विकसित भारत का खाका खींचने को कोटा विश्वविद्यालय में जुटे देश भर के भूविज्ञानी

कोटा। राजस्थान भूगोल परिषद के 52वें राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ आज विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग, कोटा विश्वविद्यालय, कोटा में गरिमामय वातावरण में हुआ। अधिवेशन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों से पधारे विद्वान, प्राध्यापकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ जी उपस्थित रहे। इस अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के सेवानिवृत्त प्रो. एच. एस. शर्मा, राजस्थान भूगोल परिषद के अध्यक्ष प्रो. संतोष आनंद जी तथा कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी. पी. सारस्वत सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
अधिवेशन के विशेष आकर्षण प्रो. ए. एन. भट्टाचार्य मेमोरियल लेक्चर में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. रोली कंचन ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने व्याख्यान के माध्यम से भूगोल विषय के महत्व, समकालीन भौगोलिक चिंतन तथा शोध के विभिन्न आयामों पर विचार व्यक्त किए। उनके व्याख्यान से उपस्थित प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण शैक्षणिक जानकारी प्राप्त हुई।
राष्ट्रीय अधिवेशन में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं सततता जैसे समकालीन विषयों पर भूगोलवेत्ताओं द्वारा विचार-विमर्श किया जा रहा है। विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों एवं विद्वानों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिससे भौगोलिक अध्ययन एवं अनुसंधान को नई दिशा मिलने की संभावना है।
इस अवसर पर अधिवेशन के संयोजक प्रो. जे. पी. शर्मा सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं शोधार्थियों का स्वागत किया तथा राष्ट्रीय भूगोल परिषद के 52वें अधिवेशन को सफल बनाने में सभी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सम्मेलन की स्मारिका तथा त्ळ। ।ददंसे (एनाल्स) का भी विमोचन किया गया। इस सम्मेलन में राजस्थान भूगोल परिषद के जनरल सेक्रेटरी प्रो. एच. एस. भट्ट द्वारा परिषद की विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया गया।
इस अवसर पर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष, श्रीमान हनुमान सिंह राठौड़, मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा द्वारा ही भारत का विकास संभव है। भारतीय प्राचीन ग्रंथों में सतत् विकास की अवधारणा को अनेक उद्धरणों द्वारा व्यक्त किया गया।
राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के पूर्व डीन, प्रो. एच. एस. शर्मा ने विकसित भारत के विकास में युवा पीढ़ी के योगदान की महत्ता का उल्लेख किया। भारतीय युवा पीढ़ी के कौशल एवं ज्ञान को विश्व के अनेक देशों में लोहा माना गया है। इस अवसर पर उन्होंने युवा भूगोलवेत्ताओं का आह्वान किया कि वे अपने शोधकार्य में अध्ययन क्षेत्र के भ्रमण के साथ ही प्राथमिक आंकड़ों को महत्व दें ताकि समाज के विकास में वे भरपूर योगदान दे सकें।
इस कार्यक्रम में राजस्थान भूगोल परिषद के अध्यक्ष एवं राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य प्रो. संतोष आनंद ने परिषद के ऐतिहासिक विकास, शोधकार्य और सदस्यता के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि परिषद देश की सबसे पुरानी अकादमिक संस्था है जिसके लगभग 900 आजीवन सदस्य हैं।
कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में आह्वान किया कि यह विश्वविद्यालय अकादमिक एवं शोधकार्यों के आयोजन के लिए सदैव तत्पर रहेगा। इसके लिए विश्वविद्यालय हर प्रकार के संसाधन उपलब्ध कराएगा। इस अवसर पर उन्होंने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के उपलक्ष पर नशामुक्ति की शपथ दिलाते हुए इस सम्मेलन को समर्पित किया। इस कार्यक्रम में प्रो. एस.एस. भट्ट तथा राष्ट्रीय सम्मेलन संयोजक प्रो. जे.पी. शर्मा द्वारा स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया गया। तथा सह-सयोंजक डाॅ.के.आर. चैधरी द्वारा अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।
इस सम्मेलन में कुल 6 तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ जिसमें देश के विभिन्न राज्यों तथा राजस्थान के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 69 संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने पत्र-वाचन किया।







