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	<title>Impact of Covid-19 Archives - TIS Media</title>
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	<title>Impact of Covid-19 Archives - TIS Media</title>
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		<title>मुसीबत में फंसे बच्चों के लिए है संजीवनी बूटी है चाइल्ड लाइन</title>
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		<pubDate>Mon, 17 May 2021 13:15:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>यह न केवल बच्चों की आपातकालीन जरूरतों का जवाब देते हैं बल्कि उन्हें उनकी दीर्घकालिक देखभाल और पुनर्वास के लिए प्रासंगिक सेवाओं से भी जोड़ते हैं । यह अब तक देश भर में 30 लाख बच्चों से जुड़े हुए हैं और उन्हें देखभाल और सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं । चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन (सीआईएफ) केंद्रीय &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-kalpana-prajapati-on-childline-is-a-sanjeevani-for-children-trapped-in-trouble/8390/">मुसीबत में फंसे बच्चों के लिए है संजीवनी बूटी है चाइल्ड लाइन</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>लाखों बच्चों के जीवन में सुरक्षा, संरक्षण और न्याय की आशा जगाता है चाइल्डलाइन 1098 एक फोन नंबर है जो उनकी कष्ट भरी जिंदगी को सुख और खुशियों की तरफ मोड देता है । यह सहायता और सहायता की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए दिन में 24 घंटे, वर्ष में 365 दिन निःशुल्क आपातकालीन फोन सेवा है ।
			</div>
		</div>
	
<p>यह न केवल बच्चों की आपातकालीन जरूरतों का जवाब देते हैं बल्कि उन्हें उनकी दीर्घकालिक देखभाल और पुनर्वास के लिए प्रासंगिक सेवाओं से भी जोड़ते हैं । यह अब तक देश भर में 30 लाख बच्चों से जुड़े हुए हैं और उन्हें देखभाल और सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं । चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन (सीआईएफ) केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की नोडल एजेंसी है जो पूरे देश में चाइल्डलाइन 1098 सेवा की स्थापना, प्रबंधन और निगरानी के लिए मूल संगठन के रूप में कार्य करती है। सीआईएफ देश भर में चाइल्डलाइन सेवा की स्थापना, सेवा वितरण और वित्त की निगरानी, ​​प्रशिक्षण, अनुसंधान और प्रलेखन, जागरूकता पैदा करने, वकालत के साथ-साथ सेवा के लिए संसाधन निर्माण के लिए जिम्मेदार एकमात्र एजेंसी  निकाय है ।</p>
<p><img decoding="async" class="alignleft wp-image-8392 size-medium" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/05/IMG-20161017-WA0006-1024x723-1-300x212.jpg" alt="" width="300" height="212" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/05/IMG-20161017-WA0006-1024x723-1-300x212.jpg 300w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/05/IMG-20161017-WA0006-1024x723-1-768x542.jpg 768w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/05/IMG-20161017-WA0006-1024x723-1.jpg 1024w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>चाइल्डलाइन का लक्ष्यः-</strong> चाइल्डलाइन का लक्ष्य हर जरूरतमंद बच्चे तक पहुंचना और उनके अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। हमारे चार सीएस मॉडल &#8211; कनेक्ट, कैटालाइज, सहयोग और संचार &#8211; वह प्रणाली है जो हमें हर साल अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचने में सक्षम बनाती है ।</p>
<p>भारत में जून 1996 से चाइल्डलाइन का सञ्चालन किया जा रहा है जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों का हित करना और मुसीबत में फंसे बच्चों को बाहर निकालना रहा है । देश में बच्चों से सम्बंधित बाल विवाह, बालश्रम, बाल भिक्षावृति, चाइल्ड ट्रेफिकिंग, चाइल्ड एब्यूज, बच्चों का शारिरिक व मानसिक शोषण, गुड टच बैड टच, रनवे चाइल्ड आदि महत्वपूर्ण समस्याऐ रही है । इनमें से प्रमुख समस्या है बाल विवाह, बालश्रम, बाल भिक्षावृति, चाइल्ड ट्रेफिकिंग | तो हमें यह जानना भी होगा की ये समस्याएं है क्या ?</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/citizen-journalist/article-by-pramod-ranjan-on-before-the-fifth-birthday-1-2-million-children-of-poor-and-backward-classes-are-feared-to-die-of-corona-infection/8264/">‘कोविड:19 अकाल’ का खतरा: तो, पांचवें जन्मदिन से पहले काल के गाल में समा जाएंगे इन तबकों के 12 लाख बच्चे!</a></span></strong></span></p>
<p><strong>बाल</strong> <strong>श्रम</strong> <strong>क्या</strong> <strong>है? </strong>अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन बाल श्रम को ऐसे किसी भी काम के रूप में परिभाषित करता है जो बच्चों को उनके बचपन, उनकी क्षमता, उनकी गरिमा से वंचित करता है और जो बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए हानिकारक है । इसमें ऐसे कार्य शामिल हैं जो बच्चों के लिए मानसिक, शारीरिक, सामाजिक या नैतिक रूप से खतरनाक हैं । वह कार्य जो बच्चे को समय से पहले स्कूल छोड़ने के लिए बाध्य करके स्कूल में भाग लेने और पूरी तरह से भाग लेने की क्षमता में हस्तक्षेप करता है; या उनसे स्कूल की उपस्थिति को अत्यधिक लंबे और भारी काम के साथ जोड़ने का प्रयास करना भी बाल श्रम है । यह गरीबी का कारण और परिणाम दोनों है । भारत में, एक &#8220;बालक&#8221; जैसा कि बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2016 द्वारा परिभाषित किया गया है, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जिसने 14 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है ।</p>
<p><strong>भारत</strong> <strong>में</strong> <strong>बाल</strong> <strong>श्रम-</strong>दुख की बात है कि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा बाल मजदूरों का घर है । एक बढ़ती हुई घटना शहरी क्षेत्रों में बच्चों को घरेलू कामगारों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है । जिन परिस्थितियों में बच्चे काम करते हैं वे पूरी तरह से अनियमित हैं और उन्हें अक्सर बिना भोजन के काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, बहुत कम मजदूरी के साथ, गुलामी जैसी। बाल घरेलू कामगारों के शारीरिक, यौन और भावनात्मक शोषण के मामले सामने आ रहे हैं। श्रम मंत्रालय की एक अधिसूचना ने बच्चों के घरेलू काम के साथ-साथ ढाबों, चाय की दुकानों और रेस्तरां में बच्चों के रोजगार को &#8220;खतरनाक&#8221; व्यवसाय बना दिया है ।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/justice-deepak-maheshwari-is-inspiring-us-to-fulfill-his-duty-towards-the-society/8243/">कोरोना कालः समाज के ऋण से उऋण होने का यही वक्त है&#8230;</a></span></span></strong></p>
<p><strong>भारत</strong> <strong>में</strong> <strong>बाल</strong> <strong>विवाह- </strong>बालविवाह सामजिक बुराई है कानूनन दण्डनीय अपराध है बाल विवाह व इसमें सहयोग व प्रेरित करने बाले परिवारजन, पण्डित, नाई, बराती, बैण्ड वाला, टेन्ट वाला आदि व अन्य सभी दोषियों को 2 वर्ष की सजा व 1 लाख रूपऐ का तक का जुर्माना किया जा सकता है व ऐसी शादी शुन्य मानी जाती है । किसी लड़की की शादी 18 साल और लडके की शादी 21 वर्ष की उम्र से पहले होना बाल विवाह कहलाता है । बाल विवाह में औपचारिक विवाह तथा अनौपचारिक संबंध भी आते हैं, जहां 18 साल से कम उम्र के बच्चे शादीशुदा जोड़े की तरह रहते हैं । बाल विवाह, बचपन खत्म कर देता है । बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और संरक्षण पर नकारात्मक प्रभाव डालता है । इसके दुष्परिणामों में कुपोषण, शारिरिक दुर्बलता, हिंसा व दुव्र्यवहार, समयपूर्व गर्भावस्था, मातृ एवं मृत्युदर में वृद्धि, मानसिक विकास में रूकावट, शिक्षा का अभाव, शारिरिक विकास में रूकावट आदि है | बाल विवाह रोकने के लिए निम्न संस्थाओं व व्यक्तियों को सुचना दी जा सकती है:- चाइल्डलाइन- 1098, पुलिस – 100, जिला कलेक्टर, तहसीलदार, अध्यापक, महिला अधिकारिता विभाग, बाल कल्याण समिति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण |</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/entertainment/art-and-literature/idgah-by-munshi-premchand/8218/">ईदगाह: वह कहानी, जो आज भी हमारे मन को झकझोरती है</a></span></span></strong></p>
<p><strong>कोरोना काल में चाइल्डलाइन की बच्चों के लिए भुमिकाः-</strong>कोरोना काल में जिन बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों या किसी एक को खो दिया है, उनके संबंध में सूचना कोई भी व्यक्ति चाइल्ड लाइन के हेल्पलाइन नंबर 1098 या महिला हेल्पलाइन नंबर 181 पर दे सकता है । ऐसे बच्चों को चाइल्ड लाइन 24 घंटे के अंदर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगी व बच्चों के लिए संरक्षण आदि की व्यवस्था करेगी । बच्चों को पालनहार योजना से जोडा जायेगा । साथ ही इस समय बहुत सारे बच्चे जो अकेले थे, उनकी तस्करी भी मानव तस्करों ने उन्हें बहला फुसलाकर शुरू कर दी, ऐसे में समाज के हर जागरूक नागरिक से अपील है की अगर कोई संदिग्ध या अनजान बच्चे की जानकारी उन्हें मिले तो तुरंत चाइल्ड लाइन को बताये | आप सभी के लिए यह बात जानना अत्यंत आवश्यक है की इन दिनों सोशल मिडिया पर जो बच्चों को गोद देने वाला मेसेज चल रहा है वह पूरी तरह से गलत है बच्चों को गोद देनी की प्रकिया कारा दतक ग्रहण एजेन्सी के माध्यम से की जाती है जो पूरी एक कानूनी प्रक्रिया है जिसे पूरा करने के बाद ही भावी दम्पति को बच्चा सौपा जाता है और इस पूरी प्रक्रिया से दम्पति को गुजरना पड़ता है । अत: आप सभी से अनुरोध है की ऐसे विडियों और संदेशों को आगे वायरल ना करे, ऐसा करने पर आई एक्ट के तहत सम्बंधित व्यक्ति के ऊपर भी कानूनी कार्यवाही की जा सकती है ।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">लेखक: </span><span style="color: #0000ff;">कल्पना प्रजापति</span></strong><br />
<strong><span style="color: #0000ff;">चाइल्ड लाइन शहर समन्वयक, कोटा</span></strong></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-kalpana-prajapati-on-childline-is-a-sanjeevani-for-children-trapped-in-trouble/8390/">मुसीबत में फंसे बच्चों के लिए है संजीवनी बूटी है चाइल्ड लाइन</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>मानव जाति को पड़ा महंगा पर्यावरण के साथ खिलवाड़</title>
		<link>https://tismedia.in/tis-utility/environment/article-by-kirti-sharma-on-human-activities-has-destroyed-the-environment/8377/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=article-by-kirti-sharma-on-human-activities-has-destroyed-the-environment</link>
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		<pubDate>Mon, 17 May 2021 12:07:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;पर्यावरण&#8217; जो हमारे आस-पास का वातावरण है उसका वास्तविक व वृहद् रूप में अर्थ और महत्व समझना आज हमारे लिए पुन: जानना जरूरी हो गया है &#124; पर्यावरण का संबंध पृथ्वी पर रहने वाले हर मनुष्य जाति और जीव-जंतु के साथ जुड़ा हुआ है &#124; कई वर्षों पहले  तक मानव जाति की संख्या सीमित थी &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/tis-utility/environment/article-by-kirti-sharma-on-human-activities-has-destroyed-the-environment/8377/">मानव जाति को पड़ा महंगा पर्यावरण के साथ खिलवाड़</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>&#8216;मनुष्य का जीवन पर्यावरण से उसी तरह जुड़ा हुआ  है जिस तरह मछली का जीवन  पानी से&#8217;|
			</div>
		</div>
	
<p>&#8216;पर्यावरण&#8217; जो हमारे आस-पास का वातावरण है उसका वास्तविक व वृहद् रूप में अर्थ और महत्व समझना आज हमारे लिए पुन: जानना जरूरी हो गया है | पर्यावरण का संबंध पृथ्वी पर रहने वाले हर मनुष्य जाति और जीव-जंतु के साथ जुड़ा हुआ है | कई वर्षों पहले  तक मानव जाति की संख्या सीमित थी | वहीं मानव संसाधन भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थे | मनुष्य पहले अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए संसाधनों से ज्यादा अपने हाथ &#8211; पैरों और शरीर का उपयोग करते थे | इसलिए पर्यावरण सुरक्षित था लेकिन जैसे -जैसे  मानव जाति की संख्या बढ़ने लगी और मनुष्य का विकास होने लगा वैसे &#8211; वैसे संसाधन भी बढ़ने लगे | मनुष्य ने आज अपने आरामदायक जीवन को जीने के लिए संसाधन इतने ज्यादा विकसित कर लिए की पर्यावरण, पेड़-पोधे , जीव-जंतु सभी जानवर और खुद मनुष्य जाति आज बुरी तरह खतरे में है | जैसे ही संसाधन बढ़े वैसे ही पर्यावरण धीरे-धीरे संकट की और जाने लगा |</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/entertainment/art-and-literature/main-kahanikar-nahin-jebkatra-hoon-story-by-saadat-hasan-manto/8328/">मैं कहानीकार नहीं, जेबकतरा हूँ : सआदत हसन मंटो</a></span></strong></span></p>
<p><strong><span style="color: #008000;">मानव जाति पूरी तरह पर्यावरण पर निर्भर&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;</span></strong><br />
पानी, पेड़, आग, हवा एवं भोजन मानव जाति के  दैनिक जीवन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिया आधारभूत संसाधन है अर्थात मनुष्य इन सब के बिना न के बराबर है वह अपना जीवन यापन कर ही नहीं सकता | यदि इन्हीं सब पर खतरा मंडराने लगे तो मानव जाति एक दिन खत्म होने की कगार पर होगी | जिस हवा में हम श्वास के रहे है, जिस प्रकार हम पेड़ पोधो और लकड़ी से हम घर बनाकर रह रहे है, सर्दी से हमारे शरीर को बचा रहे है, भोजन और पानी से हमारे शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे है और अगर यह सब खत्म होने लगे तो पर्यावरण के साथ मनुष्य भी नष्ट जाएगा अर्थात सीधा मतलब यह कि मनुष्य इन सब के बिना कुछ नहीं | हम मानव जाति ने पर्यावरण के साथ कितना खिलवाड़  किया है ये तो हम देख ही रहे है आज असली जंगल के स्थान पर कंक्रीट के जंगलों का बोल-बाला हो गया | पहले जगह &#8211; जगह पेड़ &#8211; पॊधे  और जंगल  हुआ करते थे | लेकिन हमने हमारी जरूरतों के लिए घर बनाने के लिए पेड़ काटना शुरू  किया , जंगलों  और भूमियों पर  मैदान बना दिए और वहां बड़े बड़े मकान, बिल्डिंग खड़े कर दिए | मनुष्यो ने नदियों , तालाबों को गन्दा कर दिया | आज बड़े-बड़े समुद्र, तालाब, नदियां  कचरों के ढेर से अटे पड़े है | पहले मनुष्य अपनी प्यास बुझाने के लिए, घर में खाना पकाने के लिए सीधे नदी, तालाबों के पानी को काम  लिया करते थे परन्तु आज वर्तमान में स्थित यह है कि मनुष्य नहाने में भी तालाबों का पानी काम नहीं ले पा रहा है | उस पानी को साफ करने के लिए भी लाखों की बड़ी-बड़ी मशीनों का उपयोग किया जाता है | हम मानव जाति ने अपनी लापरवाही के कारण पर्यावरण को इतना दूषित कर दिया है कि हम एक आपदा से नहीं निपट पा रहे की दूसरी आपदा हमारे समक्ष मुहँ खोले बाहें पसारे खड़ी रहती है |</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-devanshu-nagar-on-amazing-world-of-development-of-smartphone/8298/">स्मार्टफोन के विकास की गजब दुनिया</a></span></strong></span></p>
<p>मानव जाति ने अपने जीवन को आरामदायक बनाने के लिए बड़ी &#8211; बड़ी फैक्ट्रियों , उद्योगों और कई संसाधनों को विकसित किया | खुद के जीवन को खुशहाल बनाने के लिए भूमि, जल, ऊर्जा, प्राकृतिक गेसो, खनिजों आदि संसाधनों का भरपूर आनन्द उठाया आज यही कारण है कि लाखों मानव अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठे | वर्तमान में यदि हम गंगा या प्रयागराज में बहती नदियों का उदाहरण ले तो हम देखेंगे की कैसे मनुष्य ने अपने कृत्यों से प्रकृति को नष्ट किया है | खबरों के मुताबिक गंगा नदी जिसको हम माँ कहते है इतनी पवित्र नदी जिसमें आज हजारों शव बह रहे है | कोरॉना के कारण लगातार हो रही लोगों कि मौतों के बाद जब शवों को जलाने की भी जगह नहीं मिल रही, कई लोगों ने कॉविड के डर से अपने ही लोगों के शवों को ऐसे ही नदियों नालो में बहा दिया है जिससे नदियों का पानी तो दूषित हो ही रहा है साथ ही वहाँ के तटीय क्षेत्र का वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है | खुद गंगा माँ भी इस महामारी के आगे इतनी लाचार है की  जिसने आज एक साथ अपने ही हजारों बच्चों के मृत शरीर को अपनी गोद में लिया हुआ है |  ऐसे में भूपेन हजारिका का गीत ओ गंगा बहती हो क्यूँ? याद आता है | जिसमें बताया गया है की किस तरह नदी के दोनों ओर रहने वाली जनता इस प्राकर्तिक संसाधन के साथ छेड़-छाड़ करने के कारण त्रस्त है | दूसरा उदाहरण देखें तो हाल ही में चर्चा में आ रहा ‘ ताऊ ते’&#8217; नाम का तूफान जो भी मनुष्य के अनियोजित भौतिक विकास का परिणाम हो सकता है | हम मानव जाति इन भयानक कहर के कारण इतना लाचार हो गए है कि चाहकर भी कुछ कर नहीं पा रहे है | एक के बाद एक संकट मानव जाति को तबाह करता जा रहा है | यह दूसरा खतरा &#8216; ताऊ ते &#8216; नाम का बवंडर ( तूफान )  कॉरोना का खतरा टला नहीं की इसने दस्तक दे दी है एक तरफ तो कोरोना के संकट ने लोगों को डराया हुआ है, तो दूसरी तरफ इस तूफान से होने वाले नुकसान ने | मौसम विभाग के अनुसार यह तूफान इतना भयानक है कि इसने दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम भारत में मानव जीवन को भारी जन-धन की हानि होने की संभावना है | आज इन सब परेशानियों के कारण हम सचेत तो हुए है लेकिन क्या जब महामारी खत्म हो जाएगी और हमारा जीवन पहले कि तरह सामान्य होने लगेगा तो क्या हम आगे भी इसी तरह रहेंगे जैसे पहले रहा करते थे या पर्यावरण को अभी के जैसे सुरक्षित रखने का प्रयास करेंगे?</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-mukti-parashar-gugor-fort-built-by-the-khinchi-rajputs-is-mourning-on-its-predicament-in-the-desolate-and-ruins-state/8263/">पुरातत्व विभाग की राह तकता गुगोर दुर्ग</a></span></strong></span></p>
<p>हालांकि इस लॉकडाउन के कारण पर्यावरण पर पड़े अच्छे प्रभाव भी पड़े है &#8211; लोगों द्वारा भौतिक व प्राकर्तिक संसाधनों के कम उपयोग से हमारे चारों और का वातावरण शुद्ध हुआ है | वर्तमान में कई हद तक हवा, पानी में आया बदलाव नग्न आखों से देखा जा सकता है | बरसों से प्रदूषित गंगा यमुना का स्वच्छ जल इसका प्रमाण है | सड़क पर वाहनों की कमी के कारण हवा में शुद्धता फैली है| पेड़-पौधों की कटाई ना होने से हरियाली बढ़ी | ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम हुआ | यहाँ तक की जिस ओजोन परत के क्षरण को लेकर पूरी दुनिया में चिंताजनक स्थिति बनी हुई थी उसने खुद अपने आप का अनुरक्षण इस वैश्विक लॉकडाउन में कर लिया है | कारखानों, उद्योगों, फैक्ट्रियों के बन्द हो जाने से हवा दूषित होने से बची रही | और इन सबसे ज्यादा फायदा जीव जंतुओं को हुआ | पृथ्वी रूपी घर पर मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों को भी स्वच्छ वातावरण में आजादी के साथ घूमने का स्थान मिला | हम मनुष्यों ने अपने आंनद और भोजन  के लिए जीव &#8211; जंतुओं को शिकार बनाया उसके बाद से जीव &#8211; जंतुओं की संख्या घटने लगी लेकिन लॉकडॉउन के कारण जंतुओं की संख्या में इजाफा हुआ और जीव &#8211; जंतु स्वतंत्र घूमने लगे | देखा जाए तो हम मनुष्य अपनी खुशियों के लिए इतने स्वार्थी हो गए कि हमने पर्यावरण तो क्या जीव &#8211; जंतुओं तक को नहीं छोड़ा |</p>
<p><strong><span style="color: #008000;">हमारा भविष्य और पर्यावरण की सुरक्षा &#8230;&#8230;..</span></strong><br />
हम पर्यावरण के बगैर कितने बेसहारा है ये तो हम समझ ही गए है और इन दोनों उदाहरणों और अच्छे से हमें समझा दिया है | हर वर्ष पर्यावरण कि सुरक्षा के लिए हम संकल्प लेते है| पर्यावरण की सुरक्षा हेतु हर वर्ष 5 जून को &#8216; विश्व पर्यावरण  दिवस &#8216; के रूप में मनाते है जिसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक स्तर को सुधारने व जागरूकता लाने के लिए की थी| इस दिन तो हम बहुत जोरो-शोरो से पर्यावरण की सुरक्षा हेतु बड़े बड़े संकल्प लेते है, इसकी रक्षा की बातें करते है | पेड़ &#8211; पोधे लगाने की बातें करते है | लेकिन हर दूसरे दिन वहीं स्थिति नजर आती है ढ़ाक के तीन पात | अगर हम इस दिन की तरह हर दिन संकल्प ले और लोगों को इसके लिए जागरूक करें, पेड़-पौधे लगाए तो हमें आगे इन सब परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ेगा जो हम आज झेल रहें है | यदि यही चलता रहा तो एक दिन पूरी धरती काल के मुंह में समा जाएगी | मेरी दुनिया, मेरी धरती बर्बाद है |  मानव प्रजाति द्वारा खराब किया गया ग्रह |  हम गुणा-भाग करते रहे और लड़ते-लड़ते खाते रहे जब तक कि कुछ न बचा, और तब हम मर गए |  &#8220;हमने न तो भूख को नियंत्रित किया और न ही हिंसा को हमने अनुकूलित किया |  हमने खुद को तबाह कर लिया |  लेकिन हमने पहले अपनी दुनिया को तबाह किया |”</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">लेखक:</span></strong> <strong><span style="color: #0000ff;">कीर्ति शर्मा</span></strong><br />
<strong><span style="color: #0000ff;">शिक्षक प्रशिक्षनार्थी</span></strong></p>
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