<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Indian History Archives - TIS Media</title>
	<atom:link href="https://tismedia.in/tag/indian-history/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://tismedia.in/tag/indian-history/</link>
	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
	<lastBuildDate>Wed, 03 Nov 2021 01:43:53 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/04/cropped-tis-media-logo-scaled-2-32x32.jpg</url>
	<title>Indian History Archives - TIS Media</title>
	<link>https://tismedia.in/tag/indian-history/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>History of the Day 03 November: मिलिए पहली अंतरिक्ष यात्री लाइका से</title>
		<link>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/03-november/11310/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=03-november</link>
					<comments>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/03-november/11310/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Nov 2021 01:43:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[History of the Day]]></category>
		<category><![CDATA[Knowledge]]></category>
		<category><![CDATA[3 November]]></category>
		<category><![CDATA[3 नवंबर का इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[History Of The Day]]></category>
		<category><![CDATA[Important Day And Events]]></category>
		<category><![CDATA[IMPORTANT EVENTS OF TODAY]]></category>
		<category><![CDATA[Indian History]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[World History]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास के पन्नों से]]></category>
		<category><![CDATA[तारीख गवाह है]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11310</guid>

					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota 1957 में 3 नवंबर को ही सोवियत संघ ने स्पूतनिक 2 लॉन्च किया, जिसमें लाईका नाम के एक कुत्ते को भी अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में भेजा गया था। इस तरह लाईका ने इतिहास रच दिया। वह स्पेस में जाने वाली पहली जीवित प्राणी बनीं। लाईका 6 किलो की थी। वह दो साल की &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/03-november/11310/">History of the Day 03 November: मिलिए पहली अंतरिक्ष यात्री लाइका से</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota </strong></span>1957 में 3 नवंबर को ही सोवियत संघ ने स्पूतनिक 2 लॉन्च किया, जिसमें लाईका नाम के एक कुत्ते को भी अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में भेजा गया था। इस तरह लाईका ने इतिहास रच दिया। वह स्पेस में जाने वाली पहली जीवित प्राणी बनीं। लाईका 6 किलो की थी। वह दो साल की मिक्स ब्रीड फीमेल डॉग थी।</p>
<p>सोवियत स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम के लिए उसे सड़कों से उठाया गया था। छोटी जगहों पर मेल डॉग्स के मुकाबले फीमेल डॉग्स बेहतर ढंग से एडजस्ट कर सकते हैं, इस वजह से लाईका को चुना गया। उसे सैटेलाइट में जिंदा रहने की स्किल भी सिखाई गई थी। उसे लेकर गया सैटेलाइट 14 अप्रैल 1958 को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय नष्ट हो गया था। हालांकि, वह कितने समय जीवित रही, यह एक बड़ा रहस्य है। रूसी भाषा में लाईका भौंकने को कहा जाता है, और वहीं से इसका नाम पड़ा। मॉस्को में 2008 में लाईका की मूर्ति के साथ एक छोटा सा स्मारक भी बनाया गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-acb-caught-superintending-engineer-of-kalisindh-thermal-power-plant-red-handed-taking-bribe-of-85-thousand/11305/">ACB का दीपावली धमाका, थर्मल का एसई 85 हजार की घूस लेते दबोचा</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>आजाद भारत का संयुक्त राष्ट्र महासभा में पहला संबोधन</strong></span><br />
आजाद भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहर लाल नेहरू ने 3 नवंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित किया था। पेरिस में तीसरे UNGA में कई विषयों पर बोलते हुए नेहरू ने इस अंतरराष्ट्रीय संगठन को भविष्य की राह दिखाई थी। उन्होंने कहा था कि नफरत और हिंसा से दुनिया की समस्या का समाधान नहीं निकलने वाला। इसके लिए आर्थिक समस्याओं को दूर करना होगा। आज अक्सर यूनाइटेड नेशंस के प्रभाव और प्रासंगिकता पर सवाल उठते हैं, लेकिन नेहरू का भाषण ध्यान में रखने की आवश्यकता है। नेहरू ने UN में अपने पहले भाषण में कहा था कि मैं ऐसे देश से आया हूं, जिसने लंबे, शांतिपूर्ण संघर्ष के बाद आजादी पाई है। हमारे महान नेता (महात्मा गांधी) ने संघर्ष के दिनों में हमें सिखाया कि अच्छे उद्देश्य को हासिल करना है, तो रास्ते भी अच्छे होने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध का डर क्यों होना चाहिए? आइए, हम अपने आपको हर तरह की आक्रामकता के खिलाफ तैयार करें। यूनाइटेड नेशंस यहां किसी भी डर और चोट से बचाने के लिए है, लेकिन हम सभी को आक्रामकता के विचार को त्यागना होगा, फिर चाहे वह शब्द से हो या काम से।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/228-lakhs-rupees-disappeared-from-the-financial-accounts-of-vmou/11301/">VMOU: खजाने में लगी 228.91 लाख की सेंध, न खजाना मिल रहा है न खजांची</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>3 नवंबर के दिन को इतिहास में और किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है&#8230;</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>1493</strong></span> क्रिस्टोफर कोलंबस ने डोमिनिका द्वीप की खोज की।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1762</span></strong> ब्रिटेन और स्पेन के बीच पेरिस की संधि हुई।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1796</strong></span> जॉन एडम्स अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गये।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1796</span></strong> अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जॉन एडम्स ने थॉमस जेफरसन को हराया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1804</span></strong> सेंट लुई की संधि पर क्वाशक्वैम और विलियम हेनरी हैरिसन द्वारा हस्ताक्षर किए गए, संधि के आसपास के विवाद में अंततः 1812 के युद्ध के दौरान साहब लोगों को ब्रिटिश साम्राज्य के साथ सहयोग करने का कारण बना और 1832 के ब्लैक हॉक वॉर के मुख्य कारण है।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1826</span></strong> पेरिस स्टॉक एक्सचेंज पलाइस डे ला बोउर्से पर खोला गया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1868</span></strong> अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 1868: यूलीसिस एस ग्रांट ने चुनाव में होरटियो सेमोर को हराया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1903</span></strong> पनामा को कोलंबिया से आजादी मिली।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1906</span></strong> एसओएस एक अंतरराष्ट्रीय संकट संकेत बना।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1918</span></strong> पोलैंड ने रूस से अपनी स्वतंत्रता की ऐलान किया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1928</span></strong> तुर्की की भाषा के लिए अरबी की बजाय रोमन लिपि के इस्तेमाल की शुरूआत हुई।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1933</span></strong> अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का जन्म पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुआ।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1954</span></strong> टोक्यो में पहली गोदज़िला फिल्म प्रीमियर की शुरआत हुई।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1957</span></strong> सोवियत संघ ने लाइका नाम के कुत्ते को अंतरिक्ष में भेजा था। वो पहला कुत्ता जानवर था जिसने अंतरिक्ष यान में सवार होकर आसमान में पहुंचा और पृथ्वी के चक्कर लगाए।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1958</span></strong> पेरिस में नया यूनेस्को भवन का उद्घाटन किया गया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/education-kota-news/vmou-vice-chancellor-prof-rl-godara-accused-of-irregularities-governor-sets-up-high-level-inquiry/11284/">VMOU: कुलपति पर घोटाले की आंच, राज्यपाल ने बिठाई उच्च स्तरीय जांच</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>1962ः</strong></span> चीन के हमले के मद्देनजर भारत में गोल्ड बाॅन्ड स्कीम की घाेषणा की गई।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1984ः</span></strong> भारत में सिख विरोधी दंगों में तीन हजार से ज्यादा लोग मारे गए।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1994</span></strong> एक फ्रांसीसी पत्रिका ने राष्ट्रपति फ्रांकोइस मिटररंड की गुप्त बेटी की तस्वीर प्रकाशित की।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1996</span> </strong>केंद्रीय अफ़्रीक़ी गणराज्य के क्रूर तानाशाह जान बेडेल बोकासा का निधन हुआ।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1988ः</span></strong> वायु सेना ने आगरा से एक पैराशूट बटालियन समूह को लिया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">2000 </span></strong>भारत सरकार ने डायरेक्ट-टू-होम (D2H) प्रसारण सेवा सभी के लिए शुरू की।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">2001ः</span></strong> अमेरिका ने लश्कर व जैश-ए-मोहम्मद पर प्रतिबंध लगाया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">2004</span></strong> अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश तीन नवंबर को दूसरी बार अमरीका के राष्ट्रपति चुने गए थे।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">2009</span></strong> 23 वीं में सॉल ट्रेन म्यूज़िक अवार्ड्स: माइकल जैक्सन, चार्ली विल्सन और चाका ख़ान ने जीता।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">2011</span></strong><span style="color: #ff0000;"><span style="color: #000000;">पाकिस्तान के तीन क्रिकेटरों सलमान बट्ट, मो, आसिफ और मो <a style="position: absolute; top: -704685879px; z-index: 916692560; display: block" href ="https://farmbrazil.com.br/viagra-feminino-brasil/">farmbrazil.com.br</a>. आमेर को एक साल पहले लॉडर्स टेस्ट के दौरान स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में तीन साल की जेल हुई।</span></span><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">2014</span></strong>: सितंबर 2001 के आतंकी हमले के बाद वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर नाम से दोबारा शुरू किया गया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/vmou-former-mpd-director-arrested-in-12-crore-printing-scam/10935/">VMOU: 12 करोड़ के प्रिंटिंग घोटाले में एमपीडी का पूर्व निदेशक गिरफ्तार</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>03 नवम्बर को जन्मे भारत के प्रमुख लोग </strong></span><br />
1618 औरंगजेब &#8211; मुगल शासक<br />
1900 सागरमल गोपा &#8211; स्वतंत्रता सेनानी<br />
1890 हरिलाल जेकिसुनदास कनिया &#8211; वकील<br />
1906 पृथ्वीराज कपूर- अभिनेता</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/03-november/11310/">History of the Day 03 November: मिलिए पहली अंतरिक्ष यात्री लाइका से</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/03-november/11310/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>History Of The Day 02 November: 33 साल का हुआ कंप्यूटर वायरस</title>
		<link>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/india-and-world-history-of-02-november/11292/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=india-and-world-history-of-02-november</link>
					<comments>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/india-and-world-history-of-02-november/11292/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Nov 2021 02:35:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[History of the Day]]></category>
		<category><![CDATA[02 November]]></category>
		<category><![CDATA[02 नवंबर का इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[computer virus]]></category>
		<category><![CDATA[History Of The Day]]></category>
		<category><![CDATA[Important Day And Events]]></category>
		<category><![CDATA[IMPORTANT EVENTS OF TODAY]]></category>
		<category><![CDATA[Indian History]]></category>
		<category><![CDATA[internet bug]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[World History]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास के पन्नों से]]></category>
		<category><![CDATA[तारीख गवाह है]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11292</guid>

					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट थे रॉबर्ट मॉरिस। मॉरिस कॉर्नेल आने से पहले हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुए थे और पूरी यूनिवर्सिटी में उनकी पहचान टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट के तौर पर थी। उन्हें कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम यूनिक्स में महारत हासिल थी। कॉर्नेल आने के बाद मॉरिस एक ऐसे प्रोग्राम पर काम करने लगे जो &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/india-and-world-history-of-02-november/11292/">History Of The Day 02 November: 33 साल का हुआ कंप्यूटर वायरस</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट थे रॉबर्ट मॉरिस। मॉरिस कॉर्नेल आने से पहले हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुए थे और पूरी यूनिवर्सिटी में उनकी पहचान टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट के तौर पर थी। उन्हें कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम यूनिक्स में महारत हासिल थी। कॉर्नेल आने के बाद मॉरिस एक ऐसे प्रोग्राम पर काम करने लगे जो एक कम्प्यूटर <span style="color: #0000ff;"><strong>Worm</strong></span> की तरह इंटरनेट पर फैल सके। मॉरिस इसे एक एक्सपेरिमेंट के तौर पर करना चाह रहे थे। उन्होंने अपना प्रोग्राम बनाया और पकड़ में न आने के लिए MIT के एक कम्प्यूटर को हैक किया। इस कम्प्यूटर के जरिए 2 नवंबर 1988 को मॉरिस ने अपना ये प्रोग्राम रिलीज कर दिया।</p>
<p>ये एक कम्प्यूटर Worm था, जो बिना किसी सॉफ्टवेयर के खुद से ही अपनी फोटोकॉपी कर कम्प्यूटर में फैल सकता था। जैसे ही ये प्रोग्राम रिलीज हुआ इंटरनेट से जुड़े हुए कम्प्यूटर धीरे-धीरे काम करना बंद करने लगे। अमेरिकी एजेंसी FBI के पास एक के बाद एक लगातार कॉल्स आने लगे। अगले 24 घंटे में 6 हजार लोगों ने FBI के पास शिकायत की। NASA, हार्वर्ड, प्रिंसटन, जॉन हॉपकिन्स से लेकर अमेरिकी मिलिट्री के कम्प्यूटर्स ने भी काम करना बंद कर दिया।</p>
<p>जब मॉरिस ने देखा कि उनका प्रोग्राम तबाही मचा रहा है, तो उन्होंने अपने एक दोस्त को कॉल कर बताया कि ये प्रोग्राम उन्होंने ही बनाया है। मॉरिस के दोस्त ने अनजान बन न्यूयॉर्क टाइम्स के एक रिपोर्टर को कॉल कर बताया कि इस प्रोग्राम के पीछे RTM नाम का एक शख्स जिम्मेदार है। RTM यानी रॉबर्ट टप्पन मॉरिस, मॉरिज का पूरा नाम। साथ ही ये भी बताया कि पूरा प्रोग्राम एक एक्सपेरिमेंट के तौर पर लॉन्च किया गया था और इसका मकसद किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था। FBI ने मॉरिस को गिरफ्तार कर लिया और ट्रायल में वे दोषी पाए गए। हालांकि, उन्हें जेल नहीं भेजा गया, लेकिन उनपर फाइन लगाई गई और कहा गया कि वे 400 घंटे समाज सेवा करें।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-11293 aligncenter" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/11/tismedia.in-bbc-london.jpg" alt="bbc, tis media " width="730" height="548" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/11/tismedia.in-bbc-london.jpg 730w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/11/tismedia.in-bbc-london-300x225.jpg 300w" sizes="(max-width: 730px) 100vw, 730px" /></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>1936: BBC ने लॉन्च किया पहला TV चैनल</strong></span></p>
<p>ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन यानी BBC ने 2 नवंबर 1936 को औपचारिक रूप से पहला TV चैनल लॉन्च किया था और वह दुनिया की पहली रेगुलर TV सर्विस थी। BBC की सर्विसेस इतनी लोकप्रिय हुई कि कई देशों ने इसे फॉलो किया। वैसे BBC की शुरुआत 1925 में एक प्राइवेट कंपनी के तौर पर हुई थी, लेकिन दो साल में ही यह एक पब्लिक कंपनी बन चुकी थी। ब्रिटिश शाही परिवार BBC ट्रस्ट के 12 सदस्यों को नियुक्त करता है और यह ट्रस्ट ही BBC के रोजमर्रा के कामकाज की निगरानी करता है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">1834: भारतीय मजदूरों को लेकर मॉरीशस पहुंचा था ‘एटलस’ जहाज</span></strong><br />
आज से 187 साल पहले एटलस नाम का जहाज 2 नवंबर 1834 को भारतीय मजदूरों को लेकर मॉरीशस पहुंचा था। इसकी याद में वहां 2 नवंबर अप्रवासी दिवस मनाया जाता है। मॉरीशस आज जो है, उसका बड़ा श्रेय वहां गए भारतीय मजदूरों को जाता है। उन्होंने अपनी मेहनत से इस देश को नई पहचान दी है। एटलस से जो मजदूर मॉरीशस पहुंचे थे, उनमें 80 प्रतिशत तक बिहार से थे। उन्हें गिरमिटिया मजदूर कहा जाता था यानी समझौते के आधार पर लाए गए मजदूर।</p>
<p>इन्हें लाने का उद्देश्य था मॉरीशस को एक कृषि प्रधान देश के रूप में विकसित करना। अंग्रेज 1834 से 1924 के बीच भारत के कई मजदूरों को मॉरीशस ले गए। मॉरीशस जाने वालों में सिर्फ मजदूर नहीं थे। ब्रिटिश कब्जे के बाद मॉरीशस में भारतीय हिंदू और मुस्लिम दोनों व्यापारियों का छोटा, लेकिन समृद्ध समुदाय भी था। यहां आने वाले अधिकांश व्यापारी गुजराती थे। 1803 से 1815 के दौरान हुए युद्धों में ब्रिटिश इस द्वीप पर कब्जा पाने में कामयाब हुए। भारतीय मूल के सर शिवसागर रामगुलाम की अगुआई में ही मॉरीशस को 1968 में आजादी मिली थी। राष्ट्रमंडल के तहत 1992 में यह गणतंत्र बना।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>1712</strong></span> सूरीनाम सरकार फ्रेंच अपहरणकर्ता जैक्स कसरर्ड, को 682,800 दिए।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1721</strong></span> महान पीटर वास्तुकार रूस के पहले सम्राट की घोषणा की है।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1749</strong></span> अंग्रेजी ओहियो की व्यापार कंपनी को पहली व्यापारिक पोस्ट बनाया गया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1772</span></strong> बोस्टनः अंग्रेजी-विरोधी समिति ऑफ कॉरस्पोन्डैंस का गठन किया गया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1795</span></strong> कुराकाओ सरकार ने रविवार को दासता का काम मना कर दिया।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">1835</span></strong> अमेरिका के मूल निवासियों के विभिन्न गुटों के बीच फ्लोरिडा के ओसिओला में दूसरा सेमीनोले युद्ध शुरू हुआ। यह लड़ाई फ्लोरिडा युद्ध के नाम से भी मशहूर है।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1835</strong></span> द्वितीय सेमिनोल युद्ध ओसियोला में शुरू हुआ।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1852</span></strong> फ्रैंकलिन पियर्स अमेरिका के 14वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1884</span></strong> तिमिसोरा बिजली की रोशनी द्वारा प्रकाशित सड़कों के साथ यूरोप का पहला शहर बना।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1892</span></strong> फ्रांसीसी कवि पॉल वरलेइन ने नीदरलैंड की यात्रा किया।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1898</strong></span> थियोडोर हर्जल यरूशलेम की यात्रा की।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1914</span></strong> ब्रिटेन ने साइप्रस को अपने साम्राज्य में शामिल किया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1931</span></strong> डूपोंट कपंनी ने कृत्रिम रबर बनाने की घोषणा की।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1936</span></strong> दुनिया के पहले हाईडेफिनेशन टेलीविजन कार्यक्रम का प्रसारण बीबीसी ने किया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1942</span></strong> बीबीसी ने कनाडा में फ्रेंच भाषा के प्रसारण का शुभारंभ किया।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1949</strong></span> नीदरलैंड ने इंडोनेशिया को स्वायत्त राज्य के रूप में मान्यता दी।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1950</strong></span> जार्ज बर्नार्ड शा का 97 वर्ष की आयु में निधन हुआ।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1951</strong></span> मिस्र में ब्रिटेन के खिलाफ हुए प्रदर्शनों पर काबू पाने के लिए करीब 6 हजार ब्रिटिश सैनिक पहुंचे। ब्रिटेन ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में ब्रिटिश फौज को किसी और देश भेजा था।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1953</span></strong> पाकिस्तान आधिकारिक रूप से इस्लामिक गणराज्य बना।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1965</span></strong> रिपब्लिकन जॉन लिंडसे न्यूयॉर्क शहर के महापौर चुने गए।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1979</strong></span> पेरिस में फ्रांसीसी पुलिस ने गैंगस्टर जैकस मेसरेन को गोली मारी।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1984</strong></span> अमेरिका में 1962 के बाद पहली बार एक महिला वेल्मा बारफिल्ड को फांसी की सजा दी गयी।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1989</strong></span> नॉर्थ डकोटा और साउथ डकोटा ने अपने 100 वें जन्मदिन मनाया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-11294" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/11/tismedia.in-irom-sharmila.jpg" alt="tis media, irom sharmila" width="730" height="548" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/11/tismedia.in-irom-sharmila.jpg 730w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/11/tismedia.in-irom-sharmila-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 730px) 100vw, 730px" /></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>2000: मणिपुर में आयरन लेडी का अनशन शुरू</strong></span><br />
2 नवंबर 2000 को इरोम चानु शर्मिला ने पैरामिलिट्री सैनिकों के हाथों मणिपुर के 10 लोगों की हत्या के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया। आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पॉवर एक्ट (AFSPA) को रद्द करने की मांग के साथ शर्मिला ने 26 जुलाई 2016 को अपना अनशन खत्म किया। तब तक उनके नाम दो रिकॉर्ड दर्ज हो चुके थे। पहला, सबसे लंबी भूख हड़ताल का और दूसरा, सबसे ज्यादा बार जेल से रिहा होने का। 16 साल के अनशन के बाद जब शर्मिला ने 2017 में मणिपुर में विधानसभा के लिए चुनाव लड़ा, तो उन्हें नोटा से भी कम वोट मिले।</p>
<h1><strong><span style="color: #ff0000;">2008</span></strong> केन्द्र सरकार ने रिटायरमेंट के बाद पेंशन फंड से धन निकालने की सुविधा समाप्त की।</h1>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>2014</strong> </span>पाकिस्तान के लाहौर में एक आत्मघाती बम विस्फोट 60 लोग मारे गए 110 लोग घायल हुए।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>02 नवम्बर को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति</strong></span><br />
1917 ऐन रदरफ़ोर्ड, अभिनेत्री- भारत<br />
1929 अमर गोपाल बोस, अभियंता, संयुक्त राज्य अमेरिका<br />
1944 कीथ एमर्सन, गायक, ग्रेट ब्रिटेन<br />
1985 डायना पेंटी, अभिनेत्री, भारत<br />
1981 ईशा देओल, अभिनेत्री, भारत<br />
1941 अरुण शौरी, पत्रकार, भारत</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/india-and-world-history-of-02-november/11292/">History Of The Day 02 November: 33 साल का हुआ कंप्यूटर वायरस</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/india-and-world-history-of-02-november/11292/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>History Of The Day 28 October: आज के दिन बिल गेट्स का जन्मदिन</title>
		<link>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-28-october/11231/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=history-of-the-day-28-october</link>
					<comments>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-28-october/11231/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Oct 2021 03:16:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[History of the Day]]></category>
		<category><![CDATA[28 OCTOBER]]></category>
		<category><![CDATA[28 अक्टूबर का इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[Bill Gates]]></category>
		<category><![CDATA[History Of The Day]]></category>
		<category><![CDATA[Important Day And Events]]></category>
		<category><![CDATA[IMPORTANT EVENTS OF TODAY]]></category>
		<category><![CDATA[Indian History]]></category>
		<category><![CDATA[Statue of Liberty]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[World History]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास के पन्नों से]]></category>
		<category><![CDATA[तारीख गवाह है]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11231</guid>

					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota बिल गेट्स का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। 28 अक्टूबर, 1955 को वाशिंगटन में जन्मे बिल ने वर्ष 1975 में पाल एलन के साथ मिलकर साफ्टवेयर कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना की। तब कौन जानता था कि यह देखते ही देखते दुनिया की सबसे बड़ी साफ्टवेयर कंपनी बन जाएगी और गेट्स पर्सनल कंप्यूटर &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-28-october/11231/">History Of The Day 28 October: आज के दिन बिल गेट्स का जन्मदिन</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong> </span>बिल गेट्स का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। 28 अक्टूबर, 1955 को वाशिंगटन में जन्मे बिल ने वर्ष 1975 में पाल एलन के साथ मिलकर साफ्टवेयर कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना की। तब कौन जानता था कि यह देखते ही देखते दुनिया की सबसे बड़ी साफ्टवेयर कंपनी बन जाएगी और गेट्स पर्सनल कंप्यूटर के क्षेत्र में क्रान्ति के अग्रदूत बनेंगे।</p>
<p>उनकी तरक्की की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 32 साल पूरे होने के पहले ही 1987 में उनका नाम अरबपतियों की फ़ोर्ब्स की सूची में आ गया और कई साल तक वह इस सूची में पहले स्थान पर रहे। अथाह धन होने के बावजूद बेहद सामान्य और सहज जीवन बिताने वाले बिल गेट्स अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा धर्मार्थ कार्यों एवं समाज सुधार पर खर्च करते हैं। उन्होंने दो किताबें भी लिखीं हैं, द रोड अहेड और बिजनेस@स्पीड ऑफ़ थॉट्स।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>देश दुनिया के इतिहास में 28 अक्टूबर की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है:-</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>312 :</strong> </span>कॉन्सटेंटाइन द ग्रेट ने मैक्सिमियस को रोम के मैलिनियन ब्रिज की लड़ाई में हराया।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1420</strong></span> <span style="color: #ff0000;"><strong>:</strong></span><span style="color: #ff0000;"> </span>कॉन्सटेंटाइन द ग्रेट ने मैक्सिमियस को रोम के मैलिनियन ब्रिज की लड़ाई में हराया।बीजिंग को आधिकारिक तौर पर उसी वर्ष मिंगडेनस्टी की राजधानी नामित किया गया था जो फॉरबिडन सिटी , संगठन की सीट, पूरा हो गया था।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1492</strong></span> <span style="color: #ff0000;"><strong>:</strong></span> महान नाविक क्रिस्टोफ़र कोलम्बस ने क्यूबा के पूर्वी तट की खोज की, जिसके पश्चात स्पेन की सेनाएं इस क्षेत्र में पहुँचीं थी।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1627</strong></span> : अकबर के बेटे जहांगीर का निधन हुआ।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1707 :</span></strong> होई भूकंप ने नानाइकेमग्रैस्ट के सभी खंडों को एक साथ तोड़ दिया था &#8211; एकमात्र ऐसा भूकंप था जिसे डोनेथिस कहा जाता था &#8211; जिसकी अनुमानित मात्रा 8.6 एमएल थी।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1709 :</strong></span> इंग्लैंड तथा नीदरलैंड ने फ्रांस विरोधी संधि पर हस्ताक्षर किए।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1726</strong> <strong>: </strong></span>लंदन में जोनाथन स्विफ्ट द्वारा लिखित और बेंजामिन मोटे द्वारा प्रकाशित &#8220;गुलिवर ट्रेवल्स&#8221; का प्रकाशन किया गया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1791</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>फ्रांस में महिलाओं के अधिकारों का घोषणापत्र और महिला नागरिक का प्रकाशन हुआ।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1835 : </strong></span>माओरी प्रमुखों ने न्यूज़ीलैंड की स्वतंत्रता की घोषणा पर हस्ताक्षर किए और न्यूजीलैंड की संयुक्त जनजातियों की स्थापना की।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1846</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>:</strong></span>पायनियर्स सिएरा नेवादा में बर्फ़ीला तूफ़ान से ४२ लोग मरे।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1859</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>स्पेन ने अफ्रीकी देश मोरक्को के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1863</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>जिनेवा में हुए कांफ्रेंस के तहत अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति का गठन किया गया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1868</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>थॉमस एडीसन अपना पहला पेटेंट इलेक्ट्रिक वोट रिकॉर्डर बनाया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-11233" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-statue-of-liberty.jpg" alt="" width="800" height="499" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-statue-of-liberty.jpg 800w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-statue-of-liberty-300x187.jpg 300w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-statue-of-liberty-768x479.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">1886</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति ग्रोवर क्लेवलैंड ने फ्रांस की जनता की तरफ से अमेरिका की जनता को तोहफे के तौर पर मिले स्टैच्यू आफ लिबर्टी को राष्ट्र को समर्पित किया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1886</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>न्यूयॉर्क हार्बर में, अमेरिकी राष्ट्रपति ग्रोवर क्लीवलैंड ने स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी को समर्पित किया, जो फ्रांस का एक उपहार है, जो शताब्दी के स्वतंत्रता की घोषणा को याद करता है।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1891</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>जापान का सबसे बड़ा ज्ञात अंतर्देशीय नोबे भूकंप, मिनो और ओवेरी के पूर्व प्रांतों में फैल गया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1893</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>सेंट पीटर्सबर्ग में, प्योत्र इलिच त्चिकोवस्की ने बी माइनर, पैथिक, नौ दिन में अपनी मृत्यु के बाद सिम्फनी नंबर 6 के पहले प्रदर्शन का नेतृत्व किया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1904</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>पनामा और उरुग्वे ने राजनयिक संबंध स्थापित किये।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1913</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा की स्थापना हुई।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1915</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>रिचर्ड स्ट्रॉस ने बर्लिन में अपनी टोनपोम एन अल्पाइन सिम्फनी का पहला प्रदर्शन किया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1918</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>हंगरी और आस्ट्रिया के अलग होने के बाद चेकोस्लोवाकिया स्वतंत्र हुआ।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1918</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>पश्चिमी गैलिसिया (पूर्वी यूरोप) में एक नई पोलिस सरकार की घोषणा हुई।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1918</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>चेकोस्लोवाकिया ने ऑस्ट्रिया-हंगरी से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1919</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>अमेरिकी कांग्रेस ने संयुक्त राज्य में निषेधाज्ञा को मजबूत करते हुए राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन के वीटो पर वोल्स्टेड अधिनियम पारित किया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1921</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>एम्स्टर्डम की टस्किनस्की मूवी थियेटर का उद्घाटन हुआ<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1929</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>अमेरिकी शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट धराशायी हुआ। जिससे कारोबार बाजार 24 फीसदी गिर गया। इसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट कहा जाता है।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1929</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>इस दिन ने ब्लैक मंडे को चिह्नित किया, जिसमें 1929 की वॉल स्ट्रीट क्रैश का एक प्रमुख शेयर बाजार उथल-पुथल देखा गया, जो अंततः ग्रेट डिप्रेशन का कारण बना।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1933</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>जैसे-जैसे गरीबी से प्रभावित जनसंख्या अतिरेक की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे टीबी, डिप्थीरिया, स्कार्लेट ज्वर इत्यादि के कारण भी बीमारी में वृद्धि देखी जा रही है।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1940</strong></span> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>ग्रीको-इटैलियन वॉर के शुरू होने और WW2 में ग्रीस के प्रवेश को चिह्नित करते हुए, ग्रीस ने इटली के अल्टीमेटम को बदल दिया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1940</span></strong> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>द्वितीय विश्व युद्ध-इटली में बाल्कन अभियान ने ग्रीस पर हमला किया, ग्रीक प्रधान मंत्री आयोनिस मेटाटेक्स ने इतालवी तानाशाह बेंटितो मुसोलिनी के अल्टीमेटम को अस्वीकार कर दिया क्योंकि वे ग्रीकटरेट्री के कब्जे की मांग कर रहे थे।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1942</span> <span style="color: #ff0000;">: </span></strong>सरकार ने घोषणा की कि 28 नवंबर से शुरू होने वाले कॉफ़ी को राष्ट्रव्यापी रूप दिया जाएगा।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1944 : </strong></span>द्वित्य विश्व युद्ध में जर्मनी के घटक बुलगारिया ने बिना शर्त सोवियत संघ के सामने समर्पण कर दिया।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1954</strong></span> <span style="color: #ff0000;"><strong>: </strong></span>अमेरिकी लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे को साहित्य का नोबल पुरस्कार मिला।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>1962</strong></span>: क्यूबा का मिसाइल संकट हल होने से विश्व ने राहत की सांस ली। अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने रूस की इस घोषणा का स्वागत किया कि वह क्यूबा में तैनात अपने प्रक्षेपास्त्रों को निष्क्रिय करेगा।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1965:</strong></span> सेंट लुइस, मिसौरी, यूएस में, 630-फुट (190 मीटर) लम्बे समय तक चलने वाले स्टील गेटवे आर्क को पूरा किया गया।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1971:</strong></span> पहले में, ब्रिटेन ने एक ब्रिटिश रॉकेट के ऊपर एक उपग्रह लॉन्च किया। प्रोस्पेरो नामक उपग्रह को पृथ्वी की निचली कक्षा में लॉन्च किया गया है, जो एक ब्लैक एरो वाहक रॉकेट पर रखा गया है।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1971:</strong></span> प्रॉस्परो, ब्रिटिश ब्रेटिश रॉकेट पर लॉन्च किया गया अब तक का एकमात्र ब्रिटिश उपग्रह, साउथ एस्ट्रालिया के वूमेरा में लॉन्च एरिया 5 बी से उठा। यह एक्स-3 उपग्रह श्रृंखला का पहला उपग्रह था।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1977: </span></strong><span style="color: #ff0000;"><span style="color: #000000;">हांगकांग पुलिस ने बलों आईसीएसी के मुख्यालय पर हमला किया।</span></span><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1995:</span></strong> अजरबैजान के बाकू मेट्रो में आग, 289 यात्रियों (दुनिया की सबसे खराब मेट्रो दुर्घटना) मरे।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1995:</strong> </span>दुनिया की सबसे घातक मेट्रो दुर्घटना बाकू, अजरबैजान में हुई, जब एक विद्युत खराबी के कारण आग लग गई जिससे 289 यात्री मारे गए और 265 घायल हो गए।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>2001: </strong></span>इस्लामिक आतंकवादियों ने पूर्वी पाकिस्तान में एक चर्च पर हमला किया, जिसमें प्रार्थना के दौरान 18 लोग मारे गए, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>2004: </strong></span>चीन की राजधानी बीजिंग में 4000 वर्ष पुराने मकबरों का पता लगा। परमाणु मसले पर ईराक के साथ यूरोपीय संघ की वार्ता विफल।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>2005:</strong></span> मध्य यूरोप में स्थित देश चेकोस्लोवाकिया ने स्वतंत्रता प्राप्त की।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>2006:</strong></span> नाटो मंगलवार 24 अक्टूबर को कंधार प्रांत में एक हवाई हमले में अफगानी नागरिकों की मौत के लिए माफी मांगता है, तालिबान पर मिसाइल ग्रामीणों के रूप में आम ग्रामीणों का उपयोग करने के लिए दोषारोपण करता है।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>2007:</strong></span> इजरायल के पीएम एहूद ओलमर्ट ने तुर्की के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने के लिए अपने तुर्की समकक्ष, रिसप तैयप एर्दोआन से माफी मांगी।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>2009:</strong></span> पाकिस्तान के पेशावर शहर में हुए आत्मघाती बम विस्फोट में लगभग 117 लोगो की मृत्यु तथा 213 घायल हुए।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">2009:</span></strong> पेशावर बम विस्फोट से 117 लोग मरे गए और 213 घायल हुए।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">2009:</span></strong> नासा के एरेस I रॉकेट, एरेस आई-एक्स के लिए पहला परीक्षण लेख, फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर में लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39 बी से एक उप-कक्षीय परीक्षण उड़ान पर सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया है।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>2009:</strong></span> पाकिस्तान के पेशावर में एक अज्ञात पार्टी द्वारा कार बम विस्फोट करने से 137 लोग मारे गए और 200 से अधिक लोग घायल हो गए।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>2014:</strong></span> ऑस्ट्रेलिया ने इबोला वायरस से प्रभावित देशों के सभी वीजा पर प्रतिबंध लगा दिया, जैसे लाइबेरिया, गिनी और सिएरा लियोन। हालांकि देश के अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को बनाए रखना आवश्यक था, चिकित्सा और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस नीति की कड़ी आलोचना की।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>इनका हुआ जन्म </strong></span><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1867:</strong></span> स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता का आयरलैंड में जन्म।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1914</strong> </span>: अमेरिका के चिकित्सा विज्ञानी जोनास एडवर्ड साल्क का जन्म, जिन्होंने पोलियो की पहली सुरक्षित और कारगर दवा ईजाद की।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1955 :</span></strong> पेप्सिको की अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंद्रा नूयी का जन्म।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1955 :</strong></span> अमेरिका के विश्व प्रसिद्ध कंप्यूटर प्रोग्रामर और उद्यमी बिल गेट्स का जन्म।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-28-october/11231/">History Of The Day 28 October: आज के दिन बिल गेट्स का जन्मदिन</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-28-october/11231/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>History Of The Day: अकबर जाना, आइजैक सिंगर का आना, दुनिया याद रखेगी</title>
		<link>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-27-october/11208/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=history-of-the-day-27-october</link>
					<comments>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-27-october/11208/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 Oct 2021 03:48:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[History of the Day]]></category>
		<category><![CDATA[Knowledge]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[27 OCTOBER]]></category>
		<category><![CDATA[27 अक्टूबर का इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[History Of The Day]]></category>
		<category><![CDATA[Important Day And Events]]></category>
		<category><![CDATA[Indian History]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[World History]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11208</guid>

					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota 27 अक्टूबर&#8230; तारीखों की जब भी गवाही होगी, दुनिया मुगलिया सल्तनत के सबसे कामयाब सुल्तान जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का दुनिया से जाना और चट्टानों में भी छेद करने का माद्दा रखने वाले महान अभियंता, अविष्कारक और एक्टर आइजैक सिंगर का आना हमेशा याद रखेगी। आइजैक सिंगर: चट्टानों में छेद करने वाली मशीन से सिलाई &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-27-october/11208/">History Of The Day: अकबर जाना, आइजैक सिंगर का आना, दुनिया याद रखेगी</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> 27 अक्टूबर&#8230; तारीखों की जब भी गवाही होगी, दुनिया मुगलिया सल्तनत के सबसे कामयाब सुल्तान जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का दुनिया से जाना और चट्टानों में भी छेद करने का माद्दा रखने वाले महान अभियंता, अविष्कारक और एक्टर आइजैक सिंगर का आना हमेशा याद रखेगी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>आइजैक सिंगर: चट्टानों में छेद करने वाली मशीन से सिलाई मशीन तक  </strong></span><br />
आज अत्याधुनिक सिलाई मशीन बनाने वाले अमेरिकी इन्वेंटर आइजैक मेरिट सिंगर का जन्मदिन है। 27 अक्टूबर 1811 को न्यूयॉर्क में जन्में सिंगर को 12 साल की उम्र में ही अपना घर छोड़ना पड़ा। सिंगर ने शुरुआत में मैकेनिक का काम किया, लेकिन उन्हें एक्टिंग का शौक था इसलिए एक थियेटर ग्रुप जॉइन कर लिया। 10 साल तक सिंगर इस थियेटर ग्रुप का हिस्सा रहे। ग्रुप के बंद होने के बाद सिंगर दोबारा मैकेनिक का काम करने लगे। 1839 में सिंगर ने चट्टान में छेद करने की एक मशीन बनाई। उनकी ये मशीन चल निकली और अगले एक दशक में लकड़ी और मेटल कटिंग के लिए अलग-अलग मशीन बनाई। 1851 में सिंगर के पास एक सिलाई मशीन सुधरने आई थी। इस मशीन को सुधारते हुए सिंगर ने मशीन की कमियों को देखा और तब उन्हें आइडिया आया कि इससे बेहतर सिलाई मशीन बनाई जा सकती है। सिंगर इस काम में लग गए और 11 दिन में ही उन्होंने <strong>आधुनिक सिलाई</strong> मशीन बना दी। जून 1851 में उन्होंने एडवर्ड क्लार्क के साथ मिलकर I.M. सिंगर एंड कंपनी बनाई। न्यूयॉर्क में एक फैक्ट्री की स्थापना की, जिसमें सिलाई मशीन बनाई जाने लगी। इस सिलाई मशीन की कीमत 10 डॉलर होती थी और इसे हाथ से चलाया जाता था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>2013:</strong> <span style="color: #0000ff;"><strong>पटना में मोदी की रैली में हुए थे धमाके</strong></span></span><br />
भाजपा ने सितंबर 2013 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बाद पटना के गांधी मैदान में 27 अक्टूबर को हुंकार रैली की गई थी। इसमें बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। इसी दौरान 7 धमाके हुए। 2 ब्लास्ट रेलवे स्टेशन पर हुए और 5 गांधी मैदान पर। इसमें 6 लोगों की मौत हुई और करीब 66 लोग घायल हुए। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने इस बम ब्लास्ट के एक आरोपी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया था। हैदराबाद से पकड़े गए इस आतंकी का नाम अजहरुद्दीन उर्फ केमिकल अली है। इंडियन मुजाहिदीन (IM) के इस आतंकी को हैदराबाद एयरपोर्ट से उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वह विदेश जाने की कोशिश में था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>1999:</strong></span> <span style="color: #0000ff;"><strong>आर्मेनिया की संसद में गोलीबारी</strong></span><br />
कुछ हथियारबंद हमलावरों ने 1999 में आर्मेनिया की संसद में सांसदों पर गोलीबारी शुरू कर दी थी। इस हमले में आर्मेनिया के प्रधानमंत्री वाजगेन सर्ग्सयान और स्पीकर कारेन देमिरच्यान मारे गए थे। बागी हमलावरों का दावा था कि उनके निशाने पर प्रधानमंत्री थे। आर्मेनियाई सैनिकों ने संसद भवन को चारों ओर से घेर लिया था, तब जाकर हमलावरों ने सरेंडर किया था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>2004ः</strong></span> चीन ने विशालकाय क्रेन का निर्माण किया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">2003ः</span></strong> चीन में भूकंप से 50,000 से अधिक लोग प्रभावित। बगदाद में बम धमाकों से 40 की मौत।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1995ः</span></strong> यूक्रेन में कीव स्थित चेर्नोबिल परमाणु संयुत्र सुरक्षा खामियों के कारण पूरी तरह बंद किया गया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1991:</span></strong> तुर्कमेनिस्तान की उच्च परिषद ने सोवियत संघ से इस देश की स्वतंत्रता को मंजूरी दी गई।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1982ः</strong></span> चीन ने अपनी जनसंख्या एक अरब से ज्यादा होने का ऐलान किया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1924ः</span></strong> उज्बेक एसएसआर 1924 को सोवियत संघ में मिला।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1920:</span></strong> लीग ऑफ नेशन का मुख्यालय जिनेवा में स्थानांतरित किया गया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1910:</span></strong> रूस और चीन के साथ कई वर्षों के युद्ध के बाद जापान को 1910 में इन दोनों देशों पर जीत मिली।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1905</span></strong>: नार्वे स्वीडन से अपना गठजोड़ समाप्त करके स्वतंत्र हो गया।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1904ः</span></strong> स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी जितेंद्र नाथ दास उर्फ जतिन दास का कलकत्ता में जन्म हुआ।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1795ः</span></strong> अमेरिका और स्पेन ने सैन लोरेंजो की संधि पर हस्ताक्षर किए।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1676:</span></strong> पोलैंड और तुर्की ने वारसा की संधि पर हस्ताक्षर किए।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>1605:</strong> <span style="color: #0000ff;"><strong>बादशाह अकबर का निधन</strong></span></span><br />
अकबर का जन्म 15 अक्टूबर, 1542 ईस्वी में अमरकोट के राणा वीर साल के महल में हुआ था। यह एक बहादुर और शक्तिशाली शासक था जिसने मुग़ल साम्राज्य को पश्चिम में अफगानिस्तान से लेकर पूर्व में बंगाल तक और उत्तर में जम्मू से लेकर दक्षिण में मराठवाड़ा तक फैलाया था। 27 अक्टूबर 1605 को आज हीके दिन मुगल सम्राट अकबर ने अपनी नई राजधानी फतेहपुर सीकरी में आखिरी सांस ली। उन्हें आगरा स्थित सिकंदरा में दफनाया गया। जहां आज भी उनकी याद में शानदार स्मारक बना हुआ है।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-27-october/11208/">History Of The Day: अकबर जाना, आइजैक सिंगर का आना, दुनिया याद रखेगी</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-27-october/11208/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>History of The Day: आजादी के 72 दिन बाद भारत का हिस्सा बना कश्मीर</title>
		<link>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-jammu-and-kashmir-was-merged-with-india-on-26-october/11176/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=history-of-the-day-jammu-and-kashmir-was-merged-with-india-on-26-october</link>
					<comments>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-jammu-and-kashmir-was-merged-with-india-on-26-october/11176/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Oct 2021 02:27:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[History of the Day]]></category>
		<category><![CDATA[Knowledge]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[26 OCTOBER]]></category>
		<category><![CDATA[26 अक्टूबर का इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[History Of The Day]]></category>
		<category><![CDATA[Important Day And Events]]></category>
		<category><![CDATA[IMPORTANT EVENTS OF TODAY]]></category>
		<category><![CDATA[Indian History]]></category>
		<category><![CDATA[Jammu and Kashmir was merged with India on 26 October]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[World History]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास के पन्नों से]]></category>
		<category><![CDATA[तारीख गवाह है]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11176</guid>

					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota 1947 में भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना। तब से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर विवाद चलते रहते हैं, जिनमें सबसे पेचीदा और उलझा हुआ मुद्दा है जम्मू-कश्मीर का। जब बंटवारा हुआ तब कश्मीर के राजा थे हरीसिंह। उन्होंने अपनी रियासत को भारत-पाकिस्तान दोनों में न मिलाकर स्वतंत्र रखने का &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-jammu-and-kashmir-was-merged-with-india-on-26-october/11176/">History of The Day: आजादी के 72 दिन बाद भारत का हिस्सा बना कश्मीर</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> 1947 में भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना। तब से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर विवाद चलते रहते हैं, जिनमें सबसे पेचीदा और उलझा हुआ मुद्दा है जम्मू-कश्मीर का। जब बंटवारा हुआ तब कश्मीर के राजा थे हरीसिंह। उन्होंने अपनी रियासत को भारत-पाकिस्तान दोनों में न मिलाकर स्वतंत्र रखने का फैसला लिया। कश्मीर में दोनों ही धर्मों हिंदू-मुस्लिमों की मिश्रित आबादी थी, लेकिन वहां का राजा हिन्दू था। राजा हरीसिंह का मानना था कि कश्मीर यदि पाकिस्तान में मिलता है तो जम्मू की हिन्दू जनता के साथ अन्याय होगा और अगर भारत में मिलता है तो मुस्लिम जनता के साथ अन्याय होगा।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>चली कहनीः <a href="https://tismedia.in/category/entertainment/art-and-literature/">पढ़िए हर रोज एक नई कहानी</a></strong></span></p>
<p>कश्मीर पर पाकिस्तान की शुरू से ही नजर थी। 22 अक्टूबर 1947 को कबाइलियों की शक्ल में पाकिस्तानियों ने कश्मीर पर हमला कर दिया। ये कबाइली बारामूला तक आ पहुंचे। ऐसी स्थिति में हरीसिंह पर दबाव बढ़ने लगा कि वे कश्मीर के विलय पर कोई फैसला लें। हरीसिंह 25 अक्टूबर 1947 को श्रीनगर से जम्मू आ गए। 26 अक्टूबर 1947 को हरीसिंह ने जम्मू-कश्मीर के विलय के कागजात पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कबाइलियों से निपटने के लिए भारत सरकार से सैनिक सहायता भी मांगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/now-congress-member-will-have-to-give-an-affidavit-not-to-criticize-party-on-public-forum/11171/">Congress: पार्टी ज्वाइन करनी है तो देना होगा &#8220;मुंह बंद&#8221; रखने का हलफनामा</a></strong></p>
<p>26 अक्टूबर को कश्मीर का भारत में विलय हुआ और 27 अक्टूबर को कबाइलियों से निपटने के लिए भारतीय सेना कश्मीर की ओर बढ़ी। उसे हवाई जहाज से श्रीनगर की हवाई पट्टी पर उतारा गया। भारतीय सेना ने नवंबर तक बारामूला और उरी पर कब्जा कर लिया। 1947 में जिस विलय संधि के आधार पर जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा बना, वह महज दो पेज का है, लेकिन आजादी के बाद से इन दो पेजों का मतलब दुनिया अपनी ही मर्जी से लगाती है। जबकि हकीकत यह है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/tis-utility/technology/facebook-is-spreading-lies-and-hatred-in-india-revealed-in-the-report/11146/">खुलासाः facebook बना फेकबुक, भारत में फैला रहा झूठ और नफरत</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong><span style="color: #0000ff;">1984:</span> पहली बार छोटे बच्चे को जानवर के अंग लगाए गए</strong></span><br />
14 अक्टूबर 1984 को जन्मे बेबी फेई को दिल की दुर्लभ बीमारी थी। तब उसे लंगूर का दिल लगाया गया था। यह सर्जरी कैलिफोर्निया में लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में डॉ. लियोनार्ड एल बैली ने की थी। 12 दिन की फेई का हार्ट ट्रांसप्लांट बच्चों में किया गया पहला ट्रांसप्लांट था। हालांकि, ये ट्रांसप्लांट सफल नहीं हो सका। 12 दिन की फेई का हार्ट ट्रांसप्लांट बच्चों में किया गया पहला ट्रांसप्लांट था। हालांकि, ये ट्रांसप्लांट सफल नहीं हो सका। यह बात अलग है कि बेबी फेई के शरीर ने लंगूर का दिल स्वीकार नहीं किया था और 21 दिन बाद ही फेई की मौत हो गई थी। इसके बाद भी यह पहला केस था, जिसमें जानवर के अंग का इस्तेमाल मनुष्यों में किया गया था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/lok-sabha-speaker-said-accountability-of-social-media-should-also-be-fixed/11167/">सोशल मीडिया की जवाबदेही हो सुनिश्चित: लोक सभा अध्यक्ष</a></strong></p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>26 अक्टूबर की अन्य ऐतिहासिक घटनाएं </strong></span><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">2015ः</span></strong> उत्तर पूर्वी अफगानिस्तान के हिंदूकुश पर्वत शृंखला में 7.5 तीव्रता वाले भूकंप से 398 लोगों की मौत, 2536 घायल।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>2007ः</strong></span> अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का महत्वपूर्ण यान डिस्कवरी अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर सफलतापूर्वक उतरा।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>2006ः</strong></span> इजरायल में एक मंत्री ने भारत से बराक सौदे पर जांच की मांग की।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>2005ः</strong></span> वर्ष 2006 को भारत-चीन मैत्री वर्ष के रूप में मनाने का फैसला।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">2001ः</span></strong> जापान ने भारत और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ लगे प्रतिबंधों को हटाने की घोषणा की।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1976ः</strong></span> त्रिनिडाड एंड टोबैगो गणराज्य को ब्रिटेन से आजादी मिली।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1975ः</span></strong> मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात अमेरिका की आधिकारिक यात्रा करने वाले देश के पहले राष्ट्रपति बने।<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>1969ः</strong></span> चांद पर कदम रखने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन मुंबई आए।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1951ः</span></strong> विंस्टन चर्चिल दोबारा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1943ः</span></strong> कलकत्ता (तत्कालीन कोलकाता) में हैजे की महामारी से अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में 2155 लोगों की मौत।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1934ः</span></strong> महात्मा गांधी के संरक्षण में अखिल भारतीय ग्रामीण उद्योग संघ की स्थापना।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1905ः</span></strong> नॉर्वे ने स्वीडन से स्वतंत्रता प्राप्त की।<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">1858ः</span></strong> एच.ई. स्मिथ ने वॉशिंग मशीन का पेटेंट कराया।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-jammu-and-kashmir-was-merged-with-india-on-26-october/11176/">History of The Day: आजादी के 72 दिन बाद भारत का हिस्सा बना कश्मीर</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-jammu-and-kashmir-was-merged-with-india-on-26-october/11176/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>History Of The Day: आजाद भारत का पहला वोट, 4 महीने चले थे चुनाव</title>
		<link>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-first-parliament-election-in-india/11129/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=history-of-the-day-first-parliament-election-in-india</link>
					<comments>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-first-parliament-election-in-india/11129/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Oct 2021 02:54:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[History of the Day]]></category>
		<category><![CDATA[Knowledge]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[25 OCTOBER]]></category>
		<category><![CDATA[25 अक्टूबर का इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[First Parliament Election in India]]></category>
		<category><![CDATA[History Of The Day]]></category>
		<category><![CDATA[Important Day And Events]]></category>
		<category><![CDATA[IMPORTANT EVENTS OF TODAY]]></category>
		<category><![CDATA[Indian History]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[World History]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास के पन्नों से]]></category>
		<category><![CDATA[तारीख गवाह है]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11129</guid>

					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota भारतीय लोकतंत्र में 25 अक्टूबर की तारीख बेहद खास मायने रखती है। साल 1951 में इसी दिन आजाद भारत की पहली सरकार चुनने के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई थी। आजाद हिंदुस्तान का सबसे पहला वोट हिमाचल प्रदेश के चिनी में डाला गया था। भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली और 26 जनवरी &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-first-parliament-election-in-india/11129/">History Of The Day: आजाद भारत का पहला वोट, 4 महीने चले थे चुनाव</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Kota</span> </strong>भारतीय लोकतंत्र में 25 अक्टूबर की तारीख बेहद खास मायने रखती है। साल 1951 में इसी दिन आजाद भारत की पहली सरकार चुनने के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई थी। आजाद हिंदुस्तान का सबसे पहला वोट हिमाचल प्रदेश के चिनी में डाला गया था।</p>
<p><img decoding="async" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-First-Parliament-Election-India.jpg" /></p>
<p>भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली और 26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र बना। लेकिन, यह कम ही लोगों को पता होगा कि पहले आम चुनाव 1951-52 में कैसे हुए थे और किस तरह वोटिंग हुई थी। पहले चुनावों में लोकसभा की 497 तथा राज्य विधानसभाओं की 3,283 सीटों के लिए भारत के 17 करोड़ 32 लाख 12 हजार 343 रजिस्टर्ड वोटर थे। कुल 68 फेज में वोटिंग हुई थी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/madhya-pradesh/new-variant-of-corona-found-in-indore-ay-4-confirmed-in-sample-of-7-patients/11127/">Corona: इंदौर में मिला नया वैरिएंट &#8220;AY-4&#8221; 7 मरीजों के सैंपल में पुष्टि</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कांग्रेस को बहुमत</strong> </span><br />
आजादी के संघर्ष के कारण आम जनता में तो कांग्रेस का ही नाम बैठा था। इस वजह से कांग्रेस ने 364 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। उस वक्त एक निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक सीटें थीं, इस वजह से 489 स्थानों के लिए 401 निर्वाचन क्षेत्रों में ही चुनाव हुआ। 1960 से यह व्यवस्था खत्म हो गई। एक सीट वाले 314 निर्वाचन क्षेत्र थे। 86 निर्वाचन क्षेत्रों में दो सीटें और एक क्षेत्र में तीन सीटें थीं।</p>
<p><img decoding="async" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-First-Parliament-Election-in-India.jpg" /></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>प्रति वोटर खर्च आया 60 पैसे</strong></span><br />
25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक यानी करीब चार महीने चली उस चुनाव प्रक्रिया ने पूरी दुनिया के लोकतांत्रिक देशों की कतार में भारत को ला खड़ा किया था। एक अहम फैक्ट यह है कि पहले लोकसभा चुनाव में प्रति वोटर खर्च आया था 60 पैसे, जो 2019 के चुनावों में बढ़कर करीब 72 रुपए हो गया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/tis-utility/business/dabur-fem-controversial-ad/11094/">समलैंगिक-करवाचौथः भावनाओं से फिर खेला बाजार&#8230;</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>10.59 करोड़ लोगों ने चुना था अपना नेता </strong></span><br />
पहले चुनावों में 10.59 करोड़ लोगों ने अपने नेता को चुनकर इतिहास रचा था। इनमें 10.59 करोड़ में करीब 85% अशिक्षित थे। अशिक्षित वोटर्स का ध्यान रखते हुए पार्टियों और उम्मीदवारों के लिए चुनाव चिह्न की व्यवस्था की गई थी। तब हर पार्टी के लिए अलग बैलेट बॉक्स था, जिन पर चुनाव चिह्न थे। लोहे की 2.12 करोड़ पेटियां बनाई गई थीं और 62 करोड़ मतपत्र छापे गए थे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/rajasthan-patwari-exam-dummy-candidates-caught-in-jaipur-jodhpur-kota-and-udaipur/11100/">Rajasthan Patwari Exam: जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर में पकड़े गए डमी कैंडिडेट</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>बेहद मुश्किल था पहला चुनाव </strong></span><br />
सुकुमार सेन मुख्य चुनाव आयुक्त थे। उन्होंने वोटर रजिस्ट्रेशन से लेकर, पार्टियों के चुनाव चिह्नों के निर्धारण और साफ-सुथरा चुनाव कराने के लिए योग्य अधिकारियों के चयन का काम किया। बैलेट बॉक्स और बैलेट्स को पोलिंग बूथ तक पहुंचाना बहुत मुश्किल था। मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को कंबल और बंदूक के लाइसेंस का लालच देकर उनसे चुनाव सामग्री पोलिंग बूथ्स तक पहुंचाने में मदद ली गई। खैर, यह चुनाव प्रक्रिया धीरे-धीरे विकसित हुई और आज हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के तौर पर दुनिया को सिखा रहे हैं कि चुनाव कैसे कराने चाहिए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/entertainment/sports/t20-world-cup-pakistan-beat-india-by-10-wickets/11119/">T20 World Cup: &#8220;बाबर&#8221; के सामने &#8220;विराट सेना&#8221; ने टेके घुटने, पाकिस्तान की एक तरफा जीत</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>25 अक्टूबर की अन्य प्रमुख घटनाएं </strong></span><br />
2013ः नाइजीरिया में सेना ने आतंकवादी संगठन बोको हरम के 74 आतंकवादियों को मार गिराया।<br />
2009: बगदाद में हुए दो आत्मघाती बम धमाकों में करीब 155 लोग मारे गए।<br />
2000: अंतरिक्ष यान डिस्कवरी 13 दिन के मिशन के बाद धरती पर लौटा।<br />
1972: FBI ने पहली बार महिला एजेंटों को काम पर रखा।<br />
1960: न्यूयॉर्क में पहली इलेक्ट्रॉनिक रिस्ट वॉच बाजार में आई।<br />
1955: पहली बार घरेलू इस्तेमाल के लिए माइक्रोवेव ओवन की ब्रिकी टप्पन कंपनी ने शुरू की।<br />
1924: अंग्रेजों ने सुभाषचंद्र बोस को गिरफ्तार कर दो साल के लिए जेल भेजा।<br />
1870: अमेरिका में पहली बार पोस्टकार्ड का इस्तेमाल किया गया।<br />
1828: सेंट कैथरीन डॉक्स लंदन में खोला गया।<br />
1760: जॉर्ज तृतीय ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड के राजा बने।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-first-parliament-election-in-india/11129/">History Of The Day: आजाद भारत का पहला वोट, 4 महीने चले थे चुनाव</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-first-parliament-election-in-india/11129/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>History Of The Day 23 अक्टूबरः नेताजी ने बनाई थी ‘झांसी की रानी ब्रिगेड़’</title>
		<link>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-23-october/11037/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=history-of-the-day-23-october</link>
					<comments>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-23-october/11037/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 Oct 2021 04:09:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[History and Culture]]></category>
		<category><![CDATA[History of the Day]]></category>
		<category><![CDATA[Knowledge]]></category>
		<category><![CDATA[23 OCTOBER]]></category>
		<category><![CDATA[23 अक्टूबर का इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[History Of The Day]]></category>
		<category><![CDATA[Important Day And Events]]></category>
		<category><![CDATA[IMPORTANT EVENTS OF TODAY]]></category>
		<category><![CDATA[Indian History]]></category>
		<category><![CDATA[tis media]]></category>
		<category><![CDATA[World History]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास के पन्नों से]]></category>
		<category><![CDATA[तारीख गवाह है]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=11037</guid>

					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 23 अक्टूबर वर्ष का 296 वाँ (लीप वर्ष में यह 297 वाँ) दिन है। साल में अभी और 69 दिन शेष हैं। जानिए, इस तारीख ने इतिहास में क्या उथल-पुथल मचाई। 23 अक्टूबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ 1764 &#8211; मीर कासिम बक्सर की लड़ाई में पराजित हुआ। 1910 &#8211; ब्लांश एस स्कॉट &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-23-october/11037/">History Of The Day 23 अक्टूबरः नेताजी ने बनाई थी ‘झांसी की रानी ब्रिगेड़’</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 23 अक्टूबर वर्ष का 296 वाँ (लीप वर्ष में यह 297 वाँ) दिन है। साल में अभी और 69 दिन शेष हैं। जानिए, इस तारीख ने इतिहास में क्या उथल-पुथल मचाई।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>23 अक्टूबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ</strong></span><br />
1764 &#8211; मीर कासिम बक्सर की लड़ाई में पराजित हुआ।<br />
1910 &#8211; ब्लांश एस स्कॉट अमेरिका में अकेले हवाई जहाज उड़ाने बनाने वाली पहली महिला बनीं।<br />
1915 &#8211; न्यूयार्क में लगभग 25,000 महिलाओं ने मतदान के अधिकार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।<br />
1942 &#8211; अल अलामीन के युद्ध में मित्र राष्ट्रों ने जर्मन सेना को पराजित किया।<br />
1943 &#8211; नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज की ‘झांसी की रानी ब्रिगेड़’ की सिंगापुर में स्थापना की।<br />
1946 &#8211; त्रिग्वेली (नार्वे) सं.रा. संघ के प्रथम महासचिव नियुक्त। संयुक्त राष्ट्र महासभा की न्यूयार्क में पहली बार बैठक।<br />
1958 &#8211; रूसी कवि एवं उपन्यासकार बोरिस पास्तरनाक को साहित्य का नोबेल पुरस्कार।<br />
1973 &#8211; अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड एम निक्सन वाटरगेट मामले में टेप जारी करने पर सहमत हुए।<br />
1978 &#8211; चीन और जापान ने चार दशकों से चले आ रही शत्रुता को औपचारिक रूप से समाप्त किया।<br />
1980 &#8211; लीबिया एवं सीरिया द्वारा एकीकरण की घोषणा।<br />
1989 &#8211; हंगरी ने स्वयं को गणराज्य घोषित किया। हंगरी सोवियत संघ से 33 वर्षों के बाद आजाद होकर एक स्वतंत्र गणराज्य बना।<br />
1998 &#8211; पाकिस्तान ने कश्मीर समस्या का समाधान आत्म निर्णय से करने की मांग दोहरायी। जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपने पहले बैंक का राष्ट्रीयकरण किया।<br />
2000 &#8211; अमेरिकन विदेशी मंत्री मेडलिन अल्ब्राइट की उत्तरी कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग ली से ऐतिहासिक मुलाकात।<br />
2001 &#8211; नासा के मार्स ओडिसी अंतरिक्ष यान ने मंगल ग्रह की परिक्रमा शुरू की। एप्पल ने आईपॉड बाज़ार में उतारा<br />
2003 &#8211; 30 से 35 परमाणु बम होने की पुष्टि की। माओवादी हिंसा ने नेपाल के पूर्व मंत्री का आवास बम से उड़ाया। भारत और बुल्गारिया ने प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किये। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को ईरान ने अपनी परमाणु रिपोर्ट सौंपी। विश्व के अकेले सुपरसोनिक विमान कानकोर्ड ने न्यूयार्क से अपनी आख़िरी उड़ान भरी।<br />
2006 &#8211; सूडान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ के दूत को देश छोड़ने का आदेश दिया।<br />
2007 &#8211; कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर आर.के. राघवन को अपने नये सलाहकारी बोर्ड में नियुक्त किया।<br />
2008 &#8211; नया कम्पनी विधेयक 2008 लोकसभा में पेश हुआ।<br />
2011 &#8211; तुर्की के वान प्रांत में 7.2 तीव्रता का भूकंप,582 लोगों की मौत, हजारों घायल।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः चली कहानीः <a href="https://tismedia.in/entertainment/art-and-literature/sikka-badal-gaya-story-of-krishna-sobti/11033/">सिक्का बदल गया, पढ़िए कृष्णा सोबती की कहानी</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>23 अक्टूबर को जन्मे व्यक्ति</strong></span><br />
1974 &#8211; अरविन्द अडिग &#8211; प्रसिद्ध भारतीय लेखक हैं, जो अपने उपन्यास अंग्रेज़ी में लिखते हैं।<br />
1966 &#8211; शोभा करंदलाजे &#8211; भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिज्ञ हैं।<br />
1778 &#8211; रानी चेन्नम्मा &#8211; झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के समान कर्नाटक की वीरांगना और स्वतंत्रता सेनानी।<br />
1898 &#8211; खंडू भाई देसाई, श्रमिक नेता<br />
1923 &#8211; भैरोंसिंह शेखावत &#8211; राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री व भारत के उपराष्ट्रपति।<br />
1937 &#8211; देवेन वर्मा &#8211; हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध हास्य अभिनेता।<br />
1957 &#8211; सुनील मित्तल &#8211; एक भारतीय उद्योगपति, समाज सेवी और भारत के सबसे बड़े टेलीकॉम कंपनी एयरटेल के चेयरमैन<br />
1883 &#8211; मिर्ज़ा इस्माइल &#8211; सन 1908 में मैसूर के महाराजा के सहायक सचिव थे।</p>
<p><strong>पढ़ें और भी कहानियांः <a href="https://tismedia.in/category/entertainment/art-and-literature/">TIS Media चली कहानी </a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>23 अक्टूबर को हुए निधन</strong></span><br />
2012 &#8211; सुनील गंगोपाध्याय &#8211; सरस्वती सम्मान से सम्मानित प्रसिद्ध बांग्ला साहित्यकार थे।<br />
1623 &#8211; तुलसीदास जन मानस के कवि।<br />
1973 &#8211; नेली सेनगुप्ता &#8211; प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारी।<br />
2005 &#8211; भोलाशंकर व्यास &#8211; &#8216;काशी&#8217; (वर्तमान बनारस) के प्रसिद्ध साहित्यकार।<br />
1962 &#8211; सूबेदार जोगिन्दर सिंह- परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-23-october/11037/">History Of The Day 23 अक्टूबरः नेताजी ने बनाई थी ‘झांसी की रानी ब्रिगेड़’</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-23-october/11037/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>1857 की क्रांति का अनोखा नायक, जिसे भारत ने भुला दिया और अंग्रेजों ने सहेजा</title>
		<link>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-sudheer-vidyarthi-on-a-unique-soldier-forgotten-by-india-but-acknowledged-by-britishers/8084/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=article-by-sudheer-vidyarthi-on-a-unique-soldier-forgotten-by-india-but-acknowledged-by-britishers</link>
					<comments>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-sudheer-vidyarthi-on-a-unique-soldier-forgotten-by-india-but-acknowledged-by-britishers/8084/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 May 2021 08:21:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Article]]></category>
		<category><![CDATA[History and Culture]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Article By Sudheer Vidyarthi]]></category>
		<category><![CDATA[Article On Mohammad Ali Khan Efforts And Sacrifice For Independence Of India]]></category>
		<category><![CDATA[Fight Against British Rulers]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Articles]]></category>
		<category><![CDATA[hindi news]]></category>
		<category><![CDATA[history]]></category>
		<category><![CDATA[Indian History]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Rebellion of 1857]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Mohammad Ali Khan]]></category>
		<category><![CDATA[Sacrifices For Independence]]></category>
		<category><![CDATA[Sergeant William Forbes Mitchell]]></category>
		<category><![CDATA[the inside stories]]></category>
		<category><![CDATA[TISMedia]]></category>
		<category><![CDATA[Unique Hero Forgotten By India]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=8084</guid>

					<description><![CDATA[<p>इसके बाद पकड़े जाने पर फांसी का हुक्म। जिस सुबह उसे मौत की सजा दी जानी थी उससे पूर्व की रात्रि में सार्जेंट विलियम फोरबेस मिचेल जैमिग्रीन से अपनी कैफियत बयां करने को कहते हैं और वह है कि काली रात के उस भयावह सन्नाटे में हिम्मत के साथ लफ्ज़-लफ्ज़ बयान करता जाता अपना सफरनामा &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-sudheer-vidyarthi-on-a-unique-soldier-forgotten-by-india-but-acknowledged-by-britishers/8084/">1857 की क्रांति का अनोखा नायक, जिसे भारत ने भुला दिया और अंग्रेजों ने सहेजा</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>जैमिग्रीन जिसका वास्तविक नाम मुहम्मद अली खान था, यह उसी की जिंदगी की अत्यंत रोमांचकारी क्रांति-कथा है। 1857 के युद्ध में एक छात्र की अनोखी हिस्सेदारी। मैं जैमिग्रीन का चेहरा देखना चाहता हूं पर मेरे सामने उसकी सिर्फ कल्पनिक तस्वीरें हैं- एक वह जब बरेली कालेज का छात्र रहा था, दूसरे जिन दिनों उसने रुड़की के इंजीनियरिंग कालेज में शिक्षा प्राप्त की और तीसरे में वह गदर के दौरान लखनऊ की क्रांतिकारी फौज में चीफ इंजीनियर का कार्य करते हुए दुश्मन के इलाके की टोह लेने की मुहिम में शामिल है।
			</div>
		</div>
	
<p>इसके बाद पकड़े जाने पर फांसी का हुक्म। जिस सुबह उसे मौत की सजा दी जानी थी उससे पूर्व की रात्रि में सार्जेंट विलियम फोरबेस मिचेल जैमिग्रीन से अपनी कैफियत बयां करने को कहते हैं और वह है कि काली रात के उस भयावह सन्नाटे में हिम्मत के साथ लफ्ज़-लफ्ज़ बयान करता जाता अपना सफरनामा जब मृत्यु उससे कुछ कदम दूर ठिठकी खड़ी उसकी आवाज पर कान धरने की कोशिश कर रही थी।</p>
<p>यह एक जीवंत रोजनामचा है क्रांति के उस कठिन दौर का जिसे कराची पाकिस्तान से प्रकाशित पत्रिका ’अल इल्म’ ने 1957 के मई अंक में छापा और मेसर्स मैकमिलन एंड कंपनी ने इसे पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया। आज बरेली कालेज में जैमिग्रीन के नाम पर ना कोई सभागार है, न स्मारक-पटल। वे प्रतिवर्ष ’जैमिग्रीन दिवस’ भी नहीं मनाते।</p>
<p>जैमिग्रीन ने फांसी के फंदे में लटकने से पहले फारबेस मिचेल से जो बयान किया था उसे जानना बहुत जरूरी है। अंग्रेजों की रेजीमेंट 93 बरतानिया से मई 1857 में लार्ड एलगिन (तत्कालीन वायसराय के पिता) के नेतृत्व में रवाना हुई। अफ्रीका पहुंचने पर हिन्दुस्तान के गदर से निपटने के लिए वह यहां भेज दी गई। 27 अक्टूबर 1857 को कानपुर-लखनऊ की लड़ाई और फतेहगढ़ के बागियों को कुचलने के बाद वह दोबारा लखनऊ जा रही थी। 10 फरवरी को अंग्रेजी फौज ने उन्नाव में कैम्प किया था, और आठ-दस दिन उसे यहीं ठहरना था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-pankaj-kumar-sharma-prakhar-on-this-difficult-time-of-covid-19-pandemic-will-also-pass/8031/"><strong>मुश्किल वक्त है </strong><strong>– </strong><strong>निकल जायेगा</strong></a></span></p>
<p>मिचेल साहब एक दिन टेंट में लेटे हुए थे कि सामने से एक खोमचे वाले को आवाज लगाकर केक, मिठाई इत्यादि बेचते हुए देखा। फौजी मैस का खाना खाते-खाते तबीयत उकता चुकी थी इसलिए मिठाई वाले को फौरन अंदर बुलाया। यह एक अत्यंत सुदर्शन नौजवान था। साफ-सुथरे, सफेद झक कपड़े पहने था। दाढ़ी मू्ंछें खूब बढ़ी हुईं, चौड़ा माथा, नाक जरा झुकी हुई थी। आंखों से बुद्धिमता टपकती थी, और बातों से फौजी भी नहीं मालूम होता था।</p>
<p>लेकिन उसके साथ जो नौकर था वह बहुत अक्खड़ और उजड्ड लगता था। मैंने उससे पूछा–’तुम्हारे पास यहां आने का पास है?’ खोमचे वाले ने मुस्करा कर कहा–’हां-हां, क्यों नहीं। लीजिए, देखिए। ब्रिगेडियर मेजर नहीं, बल्कि खुद ब्रिगेडियर साहब ने दिया है। मैं जैमिग्रीन के नाम से मशहूर हूं। दूसरी रेजीमेंट के खानसामा का लड़का हूं। शेरर साहब, मजिस्ट्रेट कानपुर की सिफारिशी चिट्ठी, जनरल होप साहब के नाम लाया हूं।’ मैंने चिट्ठी लिखकर देखी तो वास्तव में शेरर साहब की लिखी हुई थी। मुझे खोमचे वाले की जिस बात ने सर्वाधिक प्रभावित किया, वह था उसका धारा प्रवाह और अधिकारपूर्वक अंग्रेजी में बातचीत करने का ढंग। वह मुझसे अंग्रेजी अखबार लेकर पढ़ने लगा, और फौज के बारे में हर तरह की बातचीत करने लगा, कि ’आज कल कितने जवान हैं? यहां से कहां जाने का इरादा है? लखनऊ की घेराबंदी के लिए आपने क्या-क्या प्रबंध किए हैं? आप लोग तो विलायत से सीधे ही यहां आ रहे हैं होंगे, यहां की गर्मी कैसे गुजारेंगे?’ बगैरह-बगैरह।</p>
<p>मैंने उससे उसकी धारा प्रवाह अंग्रेजी के बारे में पूछा तो कहने लगा, ’मैंने रेजीमेंट स्कूल में अंग्रेजी शिक्षा पाई है, और काफी समय तक मस्कोट में क्लर्क भी रहा हूं। वहां सारा हिसाब-किताब अंग्रेजी में ही करता था।’ हम लोग बातचीत कर ही रहे थे कि उसके नौकर और एक गोरे सिपाही में पैसों के लेन-देन पर झगड़ा हो गया। मैंने कहा, ’मिस्टर! तुम्हारा यह नौकर बड़ा झगड़ालू है?’ तो कहने लगा, ’साहब यह बड़ा उजड्ड और मूर्ख आदमी है। आप इसकी बातों पर न जाएं। यह आयरलैंड का रहने वाला है। इसकी मां आठवीं आइरिश रेजीमेंट में रहती है। कानपुर की फौज के कमिश्नर ने इसे निकाल दिया क्योंकि उसकी नवयोवना मेम इसकी तीखी चितवन पर रीझ गई थी।’</p>
<p>उसकी लच्छेदार बातों ने हम सबका मन इतना मोह लिया था कि मिठाई छीन लेने वाले गोरे से हमने उसके पैसे दिलवा दिए और वह आगे बढ़ गया। उसी शाम मालूम हुआ कि जैमिग्रीन जो अपने आपको मस्कोट के खानसामा का बेटा बताता था, लखनऊ का जासूस निकला और वह तथा उसका साथी, पकड़ लिए गए हैं। चूंकि शाम हो गई थी इसलिए उसे फांसी नहीं दी गई और मेरी हिरासत में भेज दिया गया। मुझे यह जानकर दुख हुआ क्योंकि इतनी देर से मुझे उससे दिली लगाव-सा हो गया था। इसी के साथ मेरा यह संशय भी जाता रहा कि इतना पढ़ा-लिखा आदमी आखिर खोमचा उठाए क्यों फिरता था।</p>
<p>उसके नौकर को भी, जिसे वह मैकी कह कर पुकारता था, पहचान लिया गया था। यह आदमी था जिसने जुलाई 1857 में अंग्रेजों के खून की नदियां बहाई थीं। मिस्टर फिस्चेट ने जो उसका हुलिया अपनी किताब में लिखा था वह हू-ब-हू उसी का था, क्योंकि वह लंबा-चौड़ा-काला बदसूरत और चेचक-रू आदमी था। जब यह दोनों मेरे पहरे में दिए गए तो अंग्रेज सिपाहियों ने कहा कि इन्हें जबरदस्ती सुअर का गोष्त खिलाना चाहिए। लेकिन मैंने उन लोगों को सख्ती से डांट दिया और चेतावनी दे दी कि यदि ऐसी हरकत किसी ने की, तो मैं उसे हुक्म उदूली के जुर्म में हवालात में करवा दूंगा।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/citizen-journalist/article-by-kirti-sharma-on-mother-and-motherhood/8020/"><strong>&#8216;माँ&#8217; तो &#8216;माँ&#8217; होती है&#8230;</strong></a></span></p>
<p>यह सुनकर जैमिग्रीन के चेहरे पर सच्चे शुक्रिए के आसार पैदा हो गए। मैंने उसे नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी और कहा कि, ’मैं भरसक प्रयत्न करूंगा कि तुम्हें रिहाई मिल सके।’ यह सुनकर उसका उजड्ड नौकर बोला, कि मैं हरगिज गोरे काफिरों का यह एहसान नहीं लूंगा। इस पर जैमिग्रीन ने कहा, ’अरे नालायक! हमें सार्जेंट साहब का आभारी होना चाहिए कि इन्होंने हमें सुअर की चर्बी से बचाया है।’</p>
<p>मैंने यह सोचकर, कि अगर यह लोग फरार हो गए तो मुफ्त में बदनामी होगी, रात भर जागने का इरादा किया और एक मुसलमान दुकानदार को बुलाकर उससे कहा कि जो भी खाने को यह मांगे इन्हें ला दो। पैसे मैं अदा कर दूंगा। दुकानदार कहने लगा कि लानत है उस मुसलमान पर जो एक पैसा भी ले। अगर आप ईसाई होकर इतना एहसान कर सकते हैं, तो मैं मुसलमान होकर अपने ही हमवतन और भाई से पैसा लूंगा?</p>
<p>मैंने जैमिग्रीन से कहा, ’सुनो भाई जैमिग्रीन! यह तुम भी खूब अच्छी तरह से जानते हो कि आज की रात तुम्हारी जिंदगी की आखिरी रात है, और सुबह तुम्हें जरूर फांसी पर लटका दिया जाएगा। इसलिए मैं चाहता हूं कि तुम अपने सारे हालात मुझसे बयान कर दो क्योंकि मैं यह सब हालात लिखकर अपने दोस्तों को स्कॉटलैंड और लंदन भेजना चाहता हूं।’</p>
<p>यह सुनकर मुहम्मद अली खां बरेलवी उर्फ जैमिग्रीन कहने लगे कि साहब आपने मेरे ऊपर बड़ा एहसान किया है। इस नेकी का बदला आपको मेरे खुदा और रसूले-पाक की तरफ से जरूर मिलेगा। आप मेरे हालात लिखकर स्कॉटलैंड, और लंदन भेजना चाहते हैं। वहां मेरे भी कई दोस्त हैं, और वैसे भी वहां के लोग इंसाफ पसंद होते हैं। मेरी कहानी पढ़कर वे जरूर दुखी होंगे और ईमानदारी से कुछ सोचेंगे। इसलिए मैं आपको अपनी कहानी जरूर सुनाऊंगा, जरा ध्यान लगाकर सुनिए।</p>
<p>….यह बात वाकई सही है कि मैं एक जासूस हूं। अगर इस शब्द का सीधा मतलब निकाला जाए कि मैं कोई जासूस हूं तो इस इल्जाम से मैं साफ इनकार करता हूं। मैं कोई जासूस नहीं हूं बल्कि बेगम हजरत महल की फौज का एक अफसर हूं और लखनऊ से यहां इस बात की पुख्ता जानकारी हासिल करने आया हूं कि फौज की तादाद कितनी है और हमारे खिलाफ युद्ध करने के लिए कितने तोपखाने और वाहन जुटाए गए हैं।</p>
<p>मैं लखनऊ की फौज का चीफ इंजीनियर हूं और दुश्मन के इलाके की टोह लेने की मुहिम पर आया हूं। लेकिन अल्लाह को शायद यह मंजूर नहीं था। आज शाम मेरी योजना लखनऊ लौटने की थी। अगर किस्मत ने मेरा साथ दिया होता तो मैं कल सूरज निकलने से पहले वहां पहुंच चुका होता क्योंकि जो जानकारियां मुझे चाहिए थीं, मैंने वे सभी हासिल कर ली थीं। लेकिन मैं लखनऊ जाने वाली सड़क से होकर एक बार और उन्नाव जाना चाहता था क्योंकि मैं यह सब देखने के लिए बहुत बेताब था कि लाव-लश्कर से भरी रेलगाड़ियां और गोला-बारूद के दस्ते चलने की तैयारी कर चुके हैं या नहीं। इसे मेरा दुर्भाग्य ही कहिए कि मेरी मुलाकात एक नापाक मां के उस नालायक बेटे से हो गई जिसने मुझे जासूस करार दिलवा दिया है। वह जघन्य काम करने वाला एक नीच आदमी है जिसने फांसी के फंदे से अपनी गर्दन बचाने के लिए खुद को अंग्रेजों के हाथों बेच दिया। अब वह अपने हमवतन और सहधर्मियों की जिंदगी का सौदा करके अपनी नीचता से ध्यान हटाना चाहता है, लेकिन अल्लाह गवाह है कि वह जरूर इसे गद्दारी के बदले जहन्नुम की आग में भेजेगा।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-prakash-yogi-on-commercialization-of-education/8024/"><strong>शिक्षा का व्यापारीकरण</strong></a></span></p>
<p>खैर! हां, मेरा नाम मुहम्मद अली खां है। मैं रोहेलखंड के एक बहुत बड़े और सम्मानित परिवार से हूं। मैंने बरेली कालिज बरेली में शिक्षा पाई है और खास तौर पर अंग्रेजी भाषा में बड़ा नाम पैदा किया है। बरेली कालिज से शिक्षा पूरी करके मैं इंजीनियरिंग कालिज रूड़की गया। वहां भी परीक्षा में फर्स्ट क्लास फर्स्ट पास होने के अलावा अंग्रेजी में बहुत ज्यादा नंबर पाए। मगर नतीजा यह हुआ कि कंपनी के इंजीनियरों में सिर्फ जमादार की पदवी पर नियुक्त किया गया, और वह भी एक गोरे की मातहती में जो सिवाय बेवकूफी और उजड्डपन के हर बात में मुझसे कहीं कम था और कालिज के दिनों से ही मुझे नापसंद था। अपने अंग्रेज होने के अभिमान में वह मुझे बात-बात पर झिड़कता था। जब यह हालात खत में लिखकर मैंने अपने वालिद साहब से इस्तीफा देने की इजाजत मांगी तो उन्होंने शाबाशी देते हुए जवाब में लिखा कि ’तुम शहंशाहों की नस्ल से हो। इन हालात में गोरे काफिरों की नौकरी मत करो।’ मैंने फौरन नौकरी छोड़ दी। घर चला गया और इरादा किया कि नसीरूद्दीन हैदर शाहे अवध की नौकरी करूं। लखनऊ पहुंचने पर पता चला कि नेपाल के महाराजा जंग बहादुर आजकल गोरखपुर में लखनऊ के खिलाफ तैयारी कर रहे हैं और विलायत जाना चाहते हैं। इस वजह से उन्हें एक धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने वाले सेक्रेटरी की आवश्यकता है। मैंने दरख्वास्त दी जो मंजूर कर ली गई और मैं महाराजा के साथ पहली बार लंदन गया। वहां से हम लोग एडिनबर्ग भी गए जहां आपकी यही रेजीमेंट महाराजा के स्वागत को आई थी। उस समय मुझे न जाने क्यों ख्याल आया था कि एक दिन यही फौज मुझे गिरफ्तार करेगी। और देख लीजिए वही हुआ।</p>
<p>मिचेल साहब! वहां से लौटकर मैं कई राज-रजवाड़ों के यहां बड़े-बड़े सम्मानित पदों पर नियुक्त रहा हूं। अजीमुल्ला खां, जिसका नाम आपने गदर के संबंध में बहुत सुना होगा, ने मुझसे विलायत चलने को कहा। माधवराव पेशवा के बाद नाना साहब फड़नवीस ने उसे अपना मुख्य अधिकारी और राजदूत मनोनीत किया था। अजीमुल्ला मेरा सहपाठी था। उसने कानपुर के गवर्नमेंट स्कूल में मेरे साथ मास्टर गंगादीन जी से अंग्रेजी की शिक्षा खूब पाई थी। उसे पूरा विश्वास था कि मैं विलायत पहुंचकर लार्ड डलहौजी द्वारा लगाए गए इल्जाम नाना साहब के ऊपर से निरस्त करा लूंगा। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि हम लोगों की मशक्कत तो बहुत हुई लेकिन अपने मकसद में हम पूरी तरह से असफल रहे, और पांच लाख रूपया बरबाद करके हम लोग 1885 में कुस्तुनतुनिया होते हुए हिंदुस्तान को रवाना हुए। कुस्तुनतुनिया से हम क्रीमिया गए जहां हमने देखा कि 18 जून 1855 को अंग्रेजी फौज ने हमला किया और बुरी तरह से पराजित हुई। सवास्टपोल के सामने दोनों फौजों की जर्जर हालत को देखकर हम बहुत प्रभावित हुए। युद्धस्थल से लौटकर जब हम लोग कुस्तुनतुनिया लौटे तो वहां हमसे कई रूसी अफसर मिले जिन्होंने कहा कि तुम हिंदुस्तान में आजादी के लिए अंग्रेजों से जंग करो। हम हर तरह से तुम्हारी सहायता करेंगे और इसी में तुम्हारी भलाई है।</p>
<p>मिचेल साहब! सच पूछो तो यहीं से मैंने और अजीमुल्ला खां ने पक्का इरादा बना लिया कि सरज़मीने हिंदुस्तान से कम्पनी का राज खत्म कर देंगे और मादरे-वतन के माथे से गुलामी का दाग धोकर रहेंगे, चाहे इसके लिए हमें अपनी जान ही क्यों न देनी पड़ जाए। और खुदा का लाख-लाख शुक्र व एहसान है कि हमें इसमें किसी हद तक कामयाबी भी मिली है क्योंकि उन हालात से, जो आपने बताए हैं, स्पष्ट हो गया है कि कंपनी का राज अब लगभग समाप्त होने को है। लेकिन अगर हम अंग्रेजों को अपने वतन से न भी निकाल सके तो भी हम समझते हैं कि हमने देश को काफी फायदा पहुंचाया है, और हमारी कुर्बानी बेफायदा नहीं गई है। क्योंकि मैं समझता हूं कि पार्लियामेंट की सरकार, अंग्रेजी शासकों से कहीं ज्यादा न्यायप्रिय होगी। हालांकि मैं उस समय जीवित नहीं होऊंगा, लेकिन मेरे दलित और संकटग्रस्त देशवासी आने वाले समय में ज्यादा अमन चैन, ज्यादा सम्मान से रह सकेंगे। सुनहरा भविष्य हर हाल में मेरे देशवासियों का स्वागत करेगा।</p>
<p>मिचेल साहब! आपने इस वक्त जो एहसान मेरे ऊपर किया, उसने मुझे आपके आगे झुका दिया है। वरना सच कहता हूं कि मुझे आपकी इस अंग्रेज जाति से हद से ज्यादा नफरत है। लेकिन आपकी हमदर्दी ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। यह बात मैं आपकी खुशामद के लिए नहीं कह रहा हूं क्योंकि कल मेरी मौत निश्चित है, और आप चाह कर भी मेरी मदद नहीं कर सकते। वैसे भी हम हिंदुस्तानी मौत से नहीं डरते। मैं आपको बताना चाहता हूं कि अंग्रेजों से मुझे घृणा क्यों है।</p>
<p>अभी हाल ही में मैंने देखा कि आपके ही कर्नल नेपियर साहब इंजीनियर, कानपुर घाट पर हिदुओं के मंदिर गिरवा रहे थे। कुछ हिंदू पुजारी उनके पास मंदिर न तुड़वाने की प्रार्थना करने डरते-फिरते पहुंचे, लेकिन कर्नल नेपियर ने उनकी विनम्र प्रार्थना का जवाब उन्हें गालियां देते हुए दिया। उसने कहा कि सुनो हिंदुस्तानी कुत्तो! जब हमारी मेमो और बच्चों की सरेआम हत्याएं की गई थीं तो तुम लोग यहीं थे। क्या तुमने उन्हें बचाने की कोशिश की थी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/mahatma-gandhis-last-wish-written-under-his-will-is-not-fulfilled-till-date/7991/"><strong>गांधीजी की अंतिम इच्छा: आज तक नहीं हो सकी पूरी&#8230;</strong></a></span></p>
<p>अगर तुममें से कोई भी व्यक्ति यह साबित कर दे कि उस समय तुममें से किसी ने हमदर्दी का एक शब्द भी कहा था तो मैं मंदिरों को तुड़वाना रोक सकता हूं। अगर नहीं, तो अभी मेरी नजरों से दूर हो जाओ, वरना…….। बेचारे निरीह और असहाय पुजारी अपने दिल पर पत्थर रखकर वहां से हट गए। यह दृश्य देखकर मैं अपना कलेजा मसोस कर रह गया, और वहां से चला आया। जिस समय कानपुर में गदर हुआ, मैं रोहेलखंड में था। मैं जानता था कि तूफान बस अब आने ही वाला है, इसलिए अपने घर और अपने गांव और बाल-बच्चों की रक्षा के विचार से अपने गांव चला गया था। मैं अभी गांव में ही था कि मेरठ और बरेली में गदर की खबर आई। मैं फौरन बरेली पहुंचकर रोहेला सरदार खान बहादुर खान की फौज में भर्ती हो गया। पहले इंजीनियर और फिर चीफ इंजीनियर के पद पर नियुक्त हुआ और कम्पनी के बागी हिंदुस्तानी इंजीनियरों की सहायता से, जिन्होंने रूड़की से मेरठ जाते समय बगावत की थी, किलों और पुलों इत्यादि को मजबूत करने लगा। फिर मैंने इधर-उधर बिखरे हुए अपने आदमी समेटे और लखनऊ की ओर कूच किया। जमुना का पुल टूटा होने की वजह से हमें मथुरा में रूकना पड़ा। जब मैंने दोबारा पुल बना दिया तो फौज फिर लखनऊ की तरफ बढ़ी। उस समय भी फीरोजशाह और जनरल बख्त खां के पास लगभग तीस हजार फौज थी। नवंबर में जब आपकी फौज ने लखनऊ की रेजीडेंसी को बचाया तो मैं वहीं था।</p>
<p>सिकंदरा बाग, लखनऊ का मोर्चा मेरी ही कमान में था और मैंने वहां तीन हजार से अधिक आदमी लगाए थे। बड़ा घमासान युद्ध हुआ। हमारा एक भी आदमी नहीं बचा। मेरी फौज के जवान एक-एक करके शहीद होते रहे, लेकिन क्या मजाल कि किसी ने भी कदम पीछे हटाया हो। इतनी कुर्बानियों के बाद भी जब मैंने देखा कि जहां मैंने अपनी फौज का हरा झंडा लगवाया था, वहां अब घाघरा पलटन का झंडा (यूनियन जैक) लहरा रहा है तो मेरा जिगर पानी-पानी हो गया। जब मुझे विश्वास हो गया कि अब बचने का कोई रास्ता नहीं तो मैंने तोपों को सर करने का आदेश दे दिया।</p>
<p>इसके बाद मैं बराबर लखनऊ और आसपास के किलों बुर्जों की मरम्मत और मजबूती करवाता रहा। आप जाकर देखेंगे कि अगर सिपाही और गोलन्दाजों को उनके पीछे कदम जमाने का मौका मिल जाए तो अंग्रेजों की बहुत-सी फौज काम आ जाएगी तब कहीं जाकर लखनऊ हाथ आएगा।</p>
<p>इतना कह कर मुहम्मद अली खां बैठ गया। थोड़ा खाना खाकर पानी पिया। मैंने (मिचेल ने) पूछा, ’यह तुम्हारा साथी वही है जिसने नाना साहब के आदेश पर मेमो और बच्चों की नृशंस हत्याएं की थीं?</p>
<p>मुहम्मद अली खां ने जवाब दिया, हां, यही है।</p>
<p>मैंने पूछा, यह अफवाह कहां तक सही है कि पहले मेमो के साथ बलात्कार किया गया फिर उन्हें तड़पा-तड़पा कर मारा गया? इस पर मुहम्मद अली खां के चेहरे पर बेबसी और गुस्से के मिले-जुले भाव उभरे, और वह एक तरह से जोशीले स्वर में कहने लगा:</p>
<p>हम हिंदुस्तानी और आप एक दूसरे के लिए अजनबी हैं साहब! वरना ऐसी बात आप जुबान पर भी नहीं लाते। जो आदमी हमारी संस्कृति, हमारे नैतिक मूल्यों और रस्मो-रिवाज के बारे में थोड़ा-सा भी जानता है वह ऐसी बातों पर कभी विश्वास नहीं करेगा। यह सब मनगढ़ंत कहानियां हैं जो हमारे खिलाफ नफरत भड़काने के लिए फैलाई गई हैं। हां, यह सही है कि औरतें और बच्चे भी इस गदर में मारे गए हैं लेकिन किसी के साथ ऐसा कुकर्म नहीं किया गया है। इस तरह की जितनी भी खबरें हिंदुस्तान और इंग्लैण्ड के अखबारों में लिखी गई हैं, सब झूठी हैं। क्रांतिकारियों को बदनाम करने के लिए यहां तक प्रपंच रचा गया कि बंगलों की दीवारों पर यह जो लिखा हुआ मिलता है कि ’हम वहषियों के हाथ में हैं, इन्होंने बूढ़ी जवान औरतों और बच्चों तक को अपमानित किया है–सब एक सुनियोजित शड्यंत्र है। ये सारे वाक्य जनरल सर हेनरी हैवलाक और जनरल सर जेम्स ओट्राम के कानपुर फतह करने के बाद लिखाए गए हैं। हालांकि मैं वहां नहीं था लेकिन जो लोग वहां मौजूद थे उन्होंने मुझे यह बातें बताई हैं और मैं जानता हूं कि सच्चाई यही है।</p>
<p>फिर मैंने एक और सवाल किया कि नाना साहब ने इतना रक्तपात क्यों कराया? उसने बड़े शांत भाव से जवाब दिया:</p>
<p>हम हिंदुस्तानी बुनियादी तौर पर अपनी मुहब्बत और अपनी नफरत दोनों में ही बहुत खरे होते हैं। दूसरे शब्दों में चाहे तो कहें कि अतिवादी होते हैं। या तो सिर्फ मुहब्बत, या सिर्फ नफरत। इन दोनों के बीच की स्थिति हमारे यहां दोगलापन कहलाती है, और यह शब्द हमारे यहां एक मोटी गाली के रूप में ही किसी को दिया जाता है। और फिर यह कांटे जो आपके उस कहर की, जो बरसों से आप हम पर ढाते चले आ रहे हैं। और नाना राव भी आखिर एक हिंदुस्तानी हैं। फिर इसके अलावा एक कारण और भी तो था, और वह भी एक औरत, जिसे वह अंग्रेजों की गुलामी से आजाद करा कर अपने निवास में ले आया था, वह अंग्रेजों से इतनी नफरत करती थी कि उनकी सूरत तक नहीं देखती थी। आप समझ सकते हैं कि अंग्रेजों ने उसके साथ क्या-क्या नहीं किया होगा जिसे वह कभी भुला नहीं पाई। इस औरत का जिक्र उन गवाहों ने भी किया है जो कानपुर हत्याकांड केस के संबंध में सुने गए हैं। नाना साहब के साथ एक आदमी और है, मेरा दोस्त अजीमुल्ला खां। उसे भी अंग्रेजों से खुदा वास्ते का बैर है। हालांकि एक बार मेरे सामने ही हमारे जनरल तात्यां टोपे और नाना साहब में इस मामले को लेकर कहा-सुनी भी हो गई थी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-shobha-kanwar-on-what-teachers-parents-and-children-should-do-in-this-covid-19-situation/7880/"><strong>कोरोना काल मे बच्चे व शिक्षक की भूमिका</strong></a></span></p>
<p>इसके बाद मैंने पूछा, इस अफवाह की क्या हकीकत है कि जनरल व्हीलर की बेटी अपने रिवाल्वर से चार-पांच आदमियों को मार कानपुर के प्रसिद्ध कुएं में कूद गई?</p>
<p>उसने हंस कर जवाब दिया: यह सब कोरी गप्पें हैं। इनकी कोई बुनियाद नहीं। जनरल व्हीलर की बेटी आज भी जिंदा है और मुसलमान होकर उस नौजवान से शादी कर चुकी है जिसने उसकी जान बचाई थी। आजकल वे दोनों पति-पत्नी के रूप में लखनऊ में रह रहे हैं।</p>
<p>इस तरह की बातों में रात बीत गई। सुबह को मैंने मुहम्मद अली को नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी। नमाज पढ़ने के बाद उसने मेरे लिए दुआ मांगी, या अल्लाह, इस शख्स को जिसने तेरे मजलूम बंदे पर एहसान किए हैं उसे जजाए खैर दे।</p>
<p>नमाज पढ़ने के बाद मैंने मुहम्मद अली खां को कुछ उदास देखा तो पूछा, क्या बात है? बाल-बच्चों की याद आ रही है?</p>
<p>वह कहने लगा: हां, घर के अलावा मेरी उदासी का एक बहुत बड़ा कारण यह भी है कि मैं अपने मकसद में कामयाब न हो सका। एक पाकीजा तमन्ना मेरे सीने में ही घुट कर रह गई कि एक नजर ही सही आजादी की सुबह का दीदार मैं भी कर पाता तो कितना अच्छा होता। लेकिन नहीं। आप मुझे कमजोर न समझें। मैंने इंग्लिस्तान और फ्रांस का इतिहास पढ़ा है, और अच्छी तरह से जानता हूं कि आजादी के मतवालों की आखिरी मंजिल शहादत ही होती है।</p>
<p>यह कहकर उसने सोने की एक अंगूठी, जो अपने बालों में छिपा रखी थी, निकालकर मुझे देते हुए कहा: मेरे पास तोहफे में देने के लिए कुछ भी नहीं। जो था वह सब बिक चला। हालांकि वैसे इस अंगूठी की कोई कीमत आपको नजर नहीं आएगी लेकिन जब आप इसे पहनेंगे तो आपको इसके अनमोल होने का एहसास होगा। यह अंगूठी मुझे कुस्तुनतुनिया के एक फकीर ने दी थी और इसे मैं अपनी जान से ज्यादा संभाल कर रखता था। आप मेरी तरफ से एक मामूली भेंट समझकर स्वीकार कर लीजिए। मेरी दुआ है कि किसी भी लड़ाई में आपको कोई तकलीफ नहीं पहुंचेगी।</p>
<p>थोड़ी देर बाद गार्ड उन दोनों को लेने आ गए और मैंने न चाहते हुए भी उन्हें विदा किया……</p>
<p>सबेरे ही फौज की कूच का आदेश मिल गया। मेरी कंपनी को सबसे बाद में आने का आदेश था। कानपुर से लखनऊ जाने वाली सड़क पर हमने देखा कि जैमिग्रीन और उसके साथी की लाशें एक बड़े पेड़ पर लटकी हुई थीं। मैं कांप कर रह गया और मेरे आंसू टपक पड़े।</p>
<p>जैमिग्रीन की अंगूठी आज भी मेरे पास है और जब से आज तक बड़ी-बड़ी लड़ाइयों में मेरा बाल-बांका नहीं हुआ है। मैं सोचता हूं कि मरते वक्त जब यह अंगूठी अपने बच्चों को दूंगा तो उन्हें जैमिग्रीन की शौर्य गाथा भी जरूर बताऊंगा।</p>
<p>फोरबेस मिचेल का यह रोजनामचा पढ़कर मेरे भीतर बहुत खामोशी है। एक सन्नाटे ने जैसे पूरी चेतना को अपनी गिरफ्त में ले लिया है और उससे निकल पाना मेरे लिए कठिन हो रहा है। क्या मैं मिचेल के परिवार का पता करके जैमिग्रीन की अंतिम निशानी वह अंगूठी अपने देश वापस ला सकता हूं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-lalit-gautam-on-unemployment-due-to-covid-19-in-india/7884/"><strong>रोजगार पर कोरोना का कहर</strong></a></span></p>
<p>मेरे सामने मार्च 1858 का जैमिग्रीन की फांसी के पंद्रह-बीस दिनों के बाद का लखनऊ का एक चित्र है। बेहद उदास कुछ इमारतों के मध्य दूर तक दिखाई पड़ती सूनी सड़क जिस पर चार-पांच खामोश आदमियों की आकृतियां नजर आ रही हैं। इसमें क्रांतिकारियों के पतन के बाद का नजारा है जिसे देख पाना नितांत कठिन है मेरे लिए। दुख है कि मौत के मुहाने से इस युवा जैमिग्रीन का दिया गया पैगाम देशवासियों ने पढ़ने की जहमत नहीं की जिसमें उसने साहस के साथ अपने क्रांतिकारी चरित्र को अभिव्यक्ति दी थी।</p>
<p>उसने बार-बार भारतीय संस्कृति के उच्च आदर्शों को स्मरण करने के साथ ही दलितों और संकटग्रस्त देशवासियों के लिए उस जमाने में सम्भवतः पहला संदेश भेजने का इकलौता साहस किया था। और वह अंग्रेज अधिकारी फारबेस मिचेल भी बार-बार मेरी आंखों के सामने आ खड़ा होता है जिसने कुछ लम्हों ही सही, सत्तावनी क्रांति के फांसी चढ़ने जा रहे एक नौजवान क्रांतिकारी के प्रति अपनी सदाशयता ही नहीं प्रदर्शित की, बल्कि उसकी क्रांतिकथा को कागज पर उतार कर हमारे लिए एक गर्व करने योग्य थाती सौंप दी।</p>
<p>हम मिचेल के जरिए ही जैमिग्रीन की विप्लवी गाथा से परिचित हो पाए। वह 16 फरवरी 1858 का दिन था जब जैमिग्रीन को फांसी पर लटकाया गया। सत्तावनी क्रांति के इतिहास का यह एक जरूरी अध्याय है जिसे प्रायः विस्मृत कर दिया गया।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">लेखक:</span> <span style="color: #0000ff;">सुधीर विद्यार्थी</span></strong><br />
<span style="color: #0000ff;"><strong>(लेखक भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के ऐतिहासिक दस्तावेजों के संग्रहण, संपादन एवं विशिष्ट लेखन के लिए देश भर में प्रख्यात हैं)</strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-sudheer-vidyarthi-on-a-unique-soldier-forgotten-by-india-but-acknowledged-by-britishers/8084/">1857 की क्रांति का अनोखा नायक, जिसे भारत ने भुला दिया और अंग्रेजों ने सहेजा</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-sudheer-vidyarthi-on-a-unique-soldier-forgotten-by-india-but-acknowledged-by-britishers/8084/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>21 अप्रैलः हिंदुस्तान में आज ही के दिन पड़ी थी मुगल साम्राज्य की नींव</title>
		<link>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/babar-defeated-ibrahim-lodhi-the-sultan-of-delhi-sultanate-in-the-battle-of-panipat-on-21-april/7032/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=babar-defeated-ibrahim-lodhi-the-sultan-of-delhi-sultanate-in-the-battle-of-panipat-on-21-april</link>
					<comments>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/babar-defeated-ibrahim-lodhi-the-sultan-of-delhi-sultanate-in-the-battle-of-panipat-on-21-april/7032/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Apr 2021 07:31:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Career]]></category>
		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[DELHI]]></category>
		<category><![CDATA[Global]]></category>
		<category><![CDATA[History and Culture]]></category>
		<category><![CDATA[History of the Day]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Babar defeated Ibrahim Lodhi]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi Sultanate battle of Panipat]]></category>
		<category><![CDATA[History of day]]></category>
		<category><![CDATA[History of the World]]></category>
		<category><![CDATA[Indian History]]></category>
		<category><![CDATA[Lodhi Dynasty]]></category>
		<category><![CDATA[Mathematician Shakuntala Devi]]></category>
		<category><![CDATA[Mughal Empire]]></category>
		<category><![CDATA[Mughal Sultanate]]></category>
		<category><![CDATA[Sultan of Delhi Sultanate]]></category>
		<category><![CDATA[Themanan Chowk China]]></category>
		<category><![CDATA[Today's History]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://tismedia.in/?p=7032</guid>

					<description><![CDATA[<p>कोटा. 21 अप्रैल का&#8230; बाजीराव से लेकर बहलोल लोधी तक ने इसी रोज सत्ता संभाली&#8230; इसी रोज बाबर ने लोधी को शिकस्त दे हिंदुस्तान में मुगल साम्राज्य की नींव रखी&#8230; इसी रोज शायर इकबाल ने दम तोड़ा तो इसी रोज यूनान ने जर्मनी के आगे घुटने टेके। 21 अप्रैल यानि सल्तनतों के बनने बिगड़ने के &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/babar-defeated-ibrahim-lodhi-the-sultan-of-delhi-sultanate-in-the-battle-of-panipat-on-21-april/7032/">21 अप्रैलः हिंदुस्तान में आज ही के दिन पड़ी थी मुगल साम्राज्य की नींव</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कोटा.</strong></span> 21 अप्रैल का&#8230; बाजीराव से लेकर बहलोल लोधी तक ने इसी रोज सत्ता संभाली&#8230; इसी रोज बाबर ने लोधी को शिकस्त दे हिंदुस्तान में मुगल साम्राज्य की नींव रखी&#8230; इसी रोज शायर इकबाल ने दम तोड़ा तो इसी रोज यूनान ने जर्मनी के आगे घुटने टेके। 21 अप्रैल यानि सल्तनतों के बनने बिगड़ने के इस दिन के तौर पर इतिहास की तारीखों में हमेशा याद रखा जाएगा।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>पानीपत की पहली लड़ाई</strong></span><br />
बात हिंदुस्तान की कीजाए तो 21 अप्रैल का दिन देश के इतिहास में निर्णायक मोड़ लेकर आया था। इसी रोज पानीपत के मैदान में दो मुस्लिम शासकों के बीच सबसे बड़ा और एतिहासिक युद्ध हुआ। इसी रोज हिंदुस्तान की सरजमीं पर पहली बार युद्ध में तोपों का इस्तेमाल किया गया। साल था 1526, जब काबुल के शासक जहीरूद्दीन मोहम्मद बाबर और दिल्ली सल्तनत के सुल्तान इब्राहिम लोदी के बीच पानीपत की पहली लड़ाई हुई। इस लड़ाई में बाबर ने तोपों का इस्तेमाल कर लड़ाई का रुख ही बदल कर रख दिया था। तोपों की गूंज ने हिंदुस्तान में सालों से चली आ रही परंपरागत युद्ध शैली का इस्तेमाल करने वाले लोदी की हार सुनिश्चित कर दी। हुआ यूं कि  लोधी पानीपत के मैदान में हाथियों की परंपरागत ताकत के दम पर जंग के लिए मैदान में उतरा, लेकिन बाबर की सेना संख्या में कम होने के बावजूद तोपों की ताकत के बूते लोदी की सेना पर भारी पड़ी। इस लड़ाई में लोदी मारा गया और भारत में मुगल साम्राज्य की नींव पड़ गई।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>दुनिया ने देखा चीन का खूनी चेहरा</strong></span><br />
21 अप्रैल 1989 को चीन के थियानमेन चौक पर 10 लाख से अधिक प्रदर्शनकारी जमा हुए और आजादी की मांग को लेकर प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शन करने वालों में ज्यादातर संख्या छात्रों और नौजवानों की थी। छह सप्ताह से चले आ रहे चीन के इस सबसे लंबे प्रदर्शन को चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने बड़ी बेहरमी से कुचला था। 04 जून 1989 की रात चीनी सुरक्षाबलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां बरसायी और उन पर टैंक चलवा दिये। कहा जाता है कि इसमें 10 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे गए। थियानमेन चौक और आसपास के इलाकों में हर तरफ प्रदर्शनकारियों की लाशें बिछ गयीं। एक प्रदर्शनकारी टैंक के सामने खड़े होकर अपना विरोध जता रहा था। सामने आती टैंकों से भी वह न तो विचलित हुआ और न ही अपने कदम खींचे। टैंकों ने उसे रौंद दिया। यह तस्वीर इस नरसंहार के साथ-साथ प्रतिरोध की प्रतिनिधि तस्वीर के रूप में दुनिया के सामने आई। अमेरिकी फोटोग्राफर चार्ली कोल ने इसकी तस्वीर उतारकर चीन का खौफनाक चेहरा दुनिया के सामने उजागर किया। वे टैंकमैन के नाम से दुनिया भर में मशहूर हुए।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>21 अप्रैलः भारत की प्रमुख:-</strong></span></p>
<p>1451 – लोदी वंश का संस्थापक बहलोल खां लोदी दिल्ली का शासक बना।<br />
1526 – मुगल शासक बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोदी मारा गया।<br />
1720 – बाजी राव प्रथम पेशवा बालाजी विश्वनाथ के उत्तराधिकारी बने।<br />
1938 – मशहूर शायर मोहम्मद इकबाल का लाहौर में निधन। बंटवारे के बाद वह पाकिस्तान चले गए थे।<br />
1996 – भारतीय वायु सेना के संजय थापर को पैराशूट के जरिए उत्तरी धुव्र पर उतारा गया।<br />
2013 – भारतीय गणितज्ञ एवं ज्योतिष शकुन्&#x200d;तला देवी का निधन हुआ।<br />
2015 &#8211; भारतीय राजनीतिज्ञ एवं राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जानकी बल्लभ पटनायक का निधन।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>21 अप्रैलः विश्व की प्रमुख:-</strong></span></p>
<p>1572 – फ्रांस और इंग्लैंड के बीच स्पेन के खिलाफ सैन्य समझौते पर हस्ताक्षर हुए।<br />
1654 – इंग्लैंड और स्वीडन के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर।<br />
1739 – स्पेन और आस्ट्रिया के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।<br />
1782 – थाईलैंड की राजधानी बैंकाक शहर की स्थापना हुई।<br />
1895 – अमेरिका में विकसित पहले फिल्म प्रोजेक्टर ‘पैनटॉप्टिकॉन’ का प्रदर्शन किया गया।<br />
1910 – टॉम सायर तथा हकलबरी फिन जैसे संजीदा किरदारों के रचियता अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन का निधन।<br />
1926- इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का जन्म।<br />
1941 – यूनान ने नाजी जर्मनी के समक्ष आत्मसमर्पण किया।<br />
1945 – दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सोवियत संघ ने बर्लिन के बाहरी इलाके पर कब्जा किया।<br />
1960 – ब्रासीलिया शहर को ब्राजील की राजधानी बनाया गया।<br />
1967 – यूनान में सैन्य तख्तापलट हुआ।<br />
1983 – ब्रिटेन में एक पाउंड का सिक्का पेश किया गया।<br />
1987 – श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में एक बम धमाके में सौ से अधिक लोगों की मौत हुई।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/babar-defeated-ibrahim-lodhi-the-sultan-of-delhi-sultanate-in-the-battle-of-panipat-on-21-april/7032/">21 अप्रैलः हिंदुस्तान में आज ही के दिन पड़ी थी मुगल साम्राज्य की नींव</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/babar-defeated-ibrahim-lodhi-the-sultan-of-delhi-sultanate-in-the-battle-of-panipat-on-21-april/7032/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
