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	<title>Jobs Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>Jobs Archives - TIS Media</title>
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		<title>राजस्थान विधानसभाः सरकारी नौकरियों में लोकल को नहीं मिलेगा आरक्षण</title>
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		<pubDate>Fri, 10 Feb 2023 03:12:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर। राजस्थान सरकार ने विधानसभा में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में स्थानीय लोगों को आरक्षण देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने प्रश्नकाल के दौरान उक्त बात कही। राजस्थान में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर सरकार और विपक्ष अभी से पूरा जोर लगा रही है। इस &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">जयपुर।</span></strong> राजस्थान सरकार ने विधानसभा में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में स्थानीय लोगों को आरक्षण देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने प्रश्नकाल के दौरान उक्त बात कही।</p>
<p>राजस्थान में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर सरकार और विपक्ष अभी से पूरा जोर लगा रही है। इस बीच राजस्थान की सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों को अलग से आरक्षण मिलेगा या नहीं इस सवाल पर अशोक गहलोत सरकार ने विधानसभा में इसका जवाब दिया है। राजस्थान सरकार ने मंगलवार को कहा कि राज्य की सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों को अलग से आरक्षण देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल में राज्य की भर्तियों में स्थानीय लोगों को आरक्षण संबंधी सवाल का जवाब देते हुए यह जानकारी दी।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">भर्ती का आधार सिर्फ राष्ट्रीयता </span></strong><br />
शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने कहा- सभी सेवा नियमों में &#8216;राष्ट्रीयता&#8217; के नियम के तहत कर्मचारी के भारत का नागरिक होने का प्राविधान है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 16 (2) के अनुसार, निवास स्थान के आधार पर सार्वजनिक नियोजन में भेदभाव नहीं किया जा सकता है। निवास स्थान के आधार पर सार्वजनिक नियोजन में विधिक प्राविधान करने का अधिकार अनुच्छेद 16 (3) के अनुसार केवल संसद को है। राज्य में मौजूदा वक्त में ऐसा कोई प्रस्&#x200d;ताव विचाराधीन नहीं है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">फिर भी 64 फीसदी पदों पर लोकल की भर्ती </span></strong><br />
इसके साथ ही उन्होंने सदन को सूचित किया कि मौजूदा वक्त में प्रदेश की भर्तियों में स्&#x200d;थानीय लोगों के लिए अलग से आरक्षण का कोई प्राविधान नहीं है, लेकिन राज्&#x200d;य के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/पिछड़ा वर्ग/ अति पिछड़ा वर्ग/आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की कुल भर्तियों में से 64 फीसदी पदों को केवल राजस्&#x200d;थान के स्&#x200d;थानीय निवासीयों से भरे जाने का प्राविधान है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">भाजपा ने की घेरने की कोशिश </span></strong><br />
दरअसल, भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी ने पूछा था की सूबे की भर्तियों में स्थानीय लोगों को कितना फीसदी आरक्षण देय है। क्या सरकारी भर्तियों में स्थानीय लोगों को आरक्षण देने का विचार रखती है? मालूम हो कि राजस्थान में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसे देखते हुए अशोक गहलोत की सरकार पर हमले का कोई मौका नहीं चूक रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस भी तगड़ा पलटवार कर रही है। हालांकि कांग्रेस के साथ समस्या यह आ रही है कि अक्सर पार्टी के भीतर गहलोत और पायलट के बीच की खींचतान सामने आने लग रही है। भाजपा इन खींचतान पर जमकर तंज कस रही है।</p>
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		<title>RSMSSB CET: परीक्षा केंद्र में लड़कियों के दुपट्टे उतरवाए</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Feb 2023 09:07:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर। राजस्थान में समान पात्रता परीक्षा आज सीनियर सेकेंडरी लेवल शनिवार से शुरू हुई। गहन जांच के बाद अभ्यर्थियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश व एग्जाम सेंटर पर एंट्री मिली। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए है। हालांकि, कई परीक्षा केंद्रों पर लड़कियों के दुपट्टे उतरवाए जाने पर परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों ने नाराजगी जताई। सुरक्षा &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">जयपुर। </span></strong>राजस्थान में समान पात्रता परीक्षा आज सीनियर सेकेंडरी लेवल शनिवार से शुरू हुई। गहन जांच के बाद अभ्यर्थियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश व एग्जाम सेंटर पर एंट्री मिली। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए है। हालांकि, कई परीक्षा केंद्रों पर लड़कियों के दुपट्टे उतरवाए जाने पर परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों ने नाराजगी जताई। सुरक्षा के नाम पर कई परीक्षा केंद्रों पर एक से दो मिनट लेट हुए परीक्षार्थियों को भी अंदर दाखिल नहीं होने दिया गया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/those-announcements-of-cm-ashok-gehlot-which-can-be-helpful-in-getting-the-government-repeated-in-2023/12616/">राजस्थान चुनाव 2023ः जादूगर की वो सौगात जिससे रिपीट हो सकती है सरकार</a></strong></p>
<p>राजस्थान में समान पात्रता परीक्षा आज सीनियर सेकेंडरी लेवल शनिवार से शुरू हुई। गहन जांच के बाद अभ्यर्थियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश व एग्जाम सेंटर पर पर एंट्री मिली। परीक्षा से ठीक एक घंटे पहले ही प्रवेश द्वार को बंद कर दिया गया। जिसके कारण कई अभ्यर्थियों को मायूस लौटना पड़ा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/student-dies-after-falling-from-sixth-floor-of-hostel/12613/">मोबाइल पर दोस्तों संग खेल रहा था गेम, छठी मंजिल से गिरकर मौत</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">सुरक्षा के इंतजाम सख्त</span></strong><br />
परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों के अलावा यहां लगे हुए पर्यवेक्षकों और जांचकर्ताओं को भी मोबाइल इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी गई। महिला अभ्यर्थियों के दुपट्टे, बक्कल आदि भी खुलवाए गए। सेंटर पर अभ्यर्थियों के साथ-साथ यहां तैनात कर्मचारियों के भी मोबाइल फोन स्विच ऑफ करवा दिए गए। परीक्षा से ठीक एक घंटे पहले एग्जाम सेंटर के गेट को बंद कर दिया गया। कई अभ्यर्थी एग्जाम सेंटर के नाम की गफलत में इधर-उधर भटकते रहे, जो अभ्यर्थी पहली पारी में 8:00 बजे के बाद परीक्षा केंद्र पर पहुंचे, उन्हें मायूस ही लौटना पड़ा। जयपुर के कुछ परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थी 8 बजे के बाद मन्नत करते नजर आए। लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। बता दें कि प्रदेश के 828 परीक्षा केंद्रों पर इसका आयोजन हो रहा है। जिनमें सबसे कम टोंक में 35 और सबसे अधिक जयपुर में 183 सेंटरों पर परीक्षा हो रही है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/vasundhara-raje-said-before-the-assembly-elections-that-she-is-dependent-on-god/12609/">मैं भगवान भरोसे हूं&#8230;! चुनावी साल में ऐसा क्यों बोलीं वसुंधरा राजे</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">परीक्षा दो पारियों में हो रही है</span></strong><br />
वनपाल, छात्रावास अधीक्षक, लिपिक ग्रेड-2, कनिष्ठ सहायक, जमादार ग्रेड-2 और कांस्टेबल के लिए निकलने वाली भर्ती में पात्रता के लिए होने वाले सीईटी (सीनियर सेकेंडरी लेवल) के अभ्यर्थी 4 फरवरी, 5 फरवरी और 11 फरवरी को होने वाली पात्रता परीक्षा में 16 लाख 33 हजार 631 अभ्यर्थी शामिल होंगे। यह परीक्षा 11 जिलों अजमेर, अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, कोटा, श्रीगंगानगर, टोंक और उदयपुर में आयोजित कराई जा रही है। ये परीक्षा दो पारियों में आयोजित हो रही है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/world/pakistan-celebrates-kashmir-solidarity-day-on-5-february/12606/">ना-पाकः खाने को दाने नहीं पर चाहिए कश्मीर&#8230;!</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">नकल रोकने के पुख्ता इंतजाम</span></strong><br />
राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड ने परीक्षार्थियों को ताकीद किया गया है कि वो किसी भी प्रकार से नकल करने का प्रयास न करें। नकल करने के प्रयास में पकड़े जाने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के साथ परीक्षा भी निरस्त की जाएगी। साथ में आगामी भर्ती परीक्षाओं के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। जयपुर के एक सेंटर सुपरिटेंडेंट हनुमान सिंह भाटी ने बताया कि अभ्यर्थियों को त्रिस्तरीय जांच के बाद प्रवेश दिया गया। यहां थर्ड पार्टी से छात्रों की जांच भी कराई गई. इसके अलावा शिक्षक और कर्मचारियों की टीम ने छात्रों की आईडी जांच करने के साथ-साथ बोर्ड की ओर से दिए गए निर्देशों के तहत ड्रेस कोड सुनिश्चित किया गया।</p>
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		<title>नाबार्ड में 177 पदों पर निकली भर्ती, 10 अक्टूबर तक कर सकेंगे अप्लाई</title>
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		<pubDate>Wed, 21 Sep 2022 04:14:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Jaipur नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) में डेवलपमेंट असिस्टेंट सहित समेत 177 पदों पर वैकेंसी निकली है। जिसके लिए 25 से 35 साल तक के ग्रेजुएट कैंडिडेट्स 10 अक्टूबर तक नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट की वेबसाइट www.nabard.org पर जाकर आवेदन कर सकते है। नोटिफिकेशन के अनुसार, नाबार्ड (NABARD) के &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Jaipur</strong></span> नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) में डेवलपमेंट असिस्टेंट सहित समेत 177 पदों पर वैकेंसी निकली है। जिसके लिए 25 से 35 साल तक के ग्रेजुएट कैंडिडेट्स 10 अक्टूबर तक नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट की वेबसाइट <strong><a href="https://www.nabard.org/">www.nabard.org</a></strong> पर जाकर आवेदन कर सकते है।</p>
<p>नोटिफिकेशन के अनुसार, नाबार्ड (NABARD) के इस भर्ती अभियान के द्वारा 177 पदों को भरा जाएगा। इसमें से 173 पद विकास सहायक पद के लिए और 4 विकास सहायक (हिंदी) के लिए हैं।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">सिलेक्शन प्रोसेस</span></strong><br />
उम्मीदवारों का चयन दो स्टेप्स में होगा। पहली स्टेप्स में प्रीलिम्स ऑनलाइन एग्जाम होगी। यह एग्जाम 100 अंकों की होगी जिसका आयोजन 6 नवंबर 2022 को किया जाएगा। वहीं, दूसरी स्टेप्स की परीक्षा के सम्बन्ध में भी जल्द जानकारी उपलब्ध होगी।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">आवेदन शुल्क</span></strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">सामान्य श्रेणी</span></strong> : 400 रुपये<br />
<strong><span style="color: #ff0000;">एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी/ईएक्सएस श्रेणी</span></strong> : कोई शुल्क नहीं देना है। हालांकि सभी श्रेणी के आवेदकों के लिए सूचना शुल्क 50 रुपये रखा गया है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>आयु सीमा</strong></span><br />
उम्मीदवारों की उम्र 21 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। वहीं, आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कैसे करें आवेदन </strong></span><br />
ऑफिशियल वेबसाइट <a href="https://www.nabard.org/">www.nabard.org</a> पर क्लिक करें।<br />
अब करियर टैब के तहत करियर नोटिस पर क्लिक करें।<br />
फिर “विकास सहायक / विकास सहायक (हिंदी) 2022 पदों” के लिए आवेदन लिंक पर क्लिक करें।<br />
इसके बाद रजिस्टर करके लॉग इन करें।<br />
उम्मीदवार फॉर्म भरें। डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें और फीस का भुगतान करें।<br />
अब फॉर्म सबमिट कर दें।</p>
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		<title>Union Budget 2022: मोदी सरकार ने किया 60 लाख नई नौकरियां देने का वादा</title>
		<link>https://tismedia.in/india/union-budget-2022-union-finance-minister-has-promised-60-lakh-new-jobs-in-the-budget-announcement/11456/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=union-budget-2022-union-finance-minister-has-promised-60-lakh-new-jobs-in-the-budget-announcement</link>
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		<pubDate>Tue, 01 Feb 2022 10:28:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@NewDelhi संसद में साल 2022-23 का संघीय बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता प्रोत्साहन के लिए कई घोषणाएं कीं। केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट घोषणा में डिजिटल यूनिवर्सिटी की स्थापना के साथ-साथ 60 लाख नई नौकरियां देने का वादा किया है। सीतारमण ने कहा कि &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/union-budget-2022-union-finance-minister-has-promised-60-lakh-new-jobs-in-the-budget-announcement/11456/">Union Budget 2022: मोदी सरकार ने किया 60 लाख नई नौकरियां देने का वादा</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@NewDelhi</strong> </span>संसद में साल 2022-23 का संघीय बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता प्रोत्साहन के लिए कई घोषणाएं कीं। केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट घोषणा में डिजिटल यूनिवर्सिटी की स्थापना के साथ-साथ 60 लाख नई नौकरियां देने का वादा किया है। सीतारमण ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। हमने 14 विभिन्न सेक्टर में उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास किए हैं। इससे देश में करीब 60 लाख नई नौकरियां सृजित हो पाएंगी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>जानिए, बजट भाषण में शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार से जुड़ी प्रमुख बातें &#8211; </strong></span><br />
&#8211; आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत 16 लाख नौकरियां दी जाएंगी।<br />
&#8211; वहीं, मेक इन इंडिया के तहत 60 लाख नौकरियां आएंगी।<br />
&#8211; कौशल विकास कार्यक्रमों का नई सिरे से शुरू किया जाएगा, ताकि रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकें।<br />
&#8211; नेशनल स्किल क्वालीफिकेशन प्रोग्राम उद्योगों की जरूरत के अनुसार बनाया जाएगा।<br />
&#8211; राज्यों में संचालित औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्रों को भी जरूरत के अनुसार अपग्रेड किया जाएगा।</p>
<p>&#8211;  कोरोना काल में हुए पढ़ाई के नुकसान की भरपाई करेगी पीएम ई-विद्या योजना, 200 एजुकेशन चैनल शुरू होंगे।<br />
&#8211; देश के विभिन्न इलाकों में स्कूली बच्चों की पढ़ाई के दो साल महामारी के कारण बर्बाद हुए हैं। ऐसा फिर न हो इसलिए डीटूएच प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री ई-विद्या योजना के तहत एक चैनल एक क्लास योजना को 12 से 200 टीवी चैनल योजना तक बढ़ाया जाएगा।<br />
&#8211; कक्षा पहली से लेकर 12वीं तक के बच्चों को उनकी क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा सुविधा मुहैया कराई जाएगी।<br />
&#8211; एक डिजिटल विश्वविद्यालय की स्थापना होगी, ताकि डिजिटल टूल्स को बेहतर उपयोग कर सकें।</p>
<p>&#8211;  सभी भारतीय भाषाओं में टीवी, इंटरनेट, रेडियो और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिये गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि शिक्षकों को ई-कंटेंट मिल सके।<br />
&#8211; शहरों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए काम किया जाएगा।<br />
&#8211; पांच शीर्ष शिक्षण संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा दिया जाएगा। इन्हें 25 हजार करोड़ का विशेष फंड दिया जाएगा।<br />
&#8211; एआईसीटीई इन संस्थानों के लिए फैकल्टी और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की देखरेख करेगा।<br />
&#8211; दो लाख आंगनबाड़ी को अपग्रेड किया जाएगा।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/union-budget-2022-union-finance-minister-has-promised-60-lakh-new-jobs-in-the-budget-announcement/11456/">Union Budget 2022: मोदी सरकार ने किया 60 लाख नई नौकरियां देने का वादा</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>रोषः एम.एड संघर्ष समिति ने राजस्थान शिक्षा सेवा नियमों में बदलाव पर जताई आपत्ति</title>
		<link>https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/m-ed-sangharsh-samiti-objected-to-changes-in-rajasthan-education-service-rules/10116/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=m-ed-sangharsh-samiti-objected-to-changes-in-rajasthan-education-service-rules</link>
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		<pubDate>Fri, 23 Jul 2021 13:11:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अभ्यार्थियों को नजरंदाज करने का आरोप लगा एमएड डिग्री धारियों ने सेवा नियमावलियों में किए गए बदलावों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एमएड डिग्री धारी अभ्यार्थियों ने सरकार से मांग की है कि कम शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अभ्यार्थियों को चयनित कर उनके &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>TISMedia@Kota</strong> राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अभ्यार्थियों को नजरंदाज करने का आरोप लगा एमएड डिग्री धारियों ने सेवा नियमावलियों में किए गए बदलावों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एमएड डिग्री धारी अभ्यार्थियों ने सरकार से मांग की है कि कम शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अभ्यार्थियों को चयनित कर उनके प्रशिक्षण पर पैसा खर्च कर न सिर्फ सरकार के खजाने को मोटी चपत लगाई जा रही है, बल्कि प्रदेश के उच्च शिक्षित बेरोजगारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी किया जा रहा है।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/35th-foundation-day-of-vardhman-mahaveer-open-university/10110/">दूरस्थ शिक्षा को सार्थक बनाना है तो ऑनलाइन मोड में करानी होगी पढ़ाईः कलराज मिश्र</a></strong></p>
<p>बदलाऊ प्रकृति का नियम है। बदलाव होना चाहिए। किन्तु कोई भी बदलाव या परिवर्तन परिष्कृत व परिमार्जित रूप में हो तो ही सार्थक है। वर्तमान में राजस्थान सरकार ने सेवा नियमों में बदलाव किया है। सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है। जो नियमावली 1971 में बनी थी वह आज के परिपेक्ष्य में बदलनी चाहिए। यह अच्छी पहल है जो नियम पुराने हो चुके उनमें नयापन जरूरी है।<br />
सभी सेवारत शिक्षकों द्वारा इसका स्वागत भी किया गया। अनुभव का लाभ, नए कैडर का निर्माण, योग्यता में वृद्धि आदि काम किये। जब हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करते है तो निश्चित रूप से योग्यता व अनुभव के आधार पर तय करते है। शिक्षकों की योग्यता के निर्धारण हेतु राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद गठित की गई है। यही परिषद अध्यापकों की योग्यता व प्रशिक्षण के मानदंडों का निर्धारण करती है।सरकार द्वारा सेवा नियमों में जो परिवर्तन किया है, यह परिवर्तन योग्यताओं को नकारते हुए किये गए है। जैसे- सेवारत शिक्षकों में बहुत शिक्षक एम.एड (शिक्षा अधिस्नातक) नेट(राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) विद्या वाचस्पति (PHd) आदि योग्यता रखते है किंतु इनका कोई जिक्र नही किया गया है। जो यह दर्शाता है कि उच्च योग्यताधारी शिक्षकों की योग्यता का लाभ उन्हें नही मिलेगा। जबकि इन योग्यताओं का लाभ निर्धारित करना चाहिए था।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/india/parliament-monsoon-session-2021-tmc-mp-santanu-sen-suspended-for-the-entire-session/10107/">Parliament Monsoon Session 2021: TMC के बवाली सांसद शांतनु सेन पूरे सेशन के लिए सस्पेंड</a></strong></p>
<p>साथ ही राजस्थान में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक शिक्षा के शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण विद्यालय जो कि जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के नाम से जाने जाते है। यह संस्थान प्रारम्भिक शिक्षा के तहत संचालित होते है। इन संस्थानों में एनसीटीई के नियमों की अवहेलना की जा रही है। इन संस्थाओं के लिए सेवा नियमों में कोई स्थान नही है। जबकि राजस्थान में एम.एड की डिग्री करवाई जाती है और एनसीटीई के नियमानुसार डीएलएड संस्थानों में इनकी डिग्री का उपयोग किया जा सकता है। इन प्रशिक्षण संस्थानों के लिए भी सेवा नियम बनाकर स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। जो कि सेवा नियमों से बाहर है। अब तक इन संस्थाओं में प्रतिनियुक्ति पर प्रशिक्षक नियुक्त कर प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्ण करवाया जा रहा है। जो कि नियम विरुद्ध है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण भी जरूरी है। अगर प्रशिक्षण उत्तम होगा तो शिक्षक भी उत्तम ही तैयार होंगे।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/entertainment/cinema/mumbai-crime-branch-raids-shilpa-shettys-house-in-pornography-case/10113/">पोर्नोग्राफी केस में शिल्पा शेट्टी के घर क्राइम ब्रांच का छापा, गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे कुंद्रा</a></strong></p>
<p>शिक्षा जगत में एमएड की डिग्री उपेक्षा का शिकार रही है। इन परिवर्तनों में भी निराशा ही हाथ लगी है। शिक्षा विषय में स्नात्कोत्तर (एम.एड.), राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण योग्यताधारी (नेट) राज्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण योग्यताधारी (सेट), मास्टर ऑफ फिलाॅसफि (एम.फिल.) तथा शिक्षा में डाक्टरेट (पीएच.डी.) जैसी महत्वपूर्ण उपाधियों का राजस्थान में सिवाय निजी महाविद्यालय में नौकरी करने के अलावा और कोई महत्व नहीं है। शिक्षक शिक्षा की इन सभी उच्च डिग्री को वर्ष 1998 से शिक्षा विभाग भूल कर बैठा है। विदित है कि राजस्थान में एक राज्य शैक्षिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान परिषद् (एस.सी.ई आर.टी.), दो राजकीय उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान (आई.ए एस.ई.) तथा 33 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डी.आई ई.टी.) है लेकिन सरकारी सेवाओं में शिक्षक शिक्षा की इन उच्च डिग्रियों का उपयोग नहीं के बराबर है।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/three-friends-murdered-a-young-man-on-suspicion-of-theft-in-kota/10100/">&#8220;जेम्स बॉड&#8221; बनने के चक्कर में तीन दोस्तों ने कर डाली युवक की हत्या, बदलते रहे लाश का ठिकाना</a></strong></p>
<p>वर्ष 1998 से पहले शिक्षा विभाग अपने कार्मिक को एम.एड. के आधार पर प्रमोशन देता था लेकिन 1998 के बाद यह व्यवस्था समाप्त कर दी गयी। नतीजन आज पिछले 22 सालों से राजस्थान में एम.एड. जैसी उच्च योग्यता उपेक्षित हो रही है। वर्ष 2015 से वर्मा समिति की सिफारिश के पश्चात बी.एड. का पाठ्यक्रम दो वर्ष का करके बी.एड. को उच्च शिक्षा में शामिल कर लिया गया था वहीं दूसरी ओर अनुदानित बी.एड. शिक्षकों के लिए सरकार ने पांच शासकीय बी.एड. काॅलेज स्थापित किए थे जो शिक्षक शिक्षा के सेवानियम के अभाव में बन्द हो गए। आज हमारे राज्य की शिक्षक शिक्षा दोहरे नियम पर चल रही है जहां एक ओर निजी बी.एड. काॅलेज उच्च शिक्षा आयुक्तालय जयपुर के अधीन है वहीं राजकीय उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान शिक्षा निदेशालय स्कूल शिक्षा बीकानेर के अन्तर्गत संचालित है। इन संस्थानों को लेकर भी नियमावली में कोई स्थान नही दिए गया।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/three-senior-mbbs-students-of-kota-medical-college-were-suspended-for-ragging-with-juniors/10060/">कोटा मेडिकल कॉलेज रैगिंग: MBBS के तीन सीनियर्स को 1 महीने के लिए किया सस्पेंड</a></strong></p>
<p>राजस्थान में शिक्षक शिक्षा के सेवानियम बनाए जाए। राज्य शैक्षिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान परिषद्, राजकीय उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रति नियुक्तियां बद हो एवं एनसीटीई अनुसार सेवा नियमावली का निर्माण किया जाना चाहिए था। जो नही किया।डॉ राजेन्द्र श्रीमाली, डॉ प्रभु दयाल, डॉ प्रशांत गुर्जर, डॉ प्रेमलता, राम बाबू जांगीड़, महेंद्र सिंह गुर्जर, महावीर पूनिया, डॉ दमोदर प्रसाद, अनिल पारगी, डॉ मनोज मेहता आदि सदस्यों ने रोष व्यक्त किया। सभी सदस्यों ने बताया कि जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जो कि शिक्षा निदेशालय बीकानेर द्वारा संचालित है। इनके लिए सेवा नियमों जगह न देना। गुणवत्ता पूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण के प्रति सरकार की उदासीनता जाहिर होती है। जबकि यहाँ पर सेवापूर्व व सेवारत शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाता है।<br />
अतः सरकार को चाहिए कि सेवा नियमों के बदलाव पर पुनर्विचार करें। निश्चित रूप से शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र के बदलावों का फायदा भावी पीढ़ी को मिलेगा। अन्यथा गुणवत्ता के अभाव में भावी पीढ़ी किस ओर जाएगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।</p>
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		<title>युवाओं की दक्षता और कौशल पर निर्भर करती है किसी भी देश और प्रदेश की तरक्कीः गहलोत</title>
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		<pubDate>Thu, 15 Jul 2021 16:34:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota किसी भी देश और प्रदेश की तरक्की उसकी युवा शक्ति के कौशल और दक्षता पर निर्भर करती है। हमारे युवाओं ने पूरी दुनिया में अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है। राज्य सरकार तकनीक एवं नवाचारों के साथ युवाओं को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न विधाओं में दक्ष बनाने का हरसंभव प्रयास कर रही है। प्रदेश &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/ashok-gehlot-government-engaged-in-providing-employment-by-skill-development-of-youth-in-rajasthan/9952/">युवाओं की दक्षता और कौशल पर निर्भर करती है किसी भी देश और प्रदेश की तरक्कीः गहलोत</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto"><strong>TISMedia@Kota </strong>किसी भी देश और प्रदेश की तरक्की उसकी युवा शक्ति के कौशल और दक्षता पर निर्भर करती है। हमारे युवाओं ने पूरी दुनिया में अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है। राज्य सरकार तकनीक एवं नवाचारों के साथ युवाओं को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न विधाओं में दक्ष बनाने का हरसंभव प्रयास कर रही है। प्रदेश में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए कई संस्थानों की स्थापना के साथ ही महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। सूबे में हर हाथ को काम मिलेगा ऐसा हमारा वायदा है। विश्व कौशल विकास दिवस के अवसर पर वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कही।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का समय स्वरोजगार से जुड़ने और स्वावलम्बी बनने का है। प्रदेश के युवा अपनी इच्छा और क्षमता के अनुरूप कौशल विकास करते हुए आगे बढ़ें। राज्य सरकार उन्हें प्रोत्साहन देने में कोई कमी नहीं रखेगी। निर्देश दिए कि युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए नामी कम्पनियों के साथ सम्पर्क स्थापित किया जाए। बाजार की मांग के अनुसार अच्छे कोर्स तैयार कर युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/rajasthan/ashok-gehlot-has-absolute-majority-in-rajasthan-assembly/9329/">राजस्थानः मस्त रहिए, गहलोत सरकार पर कोई खतरा नहीं है&#8230;</a></strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>आईटी के क्षेत्र में बढ़ना होगा आगे </strong></div>
<div dir="auto">पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने देश को मजबूत, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनाने के लिए युवा शक्ति की प्रतिभा के उपयोग पर जोर दिया था। उनका मानना था कि दुनिया के विकसित राष्ट्रों के बराबर खड़ा होने के लिए हमें विज्ञान और तकनीक का भरपूर उपयोग करने के साथ ही हमारी शिक्षा को व्यावसायोन्मुखी बनाना होगा। यह गर्व का विषय है कि हमारे युवाओं ने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया के विकसित देशों को पीछे छोड़ दिया है। हमें इसी तरह अन्य क्षेत्रों में भी पूरी दक्षता के साथ आगे बढ़ना होगा। राज्य सरकार दूर-दराज गांवों तक शिक्षण-प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। राज्य में करीब 2 हजार आईटीआई का मजबूत ढांचा उपलब्ध है और इस दृष्टि से राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है। प्रदेश के युवा इनका लाभ लेकर अपनी प्रतिभा को निखारें।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/bjp-will-fight-the-next-assembly-elections-under-the-leadership-of-yogi-adityanath-pm-modi-announced/9945/">काशी पहुंचे मोदीः बोले, हर-हर योगी, घर-घर योगी&#8230;</a></strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>सम्मानित की गईं प्रतिभाएं </strong></div>
<div dir="auto">इस अवसर पर राजस्थान कौशल और आजीविका विकास निगम की नवीन योजनाओं सक्षम, समर्थ एवं राजक्विक के पोस्टर, स्वरोजगार ऋण योजना की पुस्तिका, निगम के वार्षिक न्यूज लेटर ‘दक्ष‘, रोजगार विभाग द्वारा प्रकाशित रोजगार संदेश तथा योजनाओं की जानकारी से संबंधित नए जैकेट का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में स्किल आइकन एवं स्किल एम्बेसडर के साथ संवाद करने के साथ ही विभिन्न जिलों के स्किल आइकन, स्किल एम्बेसडर एनसीवीटी टॉपर एवं ब्राण्ड एम्बेसडर को वर्चुअल रूप से सम्मानित भी किया गया।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/woman-alleges-rape-against-joint-labor-commissioner-kota-pradeep-jha/9928/">दिल्ली के वीवीआईपी ठिकाने राजस्थान हाउस में बलात्कार! संयुक्त श्रम आयुक्त पर लगे आरोप</a></strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>कोटा के ब्रांड अंबेसडर को मिला सम्मान </strong></div>
<div dir="auto">आईटीआई प्राचार्य राजेश गुप्ता ने बताया कि वर्चुअल कार्यक्रम में कोटा जिले के ब्रांड एम्बेसडर रवि जाटव का प्रमाण पत्र, ब्लेज़र एवं ट्रॉफी देकर सम्मान किया गया। रवि जाटव अभी इसरो तिरुअनंतपुरम केरल के ड्राफ्ट्समैन के पद पर कार्यरत है। उन्होंने राजकीय आईटीआई कोटा से आईटीआई की थी। उनका सम्मान उनके पिता एवं माताजी रामस्वरूप जी जाटव एवं दुलारी बाई ने लिया। साथ ही राजकीय आईटीआई सांगोद से पूरे राजस्थान के आईटीआई परीक्षा के टॉपर मुकेश चारण वेल्डर ट्रेड से एवं मनीष पंकज इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड को भी प्रमाण पत्र एवं ट्रॉफी दी गई।</div>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/ashok-gehlot-government-engaged-in-providing-employment-by-skill-development-of-youth-in-rajasthan/9952/">युवाओं की दक्षता और कौशल पर निर्भर करती है किसी भी देश और प्रदेश की तरक्कीः गहलोत</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<item>
		<title>श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है: संतोष गंगवार</title>
		<link>https://tismedia.in/jobs/santosh-gangwar-said-government-is-committed-to-the-health-safety-and-welfare-of-workers/9276/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=santosh-gangwar-said-government-is-committed-to-the-health-safety-and-welfare-of-workers</link>
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		<pubDate>Tue, 22 Jun 2021 07:14:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@नई दिल्ली. श्रम और रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने महामारी के दौरान श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों के कल्याण के उपायों की विस्तृत जानकारी वाली पुस्तिका जारी की। श्रम और रोजगार मंत्री श्री संतोष गंगवार ने कहा कि सरकार श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। कोरोना महामारी के दौरान श्रमिकों &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/jobs/santosh-gangwar-said-government-is-committed-to-the-health-safety-and-welfare-of-workers/9276/">श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है: संतोष गंगवार</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@नई दिल्ली.</strong></span> श्रम और रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने महामारी के दौरान श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों के कल्याण के उपायों की विस्तृत जानकारी वाली पुस्तिका जारी की। श्रम और रोजगार मंत्री श्री संतोष गंगवार ने कहा कि सरकार श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। कोरोना महामारी के दौरान श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों के कल्याण के लिए केंद्रीय श्रम मंत्रालय की ओर से उनके हित में उठाए कदमों की विस्तृत जानकारी देने के लिए तैयार की गई पुस्तिका जारी करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर केन्द्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि सुविधाएं उन लोगों तक हर हाल में पहुंचे, जिनके लिए इन्हें तैयार किया गया हैं। मंत्री ने आगे कहा कि महामारी के चलते पैदा हुए हालातों के बारे में सरकार को पूरी जानकारी है। इसीलिए उनके हित में कोई भी फैसला लेने से नहीं चूक रही। इस चुनौतीपूर्ण समय में जरूरत होने पर मंत्रालय श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा करने और उन्हें कठिनाइयों से बचाने के लिए लचीले और उत्तरदायी तरीके से अतिरिक्त उपाय करना जारी रखेगा।</p>
<p>संतोष गंगवार ने आगे कहा कि मंत्रालय ने नियोक्ताओं पर बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय दायित्व के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभों को व्यापक और विस्तृत करने के साथ आगे बढ़ाया है। ईएसआईसी और ईपीएफओ योजनाओं के तहत सामाजिक सुरक्षा के प्रावधानों में अब और अधिक ढील दी गई है और इसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी के बढ़ते संक्रमण और मृत्यु के चलते अपने परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य व जीवन के बारे में श्रमिकों के भय और चिंता को दूर करना है।</p>
<p>ईपीएफओ की कर्मचारी जमा सहबद्ध बीमा योजना (ईडीएलआई) के तहत इसके सदस्यों के परिवार के सभी जीवित आश्रित सदस्य, बीमित सदस्य की मृत्यु होने पर ईडीएलआई का लाभ लेने के पात्र हैं। वर्तमान में, इस योजना के तहत कर्मचारी की मौत के मामले में दिए गए लाभों का विस्तार किया गया है। अब ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए न्यूनतम सेवा की जरूरत नहीं है, पारिवारिक पेंशन का भुगतान ईपीएफ और एमपी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किया जा रहा है, कर्मचारी के बीमार होने और कार्यालय न आने की स्थिति में साल में 91 दिनों के लिए बीमारी लाभ के रूप में कुल मजदूरी का 70 फीसदी का भुगतान किया जाता है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>मंत्रालय की ओर से जारी एक हालिया अधिसूचना में निम्नलिखित संशोधन भी शामिल किए हैं:</strong></span><br />
मृतक कर्मचारी के परिजनों को मिलने वाली अधिकतम लाभ राशि को 6 लाख से बढ़ाकर 7 लाख कर दिया गया है।<br />
मृतक कर्मचारियों के पात्र परिवार के सदस्यों को 2.5 लाख रुपये का न्यूनतम आश्वासन लाभ, जो अपनी मौत से पहले एक या अधिक प्रतिष्ठानों में 12 महीने की निरंतर अवधि के लिए सदस्य था। मौजूदा प्रावधान में एक प्रतिष्ठान में 12 महीने तक लगातार रोजगार का प्रावधान है। इससे अनुबंधित/अनौपचारिक मजदूरों को लाभ होगा जो एक प्रतिष्ठान में लगातार एक वर्ष तक काम करने की स्थिति के कारण लाभ से वंचित थे।</p>
<p>15 फरवरी 2020 से पहले के प्रावधान के मुताबिक न्यूनतम 2.5 लाख रुपये मुआवजे के प्रावधान की बहाली।<br />
आगामी 3 वर्षों में, एक्चुअरी ने अनुमान लगाया है कि पात्र परिवार के सदस्यों को वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक ईडीएलआई फंड से 2185 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।</p>
<p>योजना के तहत मृत्यु के कारण होने वाले दावों की संख्या प्रति वर्ष लगभग 50,000 परिवार होने का अनुमान लगाया गया है। इसमें लगभग 10,000 श्रमिकों की अनुमानित मौत को भी शामिल किया गया है, जो कोविड के कारण हो सकती है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, ईएसआईसी के तहत बीमित व्यक्तियों (आईपी) के लिए, मौत या काम की वजह से चोट के कारण बीमित व्यक्ति की अक्षमता के बाद श्रमिक की औसत दैनिक मजदूरी के 90 फीसदी के बराबर पेंशन पति या पत्नी और विधवा मां को जीवनभर के लिए और बच्चों के लिए 25 वर्ष की उम्र होने तक के लिए उपलब्ध है। वहीं, बच्ची (लड़की) के लिए यह उनकी शादी होने तक के लिए है।</p>
<p>ईएसआईसी योजना के तहत बीमित व्यक्तियों (आईपी) के परिवारों की सहायता करने के लिए, यह निर्णय लिया गया है कि आईपी के परिवार के सभी आश्रित सदस्य जो ईएसआईसी के ऑनलाइन पोर्टल में कोविड बीमारी के निदान और इस रोग के कारण बाद में मौत से पहले पंजीकृत हैं, उन्हें भी काम के दौरान मरने वाले बीमित व्यक्तियों के आश्रितों को प्राप्त होने वाले लाभ और इसे समान स्तर पर ही हासिल करने के हकदार होंगे। यह निम्नलिखित पात्रता शर्तों के अधीन होगा :</p>
<p>आईपी को ईएसआईसी ऑनलाइन पोर्टल पर कोविड रोग के निदान और इसके चलते होने वाली मौत से कम से कम तीन महीने पहले पंजीकृत होना चाहिए।<br />
बीमित व्यक्ति निश्चित तौर पर वेतन के लिए नियोजित होना चाहिए और मृतक बीमित व्यक्ति के संदर्भ में कोविड रोग का पता चलने, जिससे मौत हुई हो, ठीक पूर्ववर्ती एक साल के दौरान कम से कम 78 दिन का अशंदान होना चाहिए।<br />
बीमित व्यक्ति, जो पात्रता की शर्तों को पूरा करते हैं और कोविड बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गई है, उनके आश्रित अपने जीवन के दौरान बीमित व्यक्ति के औसत दैनिक वेतन का 90 फीसदी मासिक भुगतान प्राप्त करने के हकदार होंगे। मृतक श्रमिक की पत्नी भी प्रति वर्ष 120 रुपये के मामूली योगदान पर चिकित्सा देखभाल के लिए पात्र है। यह योजना कोविड-19 से ठीक होने के बाद 30 दिनों के भीतर होने वाली कोविड-19 से संबंधित मौतों को भी कवर करती है। यह योजना 24 मार्च, 2020 से दो वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी होगी।</p>
<p>संतोष गंगवार ने कहा कि ईएसआईसी के लिए 15 दिनों के भीतर और ईपीएफओ के लिए 7 दिनों से कम समय में शिकायतों का समाधान किया जाएगा।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>शिकायतों के निवारण के बारे में विवरण पाया जा सकता है &#8211;</strong></span></p>
<p>ईएसआईसी के लिए निम्नलिखित लिंक पर:</p>
<p><em><span style="color: #0000ff;"><strong><a style="color: #0000ff;" href="https://www.esic.nic.in/">www.esic.nic.in</a></strong></span></em></p>
<p>ईपीएफओ के लिए निम्नलिखित लिंक पर:</p>
<p><em><strong><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://www.epfindia.gov.in/site_docs/PDFs/Downloads_PDFs/WhatsApp_Helpline%E0%A5%A4pdf">https://www.epfindia.gov.in/site_docs/PDFs/Downloads_PDFs/WhatsApp_Helpline।pdf</a></span></strong></em></p>
<p>इस अवसर पर श्रम सचिव अपूर्व चंद्रा, वरिष्ठ श्रम और रोजगार सलहकार डी. पी. एस. नेगी, संयुक्त सचिव (श्रम व रोजगार) आर के गुप्ता और विशेषकार्याधिकारी पीके गुप्ता भी मौजूद थे।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/jobs/santosh-gangwar-said-government-is-committed-to-the-health-safety-and-welfare-of-workers/9276/">श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है: संतोष गंगवार</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>इटली की कंपनी करेगी निर्यात गुणवत्ता के दुग्ध उत्पाद तैयार करने के लिए 165 करोड़ का निवेश, मिलेगा 5000 लोगों को रोजगार</title>
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		<pubDate>Sun, 30 May 2021 08:39:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@कोटा. देवनारायण नगर एकीकृत आवासीय योजना यूआईटी की ओर से विकसित की जा रही है। इस योजना में इटली के एक ग्रुप के एक्पोर्ट क्वालिटी के दुग्ध अत्पाद तैयार करने की प्रस्तावित परियोजना से लगभग 5000 लोगों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकेगा। इस परियोजना में 165 करोड़ रुपए के निवेश करने का प्रस्ताव है। &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/italian-company-will-invest-165-crore-in-devnarayan-nagar-ekikrat-yajna-in-kota/8828/">इटली की कंपनी करेगी निर्यात गुणवत्ता के दुग्ध उत्पाद तैयार करने के लिए 165 करोड़ का निवेश, मिलेगा 5000 लोगों को रोजगार</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@कोटा.</strong> </span>देवनारायण नगर एकीकृत आवासीय योजना यूआईटी की ओर से विकसित की जा रही है। इस योजना में इटली के एक ग्रुप के एक्पोर्ट क्वालिटी के दुग्ध अत्पाद तैयार करने की प्रस्तावित परियोजना से लगभग 5000 लोगों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकेगा। इस परियोजना में 165 करोड़ रुपए के निवेश करने का प्रस्ताव है। शनिवार को ग्रुप ने प्रस्तावित भूमि का अवलोकन कर अपनी डीपीआर यूआईटी को पेश की।</p>
<p>जानकारी के अनुसार इटली के शर्मा ग्रुप के प्रतिनिधिमंडल ने देवनारायण आवासीय योजना में एक्सपोर्ट क्वालिटी के दुग्ध अत्पादों को तैयार करने के लिए माईक्रो और लघु डेयरी क्लस्टर बनाने का प्रस्ताव पेश किया है। शनिवार को ग्रुप के प्रेसिडेंट शिव बिहारी शर्मा, डायरेक्टर गिर्राज प्रसाद शर्मा, प्रोमोटर विजय मेहता, चार्टर्ड अकाउंटेंट हार्दिक बिनायका, बद्रीप्रसाद राव और राहुल कुमार मीणा ने प्रस्तावित माइक्रो और लघु डेयरी क्लस्टर योजना के लिए प्रस्तावित भूमि का अवलोकन किया।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/kota-news/truck-and-moped-accident-in-kota-elderly-woman-died/8825/">प्याज से भरे ट्रक ने मारी मोपेड सवार बुजुर्ग दम्पति को टक्कर, ट्रक का पहिया गर्दन पर चढ़ने से महिला की मौके पर मौत</a></span></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>234 माइक्रो और स्मॉल यूनिट होंगे तैयार</strong></span><br />
कंपनी ने 9 हेक्टयर विकसित और 5.25 हेक्टेयर अविकसित भूमि के प्रावधान का उपयोग मानते हुए माइक्रो ओर लघु डेयरी क्लस्टर योजना के लिए डीपीआर प्रस्तुत की है। जिसके मुताबिक योजना में 165 करोड़ का निवेश करने का प्रस्ताव किया गया है। योजना में 234 माइक्रो और स्मॉल यूनिट तैयार किए जाएंगे। जहां एक्सपोर्ट क्वालिटी के विभिन्न दुग्ध उत्पाद जैसे पैकेज्ड मिल्क, सोया मिल्क, फ्लेवर्ड मिल्क, पनीर, चीज, योगर्ट, दही, बटर मिल्क, मावा, खोया, मिल्क चोकलेट, टोफू पनीर, मिठाईयां, आईसक्रीम, क्रीम और शुद्ध घी तैयार होंगे।</p>
<p>इस योजना से लगभग 5 हजार लोगों को प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। जानकारी के मुताबिक एसपीवी का गठन ‘देवनारायण स्मार्ट एन्टरप्राइजेज पार्क’ के नाम से करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके माध्यम से परियोजना का क्रियान्वयन होगा। इस परियोजना से देवनारायण योजना के पशुपालकों से घर-घर जाकर दूध का संकलन किया जाएगा। साथ ही पशुओं का टीकाकरण और चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। इसमें उत्तम क्वालिटी का पशु आहार भी पशुपालकों को डोहस्टेप पर उपलब्ध करवाया जाएगा और पशुपालकों को पशुपालन से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/tis-utility/health/covid-19-cases-today-in-india-more-than-1-65-lakh-new-positive/8822/">#IndiaFightCovid: देश में 3460 संक्रमितों की मौत, 1.65 लाख नए पॉजिटिव मिले</a></span></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>उद्यमियों को मिलेगी यह सुविधाएं</strong></span><br />
उद्यमियों को तकनीकी ट्रेनिंग, प्रोडक्ट के क्वालिटी कंट्रोल, मार्केटिंग, प्रशिक्षण, महंगे उपकरण, पैकिंग मशीन, लैब और कॉमन फैसिलिटी प्रदान की जाएगी। इसमें यूआईटी के सलाहकार आरडी मीणा, सचिव राजेश जोशी, उपसचिव चंदन दुबे, एक्सईएन राजेंद्र कुमार राठौर, मुख्य लेखाधिकारी टीपी मीणा, उपनगर नियोजक महावीर सिंह मीणा आदि मौजूद रहे।</p>
<p>इसके अलावा कॉमन चिलिंग प्लांट, वेयरहाउस, कॉमन पैकिंग मशीन, मार्केटिंग, ट्रांसपोर्ट जैसी सुविधाएं भी दी जाएगी। इस परियोजना का कार्य 9 से 12 महीने में पूर्ण कर लिया जाएगा। न्यास सलाहकार आर.डी. मीणा ने माइक्रो और स्मॉल यूनिट में काम करने वाले श्रमिकों को प्रत्येक यूनिट में आवास सुविधा देने और डीपीआर में इस तरह के प्रावधान करने, जो पशुपालकों को ज्यादा से ज्यादा लाभ हो और वे इस योजना के लिए आकर्षित हो आदि के सुझाव दिए।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/italian-company-will-invest-165-crore-in-devnarayan-nagar-ekikrat-yajna-in-kota/8828/">इटली की कंपनी करेगी निर्यात गुणवत्ता के दुग्ध उत्पाद तैयार करने के लिए 165 करोड़ का निवेश, मिलेगा 5000 लोगों को रोजगार</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>तनाव से मुक्ति, जीवन में तंदरुस्ती</title>
		<link>https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-nidhi-prajapati-on-stress-management-of-students/8481/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=article-by-dr-nidhi-prajapati-on-stress-management-of-students</link>
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		<pubDate>Wed, 19 May 2021 07:21:13 +0000</pubDate>
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<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-nidhi-prajapati-on-stress-management-of-students/8481/">तनाव से मुक्ति, जीवन में तंदरुस्ती</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<div class="box info  aligncenter">
			<div class="box-inner-block">
				<span class="fa tie-shortcode-boxicon"></span>बीते कुछ वर्षों में, विद्यार्थी जीवन के सम्पूर्ण प्रतिमान बदल गए है | वर्तमान में चल रही नौकरी व एडमिशन के कॉम्पिटिशन के अंधाधुंध दौड़ में विद्यार्थियों ने अपना वो जीवन जीना ही छोड़ दिया है जो हमारे दादा परदादाओं ने जिया था | पहले जहाँ विद्यार्थी गुरुकुल के आश्रम के जाकर शिक्षा 24 घंटे वही रहकर गुरूजी के सानिध्य में ग्रहण करता था वही शिक्षा अब विद्यालयों में 5-6 घंटों में सिमट गई है आज विद्यालयों और महाविद्यालयों का स्थान कोचिंग संस्थानों ने ले लिया है |
			</div>
		</div>
	
<p>पहली कक्षा से लेकर 12वीं व कॉलेज के विद्यार्थी कोचिंग का रास्ता चुन रहा है | बच्चा स्कूल कम और कोचिंग संस्थानों के चक्कर ज्यादा कटता नजर आता है जिसमें राजस्थान का कोटा शहर आई.आई.टी., जे.ई.ई., नीट, एम्स की कॉम्पिटिशन परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक लोकप्रिय कोचिंग गंतव्य के रूप में उभरा है जहाँ व्यापक रूप से कोचिंग संस्थानों में पूरे देश और पड़ौसी देशों के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है, वही दिल्ली, बेंगलोर, मुंबई, पुणे, कोलकाता, प्रयागराज, जयपुर, लखनऊ, पटना, इंदौर, हैदराबाद आदि यू.पी.एस.सी. की तैयारी के लिए अपनी पहचान बना चुके है | लेकिन यहाँ की बेस्ट फैकल्टी, बेस्ट कोर्स मटेरियल, बेस्ट रिजल्ट्स, बेस्ट रहने की सुविधाएँ, बेस्ट वातावरण, बेस्ट खाना आदि होने के बावजूद भी बहुत से विद्यार्थी अपने अध्ययन और प्रवेश परीक्षा के समय गंभीर तनाव के शिकार हो जाते है और सही समय पर काउन्सलिंग न मिल पाने व परिणामों के दबाव के चलते उनका तनाव बढता चला जाता जिसके परिणामस्वरुप विद्यार्थियों को अनेकों अनेक मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक, मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक नकारात्मक परिवर्तन झेलने पड़ते है | कई पढ़ाई के दौरान अपनी तैयारी छोड़ देते है, तो कई अपने घर वापस चले जाते, कई तो बहुत ही कठोर कदम उठाते हुए अपनी जीवन लीला ही आत्महत्या करके समाप्त कर देते है | वर्तमान में भी कोरोना के संक्रमण के कारण दीर्घकालीन समय से बंद हुई शिक्षण गतिविधियाँ, बार-बार स्थागित होने वाली यूनिवर्सिटी, यू.पी.एस.सी., आई.आई.टी., जे.ई.ई., नीट, एम्स, बोर्ड परीक्षाओं से विद्यार्थियों का तनाव बहुत बढता जा रहा है | ये तनाव एक स्तर पर प्रेरणा का कार्य करता है परन्तु इसकी मात्रा बढ़ने पर यह जानलेवा हो जाता है ऐसे में यह नितांत आवश्यक है की विद्यार्थियों के तनाव को दूर किया जाये जिससे उनके बढ़ते हुए तनाव का हल मिल सके और वे अपनी क्षमताओं का अधिकतम उपयोग कर सकें |</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/tis-utility/environment/article-by-kirti-sharma-on-human-activities-has-destroyed-the-environment/8377/">मानव जाति को पड़ा महंगा पर्यावरण के साथ खिलवाड़</a></span></span></strong></p>
<p><strong>योग:</strong> विद्यार्थियों के तनाव को कम करने के लिए सबसे सरल, सटीक और सीधा रास्ता है योग, शांतिपूर्ण व चिंतारहित जीवन जीने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को योग करना चाहिए । योग अभ्यास सकारात्मक और रचनात्मक विचारों के साथ शरीर और मन को विकसित करने और नियंत्रित करने में मदद करता है | यह विद्यार्थियों की सहज क्षमता को बढ़ाता है साथ ही इसकी समझ भी देता है की क्या सही है और क्या गलत क्या करना चाहिए और क्या नहीं, सकारात्मक परिणाम कैसे प्राप्त किये जा सकते है प्राप्त करने के लिए क्या, कैसे और कब किया जाना चाहिए । यह योग ही है जो सकारात्मक रूप से साथियों, शिक्षकों, अभिभावकों और रिश्तेदारों के साथ जुड़ाव को बढ़ा सकता है | यह मन को प्रफुल्लित और शांत रखने से संबंधित है | यह जीवन से निराशा की चिंता का दूर करते हुए हमारे जीवन और शरीर के साथ हमारा सम्बन्ध स्थापित करता है | विभिन्न प्रकार की योग मुद्राएँ मन और तन दोनों की दुःख तकलीफ समाप्त करती है | डॉक्टरों का सुझाव है कि तनाव से जूझ रहे छात्रों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की भलाई के लिए योग करना चाहिए यह उनके लिए रामबाण के समान कार्य करेगा | यह मन व शरीर उत्कृष्ट शक्ति, संवेदनशीलता, जागरूकता, शांति व लचीलापन प्रदान करता है साथ ही असाधारण व्यक्तित्व का निर्माण करता है |<br />
<strong>ध्यान:</strong> योग साथ समानांतर स्तर पर तनाव को दूर करने का और अपनी आंतरिक दुनिया में झाँकने का साधन है ध्यान | ध्यान विश्राम, पूर्ण विश्राम और सभी गतिविधियों का पूर्ण विराम है- शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक। ध्यान का अर्थ है अपनी विचार प्रक्रिया से जो शेष, अशांत, शांत, जीवन है जो बीत गया और जो भी बीत रहा है उसे देखना । &#8220;छात्रों को ध्यान के बारे में बहुत जागरूक होना चाहिए, उन्हें जीवन का आनंद और आनंद के साथ आनंद लेने के लिए इसे सीखना चाहिए । उन्हें खुद के बारे में पता होना चाहिए कि उनकी आंतरिक आत्मा में क्या चल रहा है | ध्यान, विद्यार्थियों को यह सिखाता कि वे दिमाग से न लड़ें, इसे नियंत्रित करने की कोशिश न करें। जो कुछ भी वे कर रहे हैं वह सिर्फ उसका ध्यान रख सकते है । जीवन जो स्वाभाविक है और उन्हें दुर्घटनाओं के प्रति उदासीन रवैया दिखाना होगा । फिर कुछ भी गलत या अच्छा, बदसूरत या सुंदर, कठोर या नरम नहीं होगा । ध्यान की मदद से, छात्र निर्णय लें सकेंगे । ध्यान रिफ्रेशिंग, कायाकल्प करने वाला होता है और छात्रों को जागरूक करता है कि वे क्या हैं? और क्या कर सकते हैं । ध्यान के बाद छात्रों को मन से मुक्त किया जाएगा । वे किसी भी पूर्वाग्रह से खुद को आंक सकते हैं ।<br />
<strong>हॉबी का साथ:</strong> छात्रों को अपने जीवन में कम से कम अपना एक शौक रखना चाहिए । हॉबी उनके सर्वांगीण विकास में उनकी मदद कर सकती हैं । यह हर स्वतंत्र विकास में अपने तरीके से मदद करता है । अध्ययन के उबाऊ, तनावपूर्ण जीवन से छुटकारा पाने के लिए यह सबसे अच्छा उपकरण है । छात्र किसी भी स्थिति में खुद को समायोजित कर सकते हैं । वे मानसिक रूप से मजबूत हो जाते हैं । शौक की मदद से विद्यार्थी आत्मविश्वास हासिल कर सकते हैं जो प्रतियोगिताओं और अच्छे परिणाम के लिए सबसे महत्वपूर्ण है । हॉबी व्यक्तियों की छिपी प्रतिभा को भी खोजती हैं और मन को शांति प्रदान करती हैं । हॉबी क्लासेस के जरिए छात्र अपनी भावनाओं को संभाल सकते हैं । यह बच्चों को तनावपूर्ण वातावरण से आज़ादी देता है क्योंकि जिस कम में मन सम्मिलित होता है उसे करने में आनंद की अनुभूति है । विद्यार्थियों का आत्म-सम्मान और महत्वाकांक्षा तब बढ़ सकती है जब उनकी हॉबी का प्रयोग वे नियमित रूप से करे |<br />
<strong>उचित आराम करना:</strong> विद्यार्थियों को उचित आराम करना चाहिए यह हमारे सीखने और चीजों को याद रखने के लिए आवश्यक है । नींद की कमी हमारी मानसिक स्थिति, शारीरिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और दीर्घायु को प्रभावित करती है । प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. एम. एल. अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा है कि नींद की कमी और आराम न करने के कारण विद्यार्थी जीवन के गलत रास्ते पर मुड़ सकते हैं और वे ड्रग्स, अपराध, धूम्रपान के अंधेरे में घिर सकते है, वे शराबी हो जाते हैं और अंततः आत्महत्या के बारे में सोचते हैं । हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में स्लीप मेडिसिन डिवीजन के अनुसार, हमारे शरीर को सही देखरेख और आराम की आवश्यकता होती है क्योंकि यही आराम हमें खाने, पीने और अन्य गतिविधियाँ करने के लिए आवश्यक निर्देश देता है । पर्याप्त आराम के बिना, निर्णय, मन की स्थिति, सीखने और धारण करने की क्षमता कमजोर होती है, जबकि ये घटक भविष्य की प्रतिस्पर्धी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हैं । आराम शरीर और मन की मरम्मत करता है यहां तक ​​कि यह याददाश्त को भी बढ़ाता है ।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-kalpana-prajapati-on-childline-is-a-sanjeevani-for-children-trapped-in-trouble/8390/">मुसीबत में फंसे बच्चों के लिए है संजीवनी बूटी है चाइल्ड लाइन</a></span></span></strong></p>
<p><strong>सकारात्मक सोचना:</strong> छात्रों को हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिए क्योंकि शोधों ने साबित किया है कि सकारात्मक सोच से व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है, अवसाद कम हो सकता है और निम्न स्तर का तनाव पैदा हो सकता है जो उसकी प्रस्तुति लिए अच्छा है । यदि हम किसी भी बुरी परिस्थिति में सकारात्मक सोचते हैं, तो तनाव नहीं होगा । सकारात्मक सोच वाले विद्यार्थियों के काम की गति, जुनून, धैर्य, आशावाद, नवाचार, खुद पर भरोसा, समय प्रबंधन, बुद्धिमत्ता, पहल, जीत की दृष्टि, अपने समय के मूल्य, जीवंत रचनात्मकता और प्रभावी प्रयासों अन्य से श्रेष्ठ होता है ।<br />
<strong>भावनाओं को साझा करे:</strong> यह कहा गया है कि &#8220;दुःख को साझा करने कम होता है&#8221; इसलिए विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को साझा करना चाहिए है । विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों, माता-पिता, संरक्षक, परामर्शदाताओं को उनके लिए एक खुला मंच बनाना चाहिए ताकि वे अपनी सहायता स्वयं कर सके, भविष्यवाणी कर खुद का पता लगा सकें की आगे कैसे बढ़ना है । मनोवैज्ञानिकों और परामर्शदाताओं ने सुझाव दिया कि जब भी छात्र तनाव महसूस कर रहे हों, तो उन्हें अपने माता-पिता, दोस्तों, शिक्षकों, काउंसलर, मेंटर्स, अभिभावक आदि के साथ अपनी भावनाओं को साझा करना चाहिए । विद्यार्थियों को तनाव से दूर रखने के लिए अभिभावकों के साथ खुला मन रखना चाहिए । यह और बेहतर करने के लिए सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा देता है । विद्यार्थियों को अपने अध्ययन के अनुभवों, प्रदर्शन, क्षमता, कैलिबर और प्राप्त लक्ष्य पर चर्चा करनी चाहिए ।<br />
<strong>अपनी क्षमता के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करना:</strong> हर बच्चा अपने कैलिबर को जानता है क्योंकि कोई भी व्यक्ति खुद को दूसरों से ज्यादा जनता है । किसी भी लक्ष्य या लक्ष्य को तय करने से पहले छात्रों को अपनी ओर देखना चाहिए और स्वॉट(SWOT) विश्लेषण के माध्यम से खुद को परख लेना चाहिए । स्वॉट विश्लेषण में अपनी ताकत, कमजोरियों, अवसरों और खतरों से ज्ञान होने के बाद अपने लक्ष्य का निर्धारण करना चाहिए । इसके बाद, उन्हें अपने विषयों को तय करना चाहिए और सीमित समय सीमा में हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए । अपनी ताकत के अनुसार, छात्रों को अपने भविष्य के बारे में सपने देखना चाहिए । इससे विद्यार्थी के आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प में भी वृद्धि होती है ।<br />
<strong>रिवीजन पर ध्यान</strong>: विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद उसका रिवीजन करने के लिए अपनी योजना बनानी चाहिए । रिवीजन में ही वे ही यह समझ पाएंगे कि वे किन विषयों में मजबूत या कमजोर हैं, किन विषयों में अधिक प्रयासों की आवश्यकता है, किन विषयों और टॉपिक्स को छोड़ा जा सकता है | इस समय चूँकि सभी के अपार समय है तो अपनी सभी परीक्षाओं के सिलेबस का पुन: रिवीजन करते रहे | रिवीजन हम निम्न रूप में कर सकते है &#8211;<br />
<img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-8482" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/05/ग्फ्फ्फ़.jpg" alt="" width="700" height="202" srcset="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/05/ग्फ्फ्फ़.jpg 700w, https://tismedia.in/wp-content/uploads/2021/05/ग्फ्फ्फ़-300x87.jpg 300w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /></p>
<ul>
<li><strong> पढ़ें:</strong> इस स्तर पर विद्यार्थियों को अधिगम सामग्री का चयन करना चाहिए क्योंकि जो कुछ भी किताबों और संदर्भों में लिखा गया है वह सब कुछ महत्वपूर्ण नहीं है । तो सामग्री का चयन करने के लिए छात्र स्वयं से ये मौलिक प्रश्न पूछें: क्यों पढ़ना है? कैसे पढ़ें ?, क्या पढ़ें ?, कब पढ़ें? कहां पढ़ें? आदि |</li>
<li><strong style="background-color: initial;">याद करे:</strong><span style="background-color: initial; font-weight: lighter;"> सामग्री को चुनने और पढ़ने के बाद रिवीजन का दूसरा चरण शुरू होता है, अर्थात् याद करना । याद करने के दौरान, वातावरण अध्ययन की प्रभावशीलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । याद करना बहुत से कारकों पर निर्भर होता है जैसे: उचित प्रकाश, ताजी हवा, ताजा-स्वस्थ और पौष्टिक भोजन, बाहरी शोर, परिवार और सामाजिक जीवन के सदस्य, सोशल मीडिया की व्यस्तता, समाजिक कार्य, उत्साह, थकान, चिंता, दबाव, रुचि, समय आदि । याद करने में, विद्यार्थियों को याद करने और रिवीजन की अलग से नोटबुक / रजिस्टर बनानी चाहिए ताकि रोज की अध्ययन सामग्री और रिवीजन में कोई उलझन न हो ।</span></li>
<li><strong> खुद का स्वयं टेस्ट लेना:</strong> पढ़ने और सीखने के बाद छात्र को अपनी परीक्षा खुद लेनी चाहिए |</li>
<li><strong> विश्लेषण:</strong> स्व-परीक्षण याद करने की प्रगति का वास्तविक स्थिति प्रदान करेगा । बच्चों को अब खुद से अपने अध्ययन का विश्लेषण करना चाहिए । उन्हें किन बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए: वे कहां कमजोर हैं? अधिक जानने की गुंजाइश कहाँ है? वे कौन से बिंदु, तथ्य, आंकड़े, तत्व भूल रहे हैं? पिछली बार की तुलना में प्रदर्शन कम या अच्छा क्यों है? परीक्षा को पूरा करने में कितना समय लगता है? आदि का विश्लेषण करने के बाद, छात्रों को फिर से याद करना चाहिए।</li>
<li><strong>री-टेस्ट:</strong> इस अंतिम चरण में पुनः याद व खुद का विश्लेषण करने के बाद, छात्रों को फिर से एक और परीक्षा देनी चाहिए और फिर उन्हें पिछले प्रदर्शन के साथ अपने प्रदर्शन की तुलना करनी चाहिए ।</li>
</ul>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-pankaj-nagar-thoughts-are-combination-of-mind-brain-and-experiences/8361/">मन, मस्तिष्क व अनुभवों का संयोजन है विचाराभिव्यक्ति</a></span></span></strong></p>
<p><strong>समयावधि:</strong> विद्यार्थियों को अध्ययन करने के लिए अपने समय को तय करना चाहिए क्योंकि जीवन में सफलता सही समय प्रबंधन पर ही निर्भर है । यह जीवन का एकमात्र तत्व है जो अगर एक बार चला गया तो कभी नहीं लौटेगा । इसलिए लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए छात्रों को अपने समय का प्रबंधन करना चाहिए । उन्हें पहले अपना अंतिम लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और उसके बाद उसे छोटे-छोटे क्रमबद्ध तरीके से उन्हें विभाजित करना चाहिए | JEE, AIIMS, NEET, IIT, बोर्ड की तैयारी के लिए जहाँ प्रतिदिन 5 से 6 घंटे का अध्ययन आवश्यक है, वही IAS, IPS, UPSC की तैयारी के 8-10 घंटे का पढाई करना जरुरी है जो आपके स्कूल और कोचिंग समय से अलग होना चाहिए । विद्यार्थियों को अपने कीमती समय की बर्बादी नहीं करनी चाहिए जैसे कि मूवी देखना, लंबे समय तक फोन पर बातचीत करना आदि । विद्यार्थियों को एक निश्चित समय सारिणी का पालन करना चाहिए जिसमें जीवन के हर पहलू जैसे- आत्मचिंतन-मंथन, स्वास्थ्य और स्वच्छता, खेल, सामाजिक जीवन, शौक, कोचिंग, अध्ययन, संशोधन, भोजन आदि के लिए पर्याप्त समय हो । अध्ययन का समय व्यक्तिगत क्षमता या आदत पर निर्भर करता है, कोई व्यक्ति सुबह जल्दी रिवीजन की योजना बना सकता है जबकि कोई रात या शाम को कर सकते हैं । पढ़ाई के दौरान, उन्हें छोटे ब्रेक देने चाहिए और हल्के, ऊर्जावान, स्वस्थ स्नैक्स जैसे मूंगफली, चिप्स, जूस आदि लेने चाहिए । रोजाना एक-दो मिनट के लिए, छात्रों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि वर्तमान में क्या हो रहा है, थोड़ी देर टहलने जाना चाहिए |<br />
<strong>सोशल मीडिया से दूर रहना:</strong> जैसा कि हमने देखा है कि इंटरनेट युग में हर कोई क्लाउड कंप्यूटिंग में व्यस्त है । हर कोई दुनिया में एक्सपोजर चाहता है; हर कोई दुनिया से जुड़ना चाहता है, अपडेट रहना चाहता है, पसंद करना चाहता है, तारीफ पाना चाहता है, पॉजिटिव कमेंट करना चाहता है आदि, इसके लिए अब विद्यार्थी सोशल मीडिया से बहुत ज्यादा जुड़ गए हैं । वे वर्तमान सोशल मीडिया पोर्टल जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, हाइक, स्नैप चैट, वाइबर आदि पर अपनी हर घटना को अपडेट करते हैं, लेकिन सफलता की इच्छा रखने वालों को खुद से सोशल मीडिया से दूर रखना चाहिए | छात्रों में नकारात्मकता पैदा करते है । शोधों ने साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया लोगों को नकारात्मक बनाता है क्योंकि वहाँ बहुत सारे नकारात्मक सामाजिक तत्व जो सिर्फ खुद की सुनते हैं दूसरों की बात समझना ही नहीं चाहते । यहां तक ​​कि जब भी किसी को कोई प्रतिक्रिया जैसे पसंद, टिप्पणी, शेयर और प्यार नहीं मिलती है, यह अवसाद और चिंता का कारण बन सकता है ।<br />
<strong>नियमित ऑनलाइन टेस्ट सीरीज:</strong>  स्थगित होती परीक्षाओं और परिणाम के तनाव से बचने के लिए अभी सभी को नियमित रूप से ऑनलाइन टेस्ट सीरीज का उपयोग करते हुए अपने ज्ञान की निरंतरता को बनाये रखना चाहिए | छात्रों को नियमित अध्ययन और कक्षाओं को छोड़ना नहीं चाहिए । जब भी उन्हें कोई संदेह हो, तो उन्हें मेंटर्स और टीम के साथियों से सलाह लेनी चाहिए । परीक्षणों की नियमित प्रतिक्रिया वास्तविक समझ और अध्ययन की स्थिति (कागज़ी, 2015) प्रदान करेगी ।<br />
<strong>सरकार द्वारा प्रकाशित किताबों से अध्ययन:</strong> विभिन्न प्रवेश परीक्षा के टॉपर्स ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा की प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रतिभागियों को सरकार व सरकारी संस्थाओं जैसे एन.सी.ई.आर.टी., बोर्ड्स, द्वारा प्रकाशित किताबों से अध्ययन करना चाहिए । जेईई मेन्स के टॉपर मास्टर कल्पित वीरवाल ने कहा कि प्रश्न पत्र की तैयारी के लिए एनसीईआरटी की किताबें सबसे अच्छी हैं, एक भी विषय का प्रश्न एन.सी.ई.आर.टी के सिलेबस के बाहर से प्रश्नपत्र में नहीं आया ।<br />
<strong>नियमित अभ्यास:</strong> विद्यार्थियों को जीवन से तनाव से बचने के लिए नियमित रूप से वर्कशीट, दैनिक अभ्यास पत्र, प्रश्न, सूत्र आदि पर अभ्यास करना चाहिए । नियमित अभ्यास लिखित रूप में करना चाहिए बजाये इसके की केवल याद किया जाये | नियमित अभ्यास आत्मविश्वास का निर्माण करेगा और परीक्षा और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण लाएगा ।<br />
<strong>शांत रहे: </strong>अंतिम परीक्षा हमेशा तनाव के साथ आती है । इसलिए परीक्षा से पहले छात्रों को खुद को शांत रखना चाहिए । उन्हें हाइपर और किसी भी चीज़ पर गुस्सा करना चाहिए क्योंकि यह ऊर्जा और एकाग्रता को कम करता है ।<br />
<strong>अंतिम दिन कुछ भी नया प्रारंभ न करे:</strong>  आम तौर पर, छात्र अंतिम दिनों के लिए कठिन विषयों को याद करने के लिए रखते हैं लेकिन यह तनाव लाता है । अंतिम क्षण में, छात्रों को कुछ भी नया याद नहीं रहता इसके विपरीत जो ज्ञान ग्रहण करने की कोशिश को जाती वो अस्थिर रहता है ।<br />
<strong>पौष्टिक भोजन करे:</strong>  वर्तमान में हर विद्यार्थी के खाने की पसंद में जंक / फास्ट फूड आदि है जो वे कहीं से भी, किसी भी मेस, किसी भी विक्रेता, दुकान या सड़क के किनारे से खाते लेते है, जो उन्हें अस्वस्थ और बीमार बनाता है । इसलिए उन्हें अपने भोजन के बारे में बहुत सचेत होना चाहिए । उन्हें स्वच्छ स्थानों से खाना चाहिए और एक संतुलित आहार चार्ट का पालन करना चाहिए जो उनके अध्ययन के लिए उपयुक्त है क्योंकि अस्वस्थ भोजन भी तनाव का एक कारण है । अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अध्ययन के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं की एक बड़ी संख्या (प्रत्येक तीन में से एक) अपने स्वाद के लिए नई नई चीजे अपनाती है, उदाहरण के लिए, जमे हुए दही, ठंडे खाद्य पदार्थों और दबाव को कम करने के लिए व्यवहार करती है । महिलाओं के लिए अपने सबसे पसंदीदा खाने की आदतों से खुद को रोकना बहुत आम है क्योंकि वे अधिक फिट होने का प्रयास हमेशा करती रहती हैं ।<br />
<strong>नियमित प्रतिक्रिया:</strong>  यदि विद्यार्थी फैकल्टी, परामर्शदाता और अपने अध्यापकों से प्रतिदिन प्रतिक्रिया प्राप्त कर सकते हैं, तो यह उनके परिणामों के बारे में चिंता और तनाव को कम करता है । उसके बाद परिणाम के विषय को लेकर विद्यार्थियों के लिए कोई नई बात नहीं होगी । विद्यार्थियों को अपने परिणामों पर कभी आश्चर्य नहीं होगा ।<br />
<strong>सकारात्मक संगीत सुने:</strong> आर.के. वर्मा निदेशक रेजोनेंस, गोविंद माहेश्वरी एलन कोचिंग संस्थान के निदेशक और कई प्रकार के शोधों से यह साबित हो चूका है की कि तनाव से बचने के लिए संगीत एक अच्छा साधन है । विद्यार्थियों को प्रेरक गीतों को सुनना चाहिए जैसे- &#8220;रुक जाना नहीं तू कही हार के&#8230;..&#8221;, &#8220;जो भी हो गया फिर आएगा &#8230;&#8221;, &#8220;डर के आगे जीत हैं&#8221;। ! ”,“ बार-बार हो बोलो यार है अपनी जीत हो…। ”,“ जिंदगी की ना टूटे लाडी…। ”,“ जिन्दगी हर कदम एक नई जंग है…। ”, जिंदा है तोह…।”, “अये। साला अभी अभी हुआ यकीन, &#8230; &#8220;,&#8221; कंधो से कांधे मिलते है, कदमों से कदम मिलते है &#8230;.. &#8220;,&#8221; धुन्धला जाये जो मंजिले । &#8220;&#8230;&#8221;, &#8220;कुछ करिए कुछ करिए &#8230;&#8221;, &#8220;ये होसला कैसे रुके&#8230;.। &#8220;, &#8220;कुछ पाने की हो आस-आस&#8230;आशाएं आशाएं &#8230;&#8221;, &#8220;ओ मितवा सुन मितवा तुझे क्या डर है रे&#8230;&#8221;, &#8220;इकतारा वोतारा सबतारा&#8230;।&#8221; आदि | इस प्रकार के गीत ऊर्जा को बढ़ावा देंगे और अध्ययन और सीखने की नई भावना भरेंगे ।<br />
<strong>एकाग्रता:</strong> विद्यार्थियों को पूरी एकाग्रता के साथ एक समय में एक काम ही करना चाहिए क्योंकि अगर वे कई काम करेंगे और अपने दिमाग को अन्य दिशाओं में मोड़ेंगे, तो उनके प्रयास प्रभावी नहीं होंगे और जो परिणाम वे चाहते हैं वे कभी नहीं मिलेंगे जिससे तनाव में वृद्धि होगी । तनाव अपरिहार्य है, और विफलता दुनिया का सबसे बड़ा शिक्षक है । प्रत्येक विद्यार्थी को यह समझना चाहिए कि यदि उन्हें असफलता मिलती है, तो वह जीवन का अंत नहीं है, यह भविष्य की सफलता के लिए एक खुले द्वार की तरह है । स्थिति को संभालने के लिए उन्हें अपने तरीके खोजने चाहिए क्योंकि हर व्यक्ति दूसरों से अलग होता है और जीवन के प्रति उनकी धारणा होती है । इसलिए एक सामान्य उपाय सभी पर काम नहीं कर सकता है ।<br />
<strong>खर्चों पर नियंत्रण:</strong>  विद्यार्थी धन की कमी के कारण भी तनाव में हैं, इसलिए इस स्थिति से बचने के लिए विद्यार्थी को एटीएम से अपनी नकद निकासी की प्रवृत्ति को सीमित करना चाहिए । यहां तक कि उन्हें अपने खर्च को अपने दोस्तों की तुलना में मोबाइल, कपड़े, फास्ट/जंक फूड, व्यक्तिगत संबंधों, युवाओं की बुरी आदतों (धूम्रपान, बंक करना, शराब पीना) आदि पर सीमित करना चाहिए ।<br />
<strong>भूतकाल की उपलब्धियों और सफलताओं को याद करे:</strong> निराशा की परिस्थिति में विद्यार्थियों को अपने पिछले सफल, सुखदायी अनुभवों और घटनाओं को याद करना चाहिए साथ ही ध्यान देना चाहिए कि उन्होंने अन्य तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना कैसे किया था- जैसे कि ब्रेक अप, परीक्षा परिणाम, घर या भोजन की आदतों को बदलना, दोस्तों के झगड़े आदि । वाशिंगटन, डीसी के स्वास्थ्य विभाग की सलाह है कि साथियों के साथ बातचीत करना एक बुरी घटना के बाद महीनों एक-एक करके निर्देशन की तुलना में अधिक लाभकारी है ।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">READ MORE: </span><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-k-vikram-rao-about-malerkotla/8427/">मालेरकोटला पर विवाद ? क्या कारण है ?</a></span></strong></p>
<p>सारांश में हम ये कह सकते है की योग, ध्यान, सकारात्मक सोच, तनाव को दूर करने के लिए अपना स्वयं का पढने का तरीका, उचित आराम और पर्याप्त नींद, हॉबी गतिविधियों में संलग्न रहना, अपनी भावनाएं साझा करना, माता-पिता या अभिभावकों के साथ संपर्क में रहना, स्वस्थ भोजन लेना, योग्यता और रुचि के अनुसार लक्ष्य तय करना, एक व्यवस्थित तरीके से संशोधन पर ध्यान देना, अध्ययन के लिए उचित समय तय करना, समय सारणी का पालन करना, सोशल मीडिया से दूर रहना, नियमित परीक्षण और कक्षाओं में भाग लेना, प्रेरणादायक पुस्तकों का अध्ययन करना, परीक्षा के एक दिन पहले शांत और तनावमुक्त रहना, संकाय सदस्यों द्वारा वर्तमान प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया प्राप्त करना, भविष्य के लिए योजना बनाना, सकारात्मक संगीत सुनना, खर्चों को सीमित करना, सहपाठियों के साथ अवकाश के समय का आनंद लेना और प्रतिकूल समय के दौरान सर्वश्रेष्ठ पिछली सफलताओं को याद करना निश्चित रूप से विद्यार्थियों के तनाव को जीवन की हर परिस्थिति में चाहे कोरोना जैसी विकट स्थिति ही क्यों न हो कम कर सकता है ।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">लेखक:</span></strong> <span style="color: #0000ff;"><strong>डॉ. निधि प्रजापति</strong></span><br />
<span style="color: #0000ff;"><strong>वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर</strong></span><br />
<span style="color: #0000ff;"><strong>अध्यक्ष-सोसाइटी हैस ईव शी इंटरनेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट </strong></span></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/article/article-by-dr-nidhi-prajapati-on-stress-management-of-students/8481/">तनाव से मुक्ति, जीवन में तंदरुस्ती</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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