मध्य-पूर्व युद्ध का असर: LPG सिलेंडर महंगा, अब 21 दिन बाद ही होगी अगली बुकिंग
पेट्रोलियम मंत्रालय के नए निर्देश लागू, डिलीवरी के समय DAC कोड और ई-KYC अनिवार्य; ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के बीच आपूर्ति पर नजर

नई दिल्ली/कोटा। घरेलू एलपीजी गैस उपभोक्ताओं के लिए सरकार ने नया नियम लागू किया है। अब गैस सिलेंडर की डिलीवरी के 21 दिन बाद ही अगली बुकिंग कराई जा सकेगी। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निर्देश के बाद तेल कंपनियों ने अपने सॉफ्टवेयर सिस्टम में बदलाव कर दिया है। नया नियम शुक्रवार से देशभर में लागू हो गया।
इसके साथ ही गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। जानकारी के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में करीब 60 रुपए और कमर्शियल गैस सिलेंडर में करीब 115 रुपए की बढ़ोतरी की गई है।
सरकार का मानना है कि मध्य-पूर्व में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस की आपूर्ति कई समुद्री मार्गों से होती है, लेकिन युद्ध और सुरक्षा कारणों के कारण कुछ मार्गों पर दबाव और जोखिम बढ़ गया है। ऐसे हालात में देश में एलपीजी की उपलब्धता संतुलित रखने और अनावश्यक स्टॉकिंग रोकने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है।
पहले उपभोक्ता लगभग 15 दिन बाद ही सिलेंडर की बुकिंग कर सकते थे, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 21 दिन कर दिया गया है। ऑयल कंपनियों ने सभी गैस एजेंसियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराने के आदेश दिए हैं।
डिलीवरी के समय देना होगा DAC कोड
अब गैस सिलेंडर की डिलीवरी के समय डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) देना अनिवार्य होगा।
जब उपभोक्ता मोबाइल से गैस सिलेंडर बुक करते हैं, तब उनके फोन पर एक कोड मैसेज के माध्यम से आता है। यह कोड डिलीवरी मैन को बताने के बाद ही गैस सिलेंडर की डिलीवरी पूरी मानी जाएगी।
ई-KYC भी जरूरी
अब उपभोक्ताओं के लिए ई-KYC कराना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इससे फर्जी कनेक्शन और घरेलू सिलेंडर के दुरुपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग नहीं
तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर का कमर्शियल उपयोग न करें। ऐसा करने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

कंपनियों का दावा—किल्लत नहीं ऑयल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की पर्याप्त आपूर्ति है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय हालात, खासकर ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध और प्रभावित समुद्री मार्गों को देखते हुए सरकार आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार नजर बनाए हुए है।

