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	<title>Power Plant in India Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>Power Plant in India Archives - TIS Media</title>
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		<title>#TIS_Impact नाकाम हुई कोटा थर्मल को बंद करने की साजिश, जारी हुआ यूनिटें चलाने का आदेश</title>
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		<pubDate>Thu, 01 Jul 2021 12:02:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TIS Media ने खोली उत्पादन निगम के अफसरों की पोल, ऊर्जा विकास निगम ने दिया यूनिटें चलाने का आदेश  मुख्यमंत्री, यूडीएच और ऊर्जा मंत्री की कोशिशों के बावजूद कोटा थर्मल को बंद करने पर अड़े थे अफसर  TISMedia@Kota कोटा थर्मल को बंद करने की साजिश TIS Media ने एक बार फिर नाकाम कर डाली। आलम यह &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/tis_impact-conspiracy-to-shut-down-kota-thermal-failed-order-to-run-units-issued/9557/">#TIS_Impact नाकाम हुई कोटा थर्मल को बंद करने की साजिश, जारी हुआ यूनिटें चलाने का आदेश</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>TIS Media ने खोली उत्पादन निगम के अफसरों की पोल, ऊर्जा विकास निगम ने दिया यूनिटें चलाने का आदेश </strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>मुख्यमंत्री, यूडीएच और ऊर्जा मंत्री की कोशिशों के बावजूद कोटा थर्मल को बंद करने पर अड़े थे अफसर </strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota </strong></span>कोटा थर्मल को बंद करने की साजिश TIS Media ने एक बार फिर नाकाम कर डाली। आलम यह था कि राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के आला अफसर यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल तो दूर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक के आदेश को मानने के लिए राजी नहीं थे। TIS Media ने जब साजिश का खुलासा किया तो उत्पादन निगम से लेकर ऊर्जा विकास निगम तक में हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने आदेशों की अवेहलना को गंभीरता से लेते हुए जब उत्पादन निगम के आला अफसरों से जवाब तलब किया तब कहीं जाकर आनन फानन में कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाइयों को बंद करने का आदेश रद्द किया और साल 2023 तक दोनों यूनिटों के नियमित रूप से चलाने के आदेश जारी किए।</p>
<p>कोटा थर्मल को बंद करने की बड़ी साजिश का एक बार फिर खुलासा हुआ है। ऊर्जा विभाग की संयुक्त सचिव अनूपमा जोरवाल ने 17 जून को राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के एमडी एवं चेयरमेन को लिखित आदेश जारी किया था कि कोटा थर्मल की पहली और दूसरी यूनिट को 30 जून की आधी रात से हमेशा के लिए बंद कर दिया जाए। आदेश की जानकारी लगते ही #TISMedia ने 24 जून को <span style="color: #ff0000;"><strong>&#8220;<a style="color: #ff0000;" href="https://tismedia.in/kota-news/politics/kota-thermals-first-and-second-power-generation-units-will-be-closed-forever-from-june-30/9341/"><span style="color: #0000ff;">#TISExclusive जेके और आईएल की तरह मिटने लगा कोटा थर्मल वजूद, हमेशा के लिए बंद हुईं दो यूनिटें</span></a>&#8220;</strong></span> खबर प्रकाशित कर कोटा थर्मल को बंद करने की उच्च स्तरीय साजिश का खुलासा किया था। वसुंधरा राजे की सरकार के समय से ही कोटा थर्मल को बंद करने की साजिशें कर रहे ऊर्जा विभाग के अफसरों की इस करतूत का पर्दाफाश होते ही पूरे राजस्थान में हड़कंप मच गया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TIS Media के खुलासे के बाद मचा हड़कंप </strong></span><br />
वसुंधरा सरकार के बाद गहलोत सरकार में भी कोटा थर्मल को बंद करने की उच्च स्तरीय साजिश का खुलासा होते ही सूबे में हड़कंप मच गया था। कोटा थर्मल के कर्मचारियों से लेकर आला अधिकारियों तक ने ऊर्जा विभाग जिम्मेदार अधिकारियों को हालात से अवगत कराया। TIS Media की खबर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला तक पहुंची तो हर कोई भौंचक रह गया। कोटा थर्मल से लेकर ऊर्जा विकास निगम के अफसरों और सरकार में बैठे मंत्रियों तक की समझ में नहीं आया कि कोटा थर्मल को 2023 तक इन्वायरमेंट क्लीयरेंस मिलने के बाद भी आखिर पहली और दूसरी इकाई को बंद करने के आदेश कैसे जारी हो गए। खुलासे के बाद मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के दफ्तरों से कोटा थर्मल को बचाने वाले अफसरों को फोन घनघनाए गए और जब असल हालात पता चले तो हर कोई कोटा थर्मल की दो इकाइयों को बंद करने के फैसले की जिम्मेदारी लेने से भागने लगा।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/tismedia-impact-now-the-first-and-second-units-of-kota-thermal-will-not-be-closed-in-kota/9485/">#TIS_Impact: अब नहीं होगी कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाई बंद, मंत्री धारीवाल ने दिया बयान</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>धारीवाल ने दिया दखल </strong></span><br />
तीन दिन बाद कोटा के विधायक और राजस्थान सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री शांति धारीवाल ने भी सियासी नुकसान होता देख मामले में दखल दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से बात कर कोटा थर्मल की दोनों इकाइयों का संचालन चालू रखने की अपील की। जिस इन्वायरमेंट क्लीयरेंस की आड़ में कोटा थर्मल को बंद करने की साजिश रची जा रही थी, उसी को आधार बनाते हुए मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री ने धारीवाल को आश्वासन दिया कि जब तक इन्वायरमेंट क्लीयरेंस है तब तक कोटा थर्मल की किसी भी इकाई को बंद नहीं किया जाएगा। पूरी तरह से मुतमईन होने के बाद नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने 28 जून को वीडियो जारी कर बयान दिया कि कोटा थर्मल की सभी इकाइयां पहले की तरह ही संचालित होती रहेंगी। इसके साथ ही पहली और दूसरी इकाई को बंद करने के आदेश भी सरकार ने वापस ले लिए हैं।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/energy-department-denies-udh-minister-orders-two-units-of-kota-thermal-will-be-closed-tonight/9532/">#KotaThermal धारीवाल पर भारी पड़ा लोड डिस्पेच सेंटर, आधी रात से बंद हो जाएंगी यूनिट 1 और 2</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>धारीवाल और गहलोत को भी रखा धोखे में </strong></span><br />
यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के कोटा थर्मल को बचाने का बयान जारी करने के 48 घंटे बाद ही राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम के लोड डिस्पेच सेंटर ने 17 जून को जारी किए गए ऊर्जा विभाग की सचिव अनूपमा जोरवाल के आदेश को आधार बनाकर कोटा थर्मल प्रशासन को आज आधी रात से पहली और दूसरी यूनिट को हमेशा के लिए बंद करने के आदेश जारी कर दिए। यूडीएच मंत्री के बयान और मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के आश्वासन के बावजूद कोटा थर्मल की दोनों इकाइयों को आधी रात से बंद करने के आदेश मिलते ही प्लांट में हड़कंप मच गया। जयपुर बैठे आला अफसरों को हालात बताए गए, लेकिन किसी ने भी कोई दखल देने से साफ इनकार कर दिया। कोटा थर्मल को बंद करवा कर निजी हाथों में बेचने की साजिश रच रहे जयपुर में बैठे ऊर्जा विभाग के अफसरों के आगे राजस्थान सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री की एक न चली। TIS Media ने न सिर्फ इस साजिश का खुलासा किया बल्कि, मुख्यमंत्री कार्यालय को भी उत्पादन निगम के अफसरों की हरकतों से अवगत कराया। जिसके बाद सीएमओ में जमकर बवाल मच गया।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/national/labor-minister-santosh-gangwar-said-that-the-new-labor-code-will-be-implemented-soon/9558/">बड़ी खबर: सप्ताह में सिर्फ 40 घंटे करना होगा काम, देश में जल्द लागू होंगे नए श्रम कानून</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>तलब किए अफसर, जारी हुआ आदेश  </strong></span><br />
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंजूरी के बावजूद भी कोटा थर्मल की दोनों इकाइयों को बंद करने के आदेश रद्द नहीं किए गए तो मुख्यमंत्री कार्यालय ने राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के अफसरों की जमकर फटकार लगाई। शुक्रवार तड़के उत्पादन निगम के अफसरों को सीएमओ तलब किया गया और उसके बाद आनन-फानन में चिट्ठी तैयार कर ऊर्जा विकास निगम को भिजवाई गई। TIS Media पूरे दिन चल रही हर एक गतिविधि पर नजर रखे हुए था और मुख्यमंत्री कार्यालय को उनके बारे में जानकारी दे रहा था। आखिरकार, जब राजधानी में बैठे आला अफसरों की समझ में आ गया कि उनकी साजिशें इस बार कामियाब नहीं होगी तब जाकर शुक्रवार शाम को ऊर्जा विकास निगम ने लोड डिस्पेच सेंटर को कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाई के साल 2023 तक चालू रखने और बिजली खरीदने के आदेश जारी कर दिए।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>आखिरकार बचा लाए कोटा थर्मल </strong></span><br />
गुरुवार से ही TIS Media ने कोटा थर्मल को बंद करने की साजिशों को बेनकाब करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। जिसके बाद आखिरकार ऊर्जा विभाग को अपना पुराना आदेश वापस लेकर थर्मल की दोनों इकाइयों को साल 2023 तक चालू रखने का नया आदेश जारी करना पड़ा। ऊर्जा विकास निगम का आदेश शुक्रवार देर शाम कोटा थर्मल भी पहुंच गया। वहीं लोड डिस्पेच सेंटर ने भी बदला हुआ आदेश मिलने के बाद कोटा थर्मल की पहली और दूसरी यूनिट को एक्टिव दिखाना शुरू कर दिया है। जिसके बाद कोटा थर्मल की इन इकाइयों में बिजली का उत्पादन होने और फिर लोड डिस्पेच सेंटर के खरीदे जाने का रास्ता साफ हो गया है। जबकि, राजधानी में बैठे अफसरों की साजिश के चलते बुधवार आधी रात को अपनी पूरी क्षमता से चल रही दोनों यूनिटों को बंद कर दिया गया था। जिन्हें दोबारा चलाने पर कोटा थर्मल को फिर से लाखों रुपए खर्च करने पड़ेंगे।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/tis_impact-conspiracy-to-shut-down-kota-thermal-failed-order-to-run-units-issued/9557/">#TIS_Impact नाकाम हुई कोटा थर्मल को बंद करने की साजिश, जारी हुआ यूनिटें चलाने का आदेश</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>#KotaThermal धारीवाल पर भारी पड़ा लोड डिस्पेच सेंटर, आधी रात से बंद हो जाएंगी यूनिट 1 और 2</title>
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		<pubDate>Wed, 30 Jun 2021 16:05:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota राजस्थान सरकार की धड़ेबाजी कोटा थर्मल पर खासी भारी पड़ती नजर आ रही है। आलम यह है कि सूबे की सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री शांति धारीवाल पर प्रसारण निगम का लोड डिस्पेच सेंटर (एलडी) भारी पड़ गया। नतीजन, धारीवाल के बयान के बावजूद एलडी ने 30 जून की आधी रात से कोटा थर्मल की &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/energy-department-denies-udh-minister-orders-two-units-of-kota-thermal-will-be-closed-tonight/9532/">#KotaThermal धारीवाल पर भारी पड़ा लोड डिस्पेच सेंटर, आधी रात से बंद हो जाएंगी यूनिट 1 और 2</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> राजस्थान सरकार की धड़ेबाजी कोटा थर्मल पर खासी भारी पड़ती नजर आ रही है। आलम यह है कि सूबे की सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री शांति धारीवाल पर प्रसारण निगम का लोड डिस्पेच सेंटर (एलडी) भारी पड़ गया। नतीजन, धारीवाल के बयान के बावजूद एलडी ने 30 जून की आधी रात से कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाइयों को बंद करने के आदेश थर्मल प्रशासन को जारी कर दिए हैं। जिससे थर्मल कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।</p>
<p>ऊर्जा विभाग की संयुक्त सचिव अनूपमा जोरवाल ने 17 जून को राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के एमडी एवं चेयरमेन को लिखित आदेश जारी किया था कि कोटा थर्मल की पहली और दूसरी यूनिट को 30 जून की आधी रात से हमेशा के लिए बंद कर दिया जाए। आदेश की जानकारी लगते ही #TISMedia ने 24 जून को &#8220;<a href="https://tismedia.in/kota-news/politics/kota-thermals-first-and-second-power-generation-units-will-be-closed-forever-from-june-30/9341/">#TISExclusive जेके और आईएल की तरह मिटने लगा कोटा थर्मल वजूद, हमेशा के लिए बंद हुईं दो यूनिटें</a>&#8221; खबर प्रकाशित कर कोटा थर्मल को बंद करने की उच्च स्तरीय साजिश का खुलासा किया था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TIS Media के खुलासे के बाद मचा हड़कंप </strong></span><br />
वसुंधरा सरकार के बाद गहलोत सरकार में भी कोटा थर्मल को बंद करने की उच्च स्तरीय साजिश का खुलासा होते ही सूबे में हड़कंप मच गया था। कोटा थर्मल के कर्मचारियों से लेकर आला अधिकारियों तक ने विद्युत उत्पादन निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को हालात से अवगत कराया। TIS Media की खबर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला तक पहुंची तो हर कोई भौंचक रह गया।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/tismedia-impact-now-the-first-and-second-units-of-kota-thermal-will-not-be-closed-in-kota/9485/">#TIS_Impact: अब नहीं होगी कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाई बंद, मंत्री धारीवाल ने दिया वीडियो बयान</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>इन्वायरमेंट क्लीयरेंस को नकारा</strong></span><br />
कोटा थर्मल से लेकर उत्पादन निगम और सरकार में बैठे मंत्रियों तक की समझ में नहीं आया कि कोटा थर्मल को 2023 तक इन्वायरमेंट क्लीयरेंस मिलने के बाद भी आखिर पहली और दूसरी इकाई को बंद करने के आदेश कैसे जारी हो गई। खुलासे के बाद मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के दफ्तरों से कोटा थर्मल को बचाने वाले अफसरों को फोन घनघनाए गए और जब असल हालात पता चले तो हर कोई कोटा थर्मल की दो इकाइयों को बंद करने के फैसले की जिम्मेदारी लेने से भागने लगा।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>धारीवाल ने दिया दखल </strong></span><br />
तीन दिन बाद कोटा के विधायक और राजस्थान सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री शांति धारीवाल ने भी सियासी नुकसान होता देख मामले में दखल दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से बात कर कोटा थर्मल की दोनों इकाइयों का संचालन चालू रखने की अपील की। जिस इन्वायरमेंट क्लीयरेंस की आड़ में कोटा थर्मल को बंद करने की साजिश रची जा रही थी, उसी को आधार बनाते हुए मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री ने धारीवाल को आश्वासन दिया कि जब तक इन्वायरमेंट क्लीयरेंस है तब तक कोटा थर्मल की किसी भी इकाई को बंद नहीं किया जाएगा। पूरी तरह से मुतमईन होने के बाद नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने 28 जून को वीडियो जारी कर बयान दिया कि कोटा थर्मल की सभी इकाइयां पहले की तरह ही संचालित होती रहेंगी। इसके साथ ही पहली और दूसरी इकाई को बंद करने के आदेश भी सरकार ने वापस ले लिए हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>तो धारीवाल की नहीं चली!</strong></span><br />
यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के कोटा थर्मल को बचाने का बयान जारी करने के 48 घंटे बाद ही राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम के लोड डिस्पेच सेंटर ने 17 जून को जारी किए गए ऊर्जा विभाग की सचिव अनूपमा जोरवाल के आदेश को आधार बनाकर कोटा थर्मल प्रशासन को आज आधी रात से पहली और दूसरी यूनिट को हमेशा के लिए बंद करने के आदेश जारी कर दिए। यूडीएच मंत्री के बयान और मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के आश्वासन के बावजूद कोटा थर्मल की दोनों इकाइयों को आधी रात से बंद करने के आदेश मिलते ही प्लांट में हड़कंप मच गया। जयपुर बैठे आला अफसरों को हालात बताए गए, लेकिन किसी ने भी कोई दखल देने से साफ इन्कार कर दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोटा थर्मल को बंद करवा कर निजी हाथों में बेचने की साजिश रच रहे जयपुर में बैठे ऊर्जा विभाग के अफसरों के आगे राजस्थान सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री की एक न चली।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>क्यों नहीं जारी हुआ आदेश </strong></span><br />
कोटा थर्मल के आला अधिकारी बताते हैं कि यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के आश्वासन के बाद ऊर्जा विभाग को अपना पुराना आदेश वापस लेकर थर्मल की दोनों इकाइयों को साल 2023 तक चालू रखने का नया आदेश जारी करना था, लेकिन उच्च स्तर पर मामला उठने के बावजूद इस बाबत कोई आदेश जारी नहीं हुआ। जिसकी वजह से लोड डिस्पेच सेंटर ने पुराने आदेश को आधार बनाकर 30 जून की रात 12 बजे से थर्मल की पहली और दूसरी इकाई को बंद करने के आदेश जारी कर दिए। कोटा थर्मल के आला अफसर कहते हैं कि जब तक दोनों यूनिटों को चालू करने के नए आदेश नहीं आएंगे तब तक वह इन्हें बंद करने के लिए बाध्य हैं। जबकि, बुधवार को खबर लिखे जाने तक कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाई अपनी पूरी क्षमता के साथ विद्युत उत्पादन कर रही थीं। 110-110 मेगावाट क्षमता की दोनों यूनिटें 95 और 98 मेगावाट विद्युत उत्पादन कर रही थी। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि धारीवाल के दखल के बावजूद आखिर कोटा थर्मल को पहले की तरह चालू रखने का आदेश ऊर्जा विभाग ने जारी क्यों नहीं किया?</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/energy-department-denies-udh-minister-orders-two-units-of-kota-thermal-will-be-closed-tonight/9532/">#KotaThermal धारीवाल पर भारी पड़ा लोड डिस्पेच सेंटर, आधी रात से बंद हो जाएंगी यूनिट 1 और 2</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>#TIS_Campaign कोटा थर्मल को बेचने की थी साजिश, कहीं गहलोत भी तो नहीं हुए &#8220;शिकार&#8221;</title>
		<link>https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/tis_campaign-there-was-a-conspiracy-to-sell-kota-thermal-in-the-bjp-government/9430/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=tis_campaign-there-was-a-conspiracy-to-sell-kota-thermal-in-the-bjp-government</link>
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		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jun 2021 10:48:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने साल 2018 में राजस्थान के तीन थर्मल पॉवर प्लांटों को निजी कंपनियों को बेचने की अंदरखाने पूरी तैयारी कर ली थी। भाजपा सरकार ने तीनों थर्मल पॉवर प्लाटों की परिचालन कार्य क्षमता निरंतर घटने और खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देकर कोटा थर्मल (Kota Super Thermal Power Station) के साथ &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/tis_campaign-there-was-a-conspiracy-to-sell-kota-thermal-in-the-bjp-government/9430/">#TIS_Campaign कोटा थर्मल को बेचने की थी साजिश, कहीं गहलोत भी तो नहीं हुए &#8220;शिकार&#8221;</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota.</strong></span> पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने साल 2018 में राजस्थान के तीन थर्मल पॉवर प्लांटों को निजी कंपनियों को बेचने की अंदरखाने पूरी तैयारी कर ली थी। भाजपा सरकार ने तीनों थर्मल पॉवर प्लाटों की परिचालन कार्य क्षमता निरंतर घटने और खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देकर कोटा थर्मल (Kota Super Thermal Power Station) के साथ साथ छबड़ा और कालीसिंध तापीय विद्युत गृह ( Chhabra And Kalisindh power plants ) को निजी हाथों में बेचने की योजना बनाई थी।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/acb-kota-arrested-sangod-police-constable-red-handed-taking-a-bribe-of-11-thousand-rupees/9420/">KOTA ACB का खौफ: थाना लावारिश छोड़ नंगे पैर भागा सीआई, रीडर का साला भी सरपट दौड़ा</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>बेचने से पहले बंद करने थे प्लांट</strong></span><br />
कोटा थर्मल सहित तीनों थर्मल पॉवर प्लाटों को बेचने से पहले वसुंधरा राजे की भाजपा सरकार ने पहले इन्हें बंद करने की योजना बनाई। इसके लिए कोटा थर्मल की सभी इकाइयों को ज्यादा से ज्यादा बंद रखा जाने लगा और प्लांट को घाटे में धकेलने की कोशिशें तेज हो गईं। इतना ही नहीं योजना को अंजाम तक पहुंचाने के लिए वसुंधरा सरकार ने 18 जून 2018 को एक आदेश जारी कर सहायक अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता तक तकनीकी अधिकारियों के 151 और अधीनस्थ तकनीकी कर्मचारियों के 94 पद खत्म कर दिए। वसुंधरा सरकार ने यह योजना इतनी गोपनीय ढ़ंग से बनाई थी कि ऊर्जा विभाग तो छोड़िए थर्मल के कर्मचारियों और अधिकारियों तक को इसकी भनक तक न लगी। हालांकि, भाजपा सरकार इस योजना को अंजाम तक पहुंचाती इससे पहले ही चुनाव सिर पर आ गए और सरकार के खास अफसरों को यह फाइल डंप करनी पड़ी।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/rajasthan/rajasthan-acb-arrested-rajasthan-labor-commissioner-for-taking-bribe-of-3-lakhs-in-jaipur/9415/">एसीबी का डबल धमाका: लेबर कमिश्नर 3 लाख रुपए की रिश्वत लेते दबोचा, दो दलाल भी गिरफ्तार</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>गहलोत सरकार को भी रखा अंधेरे में</strong></span><br />
वसुंधरा राजे के सत्ता से बाहर होने के बावजूद ऊर्जा विभाग में बैठे उनके खास अफसरों ने अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनते ही भाजपा सरकार की योजना को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिशें तेज कर दी। आलम यह था कि इन खास अफसरों ने गहलोत सरकार को इसकी भनक तक नहीं लगने दी, लेकिन कांग्रेस की सरकार ( Congress government ) बनने के बाद भी ऊर्जा विभाग ने खत्म हुए पदों के आधार पर कार्मिकों के तबादले शुरू कर दिए, तब जाकर मामले का खुलासा हुआ। 21 जून 2019 को जब पत्रकार विनीत सिंह ने इस मामले को प्रमुखता से उजागर किया तब कोटा से लेकर जयपुर तक हड़कंप मच गया। तीन थर्मल पॉवर प्लांट बंद करने की साजिश का खुलासा होते ही ऊर्जा संयंत्रों के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। यह हड़ताल करीब 20 दिन चली।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-rail-division-collected-15-lakh-44-thousand-rupees-fine-from-2023-passengers-travelling-without-ticket/9412/">DRM कोटा की बड़ी कार्रवाई: एक ही दिन में वसूला 15 लाख से ज्यादा का रिकॉर्ड जुर्माना</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">गहलोत ने पलट दिया था फैसला</span></strong><br />
राजस्थान के तीन थर्मल पॉवर प्लांटों को बंद करने की साजिश की खबर जब नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( Cm Ashok Gehlot ) को लगी तो उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल एवं मंत्रिपरिषद की बैठक ( cabinet meeting ) में कोटा थर्मल, छबड़ा और कालीसिंध तापीय विद्युत गृह की परिचालन कार्य क्षमता और वित्तीय स्थिति की समीक्षा की। जिसमें उल्लेखनीय सुधार होने के कारण राज्य कैबिनेट ने इन पॉवर स्टेशनों का विनिवेश ( disinvestment ) नहीं किए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया। इसके साथ ही तकनीकी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के 245 पद खत्म करने के वसुंधरा सरकार के फैसले पर भी रोक लगा दी। लेकिन, इस बार कोटा थर्मल की दो इकाइयों को बंद करने का आदेश जारी होने के बाद थर्मल कर्मचारी आशंका जता रहे हैं कि कहीं थर्मल पॉवर प्लाटों के निजीकरण की कोशिश में जुटी लॉबी ने गहलोत को भी गुमराह तो नहीं कर दिया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong><span style="color: #000000;">READ MORE:</span> <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/india/contribution-of-indian-legend-journalists-gyan-sagar-verma-and-viren-dangwal-in-emergency/9398/"> देश का इकलौता पत्रकार जिसने इंटेलीजेंस की आंखों में धूल झोंककर छापी थी सरकार के खिलाफ खबर</a></span></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सरकारी प्लांटों का विनिवेश आत्मघाती</strong></span><br />
उल्लेखनीय है कि भारतीय लेखा व महानिरीक्षक (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट में राज्य विद्युत उत्पादन निगम के सभी पॉवर प्लांटों का विनिवेश करना आत्मघाती कदम बताया था। 17 फरवरी,2017 को उर्जा विभाग के प्रमुख शासन सचिव को दी गई ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य सरकार व आरवीयूएनएल अपने संयंत्रों से सस्ती बिजली की उपलब्धता को देखते हुए उनके ऑपरेशन सिस्टम को पुनगर्ठित व मजबूत करे। अर्नेस्ट एवं यंग कंपनी की सिफारिश पर राज्य सरकार व आरवीयूएनएल ने कालीसिंध एवं छबड़ा थर्मल में राज्य सरकार की इक्विटी को किसी सरकारी या निजी कंपनी में विनिवेश करने के लिये 23 फरवरी,2016 को भाजपा सरकार ने इसे स्वीकृति दे दी थी, जिस पर गहलोत सरकार ने अभी तक रोक लगा कर रखी थी।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/tis_campaign-there-was-a-conspiracy-to-sell-kota-thermal-in-the-bjp-government/9430/">#TIS_Campaign कोटा थर्मल को बेचने की थी साजिश, कहीं गहलोत भी तो नहीं हुए &#8220;शिकार&#8221;</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>#TISCampaign: कोटा थर्मल को बचाने के लिए कांग्रेसियों ने लगाई मुख्यमंत्री से गुहार</title>
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		<pubDate>Fri, 25 Jun 2021 14:26:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota. कोटा थर्मल की उम्रदराज इकाइयों को बंद करने का आदेश आते ही कोटा के लोग कांग्रेस के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं। हालात बिगड़ते देख कांग्रेस के दिग्गज नेता भी सरकार के इस फैसले के खिलाफ उठ खड़े हुए हैं। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के पूर्व महासचिव पंकज मेहता ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota.</strong></span> कोटा थर्मल की उम्रदराज इकाइयों को बंद करने का आदेश आते ही कोटा के लोग कांग्रेस के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं। हालात बिगड़ते देख कांग्रेस के दिग्गज नेता भी सरकार के इस फैसले के खिलाफ उठ खड़े हुए हैं। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के पूर्व महासचिव पंकज मेहता ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर कोटा के हालातों से अवगत कराते हुए, कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाई को बंद करने का फैसला वापस लिए जाने की मांग की है। मेहता ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि सरकार के इस फैसले से पार्टी को जमीनी स्तर पर खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p>उर्जा विभाग की संयुक्त सचिव अनुपमा जोरवाल ने 17 जून 2021 को विद्युत उत्पादन निगम के सीएमडी को कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाई को 30 जून 2021 तक चरणबद्ध ढ़ंग से बंद करने के आदेश दिए तो सभी का माथा ठनका। साल 2019 में भी कोटा थर्मल को बचाने के लिए आगे आए राजस्थान कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव पंकज मेहता ने एक बार फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर वास्तविक स्थिति से अवगत कराया है।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-thermals-first-and-second-power-generation-units-will-be-closed-forever-from-june-30/9341/">#TISExclusive जेके और आईएल की तरह मिटने लगा कोटा थर्मल वजूद, हमेशा के लिए बंद हुईं दो यूनिटें</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>2023 तक मंजूरी फिर बंदी की जल्दी क्यों</strong></span><br />
पंकज मेहता ने मुख्यमंत्री को बताया कि कांग्रेस की कोशिशों के बाद ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा कोटा थर्मल में प्रदूषण निवारण मानकों की अनुपालना सुनिश्चित करने पर 6 नवंबर 2020 में वर्ष 2023 तक सभी इकाइयों को संचालित करने के लिये पर्यावरणीय सहमति प्रदान कर दी थी। जिसके बाद कोटा थर्मल के अभियंताओं कार्मिकों व श्रमिकों को विश्वास हो चुका था कि कांग्रेस सरकार कोटा थर्मल को बंद नहीं होने देगी, लेकिन अचानक दो यूनिटों के बंद करने का आदेश जारी होने के बाद अभियंताओं, कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों सहित शहरवासियों एवं व्यापारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/virendra-atal-was-brutally-tortured-by-the-police-during-the-emergency/9382/">आपातकाल, यातनाएं और अटल: पुलिस ने प्लास से खींच लिए थे सारे नाखून, हिल गई थी पूरी दुनिया</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कांग्रेस को उठाना पड़ेगा नुकसान </strong></span><br />
पंकज मेहता ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को साफ-साफ लिखा है कि कोटा थर्मल की दो यूनिटों को बंद करने के फैसले से कांग्रेस पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिये आपके नेतृत्व में तत्काल उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर इस पर पुनर्विचार किया जाये। दोनों पुरानी इकाइयां आज भी पूरी क्षमता के साथ विद्युत उत्पादन कर रही हैं और पर्यावरण मानकों को लेकर उठी आपत्तियों का भी निस्तारण कर लिया गया है। ऐसे में इन्हें बंद करने के बजाय स्टेंडबाई मोड पर रखा जाए क्योंकि जब नार्दन ग्रिड फेल हुई थी तब इन्हीं दोनों यूनिटों ने पूरे उत्तर भारत में बिजली सप्लाई कर उसे अंधेरे से बाहर निकाला था।</p>
<p><strong>Read More:<a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/kota-police-arrested-three-accused-who-cheated-the-youth-in-the-name-of-marriage/9358/"> मैं कुवांरा हूं, मुझे शादी करनी है&#8230; सुनते ही दोस्त ने अपनी पत्नी से डलवाए फेरे और फिर&#8230; मचा बवाल</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सैकड़ों लोग हो जाएंगे बेरोजगार </strong></span><br />
पंकज मेहता ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि कोटा सुपर थर्मल परिसर के 426 हेक्टेयर क्षेत्रफल में विशाल एश डाइक एरिया है। इस रिक्त भूमि पर प्रदेश में प्रस्तावित 810 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र में से 300 मेगवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र खोलने की घोषणा की जाये। जिससे कोटा शहर में रोजगार के नये अवसर मिलेंगे। इसके लिये धर्मल प्लांट परिसर में सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। कोटा की गर्म जलवायु भी सौर ऊर्जा संयंत्र के अनुकूल है। कोटा में ही नया सौर उर्जा प्लांट स्थापित होने पर धर्मल की पुरानी ईकाइयों में कार्यरत अभियंताओं तकनीकी कर्मचारियों तथा ठेका श्रमिकों को बेरोजगार का सामना नहीं करना पड़ेगा। मेहता ने अपने पत्र में लिखा है कि &#8220;कोरोना महामारी से प्रत्येक परिवार आर्थिक संकट में है फुटकर व्यापार व्यवसाय रूप हो गये हैं. प्रत्येक क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ रही है। ऐसे समय नये उद्योग लगाने की जगह पुराने चालू उदयोग को बंद करने का निर्णय जनहित में उचित नहीं होगा।&#8221;</p>
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		<title>#TISExclusive जेके और आईएल की तरह मिटने लगा कोटा थर्मल वजूद, हमेशा के लिए बंद हुईं दो यूनिटें</title>
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		<pubDate>Thu, 24 Jun 2021 17:56:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@कोटा. गहलोत सरकार ने आखिरकार औद्योगिक नगरी की तबाही का आखिरी अध्याय लिख ही डाला। कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट (KSTPS) के अफसरों की जी तोड़ कोशिशों से इन्वायरमेंट क्लीयरेंस मिलने के बावजूद सूबे की सरकार ने कोटा थर्मल की दो इकाइयों को हमेशा के लिए बंद करने का आदेश जारी कर दिया। जिससे न सिर्फ &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/kota-thermals-first-and-second-power-generation-units-will-be-closed-forever-from-june-30/9341/">#TISExclusive जेके और आईएल की तरह मिटने लगा कोटा थर्मल वजूद, हमेशा के लिए बंद हुईं दो यूनिटें</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@कोटा. </strong></span>गहलोत सरकार ने आखिरकार औद्योगिक नगरी की तबाही का आखिरी अध्याय लिख ही डाला। कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट (KSTPS) के अफसरों की जी तोड़ कोशिशों से इन्वायरमेंट क्लीयरेंस मिलने के बावजूद सूबे की सरकार ने कोटा थर्मल की दो इकाइयों को हमेशा के लिए बंद करने का आदेश जारी कर दिया। जिससे न सिर्फ थर्मल कर्मचारी, बल्कि शहर के लोग भी खासे आक्रोशित हो उठे हैं।</p>
<p>17 जनवरी 1983&#8230; राजस्थान के इतिहास में यह तारीख हमेशा सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगी, यही वह दिन था जब 143 करोड़ रुपए की लागत से सूबे में कोयले से बिजली बनाने की पहली इकाई की कोटा में स्थापना की गई थी। ठीक छह महीने बाद कोटा थर्मल पॉवर प्लांट की दूसरी इकाई ने भी पूरे दमखम के साथ बिजली बनाना शुरू कर दिया। 110-110 मेगावाट की यह दोनों इकाइयां 37 सालों बाद भी पूरे दमखम से बिजली बना रही है। इस दौरान तमाम सरकारें आई और गईं, लेकिन किसी ने भी इन बूढ़ी चिमनियों की सुध नहीं ली। कोटा के सियासतदारों को भी कभी होश नहीं आया कि कुछ ही दूरी पर छबड़ा जैसे थर्मल पॉवर प्लांट अपग्रेड कर दिए गए, लेकिन कोटा के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार के खिलाफ कभी आवाज उठा सकते। नतीजन, बिना मरम्मत और तकनीकी सहारे के यह इकाइयां पुराने ही ढर्रे पर दौड़ती रहीं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>साल 2015 में फंसा था पेंच</strong></span><br />
कोटा थर्मल की 1240 मेगावाट क्षमता की सात इकाइयों के संचालन के लिए थर्मल प्रबंधन ने 27 फरवरी 2015 को आरएसपीसीबी से संचालन सहमति मांगी थी। आवेदन का निस्तारण करने के लिए स्थलीय निरीक्षण करने कोटा थर्मल पहुंचे पर्यावरण अभियंताओं को यहां वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन होते हुए मिला था। इसके बाद बोर्ड ने 21 बड़ी खामियां चिन्हित कर उन्हें सुधारने के लिए थर्मल प्रबंधन को नोटिस दिया था, लेकिन अधिकांश आपत्तियों का चार साल तक निस्तारण नहीं हो सका।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">कैग ने दिए थे प्लांट बंद करने के आदेश  </span>  </strong><br />
इसी दौरान कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग) ने भी कोटा थर्मल का पॉल्यूशन ऑडिट किया तो कोल यार्ड और कोल क्रेशर पर स्थापित वायु प्रदूषण नियंत्रण मशीन बंद मिली। कोयले के धुएं के साथ राख के कण चिमनियों से बाहर निकलने से रोकने के लिए लगाई गए संयंत्र बंद पड़े थे। इलेक्ट्रोस्टेटिक प्रीसीपीटेटर्स (ईएसपी) तो लगा था, लेकिन कई फील्ड्स नियमित तौर पर आउट ऑफ चार्ज थे। इसके साथ ही प्लांट का प्रदूषित पानी साफ किए बगैर चम्बल नदी और फ्लाईएश पांड की तरफ फेंका जा रहा था। तमाम कोशिशों के बावजूद भी जब इन ऑडिट आपत्तियों का निस्तारण नहीं हुआ तो कैग ने कोटा थर्मल का संचालन अवैध घोषित कर प्लांट को पर्यावरण सहमति मिलने तक बंद करने की सिफारिश कर दी।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">आरएसपीसीबी की गिरी गाज</span>  </strong><br />
इसके बाद जून 2018 में आरएसपीसीबी ने दंडात्मक कार्रवाई करते हुए सातवीं इकाई की संचालन सहमति रद्द करने के साथ ही 4.65 लाख रुपए का आवेदन शुल्क भी जब्त कर लिया था। इतना ही नहीं बाकी छह यूनिटों की संचालन सहमिति पेडिंग में डाल 14.07 लाख रुपए का आवेदन शुल्क भी डैफर कर दिया था। इस दौरान कोटा थर्मल में तैनात रहे अफसरों ने भी लापरवाही की हदें पार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट प्रबंधन ने तीन साल तक  खामियों को दुरुस्त करने की बजाय वायु प्रदूषण की जांच के लिए लगाए गए ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम को ही खराब कर दिया। नतीजतन, थर्मल की चिमनियों के जहरीला धुआं उगलने पर भी हालात सामान्य दिखाई देते रहे, लेकिन राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जब मैनुअल मॉनीटरिंग की तो पूरी पोल खुल गई। जांच में खुलासा हुआ कि पर्यावरण सहमति हासिल करने के लिए थर्मल प्रबंधन वायु प्रदूषण की ऑनलाइन मॉनीटरिंग तक को छेडऩे से बाज नहीं आया। चिमनियां जमकर धुआं और राख बाहर फेंक रही थी, बावजूद इसके ऑनलाइन पॉल्यूशन मॉनीटरिंग में प्रदूषण का स्तर सामान्य से भी कम आ रहा था। आरएसपीसी के कोटा क्षेत्रीय कार्यालय ने जब प्रदूषण की मैनुअल जांच की तो खतरनाक स्तर पर मिला। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि केएसटीपीएस के इंजीनियरों ने ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम को ही खराब कर दिया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>दावों तक ही सिमटे रहे अफसर</strong></span><br />
थर्मल की खामियां दूर करने के लिए अफसरों ने हर बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आश्वासन दिया, लेकिन जब भी एक्शन प्लान मांगा गया, अधिकारी पीछे हट गए। तीन साल में तीन बार प्रदूषण नियंत्रण संयत्रों को चालू करने का दावा किया गया, लेकिन तीनों बार स्थलीय जांच में झूठ साबित हुआ। पांच साल पहले हुई जांच के दौरान आरएसपीसीबी को जो स्थिति मिली, वही हर बार के सत्यापन में सामने आई। इसके लिए कैग ने थर्मल की बदहाली के लिए आला अफसरों को जिम्मेदार माना और जमकर फटकार भी लगाई थी। बावजूद इसके उन पर कोई असर नहीं पड़ा।<b> </b>जांच में खुलासा हुआ कि थर्मल प्रबंधन ने सीवेज और औद्योगिक कचरे के निस्तारण के लिए कोई इंतजाम नहीं किए। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के निर्देश दिए गए, लेकिन प्रबंधन ने इसका जवाब तक नहीं दिया। थर्मल परिसर में फ्लाईएश और कोयले की वजह से होने वाले प्रदूषण को रोकने का भी कोई इंतजाम नहीं किया गया। कोयले की बारीक राख को उड़ने से रोकने के लिए प्लो फीडर के ऊपर पानी का छिड़काव करने के लिए वाटर नोजल तक पिछले एक दशक से बंद पड़े थे।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>साल 2022 तक बंद करने की थी तैयारी</strong></span><br />
अफसरों की लापरवाही और पर्यावरण नियमों की सख्ती के चलते सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ने साल 2019 के नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान में इन यूनिटों को बंद करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया। अथॉरिटी पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी यूनिट को साल 2022 तक बंद करने की तैयारी में जुटा था, लेकिन इसी बीच सितंबर 2019 में कोटा थर्मल की कमान बतौर मुख्य अभियंता अजय सक्सेना के हाथ आ गई। उन्होंने अपने कार्यकाल में प्लांट को बंद होता देखने के बजाय थर्मल की खामियों को दूर करने की ठान ली।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>साल भर की मेहनत लाई रंग</strong></span><br />
तत्कालीन मुख्य अभियंता अजय सक्सेना ने कोटा थर्मल को बचाने के लिए त्रिस्तरीय योजना तैयार की। उन्होंने एक साल तक कड़ी मेहनत और संघर्ष कर सबसे पहले कैग और आरएसपीसीबी की ओर से बताई 21 खामियों को दुरुस्त करने का काम किया। इसके बाद दूसरे चरण में कूलिंग प्लांट, फ्लूड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, एसटीपी लगाने और ईएसपी को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया। तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण में मुख्य अभियंता ने कैग से लेकर लोक लेखा समित और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आला अफसरों को भरोसा दिलाने में कामियाबी हासिल की कि पर्यावरण नियमों की पालना करने के लिए बड़ी लागत वाले प्रोजेक्ट चरण बद्ध तरीके से पूरे कर लिए जाएंगे। इसके लिए बकायदा समयबद्ध प्लान भी इनके समक्ष रखा गया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>पांच साल बाद मिला था जीवनदान </strong></span><br />
कोटा थर्मल के पूर्व मुख्य अभियंता अजय सक्सेना की एक साल की कोशिशों के बाद जब प्रदूषण निवारण मानकों की पूरी पालना सुनिश्चित हुई तो राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इससे पूरी तरह मुतमईन होने के बाद कोटा थर्मल को वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 के प्रावधानों के तहत साल 2023 तक के लिए संचालन सहमति जारी कर दी। 6 नवंबर 2020 को इन्वायरमेंट क्लीयरेंस और संचालन सहमति कोटा थर्मल को मिली तो लगा कि न सिर्फ कोटा थर्मल को नया जीवन मिला है, बल्कि प्रदेश के सबसे पुराने प्लांट में पर्यावरण संरक्षण के साथ पूरी क्षमता से विद्युत उत्पादन की मिसाल भी कायम हो गई।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>अंदरखाने जारी रही साजिशें </strong></span><br />
हालांकि इसके बाद भी कोटा थर्मल को बंद करने की साजिशें अंदरखाने पुरजोर तरीके से चलती रहीं। नतीजन, राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के दफ्तर में बैठे राजधानी के अफसरों ने बिजली उत्पादन में गाइडलाइन के उल्लंघन का दावा कर अप्रैल 2021 में कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाई को बंद करने का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेज दिया। राज्य सरकार ने भी यूनिटों के अपग्रेडेशन की संभावनाएं तलाशने या फिर इन दोनों इकाइयों के बदले 660 मेगावाट की हाईटेक इकाइयां लगाने की बजाय कोटा थर्मल की सबसे उम्रदराज इकाइयों को बंद करने के प्रस्ताव पर मंजूरी का ठप्पा लगा दिया। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने गुरुवार को कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाई को हमेशा के लिए बंद करने का न सिर्फ आदेश जारी कर दिया, बल्कि आईएल और जेके की तरह कोटा थर्मल का वजूद भी मिटाने की इबारत लिख डाली। आदेश के कोटा पहुंचते ही थर्मल कर्मचारियों में खासा रोष व्याप्त है। <span style="color: #ff0000;"><strong>आदेश के मुताबिक 30 जून 2021 से कोटा थर्मल की पहली और दूसरी इकाइयों को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा। </strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/kota-thermals-first-and-second-power-generation-units-will-be-closed-forever-from-june-30/9341/">#TISExclusive जेके और आईएल की तरह मिटने लगा कोटा थर्मल वजूद, हमेशा के लिए बंद हुईं दो यूनिटें</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>फिर जी उठा ‘कोटा थर्मल’, सातों यूनिटों को मिली इन्वायरमेंट क्लीयरेंस  </title>
		<link>https://tismedia.in/india/pollution-control-board-gives-environment-clearance-to-seven-units-of-kota-thermal-power-plant/2005/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=pollution-control-board-gives-environment-clearance-to-seven-units-of-kota-thermal-power-plant</link>
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		<pubDate>Fri, 06 Nov 2020 16:12:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आरएसपीसीबी की जांच में हुआ था पर्यावरण मानकों के उलंघन का खुलासा, कैग ने संचालन घोषित कर दिया था अवैध सीई अजय सक्सेना की मेहनत लाई रंग, एक साल में 21 बड़ी खामियां की दुरुस्त, 2023 तक मिली संचालन सहमति कोटा. कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट (KSTPS) एक बार फिर जी उठा। पांच साल तक &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>आरएसपीसीबी की जांच में हुआ था पर्यावरण मानकों के उलंघन का खुलासा, कैग ने संचालन घोषित कर दिया था अवैध</strong></li>
<li><strong>सीई अजय सक्सेना की मेहनत लाई रंग, एक साल में 21 बड़ी खामियां की दुरुस्त, 2023 तक मिली संचालन सहमति</strong></li>
</ul>
<p><strong>कोटा.</strong> <strong>कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट</strong> (<strong>KSTPS</strong>) एक बार फिर जी उठा। पांच साल तक पर्यावरण मानकों के भंवर में उलझे पावर प्लांट को आखिरकार <strong>राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</strong> (<strong>RSPCB</strong>) ने संचालन सहमति जारी कर जीवनदान दे दिया। इन सालों में थर्मल प्रबंधन की कमान चार मुख्य अभियंताओं के हाथों में रही, लेकिन तीन ने कोटा थर्मल को बचाने की बजाय हाथ ही खड़े कर दिए। जबकि अजय सक्सेना ने प्लांट की कमान संभालने के महज एक साल के भीतर न सिर्फ 21 प्रमुख खामियों को दुरुस्त किया, बल्कि कैग और लोक लेखा समिति को रजामंद कर आरएसपीसीबी से साल 2023 तक के लिए इन्वायरमेंट क्लीयरेंस भी हासिल कर ली।</p>
<p><strong>साल 2015 में फंसा था पेंच</strong></p>
<p>कोटा थर्मल की 1240 मेगावाट क्षमता की सात इकाइयों के संचालन के लिए थर्मल प्रबंधन ने 27 फरवरी 2015 को आरएसपीसीबी से संचालन सहमति मांगी थी। आवेदन का निस्तारण करने के लिए स्थलीय निरीक्षण करने कोटा थर्मल पहुंचे पर्यावरण अभियंताओं को यहां वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन होते हुए मिला था। इसके बाद बोर्ड ने 21 बड़ी खामियां चिन्हित कर उन्हें सुधारने के लिए थर्मल प्रबंधन को नोटिस दिया था, लेकिन अधिकांश आपत्तियों का चार साल तक निस्तारण नहीं हो सका।</p>
<p><strong>कैग ने दिए थे प्लांट बंद करने के आदेश    </strong></p>
<p>इसी दौरान कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग) ने भी कोटा थर्मल का पॉल्यूशन ऑडिट किया तो कोल यार्ड और कोल क्रेशर पर स्थापित वायु प्रदूषण नियंत्रण मशीन बंद मिली। कोयले के धुएं के साथ राख के कण चिमनियों से बाहर निकलने से रोकने के लिए लगाई गए संयंत्र बंद पड़े थे। इलेक्ट्रोस्टेटिक प्रीसीपीटेटर्स (ईएसपी) तो लगा था, लेकिन कई फील्ड्स नियमित तौर पर आउट ऑफ चार्ज थे। इसके साथ ही प्लांट का प्रदूषित पानी साफ किए बगैर चम्बल नदी और फ्लाईएश पांड की तरफ फेंका जा रहा था। तमाम कोशिशों के बावजूद भी जब इन ऑडिट आपत्तियों का निस्तारण नहीं हुआ तो कैग ने कोटा थर्मल का संचालन अवैध घोषित कर प्लांट को पर्यावरण सहमति मिलने तक बंद करने की सिफारिश कर दी।</p>
<p><strong>आरएसपीसीबी की गिरी गाज  </strong></p>
<p>इसके बाद जून 2018 में आरएसपीसीबी ने दंडात्मक कार्रवाई करते हुए सातवीं इकाई की संचालन सहमति रद्द करने के साथ ही 4.65 लाख रुपए का आवेदन शुल्क भी जब्त कर लिया था। इतना ही नहीं बाकी छह यूनिटों की संचालन सहमिति पेडिंग में डाल 14.07 लाख रुपए का आवेदन शुल्क भी डैफर कर दिया था।</p>
<p><strong>पीसीबी की आंखों में झोंकी धूल</strong></p>
<p>कोटावासियों की सांसों में जहर घोल रहे कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट प्रबंधन ने तीन साल तक  खामियों को दुरुस्त करने की बजाय वायु प्रदूषण की जांच के लिए लगाए गए ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम को ही खराब कर दिया। नतीजतन, थर्मल की चिमनियों के जहरीला धुआं उगलने पर भी हालात सामान्य दिखाई देते रहे, लेकिन राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जब मैनुअल मॉनीटरिंग की तो पूरी पोल खुल गई। जांच में खुलासा हुआ कि पर्यावरण सहमति हासिल करने के लिए थर्मल प्रबंधन वायु प्रदूषण की ऑनलाइन मॉनीटरिंग तक को छेडऩे से बाज नहीं आया। चिमनियां जमकर धुआं और राख बाहर फेंक रही थी, बावजूद इसके ऑनलाइन पॉल्यूशन मॉनीटरिंग में प्रदूषण का स्तर सामान्य से भी कम आ रहा था। आरएसपीसी के कोटा क्षेत्रीय कार्यालय ने जब प्रदूषण की मैनुअल जांच की तो खतरनाक स्तर पर मिला। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि केएसटीपीएस के इंजीनियरों ने ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम को ही खराब कर दिया।</p>
<p><strong>दावों तक ही सिमटे रहे अफसर</strong></p>
<p>थर्मल की खामियां दूर करने के लिए अफसरों ने हर बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आश्वासन दिया, लेकिन जब भी एक्शन प्लान मांगा गया, अधिकारी पीछे हट गए। तीन साल में तीन बार प्रदूषण नियंत्रण संयत्रों को चालू करने का दावा किया गया, लेकिन तीनों बार स्थलीय जांच में झूठ साबित हुआ। पांच साल पहले हुई जांच के दौरान आरएसपीसीबी को जो स्थिति मिली, वही हर बार के सत्यापन में सामने आई। इसके लिए कैग ने थर्मल की बदहाली के लिए आला अफसरों को जिम्मेदार माना और जमकर फटकार भी लगाई थी। बावजूद इसके उन पर कोई असर नहीं पड़ा।</p>
<p><strong>हालात थे बेहद गंभीर</strong></p>
<p>जांच में खुलासा हुआ कि थर्मल प्रबंधन ने सीवेज और औद्योगिक कचरे के निस्तारण के लिए कोई इंतजाम नहीं किए। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के निर्देश दिए गए, लेकिन प्रबंधन ने इसका जवाब तक नहीं दिया। थर्मल परिसर में फ्लाईएश और कोयले की वजह से होने वाले प्रदूषण को रोकने का भी कोई इंतजाम नहीं किया गया। कोयले की बारीक राख को उड़ने से रोकने के लिए प्लो फीडर के ऊपर पानी का छिड़काव करने के लिए वाटर नोजल तक पिछले एक दशक से बंद पड़े थे।</p>
<p><strong>साल 2022 तक बंद करने की थी तैयारी</strong></p>
<p>अफसरों की लापरवाही और पर्यावरण नियमों की सख्ती के चलते सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ने साल 2019 के नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान में इन यूनिटों को बंद करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया। अथॉरिटी पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी यूनिट को साल 2022 तक बंद करने की तैयारी में जुटा था, लेकिन इसी बीच सितंबर 2019 में कोटा थर्मल की कमान बतौर मुख्य अभियंता अजय सक्सेना के हाथ आ गई। उन्होंने अपने कार्यकाल में प्लांट को बंद होता देखने के बजाय थर्मल की खामियों को दूर करने की ठान ली।</p>
<p><strong>साल भर की मेहनत लाई रंग</strong></p>
<p>मुख्य अभियंता अजय सक्सेना ने कोटा थर्मल को बचाने के लिए त्रिस्तरीय योजना तैयार की। उन्होंने एक साल तक कड़ी मेहनत और संघर्ष कर सबसे पहले कैग और आरएसपीसीबी की ओर से बताई 21 खामियों को दुरुस्त करने का काम किया। इसके बाद दूसरे चरण में कूलिंग प्लांट, फ्लूड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, एसटीपी लगाने और ईएसपी को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया। तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण में मुख्य अभियंता ने कैग से लेकर लोक लेखा समित और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आला अफसरों को भरोसा दिलाने में कामियाबी हासिल की कि पर्यावरण नियमों की पालना करने के लिए बड़ी लागत वाले प्रोजेक्ट चरण बद्ध तरीके से पूरे कर लिए जाएंगे। इसके लिए बकायदा समयबद्ध प्लान भी इनके समक्ष रखा गया।</p>
<p><strong>आखिरकार पांच साल बाद मिला जीवनदान </strong></p>
<p>कोटा थर्मल के मुख्य अभियंता अजय सक्सेना ने बताया कि एक साल की कोशिशों के बाद अब जाकर प्रदूषण निवारण मानकों की पूरी पालना सुनिश्चित हुई है। जो बड़े प्रोजेक्ट बचे रह गए हैं उनके लिए थर्मल प्रबंधन की ओर से बकायदा लिखित आश्वासन दिया गया है कि इन्हें समयबद्ध योजना के तहत पूरा कर लिया जाएगा। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जब पूरी तरह मुतमईन हो गया तब जाकर कोटा थर्मल को वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 के प्रावधानों के तहत साल 2023 तक के लिए संचालन सहमति जारी कर दी गई है। शुक्रवार को इन्वायरमेंट क्लीयरेंस और संचालन सहमति कोटा थर्मल को मिल गई है। इससे न सिर्फ कोटा थर्मल को नया जीवन मिला है, बल्कि प्रदेश के सबसे पुराने प्लांट में पर्यावरण संरक्षण के साथ पूरी क्षमता से विद्युत उत्पादन की मिसाल भी कायम हो गई है।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/pollution-control-board-gives-environment-clearance-to-seven-units-of-kota-thermal-power-plant/2005/">फिर जी उठा ‘कोटा थर्मल’, सातों यूनिटों को मिली इन्वायरमेंट क्लीयरेंस  </a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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