कोटा के प्रो. विवेक श्रीवास्तव IEEE दिल्ली सेक्शन के वाइस चेयरमैन निर्वाचित

- कोटा से IIT खड़गपुर, अमेरिका–चीन और RTU होते हुए राष्ट्रीय महत्व के संस्थान NIT उत्तराखंड तक का सफर

– अब 10 हजार सदस्यों वाले IEEE दिल्ली सेक्शन की संभालेंगे अहम जिम्मेदारी

कोटा। शहर के लिए गर्व का विषय है कि कोटा के मूल निवासी प्रो. (डॉ.) विवेक श्रीवास्तव को IEEE दिल्ली सेक्शन का वाइस चेयरमैन (उपाध्यक्ष) निर्वाचित किया गया है। IEEE दिल्ली सेक्शन संस्था के सबसे बड़े और प्रमुख सेक्शनों में से एक है, जिसकी सदस्य संख्या करीब 10,000 है। इसका कार्यक्षेत्र दिल्ली के साथ राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख तक फैला हुआ है।

IEEE (इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स) विश्व का सबसे बड़ा तकनीकी व्यावसायिक संगठन है। ऐसे में इतने व्यापक क्षेत्र वाले IEEE दिल्ली सेक्शन के वाइस चेयरमैन का पद महत्वपूर्ण और जिम्मेदारीपूर्ण माना जाता है।
भारती विद्यापीठ में ग्रहण किया पदभार
प्रो. श्रीवास्तव ने अपने नए पद का कार्यभार दिल्ली स्थित भारती विद्यापीठ में आयोजित विशेष वार्षिक आमसभा (AGM) में ग्रहण किया। यह आयोजन IEEE दिल्ली सेक्शन के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह का हिस्सा था। इस कारण पदभार ग्रहण करने का यह अवसर और भी महत्वपूर्ण रहा।

कोटा से अमेरिका और चीन तक का सफर
कोटा में अपने प्रारंभिक वर्ष बिताने वाले प्रो. श्रीवास्तव ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर से पीएच.डी. की। इसके बाद उन्होंने उद्योग और शिक्षा जगत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सैनडिस्क सेमीकंडक्टर्स (SanDisk Semiconductors) से की। इस दौरान उन्होंने अमेरिका और शंघाई (चीन) में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने NIT दिल्ली और NIT उत्तराखंड जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों में सेवाएं दीं। वर्तमान में वे NIT उत्तराखंड में प्रोफेसर एवं डीन (योजना एवं विकास) के पद पर कार्यरत हैं।

RTU कोटा में भी दिया अहम योगदान
प्रो. श्रीवास्तव का कोटा से जुड़ाव उनके पेशेवर सफर का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अगस्त 2013 से मार्च 2018 तक उन्होंने राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (RTU), कोटा के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर तथा एसोसिएट डीन (अनुसंधान एवं परामर्श) के रूप में सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के लिए कई महत्वपूर्ण योगदान दिए। वे विश्वविद्यालय के टेक्नो-कल्चरल फेस्टिवल “थार (THAR)” के प्रथम यानी संस्थापक आयोजक भी रहे। यह आयोजन आज विद्यार्थियों के लिए एक प्रिय परंपरा बन चुका है।

20 साल से अधिक समय से IEEE से जुड़े
प्रो. श्रीवास्तव दो दशकों से अधिक समय से IEEE से जुड़े हुए हैं और संस्था के सीनियर मेम्बर हैं। उनका वर्तमान निर्वाचन उनके लंबे शैक्षणिक और व्यावसायिक योगदान को भी दर्शाता है। उन्होंने 18 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में जनरल चेयर के रूप में जिम्मेदारी निभाई है और अनेक शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है। वर्ष 2024 में उन्हें “IEEE PES चैप्टर आउटस्टैंडिंग इंजीनियर अवार्ड” से सम्मानित किया गया। इसके अलावा वे राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कई संस्थानों के प्रबंध मंडलों (Boards of Governors) तथा अध्ययन मंडलों (Boards of Studies) के सदस्य भी रहे हैं।

बोले- यह सम्मान उन मूल्यों का भी है जो कोटा में सीखे
अपने निर्वाचन पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रो. श्रीवास्तव ने कहा, “यह सम्मान जितना मेरे कार्य का है, उससे कहीं अधिक उन मूल्यों का है जो मैंने कोटा में पलते-बढ़ते सीखे। कोटा सदैव शिक्षा की शक्ति में विश्वास रखने वाला शहर रहा है, और वही विश्वास मैं अपने साथ लेकर चलता हूँ। RTU कोटा में बिताए मेरे वर्ष मेरे हृदय के विशेष रूप से निकट हैं। मैं IEEE दिल्ली सेक्शन के सदस्यों का उनके विश्वास के लिए आभारी हूँ, और पूरी निष्ठा से सेक्शन के प्रत्येक सदस्य की सेवा करूँगा।”
उन्होंने कहा कि नई भूमिका में उनकी प्राथमिकताओं में पूरे क्षेत्र में विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों के लिए अवसरों को सशक्त बनाना, शिक्षा-जगत और उद्योग के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करना तथा यह सुनिश्चित करना शामिल है कि IEEE का लाभ सेक्शन के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचे।

कोटा में शुभचिंतकों ने दी बधाई
प्रो. श्रीवास्तव के निर्वाचन की जानकारी के बाद कोटा में परिवारजनों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी। उनकी उपलब्धि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बना रहे कोटा के प्रतिभाशाली व्यक्तियों की सूची में एक और नाम जोड़ती है।
IEEE के बारे में: IEEE विश्व का सबसे बड़ा तकनीकी व्यावसायिक संगठन है, जो मानवता के हित में प्रौद्योगिकी की प्रगति के लिए समर्पित है। IEEE दिल्ली सेक्शन जैसी इसकी क्षेत्रीय इकाइयां तकनीकी, शैक्षणिक और नेटवर्किंग गतिविधियों के माध्यम से इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के व्यावसायिक विकास में सहयोग करती हैं।

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