कैंसर अब लाइलाज नहीं, समय पर पहचान ही सबसे बड़ा हथियार: डॉ. असीम सामर
हाड़ौती सर्जिकल सोसायटी की सीएमई में विशेषज्ञों ने कहा— नई तकनीकों से मरीज सामान्य जीवन जी रहे, जागरूकता और शुरुआती जांच पर दिया जोर
TIS MEDIA, कोटा
कैंसर अब केवल डर का नाम नहीं, बल्कि समय पर पहचान और आधुनिक चिकित्सा से सफल उपचार की बीमारी बन चुका है। यदि शुरुआती चरण में इसकी पहचान हो जाए तो अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकते हैं। यह बात सीके बिरला हॉस्पिटल, जयपुर के वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. असीम सामर ने हाड़ौती सर्जिकल सोसायटी द्वारा आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम में कही।
डॉ. सामर ने कहा कि समाज में कैंसर को लेकर फैले भ्रम और भय को दूर करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स जैसी आधुनिक तकनीकों ने कैंसर उपचार में क्रांतिकारी बदलाव किया है। इन उपचारों से केवल कैंसर कोशिकाओं पर असर पड़ता है, जिससे स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचता है और दुष्प्रभाव भी पहले की तुलना में कम होते हैं।
उन्होंने बताया कि नई दवाओं और उपचार पद्धतियों की बदौलत चौथे चरण के कई मरीज भी पांच वर्ष या उससे अधिक समय तक बेहतर गुणवत्ता वाला जीवन जी रहे हैं। वहीं, शुरुआती अवस्था में बीमारी का पता चलने पर अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।
बदलती जीवनशैली बढ़ा रही कैंसर का खतरा
रेडिएशन ऑन्कोलॉजी एवं रेडियोसर्जरी विशेषज्ञ डॉ. रूचिर भंडारी ने कहा कि धूम्रपान, तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता तथा अनियमित दिनचर्या कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण, खाद्य पदार्थों में मिलावट, पेयजल के माध्यम से शरीर में पहुंच रहे माइक्रोप्लास्टिक तथा लगभग 10 प्रतिशत मामलों में आनुवंशिक कारण भी कैंसर के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि विकसित देशों में नियमित स्क्रीनिंग और जागरूकता के कारण अधिकांश मरीजों में कैंसर की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाती है, जबकि भारत में बड़ी संख्या में मरीज तीसरी या चौथी स्टेज में उपचार के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की।
कैंसर से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू और धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाना, शराब का सेवन न करना, संतुलित एवं पौष्टिक भोजन करना, नियमित व्यायाम करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। परिवार में कैंसर का इतिहास होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए। शरीर में किसी भी असामान्य गांठ, लगातार खांसी, अचानक वजन घटना, लंबे समय तक न भरने वाला घाव या असामान्य रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन हाड़ौती कैंसर सोसायटी के सचिव डॉ. दिनेश जिंदल ने किया। इस अवसर पर हाड़ौती सर्जिकल सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. राकेश शर्मा, सचिव डॉ. दिनेश जिंदल सहित बड़ी संख्या में सर्जन और चिकित्सा विशेषज्ञ उपस्थित रहे। सीएमई में कैंसर की रोकथाम, समय पर जांच और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।कैंसर से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
विशेषज्ञों ने बताया कि कैंसर के सभी मामलों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए तंबाकू और धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाना, शराब के सेवन से बचना, संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना और पर्याप्त नींद लेना आवश्यक है। साथ ही हेपेटाइटिस-बी और एचपीवी (HPV) जैसे आवश्यक टीके लगवाना, तेज धूप से त्वचा की सुरक्षा करना तथा प्रदूषण और हानिकारक रसायनों के अनावश्यक संपर्क से बचना भी महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों ने 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी। जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास है, उन्हें चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार समय-समय पर स्क्रीनिंग अवश्य करानी चाहिए। किसी भी प्रकार की असामान्य गांठ, लंबे समय तक रहने वाला घाव, लगातार खांसी, अचानक वजन घटना, मल या मूत्र की आदतों में बदलाव अथवा असामान्य रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
विशेषज्ञों ने कहा कि “कैंसर का सबसे प्रभावी इलाज उसकी समय पर पहचान है। जागरूकता, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली ही इस बीमारी के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच हैं।”
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