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	<title>Cinema Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>Cinema Archives - TIS Media</title>
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		<title>श्रद्धांजलिः उम्र गुजरी है इस कदर तन्हा !!</title>
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		<pubDate>Thu, 31 Mar 2022 06:10:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>ज्यादा शराब पीने की वजह से हुई थी मीना कुमारी की मौत, पति ने कायदों में बांधना चाहा तो तोड़ लिया रिश्ता TISMedia@Desk अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारी की आज पुण्यतिथि है। मीना कुमारी जब पैदा हुईं तो उनके परिवार में कोई खुशी नहीं मनाई गई। मीना कुमारी के पिता को बेटे की &#8230;</p>
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<li><span style="color: #ff0000;"><strong>ज्यादा शराब पीने की वजह से हुई थी मीना कुमारी की मौत, पति ने कायदों में बांधना चाहा तो तोड़ लिया रिश्ता</strong></span></li>
</ul>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Desk</span></strong> अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारी की आज पुण्यतिथि है। मीना कुमारी जब पैदा हुईं तो उनके परिवार में कोई खुशी नहीं मनाई गई। मीना कुमारी के पिता को बेटे की उम्मीद थी लेकिन पैदा हुई मीना यानि कि &#8216;महजबीं बानो&#8217;। इस कमतरी का जख्म उन्हें ताउम्र सहना पड़ा। फैंस की भीड़ से घिरी रहने वाली अपने दौर की सबसे कामियाब अदाकारा की उम्र बेहद तन्हा गुजरी।</p>
<p><strong>चली कहानीः <a href="https://tismedia.in/category/entertainment/art-and-literature/">पढ़िए अपने चहेते लेखकों की कहानियां</a></strong></p>
<p>1 अगस्त 1933 को मुंबई में जन्मी मीना ने 31 मार्च 1972 को मुंबई में ही दम तोड़ दिया। गजब की खूबसूरत थीं मीना कुमारी लेकिन किस्मत भी इतनी ही खूबसूरत होती तो बात ही क्या थी। घर की माली हालत ठीक नहीं थी इसलिए कम उम्र में ही काम करना पड़ा। मीना कुमारी बचपन में मां-बाप और भाई बहनों के लिए एक्टिंग कर पैसे कमाती थीं, बाद में यही उनका शौक बन गया। मीना कुमारी ने स्कूल में पढ़ाई नहीं की थी लेकिन उन्हें कई भाषाओं का ज्ञान था। उन्हें शायरी का बेहद शौक था। मीना कुमारी पहली बार 1939 में निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म &#8220;लैदरफेस&#8221; में बेबी महजबीं के रूप में नजर आईं। साल 1952 में आई फिल्म ‘बैजू बावरा’ ने उनको बुलंदियों तक पहुंचाया। यह फिल्म लोगों को इतनी पंसद आई थी कि 100 हफ्तों तक थियेटर में लगी रही।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/entertainment/history-and-culture/valentines-day-love-story-of-dhola-maru-of-rajasthan/11650/">अमर प्रेम की निशानी &#8216;ढोला मारू&#8217;: राजस्थान में आज भी गाए जाते हैं इनके प्रेमगीत</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कमाल अमरोही से की शादी</strong></span><br />
कमाल साहब और मीना कुमारी की लव स्टोरी बेहद दिलचस्प थी। कमाल मीना के साथ कुछ मुलाकातों के बाद ही उन्हें दिल दे बैठे थे वह मीना से शादी करना चाहते थे लेकिन पहले से ही शादीशुदा होने की वजह से कमाल ने मीना से चोरी छुपे निकाह किया। वे बिना बताए ही कमाल के घर पहुंच गई थीं और वहीं रहने लगीं। हालांकि एक दशक बाद दोनों के रिश्ते में कड़वाहट आनी शुरू हो गई।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-who-went-to-school-for-just-one-day-got-6-doctoral-degrees/11470/"> Lata Mangeshkar: सिर्फ एक दिन स्कूल गई थीं, लेकिन मिली थीं 6 डॉक्टरेट उपाधियां</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>मीना कुमारी ने तोड़ी कायदों की कैद </strong></span><br />
कहा जाता है कमाल अमरोही मीना को लेकर बहुत पजेसिव रहते थे। मीना कुमारी के मेकअप रूम में किसी मेल शख्स की एंट्री पर सख्त पाबंदी थी। उन्होंने एक असिस्टेंट मीना कुमारी के साथ लगा रखा था ताकि वे हर पल नजर रख सकें। एक रोज दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया और कमाल ने मीना को तीन तलाक दे दिया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kirori-singh-bainsla-passes-away/11854/">गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला का निधन, एक इशारे पर थम जाता था पूरा राजस्थान</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>अलग होकर भी किया साथ काम</strong></span><br />
कमाल अमरोही और मीना कुमारी भले ही पति और पत्नी के रूप में एक दूसरे से अलग रहे हों, लेकिन अभिनेत्री के तौर पर वो हमेशा कमाल अमरोही की फिल्मों में काम करने के लिए उपलब्ध थीं। मीना की जिंदगी काफी दर्द भरी रही जिसकी वजह से उन्हें ट्रेजिडी क्वीन कहा जाने लगा। &#8216;पाकीजा&#8217; के रिलीज होने के तीन हफ्ते बाद, मीना कुमारी गंभीर रूप से बीमार हो गईं। वे अपनी जिंदगी में इतनी अकेली हो गई थीं कि शराब का सहारा लेने लगीं। धीरे-धीरे उन्हें शराब की लत लग गई। हद से ज्यादा शराब पीने की वजह से उन्हें लीवर सिरोसिस की बीमारी हो गई। कहते हैं आखिरी दिनों में भी वे दवाइयों की जगह शराब ही पीती थीं। जब मीना कुमारी बहुत ज्यादा बीमार हो गईं तो आखिर तक जो चंद फिल्मी दोस्त उनसे मिलने आते थे उनमें धर्मेंद्र भी एक थे। आखिरकार 31 मार्च 1972 को उनका निधन हो गया।</p>
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		<title>श्रद्धांजलिः BSF की नौकरी छोड़ ‘भीम’ बने प्रवीण कुमार ने एशियन गेम्स में जीता था गोल्ड</title>
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		<pubDate>Tue, 08 Feb 2022 09:34:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota अभी तक देशवासी स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के निधन की खबर से उबरे भी नहीं थे कि फिल्मी जगत से भी एक बुरी खबर आ गई। कालजयी धारावाहिक महाभारत में भीम के किरदार को जीवंत करने वाले 74 वर्षीय प्रवीण कुमार सोबती का निधन हो गया है। प्रवीण कुमार पंजाब के रहने &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> अभी तक देशवासी स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के निधन की खबर से उबरे भी नहीं थे कि फिल्मी जगत से भी एक बुरी खबर आ गई। कालजयी धारावाहिक महाभारत में भीम के किरदार को जीवंत करने वाले 74 वर्षीय प्रवीण कुमार सोबती का निधन हो गया है।</p>
<p><iframe title="#blueshawls vs #saffronshawls Hijab की वजह से हुआ  #ABVP कार्यकर्ताओं और #दलित छात्रों के बीच टकराव" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/_P2vNSSo20I?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>प्रवीण कुमार पंजाब के रहने वाले थे। ऐक्टिंग और स्पॉर्ट्स के अलावा उन्होंने राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाई। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बीएसएफ में बतौर सैनिक की थी। 20 साल की उम्र में प्रवीण कुमार ने बीएसएफ जॉइन की और यहीं पर अफसरों की नजर उनकी खेल प्रतिभा पर पड़ी। अंतरराष्ट्रीय एथलीट रहे &#8220;भीम&#8221; 1960 और 1970 के दशक में भारतीय एथलेटिक्स के प्रमुख सितारे थे। उन्होंने कई वर्षों तक भारतीय हथौड़ा और चक्का फेंक खेलों पर अपना दबदबा कायम रखा। साल 1966 और 1970 के एशियाई खेलों में चक्का फेंक में स्वर्ण पदक जीते। एशियाई खेलों का रिकॉर्ड 56.76 मीटर था। वह 1966 में किंग्स्टन में हुए राष्ट्रमंडल खेलों और 1974 में तेहरान में हुए एशियाई खेलों में रजत पदक विजेता थे। उन्होंने 1968 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक और 1972 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भाग लिया। साल 1967 में प्रवीण कुमार को &#8216;अर्जुन अवॉर्ड&#8217; से नवाजा गया था।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/corporate-activism-gone-wrong-after-hyundai-kia-pizza-hut-and-kfc-in-trouble-over-pro-pakistani-post/11523/">जहर उगल रहीं पाकिस्तान परस्त Hyundai, KIA, Pizza Hut और KFC, भारतीयों ने किया #Boycott</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>1982 में फिल्मों में एंट्री, 50 से ज्यादा फिल्में</strong></span><br />
प्रवीण कुमार ने ऐक्टिंग की दुनिया में 1982 में आई फिल्म &#8216;रक्षा&#8217; से एंट्री की थी। यह जेम्स बॉन्ड स्टाइल की फिल्म थी। जिसमें जितेंद्र लीड रोल में थे। इसके बाद वह जितेंद्र की ही फिल्म &#8216;मेरी आवाज सुनो&#8217; में नजर आए। प्रवीण कुमार ने 50 से ज्यादा फिल्में कीं, लेकिन उन्हें स्टारडम और पॉप्युलैरिटी &#8216;महाभारत&#8217; के &#8216;भीम&#8217; बनकर मिली।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/reet-level-2-exam-cancelled-will-be-held-again-in-two-phases/11518/">REET का लेवल-2 एग्जाम रद्द: अब दो चरणों में फिर से होगी परीक्षा, देखिए पूरा VIDEO</a></strong></span></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">बायचांस मिली थी पहली फिल्म </span></strong><br />
एक साक्षात्कार में प्रवीण कुमार ने बताया था कि उन्हें ऐक्टिंग का मौका बाय चांस मिला था। वह तो अपने गेम्स की तैयारी कर रहे थे। प्रवीण ने कहा था, &#8216;यह मात्र एक संयोग था कि एक फिल्ममेकर ने मुझे फिल्म का ऑफर दिया। मैंने सोचा कि मुझे यह स्वीकार कर लेना चाहिए क्योंकि लाइमलाइट में रहने का एक यही मौका है। इस फिल्म को करने के बाद मेरे एक दोस्त ने बताया कि बीआर चोपड़ा &#8216;महाभारत&#8217; बना रहे हैं। उसमें भीम के कैरेक्टर के लिए उन्हें हीरो की तलाश है। बस मुझे यह मौका मिल गया।&#8217; भीम के रोल के बाद प्रवीण कुमार को हिंदी और अन्य रीजनल फिल्मों के ढेरों ऑफर आने लगे, लेकिन उन्होंने राजनीति में करियर बनाने के चक्कर में कम फिल्में करनी शुरू कर दीं। 2013 में उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, पर हार गए। 2014 में वह बीजेपी में शामिल हो गए थे।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/lata-mangeshkar-cremated-with-state-honors/11482/">अनंत यात्रा पर स्वर कोकिला: राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, भाई और भतीजे ने दी मुखाग्नि</a></strong></span></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">लंबे वक्त से थे बीमार</span></strong><br />
पिछले साल प्रवीण कुमार तब चर्चा में आए जब दिसंबर 2021 में ऐसी खबरें आईं कि वह पाई-पाई को मोहताज हो गए हैं। लेकिन प्रवीण ने इन खबरों को बकवास बताया। हालांकि उन्होंने यह जरूर बताया था कि वह काफी समय से घर में ही हैं। तबीयत ठीक नहीं रहती है और खाने में भी कई तरह के परहेज हैं। प्रवीण कुमार का निधन हार्ट अटैक के कारण हुआ। उनके एक रिश्तेदार ने बताया कि प्रवीण को बेचैनी हो रही थी, इसलिए डॉक्टर को घर बुलाया गया। लेकिन रात 10 से 10:30 के बीच में उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ और वह चल बसे। प्रवीण के परिवार में उनकी पत्नी , एक बेटी, दो छोटे भाई और एक बहन बची हैं।</p>
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		<title>Tribute to Lata Mangeshkar: सिर्फ एक दिन स्कूल गई थीं, लेकिन मिली थीं 6 डॉक्टरेट उपाधियां</title>
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		<pubDate>Sun, 06 Feb 2022 11:54:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की सफलताओं का सफर हमेशा ही सुहाना नहीं था, सुरज सा चमकने के लिए उन्हें मुफलिसी की आग में जलना पड़ा था। स्वर कोकिला की जिंदगी के शुरुआती दिन इतनी मुश्किलों भरे थे कि वह अपनी जिंदगी में सिर्फ एक दिन के लिए ही स्कूल जा सकी थीं। लेकिन, हैरत &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-who-went-to-school-for-just-one-day-got-6-doctoral-degrees/11470/">Tribute to Lata Mangeshkar: सिर्फ एक दिन स्कूल गई थीं, लेकिन मिली थीं 6 डॉक्टरेट उपाधियां</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की सफलताओं का सफर हमेशा ही सुहाना नहीं था, सुरज सा चमकने के लिए उन्हें मुफलिसी की आग में जलना पड़ा था। स्वर कोकिला की जिंदगी के शुरुआती दिन इतनी मुश्किलों भरे थे कि वह अपनी जिंदगी में सिर्फ एक दिन के लिए ही स्कूल जा सकी थीं। लेकिन, हैरत यह जानकर होती है कि इक दिन ऐसा भी आया कि उनकी प्रतिभा को न्यूयार्क यूनिवर्सिटी समेत देश और दुनिया के 6 विश्वविद्यालयों ने डॉक्टरेट की उपाधि दी।</p>
<p>इंदौरी गलियारों में बहने वाली खबरों के मुताबिक लता मंगेशकर का जीवन शुरू से इतना आसान नहीं रहा था। हैरत यह जानकर होती है कि वह केवल एक दिन के लिए ही स्कूल गईं थी। दरअसल, जब वह स्कूल में अपनी छोटी बहन आशा भोसलें के साथ पहुंचीं तो स्कूल के हेडमास्टर ने आशा भोसलें को यह कहकर निकाल दिया, कि उन्हें भी स्कूल की फीस जमा करनी होगी। नतीजन, पढ़ाई शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई और इस दिन के बाद लता मंगेशकर ने कभी स्कूल न जाने का फैसला किया। हालांकि, एक समय ऐसा भी आया जब प्रतिभा के दम पर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय समेत 6 विश्वविद्यालयों ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>36 भाषाओं में गाए गाने  </strong></span><br />
भारत रत्न से सम्मानित और स्वर कोकिला कही जाने वाली विश्व प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर अब नहीं रहीं। रविवार, 6 फरवरी, 2022 को 92 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांसें ली। लता मंगेशकर बीते दिनों कोरोना संक्रमित हुई थीं, इसके बाद से ही उनका इलाज चल रहा था। हालांकि, कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी उनकी हालत में सुधार न हो सका और वह दुनिया को अलविदा कह गईं। उनके जाने से देश पूरे देश में शोक की लहर सी आ गई है। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्म लेने वाली लता मंगेशकर का पूरा जीवन उपलब्धियों से भरा रहा। बचपन से गाने के शौक और कड़ी मेहनत से उन्होंने जो मुकाम हासिल किए उन्हें एक वाक्य में समेटा नहीं जा सकता। उनकी उपलब्धि को सिर्फ इसी बात से समझा जा सकता है कि सिर्फ एक दिन स्कूल जाने वाली इस महान कलाकार ने एक या दो नहीं, बल्कि छत्तीस भाषाओं में हजारों गाने गाने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था। यही वजह थी कि उन्हें भारत सरकार ने &#8220;डॉक्टर ऑफ नेशन&#8221; की उपाधि से सम्मानित किया था।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">प्रमुख पुरस्कार और सम्मानों की सूची</span></strong></p>
<p>फिल्मफेयर अवॉर्ड (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 और 1994)<br />
नेशनल अवॉर्ड (1972, 1975 और 1990)<br />
1969 में पद्मभूषण से सम्मानित।<br />
1989 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त करने वाली फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला।<br />
वर्ष 1974 में लंदन के सुप्रसिद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल में गाने वाली पहली भारतीय गायिका।<br />
सन 1974 में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का &#8216;गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड।<br />
1999 में विभूषण से सम्मानित।<br />
2001 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित।<br />
2001 में महाराष्ट्र रत्न से सम्मानित।<br />
36 भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाएं।<br />
1984 में मध्य प्रदेश सरकार ने उनके नाम पर संगीत का पुरस्कार रखा। इन पुरस्कारों के अलावा उन्हें फिल्म जगत और दुनियाभर के संस्थानों से कई अन्य बड़े पुरस्कार भी प्राप्त हुए थे।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर इन फिल्मों के लिए</strong></span><br />
1964 – वो कौन थी<br />
1967 – &#x200d;मिलन<br />
1968 – राजा और रंक<br />
1969 – सरस्वतीचंद्र<br />
1970 – दो रास्ते<br />
1971 – तेरे मेरे सपने<br />
1972 – पाकीज़ा<br />
1973 – बॉन पलाशिर पदबाली (बंगाली फिल्म)<br />
1973 – अभिमान<br />
1975 – कोरा कागज़<br />
1981 – एक दूजे के लिए<br />
1983 – अ पोर्ट्रेट ऑफ लता जी<br />
1985 – राम तेरी गंगा मैली<br />
1987 – अमरसंगी (बंगाली फिल्म)<br />
1991 – लेकिन</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">शुरुआती दिनों में रिजेक्ट भी हुईं</span></strong><br />
देश की स्वर कोकिला कही जाने वालीं लता मंगेशकर को शुरूआती दिनों में रिजेक्ट भी होना पड़ा था। कई बार उनकी आवाज को पतला बताकर नापसंद कर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने हिम्मत न हारते हुए अपनी मेहनत के दम पर कई मुकाम हासिल किए।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/entertainment/lata-mangeshkar-who-went-to-school-for-just-one-day-got-6-doctoral-degrees/11470/">Tribute to Lata Mangeshkar: सिर्फ एक दिन स्कूल गई थीं, लेकिन मिली थीं 6 डॉक्टरेट उपाधियां</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>आर्यन खान ड्रग्स केस: NCB का गवाह किरण गोसावी गिरफ्तार</title>
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		<pubDate>Thu, 28 Oct 2021 03:34:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Mumbi आर्यन खान ड्रग केस में फरार एनसीबी के गवाह किरण गोसावी को पकड़ लिया गया है। पुणे के पुलिस कमिश्नर अमिताभ गुप्ता ने बताया कि किरण गोसावी को हिरासत में लिया गया है। बता दें कि गोसावी पर धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं और उसी में से एक मामले में पुलिस को उसकी &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Mumbi</strong></span> आर्यन खान ड्रग केस में फरार एनसीबी के गवाह किरण गोसावी को पकड़ लिया गया है। पुणे के पुलिस कमिश्नर अमिताभ गुप्ता ने बताया कि किरण गोसावी को हिरासत में लिया गया है। बता दें कि गोसावी पर धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं और उसी में से एक मामले में पुलिस को उसकी तलाश थी। पुणे पुलिस के अनुसार, गोसावी को देर रात गिरफ्तार किया गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/kota-acb-arrested-sawai-madhopurs-rcho-dr-kamlesh-meena-sent-to-jail/11223/">कोटा ACB ने RCHO को गिरफ्तार कर भेजा जेल, 5 हजार की घूस लेने का आरोप</a></strong></p>
<p>किरण गोसावी के विरुद्ध पुणे के फरसखाना थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। इस 2018 के मामले में उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी किया गया था। वो कई दिनों से फरार चल रहा था। किरण गोसावी को पकड़ने के लिए पुणे पुलिस की दो टीम उत्तर प्रदेश भी गई थी। बता दें कि गोसावी वही व्यक्ति है जो आर्यन खान के साथ सेल्फी लेकर सुर्खियों में आया था। गोसावी आर्यन केस में एनसीबी का गवाह भी है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/kota-acb-court-sentenced-cashier-of-baran-tehsil-to-two-years-imprisonment-for-taking-a-bribe-of-rs-150-also-imposed-a-fine-of-30-thousand-rupees/11220/">150 रुपए की घूस लेने की सजा: 2 साल की जेल और 30 हजार रुपए का जुर्माना</a></strong></p>
<p>पुलिस के अनुसार, 2018 में किरण गोसावी और शेरबानो कुरैशी ने पुणे के चिन्मय देशमुख नाम के युवक को मलेशिया में नौकरी दिलाने का झांसा दिया था और युवक से इन्होंने 3 लाख रुपये ठग लिए थे। इस सिलसिले में पुणे पुलिस ने शेरबानो कुरैशी को मुंबई से पहले ही गिरफ्तार कर लिया है और अब गोसावी को भी हिरासत में लिया है।</p>
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		<title>Aryan Khan Drug Case: पैसे लेकर लगाया समीर वानखेड़े पर आरोप !</title>
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		<pubDate>Tue, 26 Oct 2021 04:18:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>मोहित कंबोज का दावा: प्रभाकर साइल ने पैसे लेकर लगाया वानखेड़े पर आरोप मोहित कंबोज ने ट्विटर पर शेयर किया स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो TISMedia@Mumbai बीजेपी नेता मोहित कंबोज ने एक वीडियो ट्वीट कर आर्यन खान केस में बड़ा दावा किया है। उन्होंने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा &#8220;नोटरी रामजी गुप्ता का स्टिंग ऑपरेशन&#8221; प्रभाकर &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>मोहित कंबोज का दावा: प्रभाकर साइल ने पैसे लेकर लगाया वानखेड़े पर आरोप</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong> मोहित कंबोज ने ट्विटर पर शेयर किया स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो</strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Mumbai</strong></span> बीजेपी नेता मोहित कंबोज ने एक वीडियो ट्वीट कर आर्यन खान केस में बड़ा दावा किया है। उन्होंने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा &#8220;नोटरी रामजी गुप्ता का स्टिंग ऑपरेशन&#8221; प्रभाकर साइल ने किरण गोसावी से पैसे के लिए ये सब किया है। जिसके बाद आर्यन खान ड्रग्स केस में सियासी हलचलें और बढ़ गई हैं। इन सब के बीच आज आर्यन खान की जमानत याचिका पर कोर्ट सुनवाई करेगा।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">String Operation of Notary Ram Ji Gupta :<br />Ram ji says <a href="https://twitter.com/hashtag/PrabhakarSail?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#PrabhakarSail</a> Has Done All This For Money From Kiran Gosavi ! <br />Clearly saying मियाँ Nawab and Manoj is Behind This !<a href="https://twitter.com/hashtag/AryanKhan?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#AryanKhan</a> <a href="https://t.co/XyzphQE2Xb">https://t.co/XyzphQE2Xb</a> <a href="https://t.co/FMGYvquQ2r">pic.twitter.com/FMGYvquQ2r</a></p>
<p>&mdash; Mohit Bharatiya ( Mohit Kamboj ) (@mohitbharatiya_) <a href="https://twitter.com/mohitbharatiya_/status/1452833547526434816?ref_src=twsrc%5Etfw">October 26, 2021</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>मोहित कंबोज के मुताबिक ये रामजी गुप्ता नामक एक नोटरी करने वाले व्यक्ति का स्टिंग है। जिसमें वह कह रहा है कि किरण गोसावी से प्रभाकर साइल ने पैसे मांगे थे, क्योंकि उसके यहां बॉडीगार्ड था और उसको लेकर यह सब कुछ हुआ है इस स्टिंग ऑपरेशन की सत्यता की पुष्टि #TISMedia नहीं करता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/punjab-and-mamta-banerjee-protest-on-the-jurisdiction-of-bsf/11183/">अब &#8220;BSF&#8221; पर राज्यों ने जताया एतराज, सीमा सुरक्षा पर मचाई रार</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>नवाब मलिक भी करेंगे खुलासा!</strong></span><br />
वहीं एनसीपी नेता नवाब मलिक ने ट्वीट कर कोई बड़ा खुलासा करने की ओर इशारा किया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा गुड मॉर्निंग… मैं बहुत जल्द स्पेशल 26 रिलीज करने वाला हूं. अब देखना ये होगा की नवाब मलिका क्या खुलासा करते हैं और इसका आर्यन खान ड्रग्स केस में क्या असर पड़ता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/lok-sabha-speaker-said-accountability-of-social-media-should-also-be-fixed/11167/">सोशल मीडिया की जवाबदेही हो सुनिश्चित: लोक सभा अध्यक्ष</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>आर्यन खान की जमानत पर सुनवाई आज</strong></span><br />
वहीं मुंबई क्रूज ड्रग्स केस में मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद आरोपी अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की जमानत याचिका पर बॉम्&#x200d;बे हाई कोर्ट आज सुनवाई करेगा। मुंबई के NDPS कोर्ट द्वारा शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की जमानत नामंजूर किए जाने के बाद अब उनके वकीलों ने हाई कोर्ट का रुख किया था। इससे पहले 21 अक्&#x200d;टूबर को हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान आर्यन खान के वकील सतीश मानेशिन्दे ने बीते शुक्रवार को सुनवाई की मांग की थी, लेकिन एनसीबी की ओर से पेश वकील एएसजी ने कोर्ट में कॉपी नहीं मिलने की बात कही थी ताकि पूरी तैयारी कर सकें। इसके लिए उन्होंने कोर्ट से और समय दिए जाने की मांग की थी, जिसे हाईकोर्ट ने मान लिया था। कोर्ट ने मंगलवार यानी कि आज आर्यन खान की बेल एप्लीकेशन पर सुनवाई की तारीख तय की हुई है।</p>
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		<title>चली कहानीः उसने कहा था- चंद्रधर शर्मा गुलेरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Oct 2021 04:22:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>बड़े-बडे़ शहरों के इक्के-गाड़ी वालों की जबान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल गई है और कान पक गए हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि अमृतसर के बम्बू कार्ट वालों की बोली का मरहम लगावे। जबकि बड़े शहरों की चौड़ी सड़को पर घोड़े की पीठ को चाबुक से धुनते हुए इक्के वाले कभी घोड़े की &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
		<div class="clearfix"></div>
		<div class="about-author about-author-box container-wrapper">
			<div class="author-avatar">
				<img loading="lazy" decoding="async" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/images-1.jpg" alt="About the author" class="author-avatar-img" width="111" height="111" />
			</div>
			<div class="author-info">
				<h4>About the author</h4><strong><span style="color: #ff0000;">चन्द्रधर शर्मा &#8216;गुलेरी&#8217; <span style="color: #0000ff;">(1883 &#8211; 12 सितम्बर 1922)</span> हिन्दी के कथाकार, व्यंगकार, निबन्धकार तथा सम्पादक थे। उन्हें हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेज़ी, प्राकृत, बांग्ला, मराठी, जर्मन तथा फ्रेंच भाषाओं का ज्ञान था। उनकी रुचि धर्म, ज्योतिष इतिहास, पुरातत्त्व, दर्शन भाषाविज्ञान शिक्षाशास्त्र और साहित्य से लेकर संगीत, चित्रकला, लोककला, विज्ञान और राजनीति तथा समसामयिक सामाजिक स्थिति तथा रीति-नीति में थी। आम हिन्दी पाठक ही नहीं, विद्वानों का एक बड़ा वर्ग भी उन्हें अमर कहानी ‘उसने कहा था’ के रचनाकार के रूप में ही पहचानता है।</span></strong>
			</div>
		</div>
	
<p>बड़े-बडे़ शहरों के इक्के-गाड़ी वालों की जबान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल गई है और कान पक गए हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि अमृतसर के बम्बू कार्ट वालों की बोली का मरहम लगावे। जबकि बड़े शहरों की चौड़ी सड़को पर घोड़े की पीठ को चाबुक से धुनते हुए इक्के वाले कभी घोड़े की नानी से अपना निकट यौन-संबंध स्थिर करते हैं, कभी उसके गुप्त गुह्य अंगो से डाक्टर को लजाने वाला परिचय दिखाते हैं, कभी राह चलते पैदलों की आँखो के न होने पर तरस खाते हैं, कभी उनके पैरो की अंगुलियों के पोरों की चींथकर अपने ही को सताया हुआ बताते हैं और संसार भर की ग्लानि और क्षोभ के अवतार बने नाक की सीध चले जाते हैं,</p>
<p>तब अमृतसर में उनकी बिरादरी वाले तंग चक्करदार गलियों में हर एक लडढी वाले के लिए ठहर कर सब्र का समुद्र उमड़ा कर&#8211; बचो खालसाजी, हटो भाईज&#8217;, ठहरना भाई, आने दो लालाजी, हटो बाछा कहते हुए सफेद फेटों , खच्चरों और बतको, गन्ने और खोमचे और भारे वालों के जंगल से राह खेते हैं । क्या मजाल है कि जी और साहब बिना सुने किसी को हटना पड़े। यह बात नही कि उनकी जीभ चलती ही नही, चलती है पर मीठी छुरी की तरह महीन मार करती हुई। यदि कोई बुढ़िया बार-बार चिटौनी देने पर भी लीक से नही हटती तो उनकी वचनावली के ये नमूने हैं&#8211; हट जा जीणे जोगिए, हट जा करमाँ वालिए, हट जा, पुत्तां प्यारिए. बच जा लम्बी वालिए। समष्टि में इसका अर्थ हैं कि तू जीने योग्य है, तू भाग्योंवाली है, पुत्रो को प्यारी है, लम्बी उमर तेरे सामने है, तू क्यों मेरे पहियो के नीचे आना चाहती है? बच जा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-11141" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-chandradhar-sharma-guleri-2.jpg" alt="tis media, chandradhar sharma guleri, Chali Kahani, Story Of The Day, Hindi Story, Chali Kahani, Story Of The Day, Hindi Story, Hindi Literature, Hindi Movies, Hindi Storytellers, हिंदी साहित्य, हिंदी साहित्यकार, हिंदी फिल्में, हिंदी के कहानीकार, चंद्रधर शर्मा गुलेरी, चली कहानी, हिंदी कहानियां" width="850" height="550" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-chandradhar-sharma-guleri-2.jpg 850w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-chandradhar-sharma-guleri-2-300x194.jpg 300w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-chandradhar-sharma-guleri-2-768x497.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 850px) 100vw, 850px" /></p>
<p>ऐसे बम्बू कार्ट वालों के बीच में होकर एक लड़का और एक लड़की चौक की दुकान पर आ मिले। उसके बालों और इसके ढीले सुथने से जान पडता था कि दोनो सिख हैं। वह अपने मामा के केश धोने के लिए दही लेने आया था और यह रसोई के लिए बड़ियाँ। दुकानदार एक परदेशी से गुथ रहा था, जो सेर भर गीले पापड़ो की गड्डी गिने बिना हटता न था।<br />
&#8212; तेरा घर कहाँ है?<br />
&#8212; मगरे में। &#8230;और तेरा?<br />
&#8212; माँझे में, यहाँ कहाँ रहती है?<br />
&#8212; अतरसिंह की बैठक में, वह मेरे मामा होते हैं।<br />
&#8212; मैं भी मामा के आया हूँ, उनका घर गुरु बाजार में है।<br />
इतने में दुकानदार निबटा और इनका सौदा देने लगा। सौदा लेकर दोनो साथ-साथ चले। कुछ दूर जाकर लड़के ने मुसकरा कर पूछा&#8211; तेरी कुड़माई हो गई? इस पर लड़की कुछ आँखे चढ़ाकर &#8216;धत्&#8217; कहकर दौड़ गई और लड़का मुँह देखता रह गया।</p>
<p>दूसरे तीसरे दिन सब्जी वाले के यहाँ, या दूध वाले के यहाँ अकस्मात् दोनो मिल जाते। महीना भर यही हाल रहा। दो-तीन बार लड़के ने फिर पूछा&#8211; तेरे कुड़माई हो गई? और उत्तर में वही &#8216;धत्&#8217; मिला। एक दिन जब फिर लड़के ने वैसी ही हँसी में चिढ़ाने के लिए पूछा तो लड़की लड़के की संभावना के विरुद्ध बोली&#8211; हाँ, हो गई।<br />
&#8212; कब?<br />
&#8212; कल, देखते नही यह रेशम से कढ़ा हुआ सालू। &#8230; लड़की भाग गई।<br />
लड़के ने घर की सीध ली। रास्ते में एक लड़के को मोरी में ढकेल दिया, एक छाबड़ी वाले की दिन भर की कमाई खोई, एक कुत्ते को पत्थर मारा और गोभी वाले ठेले में दूध उंडेल दिया। सामने नहा कर आती हुई किसी वैष्णवी से टकरा कर अन्धे की उपाधि पाई। तब कहीं घर पहुँचा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-11142" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-chandradhar-sharma-guleri-4.jpg" alt="" width="640" height="461" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-chandradhar-sharma-guleri-4.jpg 640w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-chandradhar-sharma-guleri-4-300x216.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>&#8212; होश में आओ। कयामत आयी है और लपटन साहब की वर्दी पहन कर आयी है।<br />
&#8212; क्या? &#8212; लपचन साहब या तो मारे गये हैं या कैद हो गये हैं। उनकी वर्दी पहन कर कोई जर्मन आया है। सूबेदार ने इसका मुँह नही देखा। मैने देखा है, और बातें की हैं। सौहरा साफ़ उर्दू बोलता है, पर किताबी उर्दू। और मुझे पीने को सिगरेट दिया है।<br />
&#8212; तो अब? &#8212; अब मारे गए। धोखा है। सूबेदार कीचड़ में चक्कर काटते फिरेंगे और यहाँ खाई पर धावा होगा उधर उन पर खुले में धावा होगा। उठो, एक काम करो। पलटन में पैरो के निशान देखते-देखते दौड़ जाओ। अभी बहुत दूर न गये होंगे। सूबेदार से कहो कि एकदम लौट आवें। खंदक की बात झूठ है। चले जाओ, खंदक के पीछे से ही निकल जाओ। पत्ता तक न खुड़के। देर मत करो।&#8217;<br />
&#8212; हुकुम तो यह है कि यहीं&#8230;<br />
&#8212; ऐसी तैसी हुकुम की! मेरा हुकुम है&#8230; जमादार लहनासिंह जो इस वक्त यहाँ सबसे बड़ा अफ़सर है, उसका हुकुम है। मैं लपटन साहब की ख़बर लेता हूँ।<br />
&#8212; पर यहाँ तो तुम आठ ही हो।<br />
&#8212; आठ नही, दस लाख। एक एक अकालिया सिख सवा लाख के बराबर होता है। चले जाओ।<br />
लौटकर खाई के मुहाने पर लहनासिंह दीवार से चिपक गया। उसने देखा कि लपटन साहब ने जेब से बेल के बराबर तीन गोले निकाले। तीनों को जगह-जगह खंदक की दीवारों में घुसेड़ दिया और तीनों में एक तार सा बाँध दिया। तार के आगे सूत की गुत्थी थी, जिसे सिगड़ी के पास रखा। बाहर की तरफ जाकर एक दियासलाई जलाकर गुत्थी रखने&#8230; बिजली की तरह दोनों हाथों से उलटी बन्दूक को उठाकर लहनासिंह ने साहब की कुहनी पर तानकर दे मारा । धमाके के साथ साहब के हाथ से दियासलाई गिर पड़ी । लहनासिंह ने एक कुन्दा साहब की गर्दन पर मारा और साहब &#8216;आँख! मीन गाट्ट&#8217; कहते हुए चित हो गये। लहनासिंह ने तीनो गोले बीनकर खंदक के बाहर फेंके और साहब को घसीटकर सिगड़ी के पास लिटाया। जेबों की तलाशी ली। तीन-चार लिफ़ाफ़े और एक डायरी निकाल कर उन्हे अपनी जेब के हवाले किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-11143" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-chandradhar-sharma-guleri-6.jpg" alt="" width="640" height="463" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-chandradhar-sharma-guleri-6.jpg 640w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-chandradhar-sharma-guleri-6-300x217.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>साहब की मूर्च्छा हटी। लहना सिह हँसकर बोला&#8211; क्यो, लपटन साहब, मिजाज कैसा है? आज मैंने बहुत बातें सीखीं । यह सीखा कि सिख सिगरेट पीते हैं । यह सीखा कि जगाधरी के जिले में नीलगायें होती हैं और उनके दो फुट चार इंच के सींग होते हैं । यह सीखा कि मुसलमान खानसामा मूर्तियो पर जल चढाते हैं और लपटन साहब खोते पर चढते हैं । पर यह तो कहो, ऐसी साफ़ उर्दू कहाँ से सीख आये? हमारे लपटन साहब तो बिना &#8216;डैम&#8217; के पाँच लफ़्ज भी नही बोला करते थे ।</p>
<p>लहनासिंह ने पतलून की जेबों की तलाशी नही ली थी। साहब ने मानो जाड़े से बचने के लिए दोनो हाथ जेबो में डाले। लहनासिंह कहता गया&#8211; चालाक तो बड़े हो, पर माँझे का लहना इतने बरस लपटन साहब के साथ रहा है। उसे चकमा देने के लिए चार आँखे चाहिएँ। तीन महीने हुए एक तुर्की मौलवी मेरे गाँव में आया था। औरतो को बच्चे होने का ताबीज बाँटता था और बच्चो को दवाई देता था। चौधरी के बड़ के नीचे मंजा बिछाकर हुक्का पीता रहता था और कहता था कि जर्मनी वाले बड़े पंडित हैं। वेद पढ़-पढ़ कर उसमे से विमान चलाने की विद्या जान गये हैं। गौ को नही मारते। हिन्दुस्तान में आ जायेंगे तो गोहत्या बन्द कर देगे। मंडी के बनियो को बहकाता था कि डाकखाने से रुपये निकाल लो, सरकार का राज्य जाने वाला है। डाक बाबू पोल्हू राम भी डर गया था। मैने मुल्ला की दाढी मूंड़ दी थी और गाँव से बाहर निकालकर कहा था कि जो मेरे गाँव में अब पैर रखा तो &#8212; साहब की जेब में से पिस्तौल चला और लहना की जाँघ में गोली लगी। इधर लहना की हेनरी मार्टिन के दो फ़ायरो ने साहब की कपाल-क्रिया कर दी।<br />
धडाका सुनकर सब दौड़ आये।<br />
बोधा चिल्लाया&#8211; क्या है?<br />
लहनासिंह में उसे तो यह कह कर सुला दिया कि &#8216;एक हडका कुत्ता आया था, मार दिया&#8217; और औरो से सब हाल कह दिया। बंदूके लेकर सब तैयार हो गये । लहना ने साफ़ा फाड़ कर घाव के दोनो तरफ पट्टियाँ कसकर बांधी । घाव माँस में ही था। पट्टियो के कसने से लूह बन्द हो गया।<br />
इतने में सत्तर जर्मन चिल्लाकर खाई में घुस पड़े। सिखो की बंदूको की बाढ ने पहले धावे को रोका। दूसरे को रोका। पर यहाँ थे आठ (लहना सिंह तक-तक कर मार रहा था। वह खड़ा था औऱ लेटे हुए थे) और वे सत्तर । अपने मुर्दा भाईयों के शरीर पर चढ़कर जर्मन आगे घुसे आते थे । थोड़े मिनटो में वे&#8230; अचानक आवाज आयी &#8212; &#8216;वाह गुरुजी की फतह ! वाहगुरु दी का खालसा!&#8217; और धड़ाधड़ बंदूको के फायर जर्मनो की पीठ पर पड़ने लगे। ऐन मौके पर जर्मन दो चक्कों के पाटों के बीच में आ गए। पीछे से सूबेदार हजारासिंह के जवान आग बरसाते थे और सामने से लहनासिंह के साथियों के संगीन चल रहे थे। पास आने पर पीछे वालो ने भी संगीन पिरोना शुरु कर दिया ।<br />
एक किलकारी और&#8211; &#8216;अकाल सिक्खाँ दी फौज आयी। वाह गुरु जी दी फतह! वाह गुरु जी दी खालसा! सत्त सिरी अकाल पुरुष! &#8216; और लड़ाई ख़तम हो गई। तिरसठ जर्मन या तो खेत रहे थे या कराह रहे थे। सिक्खो में पन्द्रह के प्राण गए। सूबेदार के दाहिने कन्धे में से गोली आर पार निकल गयी। लहनासिंह की पसली में एक गोली लगी। उसने घाव को खंदक की गीली मिट्टी से पूर लिया। और बाकी का साफ़ा कसकर कमर बन्द की तरह लपेट लिया। किसी को ख़बर नही हुई कि लहना के दूसरा घाव &#8212; भारी घाव &#8212; लगा है। लड़ाई के समय चांद निकल आया था। ऐसा चांद जिसके प्रकाश से संस्कृत कवियो का दिया हुआ &#8216;क्षयी&#8217; नाम सार्थक होता है। और हवा ऐसी चल रही थी जैसी कि बाणभट्ट की भाषा में &#8216;दंतवीणो पदेशाचार्य&#8217; कहलाती। वजीरासिंह कह रहा था कि कैसे मन-मनभर फ्रांस की भूमि मेरे बूटो से चिपक रही थी जब मैं दौडा दौडा सूबेदार के पीछे गया था। सूबेदार लहनासिह से सारा हाल सुन और कागजात पाकर उसकी तुरन्त बुद्धि को सराह रहे थे और कर रहे थे कि तू न होता तो आज सब मारे जाते। इस लड़ाई की आवाज़ तीन मील दाहिनी ओर की खाई वालों ने सुन ली थी। उन्होने पीछे टेलिफ़ोन कर दिया था। वहाँ से झटपट दो डाक्टर और दो बीमार ढोने की गाड़ियाँ चली, जो कोई डेढ घंटे के अन्दर अन्दर आ पहुँची। फील्ड अस्पताल नज़दीक था। सुबह होते-होते वहाँ पहुँच जाएंगे, इसलिए मामूली पट्टी बांधकर एक गाड़ी में घायल लिटाये गए और दूसरी में लाशें रखी गईं। सूबेदार ने लहनासिह की जाँघ में पट्टी बंधवानी चाही। बोधसिंह ज्वर से बर्रा रहा था। पर उसने यह कह कर टाल दिया कि थोड़ा घाव है, सवेरे देखा जायेगा। वह गाड़ी में लिटाया गया। लहना को छोडकर सूबेदार जाते नही थे। यह देख लहना ने कहा&#8211; तुम्हे बोधा की कसम हैं और सूबेदारनी जी की सौगन्द है तो इस गाड़ी में न चले जाओ।<br />
&#8212; और तुम?<br />
&#8212; मेरे लिए वहाँ पहुँचकर गाड़ी भेज देना। और जर्मन मुर्दो के लिए भी तो गाड़ियाँ आती होगीं। मेरा हाल बुरा नही हैं। देखते नही मैं खड़ा हूँ? वजीरासिंह मेरे पास है ही।<br />
&#8212; अच्छा, पर&#8230;<br />
&#8212; बोधा गाड़ी पर लेट गया। भला, आप भी चढ़ आओ। सुनिए तो, सूबेदारनी होराँ को चिट्ठी लिखो तो मेरा मत्था टेकना लिख देना।<br />
&#8212; और जब घर जाओ तो कह देना कि मुझ से जो उन्होने कहा था, वह मैंने कर दिया।<br />
गाड़ियाँ चल पड़ी थीं। सूबेदार ने चढ़ते-चढ़ते लहना का हाथ पकड़कर कहा&#8211; तूने मेरे और बोधा के प्राण बचाये हैं। लिखना कैसा? साथ ही घर चलेंगे। अपनी सूबेदारनी से तू ही कह देना। उसने क्या कहा था?<br />
&#8212; अब आप गाड़ी पर चढ़ जाओ। मैने जो कहा, वह लिख देना और कह भी देना।<br />
गाड़ी के जाते ही लहना लेट गया। &#8211;वजीरा, पानी पिला दे और मेरा कमरबन्द खोल दे। तर हो रहा है।<br />
मृत्यु के कुछ समय पहले स्मृति बहुत साफ़ हो जाती है। जन्मभर की घटनाएँ एक-एक करके सामने आती हैं। सारे दृश्यो के रंग साफ़ होते है, समय की धुन्ध बिल्कुल उन पर से हट जाती है। लहनासिंह बारह वर्ष का है। अमृतसर में मामा के यहाँ आया हुआ है। दहीवाले के यहाँ, सब्जीवाले के यहाँ, हर कहीं उसे आठ साल की लड़की मिल जाती है। जब वह पूछता है कि तेरी कुड़माई हो गई? तब वह &#8216;धत्&#8217; कहकर भाग जाती है। एक दिन उसने वैसे ही पूछा तो उसने कहा&#8211;हाँ, कल हो गयी, देखते नही, यह रेशम के फूलों वाला सालू? यह सुनते ही लहनासिंह को दुःख हुआ। क्रोध हुआ । क्यों हुआ?<br />
&#8212; वजीरासिंह पानी पिला दे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-11140" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-79-Punjab-Infantry.jpg" alt="tis media, chandradhar sharma guleri, Chali Kahani, Story Of The Day, Hindi Story, Chali Kahani, Story Of The Day, Hindi Story, Hindi Literature, Hindi Movies, Hindi Storytellers, हिंदी साहित्य, हिंदी साहित्यकार, हिंदी फिल्में, हिंदी के कहानीकार, चंद्रधर शर्मा गुलेरी, चली कहानी, हिंदी कहानियां" width="700" height="408" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-79-Punjab-Infantry.jpg 700w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/10/tismedia.in-79-Punjab-Infantry-300x175.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></p>
<p>पच्चीस वर्ष बीत गये। अब लहनासिंह नं. 77 राइफ़ल्स में जमादार हो गया है। उस आठ वर्ष की कन्या का ध्यान ही न रहा, न मालूम वह कभी मिली थी या नही। सात दिन की छुट्टी लेकर ज़मीन के मुकदमे की पैरवी करने वह घर गया। वहाँ रेजीमेंट के अफ़सर की चिट्ठी मिली। फौरन चले आओ। साथ ही सूबेदार हजारासिंह की चिट्ठी मिली कि मैं और बोधासिंह भी लाम पर जाते हैं, लौटते हुए हमारे घर होते आना। साथ चलेंगे।<br />
सूबेदार का घर रास्ते में पड़ता था और सूबेदार उसे बहुत चाहता था। लहनासिंह सूबेदार के यहाँ पहुँचा। जब चलने लगे तब सूबेदार बेडे़ में निकल कर आया। बोला&#8211; लहनासिंह, सूबेदारनी तुमको जानती है। बुलाती है। जा मिल आ।<br />
लहनासिंह भीतर पहुँचा। सूबेदारनी मुझे जानती है? कब से? रेजीमेंट के क्वार्टरों में तो कभी सूबेदार के घर के लोग रहे नहीं। दरवाज़े पर जाकर &#8216;मत्था टेकना&#8217; कहा। असीस सुनी। लहनासिंह चुप।<br />
&#8212; मुझे पहचाना?<br />
&#8212; नहीं।<br />
&#8212; &#8216;तेरी कुड़माई हो गयी? &#8230; धत्&#8230; कल हो गयी&#8230; देखते नही, रेशमी बूटों वाला सालू&#8230; अमृतसर में&#8230;<br />
भावों की टकराहट से मूर्च्छा खुली। करवट बदली। पसली का घाव बह निकला।<br />
&#8212; वजीरासिंह, पानी पिला &#8212; उसने कहा था ।<br />
स्वप्न चल रहा हैं । सूबेदारनी कह रही है&#8211; मैने तेरे को आते ही पहचान लिया। एक काम कहती हूँ। मेरे तो भाग फूट गए। सरकार ने बहादुरी का खिताब दिया है, लायलपुर में ज़मीन दी है, आज नमकहलाली का मौक़ा आया है। पर सरकार ने हम तीमियो की एक घघरिया पलटन क्यो न बना दी जो मै भी सूबेदारजी के साथ चली जाती? एक बेटा है। फौज में भरती हुए उसे एक ही वर्ष हुआ। उसके पीछे चार और हुए, पर एक भी नही जिया । सूबेदारनी रोने लगी&#8211; अब दोनों जाते हैं । मेरे भाग! तुम्हें याद है, एक दिन टाँगे वाले का घोड़ा दहीवाले की दुकान के पास बिगड़ गया था। तुमने उस दिन मेरे प्राण बचाये थे। आप घोड़ो की लातो पर चले गये थे। और मुझे उठाकर दुकान के तख्त के पास खड़ा कर दिया था। ऐसे ही इन दोनों को बचाना। यह मेरी भिक्षा है। तुम्हारे आगे मैं आँचल पसारती हूँ।<br />
रोती-रोती सूबेदारनी ओबरी में चली गयी। लहनासिंह भी आँसू पोछता हुआ बाहर आया।<br />
&#8212; वजीरासिंह, पानी पिला &#8212; उसने कहा था।</p>
<p>लहना का सिर अपनी गोद में रखे वजीरासिंह बैठा है। जब मांगता है, तब पानी पिला देता है। आध घंटे तक लहना फिर चुप रहा, फिर बोला&#8211; कौन? कीरतसिंह?<br />
वजीरा ने कुछ समझकर कहा&#8211; हाँ।<br />
&#8212; भइया, मुझे और ऊँचा कर ले। अपने पट्ट पर मेरा सिर रख ले।<br />
वजीरा ने वैसा ही किया ।<br />
&#8212; हाँ, अब ठीक है। पानी पिला दे। बस। अब के हाड़ में यह आम खूब फलेगा। चाचा-भतीजा दोनों यहीँ बैठकर आम खाना। जितना बड़ा तेरा भतीजा है उतना ही बड़ा यह आम, जिस महीने उसका जन्म हुआ था उसी महीने मैने इसे लगाया था।<br />
वजीरासिंह के आँसू टप-टप टपक रहे थे। कुछ दिन पीछे लोगों ने अख़बारो में पढ़ा&#8212;<br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>फ्रांस और बेलजियम&#8211; 67वीं सूची&#8211; मैदान में घावों से मरा &#8212; न. 77 सिख राइफल्स जमादार लहना सिंह ।</strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/entertainment/art-and-literature/usne-kaha-tha-story-of-chandradhar-sharma-guleri/11138/">चली कहानीः उसने कहा था- चंद्रधर शर्मा गुलेरी</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>Swara Bhaskar: अब बोली &#8220;हिंदू होने पर शर्म आती है&#8221;</title>
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		<pubDate>Sat, 23 Oct 2021 12:38:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Mumbai स्वरा भास्कर एक बार फिर हिंदू धर्म के विरोध में दिए बयान को लेकर खबरों में हैं। इस बार उन्होंने कहा है कि मैं हिंदू होने पर शर्मिंदा हूं। इस बयान के लिए स्वरा को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। लोगों ने उन्हें हिंदू धर्म छोड़ने की सलाह तक दे दी है। यह भी &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Mumbai</strong></span> स्वरा भास्कर एक बार फिर हिंदू धर्म के विरोध में दिए बयान को लेकर खबरों में हैं। इस बार उन्होंने कहा है कि मैं हिंदू होने पर शर्मिंदा हूं। इस बयान के लिए स्वरा को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। लोगों ने उन्हें हिंदू धर्म छोड़ने की सलाह तक दे दी है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/up-congress-priyanka-gandhi-flag-off-pratigya-yatra-starts-today-on-barabanki-up/11052/">Congress Pratigya Yatra: प्रियंका गांधी ने की 20 लाख सरकारी नौकरी देने की घोषणा, बोलीं- &#8216;हम वचन निभाएंगे&#8217;</a></strong></p>
<p>स्वरा ने गुरुग्राम में वायरल वीडियो पर कमेंट किया है। इस वीडियो में बताया गया कि गुरुग्राम के सेक्&#x200d;टर 12-A में एक पब्लिक प्लेस पर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग नमाज अदा कर रहे थे। कथित तौर पर बजरंग दल के कुछ लोग उनके सामने खड़े होकर &#8216;जय श्री राम&#8217; के नारे लगाने लगे, जिसके चलते वहां तनाव का माहौल बन गया। इसी घटना पर स्वरा ने अपना वीडियो पोस्ट कर लिखा, मुझे हिंदू होने पर शर्म आती है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/bjp-national-vice-president-babyrani-maurya-controversial-statement-women-should-not-go-to-the-police-station-after-sunset/11041/">अंधेरा होने के बाद थाने न जाएं महिलाएं, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने उड़ाई योगी सरकार की धज्जियां</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">हिंदू धर्म छोड़ने की मिल रही है सलाह</span></strong><br />
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में अगर किसी एक्ट्रेस को सबसे ज्यादा ट्रोल किया जाता है तो वो स्वरा हैं। वे कुछ भी पोस्ट करती हैं तो उसमें ट्रोलर्स की बाढ़ आ जाती है। स्वरा के इस पोस्ट के बाद ट्रोलर्स उन्हें ट्रोल करने लगे। एक यूजर ने लिखा- दीदी आपको इस ट्वीट का कितना मिला? वहीं, दूसरे ने लिखा- तुम हिंदू हो, हमें इस बात से शर्म आती है। इस ट्वीट के बाद कई लोग उन्हें हिंदू धर्म छोड़ने तक की सलाह दे रहे हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/amit-shahs-jammu-kashmir-visit-latest-news-update/11049/">Amit Shah in Jammu Kashmir: शहीद इंस्पेक्टर परवेज अहमद की पत्नी को सौंपे सरकारी नौकरी के कागज</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>बयानबाजी के चलते हो चुकीै है एफआईआर</strong> </span><br />
स्वरा हमेशा अपने बयानों को लेकर चर्चा में बनी रहती हैं। इससे पहले वे तालिबान पर बयान देकर खबरों में आई थीं। तब स्वरा ने कहा था कि हम हिंदुत्व आतंक के साथ ठीक नहीं हो सकते हैं और तालिबान आतंक से सभी हैरान और तबाह हो गए हैं। हमारे मानवीय और नैतिक मूल्य पीड़ित या उत्पीड़क की पहचान पर आधारित नहीं होने चाहिए। इसके बाद भी स्वरा ट्रोल हुई थीं। बता दें, स्वरा के खिलाफ उनकी बयानबाजी के चलते FIR भी दर्ज हो चुकी है।</p>
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		<title>अनन्या पांडे: 22 साल की उम्र में 72 करोड़ की कमाई, जानिए एनसीबी क्यों पड़ी है पीछे</title>
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		<pubDate>Fri, 22 Oct 2021 08:34:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Mumbai आर्यन खान संग ड्रग्स चैट को लेकर एऩसीबी ने अभिनेत्री अनन्य पांडे से शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन पूछताछ की। एनसीबी ने ड्रग्स कनेक्श्न को लेकर अनन्या से करीब 4 घंटे की पूछताछ में कई सवाल किए। अब अनन्या से सोमवार को फिर से पूछताछ होगी। सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में अनन्या पांडे ने ड्रग्स &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Mumbai </strong></span>आर्यन खान संग ड्रग्स चैट को लेकर एऩसीबी ने अभिनेत्री अनन्य पांडे से शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन पूछताछ की। एनसीबी ने ड्रग्स कनेक्श्न को लेकर अनन्या से करीब 4 घंटे की पूछताछ में कई सवाल किए। अब अनन्या से सोमवार को फिर से पूछताछ होगी। सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में अनन्या पांडे ने ड्रग्स लेने और सप्लाई करने से इनकार किया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः फैसलाः 7 साल की भांजी के साथ रेप करने वाले मामा को पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा</strong></p>
<p>अनन्या आज दोपहर सवा 2 बजे के करीब एनसीबी दफ्तर पहुंचीं थीं और 6 बजकर 21 मिनट पर अपने पिता चंकि पांडे के साथ बाहर निकलीं। एक्टर अरमान कोहली के फ्रेंड बाबूभाई कांचवाला की मानें तो इस दौरान चंकी पांडे एनसीबी ऑफिशियल समीर वानखेड़े के केबिन के बाहर बैठे रहे। वहीं, दूसरी तरफ अनन्या से अनंद पूछताछ की गई। गुरुवार को भी अनन्या पांडे से करीब 2 घंटे तक पूछताछ हुई थी। ड्रग्स मामले में अनन्या पांडे को आर्यन खान के साथ चैट के आधार पर समन किया गया है। एनसीबी के सूत्रों के मुताबिक, इस चैट में यह आरोप लगाया जा रहा है कि अनन्या गांजे से जुड़ी बातें कर रही थीं। आरोप यह भी है कि आर्यन उस चैट में गांजा अरेंज करने की बात कर रहे थे हालांकि पहले दिन पूछताछ के दौरान अनन्या ने आरोपों से इनकार कर दिया था।</p>
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<p><span style="color: #ff0000;"><strong>एनसीबी को दी जानकारी </strong></span><br />
अनन्या पांडे ने कहा कि उन्होंने आर्यन खान के साथ धीरूभाई अम्बानी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई की है और साथ ही वो आर्यन खान की बहन सुहाना की करीबी दोस्त हैं। उसी के चलते आर्यन, सुहाना और अनन्या एक दूसरे के फैमिली फ्रेंड हैं। शूटिंग शेड्यूल से अलग जब वो घर पर रहती हैं तो सब आपस मे मिलते हैं, जिसमें स्कूल फ्रेंड्स का भी एक सर्कल है। वीड चैट को लेकर अनन्या ने एनसीबी को बताया कि ये चैट उस वक्त किसी सिगरेट को लाने के संदर्भ में थी, काफी वक़्त बीत चुका है, जिसके चलते उन्हें ठीक ठीक याद नहीं है कि ये बात किस संदर्भ में हुई थी और उन्हें वीड एक ड्रग्स है इसकी जानकारी नही थी। एनसीबी की पूछताछ के कारण अनन्या पांडे का काम रुक गया है। एनसीबी ने अनन्या के फोन को जब्त कर लिया है। उन्हें कुछ दिनों बाद एक विज्ञापन की शूटिंग करनी थी हालात को देखते हुए अनन्या ने अपनी टीम को उनके शूट्स को कुछ दिनों के लिए री-शिड्यूल करने के लिए कहा है।</p>
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<p>बता दें कि एनसीबी को आर्यन और अनन्या के बीच नशे को लेकर चैट मिली थी, जिसके बाद एनसीबी ने उन्हें समन किया था। इसके बाद गुरुवार को अनन्या के घर पर रेड भी पड़ी थी, जिसके बाद जांच एजेंसी ने अनन्या का फोन जब्त कर लिया था। लेकिन, एनसीबी के मुताबिक ऐसा कोई सबूत अभी तक नहीं लगा जो यह तय कर सके की अनन्या ने आर्यन के लिए कभी कोई ड्रग अरेंज करवाया हो।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/pm-modi-warns-that-the-danger-of-corona-is-not-over-yet-be-careful/10971/">पीएम मोदी की चेतावनीः कोरोना का अभी खतरा टला नहीं है, रहें सावधान&#8230; देश को किया संबोधित</a></strong></span></p>
<p>अनन्या फिलहाल 22 साल की हैं और अपने पिता से अलग अपने खरीदे हुए दूसरे घर में रहती हैं। जानकारी के मुताबिक अनन्या की नेटवर्थ करीब 72 करोड़ रुपये है। वह एक फिल्म में अभिनय करने के लगभग 2 करोड़ रुपये चार्ज करती हैं। अनन्या की ज्यादातर कमाई विज्ञापनों के जरिए होती है। इंस्टाग्राम पर उनके 20.3 मिलियन फॉलोवर्स हैं और इनका फायदा उन्हें ब्रांड प्रमोशन के लिए भी मिलता है।</p>
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<p>चंकी पांडे की बेटी अनन्या की शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान से काफी अच्छी मित्रता है। वह आर्यन खान की भी दोस्त हैं। अक्सर तीनों साथ में पार्टी करते हुए नजर आते रहते हैं। आर्यन और अनन्या के चैट देखते हुए एनसीबी को शक है कि अनन्या भी आर्यन के साथ ड्रग्स लेती हैं। अनन्या की फिल्मों में एंट्री स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 से हुई थी इसके बाद वे पति पत्नी और वो 2, खाली पीली में नजर आई। अभ तक वे 3 फिल्मों में काम कर चुकी हैं। इसके अलावा वे स्टारकिड होने की वजह से पहले भी कई बार ट्रोल हो चुकी हैं।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/entertainment/cinema/know-who-is-ananya-pandey-earning-72-crores-at-the-age-of-22/10981/">अनन्या पांडे: 22 साल की उम्र में 72 करोड़ की कमाई, जानिए एनसीबी क्यों पड़ी है पीछे</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>&#8220;राम&#8221; और &#8220;लक्ष्मण&#8221; ने दी &#8220;रावण&#8221; को श्रद्धांजलि, केवट के किरदार के लिए ऑडिशन देने गए थे अरविंद</title>
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		<pubDate>Wed, 06 Oct 2021 08:58:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota दूरदर्शन पर प्रसारित हुए रामानंद सागर के बेहद लोकप्रिय पौराणिक सीरियल &#8216;रामायण&#8217; में रावण का किरदार निभाने वाले अभिनेता अरविंद त्रिवेदी का मंगलवार की रात 11 बजे निधन हो गया। 83 वर्षीय अरविंद त्रिवेदी ने अपने घर पर अंतिम सांस ली। &#8220;रावण&#8221; को &#8220;राम-लक्ष्मण&#8221; ही नहीं पूरे देश ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अभिनेता अरविंद &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/tis-utility/shradhanjali/actor-arvind-trivedi-pass-away/10815/">&#8220;राम&#8221; और &#8220;लक्ष्मण&#8221; ने दी &#8220;रावण&#8221; को श्रद्धांजलि, केवट के किरदार के लिए ऑडिशन देने गए थे अरविंद</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong></span> दूरदर्शन पर प्रसारित हुए रामानंद सागर के बेहद लोकप्रिय पौराणिक सीरियल &#8216;रामायण&#8217; में रावण का किरदार निभाने वाले अभिनेता अरविंद त्रिवेदी का मंगलवार की रात 11 बजे निधन हो गया। 83 वर्षीय अरविंद त्रिवेदी ने अपने घर पर अंतिम सांस ली। &#8220;रावण&#8221; को &#8220;राम-लक्ष्मण&#8221; ही नहीं पूरे देश ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Arvind Trivedi। नहीं रहे रामायण के रावण..." width="1220" height="915" src="https://www.youtube.com/embed/isN9NxncIEU?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>अभिनेता अरविंद त्रिवेदी की बेटी एकता ने &#8220;रावण&#8221; के निधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह एकदम स्वस्थ थे, लेकिन मंगलवार रात उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा और उनकी मृत्यु हो गई। अपने अंतिम समय में भी वह शिव महिमा स्रोत और &#8216;राम&#8217; नाम का जाप कर रहे थे।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>&#8220;रावण&#8221; की आखिरी इच्छा </strong></span><br />
अभिनेता अरविंद त्रिवेदी की बेटी एकता ने बताया कि उनकी आखिरी इच्छा यह थी कि जब भी उनका निधन हो &#8220;राम नाम&#8221; का ही वस्त्र पहनाना। इसलिए मृत्यु पश्चात उन्हें धोती और &#8216;राम&#8217; नाम का पीला कुर्ता पहनाया गया है। उनका अंतिम संस्कार बुधवार शाम सात बजे मुंबई के कांदिवली में किया जाएगा। रामायण की शूटिंग को याद करते हुए अरविन्द त्रिवेदी अक्सरकर कहा करते थे कि &#8220;मैं असल ज़िन्दगी में भी राम भक्त और शिव भक्त हूँ इसलिए जब भी शूटिंग पर जाया करता तो पूरा दिन उपवास रखता क्योंकि मुझे इस बात का दुःख होता कि दिए हुए स्क्रिप्ट के हिसाब से मुझे श्रीराम को उल्टे-सीधे शब्द बोलने हैं।&#8221; &#8220;मैं पूरा दिन उपवास रखता और शूटिंग शुरू होने से पहले राम और शिव की पूजा आराधना करता और जब शूटिंग ख़त्म हो जाती तो कपड़े बदलकर रात को अपना उपवास खोलता। शूटिंग के दौरान यही मेरी दिनचर्या होती।&#8221; अरविंद असल जिन्दगी में भी अरुण गोविल को प्रभु ही पुकारते थे।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>केवट बनने गए थे अरविंद </strong></span><br />
रामानंद सागर के धारावाहिक &#8216;रामायण&#8217; में रावण का रोल निभाकर अरविंद त्रिवेदी ने खासी लोकप्रियता बटोरी थी। वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के इंदौर से ताल्लुक रखते थे। उन्होंने 250 से भी ज़्यादा गुजराती फिल्मों में काम किया था। जिन दिनों वह गुजरात में थिएटर से जुड़े थे तो उन्हें पता चला कि रामानंद सागर &#8216;रामायण&#8217; बना रहे हैं और किरदारों की कास्टिंग कर रहे हैं तो वो ऑडिशन देने के लिए गुजरात से मुंबई आएं। बड़ी बात यह थी कि वह रावण नहीं, केवट का किरदार निभाना चाहते थे। लेकिन, जब वह ऑडिशन देकर बाहर निकलने लगे तो बॉडी लैंग्वेज और ऐटीट्यूड देख कर रामानंद सागर बोल उठे&#8230; मुझे मेरा रावण मिल गया। जबकि पूरी स्टार कास्ट अमरीशपुरी को रावण के तौर पर देखना चाहती थी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>आसान नहीं थी शूटिंग </strong></span><br />
अरविंद त्रिवेदी का किरदार इतना दमदार था कि जब उनकी आवाज़ टीवी पर दशानन लंकेश के रूप में गूंजती थी, तो लगता था कि वास्तविक रावण ही छोटे पर्दे पर उतर आया है, लेकिन रावण ऐसे ही नहीं बने। इसके लिए उन्हें खासी मेहनत करनी पड़ी। इस किरदार को जीवंत करने के लिए शूटिंग से पहले सिर्फ तैयार होने में ही उन्हें पांच घंटे लगते थे। भारी भरकम आभूषण और कपड़े ही नहीं दस किलो का मुकुट भी पहनना पड़ता था। रामायण की शूटिंग गुजरात-महाराष्ट्र बॉर्डर के पास उमरगाम में हुआ करती थी। इसलिए वह  बंबई से ट्रेन पकड़ कर उमरगाम जाया करते। शुरुआत में तो उन्हें ट्रेन में सीट भी नहीं मिलती थी और खड़े होकर जाना पड़ता था, लेकिन जब धारावाहिक टीवी पर आने लगा तो लोग खुद उन्हें खड़े होकर अपनी सीट दे दिया करते थे। वह खुद कहते थे कि उन्हें इस सीरियल से इतनी लोकप्रियता मिली कि &#8220;इस सीरियल के बाद मैं लोगों के लिए अरविंद त्रिवेदी नहीं, लंकापति रावण हो गया था।&#8221;</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सांसद भी रहे रावण </strong></span><br />
रामायण में रावण का किरदार निभाने के बाद अरविंद त्रिवेदी ने राजनीति में भी कदम रखा। 1991 में अरविंद त्रिवेदी गुजरात की साबरकांठा लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी से चुनाव लड़े और भारी मतों से जीतकर सांसद चुने गए थे। अरविंद त्रिवेदी को हराने के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री अपनी पत्नी निशा चौधरी को चुनाव में उतारना पड़ा। तब जाकर यह सीट कांग्रेस को वापस मिली। साल 2002 में उन्हें भारतीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफ़सी) का अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>राम-लक्ष्मण-सीता ने दी श्रद्धांजलि </strong></span><br />
रामायण में ‘राम&#8217; का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल ने ट्विटर पर अरविंद त्रिवेदी को श्रद्धांजलि दी है। श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने लिखा -&#8216;आध्यात्मिक रूप से रामावतार का कारण और सांसारिक रूप से एक बहुत ही नेक, धार्मिक, सरल स्वभावी इंसान और मेरे अतिप्रिय मित्र अरविंद त्रिवेदी जी को आज मानव समाज ने खो दिया। नि:संदेह वे सीधे परमधाम जाएंगे और भगवान श्रीराम का सानिध्य पाएंगे।&#8217; लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले सुनील लहरी ने अरव&#x200d;िंद त्रिवेदी की दो तस्वीरें शेयर कर ट्वीट किया- &#8216;बहुत दुखद समाचार है कि हमारे सबके प्यारे अरव&#x200d;िंद भाई (रामायण के रावण) अब हमारे बीच नहीं रहे. भगवान उनकी आत्मा को शांती दे&#8230;मेरे पास शब्द नहीं हैं, मैंने एक पिता समान शख्स को खो दिया है, मेरे मार्गदर्शक, शुभचिंतक और सज्जन व्यक्त&#x200d;ि.&#8217; दीप&#x200d;िका चिखल&#x200d;िया ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट साझा कर लिखा- &#8216;उनके पर&#x200d;िवार के प्रति मेरी संवेदनाएं&#8230;एक बहुत शानदार इंसान थे..।&#8221; रामायण में &#8216;सीता&#8217; का रोल निभाने वाली दीपिका चिखलिया ने भी इंस्टाग्राम पर अरविंद जी की फोटो शेयर करते हुए एक पोस्ट शेयर किया है। पोस्ट शेयर करते हुए उन्होने कैप्शन में लिखा- ‘उनके पर&#x200d;िवार के प्रति मेरी संवेदनाएं&#8230;वह एक बहुत शानदार इंसान थे..।&#8217;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/tis-utility/shradhanjali/actor-arvind-trivedi-pass-away/10815/">&#8220;राम&#8221; और &#8220;लक्ष्मण&#8221; ने दी &#8220;रावण&#8221; को श्रद्धांजलि, केवट के किरदार के लिए ऑडिशन देने गए थे अरविंद</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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