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	<title>Covid-19 Impacts Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>Covid-19 Impacts Archives - TIS Media</title>
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		<title>फिर भी ना हारे हौसला, चाहे जितनी मुश्किल हो जिंदगी</title>
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		<pubDate>Thu, 06 May 2021 13:04:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>कोरोना का कहर इस कदर इस दुनिया में छा गया है कि कोई आपस में एक दूसरे से मिलने से डरने लगा है। एक अलग सा संदेह उसके मन में चलता रहता है कि में जिस व्यक्ति से मिल रहा हूँ वो सुरक्षित तो है ना। इस अनजाने डर से हम एक दूसरे से दूर होते जा &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-dheeraj-soni-on-how-uncertain-life-has-become-due-to-covid-19/7892/">फिर भी ना हारे हौसला, चाहे जितनी मुश्किल हो जिंदगी</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>जिंदगी ना जाने कैसी हो गयी है ना इस पल का पता ना ही आने वाले का पता और ना जाने कौनसा पल जिंदगी का आखिरी हो कुछ कहा नहीं जा सकता है। ऐसा लगता है कि मानो उधार की जैसी जिंदगी हो गयी है, उधार पूरा और जिंदगी ख़तम। वो ईश्वर जिसने इस सृष्टि की रचना की थी तो शायद उसने भी न सोचा होगा कि ऐसा भी वक़्त आयेगा कि हम अपनों के साथ हो कर भी उनसे बहुत दूर हो जायेंगें। ईश्वर ने इसलिए तो परिवार बनाये थे एक दूसरे के साथ सुख और दुःख बाँट सके और न जाने कैसा वक़्त आ गया है अंतिम पलों में कोई साथ ही नहीं दे पा रहा है। वही कहावत सही साबित हो रही है कि अकेले ही आये है और अकेले ही जा रहे है। ना तो अपनों को अपनों का कंधा नसीब हो रहा है, एक अनजाना व्यक्ति ही अंतिम समय में साथ दे रहा है।
			</div>
		</div>
	
<p>कोरोना का कहर इस कदर इस दुनिया में छा गया है कि कोई आपस में एक दूसरे से मिलने से डरने लगा है। एक अलग सा संदेह उसके मन में चलता रहता है कि में जिस व्यक्ति से मिल रहा हूँ वो सुरक्षित तो है ना। इस अनजाने डर से हम एक दूसरे से दूर होते जा रहे है। हर व्यक्ति या तो अपने आप को बचाना चाहता है या फिर दूसरे की सुरक्षा चाहता है। ऐसा लगने लगा है जैसे कि हवा में ही जहर घुल गया है। इसी कारण व्यक्ति बाहर निकलने से डर रहा है।</p>
<p>एक आसान दिखने वाली ज़िन्दगी आज इतनी मुश्किल हो गयी है एक सांस के लिये आज दर दर भटकना पढ़ रहा है। बड़ा ही मुश्किल दौर चल रहा है जो बच गया है वही सिकंदर बन रहा है। लोगों को आक्सीजन ही समय समय पर नहीं मिल पा रही है लेकिन उसकी कालाबाजारी का सच लोगों के सामने आ रहा है। ऐसे लोगों ने क्या अपने जीवन के बारे में सोचा है कि कभी हमारे साथ भी ऐसा हो सकता था? सच्चाई एक न एक दिन सामने तो आनी है जब असहास होगा कि जीवन में सब कुछ पैसा नहीं होता कुछ इंसानियत भी होती है जो वक़्त बे वक़्त काम आ ही जाती है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-lalit-gautam-on-unemployment-due-to-covid-19-in-india/7884/"><strong>रोजगार पर कोरोना का कहर</strong></a></span></p>
<p>कैसी तो लोगों की सोच हो गयी है कि अपनेपन का आभास दिखाने वाले अवसर मिल नहीं पा रहा है और जिन्हें मिल रहा है उसमें उन्हें किसी न किसी प्रकार का स्वार्थ दिख रहा है। कुछ तो ऐसे भी जो इस महाबीमारी में भी अपनी जान की परवाह न कर दूसरों के लिये अपनी जान पर खेल रहे है। जिनका कोई सहारा नहीं है वो उनका सहारा बन रहे है। ऐसे लोगों की दुआ ही उनके उज्जवल भविष्य में सार्थक साबित होगी ऐसा विश्वास मन में बना हुआ है। इन लोगों से कभी आप धन्यवाद नहीं हमेशा आशीर्वाद मांगो जो हमेशा आपके साथ रहे।</p>
<p>जो बच्चे अपने माता-पिता से दूर है किसी न किसी कारण से या भविष्य निर्माण को लेकर या रोज़गार की तलाश में वो उनसे मिल नहीं पा रहे है वक़्त का कैसा सितम आज आ गया है कि जिस पिता ने अपने लाडले को इतने नाजों से पाला आज वो ही अपने पिता को बेसहारा छोड़कर चला गया है वो भी इस कोरोना की लहर का शिकार बन गया या फिर उसके माता-पिता दोनों ही स्थिति में एक दूसरे के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाये। जो कल साथ थे आज वे एक दूसरे से हमेशा-हमेशा के लिये बिछुड़ गये कैसी आपदा आ पड़ी है।</p>
<p>पेट भर खाना खाना भी मुश्किल हो गया है आये दिन लोगों को इतना ज्यादा संघर्ष करना पड़ रहा है कि लोग दाने-दाने को तरस रहे है। जिन लोगों से उम्मीद की वो सहारा बनेगा वो ही आज इस कठिन समय बेसहारा कर रहे है। इस स्थिति वे दूसरों में सहारा तलाश कर रहे है। लेकिन इस विपदा में कुछ ही लोग आगे आ रहे है और कुछ तो केवल मौके का फायदा उठाने में लग गये है। प्राइवेट संस्थाओं में काम करने वाले इसका शिकार अधिक हो गये है। एक तो कोरोना का कहर और दूसरा उनका इस विपदा में समय पर वेतन न देना। कभी &#8211; कभी तो ऐसा लगता है कोरोना का सबसे अधिक असर उन पर ही पड़ा है।</p>
<p>ऐसा भी क्या पैसा कमाया कि अंतिम समय में कुछ भी काम नहीं आया है। अपनों का साथ पाने के लिये जीवन भर उसमें आस तलाश करते रहे और आज जब अंतिम समय ऐसा आया कि अपने ही लोग पास नहीं आ पाये। सब कुछ भूल गये इस आसान ज़िन्दगी को जीते-जीते यह भूल गये थे कि कभी ऐसा भी समय आएगा कि जीवन जीना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जायेगा।</p>
<p>वक़्त का ना जाने कैसा सितम आ गया है कौन सा एक नशा हवा में घुल गया है न जाने कब और किस पर असर कर जाये कुछ कहा नहीं जा सकता है आज है कल न हो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। इसलिए हर पल खुश रहो और खुशनुमा पलों को याद करो जो आपने अपने परिवार के साथ बिताये है। छोटी-छोटी बातों में खुशियों की तलाश करो हो सकता है कि वो खुशियाँ ही आपके दुःख को भुलाने में आपकी मदद कर सके।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-shobha-kanwar-on-what-teachers-parents-and-children-should-do-in-this-covid-19-situation/7880/"><strong>कोरोना काल मे बच्चे व शिक्षक की भूमिका</strong></a></span></p>
<p>बड़ी ही अजीब ज़िन्दगी हो गयी सभी की न जाने किस-किस के उधार पर चल रही है और ना जाने किस जन्म में वो उधार भी चुक पायेगा। वक़्त के साथ और सावधानी से चलने में ही भलाई है और उसके साथ ही अपने जीवन को हमें सुधारने की आवश्यकता है और उस पर अमल करने की आवश्यकता है। अपने संकट मोचन को हमेशा याद करते रहे हो और जब भी अपने घर से बाहर निकलो तो उन्हें नमन कर निकलो कि हे प्रभु आप ऐसा कवच मेरे और जिससे से भी मैं मिलूं उसके चारों और बना दो ताकि आपका यह कवच इस महाबीमारी से हमारी रक्षा करे। आज के समय ऐसा बन गया है कि घर में रहे और सुरक्षित रहे और किसी के लिये भी किसी प्रकार के दुःख का कारण ना बने और जरूरत पर जरुरतमंदो का आगे बढ़ कर साथ दे सके। ऐसी ही आशीर्वाद बनाये रखना प्रभु।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">लेखक &#8211;</span> <span style="color: #0000ff;">डॉ. धीरज सोनी</span></strong></p>
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		<title>रोजगार पर कोरोना का कहर</title>
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		<pubDate>Thu, 06 May 2021 12:00:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>भारत सरकार द्वारा गत वर्ष 24 मार्च को पूरे देश में लॉक डाउन लगाया गया जिसके कारण पूरे भारत में रोजगार का संकट उत्पन्न हुआ जो एक साल बीतने के बाद भी जस का तस बना हुआ है &#124; वैसे बेरोजगारी भारत में देश आजाद होने के बाद से ही बनी हुई है लेकिन कोरोना महामारी के कारण &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-lalit-gautam-on-unemployment-due-to-covid-19-in-india/7884/">रोजगार पर कोरोना का कहर</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>आज हमारा भारत देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर की चपेट में आ गया है जो पिछले साल के म्यूटेंट से भी अधिक घातक है इस  कोरोना का म्यूटेंट ब्रिटेन के म्यूटेंट से मिलता जुलता बताया जा रहा हैं जिसका प्रभाव ब्रिटेन में भयावह देखने को मिला था | करीब एक साल बीतने के बाद भी हमारे देश में कोरोना का प्रभाव समाप्त होने का नाम नही ले रहा है | इस कोरोना की दूसरी लहर के कारण भारत देश कोरोना संक्रमण के मामलों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है| कोरोना के कारण आज हर क्षेत्र प्रभावित हुआ है चाहे वह शिक्षा क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र या फिर रोजगार क्षेत्र | रोजगार क्षेत्र पर तो कोरोना का कहर टूट पड़ा है |
			</div>
		</div>
	
<p>भारत सरकार द्वारा गत वर्ष 24 मार्च को पूरे देश में लॉक डाउन लगाया गया जिसके कारण पूरे भारत में रोजगार का संकट उत्पन्न हुआ जो एक साल बीतने के बाद भी जस का तस बना हुआ है | वैसे बेरोजगारी भारत में देश आजाद होने के बाद से ही बनी हुई है लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसकी स्तिथि और अधिक भयावह हो गई है जिसका असर निम्न क्षेत्रों पर पड़ा है &#8211;</p>
<p>1) लॉक डाउन लगने के कारण छोटे व्यापारी, दुकानदार आदि के उद्योग धंधे बंद हुए |</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-shobha-kanwar-on-what-teachers-parents-and-children-should-do-in-this-covid-19-situation/7880/"><strong>कोरोना काल मे बच्चे व शिक्षक की भूमिका</strong></a></span></p>
<p>2) रोज के रोज कमाने वाले व्यक्ति लॉक डाउन लगने के कारण जहा थे वही फसे रह गए जिनके सामने भोजन, रहने के स्थान आदि की समस्या उत्पन्न हुई अनेक एनजीओ , सहायता कर्मियो , और सेवा संस्थानों ने इन प्रवासी मजदूरों को अपने अपने शहरों,कस्बों, गांवों आदि में अपने स्तर पर पहुंचाया लेकिन वहां पर भी जाने के बाद इनके सामने रोजगार का संकट बना रहा |</p>
<p>3) अनेक लघु उद्योग, घरेलू उद्योग आदि पर भी कोरोना की मार पड़ी |</p>
<p>4) प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कार्मिकों को भी कंपनी में काम बंद होने के कारण निकाल दिया गया जिसके कारण कार्मिकों के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हुआ |</p>
<p>5) कोरोना के प्रभाव को देखते हुए सरकार ने अनेक प्रतियोगिता परीक्षाओ को रद्द कर दिया जिनके एग्जाम आज तक भी सम्पन्न नही हुए है जिसके कारण प्रतियोगी छात्रों में अवसाद देखने को मिल रहे हैं और यही स्तिथि आगे भी रहने के आसार है |</p>
<p>6) कृषि के क्षेत्र में भी अनेक किसान भाई अपनी फसलों से उत्पन्न खाद्यान्न को मंडियों में लॉक डाउन की वजह से नही ले जा पा रहे और कम शुल्क पर छोटे स्तर पर बेचने को मजबूर है जिसके कारण उन्हें उचित परिश्रम का फल नही मिल पा रहा है |</p>
<p>7) देश में आवागमन बंद हुआ जिसके कारण बस,रेल,टैक्सी,ऑटो रिक्शा आदि में यात्री भार कम हुआ है और टैक्सी,ऑटो, रिक्शा वालों के जीवनयापन का संकट गहराता जा रहा है |</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-west-bengal-election-and-why-mamata-banerjee-is-not-appropriate-for-becoming-pm-of-india/7783/"><strong>ममता ने मारा गोल</strong><strong>, </strong><strong>फाउल करके</strong></a></span></p>
<p>8) देश के पर्यटक स्थलो को भी बंद कर दिया गया जिसका व्यापक असर पर्यटन उधोगों पर देखने को मिला है|</p>
<p>9) कोरोना के अधिक संक्रमण क्षेत्रों में मॉल,फिल्म सिनेमा घर,मार्केट आदि को शामिल किया गया है जिसका आर्थिक असर इन क्षेत्रों में देखने को मिला है |</p>
<p>10) शादी समारोह,सम्मेलन आदि को कोरोना के कारण रद्द किया गया या फिर सरकारी गाइड लाइन के अनुसार आयोजित किया गया जिसके कारण आमजन में निराशा छा गई |</p>
<p>जिन लोगों की नौकरियां चली गई या जिनके काम धंधे बंद पड़ गए वे सभी लोग बेरोजगारी के कारण मानसिक वेदना झेल रहे है और वर्तमान समय में अवसाद की जिंदगी जी रहे हैं| लोगो को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है जिसके कारण उनके परिवारों को संभालने में संकट उत्पन्न हो गया है| भारत की बेरोजगारी दर अप्रैल माह में लगभग 8 फीसदी पर पहुंच गई है जो 2021 के पिछले तीन महीनो में सर्वाधिक है| भारत में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों से यह बेरोजगारी की दर और अधिक बढ़ने की आशंका है जिसके कारण लोग कोरोना से ज्यादा अपने बेरोजगार होने से डरने लगे है|</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-vivek-mishra-on-covid-19-taught-us-how-we-should-behave-and-what-we-should-do-for-our-society/7697/"><strong>कोरोना से लड़ेगा इंडिया जीतेगा इंडिया: आओ मिलकर बेहतर जहान बनाएं</strong></a></span></p>
<p>कोरोना की दूसरी लहर के कारण आए आंकड़े  यह बताते है कि लगभग 70 लाख भारतीय बेरोजगार हो गए है और अनेक करोड़ो बेरोजगार होने के कगार पर है| इन आंकड़ों को देखते हुए भारत सरकार को बेरोजगारी पर ध्यान देना जरूरी है नही तो बेरोजगारी बढ़ने से देश में अराजकता का माहौल देखने को मिल सकता है और स्तिथि को संभालना मुश्किल होगा|</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong><span style="color: #ff0000;">लेखक &#8211;</span> ललित गौतम</strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-lalit-gautam-on-unemployment-due-to-covid-19-in-india/7884/">रोजगार पर कोरोना का कहर</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>उधार की जिंदगी</title>
		<link>https://tismedia.in/editorial/article/impact-of-corona-on-social-and-personal-life/7339/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=impact-of-corona-on-social-and-personal-life</link>
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		<pubDate>Tue, 27 Apr 2021 07:41:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>हर तरफ बस बेबस सूनी सड़के, मायूसी की चादर ओढ़े आती बिना राहत की शाम और पूनम कि रौशनी में भी अमावस्या सी गहरी घनघोर निराशा वाली काली डरावनी रात&#124; लोगों की जिंदगी मानो कौनसे रिवर्स गेयर में चली गई है सामान्य होने का नाम ही नहीं ले रही &#124; व्यक्ति दूसरों के सामने खुश और सामान्य रहने की कोशिश &#8230;</p>
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		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>कोरोना वायरस से पिछले 14 महीनों से समूचे जगत कि जिंदगी की गाड़ी रुक सी गई है मानो किसी ने गाड़ी को पीछे से उठा लिया हुआ हो कितनी ही कोशिश करे जिंदगी आगे बढ़ने का नाम ही नहीं ले रही | कई बार घर की बालकनी से झाँक कर देखा तो लगता है की जीवन और जिंदगी की रौनक कही खो गई है न लोगों की चहलकदमी, न बच्चों की शैतानी-खेल, न ही बड़े बुजर्गों की रोज लगने वाली आम पंचायत |
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<p>हर तरफ बस बेबस सूनी सड़के, मायूसी की चादर ओढ़े आती बिना राहत की शाम और पूनम कि रौशनी में भी अमावस्या सी गहरी घनघोर निराशा वाली काली डरावनी रात| लोगों की जिंदगी मानो कौनसे रिवर्स गेयर में चली गई है सामान्य होने का नाम ही नहीं ले रही | व्यक्ति दूसरों के सामने खुश और सामान्य रहने की कोशिश करता है और वर्क फ्रोम होम करके, काढ़ा पी रहा है, स्टीम ले रहा है, कपूर-लौंग-अजवाईन सूंघ रहा है, बेवजह ही आवश्यकता से अधिक सुबह शाम वॉक कर रहा है, योगा मेडिटेशन कर रहा है, खुद को किसी न किसी काम व्यस्त रखने का दिखावा करता है पर वास्तव में अपनी उस असली जिन्दगी को जीने के लिए तरस रहे है जो वो कोरोना से पहले जिया करते थे | रोज जब सुबह की पहली किरण निकलती है तो लगता है कल जो दिखा और महसूस किया था वह शायद कोई बुरा सपना था जो अब खत्म हो जायेगा पर जैसे-जैसे सुबह एक पहर से पहरे में प्रवेश करती है वैसे वैसे हर दिन की समानता और नकारात्मकता अपने आस-पास का वातावरण अपने में समा लेती है | दिन कि दिनचर्या की एकरूपता जीवन के महत्वपूर्ण पलों को दीमक की तरह खा रही है । यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण, निराशायुक्त और कष्टकारी है | हर कोई पल पल इसी डर के साये में जी रहा है की ना जाने कब कोरोना के नाम का दानव उन्हें या उनके परिवार के किसी जन को अपनी आगोश में लेने को बैठा है | उसके नाम और सोचने से ही आत्मा और जहन काँप उठता है क्योंकि जिंदगी कैसे लोगों के हाथों से फिसल रही है यह इस वायरस ने पलक झपकते ही दिखाया है | सुबह से लेकर रात तक व्यक्ति अपने और अपनों के लिए सोशल मीडिया, फोन, आस-पड़ोस से जिंदगी की भीख मांगते फिर रहे है | कभी ऑक्सीजन के लिए, कभी ओक्सीमीटर के लिए, कभी खून, कभी प्लाज्मा तो कभी बेड की व्यवस्था में लोगों का एक एक दिन ऐसा निकल रहा है जैसे हर रोज अपने इष्ट से अपनी और अपनों की जिंदगी और सांसे उधार ले लेकर चला रहे हो | कोरोना वायरस नामक एटम बम के जिस मुहाने पर हम आज खड़े है उसके एक हद तक बारूद भी हम ही है जिन्होंने इसे नजरअंदाज करके इसकी विनाश की आग से खेला, लोगों को आग से खेलने का चस्का चढ़ गया है और आज उसी का परिणाम है की शमशान की आग बुझ ही नहीं रही | इसके साथ सबसे बड़ी विडंबना ही यही है कि जब तक लोगों पर खुद नही गुजरती तब तक कोई सीरियस होता ही नहीं, उनके लिए तो ये कोई बीमारी ही नहीं, कोई जरुरत नहीं मास्क लगाने की, दूरी रखने की और जब तक समझ आता है तब तक कोई अपना शमशान की राख बन चुका होता है ।</p>
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<p>पर हृदय फिर से सामान्य रूप से घर से बहार जाने, सज सवर के काम पर जाने, सिनेमा देखने, ननिहाल, ददिहाल,पार्क, मॉल, स्विमिंग पूल जाने को, दोस्तों व रिश्तेदारों से मिलने और उन्हें गले लगाने के लिए उतावला है । पहली बार दिल दिमाग के कनेक्शन को समझ आया की बरसों से मिल रही टेक इट ग्रांटीड सुविधाएँ रिश्ते,नाते,यारी-दोस्ती,दूध-फल-सब्जीवाले भईया, सफाईकर्मी, डॉक्टर, नर्स, पुलिसकर्मी, 18 घंटे खुलती दुकाने, 24 घंटे वाली परिवहन सेवा, जिनकी कीमत कभी समझी नहीं थी, कितनी अनमोल और जीवन का अभिन्न अंग है | कोविड-19 पर विजय श्री हमारे हाथ तो लगेगी चाहे वह वैक्सीन से, दवा से, समय के साथ या प्रकृति से हो पर यह विजय करोड़ों की जिंदगी की बलि लेकर और जिंदगी के मायने बदलकर मिलेगी । इसीलिए सबसे अनुरोध है की जो जिंदगी इस बार मिली है और लाख जतन करने के बाद उधारी में बची है उसका ध्यान रखते हुए दूसरों का भी ध्यान रखे और मानवता का जो धर्म निभाया उसे नियमित रखे | सरकार के द्वारा जो भी नियम और विधि-विधान लागू किये जाये जैसे मास्क पहनना, हाथ धोना, सेनेटाइस करना, सामाजिक दूरी बनाये रखना आदि, उसे पूर्णता के साथ अपनाते हुए अपनी और जन रक्षा में योगदान दे क्योंकि जो भी फर्क पड़ता है वो आम इंसान पर पड़ता है खास तो बच जाते है धन से, बल से पर हमें अपने विवेकबल का उपयोग करना है |</p>
<p><strong>लेखक- डॉ. निधि प्रजापति</strong><br />
<strong>अध्यक्ष : सोसाइटी हैस ईव इंटरनेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट</strong></p>
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