2700 किमी की नॉनस्टॉप कांवड़ दौड़ यात्रा पहुंची कोटा, भक्ति और संकल्प का अनूठा संगम
रामेश्वरम से शुरू हुई 10वीं कांवड़ यात्रा उज्जैन होते हुए पहुंची कोटा, 270 श्रद्धालुओं के सामूहिक प्रयास से निरंतर जारी है यात्रा

कोटा। आस्था जब संकल्प का रूप ले लेती है तो हजारों किलोमीटर की दूरी भी छोटी पड़ जाती है। तमिलनाडु के पवित्र सेतु बांध रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग धाम से शुरू हुई 2700 किलोमीटर लंबी 10वीं नॉनस्टॉप कांवड़ दौड़ यात्रा रविवार को कोटा पहुंची।

श्रद्धालुओं की यह अनूठी यात्रा केवल कदमों की दूरी तय करने का नाम नहीं, बल्कि शिव भक्ति, अनुशासन, त्याग और सामूहिक संकल्प की जीवंत मिसाल बन गई है। यात्रा उज्जैन होते हुए कोटा पहुंची, जहां शिवभक्तों के उत्साह और श्रद्धा ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
यात्रा का समापन टोंक स्थित श्री अमरनाथ महादेव दूधिया बालाजी संत आश्रम में श्रावण मास के अंतिम सोमवार को भगवान शिव के जलाभिषेक के साथ होगा। इस दौरान कांवड़ में लाया गया पवित्र जल भोलेनाथ को अर्पित कर श्रद्धालु अपनी लंबी धार्मिक यात्रा को पूर्ण करेंगे।
इस विशाल आयोजन का सफल संचालन महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 श्री रामदास जी महाराज राम जी बाबा के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इससे पहले भी श्री रामदास जी महाराज के नेतृत्व में नौ नॉनस्टॉप कांवड़ यात्राएं सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी हैं। दसवीं यात्रा में भी श्रद्धा के साथ अनुशासन और बेहतर व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।
यात्रा में करीब 270 श्रद्धालु शामिल हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि पांच श्रद्धालु बारी-बारी से लगभग 10 किलोमीटर तक कांवड़ लेकर दौड़ते हैं, जबकि अन्य श्रद्धालु विश्राम करते हुए अपनी बारी की प्रतीक्षा करते हैं। इस क्रम में कांवड़ यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रहती है। सामूहिक सहयोग और आपसी समन्वय के बल पर हजारों किलोमीटर की यह कठिन यात्रा लगातार अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही है।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा प्रारंभ से लेकर अंत तक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। लंबी दूरी और निरंतर दौड़ के बावजूद श्रद्धालुओं के चेहरे पर थकान से अधिक शिवभक्ति का उत्साह दिखाई दे रहा है।
आस्था का यही भाव कांवड़ यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति है। कांवड़ केवल कंधों पर रखा जल नहीं, बल्कि मन में बसे विश्वास और भगवान शिव के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। आधुनिक दौर में जहां जीवन की रफ्तार तेज है, वहीं ऐसी यात्राएं समाज को धैर्य, अनुशासन, सेवा और सामूहिकता का संदेश देती हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यात्रा के दौरान शरीर भले ही थकता है, लेकिन “हर-हर महादेव” का जयघोष मन में नई ऊर्जा भर देता है। रामेश्वरम से टोंक तक की यह यात्रा इसी अटूट विश्वास का प्रमाण है कि सच्ची श्रद्धा के सामने दूरी, थकान और कठिनाइयां भी छोटी पड़ जाती हैं।
कोटा से बूंदी की ओर बढ़ चुकी यह कांवड़ दौड़ यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर अग्रसर है, लेकिन इसके साथ चल रही शिवभक्ति की धारा हजारों लोगों के मन में आस्था और प्रेरणा का संचार करती रहेगी।
TIS मीडिया | कोटा









