बारां की लड़कियां और कोटा के लड़के, शहद सी बातें और फिर जेब खाली…!
- कोटा पुलिस ने दबोचा "हनीट्रैप" गैंग, दो महिलाएं और चार युवक गिरफ्तार

– सहेली के कमरे पर कपड़े उतरते ही बना डाला वीडियो, 90 हजार देकर लौटे
कोटा।
शहद सी बातें और “सहेली का कमरा”….! कपड़े उतरते ही कैमरा हुआ चालू…! फोन पर शुरू हुई आशिकी, जेब पर ऐसी भारी पड़ी कि 90 हजार देने के बाद भी किस्तें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थीं…।
बारां की लड़कियों और कोटा के लड़कों ने मिलकर ऐसा काटा कि “आशिक मिजाजी” का जहर उतरवाने के लिए कोटा पुलिस की शरण में ही जाना पड़ा। एसपी तेजस्वी गौतम मामला सुनते ही हकीकत भांप गईं और एएसपी दिलीप सैनी, सीओ रुद्रप्रकाश शर्मा, सीआई उद्योग नगर मांगेलाल यादव को तुरंत एक टीम बनाकर “मुहब्बत के शिकारियों” को दबोचने भेज दिया।
कोटा पुलिस ने जाल बिछाया और शिकारियों को उनके खेल में ही फंसाकर NH-27 के नीचे ढाडदेवी रोड पर स्विफ्ट कार (RJ-20-CK-3862) से धर दबोचा।
पुलिस ने इन छह लोगों को डिटेन कियाः-
1. कोमल शर्मा (25 वर्ष): निवासी किशनगंज, बारां (हाल कोटा/बारां)।
2. कृष्णा मीणा (31 वर्ष): निवासी राजपुरा, बारां (हाल महावीर नगर, कोटा)।
3. नरेन्द्र सिंह सोलंकी उर्फ तंवर (27 वर्ष): निवासी राजपूत कॉलोनी, कंसुआ।
4. शाहरूख (26 वर्ष): निवासी राजपूत कॉलोनी, कंसुआ।
5. योगेन्द्र प्रताप सिंह राणावत (26 वर्ष): निवासी बापू नगर, कुन्हाड़ी।
6. मोहम्मद आसिफ (26 वर्ष): निवासी एसएसएफ चौराहा, कंसुआ (कार चालक) और पूछताछ के बाद जो कहानी सामने आई वह बेहद दिलचस्प निकली।
दरअसल, 23 अप्रैल को उद्योग नगर थाने में एक शिकायत आई कि दो महिलाओं और चार युवकों ने एक “भले इंसान” को लूट लिया। लूट भी ऐसे वैसे नहीं हुई…। पहले एक महिला ने उस “भले इंसान” के फोन पर कॉल किया…। “रॉग नंबर” से शुरू हुआ यह खेल मीठी-मीठी बातों में तब्दील हो गया और फिर एक दिन शहद सी बातें करने वाली युवती ने “भले इंसान” को मिलने के लिए सहेली के कमरे पर बुला लिया… और वो “भले इंसान” चला भी गया।
वहां जैसे ही इस “भले इंसान” ने एक नहीं बल्कि दो महिलाओं की मौजूदगी में कपड़े उतारे… उसकी वीडियो बना ली गई। तब जाकर आशिक मिजाजी का भूत सिर से उतरा और समझ आया कि वो हनी ट्रैप का शिकार हो गया है। बारां की लड़कियों और कोटा के लड़कों की इस गैंग ने वीडियो वायरल करने और बलात्कार के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर 90 हजार रुपये वसूल लिए, लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ और जब एक के बाद एक लगातार कई किस्तों में वसूली शुरू हुई तब कहीं जाकर वो “भले इंसान” पुलिस के पास पहुंचे।
गनीमत यह रही कि आला अफसरों ने मामला सुनते ही पूरा कांड समझ लिया और आनन-फानन में कार्यवाही शुरू कर दी।
परिवादी की रिपोर्ट पर प्रकरण संख्या 236/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं 308(6), 316(2), 351(3), 61(2) (a) में मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया और पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में गठित टीम, ने त्वरित कार्यवाही करते हुए पूरे गिरोह को धर दबोचा।
अब कोटा पुलिस ने आमजन से अपील की है कि “अज्ञात कॉल या सोशल मीडिया के झांसे में आकर किसी अनजान स्थान पर जाने से बचें; यदि कोई डराकर पैसों की मांग करे, तो डरे नहीं और तुरंत पुलिस को सूचित करें।”
बाकी तो आप खुद ही समझदार हैं।
हनीट्रैप गिरोह को धर दबोचने वाली उद्योग नगर पुलिस की टीम में मोहम्मद इब्राहिम उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक राजेन्द्र सिंह, सायर सिंह, हैड कांस्टेबल हरिओम, मनमोहन, कांस्टेबल अशोक जाणी, लक्ष्मी नायक और रामगोपाल शामिल थे।









