिफरेंस’ ही बदल दिया गया। हालांकि मजे की बात यह रही कि कमेटी के पांच सदस्य प्रस्ताव के विरोध में थे और केवल चार सदस्य ही प्रस्ताव के पक्ष में थे। बाद में कमेटी अध्यक्ष ने घालमेल कर ‘‘टर्म आफ रिफरेंस’’ बदलने का निर्णय कर दिया और कुलपति गोदारा ने पूरी कमेटी के समेकित फैसले को दरकिनार कर कमेटी के अध्यक्ष प्रोफेसर सांखला के फैसले का एकतरफा अनुमोदन भी कर दिया। इस फैसले से विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों में काफी रोष व्याप्त है। गौरतलब हो कि बीती 3 जून 2022 को ही विश्वविद्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों का मनमाने तरीके से तबादला करने के प्रकरण में राजभवन की फटकार खा चुके कुलपति गोदारा अब भी अपनी मनमानी करने से चूक नहीं रहे हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/228-lakhs-rupees-disappeared-from-the-financial-accounts-of-vmou/11301/">VMOU: खजाने में लगी 228.91 लाख की सेंध, न खजाना मिल रहा है न खजांची</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">परीक्षा परिणाम से मतलब नहीं, सियासत पर जोर </span></strong><br />
राजभवन ने 1 फरवरी 2022 को राज्य के सभी विश्वविद्यालय के कुलपतियों के लिए निकाले गए पत्र का हवाला देते हुए कड़ा निर्देश दिया था कि कार्यकाल के अंतिम तीन महीनों में कुलपतिगण कोई नीतिगत निर्णय न करें। बावजूद इसके प्रोफेसर गोदारा पर राजभवन के आदेशों का कोई असर नहीं हो रहा है और वह लगातार उन आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। विवि के सूत्रों का कहना है कि कुलपति गोदारा की मनमानी से अधिकारी-कर्मचारी तो परेशान हैं ही साथ ही राज्य सरकार की भी किरकिरी हो रही है। हजारों छात्रों के रिजल्ट लंबित हैं और दिसंबर 2020 तथा जनवरी 2021 से परीक्षाएं न होने से लाखों छात्र सड़कों पर घूम रहे हैं तथा धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/vmou-vice-chancellor-r-l-godara-again-disobeyed-the-orders-of-raj-bhavan/12046/">VMOU: राजभवन के आदेशों की कुलपति गोदारा ने की फिर अवहेलना, बनाईं मनमानी कमेटियां</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>नाथी का बाड़ा: VMOU से चोरी हो रहीं अति गोपनीय पत्रावलियां, रोकने को रजिस्ट्रार ने निकाला आदेश</title>
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		<pubDate>Fri, 17 Jun 2022 14:31:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>छात्रों के डाटा के बाद अब विश्वविद्यालय कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड तक पहुंचे बाहरी लोगों के हाथ  एक आला अफसर के इशारे पर थर्ड पार्टी तक पहुंचा रहीं अति गोपनीय पत्रावलियां, रिकॉर्ड तक नहीं होता दर्ज  TISMedia@Kota वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) इन दिनों नाथी का बाड़ा बना हुआ है। 30 लाख छात्रों का निजी &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/highly-confidential-files-of-vmou-leaked-to-third-party/12044/">नाथी का बाड़ा: VMOU से चोरी हो रहीं अति गोपनीय पत्रावलियां, रोकने को रजिस्ट्रार ने निकाला आदेश</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>छात्रों के डाटा के बाद अब विश्वविद्यालय कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड तक पहुंचे बाहरी लोगों के हाथ </strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>एक आला अफसर के इशारे पर थर्ड पार्टी तक पहुंचा रहीं अति गोपनीय पत्रावलियां, रिकॉर्ड तक नहीं होता दर्ज </strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) इन दिनों नाथी का बाड़ा बना हुआ है। 30 लाख छात्रों का निजी डाटा चोरी करने की कोशिशों के बाद अब बाहरी लोगों के हाथ विश्वविद्यालय के अति गोपनीय दस्तावेजों तक जा पहुंचे हैं। आलम यह है कि एक आला अफसर के इशारे पर वीएमओयू के नीतिगत फैसलों से जुड़े अति गोपनीय दस्तावेज ही नहीं विश्वविद्यालय के कर्मचारियों, अफसरों और शिक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड तक बाहरी लोग (थर्ड पार्टी) फोटो स्टेट कर विश्वविद्यालय से बाहर ले जा रहे हैं। TIS Media के खुलासे के बाद वीएमओयू के कुलसचिव ने शुक्रवार को आदेश जारी कर थर्ड पार्टी को किसी भी तरह के रिकॉर्ड और डाटा देने पर रोक लगा दी है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/vmou-personal-data-of-30-lakh-students-suspected-to-be-leaked/12008/">VMOU: 30 लाख छात्रों का पर्सनल डाटा बेचने की साजिश, फोन, आधार और बैंक डिटेल भी शामिल</a></strong></p>
<p>राजस्थान की इकलौती ओपन यूनिवर्सिटी में अराजकता चरम पर है। बाहरी लोगों का दखल (थर्ड पार्टी) इस कदर बढ़ चुका है कि उसे रोकने के लिए विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को आदेश तक निकालना पड़ रहा है। दरअसल, सूत्रों के हवाले से कुछ दिन पहले TIS Media को जानकारी मिली थी कि विश्वविद्यालय के एक आला अफसर विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों, अफसरों और शिक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड ही नहीं विश्वविद्यालय के टेंडर और खरीद प्रक्रिया से जुड़ी अति गोपनीय पत्रावलियां अपने दफ्तर ही नहीं घर पर भी मंगवा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह थी कि जिन विभागों से यह पत्रावलियां मंगवाई जा रही थीं, वहां की आवक-जावक पंजिकाओं पर इस जानकारी को दर्ज न करने की सख्त हिदायत दी गई थी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/228-lakhs-rupees-disappeared-from-the-financial-accounts-of-vmou/11301/">VMOU: सीखो और कमाओ नहीं &#8220;लूटो और खाओ&#8221; सरकार सो रही है&#8230;</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>&#8220;थर्ड पार्टी&#8221; को दिए जा रहे थे दस्तावेज </strong></span><br />
सूत्रों ने बताया कि आला अफसर के घर और दफ्तर भेजे जाने वाली इन अति गोपनीय पत्रावलियों का बाहरी लोग (थर्ड पार्टी) घंटों अवलोकन करते हैं। इतना ही नहीं कई रिकॉर्ड अवैध रूप से फोटो स्टेट कर वह अपने साथ भी लेकर जा रहे हैं। इस काम को अंजाम देने के लिए कोटा ही नहीं जयपुर तक से लोग आ रहे हैं। जिन लोगों को अवैध रूप से विश्वविद्यालय के अति गोपनीय दस्तावेज दिए जा रहे हैं उनमें से कुछ लोगों से जुड़ी फर्मों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) तक में मामले दर्ज हैं। वहीं कुछ लोग इन अवैध दस्तावेजों को आधार बनाकर विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के खिलाफ सरकार को झूठी शिकायतें भी भिजवा रहे हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/228-lakhs-rupees-disappeared-from-the-financial-accounts-of-vmou/11301/">VMOU: खजाने में लगी 228.91 लाख की सेंध, न खजाना मिल रहा है न खजांची</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>पहले बोला आरटीआई, फिर निकाला रोक का आदेश </strong></span><br />
वीएमओयू के अति गोपनीय दस्तावेजों की चोरी और अवैध निकासी की जानकारी मिलने के बाद TIS Media ने यूनिवर्सिटी के कस्टोडियन ऑफ रिकॉर्ड यानि कुलसचिव से इस बाबत जानकारी मांगी। कार्यवाहक कुलसचिव महेश मीणा ने यह तो माना कि बाहरी लोग विश्वविद्यालय परिसर में आकर गोपनीय दस्तावेजों की छायाप्रति करवा रहे हैं, लेकिन अपना बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि इस बाबत उन लोगों ने आरटीआई में सूचना मांगी थी। हालांकि, जब उनसे सूचना के अधिकार में जानकारी मांगने के बदले विश्वविद्यालय में जमा किए गए शुल्क और विभिन्न विभागों द्वारा अति गोपनीय पत्रावलियां और कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड की आवक और जावक का इंद्राज रजिस्टर दिखाने को कहा गया तो वह बगलें झांकने लगे। आला अफसर के मौखिक निर्देशों पर अति गोपनीय पत्रावलियां और सर्विस रिकॉर्ड की चोरी का मामला बनता देख आखिरकार रजिस्ट्रार ने शुक्रवार को परिपत्र जारी कर थर्ड पार्टी को किसी भी तरह का रिकॉर्ड और डाटा न दिए जाने का आदेश निकाल दिया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/education-kota-news/vmou-vice-chancellor-prof-rl-godara-accused-of-irregularities-governor-sets-up-high-level-inquiry/11284/">VMOU: कुलपति पर घोटाले की आंच, राज्यपाल ने बिठाई उच्च स्तरीय जांच</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>रजिस्ट्रार ने दी चेतावनी </strong></span><br />
वीएमओयू के कुलसचिव महेश मीणा ने 17 जून 2022 को पत्र क्रमांक एफ.2/वमखुवि/स्था./ 022/1599 से परिपत्र जारी कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी। कुलसचिव ने परिपत्र में लिखा है कि वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा के सभी इकाई अध्यक्षों, निदेशक, क्षेत्रीय केन्द्र प्रभारी अधिकारियों एवं अनुभाग अधिकारियों से अनुरोध किया जाता है कि विश्वविद्यालय का किसी भी प्रकार का डाटा या रिकार्ड अद्योहस्ताक्षरकर्ता की पूर्व अनुमति के बिना किसी तृतीय पक्ष (Third Party) को नहीं दिया जाएगा। यदि किसी इकाई अध्यक्ष, प्रभारी अधिकारी, निदेशक, क्षेत्रीय केन्द्र एवं अनुभाग अधिकारी द्वारा किसी तृतीय पक्ष को अपने स्तर से विश्वविद्यालय का कोई डाटा या दस्तावेज साझा किया जाता है, तो उसके परिणाम के लिए संबंधित व्यक्ति खुद जिम्मेदार होगा। उक्त के अतिरिक्त सभी प्रभारी अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि एक शाखा से दूसरी शाखा को भिजवायी जाने वाली पत्रावलियाँ भी जावक पंजिका में दर्ज की जाकर भिजवायी जावे तथा पावती प्राप्त की जावे। इस परिपत्र के जारी होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में डेरा जमाए बाहरी लोगों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/kota-news/vice-chancellor-of-vmou-who-issued-notice-to-the-media-is-not-responding-to-the-allegations-of-corruption/11359/"> VMOU: कुलपति जी! भ्रष्टाचार के आरोपों का मीडिया को जवाब नहीं, आपको &#8220;हिसाब&#8221; देना है</a></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/highly-confidential-files-of-vmou-leaked-to-third-party/12044/">नाथी का बाड़ा: VMOU से चोरी हो रहीं अति गोपनीय पत्रावलियां, रोकने को रजिस्ट्रार ने निकाला आदेश</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>VMOU: 30 लाख छात्रों का पर्सनल डाटा बेचने की साजिश, फोन, आधार और बैंक डिटेल भी शामिल</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Jun 2022 16:46:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर तक मचा हड़कंप, राजभवन ने छात्रों का डाटा निजी हाथों में सौंपने पर लगाई रोक हाड़ौती संयुक्त छात्र मोर्चा के संयोजक नागेंद्र सिंह राणावत ने की राज्यपाल से शिकायत   TISMedia@Kota वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) के 30 लाख से ज्यादा छात्रों की निजी जानकारियां (डाटा) लीक हो सकती हैं। इस डाटा में छात्रों के &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>जयपुर तक मचा हड़कंप, राजभवन ने छात्रों का डाटा निजी हाथों में सौंपने पर लगाई रोक</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>हाड़ौती संयुक्त छात्र मोर्चा के संयोजक नागेंद्र सिंह राणावत ने की राज्यपाल से शिकायत </strong></span><span style="color: #ff0000;"><strong> </strong></span></li>
</ul>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Kota</span></strong> वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) के 30 लाख से ज्यादा छात्रों की निजी जानकारियां (डाटा) लीक हो सकती हैं। इस डाटा में छात्रों के नाम और पते ही नहीं, उनके फोन नंबर, आधार कार्ड और बैंक खातों के साथ ही पढ़ाई से जुड़ी तमाम अति संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं। वीएमओयू के छात्रों का डाटा लीक होने की भनक लगते ही राजभवन तक हड़कंप मच गया। राजभवन की फटकार के बाद रजिस्ट्रार ने छात्रों से जुड़ी कोई भी जानकारी अगले आदेश तक निजी हाथों में सौंपने पर रोक लगा दी है। हालांकि अभी तक कितने छात्रों का डाटा निजी हाथों में सौंपा गया है, इस बाबत विवि के अधिकारी स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं।</p>
<p>कौशल विकास के नाम पर 8 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले के आरोपी वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) के कुलपति प्रो. रतन लाल गोदारा और ईएमपीसी (EDUCATIONAL MEDIA PRODUCTION CENTRE) निदेशक प्रो. बी अरुण कुमार के एक और कारनामे से पूरे राजस्थान में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के मुताबिक विश्वविद्यालय के दोनों आला अधिकारियों ने प्लेसमेंट एजेंसी, स्किल डवलपमेंट सेंटर और निजी शिक्षण संस्थान के संचालकों और अनएथिकल डाटा माइनिंग करने वालों के साथ मिलकर विश्वविद्यालय के करीब 30 लाख विद्यार्थियों का डेटा बेचने की साजिश रच डाली। पूरी साजिश को इतनी सफाई से अंजाम दिया गया कि विश्वविद्यालय में किसी को भनक तक नहीं लगी। लेकिन, जब डाटा वैरिफिकेशन का काम शुरू हुआ तो पूरे मामले की कलई खुल गई।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>ऐसे रची गई साजिश </strong></span><br />
ईएमपीसी के निदेशक एवं परीक्षा नियंत्रक प्रो. बी अरुण कुमार ने 8 जून 2022 को एक कार्यालय आदेश निकाला। जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर अब तक पढ़ाई पूरी करने वाले सभी विद्यार्थियों का संपूर्ण डाटा (जिसमें उनके नाम, पते और फोन नंबर ही नहीं बैंक एकाउंट, पुराने विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों की जानकारी, आधार कार्ड आदि की जानकारी भी शामिल होती है) एलुमनाई एसोसिएशन को सौंपने के आदेश दिए थे। इस कार्यालय आदेश में उन्होंने आगे भी छात्रों का डाटा एलुमनाई एसोसिएशन को देने के निर्देश दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए पहले तो विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया, लेकिन प्रो. बी अरुण कुमार ने 14 जून को फिर से कार्यालय आदेश निकाल संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द डाटा सौंपने के मौखिक निर्देश दिए। जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>गोदारा ने दिए थे निर्देश </strong></span><br />
वीएमओयू की स्थापना साल 1987 में हुई थी। जिसके बाद बीते 35 साल में करीब 30 लाख विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। राजस्थान ही नहीं देश भर में फैले छात्रों का डाटा निजी हाथों में सौंपने की वजह स्पष्ट न होने पर जब विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने सवाल उठाने शुरू किए तो प्रो. बी. अरुण कुमार ने एक और कार्यालय आदेश निकाल कर उसमें कुलपति प्रो. रतन लाल गोदारा का हवाला देते हुए लिखा कि यह सारा काम उनकी स्वीकृति से किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों ने डाटा तैयार करना भी शुरू कर दिया, लेकिन एलुमनाई एसोसिएशन के नाम पर डाटा ले रहे अरुण त्यागी नाम के शख्स ने इसकी वैधता पर सवाल खड़ा करते हुए कुछ छात्रों को रैंडमली फोन कर डाटा वैरिफाई करने का दवाब डाला। विवि के कर्मचारियों ने जब उन्हें फोन किया तो छात्रों को गड़बड़ी की आशंका हुई और कुछ ने जब विवि आकर जानकारी जुटाई तो पूरे खेल का पर्दाफाश हो गया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>राजभवन ने लगाई फटकार </strong></span><br />
वीएमओयू के लाखों विद्यार्थियों की निजी जानकारी (डाटा) लीक होने की भनक लगते ही हाड़ौती संयुक्त छात्र मोर्चा के संयोजक नागेंद्र सिंह राणावत ने कुलाधिपति कलराज मिश्रा को शिकायत मेल कर दी। राजभवन भेजी शिकायत में राणावत ने लिखा है कि कुलपति प्रो. रतन लाल गोदारा लगातार का सिर्फ 65 दिन का कार्यकाल बाकी बचा है, लेकिन वह नित नए घोटालों को अंजाम देने में लगे हैं। सीखो और कमाओ योजना में 8 करोड़ रुपए के घोटाले के आरोप में राजभवन, मुख्यमंत्री और एसीबी जांच कर रहे हैं। इसके बावजूद अब वह खुले बाजार में डाटा बेचने और डेटा माइनिंग करने वाले लोगों के साथ मिलकर वीएमओयू के लाखों छात्रों की अति संवेदनशील गोपनीय जानकारियां बेचने की कोशिश कर रहे हैं। किसी भी विद्यार्थी के बैंक खाते, आधारकार्ड और फोननंबर जैसी जानकारियां साइबर अपराधियों के हाथों में लग गई तो उन छात्रों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा। इसलिए स्टूडेंट्स का डाटा निजी हाथों में दिए जाने पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही बाहरी व्यक्ति अरुण त्यागी को यह डाटा क्यों दिया जा रहा है इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। शिकायत मिलने के बाद राजभवन ने वीएमओयू के अफसरों की कड़ी फटकार लगाते हुए छात्रों का डाटा किसी को भी न दिए जाने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके बाद रजिस्ट्रार महेश मीणा ने 15 जून 2022 को आदेश जारी कर वीएमओयू के विद्यार्थियों का डाटा किसी भी व्यक्ति या संस्था को दिए जाने पर रोक लगा दी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>छात्र खुद भरते हैं एलुमनाई फार्म </strong></span><br />
नागेंद्र राणावत ने कुलाधिपति को जानकारी दी कि किसी भी छात्र का डाटा एलुमनाई एसोसिएशन से जुड़ने के नाम पर किसी भी निजी व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। विवि के पोर्टल पर https://online.vmou.ac.in/Alumni.aspx लिंक दिया गया है। वीएमओयू के जिन छात्रों को एलुमनाई से जुड़ना होता है वह इस लिंक के जरिए अपना फार्म भर देते हैं। इस फार्म में सिर्फ जन्म तिथि और फोन नंबर मांगा जाता है न कि कोई निजी जानकारी। इतना ही नहीं स्वेच्छा से पंजीकरण कराने वाले छात्र ही यूनिवर्सिटी की एलुमनाई का हिस्सा हो सकते हैं। ऐसे में 30 लाख से ज्यादा छात्रों का डाटा बेचने की साजिश जान पड़ती है। इसलिए पूरे मामले की रिपोर्ट दर्ज करा उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।</p>
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