गैस संकट से हाड़ौती के सैकड़ों हलवाई-कैटरर्स परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट, 10 मार्च के बाद कई शादियों की तिथियां

जहां उठनी थी पकवानों की खुशबू, वहां छाई चिंता गैस की कमी से हाड़ौती के सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का सवाल

कोटा 10 मार्च गैस किल्लत से 1500 का सिलेंडर ब्लैक में 3000 तक, कई ओपन मैस अब तंदूर से बना रहे खाना

सचिन माहेश्वरी (माहेश्वरी कैटर्स कोटा) अध्यक्ष हाड़ोती हलवाई कैटर्स एसोसिएशन कोटा

मार्च का महीना हाड़ौती में आमतौर पर शादी-विवाह की खुशियों से भरा रहता है। रसोइयों में दिन-रात पकवान बनते हैं और हलवाई-कैटरर्स के साथ काम करने वाले मजदूरों के घरों में भी रौनक रहती है। लेकिन इस बार कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई रुकने से इन खुशियों के बीच चिंता की लकीर खिंच गई है। जिन रसोइयों में इन दिनों पकवानों की खुशबू उठनी चाहिए थी, वहां गैस की कमी के कारण काम रुकने का डर सताने लगा है।

हाड़ौती हलवाई-कैटरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन माहेश्वरी ने बताया कि मार्च महीने में 10 मार्च के बाद विवाह समारोहों की कई तिथियां तय हैं। ऐसे आयोजनों में बड़ी मात्रा में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आवश्यकता होती है। अचानक सप्लाई बंद होने से सैकड़ों हलवाई, कैटरर्स और उनसे जुड़े मजदूरों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।उन्होंने कहा कि कई हलवाई और कैटरर्स के पास पहले से तय विवाह समारोहों के ऑर्डर हैं, लेकिन गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने से भोजन बनाने की तैयारी प्रभावित हो रही है। इससे एक ओर जहां शादी करने वाले परिवारों की चिंता बढ़ रही है, वहीं इन कामों पर निर्भर मजदूरों और कामगारों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट गहराने लगा है।

माहेश्वरी ने कहा कि कैटरिंग का काम केवल व्यापार नहीं है, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका का आधार है।


वही दूसरी ओर कोचिंग सिटी कोटा में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई ठप होने से कोचिंग छात्रों के लिए चलने वाले मैस और भोजनालयों का काम बुरी तरह प्रभावित हो गया है। गैस की भारी किल्लत के कारण कई मैस संचालकों को खाना बनाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थिति यह हो गई है कि सामान्य रूप से करीब 1500 रुपए में मिलने वाला कमर्शियल गैस सिलेंडर अब ब्लैक मार्केट में 3000 रुपए तक में बिक रहा है। गैस की कमी के चलते कई मैस संचालकों को मजबूरी में ज्यादा कीमत देकर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनके खर्च में भी भारी बढ़ोतरी हो रही है।

गैस की कमी का असर कोटा के ओपन मैस पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई जगहों पर अब गैस की जगह तंदूर का प्रयोग कर खाना तैयार किया जा रहा है, ताकि छात्रों के लिए भोजन व्यवस्था जारी रखी जा सके।

मैस संचालकों का कहना है कि यदि जल्द ही कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में छात्रों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

कोटा में बड़ी संख्या में देशभर से छात्र कोचिंग के लिए आते हैं और हजारों छात्र मैस व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में गैस संकट ने मैस संचालकों और छात्रों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

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