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	<title>Kota Thermal Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>Kota Thermal Archives - TIS Media</title>
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		<title>फिर लगेगा महंगी बिजली का करंट! 18 रुपए यूनिट तक बिजली खरीद रही &#8220;लापरवाह&#8221; सरकार</title>
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		<pubDate>Sat, 28 Aug 2021 12:56:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>कोयले की कमी से राजस्थान में गहराया बिजली संकट, कोयला लेने दिल्ली दौड़े ऊर्जा मंत्री कोयले की कमी से बंद होने लगे राजस्थान के थर्मल पॉवर प्लांट, नहीं चुकाया 3600 करोड़ का कर्ज TISMedia@Jaipur राजस्थान के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बुरी खबर है। प्रदेश सरकार की लपरवाही के चलते उन्हें कई गुना बढ़े हुए बिजली &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/rajasthan-government-is-buying-expensive-electricity-by-rs-18-per-unit/10555/">फिर लगेगा महंगी बिजली का करंट! 18 रुपए यूनिट तक बिजली खरीद रही &#8220;लापरवाह&#8221; सरकार</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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<li><span style="color: #ff0000;"><strong>कोयले की कमी से राजस्थान में गहराया बिजली संकट, कोयला लेने दिल्ली दौड़े ऊर्जा मंत्री</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>कोयले की कमी से बंद होने लगे राजस्थान के थर्मल पॉवर प्लांट, नहीं चुकाया 3600 करोड़ का कर्ज</strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Jaipur</strong></span> राजस्थान के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बुरी खबर है। प्रदेश सरकार की लपरवाही के चलते उन्हें कई गुना बढ़े हुए बिजली बिलों की मार झेलनी पड़ सकती है। दरअसल, मंत्रिमंडल की उठापटक में मशगूल सरकार बिजली घरों के लिए कोयला खरीदना ही भूल गई। ऐसे में कोयला खत्म होने के राजस्थान के थर्मल पॉवर प्लांट बंद हुए तब जाकर ऊर्जा मंत्री को कोयला खरीदने की सुध आई। लेकिन, कोल कंपनियों ने हजारों करोड़ रुपए का पुराना बकाया न चुकाने पर कोयला देने से मना कर दिया। तब जाकर ऊर्जा मंत्री अपने आला अफसरों को लेकर कोयला लेने के लिए दिल्ली दौड़े।</p>
<p><iframe title="#TIS_Live प्रश्न प्रहरः कटघरे में केईडीएल" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/E-5PcqS2uSw?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>राजस्थान में कोयले की कमी के कारण बिजली का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कोयला खत्म होने से कालीसिंध और सूरतगढ़ थर्मल प्लांट की सभी यूनिट कई दिनों से ठप पड़ी हैं। वहीं गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ने और बिजली उत्पादन कम होने के बाद हालात पर काबू पाने के लिए राजस्थान सरकार ने ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में अघोषित बिजली कटौती शुरू कर दी है।  बिजली उत्पादन गड़बड़ाने से प्रदेश के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती शुरू हो गई है। बिजली की किल्लत इतनी भयावह हो गए हैं कि पॉवर सप्लाई ग्रिड से राजस्थान सरकार को सीलिंग तोड़कर 18 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली खरीदनी पड़ रही है।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/rajasthan/primary-schools-will-not-open-in-rajasthan-education-minister-govind-singh-dotasara-refutes-the-rumors/10553/">नहीं खुलेंगे प्राइमरी स्कूल: शिक्षा मंत्री ने निजी स्कूल संचालकों की मांग को किया खारिज</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कालीसिंध और सूरतगढ़ में उत्पादन हुआ ठप</strong></span><br />
झालावाड़ के कालीसिंध थर्मल पॉवर प्लांट की 600-600 मेगावाट की दोनों इकाइयां कोयले की कमी के कारण 12 दिनों से बंद पड़ी हैं। कालीसिंध थर्मल की पहली इकाई 11 अगस्त और दूसरी इकाई 16 अगस्त से ठप पड़ी है। दोनों इकाइयां बंद होने से प्लांट को हर रोज करीब 8 करोड़ रुपए का घाटा उठाना रहा है। वहीं सूरतगढ़ थर्मल पॉवर स्टेशन की 250-250 मेगावाट की सभी 6 इकाइयां कोयले की कमी के चलते करीब सप्ताह भर से बंद पड़ी हैं। जिसके चलते सूरतगढ़ थर्मल पॉवर प्लांट की सभी इकाइयों को चलाने के लिए 30 हजार मीट्रिक टन कोयले की जरूरत पड़ती है, लेकिन कोयला खत्म होने के कारण इन्हें बंद करना पड़ा है। वहीं कोटा थर्मल पॉवर प्लांट में भी 5-6 दिन का कोयला बचा है। जबकि चौथी यूनिट बिजली उत्पादन नहीं कर रही।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-team-dhariwal-and-congress-workers-complained-against-kedl-to-kota-police/10516/">मंत्री जी! आपके कार्यकर्ता आपकी और कितनी छीछालेदर करवाएंगे</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>3600 करोड़ से ज्यादा का बकाया </strong></span><br />
सूत्रों के मुताबिक राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के ऊपर निजी और सरकारी क्षेत्र की कोयला कंपनियों का हजारों करोड़ रुपया बकाया है। राजस्थान सरकार ने समय रहते देनदारी नहीं चुकाई तो इन कोयला कंपनियों ने कोयले की सप्लाई बंद कर दी। जिसके चलते राजस्थान में पिछले एक पखवाड़े से बिजली उत्पादन तेजी से घटा और बिजली की किल्लत हो गई। सूत्रों के मुताबिक अकेले कालीसिंध थर्मल पॉवर प्लाट पर छत्तीसगढ़ की कोयला खदानों का 350 करोड़ रुपए से ज्यादा का बकाया है। पैसा न मिलने के बाद इन खदानों ने कालीसिंध कोयला भेजना बंद कर दिया। उत्पादन निगम की बात करें तो कोयले की खरीद का करीब 600 करोड़ बकाया रुपया नॉर्दन कोल लिंकेज और साउथ ईस्टर्न कोल लिंकेज को देना है। जबकि निजी कंपनी अडानी पावर लिमिटेड के 3000 करोड़ रुपये की देनदारी ऊपर से है। ऐसे में करीब 4 हजार करोड़ रुपए बकाया होने के कारण इन थर्मल पॉवर प्लांटों को कोयला मिलना बंद हो गया। ऊर्जा मंत्रालय इस मुसीबत से पूरी तरह वाकिफ था, लेकिन सूबे में छिड़े सियासी घमासान में अपनी कुर्सियां बचाने के लिए न तो सरकार और न ही मंत्री एवं अफसरों ने इस ओर ध्यान दिया। नतीजन, अब जब हालात बिगड़े तो उन्हें संभालने के लिए पैबंद लगाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-sanjay-nagar-councilor-assaulted-kedl-jen-and-contract-worker/9797/">चोरी और सीनाजोरीः बिजली चोरों पर शिकंजा कसना पड़ा KEDL कर्मचारियों को भारी</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सरकार खरीद रही पांच गुने दामों पर बिजली</strong> </span><br />
बिजली की कमी से जूझ रहे राजस्थान को अंधेरे में डूबता देख जब तक सरकार ने होश संभाला तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हालत यह है कि सूबे में छाए बिजली संकट से निपटने के लिए राजस्थान को सीलिंग तोड़कर कोटे से ज्यादा बिजली खरीदनी पड़ रही है। बिजली संकट के हालात इतने भयावह हो चले हैं कि सरकार किसी भी सूरत में बिजली खरीदने को राजी है। नतीजन, अब सरकार को 18 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदने के लिए अधिकतम खरीद दर की सीलिंग भी हटानी पड़ी है। इतनी महंगी दरों पर बिजली खरीदने के बावजूद राजस्थान को एक्सचेंज से मांग की केवल 20 फीसदी ही बिजली मिल पा रही है। समय रहते सरकार चेत जाती तो सूबे पर बेवजह पड़ने वाले इस आर्थिक बोझ से बचाया जा सकता था, क्योंकि इससे पहले 6.50 रुपये प्रति यूनिट तक की सीलिंग रेट से बिजली खरीदी जा रही थी। वहीं कोयला संकट में फंसने से पहले सरकार करीब 4 रुपये प्रति यूनिट बिजली खरीद रही थी।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/kedl-responded-to-the-allegations-of-kota-congress-workers/10171/">कांग्रेस ने किया बिजली कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन, KEDL ने दिया आरोपों का जवाब</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>अब जागे सरकार </strong></span><br />
सरकार में फेरबदल के साथ ही राजस्थान में बिजली और कोयला प्रबंधन फेल होने के बाद ऊर्जा विभाग के मंत्री और अफसरों की नींद टूटी। कोयला मिलता न देख ऊर्जा मंत्री डॉ बीडी कल्ला और ऊर्जा सचिव दिनेश कुमार केंद्र सरकार से मदद मांगने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। दिल्ली पहुंच कर वह केन्द्रीय कोयला मंत्री, मंत्रालय के अफसरों और कोल इंडिया के अफसरों से मिलकर राजस्थान के बिजली घरों को चलाने लायक कोयला खरीदने की कोशिश करेंगे। हालांकि, सारा मसला बकाए के भुगतान पर ही अटकता नजर आ रहा है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि केंद्र सरकार जब तक मदद नहीं करेगी राजस्थान का अंधेरा खत्म होने वाला नहीं है। वहीं, खाली खजाने को भरने और कोयला कंपनियों का कर्जा उतारने के लिए सरकार टैक्स और सरचार्ज के नाम पर जनता से ही भरपाई करेगी। जिसके चलते राजस्थान के लोगों को एक बार फिर से महंगी बिजली का करंट लगने की पूरी आशंका है।</p>
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		<title>#TISExclusive जेके और आईएल की तरह मिटने लगा कोटा थर्मल वजूद, हमेशा के लिए बंद हुईं दो यूनिटें</title>
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		<pubDate>Thu, 24 Jun 2021 17:56:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@कोटा. गहलोत सरकार ने आखिरकार औद्योगिक नगरी की तबाही का आखिरी अध्याय लिख ही डाला। कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट (KSTPS) के अफसरों की जी तोड़ कोशिशों से इन्वायरमेंट क्लीयरेंस मिलने के बावजूद सूबे की सरकार ने कोटा थर्मल की दो इकाइयों को हमेशा के लिए बंद करने का आदेश जारी कर दिया। जिससे न सिर्फ &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/kota-thermals-first-and-second-power-generation-units-will-be-closed-forever-from-june-30/9341/">#TISExclusive जेके और आईएल की तरह मिटने लगा कोटा थर्मल वजूद, हमेशा के लिए बंद हुईं दो यूनिटें</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@कोटा. </strong></span>गहलोत सरकार ने आखिरकार औद्योगिक नगरी की तबाही का आखिरी अध्याय लिख ही डाला। कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट (KSTPS) के अफसरों की जी तोड़ कोशिशों से इन्वायरमेंट क्लीयरेंस मिलने के बावजूद सूबे की सरकार ने कोटा थर्मल की दो इकाइयों को हमेशा के लिए बंद करने का आदेश जारी कर दिया। जिससे न सिर्फ थर्मल कर्मचारी, बल्कि शहर के लोग भी खासे आक्रोशित हो उठे हैं।</p>
<p>17 जनवरी 1983&#8230; राजस्थान के इतिहास में यह तारीख हमेशा सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगी, यही वह दिन था जब 143 करोड़ रुपए की लागत से सूबे में कोयले से बिजली बनाने की पहली इकाई की कोटा में स्थापना की गई थी। ठीक छह महीने बाद कोटा थर्मल पॉवर प्लांट की दूसरी इकाई ने भी पूरे दमखम के साथ बिजली बनाना शुरू कर दिया। 110-110 मेगावाट की यह दोनों इकाइयां 37 सालों बाद भी पूरे दमखम से बिजली बना रही है। इस दौरान तमाम सरकारें आई और गईं, लेकिन किसी ने भी इन बूढ़ी चिमनियों की सुध नहीं ली। कोटा के सियासतदारों को भी कभी होश नहीं आया कि कुछ ही दूरी पर छबड़ा जैसे थर्मल पॉवर प्लांट अपग्रेड कर दिए गए, लेकिन कोटा के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार के खिलाफ कभी आवाज उठा सकते। नतीजन, बिना मरम्मत और तकनीकी सहारे के यह इकाइयां पुराने ही ढर्रे पर दौड़ती रहीं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>साल 2015 में फंसा था पेंच</strong></span><br />
कोटा थर्मल की 1240 मेगावाट क्षमता की सात इकाइयों के संचालन के लिए थर्मल प्रबंधन ने 27 फरवरी 2015 को आरएसपीसीबी से संचालन सहमति मांगी थी। आवेदन का निस्तारण करने के लिए स्थलीय निरीक्षण करने कोटा थर्मल पहुंचे पर्यावरण अभियंताओं को यहां वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन होते हुए मिला था। इसके बाद बोर्ड ने 21 बड़ी खामियां चिन्हित कर उन्हें सुधारने के लिए थर्मल प्रबंधन को नोटिस दिया था, लेकिन अधिकांश आपत्तियों का चार साल तक निस्तारण नहीं हो सका।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">कैग ने दिए थे प्लांट बंद करने के आदेश  </span>  </strong><br />
इसी दौरान कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग) ने भी कोटा थर्मल का पॉल्यूशन ऑडिट किया तो कोल यार्ड और कोल क्रेशर पर स्थापित वायु प्रदूषण नियंत्रण मशीन बंद मिली। कोयले के धुएं के साथ राख के कण चिमनियों से बाहर निकलने से रोकने के लिए लगाई गए संयंत्र बंद पड़े थे। इलेक्ट्रोस्टेटिक प्रीसीपीटेटर्स (ईएसपी) तो लगा था, लेकिन कई फील्ड्स नियमित तौर पर आउट ऑफ चार्ज थे। इसके साथ ही प्लांट का प्रदूषित पानी साफ किए बगैर चम्बल नदी और फ्लाईएश पांड की तरफ फेंका जा रहा था। तमाम कोशिशों के बावजूद भी जब इन ऑडिट आपत्तियों का निस्तारण नहीं हुआ तो कैग ने कोटा थर्मल का संचालन अवैध घोषित कर प्लांट को पर्यावरण सहमति मिलने तक बंद करने की सिफारिश कर दी।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">आरएसपीसीबी की गिरी गाज</span>  </strong><br />
इसके बाद जून 2018 में आरएसपीसीबी ने दंडात्मक कार्रवाई करते हुए सातवीं इकाई की संचालन सहमति रद्द करने के साथ ही 4.65 लाख रुपए का आवेदन शुल्क भी जब्त कर लिया था। इतना ही नहीं बाकी छह यूनिटों की संचालन सहमिति पेडिंग में डाल 14.07 लाख रुपए का आवेदन शुल्क भी डैफर कर दिया था। इस दौरान कोटा थर्मल में तैनात रहे अफसरों ने भी लापरवाही की हदें पार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट प्रबंधन ने तीन साल तक  खामियों को दुरुस्त करने की बजाय वायु प्रदूषण की जांच के लिए लगाए गए ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम को ही खराब कर दिया। नतीजतन, थर्मल की चिमनियों के जहरीला धुआं उगलने पर भी हालात सामान्य दिखाई देते रहे, लेकिन राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जब मैनुअल मॉनीटरिंग की तो पूरी पोल खुल गई। जांच में खुलासा हुआ कि पर्यावरण सहमति हासिल करने के लिए थर्मल प्रबंधन वायु प्रदूषण की ऑनलाइन मॉनीटरिंग तक को छेडऩे से बाज नहीं आया। चिमनियां जमकर धुआं और राख बाहर फेंक रही थी, बावजूद इसके ऑनलाइन पॉल्यूशन मॉनीटरिंग में प्रदूषण का स्तर सामान्य से भी कम आ रहा था। आरएसपीसी के कोटा क्षेत्रीय कार्यालय ने जब प्रदूषण की मैनुअल जांच की तो खतरनाक स्तर पर मिला। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि केएसटीपीएस के इंजीनियरों ने ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम को ही खराब कर दिया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>दावों तक ही सिमटे रहे अफसर</strong></span><br />
थर्मल की खामियां दूर करने के लिए अफसरों ने हर बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आश्वासन दिया, लेकिन जब भी एक्शन प्लान मांगा गया, अधिकारी पीछे हट गए। तीन साल में तीन बार प्रदूषण नियंत्रण संयत्रों को चालू करने का दावा किया गया, लेकिन तीनों बार स्थलीय जांच में झूठ साबित हुआ। पांच साल पहले हुई जांच के दौरान आरएसपीसीबी को जो स्थिति मिली, वही हर बार के सत्यापन में सामने आई। इसके लिए कैग ने थर्मल की बदहाली के लिए आला अफसरों को जिम्मेदार माना और जमकर फटकार भी लगाई थी। बावजूद इसके उन पर कोई असर नहीं पड़ा।<b> </b>जांच में खुलासा हुआ कि थर्मल प्रबंधन ने सीवेज और औद्योगिक कचरे के निस्तारण के लिए कोई इंतजाम नहीं किए। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के निर्देश दिए गए, लेकिन प्रबंधन ने इसका जवाब तक नहीं दिया। थर्मल परिसर में फ्लाईएश और कोयले की वजह से होने वाले प्रदूषण को रोकने का भी कोई इंतजाम नहीं किया गया। कोयले की बारीक राख को उड़ने से रोकने के लिए प्लो फीडर के ऊपर पानी का छिड़काव करने के लिए वाटर नोजल तक पिछले एक दशक से बंद पड़े थे।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>साल 2022 तक बंद करने की थी तैयारी</strong></span><br />
अफसरों की लापरवाही और पर्यावरण नियमों की सख्ती के चलते सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ने साल 2019 के नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान में इन यूनिटों को बंद करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया। अथॉरिटी पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी यूनिट को साल 2022 तक बंद करने की तैयारी में जुटा था, लेकिन इसी बीच सितंबर 2019 में कोटा थर्मल की कमान बतौर मुख्य अभियंता अजय सक्सेना के हाथ आ गई। उन्होंने अपने कार्यकाल में प्लांट को बंद होता देखने के बजाय थर्मल की खामियों को दूर करने की ठान ली।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>साल भर की मेहनत लाई रंग</strong></span><br />
तत्कालीन मुख्य अभियंता अजय सक्सेना ने कोटा थर्मल को बचाने के लिए त्रिस्तरीय योजना तैयार की। उन्होंने एक साल तक कड़ी मेहनत और संघर्ष कर सबसे पहले कैग और आरएसपीसीबी की ओर से बताई 21 खामियों को दुरुस्त करने का काम किया। इसके बाद दूसरे चरण में कूलिंग प्लांट, फ्लूड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, एसटीपी लगाने और ईएसपी को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया। तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण में मुख्य अभियंता ने कैग से लेकर लोक लेखा समित और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आला अफसरों को भरोसा दिलाने में कामियाबी हासिल की कि पर्यावरण नियमों की पालना करने के लिए बड़ी लागत वाले प्रोजेक्ट चरण बद्ध तरीके से पूरे कर लिए जाएंगे। इसके लिए बकायदा समयबद्ध प्लान भी इनके समक्ष रखा गया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>पांच साल बाद मिला था जीवनदान </strong></span><br />
कोटा थर्मल के पूर्व मुख्य अभियंता अजय सक्सेना की एक साल की कोशिशों के बाद जब प्रदूषण निवारण मानकों की पूरी पालना सुनिश्चित हुई तो राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इससे पूरी तरह मुतमईन होने के बाद कोटा थर्मल को वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 के प्रावधानों के तहत साल 2023 तक के लिए संचालन सहमति जारी कर दी। 6 नवंबर 2020 को इन्वायरमेंट क्लीयरेंस और संचालन सहमति कोटा थर्मल को मिली तो लगा कि न सिर्फ कोटा थर्मल को नया जीवन मिला है, बल्कि प्रदेश के सबसे पुराने प्लांट में पर्यावरण संरक्षण के साथ पूरी क्षमता से विद्युत उत्पादन की मिसाल भी कायम हो गई।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>अंदरखाने जारी रही साजिशें </strong></span><br />
हालांकि इसके बाद भी कोटा थर्मल को बंद करने की साजिशें अंदरखाने पुरजोर तरीके से चलती रहीं। नतीजन, राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के दफ्तर में बैठे राजधानी के अफसरों ने बिजली उत्पादन में गाइडलाइन के उल्लंघन का दावा कर अप्रैल 2021 में कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाई को बंद करने का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेज दिया। राज्य सरकार ने भी यूनिटों के अपग्रेडेशन की संभावनाएं तलाशने या फिर इन दोनों इकाइयों के बदले 660 मेगावाट की हाईटेक इकाइयां लगाने की बजाय कोटा थर्मल की सबसे उम्रदराज इकाइयों को बंद करने के प्रस्ताव पर मंजूरी का ठप्पा लगा दिया। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने गुरुवार को कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाई को हमेशा के लिए बंद करने का न सिर्फ आदेश जारी कर दिया, बल्कि आईएल और जेके की तरह कोटा थर्मल का वजूद भी मिटाने की इबारत लिख डाली। आदेश के कोटा पहुंचते ही थर्मल कर्मचारियों में खासा रोष व्याप्त है। <span style="color: #ff0000;"><strong>आदेश के मुताबिक 30 जून 2021 से कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाइयों को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा। </strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/kota-thermals-first-and-second-power-generation-units-will-be-closed-forever-from-june-30/9341/">#TISExclusive जेके और आईएल की तरह मिटने लगा कोटा थर्मल वजूद, हमेशा के लिए बंद हुईं दो यूनिटें</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>कोटा थर्मल मैत्री क्रिकेट मैच : चीफ इंजीनियर टीम ने 5 विकेट से जीता मैच</title>
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		<pubDate>Sun, 07 Mar 2021 15:46:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota. कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन परिसर में रविवार को मैत्री क्रिकेट मैच का आयोजन हुआ। इस दौरान विजेता व उप विजेता टीम को पुरस्कार से नवाजा। मैच के बाद सभी खिलाड़ियों व उपस्थित दर्शकों ने खुद के साथ-साथ आसपास के वातावरण को स्वस्थ्य बनाने का संकल्प लिया। कार्मिक विभाग के संयुक्त निदेशक हेमंत मदान &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota.</strong> </span>कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन परिसर में रविवार को मैत्री क्रिकेट मैच का आयोजन हुआ। इस दौरान विजेता व उप विजेता टीम को पुरस्कार से नवाजा। मैच के बाद सभी खिलाड़ियों व उपस्थित दर्शकों ने खुद के साथ-साथ आसपास के वातावरण को स्वस्थ्य बनाने का संकल्प लिया।</p>
<p>कार्मिक विभाग के संयुक्त निदेशक हेमंत मदान ने बताया कि मैच मुख्य अभियंता एकादश व अतिरिक्त मुख्य अभियंता एकादश टीम के बीच हुआ। टॉस जीतकर अतिरिक्त मुख्य अभियंता टीम ने पहले बल्लेबाजी कर निर्धारित 15 ओवर में 78 रन बनाए। जवाब में उतरी मुख्य अभियंता टीम ने 81 रन बनाकर 5 विकेट से मैच जीत लिया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>Read More : <a href="https://tismedia.in/breaking/encroachment-removed-in-sabjimandi-to-bajaj-khana-kota-by-uit/5036/">यहां &#8216;सड़क&#8217; के लिए बहुमंजिला मकानों और दुकानों पर चलवा दिए बुलडोजर</a></strong></span></p>
<p>मुख्य अभियंता वीके गोलानी ने विजेताओं एवं उप विजेता टीम को बधाई दी। साथ ही क्लब बिल्डिंग में स्पोट्र्स की सामग्री सुचारू रूप से उपलब्ध कराने के लिए अलग से प्रावधान की घोषणा की। कार्यक्रम का संचालन प्रसन्न माहेश्वरी ने किया। गोलानी ने बताया कि आखिरी ओवर की आखिरी बोल तक मैच बेहद रोमांचक मोड़ पर रहा। दोनों टीमों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी। मुकाबले में मुख्य अभियंता एकादश टीम विजयी रही। इस दौरान विजेता एवं उपविजेता टीमों के खिलाडिय़ों को थर्मल लेडीज क्लब की अध्यक्ष कामना गोलानी ने पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने बताया कि विद्युत गृह की वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता 2020-21 का आयोजन फरवरी में किया गया था। जिनमें विभिन्न खेल स्पर्धाओं के विजेता उप विजेता टीमों के खिलाडिय़ों को रविवार को आयोजित समारोह में पुरस्कृत किया गया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>Read More : </strong></span><a href="https://tismedia.in/kota/keshavpura-plyover-accident-labor-death-from-collision-to-crane-in-kota/5032/"><strong>Kota : केशवपुरा फ्लाईओवर पर क्रेन की चपेट में आने से श्रमिक की मौत</strong></a></p>
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		<title>वनभूमि को नामांतरित करवा, बचा लें 10 हजार लोगों का रोजगार</title>
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		<pubDate>Thu, 18 Feb 2021 16:27:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota. संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी के प्रवास पर आए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और रीको पर्यावरण इंडस्ट्रियल एरिया एसोसिएशन के सदस्यों ने ज्ञापन देकर थर्मल के पीछे स्थित करीब 45 हेक्टेयर वन विभाग से भूमि रीको को हस्तांतरित करने की मांग की है। सदस्यों ने बिरला को बताया कि यदि ऐसा &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota.</strong> </span>संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी के प्रवास पर आए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और रीको पर्यावरण इंडस्ट्रियल एरिया एसोसिएशन के सदस्यों ने ज्ञापन देकर थर्मल के पीछे स्थित करीब 45 हेक्टेयर वन विभाग से भूमि रीको को हस्तांतरित करने की मांग की है। सदस्यों ने बिरला को बताया कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो करीब 10 हजार लोगों के रोजगार पर इसका सीधा असर पड़ेगा।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>Read More : <a href="https://tismedia.in/kota/tractor-trolley-bike-accident-in-kota-husband-death-and-wife-in-coma/4607/">शादी के 75 दिन बाद ही उजड़ गया मांग का सिंदूर, पत्नी कोमा में</a></strong></span></p>
<p>एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष गोविंद राम मित्तल, एसोसिएशन अध्यक्ष संजय शर्मा के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला को बताया कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने वर्ष 1997 में करीब 45 हेक्टेयर वन भूमि फ्लाईऐश आधारित इकाइयों की स्थापना के लिए दी थी। इस भूमि के एवज में रीको ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को अन्य भूमि उपलब्ध करवा दी। इसके अलावा प्लांटेशन के लिए भी साढ़े सात लाख रुपए मंत्रालय के पास जमा करवाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में इस 45 हेक्टेयर भूमि को अब रीको को हस्तांरित करवाया जाना चाहिए। यदि यह जल्द नहीं हुआ तो वहां कार्यरत करीब 75 इकाइयों पर इसका असर होगा। जिससे करीब 10 हजार श्रमिक बेरोजगार हो जाएंगे। बिरला ने मामले में नियमानुसार कार्यवाही के लिए आश्वस्त किया है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>Read More : <a href="https://tismedia.in/kota/kota-uit-removed-encroachment-in-mukundra-vihar-vistar-yojana-at-kota/4601/">4 घंटे में 20 करोड़ की जमीन से अतिक्रमण साफ, पुलिस ने पत्थरबाजों को खदेड़ा</a></strong></span></p>
<p><strong>कोटा रेडिया स्टेशन की फीक्वेंसी बढ़ाई जाए</strong><br />
एसोसिएशन ऑफ रेडिया एण्ड टेलीविजन एम्लाइज कोटा इकाई ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला को ज्ञापन देकर कोटा रेडिया स्टेशन की फ्रीक्वेंसी बढ़वाने का आग्रह किया है। ज्ञापन में कर्मचारियों ने कहा कि कोटा में 20 किलोवॉट मीडियम वेव ट्रांसमिटर को बढ़ाकर डिजिटल रेडियो मोंडियाल ट्रांसमिटर में तथा 1 किलोवॉट एफएम ट्रांसमिटर को 5 किलोवॉट ट्रांसमिटर में अपग्रेड करवाने से कोटा सहित सम्पूर्ण संसदीय क्षेत्र तथा आसपास के जिलों में रेडियो प्रसारण सेवा में सुधार होगा। लोकसभा अध्यक्ष ने इसके लिए उचित कार्यवाही का भरोसा दिलाया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>Read More :  <a href="https://tismedia.in/kota/rail-roko-andolan-farmers-protest-on-railway-tracks-in-kota-against-agricultural-law/4595/">रेलवे ट्रेक तक पहुंचा किसान आंदोलन, प्रदर्शनकारियों ने पटरियों पर किया कब्जा</a></strong></span></p>
<p><strong>केंद्रीय कर्मचारियों को मिले सीजीएचएस सुविधा</strong><br />
नारकोटिक्स विभाग के कर्मचारियों ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला को ज्ञापन देकर कोटा में कार्यरत केंद्रीय कर्मचारियों को भी सीजीएचएस सुविधा उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है। ज्ञापन में कर्मचारियों ने कहा कि कोटा के अस्पतालों मे सीजीएचएस सुविधा संबंधी प्रस्ताव केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में लंबित है। यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है तो इससे न सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों बल्कि उनके परिजनों को भी निशुल्क चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सकेगा। लोकसभा अध्यक्ष ने इसके लिए अधिकारियों को चिकित्सा मंत्रालय में बात करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>Read More : <a href="https://tismedia.in/kota/jee-main-exam-2021-start-from-23-february-in-india/4593/">JEE-Main Exam 23 से : मोटे सोल के जूते और बड़े बटन वाले कपड़ों पर रहेगा प्रतिबंध</a><br />
</strong></span><strong>कोटा के एथलीटों ने जताया आभार</strong><br />
श्रीनाथपुरम स्पोट्स कॉम्प्लेक्स में 400 मीटर का सिंथेटिक ट्रेक स्वीकृत करवाए जाने पर कोटा के एथलीट्स ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का आभार जताया है। कोटा जिला एक्लेटिक्स संघ के अध्यक्ष विशाल शर्मा, भाजपा शहर जिला मंत्री जगदीश जिंदल तथा जिला खेल अधिकारी अजीज पठान के नेतृत्व में एथलट्सि ने गुरुवार को कैंप कार्यालय जाकर लोकसभा अध्यक्ष बिरला को इस सौगात के लिए धन्यवाद दिया।</p>
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		<title>कोटा थर्मल ने कुन्हाड़ी के लोगों को दी सामुदायिक भवन की सौगात</title>
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		<pubDate>Mon, 08 Feb 2021 15:52:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>थर्मल कर्मचारियों के साथ-साथ नदी पार इलाके लोगों को मिलेगा किराए पर तीन कमरे, बड़े टीन शेड हॉल और गार्डन में हो सकेगा करीब 300 लोगों का आयोजन कोटा. कोटा ही नहीं उत्तर भारत के लाखों घरों को सालों से रोशन कर रहा कोटा सुपर तापीय विद्युत गृह (कोटा थर्मल) अब नदी पार इलाके के &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/cover-stories/congress-leader-amit-dhariwal-inaugurated-kota-thermal-community-building/4260/">कोटा थर्मल ने कुन्हाड़ी के लोगों को दी सामुदायिक भवन की सौगात</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>थर्मल कर्मचारियों के साथ-साथ नदी पार इलाके लोगों को मिलेगा किराए पर</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>तीन कमरे, बड़े टीन शेड हॉल और गार्डन में हो सकेगा करीब 300 लोगों का आयोजन</strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कोटा.</strong></span> कोटा ही नहीं उत्तर भारत के लाखों घरों को सालों से रोशन कर रहा कोटा सुपर तापीय विद्युत गृह (कोटा थर्मल) अब नदी पार इलाके के लोगों को खुशियां भी बांटेगा। शादी-समारोह के आयोजन के लिए इस इलाके में सालों से अत्याधुनिक सामुदायिक भवन की कमी लोगों को खल रही थी। जिसे थर्मल प्रशासन ने सोमवार को पूरा कर कर दिया।</p>
<p>कोटा थर्मल ने सामाजिक उत्तरदायित्व योजना (सी.एस.आर. पॉलिसी) के तहत थर्मल आवासीय परिसर के सामने सामुदायिक केंद्र निर्माण कराया है। सोमवार को कांग्रेस नेता व सामाजिक कार्यकर्ता अमित धारीवाल ने इसका उदघाटन किया। इस मौके पर धारीवाल ने कहा कि रोशनी की नींव पर खड़ा यह सामुदायिक भवन थर्मल कर्मचारियों के साथ-साथ इलाके के लोगों की जिंदगी में खुशियों की सौगात लेकर आएगा।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>थर्मल कर्मियों को मिलेगा आधे किराए पर</strong></span><br />
कोटा थर्मल के मुख्य अभियंता वी.के. गोलानी ने कहा कि शहर के नदी पार क्षेत्र में ऐसे कार्यक्रम स्थल की खासी कमी थी। जहां अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ एक ही परिसर में कई कार्यमक्रम आयोजित किए जा सकें। थर्मल प्रशासन ने सीएसआर के जरिए इस कमी को पूरा करने का संकल्प लिया था। जिसे आज पूरा भी कर दिया गया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सिर्फ 14 हजार रुपए किराया</strong></span><br />
संयुक्त निदेशक कार्मिक हेमंत मदान ने बताया कि सामुदायिक भवन में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस तीन कमरे, एक बड़ा हॉल और लॉन स्थापित किया गया है। यहां 300 से ज्यादा लोगों के आयोजन की जगह है। थर्मल कर्मचारियों को एक दिन के लिए पूरा सामुदायिक भवन महज 14 हजार रुपए में किराए पर दिया जाएगा। जबकि आसपास के इलाके के लोगों को 28 हजार रुपए में यह सुविधा मिल सकेगी। मदान ने बताया कि जिन लोगों को छोटे आयोजन करने हैं वह कमरे, हॉल और लॉन अलग-अलग भी ले सकते हैं। हॉल 8 हजार रुपए, कमरे 16 हजार और पूरा भवन 28 हजार रुपए में मिलेगा। हालांकि थर्मल कर्मचारियों के लिए इसका आधा ही किराया रखा गया है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह रहे मौजूद</strong></span><br />
सामुदायिक भवन के उदघाटन अवसर पर अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता संजय फोतेदार और मुख्य लेखा नियत्रंक बी.के अग्निहोत्री के साथ कोटा थर्मल के अधिकारी, कांग्रेस कोटा उत्तर के ब्लॉक अध्यक्ष राजीव आचार्य, पार्षद दुष्यन्त तोषी, हरिओम सुमन, लटूर सेनी, मनोज मेघवाल, अभिमन्यु सुराणा, गोपाल, रूद्र प्रताप सिंह और अन्नू टेलर आदि लोग मौजूद रहे।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/cover-stories/congress-leader-amit-dhariwal-inaugurated-kota-thermal-community-building/4260/">कोटा थर्मल ने कुन्हाड़ी के लोगों को दी सामुदायिक भवन की सौगात</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>कोटा थर्मल पहुंचे रेलवे महाप्रबंधक, जांची कोयला परिवहन की व्यवस्थाएं</title>
		<link>https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/south-east-central-railway-general-manager-visited-kota-thermal/3662/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=south-east-central-railway-general-manager-visited-kota-thermal</link>
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		<pubDate>Sat, 16 Jan 2021 11:49:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे महाप्रबंधक ने शनिवार दोपहर को कोटा थर्मल के रेलवे विभाग का दौरा किया। थर्मल के मुख्य अभियंता वी.के गोलानी ने बताया कि दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के महाप्रबंधक गौतम बनर्जी ने रेलवे अधिकारियों के साथ थर्मल के रेलवे मार्गलिंग यार्ड, कंट्रोल रूम नम्बर 7 तथा वैगन टिपलर ऑपरेशन यूनिट का निरीक्षण &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/south-east-central-railway-general-manager-visited-kota-thermal/3662/">कोटा थर्मल पहुंचे रेलवे महाप्रबंधक, जांची कोयला परिवहन की व्यवस्थाएं</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>TISMedia@Kota. </strong>दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे महाप्रबंधक ने शनिवार दोपहर को कोटा थर्मल के रेलवे विभाग का दौरा किया। थर्मल के मुख्य अभियंता वी.के गोलानी ने बताया कि दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के महाप्रबंधक गौतम बनर्जी ने रेलवे अधिकारियों के साथ थर्मल के रेलवे मार्गलिंग यार्ड, कंट्रोल रूम नम्बर 7 तथा वैगन टिपलर ऑपरेशन यूनिट का निरीक्षण किया। इस दौरान बनर्जी ने कोयले परिवहन में सावधानी एवं सतर्कता बरतने तथा विद्युत उत्पादन निर्बाध रूप से जारी रहने के निर्देश दिए। इस मौके पर थर्मल अधिकारियों ने रेलवे महाप्रबंधक बनर्जी को स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार जताया।निरीक्षण के दौरान मण्डल रेल प्रबंधक पंकज शर्मा, वरिष्ठ मण्डल परिचालन प्रबंधक तुषार सारस्वत, वरिष्ठ मण्डल वाणिज्य प्रबंधक अजय कुमार पाल सहित कई रेलवे अधिकारी मौजूद रहे।</p>
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		<title>फिर जी उठा ‘कोटा थर्मल’, सातों यूनिटों को मिली इन्वायरमेंट क्लीयरेंस  </title>
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		<pubDate>Fri, 06 Nov 2020 16:12:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आरएसपीसीबी की जांच में हुआ था पर्यावरण मानकों के उलंघन का खुलासा, कैग ने संचालन घोषित कर दिया था अवैध सीई अजय सक्सेना की मेहनत लाई रंग, एक साल में 21 बड़ी खामियां की दुरुस्त, 2023 तक मिली संचालन सहमति कोटा. कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट (KSTPS) एक बार फिर जी उठा। पांच साल तक &#8230;</p>
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<li><strong>आरएसपीसीबी की जांच में हुआ था पर्यावरण मानकों के उलंघन का खुलासा, कैग ने संचालन घोषित कर दिया था अवैध</strong></li>
<li><strong>सीई अजय सक्सेना की मेहनत लाई रंग, एक साल में 21 बड़ी खामियां की दुरुस्त, 2023 तक मिली संचालन सहमति</strong></li>
</ul>
<p><strong>कोटा.</strong> <strong>कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट</strong> (<strong>KSTPS</strong>) एक बार फिर जी उठा। पांच साल तक पर्यावरण मानकों के भंवर में उलझे पावर प्लांट को आखिरकार <strong>राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</strong> (<strong>RSPCB</strong>) ने संचालन सहमति जारी कर जीवनदान दे दिया। इन सालों में थर्मल प्रबंधन की कमान चार मुख्य अभियंताओं के हाथों में रही, लेकिन तीन ने कोटा थर्मल को बचाने की बजाय हाथ ही खड़े कर दिए। जबकि अजय सक्सेना ने प्लांट की कमान संभालने के महज एक साल के भीतर न सिर्फ 21 प्रमुख खामियों को दुरुस्त किया, बल्कि कैग और लोक लेखा समिति को रजामंद कर आरएसपीसीबी से साल 2023 तक के लिए इन्वायरमेंट क्लीयरेंस भी हासिल कर ली।</p>
<p><strong>साल 2015 में फंसा था पेंच</strong></p>
<p>कोटा थर्मल की 1240 मेगावाट क्षमता की सात इकाइयों के संचालन के लिए थर्मल प्रबंधन ने 27 फरवरी 2015 को आरएसपीसीबी से संचालन सहमति मांगी थी। आवेदन का निस्तारण करने के लिए स्थलीय निरीक्षण करने कोटा थर्मल पहुंचे पर्यावरण अभियंताओं को यहां वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन होते हुए मिला था। इसके बाद बोर्ड ने 21 बड़ी खामियां चिन्हित कर उन्हें सुधारने के लिए थर्मल प्रबंधन को नोटिस दिया था, लेकिन अधिकांश आपत्तियों का चार साल तक निस्तारण नहीं हो सका।</p>
<p><strong>कैग ने दिए थे प्लांट बंद करने के आदेश    </strong></p>
<p>इसी दौरान कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग) ने भी कोटा थर्मल का पॉल्यूशन ऑडिट किया तो कोल यार्ड और कोल क्रेशर पर स्थापित वायु प्रदूषण नियंत्रण मशीन बंद मिली। कोयले के धुएं के साथ राख के कण चिमनियों से बाहर निकलने से रोकने के लिए लगाई गए संयंत्र बंद पड़े थे। इलेक्ट्रोस्टेटिक प्रीसीपीटेटर्स (ईएसपी) तो लगा था, लेकिन कई फील्ड्स नियमित तौर पर आउट ऑफ चार्ज थे। इसके साथ ही प्लांट का प्रदूषित पानी साफ किए बगैर चम्बल नदी और फ्लाईएश पांड की तरफ फेंका जा रहा था। तमाम कोशिशों के बावजूद भी जब इन ऑडिट आपत्तियों का निस्तारण नहीं हुआ तो कैग ने कोटा थर्मल का संचालन अवैध घोषित कर प्लांट को पर्यावरण सहमति मिलने तक बंद करने की सिफारिश कर दी।</p>
<p><strong>आरएसपीसीबी की गिरी गाज  </strong></p>
<p>इसके बाद जून 2018 में आरएसपीसीबी ने दंडात्मक कार्रवाई करते हुए सातवीं इकाई की संचालन सहमति रद्द करने के साथ ही 4.65 लाख रुपए का आवेदन शुल्क भी जब्त कर लिया था। इतना ही नहीं बाकी छह यूनिटों की संचालन सहमिति पेडिंग में डाल 14.07 लाख रुपए का आवेदन शुल्क भी डैफर कर दिया था।</p>
<p><strong>पीसीबी की आंखों में झोंकी धूल</strong></p>
<p>कोटावासियों की सांसों में जहर घोल रहे कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट प्रबंधन ने तीन साल तक  खामियों को दुरुस्त करने की बजाय वायु प्रदूषण की जांच के लिए लगाए गए ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम को ही खराब कर दिया। नतीजतन, थर्मल की चिमनियों के जहरीला धुआं उगलने पर भी हालात सामान्य दिखाई देते रहे, लेकिन राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जब मैनुअल मॉनीटरिंग की तो पूरी पोल खुल गई। जांच में खुलासा हुआ कि पर्यावरण सहमति हासिल करने के लिए थर्मल प्रबंधन वायु प्रदूषण की ऑनलाइन मॉनीटरिंग तक को छेडऩे से बाज नहीं आया। चिमनियां जमकर धुआं और राख बाहर फेंक रही थी, बावजूद इसके ऑनलाइन पॉल्यूशन मॉनीटरिंग में प्रदूषण का स्तर सामान्य से भी कम आ रहा था। आरएसपीसी के कोटा क्षेत्रीय कार्यालय ने जब प्रदूषण की मैनुअल जांच की तो खतरनाक स्तर पर मिला। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि केएसटीपीएस के इंजीनियरों ने ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम को ही खराब कर दिया।</p>
<p><strong>दावों तक ही सिमटे रहे अफसर</strong></p>
<p>थर्मल की खामियां दूर करने के लिए अफसरों ने हर बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आश्वासन दिया, लेकिन जब भी एक्शन प्लान मांगा गया, अधिकारी पीछे हट गए। तीन साल में तीन बार प्रदूषण नियंत्रण संयत्रों को चालू करने का दावा किया गया, लेकिन तीनों बार स्थलीय जांच में झूठ साबित हुआ। पांच साल पहले हुई जांच के दौरान आरएसपीसीबी को जो स्थिति मिली, वही हर बार के सत्यापन में सामने आई। इसके लिए कैग ने थर्मल की बदहाली के लिए आला अफसरों को जिम्मेदार माना और जमकर फटकार भी लगाई थी। बावजूद इसके उन पर कोई असर नहीं पड़ा।</p>
<p><strong>हालात थे बेहद गंभीर</strong></p>
<p>जांच में खुलासा हुआ कि थर्मल प्रबंधन ने सीवेज और औद्योगिक कचरे के निस्तारण के लिए कोई इंतजाम नहीं किए। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के निर्देश दिए गए, लेकिन प्रबंधन ने इसका जवाब तक नहीं दिया। थर्मल परिसर में फ्लाईएश और कोयले की वजह से होने वाले प्रदूषण को रोकने का भी कोई इंतजाम नहीं किया गया। कोयले की बारीक राख को उड़ने से रोकने के लिए प्लो फीडर के ऊपर पानी का छिड़काव करने के लिए वाटर नोजल तक पिछले एक दशक से बंद पड़े थे।</p>
<p><strong>साल 2022 तक बंद करने की थी तैयारी</strong></p>
<p>अफसरों की लापरवाही और पर्यावरण नियमों की सख्ती के चलते सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ने साल 2019 के नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान में इन यूनिटों को बंद करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया। अथॉरिटी पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी यूनिट को साल 2022 तक बंद करने की तैयारी में जुटा था, लेकिन इसी बीच सितंबर 2019 में कोटा थर्मल की कमान बतौर मुख्य अभियंता अजय सक्सेना के हाथ आ गई। उन्होंने अपने कार्यकाल में प्लांट को बंद होता देखने के बजाय थर्मल की खामियों को दूर करने की ठान ली।</p>
<p><strong>साल भर की मेहनत लाई रंग</strong></p>
<p>मुख्य अभियंता अजय सक्सेना ने कोटा थर्मल को बचाने के लिए त्रिस्तरीय योजना तैयार की। उन्होंने एक साल तक कड़ी मेहनत और संघर्ष कर सबसे पहले कैग और आरएसपीसीबी की ओर से बताई 21 खामियों को दुरुस्त करने का काम किया। इसके बाद दूसरे चरण में कूलिंग प्लांट, फ्लूड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, एसटीपी लगाने और ईएसपी को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया। तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण में मुख्य अभियंता ने कैग से लेकर लोक लेखा समित और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आला अफसरों को भरोसा दिलाने में कामियाबी हासिल की कि पर्यावरण नियमों की पालना करने के लिए बड़ी लागत वाले प्रोजेक्ट चरण बद्ध तरीके से पूरे कर लिए जाएंगे। इसके लिए बकायदा समयबद्ध प्लान भी इनके समक्ष रखा गया।</p>
<p><strong>आखिरकार पांच साल बाद मिला जीवनदान </strong></p>
<p>कोटा थर्मल के मुख्य अभियंता अजय सक्सेना ने बताया कि एक साल की कोशिशों के बाद अब जाकर प्रदूषण निवारण मानकों की पूरी पालना सुनिश्चित हुई है। जो बड़े प्रोजेक्ट बचे रह गए हैं उनके लिए थर्मल प्रबंधन की ओर से बकायदा लिखित आश्वासन दिया गया है कि इन्हें समयबद्ध योजना के तहत पूरा कर लिया जाएगा। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जब पूरी तरह मुतमईन हो गया तब जाकर कोटा थर्मल को वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 के प्रावधानों के तहत साल 2023 तक के लिए संचालन सहमति जारी कर दी गई है। शुक्रवार को इन्वायरमेंट क्लीयरेंस और संचालन सहमति कोटा थर्मल को मिल गई है। इससे न सिर्फ कोटा थर्मल को नया जीवन मिला है, बल्कि प्रदेश के सबसे पुराने प्लांट में पर्यावरण संरक्षण के साथ पूरी क्षमता से विद्युत उत्पादन की मिसाल भी कायम हो गई है।</p>
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