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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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		<title>आईएफडब्ल्यूजे की बारां जिला कार्यकारिणी घोषित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Jan 2026 04:56:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>बारां। पत्रकारों के राष्ट्रीय स्तर के संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (आईएफडब्ल्यूजे) के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ के निर्देशानुसार व संभाग प्रभारी फिरोज खान की सहमति से संगठन के बारां जिला अध्यक्ष लक्ष्मीचंद नागर के द्वारा जिला कार्यकारिणी की घोषणा की गई है। जिला कार्यकारिणी में संरक्षक राकेश गुप्ता बारां, जिला अध्यक्ष लक्ष्मीचंद &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>बारां। पत्रकारों के राष्ट्रीय स्तर के संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (आईएफडब्ल्यूजे)<br />
के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ के निर्देशानुसार व संभाग प्रभारी फिरोज खान की सहमति से संगठन के बारां जिला अध्यक्ष लक्ष्मीचंद नागर के द्वारा जिला कार्यकारिणी की घोषणा की गई है।</p>
<p>जिला कार्यकारिणी में संरक्षक राकेश गुप्ता बारां, जिला अध्यक्ष लक्ष्मीचंद नागर बारां, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुकेश नामा केलवाड़ा, राजेन्द्र नामा बारां, उपाध्यक्ष जावेद खान नाहरगढ़, गजेन्द्र गौतम कवाई, चंद्रप्रकाश गेरा छबड़ा, राजीव भार्गव शाहबाद,<br />
महासचिव जयप्रकाश शर्मा बोहत को बनाया गया है।</p>
<p>जबकि सचिव पद पर हरिओम तिवारी अंता, प्रदीप गौतम छीपाबड़ौद, सहसचिव- अरविन्द गौतम सीसवाली, भानू चौधरी भंवरगढ़, संगठन सचिव राजेन्द्र श्रृंगी नाहरगढ़, कमल चौहान अंता- कोषाध्यक्ष राजेश पंकज बारां, प्रवक्ता चतुर्भुज पंकज बारां, कार्यकारणी सदस्य ओम नागर सीसवाली, भगवान कुशवाह नाहरगढ़, प्रदीप शर्मा अटरू, प्रियरंजन किशनगंज को बनाया गया है।</p>
<p>अध्यक्ष लक्ष्मीचंद नागर ने बताया कि जिला कार्यकारिणी का जल्द विस्तार किया जाएगा। साथ ही जल्द ब्लॉक अध्यक्ष भी घोषित किये जायेंगे।</p>
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		<title>पत्रकार स्वच्छ पत्रकारिता से समाज उत्थान में अपनी भूमिका निभाएंः संभागीय आयुक्त</title>
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		<pubDate>Sun, 05 Sep 2021 16:15:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota पत्रकारिता पत्रकार के लिए धर्म की तरह होती है। इसलिये प्रत्येक पत्रकार को साफ एवं स्वच्छ पत्रकारिता करते हुए समाजोत्थान में अपनी भूमिका निभाते रहना चाहिए। लोकतंत्र एवं आमजन की आवाज है पत्रकार ,आत्म सम्मान एवं स्वाभिमान के साथ पत्रकार सदैव आमजन के सेवार्थ में सदैव लगा रहता है इसके लिए उनका सम्मान होना &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong> </span>पत्रकारिता पत्रकार के लिए धर्म की तरह होती है। इसलिये प्रत्येक पत्रकार को साफ एवं स्वच्छ पत्रकारिता करते हुए समाजोत्थान में अपनी भूमिका निभाते रहना चाहिए। लोकतंत्र एवं आमजन की आवाज है पत्रकार ,आत्म सम्मान एवं स्वाभिमान के साथ पत्रकार सदैव आमजन के सेवार्थ में सदैव लगा रहता है इसके लिए उनका सम्मान होना भी जरूरी है। पत्रकार संगठन आईएफडब्ल्यूजे के तत्वावधान में रविवार को राधिका रिसोर्ट में आयोजित हाड़ौती पत्रकार अधिवेशन एवं सम्मान समारोह में यह बात संभागीय आयुक्त केसी मीणा ने व्यक्त कही।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/editorial/article/teachers-day-special-article-by-vivek-kumar-mishra/10600/">शिक्षक दिवसः शिक्षा, समाज और भावी पीढ़ियों का संसार यानि उम्मीदों का जहां और भी है&#8230;</a></strong></p>
<p>संभागीय आयुक्त मीणा ने हाडोती के पत्रकारों का आह्वान करते हुए कहा कि पत्रकार के सम्मुख समाज निर्माण की एक बहुत बड़ी चुनौती सामने खड़ी है। उन्होंने कहा कि पत्रकार फौजियों की तरह राष्ट्र के सच्चे प्रहरी होते हैं, जिस प्रकार देश की सरहदों की फौजी रक्षा करते है, उसी प्रकार से देश के अंदर फैली कुरीतियों को मिटाकर पत्रकार राष्ट्र निर्माण में अपना अहम योगदान देते हैं, इसलिए प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि समाज में फैली बुराईयों को अपनी कलम से वाणी देकर इनके खिलाफ आम जन को जागृत करना होगा। यदि पत्रकार पत्रकारिता की मर्यादा और सच्चाई के साथ पत्रकारिता करे तो दुनिया के सबसे बडे़ लोकतात्रिक राष्ट्र भारत को दुनिया की सर्वोच्च ताकत बनने से कोई भी नहीं रोक सकता।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/editorial/article/motivational-story-on-teachers-day-written-by-senior-litterateur-and-journalist-ravi-sharma/10597/">शिक्षा की अलख जगा रही &#8220;रागिनी&#8221; की कहानी, जिसने अपने दम पर बदल डाली स्कूल की सूरत</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सुनिश्चित होगा सम्मान</strong></span><br />
संभागीय आयुक्त के सी मीणा ने पत्रकारों को आश्वस्त किया कि उनसे संबंधित जिलों में अगर कोई समस्या आएगी या किसी विभाग की समस्या आएगी तो उसके लिए वह सदैव तत्पर रहेंगे और निराकरण करने का प्रयास करेंगे पत्रकारों का सम्मान जिलों में हो यह भी सुनिश्चित करेंगे। नगर निगम आयुक्त वासुदेव मलावत ने कहा कि पत्रकार समाज की रीड की हड्डी है जिसके लिए वह समय-समय पर प्रशासन पुलिस आमजन को कर्तव्यों का भान कराता रहता है उन्होंने पत्रकार अधिवेशन से पत्रकारों के एकीकरण एवं संगठन को मजबूत करने के कार्यक्रम को सराहा।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/editorial/article/teachers-day-special-article-by-dr-geeta-ram-sharma/10594/">शिक्षक दिवस: शिक्षा के लिए चिन्तन का दिवस या नौकरी बचाने की कोशिशों का मर्सिया</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>पूरी होंगी पत्रकारों की मांग </strong></span><br />
अधिवेशन में पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राजस्थान मध्य प्रदेश प्रभारी अंशु शुक्ला ने पत्रकारों द्वारा रखी गई मागों को पूरा करवाने का आश्वासन देते हुए कहा कि वे सरकार के समक्ष पत्रकारों की 13 सूत्रीय मांगों को रखेंगे। तथा मुख्यमंत्री तक आपकी बात को पहुंचा कर मांगों के पूर्ण कराने के प्रयास करेंगे। आई एफ डब्ल्यू जे के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि संगठन 13 सूत्री मांगों के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है तथा पत्रकारों के हितार्थ सदैव साथ खड़ा है ऐसे में अगर कोई पत्रकार के साथ कोई घटना दुर्घटना होती है तो संगठन सदैव सपोर्ट करेगा। पत्रकारों को पत्रकारिता धर्म का भी पालन करने की उन्होंने सीख दी साथ थी पत्रकारिता के क्षेत्र में नवाचार करते हुए अपनी कलम का उपयोग कर आमजन को राहत देने का आह्वान किया।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/editorial/article/teachers-day-special-article-by-dr-sushma-talesara/10591/">कहीं हम भूल तो नहीं गए एक शिक्षक की मर्यादाएं और जिम्मेदारियांः डॉ. सुषमा तलेसरा</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>जताया आभार</strong></span><br />
जिलाध्यक्ष केके शर्मा कमल ने पत्रकार संगठन आई एफ डब्ल्यू जे के इतिहास के बारे में बताते हुए 1950 से अब तक की संगठन की यात्रा के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी तथा कोटा जिले में अब तक के किए गए प्रयासों सदस्यता अभियान कोरोना जागरूकता अभियान की जानकारी दी तथा अधिवेशन में भाग लेने पर सभी पत्रकारों का आभार जताया। एंकर राधिका चौधरी ने कहा कि पत्रकार सदैव दूसरे के हितार्थ ही कार्य करता रहता है कभी अपने लिए कुछ सोचता भी नहीं है। पत्रकार एक समाज सेवक के रूप में समाज में कार्य कर रहा है ऐसे में उसे सम्मान की तकरार तो है ही सही इसके लिए आईएफडब्ल्यू ने जो बीड़ा उठाया पत्रकार सम्मान का वह काबिले तारीफ है।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-on-difference-in-press-during-emergency-and-now/9504/">प्रेस पर प्रेशर कितना ? तब और अब!- के. विक्रम राव</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>संगठित हों पत्रकार </strong></span><br />
कार्यक्रम में अतिथि के रूप में डॉक्टर चंद्रशेखर सुशील ,समाजसेवी नीरज त्रिवेदी , प्रेस क्लब अध्यक्ष गजेंद्र व्यास दिल्ली दूरदर्शन से एंकर राधिका चौधरी, आई एफ डब्ल्यू जे के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शंकर नागर , शरद दीक्षित , अनिल तिवारी, उपाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा , समेत अनेक अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम संयोजक कामेंदू जोशी ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कार्यक्रम में सहयोग करने वाले सभी दानदाताओं भामाशाह का आभार जताया। कार्यक्रम सह संयोजक दुष्यंत सिंह गहलोत ने धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। मंच संचालन ओम पंचोली ने किया। वही गहलोत को आए हुए हाडोती के तमाम पत्रकार गणों ने आभार व्यक्त किया और दुष्यन्त सिंह गहलोत को पत्रकारों के हित के लिए कार्य करने के लिए बहुत-बहुत बधाई दी। दुष्यंत सिंह गहलोत ने समस्त पत्रकारों को एक दूसरे के साथ भाईचारे एवं किसी पत्रकार के साथ कोई अभद्रता होती है तो सब पत्रकारों को एक साथ एक मंच पर खड़े होने के लिए आह्वान किया। हाडोती पत्रकार अधिवेशन में पूर्व संयुक्त निदेशक प्रभात कुमार सिंघल प्रेस क्लब अध्यक्ष गजेंद्र व्यास अख्तर खान अकेला केडी अब्बासी दिलीप शाह नरेश विजयवर्गीय भवानी सिंह सोलंकी कमलेश शर्मा समेत 1 दर्जन से अधिक पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया।</p>
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		<title>केरलः माकपा को चुनौती दूसरी संतप्ता से !</title>
		<link>https://tismedia.in/editorial/article/k-vikram-rao-challenges-of-marxist-communist-party-in-kerala-elections/6805/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=k-vikram-rao-challenges-of-marxist-communist-party-in-kerala-elections</link>
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		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Apr 2021 09:29:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>केरल मार्क्सवादी कम्युनिस्टों द्वारा उसके पति की हत्या से विधवा हुयी केके रमा भी अब विधानसभा का चुनाव लड़ रहीं हैं। सोनिया कांग्रेस—नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा रमा का पूर्ण समर्थन कर रहा है। वडकर (कोजिकोड जिला) से माकपा के प्रतिकार में रमा अपना विरोध मतपेटियों द्वारा व्यक्त करेंगी।  &#8211; के. विक्रम राव रमा की गाथा &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div class="kvgmc6g5 cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<blockquote class="aligncenter quote-light "><p>केरल मार्क्सवादी कम्युनिस्टों द्वारा उसके पति की हत्या से विधवा हुयी केके रमा भी अब विधानसभा का चुनाव लड़ रहीं हैं। सोनिया कांग्रेस—नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा रमा का पूर्ण समर्थन कर रहा है। वडकर (कोजिकोड जिला) से माकपा के प्रतिकार में रमा अपना विरोध मतपेटियों द्वारा व्यक्त करेंगी।  <cite> &#8211; के. विक्रम राव</cite></p></blockquote>
<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>रमा</strong></span> की गाथा बड़ी त्रासदी और विडंबना से भरी है। उसके स्वर्गीय पति टीजी चन्द्रशेखरन माकपा के जानेमाने नेता थे। स्टूडेन्ट फेडरेशन आफ इंडिया (एसएफआई) के क्रियाशील अगुवा रहे थे। माकपा के वरिष्ठों में थे। मगर माकपा मुख्यमंत्री पिनरायी वियजन के आलोचक थे। एक दिन (4 मई 2012) को वह ओचिंत्यन गांव से किसी विवाह समारोह में शिरकत कर मोटरबाइक पर घर लौट रहे थे, तो करीब पन्द्रह लोगों ने उन्हें काट डाला, टुकड़े—टुकड़े कर दिये। मुकदमा चला तो बारह हत्यारों को आजीवन कारावास हुआ। इनमें चार लोग माकपा के वरिष्ठ नेता थे। इस हत्या पर टिप्पणी करते पूर्व माकपा मुख्यमंत्री और राज्य के वरिष्ठतम कम्युनिस्ट नेता वीएस अच्युतानन्दन ने आक्रोश व्यक्त किया था और घोर भर्त्सना की थी। क्षेत्र में वर्षों से चन्द्रशेखरन अत्यधिक लोकप्रिय रहे। उनकी आलोचना थी कि विजयन ने माकपा को पांच सितारा संस्कृतिवाला बना दिया है। सर्वहारा की पार्टी नहीं रही। चन्द्रशेखरन खुलकर अपनी पार्टी की दक्षिणपंथी कार्यशैली की निंदा करते रहे। स्वाभाविक है पिनरायी विजयन से खुला मुकाबला हुआ। नतीजन अपनी जान गंवानी पड़ी। मगर माकपा सरकार ने हत्या पर खेद तक व्यक्त नहीं किया।</div>
</div>
<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto">चन्द्रशेखरन को जब माकपा से निष्कासित कर दिया गया था तो उन्होंने नया दल &#8221;क्रांतिकारी मार्क्सवादी पार्टी&#8221; बना ली। पूरे जिले में वे अत्यधिक जनप्रिय हो गये। तीव्र ईष्यावश उन्हें उनके ही पार्टी वालों ने हमेशा के लिये हटा दिया। अत: उनकी विधवा रमा अब चुनाव द्वारा माकपा से प्रतिशोध कर रही है। सोनिया—कांग्रेस ने यह सीट रमा के लिये छोड़ दिया है।</div>
</div>
<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto">मगर माकपा और मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन को यह बर्दाश्त नहीं हुआ। माकपा ने चार निर्दलीय प्रत्याशियों से नामांकन दाखिल करा दिया। नौ उम्मीदवारों में चार रमा के नामाराशि है। अत: असली रमा की मुश्किल और मशक्कत बढ़ गयी है।</div>
</div>
<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto"><strong><span style="color: #ff0000;">रमा</span> </strong>के विरोध में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के एक घटक जनता दल (सेक्युलर) के प्रत्याशी हैं। भाजपा का भी एक है। यूं अमूमन केरल में शरारत के तौर पर कमजोर विपक्षी उम्मीदवार अपने सशक्त प्रत्याशी की नामाराशि वाले कई प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल करा देतें हैं।</div>
</div>
<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto">मसलन मशहूर कांग्रेसी प्रत्याशी शशि थरुर के विरुद्ध तिरुअनंतपुरम लोकसभा क्षेत्र से 2009 में दो और शशि थरुर नामक उम्मीदवार थे। दोनों को मिलाकर आठ हजार वोट मिले। हालांकि असली थरुर की जीत की मार्जिन दस हजार थी। हार से बच गये। मगर केरल प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वीएम सुधीरन के नामवाले भी दो और 2004 निर्वाचन में चुनाव लड़ रहे थे। असली सुधीरन केवल एक हजार वोट से हारे, जबकि उनकी नामा​राशि वालों को 8281 वोट मिले थे। ये वोट शायद कांग्रेस अध्यक्ष को ही मिलते। वोटरों के भ्रम के कारण वे पराजित हो गये।</div>
</div>
<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto">केरल विधानसभा निर्वाचन में कई अजूबे होते रहे है। माकपा मुख्यमंत्री विजयन का विरोध नब्बे—वर्षीय पूर्व सीएम वीएस अच्युतानन्द खुलकर कर रहे हैं। उनका मानना है कि मार्क्सवाद के चिंतन, दर्शन और सिद्धांतों को तिलांजलि देकर विजयन उसे दक्षिण पंथी, प्रतिक्रियावादी, पूंजीवादी ढर्रे पर ले जा रहे है।</div>
<div dir="auto"><strong><span style="color: #ff0000;">वे</span></strong> बार—बार मुख्यमंत्री की सोना तस्करी में लिप्तता की ओर इशारा करते है। इसलिये माकपा को अपार हानि हो रही है। मगर मसला यह है कि येचूरी सीताराम और प्रकाश करात जो स्वच्छतावादी है, इस गंदगी को क्यों सह रहे हैं? छह अप्रैल को उत्तर मिल जायेगा।</div>
</div>
<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto"><strong><span style="color: #ff0000;">रमा</span> </strong>की उम्मीदवारी की तरह विधवा वी. भाग्यवती भी संघर्षशील हैं। वे मुख्यमंत्री के विरुद्ध धर्मादम क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ रही है। उसकी नौ और तेरह वर्ष की दो पुत्रियों का माकपा के गुण्डों ने बलात्कार और हत्या कर दिया था। भाग्यवती भी जनता से न्याय पाने की अपील पर चुनाव लड़ रहीं हैं। वडकर और धर्मदम विधानसभा के परिणाम भले ही शहीदों की विधवाओं के माकूल न हों, पर माकपा की कचूमर निकल जायेगी।</div>
<div dir="auto"></div>
</div>
</div>
<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto"><span style="color: #000000;"><strong>(द इनसाइड स्टोरी परिवार के संरक्षक<span style="color: #ff0000;"> <a style="color: #ff0000;" href="https://www.facebook.com/profile.php?id=100001609306781">के. विक्रम राव</a> </span>का शुमार देश के नामचीन पत्रकारों में होता है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर उन्होंने इमरजेंसी तक में स्वतंत्र आवाज के लिए जेल यात्रा की। महीनों की सजाएं भुगती। श्री राव,  वॉयस ऑफ अमेरिका, टाइम्स ऑफ इंडिया, इकोनोमिक टाइम्स, फिल्मफेयर और इलस्ट्रेटेड वीकली में प्रमुख पदों पर रहने के साथ-साथ नेशनल हेराल्ड के संस्थापक संपादक भी रह चुके हैं। प्रेस की नियामक संस्था &#8216;भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य रहने के अलावा मजीठिया वेतन बोर्ड और मणिसाना वेतन बोर्ड के सदस्य के तौर पर पत्रकारों के हित में लंबा संघर्ष किया है। <span style="color: #ff0000;"><a style="color: #ff0000;" href="https://www.facebook.com/profile.php?id=100001609306781">के.विक्रम राव</a>,</span> फिलहाल इंडियन फैडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट #IFWJ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। )</strong></span></div>
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<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/k-vikram-rao-challenges-of-marxist-communist-party-in-kerala-elections/6805/">केरलः माकपा को चुनौती दूसरी संतप्ता से !</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>West Bengal Election Campaign Review: &#8220;जंग—ए—बर्रे&#8221; बंगाल !</title>
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		<pubDate>Wed, 17 Mar 2021 08:22:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>के. विक्रम राव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंडियन फैडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट  चोटिल ममता बनर्जी बोलीं : &#8221;घायल शेरनी ज्यादा घातक होती है।&#8221; अर्थात वे भाजपा को धमका रहीं हैं कि राज्य विधानसभा चुनाव में खराब नतीजों के लिये वे लोग तैयार रहें। मार्च 15 को वे झाल्दा (पुरुलिया) रैली में बोली: &#8221;अगले कुछ दिनों में मेरे &#8230;</p>
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<li><strong>के. विक्रम राव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंडियन फैडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट </strong></li>
</ul>
<p>चोटिल ममता बनर्जी बोलीं : &#8221;घायल शेरनी ज्यादा घातक होती है।&#8221; अर्थात वे भाजपा को धमका रहीं हैं कि राज्य विधानसभा चुनाव में खराब नतीजों के लिये वे लोग तैयार रहें। मार्च 15 को वे झाल्दा (पुरुलिया) रैली में बोली: &#8221;अगले कुछ दिनों में मेरे पैर के घाव तो ठीक हो ही जायेंगे। पर अब आप सोचिये कि बंगाल में आप लोग अपनी टांगों पर चल पायेंगे?&#8221;। उनके चुनावी उदगार थे : &#8221;नरेन्द्र मोदी निकम्मे हैं। देश नहीं चला सकतें&#8221; अमित शाह पर वे बोलीं : &#8221;यदि गृहमंत्री प्रार्थना करते तो मैं अपने पार्टीजन को उनकी सभा में भेज देती। वह फीकी न रहती।&#8221; ममता बनर्जी बोलीं कि विरोधियों को विश्वास था कि घायल होकर वे चुनाव अभियान से दूर हो जायेंगी। &#8221;मगर वे अब समझ लें कि आखिरी सांस तक, लहू के अंतिम कतरे तक मैं लडूंगी। कदापि नहीं झुकूंगी। भले ही टूट जाऊं।&#8221; तो यह हुयी गर्जना !</p>
<p>पर ममता दीदी द्वारा दर्द से कराहने पर अमित शाह बोले : &#8221;आपको उन 130 भाजपायी कार्यकर्ताओं की माताओं के दिली दर्द पर कष्ट नहीं हुआ जिन्हें तृणमूल—कांग्रेस के गुण्डों ने मार डाला था?&#8221; ममता बनर्जी पर हमले को वरिष्ठ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट नेता तथा पोलित ब्यूरो सदस्य मोहम्मद सलीम ने कहा : &#8221;ऐसे फर्जी किस्से ममता बनर्जी कई दफा—गढ़ चुकीं हैं।&#8221; लोकसभा में सोनिया—कांग्रेस विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा: &#8221;ममता की यह सियासी नौटंकी है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है।&#8221; हालांकि आंचलिक नेता अरविन्द केजरीवाल तथा यूपी के अखिलेश यादव ने इस हमले पर आक्रोश जताया है।</p>
<p>मगर पहेली यही रही कि उच्चतम सुरक्षा ममता को दी गयी है। यह जेड—प्लस स्तर की है। इसमें सौ सिपाही सदैव उनके समीप ही रहते हैं। वे सब क्या कर रहे थे? मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य शासन में स्वयं गृह विभाग संभालतीं हैं। पुलिस की वे सर्वेसर्वा हैं। निर्वाचन आयोग ने जांच के बाद अपनी रपट में बताया कि यह सारा हादसा एक महज दुर्घटना थी, कोई योजनाबद्ध प्रयास नहीं था। प्रश्न भी उठा कि ममता बनर्जी द्वारा नामांकन दाखिल करने के पश्चात ही यह हमला क्यों हुआ ? इरादतन होता तो पहले ही हो सकता था, ताकि वे चुनाव ही न लड़ पातीं।</p>
<p>इस पूरे प्रकरण में एक खास पहलू और उभरा है। हमला होने के कुछ समय पूर्व नन्दीग्राम में एक शिवालय में ममता बनर्जी जलार्पण करने गयीं थीं। वे ब्राह्मणपुत्री होने का दावा करतीं हैं। मांसाहारी हैं। चण्डीपाठ करतीं हैं। इसके जवाब में भाजपा प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय का दावा है कि वे श्लोकों के उच्चारण में कई त्रुटियां करतीं हैं। हिन्दू कार्ड खेलने वालों पर ममता बनर्जी का तंज है कि वे उनसे बेहतर हिन्दू हैं। प्रत्युत्तर में भाजपाईयों की टिप्पणी थी कि जिस कदर ममता ने पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनपाया है और मुसलमान वोट बैंक रचा है, उन्हें चण्डीपाठ नहीं, बल्कि कलमा पढ़ना चाहियें।</p>
<p>ममता बनर्जी से उनके पुराने काबीना साथी और आज नंदीग्राम से उनके सीधे चुनावी प्रतिद्वंदी शुभेन्दु अधिकारी ने कहा कि : &#8221;वीरभूम क्षेत्र में जन्मी ममता नंदीग्राम के लिये बाहरी हैं।&#8221; हालांकि वीरभूम केवल तीन सौ किलोमीटर दूर है। इससे बढ़िया चपत लगी ममता को जो सदा ही वे पड़ोस के बिहारी तथा अन्य हिन्दी—भाषियों को बाहरी कहती रहतीं हैं। उनकी नजर में ये भाजपा वाले, जो लोकसभा चुनाव में 40 फीसदी वोट पाकर और 42 में से 18 सीटें जीते, एक बाहरी हिन्दीभाषियों की जमात है।</p>
<p>ममता तुनुकमिजाजी हैं जो पश्चिम बंगाल की दस वर्ष से सीएम रहीं। जब वे अटल काबीना में रेलमंत्री बनी तो सांसद भवन में पूर्व रेल मंत्री नीतीश कुमार के कमरे को चाहतीं थीं। दूसरा कक्ष नामांजूर कर दिया। सिर्फ एक कमरे के खातिर ममता ने समूची राजग सरकार की खाट खड़ी कर दी। भला हो रक्षामंत्री जार्ज फर्नाण्डिस का जिन्होंने अपने पार्टी—साथी नीतीश कुमार को समझा—बुझा कर उनका कमरा खाली करवाया। नरसिम्हा राव काबीना में ममता मंत्री थीं। अकस्मात एक दिन इस्तीफा देकर वे चल दीं, मानों रेल का डिब्बा बदल रहीं हों। उनकी हरकतों से लगता है कि राजनीति परिपक्वता अभी भी आनी बाकी है। इसी कारण से आज पश्चिम बंगाल में सारे राजनीतिक दल उनके विरुद्ध अलग—अलग मोर्चा खोलें हैं। किसी का भी साथ नहीं मिला।</p>
<p>ममता पर हुये कथित हमले पर एक किस्सा याद आया। रोम के वेटिकन नगर में पोप जॉन पाल द्वितीय की हत्या का प्रयास (1981) मोहम्मद अली आगा नाम व्यक्ति ने किया था, पर विफल रहा। अमेरिकीयों ने तब आरोप लगाया था कि सोवियत रुस के पड़ोसी बलगेरिया (तब कम्युनिस्ट राष्ट्र) के नागरिक ने यह जघन्य प्रयास किया था। राजधानी सोर्फिया के प्रेस क्लब में मेरी जिज्ञासा को शांत करते वहां की श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष ने कहा : &#8221;हत्यारा बलगेरियन कभी भी नहीं हो सकता है।&#8221; मेरे कारण पूछने पर वे बोले : &#8221;यदि बलगेरियन होता तो कभी भी निशाने से नहीं चूकता।&#8221; यही तर्क उन संदिग्ध आक्रमणकारियों पर भी लागू होता है। यदि वे वस्तुत: हत्या का इरादा रखते तो बस ढाई फिट की दूसरी से हुये हमलें में असफल न होते।</p>
<p>तो यह घटना निखालिस नकली ही है, काल्पनिक भी। फिर आजकल ममता की राजनीतिक विश्वसनीयता शून्य स्तर पर है। तो भला कौन यकीन करे? चाहकर भी जनसंवेदना वे बटोर नहीं पायीं। घटना के दूसरे दिन ही एक काबीना मंत्री और पांच विधायक उनकी पार्टी को अलविदा कह गयें। खबर थी कि ममता की एक पेन्टिंग दो करोड़ रुपये में बिकी थी। ये सियासतदां अब ​चित्रकार भी हो गयीं। इस पर उनके शत्रुओं ने आयकर विभाग का ध्यान आकर्षित कर दिया। इस राशि पर ममता ने टैक्स दिया? सबूत क्या हैं? उनके जख्म पर भी सवालों की ऐसी ही झड़ी लगी हुयी है। श्रद्धा चिट फण्ड घोटाला अब नासूर बना है। जवाब उन्हें देना होगा, वोटरों को। जय श्री राम से सख्त परहेज करनेवाली ममता को याद दिला दें कि उनके चुनाव क्षेत्र नन्दीग्राम में भी &#8221;राम&#8221; हैं !!</p>
<ul>
<li><strong>लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं एवं यह उनके निजी विचार हैं। </strong></li>
</ul>
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		<title>क्रूरतम तानाशाह की बरसीः बस यही खामोशी मेरा उत्तर है&#8230;</title>
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		<pubDate>Fri, 05 Mar 2021 15:29:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>के. विक्रम राव, अध्यक्ष, इंडियन फैडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट  एकदा राजधानी मास्को के सत्ताभवन क्रेमलिन में सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठतम अधिनायकों की बैठक हो रही थी। महासचिव निकिता खुश्चोव बता रहे थे कि: &#8221;जोसेफ स्टालिन रुसी इतिहास में क्रूरतम तानाशाह रहा। इसने लाखों निर्दोष जनों का कत्ल कराया।&#8221; इस पर पीछे से आवाज आई : &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/cover-stories/68th-death-anniversary-of-dictator-stalin/4975/">क्रूरतम तानाशाह की बरसीः बस यही खामोशी मेरा उत्तर है&#8230;</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>के. विक्रम राव, अध्यक्ष, इंडियन फैडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट </strong></span></li>
</ul>
<p>एकदा राजधानी मास्को के सत्ताभवन क्रेमलिन में सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठतम अधिनायकों की बैठक हो रही थी। महासचिव निकिता खुश्चोव बता रहे थे कि: &#8221;जोसेफ स्टालिन रुसी इतिहास में क्रूरतम तानाशाह रहा। इसने लाखों निर्दोष जनों का कत्ल कराया।&#8221; इस पर पीछे से आवाज आई : &#8221;कामरेड, तब आपने विरोध क्यों नहीं किया ?&#8221; खुश्चेव ने पूछा: &#8221;किसका प्रश्न है यह?&#8221; सभागार में एकदम शांति पसर गयी। खुश्चेव ने कहा: &#8221;बस यही खामोशी मेरा उत्तर है।&#8221;</p>
<p>आज (5 मार्च 2021) <span style="color: #000000;">रुसी तानाशाह जोसेफ विस्सारवियानोविच स्टालिन की 68वीं पुण्य (मुक्ति) तिथि</span> है। एक अनुमान में उसने अपने राज में डेढ़ करोड़ को मौत दी। द्वितीय विश्वयुद्ध में 90 लाख रुसी सैनिकों की बलि चढ़ाई। <strong><span style="color: #ff0000;">इसी युद्ध में स्टालिनग्राद में पकड़े गये नाजी सेना के पराजित जवानों में थे इतालवी तानाशाह तथा हिटलर के हमराही बेनिटो मुसोलिनी के एक सिपाही। उनका नाम था स्टिफानो मियानों। उनकी पुत्री है सोनिया मियानो—गांधी, अब भारतीय कांग्रेसी नेता।</span></strong></p>
<p>संसद में शोकसभा (6 मार्च 1953) के दौरान स्टालिन को श्रद्धांजलि देते हुये जवाहरलाल नेहरु ने कहा था: &#8221;इस रुसी नेता ने अपना वजन और प्रभाव विश्वशांति के पक्ष में डाला था।&#8221; स्टालिन ने कभी भी अपने विरोधियों को जीवित नहीं छोड़ा था। महान विचारक और लेनिन के विशेष अनुयायी लियोन ट्रॉट्स्की को देश से निकाला। मेक्सिको में वे शरणार्थी थे जब स्पेनी कम्युनिस्ट जेइम मर्काडर ने हथौड़े से ट्रॉट्स्की का सिर फोड़कर हत्या (अगस्त 1948) कर दी थी। स्टालिन ने भेजा था।</p>
<p>स्टालिन के सर्वाधिक निष्ठावान अनुगामी थे चीन के माओ जेडोंगे और उत्तर कोरिया के किम इल सुंग। दोनों के नाम असंख्य हत्याओं का कीर्तिमान दर्ज है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी में बीटी रणदिवे, पीसी जोशी, श्रीपाद अमृत डांगे, ज्योति बासु आदि स्टालिन के कट्टर अनुयायी थे।</p>
<p>यह सोवियत और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टियों के मौकापरस्ती का दृष्टांत है। द्वितीय विश्वयुद्ध के पहले दौर में हिटलर से स्टालिन ने &#8221;शाश्वत&#8221; मित्रता की संघि पर हस्ताक्षर किये। तब भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ने साम्राज्यवादी युद्ध का नाम देकर गांधीजी और कांग्रेस का ब्रिटेन के विरुद्ध जनान्दोलन में साथ दिया। कुछ समय बाद नाजी जर्मनी ने रुस पर आक्रमण किया तो स्टालिन ने ब्रिटेन से मित्रता की संधि कर ली। इस पर तत्काल भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ने ब्रिटिश—विरोधी साम्राज्यवादी जंग को बंद कर ब्रिटेन का समर्थन किया। कांग्रेस का साथ छोड़ दिया। &#8221;भारत छोड़ो&#8221; आन्दोलन की मुखालफत की। रातों—रात जनयुद्ध कहकर ये भारतीय कम्युनिस्ट ब्रिटिश राज और उसकी पुलिस के मुखबिर बन गये। स्वाधीनता आंदोलन के साथ द्रोह किया। ज्योति बसु तब नेताजी सुभाष बोस हिटलर—टोजो का कुत्ता कहते थे। नई दिल्ली के गोलमार्केट में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का मुख्यालय ए.के. गोपालन भवन है। वहां माओ तथा स्टालिन के बड़े चित्र अभी भी लगे हैं।</p>
<p>स्टालिन की कुछ मशहूर उक्तियां दिलचस्प हैं। उन्होंने कहा था : &#8221;सत्ता की शक्ति लम्बी बन्दूक से आती है।&#8221; (माओ ने भी मिलती—जुलती बात कही थी : &#8221;राजशक्ति का स्रोत बन्दूक की नाल में है&#8221;)। स्टालिन ने आम चुनाव पर कहा था : &#8221;जनता बस जान ले कि मतदान हो रहा है। जो वोट डालते है वे कुछ भी तय नहीं करते। जो मतगणना करता है, वे ही हर बात तय करते हैं।&#8221; स्टालिन के समय ईवीएम नहीं था। इस सोवियत पुरोधा की अवधारणा थी कि रेशमी दस्तानों से क्रान्ति नहीं की जाती। वे कहते थे कि &#8221;इतिहास ही हीरो बनाता है, न कि हीरो इतिहास को।&#8221; स्वयं को वे सोवियत इतिहास की देन मानते थे। मौत पर बड़ा उदार नजरिया था। उनकी राय थी कि एक आदमी मारा गया तो सिर्फ त्रासदी है। लाखों मारे गये तो बस आंकड़ों का विषय है।</p>
<p>क्रीमिया में सागरतटीय याल्टा द्वीप में हिटलर—विरोधी मोर्चे के नेताओं की बैठक (4—11 फरवरी 1945) हुयी थी। एजेण्डा था कि विश्वयुद्ध में जीत के बाद इन तीनों विजेता राष्ट्रों से कब्जियायी जमीन का बटवारा कैसे होगा? तभी नाश्ते पर भेंट में ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा कि, &#8221;कल रात मैंने एक सपना देखा। वैश्विक सरकार बनी है। मैं उसका प्रधानमंत्री बना हूं।&#8221; राष्ट्रपति फ्रेंकलिन रूजवेल्ट ने कहा : &#8221;ठीक ऐसा ही सपना मैंने भी देखा। फर्क बस इतना था कि मैं विश्व का राष्ट्रपति बना।&#8221; अब बारी थी स्टालिन के बोलने की। उन्होंने अपने पाइप से राख झाड़ते हुये कहा : &#8221;और किसने आप दोनों को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नामित किया ?&#8221; फिर मुस्करा दिये।</p>
<p>भले ही स्टालिन क्रूरतम जल्लाद कहलाये पर एशिया और अफ्रीकी गुलाम राष्ट्रों के स्वाधीनता—संघर्ष् में मददगार थे। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी को अकूत वित्तीय सहायता तो बेतहाशा मिलती थी। &#8221;सोवियत भूमि&#8221; पुरस्कार और फ्री रुसी यात्रा का करीब सारे प्रमुख कम्युनिस्ट नेता लुत्फ ले चुकें हैं। चिकित्सा लाभ भी। एक हमारे कम्युनिस्ट पत्रकार साथी थे। स्टालिन के अनन्य प्रशंसक। उन्हें कब्ज की शिकायत थी। वे चिकित्सा हेतु मास्को गये। लौटकर भारत आये तो उन्हें पेचिश हो गयी थी। दस्त थमते नहीं थे। फिर भी हमारे साम्यवादियों को वोल्गा के उस पार स्वर्ग ही नजर आया करता था। इन सब को पकड़ कर मिखाइल गोर्बाचोव ने उनके गोड़ तोड़ को दिये। सोवियत साम्राज्य खत्म् कर डाला। तो हमारी आज ऐसे जोसेफ स्टालिन को हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">यह लेखक के अपने विचार हैं&#8230;। लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। </span></strong></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/cover-stories/68th-death-anniversary-of-dictator-stalin/4975/">क्रूरतम तानाशाह की बरसीः बस यही खामोशी मेरा उत्तर है&#8230;</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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