<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Vineet Singh Archives - TIS Media</title>
	<atom:link href="https://tismedia.in/tag/vineet-singh/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://tismedia.in/tag/vineet-singh/</link>
	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
	<lastBuildDate>Tue, 11 Nov 2025 07:32:48 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/04/cropped-tis-media-logo-scaled-2-32x32.jpg</url>
	<title>Vineet Singh Archives - TIS Media</title>
	<link>https://tismedia.in/tag/vineet-singh/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>डेथ हॉक्सः हस्तियों की नहीं संवेदनाओं की मौत</title>
		<link>https://tismedia.in/cover-stories/death-hoaxes-fake-news-of-death/12996/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=death-hoaxes-fake-news-of-death</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 07:32:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[KOTA NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[#deathhoaxes #कहतकबीर #जिंदगीसिंगलकॉलम #KotaDiary #चिट्ठियांखुदढूंढेअपनापता #vineetsingh]]></category>
		<category><![CDATA[Actor Dharmendra]]></category>
		<category><![CDATA[death hoax]]></category>
		<category><![CDATA[fake news of death]]></category>
		<category><![CDATA[Hema Malini]]></category>
		<category><![CDATA[Vineet Singh]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=12996</guid>

					<description><![CDATA[<p>विनीत सिंह  जीते जी मौत के इस जाल में तमाम फिल्मी-कारोबारी-सियासी हस्तियां फस चुकी हैं। अचानक उनकी मौत की झूठी खबर सोशल मीडिया पर ऐसी वायरल होती है कि सबसे पहले खबर परोसने की प्रतिस्पर्धा में शामिल देश के तमाम नामचीन मीडिया संस्थान भी “डेथ हॉक्स” के इस बवंडर का शिकार हो जाते हैं। आज &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/cover-stories/death-hoaxes-fake-news-of-death/12996/">डेथ हॉक्सः हस्तियों की नहीं संवेदनाओं की मौत</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h5 style="text-align: center;">
		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>मौत की कामना&#8230;! आखिर, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं के पतन की पराकाष्ठा इसके अलावा और क्या हो सकती है? और, यदि यह कामना बार-बार की जाए तो मान लेना चाहिए कि वह व्यक्ति, समाज और व्यवस्था मानसिक एवं नैतिक क्षरण के गहन शिकार हो चुके है। डिजिटल युग में भारतीय समाज व्यवस्था भी “डेथ हॉक्स” के संकट में फंसती जा रही है।
			</div>
		</div>
	</h5>
<ul>
<li><strong>विनीत सिंह </strong></li>
</ul>
<p>जीते जी मौत के इस जाल में तमाम फिल्मी-कारोबारी-सियासी हस्तियां फस चुकी हैं। अचानक उनकी मौत की झूठी खबर सोशल मीडिया पर ऐसी वायरल होती है कि सबसे पहले खबर परोसने की प्रतिस्पर्धा में शामिल देश के तमाम नामचीन मीडिया संस्थान भी “डेथ हॉक्स” के इस बवंडर का शिकार हो जाते हैं।</p>
<p>आज तड़के मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र की मौत की खबर सबसे ताजा डेथ हॉक्स था। देर रात से नेटिजन्स इसे फैलाने की कोशिश में लगे थे और सुबह होते होते मीडिया संस्थान इसके शिकार हो गए। तमाम नामचीन मीडिया संस्थानों के डिजिटल प्लेटफार्म धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि अर्पित करते नजर आए। जिसके बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ पड़ी।</p>
<p>धर्मेंद्र की मौत की खबर सुनते ही उनका परिवार सकते में आ गया और खुद उनकी पत्नी एवं सत्ताधारी दल भाजपा की सांसद हेमा मालिनी को मीडिया के सामने आकर धर्मेद्र की मौत की खबर को गलत बताया। साथ ही उन्होंने ऐसी खबरों के लिए मीडिया संस्थानों को लताड़ा भी। <br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>डेथ हॉक्स (Death Hoaxes)</strong><br class="html-br" />अब सवाल उठता है कि यह डेथ हॉक्स होता क्या है? डेथ हॉक्स उन अफवाहों या झूठी खबरों को कहते हैं जिनमें किसी व्यक्ति, खासकर किसी प्रसिद्ध व्यक्ति, की मृत्यु की फर्जी जानकारी फैलाई जाती है। ये अफवाहें ज्यादातर सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए फैलती हैं और तेजी से वायरल हो जाती हैं।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>डेथ हॉक्स के मुख्य पहलू:</strong><br class="html-br" />झूठी जानकारी: इसमें किसी जीवित व्यक्ति की मौत के बारे में झूठी खबर फैलाई जाती है।<br class="html-br" />सोशल मीडिया पर प्रसार: ये अफवाहें फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप, और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के जरिए फैलती हैं।<br class="html-br" />लोगों को भ्रमित करना: ये खबरें अक्सर लोगों को भ्रमित और चिंतित कर देती हैं, खासकर उस व्यक्ति के प्रशंसकों और परिजनों को।<br class="html-br" />प्रसिद्ध लोगों को निशाना बनाना: अक्सर फिल्मी सितारे, राजनेता, या खेल जगत की हस्तियां इस तरह की अफवाहों का शिकार होती हैं।<br class="html-br" />डेथ हॉक्स के परिणाम:<br class="html-br" />परिवार पर असर: उस व्यक्ति के परिवार और करीबी लोगों को मानसिक और भावनात्मक तकलीफ का सामना करना पड़ता है।<br class="html-br" />समाज में दहशत: अफवाह फैलने से समाज में भ्रम और दहशत का माहौल बनता है।<br class="html-br" />विश्वास का ह्रास: लगातार ऐसी अफवाहों से लोगों का ऑनलाइन सूचनाओं पर विश्वास कम हो सकता है।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>डेथ हॉक्स के प्रमुख उदाहरण</strong><br />
इससे पहले &#8220;31 सितंबर 2024&#8230; रामजन्म भूमि आंदोलन के अगुआ महंत नृत्य गोपाल दास भी “जीते जी मौत” के इस जाल में फंस गए। दिन चढ़ते ही अचानक उनके न<span class="html-span xexx8yu xyri2b x18d9i69 x1c1uobl x1hl2dhg x16tdsg8 x1vvkbs x3nfvp2 x1j61x8r x1fcty0u xdj266r xat24cr xm2jcoa x1mpyi22 xxymvpz">&#x200d;</span>िधन की सूचना सोशल मीड<span class="html-span xexx8yu xyri2b x18d9i69 x1c1uobl x1hl2dhg x16tdsg8 x1vvkbs x3nfvp2 x1j61x8r x1fcty0u xdj266r xat24cr xm2jcoa x1mpyi22 xxymvpz">&#x200d;</span>िया पर वायरल होने लगी। वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष और मणिराम दास छावनी के महंत हैं, नतीजन शाम होते-होते तो श्रद्धांजलियों का तांता ही लग गया। अगले रोज उनके मीड<span class="html-span xexx8yu xyri2b x18d9i69 x1c1uobl x1hl2dhg x16tdsg8 x1vvkbs x3nfvp2 x1j61x8r x1fcty0u xdj266r xat24cr xm2jcoa x1mpyi22 xxymvpz">&#x200d;</span>िया प्रभारी शरद शर्मा ने वीड<span class="html-span xexx8yu xyri2b x18d9i69 x1c1uobl x1hl2dhg x16tdsg8 x1vvkbs x3nfvp2 x1j61x8r x1fcty0u xdj266r xat24cr xm2jcoa x1mpyi22 xxymvpz">&#x200d;</span>ियो जारी करते हुए इसे अफवाह बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटो नृत्य गोपाल दास की नहीं, बल्कि रामकृष्ण मिशन के तत्कालीन अध्यक्ष स्मरानंद जी की है। 5 मार्च 2024 के दिन पीएम मोदी कोलकता स्थिति अस्पताल में उन्हें देखने गए थे। उसे ही नृत्य गोपाल दास जी का बताकर वायरल किया जा रहा है।&#8221;</p>
<p>तमाम हस्तियां ऐसी हैं जिनकी मौत की झूठी खबरें फैलाई गईं। जानते हैं विस्तार सेः- <br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>1. दिलीप कुमार (कई बार)</strong><br class="html-br" />बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार के बारे में उनकी मृत्यु की कई बार झूठी खबरें फैलाई गईं, खासकर उनकी बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य के कारण। 2013, 2016 और 2017 में सोशल मीडिया पर बार-बार उनकी मौत की अफवाहें फैलीं।<br class="html-br" />परिवार पर प्रभाव: उनकी पत्नी सायरा बानो को इन अफवाहों का बार-बार खंडन करना पड़ा, और उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की कि वे बिना सत्यापन के ऐसी संवेदनशील जानकारी न फैलाएं। ऐसी अफवाहें परिवार के लिए बेहद कष्टदायक थीं।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>2. अमिताभ बच्चन (2012)</strong><br class="html-br" />2012 में अमिताभ बच्चन के बारे में सोशल मीडिया पर अफवाह फैली कि उनकी कार दुर्घटना में मौत हो गई है। यह खबर इतनी तेजी से फैली कि खुद अमिताभ बच्चन को ट्वीट करके इसका खंडन करना पड़ा।<br class="html-br" />परिवार पर प्रभाव: इस खबर ने न केवल उनके परिवार, बल्कि उनके लाखों प्रशंसकों को भी सदमे में डाल दिया। उनके परिवार को चिंता और तनाव का सामना करना पड़ा, और उन्हें लगातार कॉल्स और संदेशों का जवाब देना पड़ा।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>3. फारूख शेख (2013)</strong><br class="html-br" />प्रसिद्ध अभिनेता फारूख शेख के बारे में उनकी मृत्यु के समय भी अफवाहें फैली थीं। वे 2013 में दिल का दौरा पड़ने से असमय निधन हो गए थे, लेकिन सोशल मीडिया पर कई प्रकार की अटकलें और गलत खबरें फैलीं, जो उनके निधन की सटीक जानकारी नहीं देती थीं।<br class="html-br" />परिवार पर प्रभाव: उनके परिवार को पहले ही दुखद घटना से गुजरना पड़ा था, और इस प्रकार की अफवाहों ने उनकी पीड़ा और बढ़ा दी। परिवार को इससे और भी मानसिक आघात झेलना पड़ा।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>4. हनी सिंह (2014)</strong><br class="html-br" />प्रसिद्ध गायक और रैपर यो यो हनी सिंह के बारे में 2014 में यह अफवाह फैली थी कि वे एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए हैं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। यह खबर तेजी से वायरल हो गई, लेकिन बाद में हनी सिंह ने खुद सामने आकर इस अफवाह को गलत बताया।<br class="html-br" />परिवार पर प्रभाव: ऐसी अफवाहों से हनी सिंह के परिवार को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। उनके परिवार को लगातार प्रशंसकों और मीडिया के सवालों का जवाब देना पड़ा।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>5. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (2014)</strong><br class="html-br" />2014 में सोशल मीडिया पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मृत्यु की अफवाहें फैल गई थीं। व्हाट्सएप पर यह खबर वायरल हो गई कि केजरीवाल की एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई है। बाद में, केजरीवाल को खुद इन अफवाहों का खंडन करना पड़ा।<br class="html-br" />परिवार पर प्रभाव: ऐसी अफवाहें उनके परिवार के लिए काफी परेशान करने वाली थीं, क्योंकि अचानक आने वाली इस प्रकार की खबरें मानसिक आघात का कारण बनती हैं।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>6. शाहरुख खान (2017)</strong><br class="html-br" />2017 में अभिनेता शाहरुख खान के बारे में भी अफवाह फैली थी कि एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई है। यह फर्जी खबरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैल गई थीं।<br class="html-br" />परिवार पर प्रभाव: इस अफवाह ने शाहरुख के परिवार और दोस्तों को बहुत परेशान किया। उन्हें इन अफवाहों का खंडन करना पड़ा, और इस घटना से परिवार को काफी तनाव हुआ।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>7. कादर खान (2017-2018)</strong><br class="html-br" />लोकप्रिय अभिनेता और लेखक कादर खान के बारे में 2017 और 2018 में कई बार उनकी मृत्यु की झूठी खबरें फैलाई गईं। कादर खान की बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण ऐसी अफवाहें बार-बार फैलाई गईं, जो उनके परिवार के लिए बेहद कष्टकारी थीं।<br class="html-br" />परिवार पर प्रभाव: कादर खान के बेटे सरफराज खान ने मीडिया से अपील की कि उनके पिता की मौत के बारे में गलत खबरें न फैलाएं, क्योंकि इससे उनका परिवार बेहद दुखी होता है।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>8. लता मंगेशकर (2019)</strong><br class="html-br" />प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर के बारे में 2019 में सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैली थी कि उनकी मृत्यु हो गई है। लता जी के परिवार ने इस खबर का खंडन किया और इसे पूरी तरह से गलत बताया।<br class="html-br" />परिवार पर प्रभाव: लता मंगेशकर के परिवार ने कहा कि यह खबर उन्हें बहुत दुखदाई लगी, क्योंकि उनके प्रशंसक और करीबी लोग लगातार फोन करके सच्चाई जानने की कोशिश कर रहे थे। ऐसी अफवाहों ने परिवार को मानसिक रूप से परेशान किया।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>9. किरण खेर (2021)</strong><br class="html-br" />2021 में अभिनेत्री और सांसद किरण खेर के बारे में यह झूठी खबर फैली कि उनकी मृत्यु हो गई है। वे उस समय कैंसर का इलाज करवा रही थीं, और इस अफवाह ने उनके परिवार और प्रशंसकों को सदमे में डाल दिया।<br class="html-br" />परिवार पर प्रभाव: उनके पति अनुपम खेर ने ट्विटर पर इस अफवाह का खंडन किया और कहा कि ऐसी खबरें उनके परिवार के लिए बेहद तनावपूर्ण और दुखदाई हैं, खासकर जब कोई पहले से ही गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>भ्रामक मौत की अफवाहों के प्रभाव</strong><br class="html-br" />इन झूठी खबरों का सबसे बड़ा प्रभाव उन हस्तियों के परिवार और करीबी लोगों पर पड़ता है। कुछ प्रमुख भावनात्मक और मानसिक प्रभाव निम्नलिखित हैं:<br class="html-br" /><br class="html-br" />1. मानसिक तनाव: परिवार को बार-बार ऐसी खबरें सुनने के बाद मानसिक तनाव झेलना पड़ता है। अचानक आने वाली मौत की अफवाहें परिवार को डर और चिंता में डाल देती हैं।<br class="html-br" />2. निजता का उल्लंघन: ऐसी खबरों के बाद मीडिया और प्रशंसकों का ध्यान अचानक बढ़ जाता है, जिससे परिवार की निजता का उल्लंघन होता है और उन्हें अनचाहा ध्यान आकर्षित करना पड़ता है।<br class="html-br" />3. भावनात्मक आघात: खासकर तब, जब व्यक्ति वास्तव में बीमार हो या गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा हो, मौत की झूठी खबरें परिवार के लिए एक बड़ा भावनात्मक आघात बन जाती हैं।<br class="html-br" />4. सोशल मीडिया का दुरुपयोग: ऐसे मामलों में सोशल मीडिया का उपयोग बेवजह अफवाह फैलाने के लिए किया जाता है, जिससे केवल हानि होती है। यह फर्जी खबरों की प्रवृत्ति को और बढ़ावा देता है।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>समाधान</strong><br class="html-br" />भारत जैसे देश में, जहां कानून प्रवर्तन कमजोर हो सकता है और एक बड़ा हिस्सा डिजिटल साक्षरता में पीछे है, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले घृणा और फेक कंटेंट को नियंत्रित करना एक जटिल चुनौती है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर गलत जानकारी और घृणा फैलाने वाली सामग्री तेजी से फैलती है, खासकर व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर जैसे लोकप्रिय प्लेटफार्मों पर। हालांकि, इस समस्या के समाधान के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जा सकते हैं, और विभिन्न वैश्विक संगठनों ने इस पर व्यापक शोध किया है।<br class="html-br" />1. स्व-नियमन<br class="html-br" />भारत में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर वायरल होने वाली सामग्री को नियंत्रित करने का पहला कदम स्व-नियमन है। प्लेटफार्मों को अपने एल्गोरिदम में बदलाव करके नकारात्मक और झूठी जानकारी के प्रसार को सीमित करना होगा। इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की जिम्मेदारी तय करनी होगी। फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफार्मों ने कुछ कदम उठाए हैं, जैसे कंटेंट मॉडरेशन, फेक न्यूज डिटेक्शन और फेक्ट-चेकिंग पार्टनरशिप। हालांकि, इस क्षेत्र में और अधिक कड़े उपायों की आवश्यकता है।<br class="html-br" />2. एल्गोरिदम में सुधार<br class="html-br" />सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के एल्गोरिदम को इस तरह से डिज़ाइन किया जाना चाहिए कि घृणास्पद और झूठी जानकारी कम से कम दिखाई जाए, और सही, प्रमाणित जानकारी को प्राथमिकता दी जाए। स्वतंत्र फैक्ट-चेकिंग नेटवर्क: प्लेटफार्मों को स्वतंत्र फैक्ट-चेकिंग संगठनों के साथ मिलकर फेक कंटेंट को तुरंत हटाने और सही जानकारी फैलाने के लिए काम करना चाहिए।<br class="html-br" />3. डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना<br class="html-br" />भारत में डिजिटल साक्षरता की कमी फेक न्यूज और घृणास्पद कंटेंट के प्रसार का एक प्रमुख कारण है। लोग अक्सर बिना सत्यापन किए जानकारी को साझा कर देते हैं। सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका: डिजिटल साक्षरता को बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। इसके लिए भारत सरकार और बड़े तकनीकी प्लेटफार्मों को मिलकर काम करना होगा।<br class="html-br" />4. शिक्षा प्रणाली में सुधार: भारत की शिक्षा प्रणाली में डिजिटल साक्षरता और मीडिया साक्षरता पर जोर दिया जाना चाहिए, जिससे लोग ऑनलाइन मिलने वाली जानकारी को सत्यापित करना सीखें और फेक न्यूज से बच सकें।<br class="html-br" />5. सख्त कानून और कानून का प्रवर्तन<br class="html-br" />भारत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) के तहत कुछ प्रावधानों का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और घृणा फैलाने वाले कंटेंट पर लगाम लगाई जा सकती है। हालांकि, अभी भी कई क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। वर्तमान कानूनों में बदलाव कर उन्हें अधिक कठोर बनाना चाहिए ताकि फेक न्यूज और घृणा फैलाने वाले कंटेंट फैलाने वालों पर तुरंत कार्रवाई हो सके। ऑनलाइन अपराधों के मामलों में त्वरित न्याय दिलाने के लिए विशेष अदालतों की स्थापना की जा सकती है, ताकि इस तरह के अपराधियों को तुरंत सजा दी जा सके और एक उदाहरण स्थापित किया जा सके।<br class="html-br" /><br class="html-br" /><strong>निष्कर्ष</strong><br class="html-br" />भारत में कमजोर कानून व्यवस्था और डिजिटल साक्षरता की कमी के बावजूद, सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर हेट और फेक कंटेंट को नियंत्रित करना असंभव नहीं है। इसके लिए कानून में सुधार, सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी, डिजिटल साक्षरता में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सिफारिशों का पालन करने की आवश्यकता है। वैश्विक संगठनों जैसे यूनिसेफ, संयुक्त राष्ट्र, और ऑक्सफोर्ड इंटरनेट इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए शोध ने सुझाव दिया है कि डिजिटल गवर्नेंस, AI आधारित मॉडरेशन, और स्व-नियमन के जरिए इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/cover-stories/death-hoaxes-fake-news-of-death/12996/">डेथ हॉक्सः हस्तियों की नहीं संवेदनाओं की मौत</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सर वीके बंसलः “बुंदेले” कभी मरा नहीं करते&#8230;</title>
		<link>https://tismedia.in/kota-coaching/founder-of-bansal-classes-coaching-guru-vk-bansal-passed-away/7704/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=founder-of-bansal-classes-coaching-guru-vk-bansal-passed-away</link>
					<comments>https://tismedia.in/kota-coaching/founder-of-bansal-classes-coaching-guru-vk-bansal-passed-away/7704/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 May 2021 09:27:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Article]]></category>
		<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Editorial]]></category>
		<category><![CDATA[Kota Coaching]]></category>
		<category><![CDATA[KOTA NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[RAJASTHAN]]></category>
		<category><![CDATA[Shradhanjali]]></category>
		<category><![CDATA[STATE]]></category>
		<category><![CDATA[TIS Utility]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[VTalk]]></category>
		<category><![CDATA[Bansal Classes]]></category>
		<category><![CDATA[Founder of Kota Coaching]]></category>
		<category><![CDATA[Haal E Dil]]></category>
		<category><![CDATA[kota Coaching]]></category>
		<category><![CDATA[Kota Diary]]></category>
		<category><![CDATA[kota factory]]></category>
		<category><![CDATA[kota Hindi News]]></category>
		<category><![CDATA[kota latest News]]></category>
		<category><![CDATA[kota news]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[Vineet Singh]]></category>
		<category><![CDATA[vk bansal]]></category>
		<category><![CDATA[VK Bansal passed away]]></category>
		<category><![CDATA[कहत कबीर]]></category>
		<category><![CDATA[चिट्ठियां ढूंढे अपना पता]]></category>
		<category><![CDATA[जिंदगी सिंगल कॉलम]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=7704</guid>

					<description><![CDATA[<p>यकीनन बंसल साहब की लौ नापने की जुर्रत कर रहा हूं&#8230; वो भी तब जब ऊर्जा से ओत प्रोत यह मशाल आज बुझ चुकी है&#8230; लेकिन, कोई एक वजह तो हो ऐसी जुर्रत न करने की&#8230; मशाल ही तो बुझी है, लेकिन वीके बसंल ऐसा लाइट हाउस खड़ा करके गए जिसकी रोशनी में न सिर्फ &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/kota-coaching/founder-of-bansal-classes-coaching-guru-vk-bansal-passed-away/7704/">सर वीके बंसलः “बुंदेले” कभी मरा नहीं करते&#8230;</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<blockquote class="aligncenter quote-light "><p>यकीनन बंसल साहब की लौ नापने की जुर्रत कर रहा हूं&#8230; वो भी तब जब ऊर्जा से ओत प्रोत यह मशाल आज बुझ चुकी है&#8230; लेकिन, कोई एक वजह तो हो ऐसी जुर्रत न करने की&#8230; मशाल ही तो बुझी है, लेकिन वीके बसंल ऐसा लाइट हाउस खड़ा करके गए जिसकी रोशनी में न सिर्फ कोटा, बल्कि हजारों आईआईटियंस देश ही नहीं दुनिया भर में अपनी रोशनी फैलाते रहेंगे&#8230; हमेशा हमेशा के लिए&#8230;। दीगर है कि&#8230; रोशनी की चकाचौंध, अक्सर हमारी आंखें ऐसे चौंधिया देती है कि हम भूल जाते हैं कि जिंदगी किसी दीपक का ही दूसरा नाम है&#8230; जहां हर रोज खुद के इर्द गिर्द उजाला करने को जलना पड़ता है &#8230; जिंदगी के तमाम अंधेरों से लड़कर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले ‘‘कोचिंग गुरु’’ पितामह सर वीके बंसल जैसे दीपक की तरह&#8230;!!! <span style="color: #ff0000;"><strong><cite>&#8211; विनीत सिंह </cite></strong></span></p></blockquote>
<p>ये जो तस्वीर में व्हीलचेयर पर बैठा शख्स दिखाई पड़ रहा है, वो किसी पहचान का मोहताज नहीं है&#8230; हजारों आईआईटियंस का <span style="color: #ff0000;"><strong>&#8216;लाइट हाउस&#8217;</strong></span> है&#8230; जी हां ! सही पहचाने आप, इंजीनियर विनोद कुमार बंसल ही है इनका नाम&#8230; पूरी दुनिया इन्हें वीके बंसल यानि बंसल सर के नाम से जानती है&#8230; आईआईटी एंट्रेंस एग्जाम के एक दो नहीं बल्कि पूरे छह ऑल इंडिया टॉपर दिए हैं इन्होंने&#8230; और 25 हजार से ज्यादा आईआईटियंस तैयार कर चुके हैं बंसल सर&#8230; वो भी अकेले के दम पर!!</p>
<p>जवानी के उस मोड़ पर जब जिंदगी सबसे हसीन होती है&#8230; कदम ही साथ छोड़ दें तो लोग जीने तक से इन्कार कर देते हैं, लेकिन इस बुंदेले ने कुदरत की बेरुखी को भी रोशनी बिखेरने का जरिया बना डाला&#8230; एक लालटेन, एक मेज और एक बच्चे के साथ चल पड़ा सफलताओं की नई इबारत लिखने&#8230; इस शख्स ने महज कोटा कोचिंग की नींव ही नहीं रखी, बल्कि पहला आईआईटियंस और आईआईटी-जेईई का पहला टॉपर देकर सफलताओं का ऐसा चस्का लगाया जो तीन दशक बाद भी जारी है&#8230;!!!</p>
<p>&#8220;पिताजी सभी के घर रोशन हैं,  हमारे घर में ही अंधेरा क्यों है? मैं रात को ज्यादा नहीं पढ़ पाता हूं।&#8221;  मुश्किलें बया करते मासूम बच्चे का सवाल जब पिता के कानों से टकराया तो दो पल के लिए वह सन्न रह गए&#8230; लेकिन, हड़बड़ाने और झुंझलाने के बजाय उस पिता ने बच्चे को ऐसा जवाब दिया जिसने उसके साथ ही बेरोजगारी और फांका परस्ती के मुश्किल दौर में फंसे हजारों कोटा वासियों की भी जिंदगी बदल दी&#8230; !</p>
<p>पिता बोले &#8216;बेटा तुम पढ़ोगे तभी घर में बिजली आ सकेगी&#8230;!&#8217; कक्षा 6 के इस वाकये को कोई और होता तो भूल भी जाता, लेकिन वो बुंदेला यानि वीके बंसल नहीं भूला&#8230; पिता का जवाब सुनने के बाद उस बच्चे ने इतनी मेहनत की, कि कक्षा 6 का टॉपर बन गया&#8230; रिपोर्ट कार्ड देखकर सरकार ने 372 रुपए की स्कॉलरशिप भी दे डाली&#8230; स्कॉलरशिप के इसी पैसे से मासूम विनोद के घर बिजली जल सकी&#8230; पंखा लगा और बल्ब चमक उठा&#8230;!</p>
<p>वर्ष 1971 में बीएचयू से मैकेनिकल ग्रेजुएट होने के बाद उन्होंने कोटा की जेके सिंथेटिक में काम शुरू किया&#8230; यहां भी महज कुछ ही रोज में योग्यता और लगन के झंडे गाढ़ दिए&#8230; लेकिन, किस्मत फिर इम्तहान लेने निकल पड़ी&#8230; खुशियों की शुरुआत ही हुई थी कि जिस्म धोखा दे बैठा&#8230; और लाइलाज बीमारी का शिकार हो गए&#8230; लाख कोशिशों के बावजूद बीमारी हावी होती गई&#8230;  शरीर के अंगों ने एक-एक कर काम करना बंद कर दिया, लेकिन वीके बंसल लड़ने से पीछे नहीं हटे&#8230;. चलना फिरना बंद हुआ तो उन्होंने 1981 में बच्चों को कोचिंग देना शुरू कर दिया और 1983 में बंसल क्लासेस की स्थापना कर आईआईटियंस की फौज ही खड़ी कर डाली&#8230; बड़ी बात यह कि अब तक सबसे ज्यादा 6 आल इंडिया टॉपर देने का उनका रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ सका है&#8230;.!!! उन्होंने ना सिर्फ अपने घर में रोशनी की, बल्कि सैकड़ों बच्चों को आईआईटियन बनाकर उनका घर-आंगन भी चमका डाला&#8230; वीके बंसल्स यानि ‘‘ <strong><span style="color: #ff0000;">ए ग्रेट जर्नी फ्रॉम लैन्टर्न टू लाइट हाउस’’&#8230;!!!</span></strong></p>
<p>ऐसा नहीं है कि इसके बाद भी उनके इम्तहानों का दौर खत्म हो गया&#8230; किस्मत, जिस्म और जिंदगी तो छोड़िए जनाब, ऐसे तमाम लोग और मौके थे जिन्होंने वीके बंसल को कदम दर कदम एक से बड़ा एक धोखा दिया&#8230; साथ छोड़ा, विश्वास तोड़ा&#8230; लेकिन, यकीनन वो एक बुंदेला ही था जो हर बुरे दौर को पीछे धकेल उसी शिद्दत के साथ तनकर खड़ा रहा&#8230; उसी शिद्दत के साथ, जिसके साथ उसने छठवीं कक्षा से जिंदगी का सफर शुरू किया था&#8230; दीपक सा रोशन होना सीखा था&#8230;!!!</p>
<p>यकीनन, यह महज इत्तेफाक नहीं है कि जब पूरी दुनिया कोरोना के अंधकार में डूबी है&#8230; हम जैसे कमतर हौसले वालों की हिम्मत जवाब दे रही है&#8230; तब हमें लड़ने का हौसला देकर चले गए बंसल सर&#8230;। एक संदेश देकर कि कोरे दीए जलाने से अंधेरा खत्म नहीं होगा&#8230; दीपक बनकर जलना होगा&#8230;. वीके बंसल की तरह&#8230;!!! तभी रोशन हो सकेगी तुम्हारी जिंदगी&#8230; और तुमसे दूसरों की&#8230;!!</p>
<p>झांसी में जन्म लेने के बाद लखनऊ में पढ़ाई और फिर कोटा में नौकरी की शुरुआत करने से लेकर शादी के कुछ साल बाद ही पैरों का साथ छोड़ देना और उसके बाद शुरू हुए संघर्ष से कोटा कोचिंग का जन्म और सफलताओं के निर्बाध दौर की कहानी भले ही पूरी हो गई हो, लेकिन इसका एक और सुनहरा अध्याय अभी बाकी है&#8230;!! उनकी स्मृतियों का अध्याय&#8230;!!! जो हमेशा जगमगाता रहेगा&#8230;!! दिवाली के दियों की तरह&#8230;!! हमेशा हमेशा&#8230;!!</p>
<p>आज भी वॉल स्ट्रीट जनरल के कवर पेज पर जगह बना चुके वीके बंसल के फार्मूले का कोई तोड़ नहीं है। कोटा के कोचिंग संस्थानों में डीपीपी से लेकर डेढ़ घंटे की क्लास तक का फार्मूला बंसल सर ने बनाया और आज भी सभी इसे फॉलो कर रहे हैं की बजाय यह कहना बेहतर रहेगा कि कॉपी कर रहे हैं&#8230; इमारतें तो एक से बेहतर एक खड़ी हो गईं&#8230; फैकल्टीज की लिस्ट में एक से बड़ा एक आईआईटियंस जुड़ गया&#8230; पैकेज भी सैकड़ों से लाखों तक पहुंच गया&#8230; लेकिन बंसल सर के किसी भी फार्मूले का तोड़ कोई नहीं तलाश सका&#8230; और बंसल सर के जाने के बाद अब इस फार्मूले का तोड़ किसी से निकलना भी नहीं है..!!!</p>
<p>ईश्वर से प्रार्थना है कि सर वीके बंसल को वह अपने श्रीचरणों में स्थान दे&#8230;। उनके परिवार को यह दुख सहने की शक्ति दे&#8230;। और शक्ति दे कोटा कोचिंग संस्थानों को फिर से रोशनी करने की&#8230;!! वीरान पड़े कोटा की रौनक फिर से लौट आने की&#8230;!!! ताकि, बंसल सर की जलाई मशाल, मिसाल बनकर एक बार पुनः ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठे&#8230;!!!</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>अलविदा सर&#8230; वीके बंसल&#8230;!!! बुंदेले कभी मरा नहीं करते&#8230; आप हमारी स्मृतियों में हमेशा यूं ही जीवंत रहेंगे&#8230;!! हमेशा हमेशा&#8230;!!!</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>(लेखकः <a href="https://www.facebook.com/UdaiVineetSingh/">विनीत सिंह</a>, <a href="https://tismedia.in/">TIS Media</a> के संपादक हैं) </strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/kota-coaching/founder-of-bansal-classes-coaching-guru-vk-bansal-passed-away/7704/">सर वीके बंसलः “बुंदेले” कभी मरा नहीं करते&#8230;</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/kota-coaching/founder-of-bansal-classes-coaching-guru-vk-bansal-passed-away/7704/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कोरोना 2.0: पत्रकारों और उनके परिवारों पर भारी पड़ रही महामारी</title>
		<link>https://tismedia.in/editorial/article/vineet-singh-editor-tis-media-describing-the-misery-of-indian-journalists-amid-corona-s-second-wave/7099/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=vineet-singh-editor-tis-media-describing-the-misery-of-indian-journalists-amid-corona-s-second-wave</link>
					<comments>https://tismedia.in/editorial/article/vineet-singh-editor-tis-media-describing-the-misery-of-indian-journalists-amid-corona-s-second-wave/7099/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Apr 2021 13:47:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Article]]></category>
		<category><![CDATA[BIHAR]]></category>
		<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[DELHI]]></category>
		<category><![CDATA[Editorial]]></category>
		<category><![CDATA[Health]]></category>
		<category><![CDATA[MADHYA PRADESH]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[RAJASTHAN]]></category>
		<category><![CDATA[STATE]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[UTTAR PRADESH]]></category>
		<category><![CDATA[V Talk]]></category>
		<category><![CDATA[VTalk]]></category>
		<category><![CDATA[corona guidelines]]></category>
		<category><![CDATA[Corona impact on journalism]]></category>
		<category><![CDATA[Corona News]]></category>
		<category><![CDATA[Corona outbreak in India]]></category>
		<category><![CDATA[Corona Vaccination]]></category>
		<category><![CDATA[Corona virus]]></category>
		<category><![CDATA[covid 19]]></category>
		<category><![CDATA[Covid 19 Update]]></category>
		<category><![CDATA[Covid Front Line Worker]]></category>
		<category><![CDATA[Covid Help Line Kota]]></category>
		<category><![CDATA[death of journalist from corona]]></category>
		<category><![CDATA[Editor TIS Media]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Journalism]]></category>
		<category><![CDATA[Journalist Vineet Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Journalists die from Corona]]></category>
		<category><![CDATA[Journalists killed by covid]]></category>
		<category><![CDATA[the inside stories]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[Vineet Singh]]></category>
		<category><![CDATA[worlds most dangerous job]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=7099</guid>

					<description><![CDATA[<p>मीडिया संस्थानों में कोविड 1.0 के दौरान खर्चे बचाने के नाम पर हजारों पत्रकारों की नौकरियां छीन ली थी। अचानक नौकरियों से निकाले गए लोगों ने सरकार से लेकर अदालतों तक के दरवाजे खटखटाए, लेकिन देश के श्रम कानून मालिकानों के आगे बौने साबित हो गए। मीडिया संस्थानों ने स्टाफ तो खूब घटाया, लेकिन बात &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/vineet-singh-editor-tis-media-describing-the-misery-of-indian-journalists-amid-corona-s-second-wave/7099/">कोरोना 2.0: पत्रकारों और उनके परिवारों पर भारी पड़ रही महामारी</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>कोरोना की दूसरी लहर पत्रकारों ही नहीं उनके परिवारों पर भी खासी भारी पड़ रही है। कोविड 1.0 में दर्जनों जान लेने के बाद कोविड 2.0 पत्रकारों के लिए काल साबित हो रहा है। बड़ी बात यह है कि युवा पत्रकारों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। लेकिन, विडंबना यह है कि जिन कंपनियों के लिए पत्रकार अपनी जान दे रहे हैं वह मीडिया हाउस उनकी मदद के लिए आगे आते हैं और न ही सरकारें उन्हें फ्रंटलाइन वॉरियर मानती हैं। ऐसे में बेहद कम तनख्वाहों पर नौकरी करने वाले इन मुलाजिमों की मौत उनके परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ बनकर टूट पड़ती है। <span style="color: #ff0000;"><strong>&#8211; फ्री वाइसः विनीत सिंह</strong></span>
			</div>
		</div>
	
<p>मीडिया संस्थानों में कोविड 1.0 के दौरान खर्चे बचाने के नाम पर हजारों पत्रकारों की नौकरियां छीन ली थी। अचानक नौकरियों से निकाले गए लोगों ने सरकार से लेकर अदालतों तक के दरवाजे खटखटाए, लेकिन देश के श्रम कानून मालिकानों के आगे बौने साबित हो गए। मीडिया संस्थानों ने स्टाफ तो खूब घटाया, लेकिन बात जब काम की आई तो जिसे पहले पांच लोग कर रहे थे अब उसे एक ही आदमी से करवाया जाने लगा। आखिर, मरता क्या न करता की स्थिति में नौकरियां बचाने के लिए देश भर के पत्रकारों ने अपनी क्षमताओं से भी ज्यादा काम किया। 6 जून 2020 को दिल्ली एम्स की चौथी मंजिल से कूदकर जान देने वाले पत्रकार तरुण सिसोदिया की मौत को चाहकर भी नहीं भूल सकते। कोविड पॉजिटिव होने के बाद भी तरुण एम्स से लगातार काम कर रहे थे। उनके सीनियर्स ने उन्हें दिलासा देना तो दूर काम कम करने तक की जहमत तक नहीं उठाई।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>भयावह है आंकड़े</strong></span><br />
कोरोना की पहली लहर के दौरान 1 मार्च 2020 के बाद दुनिया भर के 602 पत्रकारों की कोरोना की चपेट में आकर अधिकारिक मौत हुई थी। हालांकि यह आंकड़ा वास्तविकता से बेहद कम है, क्योंकि किसी भी देश की सरकार ने पत्रकारों की मौत के अलग से आंकड़े जारी नहीं किए थे। जेनेवा स्थित अंतरराष्ट्रीय मीडिया निगरानी सगंठन प्रेस इम्बलम कैंपेन (पीईसी) के महासचिव ब्लाइस लेम्पेन कहते हैं कि कोरोना की चपेट मे आकर मरने वाले पत्रकारों की वास्तविक संख्या का आंकलन करना फिलहाल असंभव है। क्योंकि, न तो सरकारें और न ही उन्हें नौकरी देने वाले मीडिया संस्थान इस तरह के आंकड़े संभाल कर रखते हैं। लेम्पेन बताते हैं कि साल 2020 में कोरोना महामारी से मरने वाले पत्रकारों के मामले में सबसे ज्यादा भयावह हालात लैटिन अमेरिका के थे। यहां सबसे ज्यादा 303 पत्रकारों की कोरोना की चपेट में आने से मौत हुई। जबकि एशिया में 145, यूरोप में 94, उत्तरी अमेरिका में 32 और अफ्रीका में 28 मौतें रिकॉर्ड की गईं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>आखिर मौत की वजह क्या</strong></span><br />
अंतरराष्ट्रीय मीडिया निगरानी सगंठन प्रेस इम्बलम कैंपेन (पीईसी) के महासचिव ब्लाइस लेम्पेन कहते हैं कि कोरोना वायरस महामारी जब दुनिया भर में लाखों लोगों की जान ले चुकी थी, तब भी पत्रकार इस दौरान अपनी जान दांव पर लगाकर खबरें निकाल रहे थे। वह बता रहे थे कि दुनिया कितने मुश्किल दौर में फस चुकी है। वह एक सच्चे सिपाही की तरह कोरोना के मोर्चे पर अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर काम कर रहे थे। इस मोर्चे पर सिर्फ पत्रकार ही नहीं थे&#8230; उनके परिजन भी थे। क्योंकि, काम खत्म करने के बाद पत्रकार लौटकर घर ही जाता है। जहां वह परिजनों के साथ मिलकर उनके साथ बैठकर अपने दिन भर के बुरे अनुभवों को खत्म करने की कोशिश करता है। लेम्पेन कहते हैं कि दुनिया के तमाम मुल्कों और मीडिया संस्थानों ने वर्क फ्रॉम होम का ढ़ोंग तो खूब किया, लेकिन वास्तविकता यह है कि उस दौरान न सिर्फ पत्रकारों को फील्ड में जमकर दौड़ाया गया, बल्कि विरोध करने वाले लोगों के सुदूर तबादले किए गए, उन्हें अखबार बांटने तक के काम में झोंक दिया गया। इससे भी बड़ी चीज जूम मिटिंग के नाम पर उन्हें 24 घंटे का बंधुआ मजदूर बना दिया गया। विरोध करने पर नौकरी से निकाला गया सो अलग।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>संकट में पत्रकारिता</strong></span><br />
पीईसी के महासचिव ब्लाइस लेम्पेन ने एक बयान में कहा, &#8220;खबरों की सच्चाई पता करने और वास्तविकता जानने के कारण पत्रकारों का फील्ड मे जाना मजबूरी है। जिसके वजह से वह कोरना वायरस की चपेट में आते हैं और इसके बाद वह दो तरफा मुश्किलों यानि नौकरी एवं जान जाने के खतरे के बीच एक कमरे में आइसोलेट हो जाते हैं। रही बात फ्रीलांसर और वर्क फ्रॉम होम की तो यह सबसे बड़ा छालावा है क्योंकि पत्रकारिता ऐसा काम है जिसे घर बैठकर किसी भी सूरत में नहीं किया जा सकता। ऊपर से पत्रकारों की मृत्यु का कारण अक्सरकर स्पष्ट नहीं किया जाता। उनकी मृत्यु की घोषणा नहीं की जाती है या कोई विश्वसनीय स्थानीय जानकारी नहीं होती है। पिछले साल मार्च के बाद से पेरू में सबसे ज्यादा मीडियाकर्मी कोरोना महामारी में मारे गए। पेरू में कोरोना वायरस की वजह से सबसे ज्यादा 93 मीडियाकर्मियों की मौत हुई। इसके बाद ब्राजील में 55, भारत में 53, मेक्सिको में 45, इक्वाडोर में 42, बांग्लादेश में 41, इटली में 37 और अमेरिका 31 पत्रकारों की मौत हुई। लेकिन, किसी भी सरकार या नौकरी प्रदाता मीडिया संस्थान ने पत्रकारों को कोरोना वॉरियर मानना तो दूर फ्रंट लाइन वर्कर तक नहीं माना। जिसके चलते उन्हें किसी भी तरह की मदद की बात तो दूर घर चलाने के लिए आर्थिक सहायता तक नहीं मिल सकी। जिनकी नौकरी छीन ली गई उन पर तो मानसिक और आर्थिक, दो तरफा हमला किया गया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कोरोना 2.0ः हालात भयावह</strong></span><br />
सरकार भले ही पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर न मान रहीं हो लेकिन पत्रकार कोरोना संक्रमितों के साथ घर से लेकर अस्पताल और अगर कोई अनहोनी होती है तो अस्पताल से लेकर शमशान तक साथ रहते है। यही कारण है कि पत्रकारिता जगत को इसका नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। कोरोना की दूसरी लहर में जहां 2 दर्जन से अधिक पत्रकारों की अभी तक मौत हो चुकी है, तो उनके परिवार भी इससे अछूते नहीं हैं। बहुत से पत्रकारों ने अपने परिजनों को इस कोरोना काल में खोया है। अभी भी बहुत से पत्रकार अस्पतालो में जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं । कोरोना की दूसरी लहर में जहां बीती 27 मार्च को उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के सदस्य प्रमोद श्रीवास्तव की कोरोना वायरस की वजह से मृत्यु होने के बाद ऐसा सिलसिला शुरू हुआ जिसने पूरे पत्रकारिता जगत की आंखों को नम कर रखा है । यह पत्रकारों के काम करने का हौसला ही है कि वह इतना दर्द झेलने के बाद भी लगातार अपने कर्तव्य पथ पर डटे हुए हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>युवाओं को खोने का गम</strong></span><br />
कोरोना वायरस के दुष्प्रकोप से ताविशी श्रीवास्तव जैसी अनुभवी पत्रकार को नहीं बचाया जा सका तो अंकित शुक्ला जैसे युवा पत्रकार भी करोना की वजह से हम सबके बीच नही रहे। बीते दिनों वरिष्ठ पत्रकार पी पी सिंहा, पवन मिश्रा, बरेली के युवा पत्रकार प्रशांत सक्सेना की कोरोना के कारण मौत हो हुई । वहीं वरिष्ठ पत्रकार राशिद मास्टर साहब, यूएनआई ब्यूरो चीफ हिमांशु जोशी, वरिष्ठ पत्रकार सच्चिदानंद सच्चे, दुर्गा प्रसाद शुक्ला, मोहम्मद वसीम, हमजा रहमान, रफीक, आगरा के वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ और ब्रजेश पटेल जैसे कई साहसी पत्रकार थे, जिन्हें कोरोना ने निगल लिया ।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>परिवारों पर भी टूटा कहर</strong></span><br />
कोरोना ने सिर्फ पत्रकारों को ही नहीं प्रभावित किया, बल्कि उनके परिवारों पर भी कहर बनकर टूटा । दैनिक जागरण के पत्रकार अंकित शुक्ला की जहां कोरोना के कारण मौत हो गई तो उसके 1 दिन पहले उनके ताऊ की और अंकित शुक्ला की मौत के 3 दिन बाद उनके पिता की भी इसी वायरस के चलते मृत्यु हो गई। वहीं उनकी मां और पत्नी अभी भी अस्पताल में अपना इलाज करा रही है। इस तरह की विभीषिका को सुनकर शायद ही कोई ऐसा हो जिसकी आंखें नम ना हो जाए। वही अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार आलोक दीक्षित की माता को कोरोना वायरस ने निगल लिया, वरिष्ठ पत्रकार राजीव श्रीवास्तव की माता की भी मृत्यु कोरोना और सिस्टम की बदहाली के कारण हुई। वरिष्ठ पत्रकार शिव शंकर गोस्वामी ने अपनी माता और दामाद को इस वायरस के कारण खो दिया।इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार पुनीत मोहन और आकाश यादव के पिता की भी मौत कोरोना वायरस और बदहाल सिस्टम के कारण ही हुई। वरिष्ठ पत्रकार अल्ह्मरा खान की मां और हिंदी खबर के कैमरामैन मनोज की माता और भाभी की भी जान इस कोरोना वायरस ने ली। कोरोना ने पत्रकारों और उनके परिवारो को बुरी तरह से प्रभावित किया हैं लेकिन सरकार इस पर कोई ध्यान नही दे रही। वरिष्ठ पत्रकार एवं नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट इंडिया के संस्थापक सदस्य डॉ. बचन सिंह सिकरवार कहते हैं कि पत्रकार सबसे दयनीय अवस्था में है। पत्रकार अस्पताल से लेकर शमशान तक काम करता है, लेकिन फिर भी उसे फ्रंटलाइन वर्कर नहीं माना जाता। बड़ी बात यह है कि पत्रकारों की मौत के बाद सरकारों से लेकर उनकी खुद की जमात सबसे पहले यही सवाल उठाती है कि आखिर वह किस अखबार में और संस्थान में पत्रकार थे? क्या मान्यता प्राप्त पत्रकार थे? क्या सरकार ने उनके गले में कोई पट्टा डाला था या फिर उनके खुद के संस्थान ने&#8230; यदि नहीं तो पत्रकार को पत्रकार मानता कौन है?</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सुनो! सरकार&#8230;</strong></span><br />
नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट इंडिया के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रतन दीक्षित पत्रकारों के हालातों से खासे निराश हैं। वह कहते हैं कि पत्रकारों के लिए सरकारों की बात तो छोड़िए उनके संस्थान तक संवेदनशील नहीं है। उनसे चरित्र प्रमाण पत्र तो हर कोई मांगता है, लेकिन किस हालात में काम कर रहे हैं, यह पूछने की जहमत कोई नहीं उठाता। अफसरों, मंत्रियों और सरकारों के करीब कोई पत्रकार है भी तो उनकी संख्या कितनी है&#8230; गिनती पर गिने जा सकते हैं ऐसे लोग, लेकिन बाकी की पूरी जमात इलाज करना तो दूर इस हाल में ईमानदारी से अपना घर तक नहीं चला पा रही है। ऐसे में उनकी मौत के बाद परिवार की जिंदगी बद से बदतर हो जाती है। सिर्फ कोरोना संक्रमण की बात करें तो पत्रकारों के आर्थिक हालात ऐसे नहीं है कि वह मंहगा इलाज करवा सकें। इसके लिए न तो उनके पास बीमे हैं और न ही दवाओं के खर्च उठाने के पैसे। रियायतों और आर्थिक मदद तो सिर्फ जुमला भर है। वर्किंग जर्नलिस्ट को अब हमे सूचीबद्ध करना होगा। उनकी मदद के लिए आगे आना ही होगा। सरकार अपनी जिम्मेदारी न समझे तो फिर इस वर्ग को खुद के लिए झंडा उठाना होगा। नहीं तो पत्रकारिता संकट में फस जाएगी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>गुजारिश&#8230;</strong></span><br />
द इनसाइट स्टोरी (TIS Media) के जुबैर खान, हिमांशु हेमनानी द लीडर हिंदी के आशीष सक्सेना और अतीक खान कहते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर जिस तरह से पत्रकारिता क्षेत्र को प्रभावित कर रही है शायद ही इतना कहर किसी और क्षेत्र पर पड़ा हो लेकिन फिर भी सोशल मीडिया पर पत्रकारों को लेकर अपशब्द बोले जाते हैं। अगली बार सोशल मीडिया पर पत्रकारों को लेकर अपशब्द लिखने से पहले उनके समर्पण पर जरूर ध्यान दें। कोरोना के इस दौर में पत्रकारों को आम लोगों की मांगो के लिए अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है जिसका सरकारी बीमा तक नही होता। अब भी तमाम लोग ऐसे हैं जो आम आदमी के लिए सरकार और माफियाओं से लड़ रहे हैं, लेकिन हर किसी को एक ही नजर से देखना बंद नहीं होगा तो उस रोज जब पत्रकारों को कोसने वाले मुश्किल में फसेंगे तब उनकी मदद के लिए कोई खांटी पत्रकार बाकी नहीं बचा होगा। उस रोज&#8230; फिर कोसना कि अब वैसे पत्रकार पैदा ही कहां होते हैं।</p>
<h6><strong><span style="color: #ff0000;">(लेखक- <a href="https://www.facebook.com/UdaiVineetSingh/">विनीत सिंह </a> <a href="https://www.facebook.com/tismedialive">द इनसाइड स्टोरी</a> (<a href="https://www.youtube.com/channel/UCSK0w1wptFiEg4i9f6OjR8Q">TIS Media</a>) के संपादक हैं। 22 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, सहारा, अमर उजाला, इंडिया टुडे, आउट लुक, एएनआई, सीएनईबी, जनमत और एनडीटीवी जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों से जुड़े रहने के साथ ही बरेली कॉलेज के पत्रकारिता विभाग में तीन वर्षों तक अध्यापन कार्य भी कर चुके हैं) </span></strong></h6>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/vineet-singh-editor-tis-media-describing-the-misery-of-indian-journalists-amid-corona-s-second-wave/7099/">कोरोना 2.0: पत्रकारों और उनके परिवारों पर भारी पड़ रही महामारी</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/editorial/article/vineet-singh-editor-tis-media-describing-the-misery-of-indian-journalists-amid-corona-s-second-wave/7099/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
