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	<title>VMOU students Personal Data leaked Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>VMOU students Personal Data leaked Archives - TIS Media</title>
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		<title>VMOU: राजभवन के आदेशों की कुलपति गोदारा ने की फिर अवहेलना, बनाईं मनमानी कमेटियां</title>
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		<pubDate>Fri, 17 Jun 2022 15:20:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>कार्यकाल के अंतिम दिनों में ले रहे नीतिगत फैसले, मनमानी जांच कमेटियां बनाने में जुटे कुलपति गोदारा राजभवन ने 1 फरवरी और 3 जून को पत्र भेजकर लगाई थी रोक, राजभवन के आदेशों को भी बताया धत्ता  TISMedia@Kota चौतरफा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आरएल गोदारा अब पूरी &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/vmou-vice-chancellor-r-l-godara-again-disobeyed-the-orders-of-raj-bhavan/12046/">VMOU: राजभवन के आदेशों की कुलपति गोदारा ने की फिर अवहेलना, बनाईं मनमानी कमेटियां</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>कार्यकाल के अंतिम दिनों में ले रहे नीतिगत फैसले, मनमानी जांच कमेटियां बनाने में जुटे कुलपति गोदारा</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>राजभवन ने 1 फरवरी और 3 जून को पत्र भेजकर लगाई थी रोक, राजभवन के आदेशों को भी बताया धत्ता </strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> चौतरफा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आरएल गोदारा अब पूरी मनमानी पर उतारू हैं। राजभवन के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अगर उनके गलत कामों का विरोध किया जाता है तो उसे बेइज्जत करते हैं और बाहरी व्यक्तियों से फाइलों का परीक्षण करावाकर उसे नोटिस देते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/highly-confidential-files-of-vmou-leaked-to-third-party/12044/">नाथी का बाड़ा: VMOU से चोरी हो रहीं अति गोपनीय पत्रावलियां, रोकने को रजिस्ट्रार ने निकाला आदेश</a></strong></p>
<p>शुक्रवार शाम को कुलपति गोदारा ने राजभवन द्वारा नीतिगत फैसले करने पर जो रोक लगाई गई थी, उस आदेश को एक बार फिर तार-तार कर डाला। कुलपति गोदारा ने एमपीडी विभाग में किताबों को छापने वाली कंपनी सरस्वती प्रेस मथुरा के बकाए के भुगतान के लिए 20 जनवरी 2022 को हुई प्रबंध मंडल की 100वीं बैठक में सूचित किया था कि एक आंतरिक कमेटी गठित कर भुगतान के मामले में तथ्यात्मक गणना व टिप्पणी को अगली प्रबंध मंडल की बैठक में विचार के लिए रखा जाएगा। इस बाबत कुलपति गोदारा ने प्रोफेसर यूसी सांखला की अध्यक्षता में एक भारी-भरकम 10 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। गौर करने वाली बात यह है कि बोर्ड की बैठक में आंतरिक स्तर पर कमेटी बनाने की बात कही गई थी, लेकिन इसमें तीन बाहरी सदस्यों को रखा गया। इनमें प्रोफेसर सांखला के अलावा संपत लाल सोनगरा और वीएमओयू एलुमिनाई एसोशिएसन के अध्यक्ष अरूण त्यागी को भी कुलपति गोदारा ने जबरन सदस्य बनाया। जबकि त्यागी विश्वविद्यालय के कर्मचारी नहीं हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/vmou-personal-data-of-30-lakh-students-suspected-to-be-leaked/12008/">VMOU: 30 लाख छात्रों का पर्सनल डाटा बेचने की साजिश, फोन, आधार और बैंक डिटेल भी शामिल</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>बैठक का मुद्दा ही बदल डाला</strong></span><br />
कमेटी की फरवरी से अब तक छह बैठकें आयोजित की गई थीं, लेकिन तथ्यात्मक गणना और टिप्पणी का काम छोड़कर बाकी सारा काम किया गया। 17 जून 2022 को विश्वविद्यालय में हुई इस कमेटी की बैठक में कुलपति के दबाव में बैठक का ‘टर्म आफ रिफरेंस’ ही बदल दिया गया। हालांकि मजे की बात यह रही कि कमेटी के पांच सदस्य प्रस्ताव के विरोध में थे और केवल चार सदस्य ही प्रस्ताव के पक्ष में थे। बाद में कमेटी अध्यक्ष ने घालमेल कर ‘‘टर्म आफ रिफरेंस’’ बदलने का निर्णय कर दिया और कुलपति गोदारा ने पूरी कमेटी के समेकित फैसले को दरकिनार कर कमेटी के अध्यक्ष प्रोफेसर सांखला के फैसले का एकतरफा अनुमोदन भी कर दिया। इस फैसले से विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों में काफी रोष व्याप्त है। गौरतलब हो कि बीती 3 जून 2022 को ही विश्वविद्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों का मनमाने तरीके से तबादला करने के प्रकरण में राजभवन की फटकार खा चुके कुलपति गोदारा अब भी अपनी मनमानी करने से चूक नहीं रहे हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/228-lakhs-rupees-disappeared-from-the-financial-accounts-of-vmou/11301/">VMOU: खजाने में लगी 228.91 लाख की सेंध, न खजाना मिल रहा है न खजांची</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">परीक्षा परिणाम से मतलब नहीं, सियासत पर जोर </span></strong><br />
राजभवन ने 1 फरवरी 2022 को राज्य के सभी विश्वविद्यालय के कुलपतियों के लिए निकाले गए पत्र का हवाला देते हुए कड़ा निर्देश दिया था कि कार्यकाल के अंतिम तीन महीनों में कुलपतिगण कोई नीतिगत निर्णय न करें। बावजूद इसके प्रोफेसर गोदारा पर राजभवन के आदेशों का कोई असर नहीं हो रहा है और वह लगातार उन आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। विवि के सूत्रों का कहना है कि कुलपति गोदारा की मनमानी से अधिकारी-कर्मचारी तो परेशान हैं ही साथ ही राज्य सरकार की भी किरकिरी हो रही है। हजारों छात्रों के रिजल्ट लंबित हैं और दिसंबर 2020 तथा जनवरी 2021 से परीक्षाएं न होने से लाखों छात्र सड़कों पर घूम रहे हैं तथा धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
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		<title>नाथी का बाड़ा: VMOU से चोरी हो रहीं अति गोपनीय पत्रावलियां, रोकने को रजिस्ट्रार ने निकाला आदेश</title>
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		<pubDate>Fri, 17 Jun 2022 14:31:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>छात्रों के डाटा के बाद अब विश्वविद्यालय कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड तक पहुंचे बाहरी लोगों के हाथ  एक आला अफसर के इशारे पर थर्ड पार्टी तक पहुंचा रहीं अति गोपनीय पत्रावलियां, रिकॉर्ड तक नहीं होता दर्ज  TISMedia@Kota वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) इन दिनों नाथी का बाड़ा बना हुआ है। 30 लाख छात्रों का निजी &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/highly-confidential-files-of-vmou-leaked-to-third-party/12044/">नाथी का बाड़ा: VMOU से चोरी हो रहीं अति गोपनीय पत्रावलियां, रोकने को रजिस्ट्रार ने निकाला आदेश</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>छात्रों के डाटा के बाद अब विश्वविद्यालय कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड तक पहुंचे बाहरी लोगों के हाथ </strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>एक आला अफसर के इशारे पर थर्ड पार्टी तक पहुंचा रहीं अति गोपनीय पत्रावलियां, रिकॉर्ड तक नहीं होता दर्ज </strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) इन दिनों नाथी का बाड़ा बना हुआ है। 30 लाख छात्रों का निजी डाटा चोरी करने की कोशिशों के बाद अब बाहरी लोगों के हाथ विश्वविद्यालय के अति गोपनीय दस्तावेजों तक जा पहुंचे हैं। आलम यह है कि एक आला अफसर के इशारे पर वीएमओयू के नीतिगत फैसलों से जुड़े अति गोपनीय दस्तावेज ही नहीं विश्वविद्यालय के कर्मचारियों, अफसरों और शिक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड तक बाहरी लोग (थर्ड पार्टी) फोटो स्टेट कर विश्वविद्यालय से बाहर ले जा रहे हैं। TIS Media के खुलासे के बाद वीएमओयू के कुलसचिव ने शुक्रवार को आदेश जारी कर थर्ड पार्टी को किसी भी तरह के रिकॉर्ड और डाटा देने पर रोक लगा दी है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/vmou-personal-data-of-30-lakh-students-suspected-to-be-leaked/12008/">VMOU: 30 लाख छात्रों का पर्सनल डाटा बेचने की साजिश, फोन, आधार और बैंक डिटेल भी शामिल</a></strong></p>
<p>राजस्थान की इकलौती ओपन यूनिवर्सिटी में अराजकता चरम पर है। बाहरी लोगों का दखल (थर्ड पार्टी) इस कदर बढ़ चुका है कि उसे रोकने के लिए विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को आदेश तक निकालना पड़ रहा है। दरअसल, सूत्रों के हवाले से कुछ दिन पहले TIS Media को जानकारी मिली थी कि विश्वविद्यालय के एक आला अफसर विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों, अफसरों और शिक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड ही नहीं विश्वविद्यालय के टेंडर और खरीद प्रक्रिया से जुड़ी अति गोपनीय पत्रावलियां अपने दफ्तर ही नहीं घर पर भी मंगवा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह थी कि जिन विभागों से यह पत्रावलियां मंगवाई जा रही थीं, वहां की आवक-जावक पंजिकाओं पर इस जानकारी को दर्ज न करने की सख्त हिदायत दी गई थी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/228-lakhs-rupees-disappeared-from-the-financial-accounts-of-vmou/11301/">VMOU: सीखो और कमाओ नहीं &#8220;लूटो और खाओ&#8221; सरकार सो रही है&#8230;</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>&#8220;थर्ड पार्टी&#8221; को दिए जा रहे थे दस्तावेज </strong></span><br />
सूत्रों ने बताया कि आला अफसर के घर और दफ्तर भेजे जाने वाली इन अति गोपनीय पत्रावलियों का बाहरी लोग (थर्ड पार्टी) घंटों अवलोकन करते हैं। इतना ही नहीं कई रिकॉर्ड अवैध रूप से फोटो स्टेट कर वह अपने साथ भी लेकर जा रहे हैं। इस काम को अंजाम देने के लिए कोटा ही नहीं जयपुर तक से लोग आ रहे हैं। जिन लोगों को अवैध रूप से विश्वविद्यालय के अति गोपनीय दस्तावेज दिए जा रहे हैं उनमें से कुछ लोगों से जुड़ी फर्मों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) तक में मामले दर्ज हैं। वहीं कुछ लोग इन अवैध दस्तावेजों को आधार बनाकर विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के खिलाफ सरकार को झूठी शिकायतें भी भिजवा रहे हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/228-lakhs-rupees-disappeared-from-the-financial-accounts-of-vmou/11301/">VMOU: खजाने में लगी 228.91 लाख की सेंध, न खजाना मिल रहा है न खजांची</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>पहले बोला आरटीआई, फिर निकाला रोक का आदेश </strong></span><br />
वीएमओयू के अति गोपनीय दस्तावेजों की चोरी और अवैध निकासी की जानकारी मिलने के बाद TIS Media ने यूनिवर्सिटी के कस्टोडियन ऑफ रिकॉर्ड यानि कुलसचिव से इस बाबत जानकारी मांगी। कार्यवाहक कुलसचिव महेश मीणा ने यह तो माना कि बाहरी लोग विश्वविद्यालय परिसर में आकर गोपनीय दस्तावेजों की छायाप्रति करवा रहे हैं, लेकिन अपना बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि इस बाबत उन लोगों ने आरटीआई में सूचना मांगी थी। हालांकि, जब उनसे सूचना के अधिकार में जानकारी मांगने के बदले विश्वविद्यालय में जमा किए गए शुल्क और विभिन्न विभागों द्वारा अति गोपनीय पत्रावलियां और कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड की आवक और जावक का इंद्राज रजिस्टर दिखाने को कहा गया तो वह बगलें झांकने लगे। आला अफसर के मौखिक निर्देशों पर अति गोपनीय पत्रावलियां और सर्विस रिकॉर्ड की चोरी का मामला बनता देख आखिरकार रजिस्ट्रार ने शुक्रवार को परिपत्र जारी कर थर्ड पार्टी को किसी भी तरह का रिकॉर्ड और डाटा न दिए जाने का आदेश निकाल दिया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/education-kota-news/vmou-vice-chancellor-prof-rl-godara-accused-of-irregularities-governor-sets-up-high-level-inquiry/11284/">VMOU: कुलपति पर घोटाले की आंच, राज्यपाल ने बिठाई उच्च स्तरीय जांच</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>रजिस्ट्रार ने दी चेतावनी </strong></span><br />
वीएमओयू के कुलसचिव महेश मीणा ने 17 जून 2022 को पत्र क्रमांक एफ.2/वमखुवि/स्था./ 022/1599 से परिपत्र जारी कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी। कुलसचिव ने परिपत्र में लिखा है कि वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा के सभी इकाई अध्यक्षों, निदेशक, क्षेत्रीय केन्द्र प्रभारी अधिकारियों एवं अनुभाग अधिकारियों से अनुरोध किया जाता है कि विश्वविद्यालय का किसी भी प्रकार का डाटा या रिकार्ड अद्योहस्ताक्षरकर्ता की पूर्व अनुमति के बिना किसी तृतीय पक्ष (Third Party) को नहीं दिया जाएगा। यदि किसी इकाई अध्यक्ष, प्रभारी अधिकारी, निदेशक, क्षेत्रीय केन्द्र एवं अनुभाग अधिकारी द्वारा किसी तृतीय पक्ष को अपने स्तर से विश्वविद्यालय का कोई डाटा या दस्तावेज साझा किया जाता है, तो उसके परिणाम के लिए संबंधित व्यक्ति खुद जिम्मेदार होगा। उक्त के अतिरिक्त सभी प्रभारी अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि एक शाखा से दूसरी शाखा को भिजवायी जाने वाली पत्रावलियाँ भी जावक पंजिका में दर्ज की जाकर भिजवायी जावे तथा पावती प्राप्त की जावे। इस परिपत्र के जारी होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में डेरा जमाए बाहरी लोगों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/kota-news/vice-chancellor-of-vmou-who-issued-notice-to-the-media-is-not-responding-to-the-allegations-of-corruption/11359/"> VMOU: कुलपति जी! भ्रष्टाचार के आरोपों का मीडिया को जवाब नहीं, आपको &#8220;हिसाब&#8221; देना है</a></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/highly-confidential-files-of-vmou-leaked-to-third-party/12044/">नाथी का बाड़ा: VMOU से चोरी हो रहीं अति गोपनीय पत्रावलियां, रोकने को रजिस्ट्रार ने निकाला आदेश</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>VMOU: 30 लाख छात्रों का पर्सनल डाटा बेचने की साजिश, फोन, आधार और बैंक डिटेल भी शामिल</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Jun 2022 16:46:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर तक मचा हड़कंप, राजभवन ने छात्रों का डाटा निजी हाथों में सौंपने पर लगाई रोक हाड़ौती संयुक्त छात्र मोर्चा के संयोजक नागेंद्र सिंह राणावत ने की राज्यपाल से शिकायत   TISMedia@Kota वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) के 30 लाख से ज्यादा छात्रों की निजी जानकारियां (डाटा) लीक हो सकती हैं। इस डाटा में छात्रों के &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/vmou-personal-data-of-30-lakh-students-suspected-to-be-leaked/12008/">VMOU: 30 लाख छात्रों का पर्सनल डाटा बेचने की साजिश, फोन, आधार और बैंक डिटेल भी शामिल</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>जयपुर तक मचा हड़कंप, राजभवन ने छात्रों का डाटा निजी हाथों में सौंपने पर लगाई रोक</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>हाड़ौती संयुक्त छात्र मोर्चा के संयोजक नागेंद्र सिंह राणावत ने की राज्यपाल से शिकायत </strong></span><span style="color: #ff0000;"><strong> </strong></span></li>
</ul>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Kota</span></strong> वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) के 30 लाख से ज्यादा छात्रों की निजी जानकारियां (डाटा) लीक हो सकती हैं। इस डाटा में छात्रों के नाम और पते ही नहीं, उनके फोन नंबर, आधार कार्ड और बैंक खातों के साथ ही पढ़ाई से जुड़ी तमाम अति संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं। वीएमओयू के छात्रों का डाटा लीक होने की भनक लगते ही राजभवन तक हड़कंप मच गया। राजभवन की फटकार के बाद रजिस्ट्रार ने छात्रों से जुड़ी कोई भी जानकारी अगले आदेश तक निजी हाथों में सौंपने पर रोक लगा दी है। हालांकि अभी तक कितने छात्रों का डाटा निजी हाथों में सौंपा गया है, इस बाबत विवि के अधिकारी स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं।</p>
<p>कौशल विकास के नाम पर 8 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले के आरोपी वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) के कुलपति प्रो. रतन लाल गोदारा और ईएमपीसी (EDUCATIONAL MEDIA PRODUCTION CENTRE) निदेशक प्रो. बी अरुण कुमार के एक और कारनामे से पूरे राजस्थान में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के मुताबिक विश्वविद्यालय के दोनों आला अधिकारियों ने प्लेसमेंट एजेंसी, स्किल डवलपमेंट सेंटर और निजी शिक्षण संस्थान के संचालकों और अनएथिकल डाटा माइनिंग करने वालों के साथ मिलकर विश्वविद्यालय के करीब 30 लाख विद्यार्थियों का डेटा बेचने की साजिश रच डाली। पूरी साजिश को इतनी सफाई से अंजाम दिया गया कि विश्वविद्यालय में किसी को भनक तक नहीं लगी। लेकिन, जब डाटा वैरिफिकेशन का काम शुरू हुआ तो पूरे मामले की कलई खुल गई।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>ऐसे रची गई साजिश </strong></span><br />
ईएमपीसी के निदेशक एवं परीक्षा नियंत्रक प्रो. बी अरुण कुमार ने 8 जून 2022 को एक कार्यालय आदेश निकाला। जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर अब तक पढ़ाई पूरी करने वाले सभी विद्यार्थियों का संपूर्ण डाटा (जिसमें उनके नाम, पते और फोन नंबर ही नहीं बैंक एकाउंट, पुराने विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों की जानकारी, आधार कार्ड आदि की जानकारी भी शामिल होती है) एलुमनाई एसोसिएशन को सौंपने के आदेश दिए थे। इस कार्यालय आदेश में उन्होंने आगे भी छात्रों का डाटा एलुमनाई एसोसिएशन को देने के निर्देश दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए पहले तो विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया, लेकिन प्रो. बी अरुण कुमार ने 14 जून को फिर से कार्यालय आदेश निकाल संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द डाटा सौंपने के मौखिक निर्देश दिए। जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>गोदारा ने दिए थे निर्देश </strong></span><br />
वीएमओयू की स्थापना साल 1987 में हुई थी। जिसके बाद बीते 35 साल में करीब 30 लाख विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। राजस्थान ही नहीं देश भर में फैले छात्रों का डाटा निजी हाथों में सौंपने की वजह स्पष्ट न होने पर जब विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने सवाल उठाने शुरू किए तो प्रो. बी. अरुण कुमार ने एक और कार्यालय आदेश निकाल कर उसमें कुलपति प्रो. रतन लाल गोदारा का हवाला देते हुए लिखा कि यह सारा काम उनकी स्वीकृति से किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों ने डाटा तैयार करना भी शुरू कर दिया, लेकिन एलुमनाई एसोसिएशन के नाम पर डाटा ले रहे अरुण त्यागी नाम के शख्स ने इसकी वैधता पर सवाल खड़ा करते हुए कुछ छात्रों को रैंडमली फोन कर डाटा वैरिफाई करने का दवाब डाला। विवि के कर्मचारियों ने जब उन्हें फोन किया तो छात्रों को गड़बड़ी की आशंका हुई और कुछ ने जब विवि आकर जानकारी जुटाई तो पूरे खेल का पर्दाफाश हो गया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>राजभवन ने लगाई फटकार </strong></span><br />
वीएमओयू के लाखों विद्यार्थियों की निजी जानकारी (डाटा) लीक होने की भनक लगते ही हाड़ौती संयुक्त छात्र मोर्चा के संयोजक नागेंद्र सिंह राणावत ने कुलाधिपति कलराज मिश्रा को शिकायत मेल कर दी। राजभवन भेजी शिकायत में राणावत ने लिखा है कि कुलपति प्रो. रतन लाल गोदारा लगातार का सिर्फ 65 दिन का कार्यकाल बाकी बचा है, लेकिन वह नित नए घोटालों को अंजाम देने में लगे हैं। सीखो और कमाओ योजना में 8 करोड़ रुपए के घोटाले के आरोप में राजभवन, मुख्यमंत्री और एसीबी जांच कर रहे हैं। इसके बावजूद अब वह खुले बाजार में डाटा बेचने और डेटा माइनिंग करने वाले लोगों के साथ मिलकर वीएमओयू के लाखों छात्रों की अति संवेदनशील गोपनीय जानकारियां बेचने की कोशिश कर रहे हैं। किसी भी विद्यार्थी के बैंक खाते, आधारकार्ड और फोननंबर जैसी जानकारियां साइबर अपराधियों के हाथों में लग गई तो उन छात्रों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा। इसलिए स्टूडेंट्स का डाटा निजी हाथों में दिए जाने पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही बाहरी व्यक्ति अरुण त्यागी को यह डाटा क्यों दिया जा रहा है इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। शिकायत मिलने के बाद राजभवन ने वीएमओयू के अफसरों की कड़ी फटकार लगाते हुए छात्रों का डाटा किसी को भी न दिए जाने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके बाद रजिस्ट्रार महेश मीणा ने 15 जून 2022 को आदेश जारी कर वीएमओयू के विद्यार्थियों का डाटा किसी भी व्यक्ति या संस्था को दिए जाने पर रोक लगा दी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>छात्र खुद भरते हैं एलुमनाई फार्म </strong></span><br />
नागेंद्र राणावत ने कुलाधिपति को जानकारी दी कि किसी भी छात्र का डाटा एलुमनाई एसोसिएशन से जुड़ने के नाम पर किसी भी निजी व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। विवि के पोर्टल पर https://online.vmou.ac.in/Alumni.aspx लिंक दिया गया है। वीएमओयू के जिन छात्रों को एलुमनाई से जुड़ना होता है वह इस लिंक के जरिए अपना फार्म भर देते हैं। इस फार्म में सिर्फ जन्म तिथि और फोन नंबर मांगा जाता है न कि कोई निजी जानकारी। इतना ही नहीं स्वेच्छा से पंजीकरण कराने वाले छात्र ही यूनिवर्सिटी की एलुमनाई का हिस्सा हो सकते हैं। ऐसे में 30 लाख से ज्यादा छात्रों का डाटा बेचने की साजिश जान पड़ती है। इसलिए पूरे मामले की रिपोर्ट दर्ज करा उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।</p>
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