उत्कृष्ट शोधकर्ता, उद्यमी एवं वैज्ञानिक तैयार करें कृषि विश्वविद्यालय: राज्यपाल

- सिर्फ डिग्री देने तक सीमित न रहे कृषि विश्वविद्यालय, नवाचार पर दें जोर
- विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं संस्थागत व्यवस्थाओं का किया गहन निरीक्षण
कोटा । राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने गुरुवार को कृषि विश्वविद्यालय, कोटा में संचालित विषय, छात्रों की वर्तमान स्थिति, नामांकन व्यवस्था, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं संस्थागत व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की।
राज्यपाल बागडे ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित न रहकर, भविष्य के कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्यमी एवं राष्ट्रनिर्माता तैयार करने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों को एक ऐसी योग्य मानव संपदा (एसेट) के रूप में तैयार करें जो समाज, राष्ट्र एवं संपूर्ण मानवधारा के हित में योगदान दे सके। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बौद्धिक रूप से सशक्त बनाते हुए समाज, राष्ट्र एवं विश्व के लिए एक मूल्यवान संपत्ति के रूप में तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों की ऊर्जा एवं ज्ञान का लाभ संपूर्ण मानव समाज तक पहुँचना चाहिए।
कुलाधिपति बागड़े ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, अनुसंधान एवं प्रसार शिक्षा में प्रगति की समीक्षा की तथा विश्वविद्यालय द्वारा की जा रही शिक्षा, अनुसंधान, प्रसार, मानव संसाधन विकास, प्रशासनिक एवं वित्तीय सुधार, आधारभूत संरचना विकास, हरित पहल, उद्यमिता एवं स्टार्टअप आदि सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्याें की प्रंशसा की। उन्होंने कहा कि कृषि को राष्ट्र की आर्थिक एवं सामाजिक मजबूती का आधार माना जाता है, ऐसे में युवाओं का कृषि एवं कृषि-आधारित व्यवसायों की ओर रुझान बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।
राज्यपाल ने निर्देश दिए कि कृषि विश्वविद्यालय में अधिक से अधिक छात्रों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए, ताकि कृषि शिक्षा का लाभ अधिकतम युवाओं तक पहुँच सके। उन्होंने शिक्षकों एवं छात्रों के अनुपात की समीक्षा करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा के प्रसार से राष्ट्र को मजबूत कृषि-शक्ति के रूप में स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय से संबद्ध 13 संस्थानों (9 सरकारी एवं 4 निजी) की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यदि कोई संस्थान सम्बन्धता हेतु निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरे तो विश्वविद्यालय को ऐसे संस्थानों के विरूद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने विश्वविद्यालय को प्लेसमेंट सेल स्थापित करने के निर्देश दिए, जहाँ इसका रिकॉर्ड रखा जाए कि पूर्व छात्र निजी, सरकारी एवं अन्य क्षेत्रों में कितनी प्रगति कर रहे हैं। राज्यपाल ने प्रतिवर्ष ‘अलुमनाई मीट’ आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि सफल पूर्व छात्र वर्तमान छात्रों को प्रेरित कर सकें। साथ ही, उन्होंने विदेशों व बड़े शहरों में कार्यरत पूर्व छात्रों को वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ने की बात कही।
राज्यपाल ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के पुस्तकालयों में भारत के प्राचीन ग्रंथ अवश्य उपलब्ध हों। उन्होंने महर्षि भारद्वाज द्वारा विमान विज्ञान के वर्णन, भास्कराचार्य द्वारा गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत की खोज और नालंदा विश्वविद्यालय जैसे ज्ञान केंद्रों की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का ज्ञान वैश्विक धरोहर है, जो आज विश्व में भारतीयों की प्रतिभा के माध्यम से पुनः स्थापित हो रहा है।
कुलगुरू डॉ. विमला डूंकवाल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं प्रसार की मुख्य उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है तथा नई तकनीकों को किसानों तक पहुँचाने के लिए सतत् प्रयासरत है। निदेशक अनुसंधान डॉ. एस. के. जैन द्वारा विश्वविद्यालय की पिछले तीन वर्षों की विभिन्न गतिविधियों तथा उपलब्धियां पर आधारित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में सिंदूर का पौधा रोपण किया गया तथा कृषि तकनीकी प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा कृषि उद्यमियों से संवाद किया।
संवाद में कुलाधिपति के उच्च शिक्षा सलाहकार प्रो. कैलाश सोडाणी, ओएसडी उच्च शिक्षा डॉ. कुलदीप मिश्रा, वित्त नियंत्रक, विश्वविद्यालय के सभी निदेशकगण, अधिष्ठातागण एवं परीक्षा नियंत्रक उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की कुलसचिव मनीषा तिवारी ने राज्यपाल एवं कुलाधिपति एवं अधिकारियों का धन्यवाद ज्ञापन दिया।









