“बोझ” नहीं बनेंगी बेटियां, बिरला लेंगे “गोद”

- जन्म पूर्व पोषाहार देकर सेहत से लेकर शिक्षा, स्वाबिलम्बन और शादी तक की ली जिम्मेदारी
कोटा। “बेटियां” अब बोझ नहीं बनेंगी। जन्म से लेकर उनकी शादी तक हर जिम्मेदारी अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला उठाएंगे। उनकी शिक्षा, स्वाबिलम्बन और शादी ही नहीं उनके मातृत्व सुपोषण तक की जिम्मेदारी लेने की उन्होंने घोषणा की है। सुपोषित मां अभियान के तहत कोटा के छप्पन भोग परिसर में सुपोषित मां अभियान के तीसरे चरण के आगाज के दौरान उन्होंने हाडौती की बोटियों के लिए बड़ी घोषणा की।
छप्पन भोग परिसर में शुक्रवार को सुपोषित मां अभियान के तीसरे चरण का आगाज हुआ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कोटा बूंदी की 1500 गर्भवती महिलाओं को सुपोषण किट वितरित किए। उस अवसर पर मौजूद मातृशक्ति को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि स्त्री के बिना मानव अस्तित्वहीन है। हमारे समाज का तानाबाना ऐसा है कि कई बार आर्थिक दुश्वारियों के कारण बेटियों का पालन-पोषण अच्छी तरह नहीं हो पाता। नतीजन राष्ट्र बेहतरीन प्रतिभाओं से वंचित रह जाता हैं। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। बेटियों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी हम उठाएंगे ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके।
बेटियां अब हमारी जिम्मेदारी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि बेटियां शारीरिक रूप से स्वस्थ हों यह अत्यन्त आवश्यक है। क्योंकि, स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन निवास करता है। इसके लिए उनके जन्म से ही अच्छे पोषण की व्यवस्था की जाएगी। वह ज्यादा से ज्यादा योग्य हों, इसके लिए प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक का समुचित प्रबंध किया जाएगा। स्कूली शिक्षा के साथ-साथ उनके कौशल का भी विकास किया जाएगा ताकि उनमें किशोरावस्था से ही स्वाबिलम्बन की ललक जगाई जा सके। बेटियां अपने पैरों पर खड़ी होंगी तो पूरा परिवार आर्थिक रूप से मजबूत होगा। इतना ही नहीं बेटियों की शादियों के लिए भी माता-पिता को मुश्किलों का सामना नहीं करना होगा। उनकी भव्य शादियों तक का बंदोबस्त करवाया जाएगा।
मजबूत होता मातृत्व
सुपोषित मां अभियान की लाभार्थियों को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि गर्भ धारण करने के बाद पोषाहार की उपलब्धता बेहत महत्वपूर्ण होती है। अब भी समाज के कई ऐसे तबके हैं जिनके पास समुचित संसाधन उपलब्ध नहीं है। कई बार देखता हूं कि गर्भवती होने के बावजूद भी महिलाओं को मजदूरी करनी पड़ती है। परिवार का पालन पोषण करने के लिए वह काम करती है, लेकिन जैसे ही रसोई में घुसती है खुद खाने के बजाय पूरे परिवार का पेट भरना उसका पहला लक्ष्य होता है। ऐसे में कई बार उसे समुचित पोषाहार नहीं मिल पाता और गर्भ में पल रहा बच्चा कमजोर रह जाता है। राष्ट्र निर्माण में समाज का यह आखिरी तबका उतना ही महत्व रखता है जितना पहले पायदान पर खड़ा आदमी। इसलिए इस तबके की महिलाओं को पर्याप्त पोषाहार उपलब्ध कराना और उनके गर्भ में पल रहे शिशु को शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ बनाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी को ध्यान में रखकर सुपोषित मां अभियान के तीसरे चरण का आज आगाज किया है। तीसरे चरण में अभी तक 1500 गर्भवती महिलाओं को उनके गर्भ धारण करने से लेकर शिशु को जन्म देने तक 12.5 किलो पोषाहार हर महीने निशुल्क उपलब्ध करवाया जाएगा। इतना ही नहीं गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भ में पल रहे बच्चे की निरंतर स्वास्थ्य जांच, नियमित जांचें और दवाएं भी उपलब्ध करवाई जाएंगी।
बजट में शामिल होगा सुपोषित मां अभियान
उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे शिशुओं के लिए सुपोषित मां अभियान निश्चित ही एक वरदान है। एक स्त्री को गर्भवती होने के बाद सबसे ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है, लेकिन कुछ वजहों से जब वह इस देखभाल से वंचित हो जाती है तो गर्भ में पल रहे शिशु को ही नहीं प्रसव के दौरान गर्भवती को भी तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सुपोषित अभियान की लाभार्थियों से जब बात करने का अवसर मिला और समझा कि इस अभियान के दौरान मिलने वाली पोषाहार किट, स्वास्थ्य जांच, दवाएं और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी का संबल उन्हें शारीरिक ही नहीं मानसिक रुप से सुदृढ़ बना रहा है तो बेहद खुशी हुई। कोटा बूंदी की महिलाओं के वरदान सरीखा यह अभियान निश्चित रूप से पूरे प्रदेश की महिलाओं तक पहुंचना चाहिए। पूरे प्रदेश की महिलाओं को सुपोषित मां अभियान जैसी सुविधा मिल सके इसके लिए जयपुर लौटकर में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा जी से बात कर प्रदेश के बजट में इसका प्रावधान कराने की कोशिश करूंगी।






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