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	<title>Emergency in India Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>Emergency in India Archives - TIS Media</title>
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		<title>ज्ञान सागर वर्माः देश का इकलौता पत्रकार जिसने इंटेलीजेंस की आंखों में धूल झोंककर छापी थी सरकार के खिलाफ खबर</title>
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		<pubDate>Sat, 26 Jun 2021 06:16:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>सरकार के खिलाफ खबर छपने की कई अफसरों पर गिरी थी गाज  TISMedia@निर्भय सक्सेना.  जून 1975&#8230; देश भर में इमरजेंसी लगी हुई थी&#8230; इंदिरा गांधी का विरोध करने वालों को चुन-चुन कर जेलों में ठूसा जा रहा था&#8230; सरकार का विरोध करने वालों को दिल दहला देने वाली यातनाएं दी जा रही थीं&#8230; बावजूद इसके &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/contribution-of-indian-legend-journalists-gyan-sagar-verma-and-viren-dangwal-in-emergency/9398/">ज्ञान सागर वर्माः देश का इकलौता पत्रकार जिसने इंटेलीजेंस की आंखों में धूल झोंककर छापी थी सरकार के खिलाफ खबर</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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<li><span style="color: #ff0000;"><strong>सरकार के खिलाफ खबर छपने की कई अफसरों पर गिरी थी गाज </strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@निर्भय सक्सेना. </strong></span></p>
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<p>जून 1975&#8230; देश भर में इमरजेंसी लगी हुई थी&#8230; इंदिरा गांधी का विरोध करने वालों को चुन-चुन कर जेलों में ठूसा जा रहा था&#8230; सरकार का विरोध करने वालों को दिल दहला देने वाली यातनाएं दी जा रही थीं&#8230; बावजूद इसके अखबारों में इनका एक शब्द नहीं छप रहा था&#8230;। वजह थी इंदिरा का वह खौफ जिसके चलते इंटेलीजेंस के अफसर अखबार छपने से पहले ही उनके दफ्तरों में बैठ जाया करते थे और जब तक हर खबर का एक-एक शब्द न पढ़ लेते तब तक उस पर छपाई योग्य होने का ठप्पा नहीं लगाते थे। बावजूद इसके उत्तर प्रदेश के बरेली में एक ऐसा जांबाज पत्रकार एवं संपादक था जिसने जनसंघ के नेताओं की गिरफ्तारी और उन्हें दी जाने वाली यातनाओं की खबर छाप डाली। वह भी इंटेलीजेंस के अफसरों से &#8220;छपाई योग्य&#8221; होने का ठप्पा लगवा कर। वह दिग्गज पत्रकार थे ज्ञान सागर वर्मा। यह वहीं वर्मा हैं जिनकी खबरों ने न सिर्फ उत्तर प्रदेश की कई सरकारें गिराईं, बल्कि भारत पर चीन के हमले की खबर भी ब्रेक की। जिस पर खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को संसद में सफाई देनी पड़ी थी।</p>
<p>46 साल पहले 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगा दिया गया था। उस समय मे दैनिक विश्व मानव  के संपादकीय विभाग में था। आपतक की घोषणा होते ही दिल्ली के कई समाचार पत्रों ने संपादकीय स्थान खाली छोड़कर अपना विरोध जताया था। जिस पर कुछ संपादकों की  गिरफ्तारी भी हुई थी। बरेली में दैनिक विश्व मानव का प्रबंधन लक्ष्मण दयाल सिंगल के हाथ मे था जो कांग्रेस के पक्षधर भी थे। मुझे याद है कि विश्व मानव के समाचार संपादक जितेंद्र भारद्वाज एवम रामगोपाल शर्मा  ने संपादकीय के सभी लोगो से सरकार के विरोध में कुछ नही लिखने के निर्देश दिए थे। संपादकीय टीम को ज्ञानसागर वर्मा,अशोक जी, कन्हइया लाल बाजपाई  देखते थे। सिटी न्यूज़ को स्वतंत्र सक्सेना, राकेश कोहरवाल, निर्भय सक्सेना,  कमल शर्मा, सतीश कमल आदि देखते थे।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/virendra-atal-was-brutally-tortured-by-the-police-during-the-emergency/9382/">आपातकाल, यातनाएं और अटल: पुलिस ने प्लास से खींच लिए थे सारे नाखून, हिल गई थी पूरी दुनिया</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">अफसर पढ़ते थे हर एक खबर </span></strong><br />
रात में इंटेलिजेंस के अधिकारी हर खबर पर &#8220;पास&#8221; की मोहर लगते थे।  जिला सूचना अधिकारी वर्मा जी भी रात में शहर की  न्यूज़ पर नजर रखते थे कि कही कोई गलत खबर नही छप जाए। एक दिन बाद यानि 26 जून 1975 को जनसंघ के नेता सत्य प्रकाश अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। सिटी रिपोर्टर ने डरते-डरते सूचना दी, लेकिन किसी की समझ में नहीं आया कि इस खबर को छापें तो कैसे? तभी संपादकीय टीम का सबसे योग्यवान हिस्सा रहे ज्ञान सागर वर्मा ने रिपोर्टर की पीठ पर धौल जमाते हुए कहा कि अब तू देख कि यह खबर कैसे छपती है! ज्ञान सागर वर्मा ने रिपोर्टर से पूरी घटना पूछी और अपनी घसीटामार राइटिंग में  गंदे से कागज पर लिख डाली। मैने इंटेलिजेंस टीम को उस दिन की सभी खबरों के साथ ज्ञान सागर वर्मा जी की लिखी खबर भी भेज दी। बाकी खबरों के बीच में दबी यह खबर अपठनीय होने के कारण और सरकार के खिलाफ होने के बावजूद भी इंटेलीजेंस के अफसरों ने &#8220;छपाई योग्य&#8221; होने का ठप्पा लगा कर एक झटके में वापस भेज दी। अगली सुबह जब सत्य प्रकाश अग्रवाल की गिरफ्तारी की खबर अखबार में छपी तो बरेली से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक बवाल मच गया। कमिश्नर से लेकर कलक्टर और एसपी तक दौड़े-दौड़े अखबार के दफ्तर जा पहुंचे, लेकिन  संपादक जी ने न्यूज़ पास होने की मोहर लगी कॉपी सूचना अधिकारी को दिखा दी। नतीजन, कोई भी अखबार के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर सका। हालांकि गाज गिरनी तो तय थी और गिरी भी, लेकिन यह गाज गिरी इंटेलिजेंस के अफसरों पर। उन्हें सरकार ने रातों रात न सिर्फ बदल दिया, बल्कि बरेली में पहले से भी ज्यादा खूंखार अफसरों की पोस्टिंग कर दी गई।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-youths-got-brutal-punishment-for-opposing-emergency/9375/">आपातकालः कोटा के किशोरों पर हुई जुल्म की इंतहा, ऐसी सजा जो मौत से जरा भी कमतर न थी</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>वीरेन डंगवाल का संघर्ष </strong></span><br />
नामचीन कवि, साहित्यकार और शिक्षक वीरेन डंगवाल मूलतः पत्रकार थे। आपातकाल के दौरान वह जॉर्ज फर्नाडीस के साप्ताहिक अखबार &#8216;प्रतिपक्ष&#8217; में बरेली से रिपोर्टिंग करते थे। इंदिरा गांधी की आताताई नितियों का विरोध करने के कारण वीरेन डंगवाल पर भी गिरफ्तारी का खतरा मंडराता रहता था। नतीजन, वह पूरे आपातकाल में अपने घर ही नहीं गए। दिन भर रिपोर्टिंग करने के बाद वह देर रात विश्व मानव के दफ्तर पहुंच जाते और वहीं प्रिंटिंग मशीन के नीचे जमीन पर अखबार बिछा कर सो जाते। यकीनन, यह बहुत बड़ा संघर्ष था जिसके बारे में आज की पीढ़ी सोचकर भी कांप जाए। आपातकाल में मैने सुभाषनगर गुरुद्वारा में जाकर वहां रह रहे लोगो से भी बात की थी। कवि कन्हैया लाल बाजपेयी जी की इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा के दिए गए निर्णय के बाद लिखी कविता उन दिनों चाय घाट &#8216;फाइव स्टार&#8217; पर बहुत सुनी जाती थी। वह थी &#8230; &#8216;बरुआ भैया कुछ तो जुगत बताओ, जा राजनारायण को जल्दी ही जेल भिजवायो&#8217;।</p>
<p><strong>#UP_Election_2022: <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/who-will-be-bjp-cm-face-for-uttar-pradesh-election-2022-bjp-is-creating-confusion-for-cm-face/9291/">कोन होगा बीजेपी का सीएम फेस, क्या कंफ्यूजन से सियासी फायदा उठाना चाहती है भाजपा</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>इंदिरा को सत्ता से बेदखल करने वाले जज थे बरेली के </strong></span><br />
आपातकाल के दौरान उत्तर प्रदेश की तराई में बसा प्रमुख शहर कांग्रेस का गढ़ होने के बावजूद ऐसे ही चर्चाओं में नहीं आया। यहां के लोकतंत्र सेनानियों पर हुए अत्याचारों जिनमें वीरेंद्र अटल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है के किस्से बीबीसी लन्दन तक ने ब्राडकास्ट किए थे। बरेली के चर्चा में आने की प्रमुख वजह थी इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा। यह वही जज थे जिन्होंने 12 जून 1975 को राजनारायण बनाम इंदिरा गांधी केस में इंदिरा को सत्ता से बेदखल करने का महत्वपूर्ण फैसला दिया था। इसी फैसले के बाद देश का राजनैतिक घटना चक्र तेजी से बदला और आपातकाल लागू कर दिया गया। दरअसल, रायबरेली संसदीय क्षेत्र से इन्दिरा गाँधी का निर्वाचन भ्रष्ट साधनों के उपयोग के कारण जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने ही रद्द किया था। देश की राजनीति में उफान लाने वाले इस साहसिक निर्णय को देने वाले जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा का झुमका सिटी बरेली से गहरा नाता रहा था। उन्होंने बरेली कालेज में वकालात की उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। इतना ही नहीं उन्होंने वर्ष 1943 से 1955 तक बरेली में वकालत की प्रेक्टिस भी की थी।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/bareilly-bank-of-baroda-guard-shoots-customer-for-not-wearing-mask-in-bareilly/9394/">Bareilly: कोरोना का आतंक, मास्क पहनो नहीं तो गोली खाओ&#8230;</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">खाली करो सिंहासन, जनता आती है </span></strong><br />
जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा के इस फैसले के बाद सभी को यह उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी नैतिकता के आधार पर अपने पद से त्यागपत्र दे देंगी, मगर अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण इंदिरा गांधी जी ने ऐसा नहीं किया और कांग्रेस प्रेसिडेंट देव कांत बरुआ सहित एक चौकड़ी ने उन्हें गुमराह कर तानाशाह बनाने की दिशा में काम  किया जिससे तत्कालीन जनसंघ सहित पूरा विपक्ष कांग्रेस पर हमलावर हो गया। उनके इस्तीफे की मांग करते हुए  विपक्षी दलों ने देशभर में  विरोध में धरना, प्रदर्शन एवं रैलियां शुरू कर दीं।  सम्पूर्ण विपक्ष द्वारा चलाए जा रहे इस आन्दोलन की अगुवाई लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने संभाली और नारा दिया सिंघासन खाली करो जनता आती है। इसके बाद 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष ने एक बड़ी रैली की जिसमें जनसमूह उमड़ा। लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने रैली में जोशीला भाषण दिया। उन पर लाठी चार्ज भी हुआ। इससे परेशान इन्दिरा गाँधी ने अपनी कुर्सी बचाने की खातिर संविधान के अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग करते हुए पूरे देश में आपातकाल लगाने  की प्रकिया में सारे कानूनी प्रावधानों को दरकिनार करते हुए देश मे आपातकाल की घोषणा की गई थी। सभी नियमों का उल्लंघन करते हुए इन्दिरा गाँधी ने आपातकाल लगाने का प्रस्ताव भी मंजूरी को तत्कालीन राष्ट्रपति को भेजा। उन्होने बिना संवैधानिक औपचारिकताओं के निर्वाह हुए बिना ही आपातकाल की घोषणा के फ़ाइल पर हस्ताक्षर कर दिए। इस प्रकार चन्द घन्टों में ही सारी कार्रवाई निपटाकर देश पर आपातकाल थोप दिया गया। आपातकाल की यह घोषणा 25 जून 1975 को रात के 12 बजे आकाशवाणी से की गई।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/rajasthan/sachin-pilot-dilemma-in-rajasthans-political-crisis/9350/">RAJASTHAN POLITICS : दुविधा में पायलट! 10 बड़े फैक्ट्स से समझें उनकी सियासी उड़ान की उलझन</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कोई अपील नहीं, कोई दलील नहीं</strong></span><br />
वर्तमान की नई पीढ़ी को लोकतन्त्र पर आई इस काली छाया की कम ही जानकारी होगी मगर उस समय जो लोग किशोर, नौजवान या प्रौढ़ रहे होंगे उनके मन में देश मे लगे आपातकाल की यादें आज भी ताजा हैं। देश में उस समय घुटन भरा डर था। पूरे देश में सरकार विरोधी बताकर सभी को जेलों में भेज दिया गया। आपातकाल में किशोरों तक को नहीं बख्शा गया। उस समय के प्रतिपक्ष के के बड़े नेता लोकनायक जय प्रकाश नारायण, अटल बिहारी बाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई, मुरली मनोहर जोशी, जार्ज फर्नांडीज, चौधरी चरण सिंह, राजनारायण सहित सभी प्रमुख नेताओं को जेल में डाल दिया गया। कोई अपील नहीं, कोई न्यायिक व्यवस्था नहीं, न्यायालयों के सारे अधिकार समाप्त। लाखों लोगों की गिरफ्तारी की गई। प्रेस पर सेंसरशिप लगाकर कुलदीप नैयर, पंजाब केसरी के रमेश चन्द्र आदि पत्रकार जेल में डाल दिए गये। चारों तरफ भय और दहशत का व्याप्त हो गई थी।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/rajasthan/ashok-gehlot-has-absolute-majority-in-rajasthan-assembly/9329/">मस्त रहिए, गहलोत सरकार को नहीं है कोई खतरा&#8230; </a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>प्रेस की आजादी का घोंटा गला</strong></span><br />
प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोट दिया गया। छापेखानों की बिजली काट दी गई। समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में छापने वाली सामग्री का प्रकाशन से पूर्व इंटेलीजेंस की टीम द्वारा जांच होने लगी। आपातकाल लगाते समय इन्दिरा गाँधी ने रेडियो पर भाषण देते हुए कहा था कि आपातकाल बहुत कम समय के लिए होगा। इसलिए देश की जनता को यह उम्मीद थी कि दो-तीन महीने में आपातकाल समाप्त हो जायेगा और लोगों को जेलों से रिहा कर दिया जायेगा, मगर जब ऐसा नहीं हुआ तो लोगों के सब्र का बांध टूटने लगा। देश में अन्दर ही अन्दर आपातकाल हटाने के लिए संघर्ष चलने लगा। अक्टूबर 1975 से देश भर में लोकतंत्र की पुनः बहाली की मांग को लेकर सत्याग्रह करते हुए गिरफ्तारियां देने का दौर शुरू हो गया। लोग लोकतान्त्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपने कैरियर की चिन्ता किए बिना गिरफ्तारियां देते रहे। आपातकाल के खिलाफ लोकतन्त्र की आवाज बुलन्द करते हुए पूरे देश में हजारों लोगों ने अपनी गिरफ्तारियां दीं। सत्याग्रहों के दौरान यह नारा बहुत लोकप्रिय हुआ- सच कहना अगर बगावत है। तो समझो हम भी बागी हैं। देश में लोकतंत्र की स्थापना के  लिए हुआ यह आंदोलन किसी मायने में स्वतंत्रता आंदोलन से कम नहीं रहा। अगर स्वतंत्रता के आंदोलन में अंग्रेजों को भगाने का लक्ष्य था तो इस आंदोलन में लोकतंत्र को तानाशाही के चंगुल से बाहर निकालने का जज्बा था। आपातकाल के विरोध में हुए आंदोलन में भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हजारों लोगो ने पुलिस की बर्बरता झेली और जेल की कोठरियों में कष्ट भी झेला।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-26-june/9397/">26 जून: दिन जब एयर इंडिया का पहला बोइंग विमान &#8216;गौरीशंकर&#8217; बॉम्बे में हुआ दुर्घटनाग्रस्त</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>19 महीने के तप से जन्मा था जनता दल</strong></span><br />
आपातकाल के दौरान देश के हजारों लोगों ने गिरफ्तारी के दौरान पुलिस के अत्याचार सहे। देश मे लोकतंत्र की बहाली के लिए हुए इस आंदोलन में देश में कई नेतागण का निधन भी हुआ। आपातकाल के दौरान जेलों और जेल से बाहर आकर जान गंवाने वाले लोगों के हर प्रदेश, हर भाषा और हर धर्म के लोग शामिल थे। इन सबका धर्म एक था और वह था अभिव्यक्ति की आजादी, लोकतंत्र की पुनः बहाली की जाए। आपातकाल के 19 महीनों तक देश में एक अजीब सी खामोशी रही जिससे इन्दिरा गाँधी को लगा कि विपक्ष का यह फिजूल का ही दम्भ था, जिसे अखबारों एवम आन्दोलनकारियों ने हवा हवाई बना दिया है। इससे उत्साहित होकर इंदिरा गांधी जी ने 18 जनवरी 1977 को देश मे आम चुनाव की घोषणा कर दी। एक बार फिर 21 जनवरी 1977 के बाद देश मे एक बार फिर राजनैतिक घटना चक्र तेजी से घुमा। विपक्ष के चार दलों के विलय के बाद एक नया राजनीतिक दल के रूप में जनता पार्टी बनी। जनता पार्टी का देश भर में प्रसार प्रचार हो गया। इस चुनाव में जनता पार्टी को बड़ी सफलता मिली। 22 मार्च 1977 में प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की अगुआई में देश में जनता पार्टी की सरकार बनी और लोकतंत्र की पुनः बहाली हुई। पर आपसी क्लेश में  जनता पार्टी की सरकार जल्दी ही गिर गई। और फिर कांग्रेस वापस आ गई।</p>
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		<title>आपातकाल, यातनाएं और अटल: पुलिस ने प्लास से खींच लिए थे सारे नाखून, हिल गई थी पूरी दुनिया</title>
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		<pubDate>Fri, 25 Jun 2021 11:51:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@विनीत सिंह  23 जून 2003&#8230;&#8216;अटल जी&#8217; से मेरी पहली मुलाकात की यही तारीख थी&#8230; आपातकाल पर कुछ खास लिखने की ललक मुझे उन तक खींच ले गई&#8230; सोचा तो था कि आधे घंटे में निपटा कर लौट आऊंगा&#8230; लेकिन जब एक कमरे के घर में कदम रखा तो जाना कि यहां तो बलिदानों की पूरी &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div class="kvgmc6g5 cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@विनीत सिंह </strong></span></div>
<div dir="auto"><span style="color: #000000;"><span style="color: #ff0000;"><strong>23 जून 2003&#8230;</strong></span>&#8216;</span>अटल जी&#8217; से मेरी पहली मुलाकात की यही तारीख थी&#8230; आपातकाल पर कुछ खास लिखने की ललक मुझे उन तक खींच ले गई&#8230; सोचा तो था कि आधे घंटे में निपटा कर लौट आऊंगा&#8230; लेकिन जब एक कमरे के घर में कदम रखा तो जाना कि यहां तो बलिदानों की पूरी दुनिया बसी पड़ी थी&#8230;असल में इस शख्स का नाम था वीरेंद्र कुमार&#8230;लेकिन हौसले इतने अटल थे कि&#8230; इस जन नायक के नाम के साथ ही जुड़ गया अटल&#8230;</div>
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<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-youths-got-brutal-punishment-for-opposing-emergency/9375/">आपातकालः कोटा के किशोरों पर हुई जुल्म की इंतहा, ऐसी सजा जो मौत से जरा भी कमतर न थी</a></strong></div>
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<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>जेपी मूवमेंट का युवा तुर्क</strong></span></div>
<div dir="auto">इस किस्से की शुरुआत हुई जेपी मूवमेंट से&#8230; बात 1975 की शुरुआत की है.. जब यूपी के सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा एक सभा को संबोधित करने बरेली आए&#8230;एबीवीपी के इस तेजतर्रार नेता ने बहुगुणा को मंच से नीचे उतारकर उनके मुंह पर काला रूमाल फेंक दिया&#8230;हड़बड़ाए बहुगुणा जमीन पर गिर गए और भगदड़ मच गई&#8230; जैसे-तैसे पुलिस की कड़ी सुरक्षा में उन्हें पहले कोतवाली ले जाया गया&#8230; जहां से कपड़े बदलकर वह जीआईसी के मैदान में सभा को संबोधित करने पहुंच गए&#8230; लेकिन यह युवा तुर्क कहां मानने वाला था&#8230; पुलिस ने जब इन्हें जीआईसी में नहीं घुसने दिया तो साथियों की मदद से कॉलेज की चार दीवारी ही गिरा दी&#8230;और मंच पर चढ़कर बहुगुणा से माइक छीन लिया&#8230;यह मामला अभी निपटा भी नहीं था कि 24 जून 1975 की रात प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगा दी&#8230; वीरेंद्र को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आंदोलन फैलाने की जिम्मेदारी मिली थी&#8230; विपक्ष के संदेश एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाना और विरोध प्रदर्शन के ठिकाने तय करने का काम दिया गया&#8230;।</div>
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<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/india/twitter-has-suspended-the-account-of-it-minister-ravi-shankar-prasad-for-an-hour/9380/">Twitter ने आईटी मिनिस्टर को सुंघाई जमीन, एक घंटे के लिए सस्पेंड कर दिया अकाउंट</a></strong></div>
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<div dir="auto"><strong style="color: #ff0000;">मुखबिरी-गिरफ्तारी</strong></div>
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<div dir="auto">इस दौरान जनसंघ समेत विपक्षी दलों के बड़े-बड़े नेता गिरफ्तार हो चुके थे, लेकिन वीरेंद्र अभी भी पुलिस की पकड़ से कोसों दूर थे&#8230;जो भाजपा आपात काल के विरोध का श्रेय लेते नहीं थकती&#8230; उसी के बरेली महानगर अध्यक्ष रमेश आनंद ने वीरेंद्र की मुखबिरी कर दी&#8230; 28 अक्टूबर 1975 की शाम को अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात रहे बरेली के कोतवाल हाकिम राय ने वीरेंद्र को उनके घर से धर दबोचा&#8230; तलाशी के दौरान अलमारी से पोस्टरों का बंडल मिला&#8230;तो वह भड़क गया। वीरेंद्र को बड़ी खामोशी से पेट्रोल जीप नंबर एक से कोतवाली तक लाना, लेकिन वह पूरे रास्ते सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते आए। जिससे हाकिम राय खौल गया। कोतवाल हाकिम राय ने वीरेंद्र के साथियों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आंदोलन की रणनीति उगलवानी चाही, लेकिन वह कामियाब नहीं हो सका।</div>
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<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong><span style="color: #000000;">READ MORE:</span> <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/kota-news/kota-thermals-first-and-second-power-generation-units-will-be-closed-forever-from-june-30/9341/">#TISExclusive जेके और आईएल की तरह मिटने लगा कोटा थर्मल वजूद, हमेशा के लिए बंद हुईं दो यूनिटें</a></span></strong></span></div>
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<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>यातनाओं का दौर</strong></span></div>
<div dir="auto">बड़े-बड़े अपराधियों का मुंह खुलवाने का दम भरने वाले हाकिम राय एक लड़के के सामने खुद को कमजोर पड़ता देख आग-बबूला हो गया। उसने रमेश आनंद को भी गिरफ्तार करवा लिया और उनके सामने ही वीरेंद्र अटल को बेइंतहा पीटने लगा। खुद थक गया तो छह सिपाहियों को बारी-बारी यह काम दिया, लेकिन वीरेंद्र फिर भी नहीं टूटे। हाकिम राय इतने पर भी नहीं रुका उसने मातहतों को एक प्लास खरीदने के लिए बाजार में भेज दिया। 29 अक्टूबर 2017 की सुबह वीरेंद्र की जिंदगी की सबसे खौफनाक सुबह थी। कोतवाल हाकिम राय उन्हें लेकर सीओ एके सिंह के कमरे में दाखिल हुआ और मातहतों को प्लास (प्लायर) लाने का हुक्म दिया। इसके बाद हाकिम राय ने सरकार को गिराने की साजिश रचने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गिरोह के सरगना वीरेंद्र का दायां हाथ पकड़ा और एक झटके में अंगूठे का नाखून खींचकर बाहर निकाल लिया। वीरेंद्र की तो छोड़ो उनकी मुखबिरी करने वाले रमेश आनंद तक चीख पड़े। यातनाओं का यह दौर तो अभी शुरु हुआ था। इसके बाद हाकिम राय ने एक-एक कर वीरेंद्र की सभी उंगलियों के नाखून खींच डाले, लेकिन यह युवा तुर्क इतने पर भी नहीं टूटा। हालांकि यातनाओं को देख रमेश टूट गए और संघ के प्रचारकों के ठिकाने बताने को राजी हो गए। दर्द से छटपटाते वीरेंद्र ने यहां भी हिम्मत नहीं हारी और उन्होंने रमेश को गलत पते बताने के लिए राजी कर लिया।</div>
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<div dir="auto"><strong>Read More:<a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/kota-police-arrested-three-accused-who-cheated-the-youth-in-the-name-of-marriage/9358/"> मैं कुवांरा हूं, मुझे शादी करनी है&#8230; सुनते ही दोस्त ने अपनी पत्नी से डलवाए फेरे और फिर&#8230; मचा बवाल</a></strong></div>
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<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>पूरी दुनिया में मचा हड़कंप</strong></span></div>
<div dir="auto">प्रचारकों की तलाश में हाकिम राय वीरेंद्र को लेकर पूरे शहर में घूमा, लेकिन उसे कोई सफलता हाथ नहीं लगी। हाकिम राय ने खून से लथपथ वीरेंद्र को जेल भेज दिया, लेकिन जेल में जब यह खबर फैली तो सारे कैदी वीरेंद्र का इलाज ना होने तक हड़ताल पर चले गए। आखिरकार रात को नौ बजे उनकी घायल उंगलियों पर पट्टियां बांधी गईं। इसी बीच अशोक सिंघल बरेली आए तो उन्हें लोगों ने पूरा घटनाक्रम बताया। सिंघल ने सुब्रह्मण्यम स्वामी से बात की तो उन्होंने यातनाओं भरी इस खबर को बीबीसी लंदन से ब्रॉडकास्ट करवाया। जिसके बाद तो पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया।</div>
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<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-25-june/9346/">25 जून: भारत के इतिहास में काला दिन, जब आपातकाल की घोषणा की</a></strong></div>
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<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>वीरेंद्र हो गया अटल</strong></span></div>
<div dir="auto">बीबीसी के न्यूज ब्रेक करने के बाद मामला अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक जा पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घिरता देख सरकार ने पूरे घटनाक्रम की जांच शाह आयोग को सौंप दी, लेकिन वहां इंसाफ नही मिल सका, लेकिन इस बीच वीरेंद्र जनता के नायक बन चुके थे और लोगों ने उनके हौसले को देखते हुए नया नाम दे डाला अटल जी। वीरेंद्र अटल जेल से तो छूट गए, लेकिन उन पर जघन्य अपराधों के 15 मामले लाद दिए गए। मीसा में भगोड़ा घोषित कर दिया गया। 1977 में जब चौधरी चरण सिंह ने बरेली में जनसभा की तो उन्होंने ही अटल जी को सभा में हाजिर करावाया। गजब का दिन था वो जब चौधरी चरण सिंह ने अपनी जगह वीरेंद्र अटल को भाषण देने के लिए खड़ा कर दिया। 50-60 हजार लोगों की भीड़ और 40 मिनट से ज्यादा का भाषण&#8230; चारों तरफ सन्नाटा पसरा था&#8230; बस कुछ सुनाई दे रहा था तो सुबकने की आवाजें&#8230; आखिर में चौधरी चरण सिंह उठे और उन्होंने ऐलान किया कि &#8230; यूपी में सरकार बदलते ही कोतवाल हाकिम राय, सीओ एके सिंह और जिला कलक्टर माता प्रसाद को सस्पेंड करवा कर जेल भिजवाएंगे&#8230; इसके बाद तो पूरा मैदान जयकारों से गूंज उठा। हुआ भी ऐसा ही जब राम नरेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री बने तो सबसे पहला आदेश उन्होंने इन तीनों लोगों को सस्पेंड कर जेल भेजने का ही दिया। आज इमरजेंसी की 42वीं साल है और अटल जी को याद किए बिना यह दिन अधूरा ही रहेगा। नमन उनकी बहादुरी को उनके बलिदान को&#8230;.।</div>
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<p>The post <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/virendra-atal-was-brutally-tortured-by-the-police-during-the-emergency/9382/">आपातकाल, यातनाएं और अटल: पुलिस ने प्लास से खींच लिए थे सारे नाखून, हिल गई थी पूरी दुनिया</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>आपातकालः कोटा के किशोरों पर हुई जुल्म की इंतहा, ऐसी सजा जो मौत से जरा भी कमतर न थी</title>
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		<pubDate>Fri, 25 Jun 2021 11:10:00 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Breaking]]></category>
		<category><![CDATA[Citizen Journalist]]></category>
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		<category><![CDATA[brutal punishment of Kota youths in Emergency]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@विनीत सिंह आपातकाल का जिक्र छिड़ते ही मेरे जेहन में अभी तक सिर्फ एक ही शख्स का अक्स उभरकर सामने आता था&#8230; वीरेंद्र अटल&#8230; पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लोकतंत्र का इनसे बड़ा झंडाबरदार शायद ही कोई हो&#8230; अत्याचार की पराकाष्ठा ये थी कि पुलिस ने साथियों के नाम उगलवाने के लिए प्लायर से &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/kota-youths-got-brutal-punishment-for-opposing-emergency/9375/">आपातकालः कोटा के किशोरों पर हुई जुल्म की इंतहा, ऐसी सजा जो मौत से जरा भी कमतर न थी</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div class="kvgmc6g5 cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<p dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@विनीत सिंह</strong></span><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>आपातकाल</strong> </span>का जिक्र छिड़ते ही मेरे जेहन में अभी तक सिर्फ एक ही शख्स का अक्स उभरकर सामने आता था&#8230; वीरेंद्र अटल&#8230; पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लोकतंत्र का इनसे बड़ा झंडाबरदार शायद ही कोई हो&#8230; अत्याचार की पराकाष्ठा ये थी कि पुलिस ने साथियों के नाम उगलवाने के लिए प्लायर से हाथ और पैर के नाखून तक खिंचवा लिए थे&#8230;। सालों बाद कोटा में ऐसे ही दूसरे लोकतंत्र सेनानी से मिलना हुआ&#8230; गिरिराज यादव&#8230; उन्हें जो सजा दी गई थी जो मौत से जरा भी कमतर नहीं थी&#8230; आज लोकतंत्र सेनानियों के साथ हुई जुल्म की इंतहा में पढ़िए उन्हीं की आपबीती&#8230;।</p>
<div dir="auto"><strong style="color: #ff0000;">कोटा 25 नवंबर 1975&#8230;.</strong></div>
</div>
<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto">सूजा जी हॉस्टल कैथूनी पोल&#8230; मेज पर जलती मोमबत्ती&#8230; मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रांण न्यौछावर करने की शपथ लेते 11 हाथ&#8230; मुट्ठियां बन जब एक साथ तने तो सख्त पहरे में बैठे मंत्री भी दहल उठे&#8230;खाकी के खौफ को परे धकेल ये नौजवान धड़ल्ले से कलक्ट्रेट में जा घुसे&#8230; जमकर पर्चे फैंके&#8230;लोकतंत्र को बचाने के लिए खूब नारेबाजी की&#8230; खिसियाई पुलिस ने सरकार का खौफ तारी करने को पांच दिन तक थाने में उल्टा लटका कर रखा&#8230; पहले कंबल और फिर ठंडा पानी डालकर बेइंतहा पीटा&#8230; जुल्म की इंतहा तो तब हो गई जब हाकिमों ने नाक, मुंह, कान और आंख ही नहीं गुप्तांगों तक में लाल मिर्च भर दी&#8230; लोकतंत्र के मतवाले फिर भी नहीं टूटे तो हार कर उन्हें जेल भेजना पड़ा।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/rajasthan/sachin-pilot-dilemma-in-rajasthans-political-crisis/9350/">RAJASTHAN POLITICS : दुविधा में पायलट! 10 बड़े फैक्ट्स से समझें उनकी सियासी उड़ान की उलझन</a></strong></div>
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<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>स्वामी माधवदास ने दिखाई राह </strong></span></div>
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<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto">हाड़ौती के इतिहास में आपातकाल के सबसे खौफनाक मंजर को याद कर गिरिराज यादव अब भी पसीने से तरबतर हो जाते हैं। वो बताते हैं कि &#8216;लोकतंत्र का दमन अपने चरम पर था। बीकॉम प्रथम वर्ष के बद्री लाल शर्मा, कृष्ण मुरारी, राधेश्याम नागर, ओम त्रिपाठी और संजय गोयल समेत पूरे हॉस्टल के छात्र सरकार का घमंड तोडऩे के लिए आकुल थे। गोवा मुक्ति आंदोलन के प्रभारी रहे स्वामी माधव दास ने इस तड़प को आवाज दी और भगत सिंह की राह पर चलने का सुझाव दिया।</div>
</div>
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<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/kota-police-arrested-three-accused-who-cheated-the-youth-in-the-name-of-marriage/9358/">मैं कुवांरा हूं, मुझे शादी करनी है&#8230; सुनते ही दोस्त ने अपनी पत्नी से डलवाए फेरे और फिर&#8230; मचा बवाल</a></strong></div>
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<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>भगत सिंह की तरह फेंके पर्चे</strong></span></div>
<div dir="auto">&#8216;आंदोलन को अंजाम देने के लिए ऐसे ११ साथियों का चुनाव किया गया जो पुलिसिया बर्बरता के आगे टूटें नहीं। सूचना मिली कि राजस्थान सरकार के मंत्री हीरा लाल देवपुरा आपातकाल की समीक्षा करने के लिए टैगोर हॉल में बैठक करने वाले थे। अपनी आवाज उठाने को इससे बेहतर मौका नहीं मिलने वाला था। तड़के हॉस्टल में शपथ ली और फिर राजकीय महाविद्यालय जाकर शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद सर्किट हाउस होते हुए हम कलेक्ट्रेट तक जा पहुंचे। जहां इतनी कड़ी सुरक्षा थी कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता, लेकिन हम पुलिस को चकमा देकर अंदरह जा घुसे और अपने साथ लाए पर्चे निकालकर फैंकने लगे। कुछ साथियों ने अदालत में घुसकर पर्चे फेंकने शुरू कर दिए। मंत्री की मौजूदगी में अचानक नारे बाजी होते देख पुलिसिया अमला हक्का बक्का रह गया।</div>
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<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-thermals-first-and-second-power-generation-units-will-be-closed-forever-from-june-30/9341/">#TISExclusive जेके और आईएल की तरह मिटने लगा कोटा थर्मल वजूद, हमेशा के लिए बंद हुईं दो यूनिटें</a></strong></div>
<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
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<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>खाकी ने भरना चाहा खौफ</strong></span></div>
<div dir="auto">इसके बाद पुलिस हम सभी को गिरफ्तार करके नयापुरा थाने ले आई। जहां सीआई एसके जौहरी, डिप्टी एसपी भोपाल सिंह और एसपी फूल सिंह यादव ने हम सभी से पूछताछ की, लेकिन किसी के कुछ नहीं उगलवा सके। शुरुआती पूछताछ में डिप्टी को इतना जरूर समझ में आ गया कि मैं इस दल का नेतृत्व कर रहा हूं। इसके बाद तो जैसे ही रात हुई मेरे कपड़े उतार लिए गए और थाने के पिछले हिस्से में ले जाकर उल्टा लटका दिया गया। करीब तीन घंटे बाद जल्लादनुमा सिपाही आए और उन्होंने पहले मेरे ऊपर कंबल डाला फिर बर्फ जैसा ठंडा पानी&#8230; मैं कुछ समझ पाता इससे पहले उन्होंने मुझे बेइंतहा पीटना शुरू कर दिया। पिटते-पिटते मैं बेहोश होजाता तो मुझे फिर से होश में लाया जाता और फिर बेहोश होने तक पीटा जाता।</div>
</div>
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<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/lok-sabha-speaker-om-birla-met-the-dependents-of-those-who-died-due-to-corona-disease/9333/">कोरोना का कहरः बिरला ने घर घर जाकर पोंछे आंसू, बेसहारा हुए लोगों का बांटा दर्द</a></strong></div>
<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
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<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>रूह तक कांप उठी</strong></span></div>
<div dir="auto">नयापुरा पुलिस ने मेरी 5 दिन की रिमांड ली थी&#8230; चार दिन की पिटाई के बाद भी मैं नहीं टूटा तो पांचवे रोज अत्याचार की इंतहा ही हो गई। पहले मेरे मुंह में जबरन लाल मिर्च ठूसी गई&#8230; फिर नाक&#8230; आंख और कान में&#8230; मैने इतने पर भी अपने साथियों और आंदोलन से जुड़े लोगों के नाम नहीं बताए तो जल्लादों ने मेरे गुप्तांगों में भी मिर्च भर दी&#8230; दो दिन तक बेहोश रहने के बाद आंख खुली तो खुद को सेंट्रल जेल में पाया। जहा मेरी हालत देख कैद किए गए हर लोकतंत्र सेनानी की रूह कांप उठी। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रचारक और आयुर्वेद के अच्छे जानकार ठाकुरदास टंडन ने कई महीने तक मेरा इलाज किया तब जाकर उठ-बैठने लायक हो सका।</div>
</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/rajasthan/ashok-gehlot-has-absolute-majority-in-rajasthan-assembly/9329/">मस्त रहिए, गहलोत सरकार को नहीं है कोई खतरा&#8230; </a></strong></div>
<div class="o9v6fnle cxmmr5t8 oygrvhab hcukyx3x c1et5uql ii04i59q">
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><span style="color: #ff0000;"><strong>नहीं ली कोई इमदाद</strong></span></div>
<div dir="auto">गिरिराज यादव बताते हैं कि 4 महीने 10 दिन तक सेंट्रल जेल में रहने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। जब इमरजेंसी खत्म हुई तो वह पीटीआई हो गए। सरकार ने घर और पैसों का लालच दिया, लेकिन ठुकरा दिया। अब जाकर कुछ साथियों ने जबरन पेंशन लगवा दी है। वो आखिर में कहते हैं कि&#8230; ये लोकतंत्र खून से सींचकर खड़ा किया गया है। इसे मजहबी और गैर वाजिब मसलों पर फिर से लुटाया नहीं जा सकता। यह बात आज की पीढ़ी को समझनी ही होगी।</div>
</div>
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