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	<title>sachin pilot Archives - TIS Media</title>
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	<title>sachin pilot Archives - TIS Media</title>
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		<title>सचिन पायलट ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, BJP-Congress टेंशन में क्यों?</title>
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		<pubDate>Fri, 10 Feb 2023 03:37:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर। राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है। पीएम मोदी से ईस्टर्न राजस्थान कैनाल परियोजना (ईआरसीपी) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग की है। मोदी 12 फरवरी को दौसा जिले पहुंचेंगे। जनसभा को संबोधित करेंगे। राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने पीएम मोदी को पत्र &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">जयपुर।</span></strong> राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है। पीएम मोदी से ईस्टर्न राजस्थान कैनाल परियोजना (ईआरसीपी) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग की है। मोदी 12 फरवरी को दौसा जिले पहुंचेंगे। जनसभा को संबोधित करेंगे।</p>
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<p>राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है। पीएम मोदी से ERCP को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग की है। मोदी 12 फरवरी को दौसा जिले पहुंचेंगे। सचिन पायलट ने पत्र में लिखा है कि वर्ष 2018 में एक जनसभा में पीएम ने ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने का वादा किया था। मोदी को अपना वादा पूरा करना चाहिए। 12 फरवरी को दौसा जिले में आपका कार्यक्रम प्रस्तावित है। ऐसे में मुझ सहित प्रदेशवासी आपसे अपेक्षा रखते हैं कि ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाएगा। पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों- दौसा, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, सवाई माधोपुर, करौली, अजमेर, टोंक. झालावाड़, कोटा और बूंदी जिले की पानी की समस्या का स्थाई समाधान ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित होने होगा।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">मोदी ERCP से जुड़े सवालों से बच पाएंगे?</span></strong><br />
ईस्टर्न राजस्थान कैनाल परियोजना पूर्वी राजस्थान का बड़ा मुद्दा है। परियोजना के तहत 13 जिले आते हैं। इन जिलों में पीने और सिंचाई के पानी के लिए ERCP की मांग लंबे समय से चली आ रही है। कांग्रेस इस पर ही केन्द्र को घेरती रही है। बार-बार इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग रख रही है. कई प्रदर्शन भी हो चुके हैं. खुले मंच से भाजपा को चैलेंज भी किया जाता रहा है. कई मौकों पर प्रधानमंत्री को उनके वायदे भी याद दिलाए गए हैं. इस बेल्ट में आकर क्या पीएम इससे जुड़े सवालों से बच पाएंगे। ये बड़ा सवाल है। कहा ये भी जा रहा है कि हो सकता है पीएम ERCP को लेकर कोई बड़ा ऐलान कर दें। उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी ने अजमेर और जयपुर में ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने का वादा किया था।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे का लोकार्पण करेंगे</span></strong><br />
उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी 12 फरवरी को दौसा पहुंच सकते हैं। यहां वो दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे का लोकार्पण करेंगे। यहां तक तो विकास का एजेंडा फिट बैठता है लेकिन इसके बाद प्रधानमंत्री का एक जनसभा को संबोधित करने का भी प्लान है। दिलचस्प बात तो ये है कि पीएम मोदी का पांच महीने में चौथा है। माना जा रहा रहा है कि मोदी का फोकस मीना वोर्टर पर रहेगा। हालांकि, बीजेपी के बड़े नेता किरोड़ी लाल मीना हाईकोर्ट में मोदी की जनसभा नहीं होने से नाराज बता जा रहे हैं। इसलिए मोदी के आने से पहले गुटबाजी भी खुलकर सामने आ गई है।</p>
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		<title>राजस्थान चुनाव 2023ः जादूगर की वो सौगात जिससे रिपीट हो सकती है सरकार</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Feb 2023 08:44:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर। राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 के अंत में होने है। सीएम गहलोत का दावा है कि उनकी सरकार रिपीटी होगी। सीएम इसकी वजह अपने अहम फैसले बताते है। सीएम का कहना है कि राज्य में सत्ता विरोधी लहर नहीं है। सवाल यही है कि क्या ये अहम फैसले आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">जयपुर।</span></strong> राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 के अंत में होने है। सीएम गहलोत का दावा है कि उनकी सरकार रिपीटी होगी। सीएम इसकी वजह अपने अहम फैसले बताते है। सीएम का कहना है कि राज्य में सत्ता विरोधी लहर नहीं है। सवाल यही है कि क्या ये अहम फैसले आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की सरकार रिपीट करने के लिए वोट खींचने में सहायक होंगे। आइए जानते हैं जादूगर के दावे में कितना दम है?</p>
<p>पुरानी पेंशन बहाली, स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम, EWS आरक्षण में छूट, मुफ्त में इलाज, शहरी रोजगार गांरटी योजना, मुफ्त कोचिंग और सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत एक करोड़ लोगों को पेंशन। ये फैसले गहलोत सरकार को रिपीट करवा सकते हैं। गहलोत सरकार ने EWS आरक्षण में जमीन और मकान के प्रावधान में छूट देकर मास्टर स्ट्रोक खेला था। इसका फायदा सरकार को चुनाव में मिलने के आसार है। यह वही योजनाएं हैं जिनके दम पर गहलोत सत्ता में वापसी का जादू दिखाने का दम भर रहे हैं।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">नहीं होगी रिपीट सरकार! </span></strong><br />
हालांकि, भाजापा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया कहते रहे है कि प्रदेश में अपराधियों का बोलबाला है। पेपर लीक की घटनाओं से युवा वर्ग हताश है। इसलिए सरकार रिपीट नहीं होगी। राजनीति विश्लेषकों का कहना है कि राजस्थान में हर पांच साल बाद सरकार बदलने की रवायत रही है। लेकिन इस बार हालत बदले हुए है। गहलोत सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर नहीं है। लेकिन गहलोत-पायलट की खींचतान का पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">हेल्थ का अधिकार संभालेगा सियासी सेहत</span></strong><br />
गहलोत सरकार मौजूदा विधानसभा के बजट सत्र में 13 जनवरी को स्वास्थ्य का अधिकार विधेयक सदन में पेश करेगी। पार्टी नेती राहुल गांधी चाहते हैं कि प्रदेश के लोगों को स्वास्थ्य का अधिकार (राइट टू हैल्थ) दिया जाए। इसके लिए राज्य सरकार के स्तर पर कानून बनाया जाएगा। अभी तक देश भर में केवल असम में इस पर कुछ काम हुआ है। पूरी तरह से कानूनी जामा पहना कर बजट अलॅाट करने वाला पहला राज्य राजस्थान बनेगा। सीएम गहलोत ने सीएम गहलोत का फोकस हेल्थ पर हर कार्यकाल में रहता आया है। चिरंजीवी बीमा योजना, मुफ्त दवा व जांच योजना, मोहल्ला क्लिनिक आदि उस अधिकार में शामिल होंगे। प्राइवेट अस्पतालों पर भी लगाम कसी जाएगी।चिरंजीवी योजना की बीमा राशि से प्राइवेट अस्पताल मालामाल हो रहे हैं। इस अधिकार के तहत सरकारी अस्पतालों में ही सभी सुविधाएं जुटाने की कोशिश होगी। तमिलनाडू में भी इस तरह के अधिकार के लिए कानून बनाने पर काम चल रहा है, वहां की सरकार से भी इसकी जानकारी मांगी जा रही है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">मास्टर स्ट्रोकः एससी-एसटी के लिए अलग बजट</span></strong><br />
सीएम गहलोत ने पिछले बजट में सीएम गहलोत ने एससी-एसटी समुदाय के लिए सम्पूर्ण बजट में अलग से राशि जनसंख्या के हिसाब से आवंटित करने की घोषणा की थी। उसके नियम अब तक नहीं बने हैं। अब इनके नियम अगले 15-20 दिनों में बनाए जाने पर काम चल रहा है। प्रदेश में करीब सवा करोड़ लोग इन समुदायों से आते हैं। प्रदेश की 200 में से 28 विधानसभा सीटें और 25 में से 6 लोकसभा सीटें इन समुदायों के लिए आरक्षित हैं। कुल 33 में से 15 जिलों में पहले, दूसरे और तीसरे नंबर का वोट बैंक भी यही समुदाय है। ऐसे में अगर राजस्थान में यह काम हो सका तो कांग्रेस अपना खोया हुआ वोट बैंक फिर से प्राप्त कर सकती है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">एक करोड़ लोगों को पेंशन</span></strong><br />
सीएम गहलोत ने संकेत दिए उनका फोकस सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं पर रहेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि गहलोत सरकार आंध्रप्रदेश की तर्ज पर बुजुर्गों को 2 से 10 हजार रुपए तक मासिक पेंशन दे सकती है। सीएम गहलोत आंध्रप्रदेश की तर्ज पर बजट में घोषणा कर सकते हैं। सीएम गहलोत ने गुरुवार में राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में जवाब दिया। सीएम ने कहा कि एक करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा के तहत पेंशन दी जा रही है, जोकि कि देश में कहीं नहीं दी जा रही है। बता दें, सीएम गहलोत कहते रहे हैं कि अमेरिका और ब्रिटेने जैसों देशों में बुजुर्गों को हर सप्ताह भत्ता मिलता है। हमारे देश में मिलना चाहिए। फिलहाल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत एक करोड़ लोगों को पेंशन दी जा रही है।</p>
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		<title>मैं भगवान भरोसे हूं&#8230;! चुनावी साल में ऐसा क्यों बोलीं वसुंधरा राजे</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Feb 2023 08:21:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर। राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने कहा कि मैं भगवान भरोसे हूं। अब तक जो भी काम हुआ है। वह सिर्फ भगवान के भरोसे से हुआ है। भगवान ने दिल खोलकर दिया है। चुनावी साल में बड़ा बयान माना जा रहा है। राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने कहा कि मैं भगवान &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">जयपुर।</span></strong> राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने कहा कि मैं भगवान भरोसे हूं। अब तक जो भी काम हुआ है। वह सिर्फ भगवान के भरोसे से हुआ है। भगवान ने दिल खोलकर दिया है। चुनावी साल में बड़ा बयान माना जा रहा है।</p>
<p><iframe title="मैं भगवान भरोसे हूं, चुनावी साल में वसुंधरा राजे ने पोस्ट कर ऐसा क्यों कहा" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/157ITp9CtFE?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" allowfullscreen></iframe></p>
<p>राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने कहा कि मैं भगवान भरोसे हूं। अब तक जो भी काम हुआ है। वह सिर्फ भगवान के भरोसे से हुआ है। भगवान ने छप्पर फाड़ कर दिया है। दिल खोलकर दिया है। चुुनाव साल में वसुंधरा राजे का यह बड़ा बयान माना जा रहा है। वसुंधरा राजे ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किया है। एक वीडियो भी शेयर किया है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">क्या बोलीं राजे</span></strong><br />
वीडियो में वसुंधराजे कह रही है कि आज राजस्थान के लोगों का जो प्यार है। वो ही हमारी पूंजी है। इस पूंजी के लिए चाहे हमें कितना भी मेहनत करना पड़े। चाहे खून क्यूं ना देना पड़े। यही प्यार है भाइयों जिसके ऊपर हम दौड़ते हैं, भागते हैं। जिस प्यार के लिए हम लोग मरते हैं। ये सब को नहीं मिलता है। जब गांव में जाती है। कहीं बड़ा बुजुर्ग सिर पर हाथ रख देता है। गाल पर हाथ फेरकर प्यार करता है। इससे बड़ी बात मैं समझती नही्ं हो सकती। इसलिए जरूरी है कि हम मेहनत करते रहे। मेरे से कोई पूछे की ये क्यों करते हो? दूसरी सरकारें तो करती नहीं है। आप तो आराम से चलो। मैं लोगों से कहती हूं, देखों किसी भी सरकार को काम करवाने के लिए 5-10 साल तो दो। 5 साल इतना शाॅर्ट टर्म होता है कि दौड़-दौड़ करके काम भी करों तो उसे कंपलीट नहीं कर सकते। हम पूरा घर सजाकर छोड़ते हैं। फिर कांग्रेस आज जाती है। उसका मजा उठाती है। जो-जो काम हमने किए है। उसका फीता काटने का काम कांग्रेस करती है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">कांग्रेस सिर्फ फीते काटने का काम करती है</span></strong><br />
वसुंधरा राजे ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट कर कहा कि हम जनता की आशाओं के अनुसार योजनाओं पर काम शुरू करते हैं और कांग्रेस आकर सिर्फ उनके फीते काटने का काम करती है। इसलिए कम से कम हमें 10 साल देना चाहिए। 5 साल तो भाग दौड़ में ही निकल जाते है। 5 साल शार्ट टर्म है। वसुंधरा राजे ने अपने फेसबुक अकाउंट पर वीडियो शेयर किया है। वीडियो में वसुंधरा राजे ने इशारों में सीएम गहलोत पर निशाना साधा है। गुरुवार को सीएम गहलोत ने विधानसभा में बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था। माना जा रहा है कि वसुंधरा राजे ने सीएम गहलोत पर पलटवार किया है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">संयम लोढ़ा ने दी बहस की चुनौती</span></strong><br />
राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे पर सीएम गहलोत के सलाहकार संयम लोढ़ा ने पलटवार किया है। सीएम लोढ़ा ने ट्वीट कर कहा-आपने सिर्फ जाति क्षेत्र आधारित पोशाकें पहन पहनकर राजस्थान की भोली जनता को भ्रमित करने का काम किया है। आपका व्यक्तव्य वास्तविकता से परे है। आपकीं 2013 से 2018 की सरकार व मौजूदा गहलोत सरकार के 2018 से 2023 के काम काज पर बहस की खुली चुनौती देता हूं। समय व स्थान आप तय करके बताना !</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/vasundhara-raje-said-before-the-assembly-elections-that-she-is-dependent-on-god/12609/">मैं भगवान भरोसे हूं&#8230;! चुनावी साल में ऐसा क्यों बोलीं वसुंधरा राजे</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>शांति धारीवाल ने रची थी Sachin Pilot के खिलाफ साजिश?</title>
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		<pubDate>Tue, 31 Jan 2023 06:35:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कुर्सी बचाने के लिए यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने विधायकों के इस्तीफे की साजिश रची थी। राजस्थान विधानसभा सचिव की ओर से हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के इशारे पर मुख्य सचेतक महेश जोशी, उप मुख्य सचेतक महेंद्र &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/rajasthan-political-crisis-shanti-dhariwal-conspired-against-sachin-pilot/12566/">शांति धारीवाल ने रची थी Sachin Pilot के खिलाफ साजिश?</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">जयपुर।</span> </strong>मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कुर्सी बचाने के लिए यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने विधायकों के इस्तीफे की साजिश रची थी। राजस्थान विधानसभा सचिव की ओर से हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के इशारे पर मुख्य सचेतक महेश जोशी, उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी, राजस्व मंत्री रामलाल जाट, कांग्रेस विधायक रफीक खान और निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा अपने साथ कुल 81 विधायकों के इस्तीफे लेकर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष के निवास पहुंचे थे।</p>
<p>मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए सचिन पायलट के दावे के बाद अशोक गहलोत की जमीन बचाने के लिए राजस्थान में शुरु हुए सियासी संकट के बीच 25 सितंबर 2022 को सबसे बड़ा &#8220;खेला&#8221; हुआ था। इस रोज संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने गहलोत के समर्थन में न सिर्फ विधायक दल की पैरेलल मीटिंग बुलाई थी, बल्कि विधानसभा अध्यक्ष के निवास पहुंचकर 81 विधायकों के इस्तीफे भी सौंप दिए थे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/rajasthan-politics-revolt-in-rajasthan-congress-90-mlas-resigned/12316/">Rajasthan Politics: गहलोत समर्थक विधायकों का विद्रोह, 90 ने दिया इस्तीफा</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">नहीं दिए इस्तीफे! </span></strong><br />
राजस्थान विधानसभा सचिव की ओर से हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे में कहा गया है कि 81 विधायकों के इस्तीफे स्वैच्छिक नहीं थे, इसलिए इन्हें मंजूर नहीं किया गया। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पंकज मित्थल की बेंच में सुनवाई हुई, तो विधानसभा सचिव महावीर प्रसाद शर्मा के शपथ पत्र में यह बात उजागर हुई। विधानसभा सचिव महावीर प्रसाद शर्मा ने सोमवार को इस्तीफा देने वाले 81 विधायकों की जानकारी दी। साथ ही विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को इस्तीफा देने से लेकर इस्तीफे वापसी तक की पूरी फाइल का ब्यौरा कोर्ट में पेश किया गया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/what-will-do-sachin-pilot-if-he-does-not-get-the-post-of-chief-minister/12342/">Rajasthan Political Crisis: मुख्यमंत्री का पद नहीं मिला तो क्या करेंगे सचिन पायलट?</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">इस्तीफों की जांच में लगा समय </span></strong><br />
विधानसभा सचिव महावीर शर्मा ने पेश जवाब में कहा कि विधानसभा सदस्यों की प्रक्रिया और कार्य संचालन संबंधी नियम 173(3) के अनुसार इस्तीफे तब तक स्वीकार नहीं किए जा सकते, जब तक उनका स्वैच्छिक और वास्तविक होने का अध्यक्षीय समाधान नहीं हो जाता। इस्तीफों पर लंबे समय तक फैसले नहीं करने पर भी जवाब में विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी की ओर से तर्क दिया गया कि हर विधायक ने अलग-अलग इस्तीफे नहीं दिए थे। सामूहिक रूप से इस्तीफे पेश किए गए थे। इसमें 6 विधायकों ने खुद पेश होकर 81 विधायकों के इस्तीफे दिए थे। 5 विधायकों के इस्तीफे की फोटोकॉपी थी। इसके कारण पूरी संतुष्टि और जांच-पड़ताल के बाद ही फैसला करना जरूरी था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/rajasthan-chief-minister-ashok-gehlot-is-playing-the-safe-game/12344/">Rajasthan Congress Crisis: दोनों हाथ में लड्डू चाहते हैं अशोक गहलोत, बढ़ सकती हैं मुश्किलें</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">जोशी ने दिया जवाब</span></strong><br />
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने इस्तीफे वापसी का कारण बताते हुए लिखा कि सभी विधायकों ने अलग-अलग मेरे सामने पेश होकर स्वैच्छिक रूप से इस्तीफे वापस लेने के प्रार्थना-पत्र पेश किए हैं। प्रार्थना पत्रों में यह साफ उल्लेख किया है कि उनके द्वारा पहले दिए गए इस्तीफे स्वैच्छिक नहीं थे। सभी विधायकों ने राजस्थान विधान सभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन संबंधी नियम 173 ( 4 ) के अनुसार स्वैच्छिक रूप से अपने इस्तीफे वापस लिए हैं। यह मामला 10 वीं अनुसूची का नहीं, बल्कि मंत्री और विधायकों के इस्तीफों का है। इसलिए इसमें चार सप्ताह में फैसला करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू नहीं होता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/politics-of-rajasthan-congress-reached-a-turning-point-after-kharge-became-the-president/12400/">टर्निंग पाइंटः राजस्थान से बैरंग लौटाए गए कांग्रेस चीफ खड़गे क्या लेंगे कोई सख्त फैसला?</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">इस्तीफों की फोटो कॉपी सौंपी</span></strong><br />
25 सितंबर 2022 को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के सामने संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल, सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी, उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी, राजस्व मंत्री रामलाल जाट, कांग्रेस विधायक रफीक खान और निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा अपने साथ कुल 81 विधायकों के इस्तीफे लेकर गए थे। इनमें से 5 विधायकों- कांग्रेस विधायक चेतन डूडी, दानिश अबरार, अमित चाचाण, गोपाल मीणा और निर्दलीय विधायक सुरेश टाक के इस्तीफे की फोटो कॉपी दी गई थी।</p>
<p><strong><span style="color: #000000;">यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-coaching/kota-coaching-student-preparing-for-neet-committed-suicide/12548/">कोटा में एक और कोचिंग स्टूडेंट ने किया सुसाइड</a></span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">इस्तीफे वापस लिए गए</span></strong><br />
30 दिसंबर 2022 को 24 विधायकों ने इस्तीफे वापस लिए, 31 दिसंबर 2022 को 38 विधायक, 1 जनवरी 2023 को 15 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के सामने पेश होकर इस्तीफे वापस लिए। 2 जनवरी को 2 विधायकों ने इस्तीफे वापस लिए। 3 जनवरी को निर्दलीय संयम लोढ़ा और 10 जनवरी को कांग्रेस विधायक वाजिब अली ने इस्तीफा वापस लिया था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/shares-of-adani-companies-fell-by-39-percent/12561/">अदाणी: 39 फीसदी तक टूटे कंपनियों के शेयर, 5.57 लाख करोड़ डूबे</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">शोभारानी ने भी दिया था इस्तीफा</span></strong><br />
सामने आया है कि 25 सितंबर 2022 को सीएम गहलोत समर्थित जिन 81 विधायकों ने इस्तीफा दिया था, उनमें बीजेपी से निष्कासित धौलपुर की विधायक शोभारानी कुशवाह भी शामिल थीं। शोभारानी को राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने पर बीजेपी ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/knowledge/history-of-the-day/history-of-the-day-31-january/12564/">History Of The Day 31 January : अंतरिक्ष की अथाह ऊंचाइयों को नापा</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">13 फरवरी को अगली सुनवाई </span></strong><br />
विधानसभा सचिव की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी की। महाधिवक्ता एमएस सिंघवी भी पेश हुए। कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">किसके दबाव में थे इस्तीफे</span></strong><br />
विधानसभा सचिव ने अपने जवाब में कहा है कि विधायकों ने इस्तीफे अपनी इच्छा से नहीं दिए थे। ऐसे में यह साफ हो जाता है कि विधायकों पर इस्तीफे का दबाव था। इससे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर किसके दबाव में विधायकों ने इस्तीफे दिए थे? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह साफ है कि 25 सितम्बर को अगर विधायक इस्तीफा नहीं देते तो अशोक गहलोत को सीएम पद से हटना पड़ता है। ऐसे में विधानसभा सचिव के जवाब के बाद यह साफ हो जाता है कि सीएम अशोक गहलोत के समर्थक नेताओं के दबाव में विधायकों ने इस्तीफे दिए थे। इसके लिए जिस व्यक्ति ने भी विधायक दल की पैरलल बैठक बुलाई यानि संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल जिम्मेदार है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/world/blast-inside-the-mosque-near-police-lines-in-peshawar-pakistan/12545/">पेशावर मस्जिद ब्लास्टः 46 लोगों की मौत, 150 घायल</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">धारीवाल-जोशी-राठौड़ पर हो सकती है कार्रवाई</span></strong><br />
राजनीतिक जानकारों और कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सचिव के हलफनामे के बाद इसका असर 25 सितम्बर के एपिसोड को लेकर अनुशासनहीनता का नोटिस पाने वाले नेताओं पर हो सकता है। तीनों नेताओं को लेकर कांग्रेस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। पायलट गुट मामले में लगातार कार्रवाई की मांग करता रहा है। कांग्रेस ने उस एपिसोड को अनुशासनहीनता मानते हुए मंत्री शांति धारीवाल, महेश जोशी और आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ को दोषी माना था। ऐसे में सचिव के हलफनामे का असर तीनों नेताओं पर पड़ सकता है।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-coaching/kota-coaching-student-attempts-suicide-before-jee-exam/12527/">Kota: JEE एग्जाम से पहले कोचिंग स्टूडेंट हॉस्टल की चौथी मंजिल से कूदा</a></strong></span></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">पायलट का पलड़ा हुआ भारी </span></strong><br />
इस पूरे वाकये का असर राजस्थान कांग्रेस की राजनीति पर देखने को मिलेगा। इस्तीफे स्वैच्छा से नहीं देने की बात का फायदा पायलट गुट उठा सकता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस हलफनामे को लेकर पायलट गुट हाईकमान के सामने यह दावा कर सकता है कि 25 सितम्बर को हाईकमान के निर्देशों की अवहेलना हुई। बता दें कि 25 सितम्बर के एपिसोड पर कांग्रेस हाईकमान ने अब तक निर्णय नहीं लिया है।</p>
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		<title>टर्निंग पाइंटः राजस्थान से बैरंग लौटाए गए कांग्रेस चीफ खड़गे क्या लेंगे कोई सख्त फैसला?</title>
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		<pubDate>Wed, 19 Oct 2022 15:15:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>अजय माकन के साथ पर्यवेक्षक बनाकर राजस्थान भेजे गए थे मल्लिकार्जुन खड़गे धारीवाल के नेतृत्व में विधायकों की बगावत से दिल्ली लौटने को कर दिया था मजबूर  TISMedia@Jaipur मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद एक बार फिर राजस्थान में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि हाल &#8230;</p>
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<li><strong><span style="color: #ff0000;">अजय माकन के साथ पर्यवेक्षक बनाकर राजस्थान भेजे गए थे मल्लिकार्जुन खड़गे </span></strong></li>
<li><strong><span style="color: #ff0000;">धारीवाल के नेतृत्व में विधायकों की बगावत से दिल्ली लौटने को कर दिया था मजबूर </span></strong></li>
</ul>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Jaipur</span></strong> मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद एक बार फिर राजस्थान में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि हाल ही में पर्यवेक्षक के रूप में राजस्थान से बैरंग लौटाए गए खड़गे का रुख क्या होगा? क्या वह अशोक गहलोत और विधायकों की बगावत को गंभीरता से लेंगे या फिर यथास्थिति बरकरार रखेंगे? इस बीच &#8216;सीएम इन वेटिंग&#8217; सचिन पायलट ने खड़गे को बधाई देते हुए उनकी तारीफ की है। पायलट ने इसे &#8216;शुभ संकेत&#8217; बताया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/mallikarjun-kharge-elected-congress-president/12387/">Congress: 24 साल बाद गद्दी से हटा गांधी परिवार, मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी के नए BOSS</a></strong></p>
<p>मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस अध्यक्ष बनने में राजस्थान ही सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। खड़गे से पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पार्टी के सर्वोच्च पद के लिए सबसे बड़े दावेदार थे। सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलों के बीच विधायक दल की बैठक बुलाई गई तो गहलोत गुट ने इस्तीफे का दांव खेल दिया। पर्यवेक्षक बनाकर भेजे गए मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को निराश होकर अगले दिन लौटना पड़ा। जयपुर में हुए हंगामे के बाद सीन पूरी तरह बदल गया। गहलोत रेस से बाहर हो गए तो खड़गे कांग्रेस चीफ बन गए हैं। ऐसे में उनका रुख राजस्थान और अशोक गहलोत को लेकर क्या होगा, इस पर सियासी पंडितों की निगाहें टिकी हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/sachin-pilot-congratulates-mallikarjun-kharge-on-winning-the-election-of-congress-president/12397/">मल्लिकार्जुन खड़गे से मिले सचिन पायलट, बताया आंतरिक लोकतंत्र की जीत</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">फैसला लेना आसान नहीं</span></strong><br />
कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए राजस्थान के सियासी संकट पर फैसला लेना आसान नहीं होगा। गहलोत और पायलट कैंप के बगावती सुर रोकना खड़गे के लिए बड़ी चुनौती होगी, जो आसान नहीं है। ऐसे में राजस्थान के सियासी घमासान खड़गे के लिए अग्निपरीक्षा माना जा रहा है। खड़गे के अध्यक्ष बनने के बाद उनके फैसलों का असर राजस्थान में देखने को मिलेगा। गहलोत सीएम की कुर्सी छोड़ना चाहते नहीं है। सचिन पायलट झुकने के लिए तैयार नहीं है। गहलोत समर्थक विधायक अपने रुख पर अड़िग है। विधायक अपने पक्ष में फैसला नहीं होने पर बगावत कर सकते हैं। अब अड़गे को बेहद सावाधानी से कदम रखना होगा। हाल ही में पर्यवेक्षक के रूप में राजस्थान से निराश करके लौटाए गए खड़गे का रुख क्या होगा? क्या वह अशोक गहलोत को लेकर कड़ा रुख अख्तियार करेंगे या फिर यथास्थिति बरकरार रखेंगे? इस बीच &#8216;सीएम इन वेटिंग&#8217; सचिन पायलट ने खड़गे को बधाई देते हुए उनकी तारीफ की है। पायलट ने इसे &#8216;शुभ संकेत&#8217; बताया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/editorial/article/k-vikram-rao-explains-the-meaning-of-roger-binny-becoming-bcci-president/12392/">Binny Roger शराफत की पिच पर सियासत ​की गुगली !</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए बड़ी चुनौती </span></strong><br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए बड़ी चुनौती है गहलोत और पायलट गुट को साधने की है। खड़गे के सामने राजस्थान में बड़ी चुनौती है। चर्चा है कि खड़गे राजस्थान को लेकर कई विकल्पों पर काम कर रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान के नाम एक लाइन का प्रस्ताव पारित करवाने की कोशिश करेंगे। सीएम फैसला फिलहाल नहीं लें। सचिन पायलट के नाम पर सहमति नहीं बनी तो तीसरे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। गहलोत समर्थक मंत्रियों पर क्या ऐक्शन ले सकते हैं। सचिन पायलट के सीएम बनने पर विधायक इस्तीफा वापस नहीं लेते हैं तो ऐक्शन ले सकते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/kedl-issues-advisory-for-safe-diwali-celebrations/12390/">KEDL Advisory बिजली न बने परेशानी, ऐसे मनाएं सुरक्षित दिवाली</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>खड़गे से मिले सियासी बवाल के जिम्मेदार नेता</strong></span><br />
कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बहिष्कार के मामले में अनुशासनहीनता के आरोप में जिन तीन नेताओं को नोटिस दिया था, वे तीनों नेता दिल्ली पहुंच गए हैं। शांति धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर उन्हें अध्यक्ष बनने की बधाई दी। तीनों नेताओं ने पिछले दिनों ही नोटिस का जवाब दिया था, जिस पर अभी एक्शन पेंडिंग है। तीनों नेताओं की दिल्ली यात्रा सियासी चर्चा का विषय बना हुआ है। नए सीएम के चयन का अधिकार हाईकमान को सौंपने का प्रस्ताव पारित करने लिए 25 सितंबर को विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी, इसके लिए मल्लिकार्जुन खड़के , अजय माकन के साथ ऑब्जर्वर थे। 25 सितंबर को खडगे जब जयपुर आए थे तो उनकी अगवानी के लिए कोई बड़ा नेता, मंत्री विधायक नहीं गए थे। उस वक्त सीएम अशोक गहलोत का अध्यक्ष के तौर पर नाम चल रहा था। महेश जोशी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ जाकर खड़गे को बधाई दी। जोशी पर पैरेलल विधायक दल की बैठक के लिए विधायकों को फोन करने के आरोप थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर बधाई दी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/munawwar-rana-controversial-comment-on-mother/12395/">Munawwar Rana मेरा बाप मुस्लिम था, लेकिन मां थीं या नहीं इसकी गारंटी नहीं लेता</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">कुछ भी कहने से बचते रहे सचिन-अशोक </span></strong><br />
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कर्नाटक के बाद में मध्यप्रदेश, फिर महाराष्ट्र और हमें ऊपर वाले ने बचा लिया। सोनिया गांधी जी का, राहुल गांधी जी का आशीर्वाद था, इसलिए सरकार बच गई। हमारा पूरा कुनबा एक रहा, वरना सरकार चली जाती। गहलोत ने कहा- मैं तो मेरे रास्ते पर चल रहा हूं। पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी दे रखी है, निभा रहा हूं। उसके अलावा मैं कुछ नहीं कर रहा हूं। ईमानदारी, निष्ठा, प्रतिबद्धता के साथ में समर्पित होकर पार्टी की जिम्मेदारी निभा रहा हूं। वहीं पायलट ने कहा कि  मिलकर चुनौतियों का सामना करेंगे।</p>
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		<title>मल्लिकार्जुन खड़गे से मिले सचिन पायलट, बताया आंतरिक लोकतंत्र की जीत</title>
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		<pubDate>Wed, 19 Oct 2022 14:40:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Jaipur राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव जीतने पर मल्लिकार्जुन खड़गे को बधाई दी है। सचिन पायलट ने कहा कि लोकतंत्र में इससे बेहतर उदाहणर नहीं हो सकता, जब आंतरिक लोकतंत्र को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने बड़े व्यापक स्तर पर चुनाव कराया। 17 तारीख को मतदान &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Jaipur</span></strong> राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव जीतने पर मल्लिकार्जुन खड़गे को बधाई दी है। सचिन पायलट ने कहा कि लोकतंत्र में इससे बेहतर उदाहणर नहीं हो सकता, जब आंतरिक लोकतंत्र को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने बड़े व्यापक स्तर पर चुनाव कराया। 17 तारीख को मतदान हुआ। 90 प्रतिशत वोट मल्लिकार्जुन खड़गे को मिले हैं। ये लोकतंत्र की जीत है। देशवासियो की जीत है। कांग्रेस पार्टी की जीत है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/munawwar-rana-controversial-comment-on-mother/12395/">Munawwar Rana मेरा बाप मुस्लिम था, लेकिन मां थीं या नहीं इसकी गारंटी नहीं लेता</a></strong></p>
<p>सचिन पायलट ने बताया कि मल्लिकार्जुन खड़गे को चुनाव जीतने पर बधाई दी है। चुनाव जीतने पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी उनके ऊपर आई है। देश के सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर खड़गे के नेतृत्व में काम करेंगे। मैं समझता हूं कि चुनाव से कांग्रेस में ताकत आई है। कांग्रेस एकजुट हुई है। सब लोग मिलकर उनके नेतृत्व में काम करेंगे। मुझे पूरा भरोसा है खड़गे का जो अनुभव है। उसका लाभ पार्टी को मिलेगा। आने वाली तमाम चुनौतियों का हम सामना करेंगे। कांग्रेस पार्टी और मजबूत होगी। मधुसूदन मिस्त्री ने निष्पक्ष चुनाव कराया है। सभी मिलकर प्रशंसा की है। किसी और दल ने आज तक नहीं किया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/kedl-issues-advisory-for-safe-diwali-celebrations/12390/">KEDL Advisory बिजली न बने परेशानी, ऐसे मनाएं सुरक्षित दिवाली</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">खुले माहौल में चुनाव हुआ</span></strong><br />
सचिन पायलट ने कहा कि हमारे यहां पारदर्शिता से खुले माहौल में चुनाव हुआ है। लोगों ने अपना मत दिया है। भारी बहुमत से खड़गे चुनाव जीते है। खड़गे जमीनी नेता है। दलित समाज से आते हैं। पूरे कर्नाटक में ही नहीं पूरे देश में लोग उनकी राजनीति को जानते हैं। सचिन पायलट ने बीजेपी का नाम लिए बिना कहा कि जो हमारे विरोधी दल है। उनके अंदर खड़गे की जीत से घबराहट पैदा हो रही होगी। खड़गे के अध्यक्ष बनने के बाद नई ऊर्जा, नई ताकत और नए जोश के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता चुनाव लड़ेंगे।</p>
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		<title>Rajasthan Congress Crisis: दोनों हाथ में लड्डू चाहते हैं अशोक गहलोत, बढ़ सकती हैं मुश्किलें</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Sep 2022 19:57:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Jaipur राजस्थान के सीएम की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए कांग्रेस में जंग छिड़ी हुई है। जयपुर से लेकर दिल्ली तक पूरी पार्टी अशोक गहलोत और सचिन पायलट के खेमों में बंट चुकी है। गहलोत खेमा दिल्ली से आए दूतों के सामने बगावत तेवर दिखाने के बाद बैकफुट पर हैं। वह सोनिया को सरताज &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Jaipur</span> </strong>राजस्थान के सीएम की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए कांग्रेस में जंग छिड़ी हुई है। जयपुर से लेकर दिल्ली तक पूरी पार्टी अशोक गहलोत और सचिन पायलट के खेमों में बंट चुकी है। गहलोत खेमा दिल्ली से आए दूतों के सामने बगावत तेवर दिखाने के बाद बैकफुट पर हैं। वह सोनिया को सरताज बता अनुशासन की दुहाई दे रहे हैं। भले ही अशोक गहलोत पूरे विवाद से खुद को अलग दिखाने की कोशिश कर रहे हों लेकिन, हर कोई जानता है कि कांग्रेस के राजस्थान कांड के पीछे &#8216;सियासत के जादूगर&#8217; का ही दिमाग है। बड़ी बात यह है, गहलोत और उनका धड़ा दोनों हाथों में लड्डू चाहता है। जिसकी संभावना अब दिनों दिन कम होती चली जा रही हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/dhariwal-accuses-maken-of-being-involved-in-conspiracy-to-remove-gehlot/12333/">धारीवाल का माकन पर साजिश का आरोप, पायलट के साथ रचा गहलोत को हटाने का षड्यंत्र</a></strong></p>
<p>दरअसल अशोक गहलोत कांग्रेस के नए चीफ की दौड़ में है। उनके खिलाफ शशी थरूर का नाम सामने आ चुका है। माना जा रहा कि अशोक गहलोत नहीं चाहते हैं, कांग्रेस अध्यक्ष बने बिना वो सीएम पद से इस्तीफा दे दें। राजस्थान में हालिया घटनाक्रम को देखते हुए पार्टी आलाकमान गहलोत से नाखुश है। पहले कहा जा रहा था कि कांग्रेस के नए चीफ के लिए गांधी परिवार के साथ पार्टी के अन्य नेताओं का भी गहलोत को समर्थन है। ऐसे में गहलोत आसानी से कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं। लेकिन, मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर मचे बवाल के बाद अब समीकरण बदल गए हैं। गहलोत के कांग्रेस चीफ की राह मुश्किल ही नहीं, असंभव सी होती दिख रही है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/what-will-do-sachin-pilot-if-he-does-not-get-the-post-of-chief-minister/12342/">Rajasthan Political Crisis: मुख्यमंत्री का पद नहीं मिला तो क्या करेंगे सचिन पायलट?</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>दो निशाने लगाना चाहते हैं गहलोत</strong></span><br />
गहलोत गुट के विधायकों का खुलकर बगावत करना और इस्तीफे की धमकी देना पार्टी आलाकमान का रास नहीं आया है। माना जा रहा है कि सीएम गहलोत को इस बात की आशंका है कि पार्टी के नए चीफ के लिए उनकी राह मुश्किल हो गई है। ऐसे में गहलोत 19 अक्टूबर के फॉर्मूल से दो निशाने लगाना चाहते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए 17 अक्टूबर को वोटिंग है और चुनाव परिणाम 19 अक्टूबर को घोषित होगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/phed-chief-engineer-arrested-for-taking-bribe-of-rs-10-lakh/12339/">PHED के चीफ इंजीनियर को ACB ने 10 लाख रुपए की घूस लेते रंगे हाथों दबोचा</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">दोनों हाथों में &#8216;लड्डू&#8217; रखना चाहते हैं गहलोत</span></strong><br />
अशोक गहलोत इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि अगर वे पार्टी के नए आलाकमान बनेंगे तो राजस्थान में अपनी पसंद का सीएम बना सकते हैं। इसके लिए 19 अक्टूबर के बाद विधायक दल की बैठक होगी। इसमें बैठक में विधायकों के बहुमत के आधार पर फैसला होगा। बैठक में तय रणनीति के तहत एक लाइन का प्रस्ताव पास होगा- &#8216;सीएम का फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष करें।&#8217; फिर गेंद गहलोत के पाले में होगी। अगर अशोक गहलोत पार्टी ने नए बॉस नहीं बन पाते हैं तब वो सीएम बने रहेंगे।</p>
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		<title>Rajasthan Political Crisis: मुख्यमंत्री का पद नहीं मिला तो क्या करेंगे सचिन पायलट?</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Sep 2022 19:31:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Jaipur राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी उठापठक जारी है। अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमे के बीच जबरदस्त खींचतान चल रही है। गहलोत खेमे ने सचिन पायलट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन बनेगा राजस्थान का नया मुख्यमंत्री? अगर सीएम पद नहीं मिला तो सचिन &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Jaipur</strong></span> राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी उठापठक जारी है। अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमे के बीच जबरदस्त खींचतान चल रही है। गहलोत खेमे ने सचिन पायलट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन बनेगा राजस्थान का नया मुख्यमंत्री? अगर सीएम पद नहीं मिला तो सचिन पायलट क्या करेंगे? कांग्रेस आलाकमान गहलोत खेमे के विधायकों की मांग मानेगा या फिर पर कतरेगा? इन सभी सवालों के बीच जो सबसे बड़ा सवाल है वह यह कि आखिर अब सचिन पायलट क्या करेंगे? आइए समझते हैं उन सभी संभावनाओं को जो फिलहाल राजस्थान से सियासी संकट के बीच आ खड़ी हुई हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/dhariwal-accuses-maken-of-being-involved-in-conspiracy-to-remove-gehlot/12333/">धारीवाल का माकन पर साजिश का आरोप, पायलट के साथ रचा गहलोत को हटाने का षड्यंत्र</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">अभी क्या हालात हैं? </span></strong><br />
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की चर्चा चल रही है। 29 सितंबर तक इसके लिए नामांकन करना है। इससे पहले राजस्थान में नए मुख्यमंत्री का एलान होना बाकी है। इसी को लेकर काफी खींचतान शुरू हुई है। रविवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक होनी थी। इसके लिए पार्टी हाईकमान ने वरिष्ठ नेता अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा था। बैठक शुरू होने से पहले अशोक गहलोत खेमे के विधायकों ने बागी रूख अख्तियार कर लिया। गहलोत समर्थक विधायक मंत्री शांति धारीवाल के घर पहुंच गए और बैठक शुरू कर दी। इसके बाद सभी विधायकों ने स्पीकार से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि, ये इस्तीफा अभी तक स्पीकर ने मंजूर नहीं किया है। ये सभी विधायक किसी भी हालत में सचिन पायलट या उनके खेमे से किसी को मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहते हैं। इन विधायकों की संख्या 80 से 92 तक बताई जा रही है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/phed-chief-engineer-arrested-for-taking-bribe-of-rs-10-lakh/12339/">PHED के चीफ इंजीनियर को ACB ने 10 लाख रुपए की घूस लेते रंगे हाथों दबोचा</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">गहलोत खेमे के विधायकों की क्या है मांग?</span></strong><br />
इस्तीफा देने बाद गहलोत खेमे के विधायकों का प्रतिनिधिमंडल कांग्रेस नेता अजय माकन से मिलने पहुंचा। इसमें मंत्री प्रताप खाचरियावास, शांति धारीवाल थे। इस प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस हाईकमान के सामने अपनी शर्तें रखीं। पहली, 19 अक्तूबर को कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के बाद नया मुख्यमंत्री चुना जाए। दूसरी, यह कि नया सीएम उन 102 विधायकों में से चुना जाना चाहिए, जो 2020 में हुई बगावत के वक्त गहलोत के प्रति वफादार रहे थे, न कि सचिन पायलट या उनके समूह में से। इस पर माकन ने कहा कि  सारी बातें हम पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को बताएंगे और वहीं फैसला करेंगी। माकन ने यह भी कहा कि कांग्रेस के इतिहास में कभी भी शर्तों के साथ कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है। इतना ही नहीं उन्होंने धारीवाल के घर बैठक और फिर इस्तीफे की ड्रामेबाजी को अनुशासनहीनता तक बता दिया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/ashok-gehlot-can-bring-down-the-government-in-rajasthan-but-cannot-make-it/12319/">राजस्थान का सियासी सर्कस: पायलट के बगैर गहलोत सरकार गिरा तो सकते हैं, लेकिन बना नहीं सकते</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">मुख्यमंत्री नहीं बने तो क्या करेंगे सचिन पायलट? </span></strong><br />
इसको लेकर हमने वरिष्ठ पत्रकार अशोक शर्मा से बात की। उन्होंने कहा, &#8216;कांग्रेस हाईकमान फिलहाल असमंजस में है। विधायकों के बागी रूख से पता चलता है कि इनके पास कोई ज्यादा विकल्प नहीं बचा है। वहीं, वह सचिन पायलट गुट को भी नाराज नहीं करना चाहते हैं। यही कारण है कि बीच का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है।&#8217; मुख्यमंत्री न बनाए जाने के बाद सचिन पायलट क्या कर सकते हैं? इस सवाल पर अशोक शर्मा कहते हैं, &#8216;सचिन को लेकर अभी तीन तरह की बातें हो सकती हैं। हालांकि, वह अपने फैसले का एलान भी तभी करेंगे जब पूरी तरह से पार्टी हाईकमान का फैसला आ जाएगा&#8217;</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/bjp-leaders-took-a-dig-at-the-political-crisis-of-congress/12323/">कांग्रेस के सियासी संकट को भाजपा ने बताया &#8220;इस्तीफों का सियासी पाखंड&#8221;</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">पायलट को मुख्यमंत्री, गहलोत खेमे के दो से तीन विधायकों को डिप्टी सीएम </span></strong><br />
अशोक गहलोत के सामने कांग्रेस हाईकमान ये विकल्प रख सकता है। पार्टी चाहेगी कि इसके जरिए गहलोत अपने समर्थन में आए विधायकों को मनाएं। इसके बदले में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री तो गहलोत खेमे से दो या तीन को डिप्टी सीएम बना दिया जाए। हालांकि, जिस तरह से गहलोत खेमे के विधायक बागी रूख अपनाए हुए हैं, उसे देखकर इसकी संभावना कम ही लग रही है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/rajasthan-politics-revolt-in-rajasthan-congress-90-mlas-resigned/12316/">Rajasthan Politics: गहलोत समर्थक विधायकों का विद्रोह, 90 ने दिया इस्तीफा</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">गहलोत खेमे से मुख्यमंत्री, पायलट को प्रदेश अध्यक्ष </span></strong><br />
यह भी संभव है कि अशोक गहलोत खेमे की नाराजगी देखकर पार्टी हाईकमान सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष बना दे। वहीं, गहलोत खेमे से किसी को मुख्यमंत्री बनाया जाए। ऐसा होने पर पायलट खेमे से किसी को डिप्टी सीएम भी बनाया जा सकता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/national/congress-president-election-update/12250/">Congress President: राहुल गांधी, अशोक गहलोत या शशि थरुर, किसके हाथ में होगी कांग्रेस की पतवार?</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">पायलट को केंद्र में लाकर गहलोत को सीएम बने रहने दें</span> </strong><br />
यह भी संभव है कि सचिन पायलट को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव या फिर अध्यक्ष भी बनाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/bjp-will-contest-the-assembly-elections-in-gujarat-on-the-formula-of-up/12288/">Gujarat Assembly Election 2022: यूपी के फार्मूले से भाजपा फिर फतेह करेगी गुजरात</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बना सकते हैं सचिन पायलट</span> </strong><br />
लगातार अपनी ही पार्टी के विधायकों से सचिन पायलट घिर गए हैं। इससे साफ है कि आने वाले समय में सचिन पायलट को जो भी पद मिले, उन्हें राजस्थान के कई नेताओं का विरोध झेलना ही पड़ेगा। ऐसी स्थिति में सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों का पार्टी में रहना मुश्किल हो सकता है। संभव है कि इस हालात में सचिन पायलट कांग्रेस छोड़ दें और नई पार्टी का गठन कर लें।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/ashok-gehlot-ready-to-become-the-national-president-of-congress/12273/">ना नहीं कहूंगा: बड़ी जिम्मेदारी के लिए गहलोत तैयार, खुलकर पेश की दावेदारी</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">भाजपा में शामिल हो जाएं </span></strong><br />
सचिन पायलट का फिलहाल कांग्रेस में रहना काफी मुश्किल हो रहा है। उनकी ही पार्टियों के विधायक और नेता लगातार उनका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में नई पार्टी बनाकर चुनाव लड़ना भी सचिन पायलट के लिए थोड़ा कठिन हो सकता है। ऐसी स्थिति में वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं। भाजपा भी राजस्थान में एक बड़े और तेज तर्रार चेहरे की तलाश में है। सचिन वह चेहरा बन सकते हैं।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/what-will-do-sachin-pilot-if-he-does-not-get-the-post-of-chief-minister/12342/">Rajasthan Political Crisis: मुख्यमंत्री का पद नहीं मिला तो क्या करेंगे सचिन पायलट?</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>धारीवाल का माकन पर साजिश का आरोप, पायलट के साथ रचा गहलोत को हटाने का षड्यंत्र</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Sep 2022 18:28:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Jaipur राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कांग्रेस महासचिव व पार्टी के प्रदेश प्रभारी अजय माकन पर संगीन आरोप लगाया कि वह सचिन पायलट के साथ मिलकर अशोक गहलोत को राजस्थान के मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने की साजिश रच रहे हैं। धारीवाल ने कहा कि माकन ने पार्टी के विधायकों से पक्षपातपूर्ण &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/dhariwal-accuses-maken-of-being-involved-in-conspiracy-to-remove-gehlot/12333/">धारीवाल का माकन पर साजिश का आरोप, पायलट के साथ रचा गहलोत को हटाने का षड्यंत्र</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Jaipur</strong></span> राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कांग्रेस महासचिव व पार्टी के प्रदेश प्रभारी अजय माकन पर संगीन आरोप लगाया कि वह सचिन पायलट के साथ मिलकर अशोक गहलोत को राजस्थान के मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने की साजिश रच रहे हैं। धारीवाल ने कहा कि माकन ने पार्टी के विधायकों से पक्षपातपूर्ण तरीके से बात की, जिससे पूरा मामला बिगड़ा। इससे पहले अजय माकन ने गहलोत के वफादार विधायकों द्वारा विधायक दल की बैठक का बहिष्कार करने को अनुशासनहीनता बताते हुए धारीवाल के घर हुई बैठक की आलोचना की थी।</p>
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<p>राजस्थान में सियासी संकट गहराता जा रहा है। कांग्रेस ही कांग्रेस के खिलाफ मैदान में है। आलम यह है कि राजस्थान के कांग्रेस नेता दिल्ली में बैठे आलाकमान को भी चुनौती देने लगे हैं। प्रदेश प्रभारी के बुलावे पर विधायक दल की बैठक छोड़कर संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल के घर बैठक करने और सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की आशंका के चलते विधानसभा अध्यक्ष को अपने इस्तीफे देने की अप्रत्याशित घटना को अजय माकन ने खासा गंभीरता से लिया है। उन्होंने गहलोत के वफादार विधायकों द्वारा विधायक दल की बैठक ही नहीं उसमें लिए जाने वाले प्रस्ताव के लिए भी शर्तें रखे जाने की आलोचना की। इतना ही नहीं माकन ने यहां तक कह दिया कि इन विधायकों का विधायक दल की आधिकारिक बैठक में शामिल न होकर उसके समानांतर अन्य बैठक करना ‘‘अनुशासनहीनता’’ है।</p>
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<p><span style="color: #ff0000;"><strong>माकन के खिलाफ धारीवाल का मोर्चा </strong></span><br />
माकन की तल्खी के बाद अशोक गहलोत और उनके समर्थक विधायकों का बचाव करने के लिए राजस्थान सरकार के संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने खुलकर मोर्चा खोल दिया। धारीवाल ने सोमवार शाम अपने आवास पर पत्रकारों से बात की। जिसमें उन्होंने कहा कि ‘‘महासचिव व प्रदेश प्रभारी अजय माकन पर मेरा आरोप है कि वह पक्षपातपूर्ण तरीके से यहां के विधायकों से बात कर रहे थे। कई दिनों से लगातार ये सूचनाएं आ रही थीं कि वे सचिन पायलट के पक्ष में प्रचार करने के लिए कहा करते थे। वे विधायकों को उनसे जुड़ने के लिए कहा करते थे, हमारे पास इसके सबूत हैं।</p>
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<p><strong><span style="color: #ff0000;">षडयंत्र में शामिल थे माकन </span></strong><br />
यह पूछे जाने पर कि क्या अशोक गहलोत को हटाने का कोई षड्यंत्र था, धारीवाल ने कहा, ‘‘सौ प्रतिशत वही था और उस षड्यंत्र में महासचिव और प्रदेश प्रभारी अजय माकन शामिल थे। उन्होंने कहा कि &#8220;मैं दूसरों के लिए नहीं कहता, मैं सिर्फ महासचिव पर आरोप लगा रहा हूं .. खड़गे साहब पर कोई आरोप नहीं है..खड़गे साहब का कोई मुकाबला नहीं है। वो तो बिलकुल ईमानदार और निष्पक्ष आदमी हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम सोनिया गांधी के सिपाही हैं। मेरे पर बीते 50 साल में एक बार भी अनुशासनहीनता का आरोप नहीं लगा। पार्टी महासचिव व प्रभारी ऐसे लोगों को मुख्यमंत्री बनाने का मिशन लेकर आया है तो विधायकों को तो नाराज होना ही था।’’</p>
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<p><strong><span style="color: #ff0000;">गद्दारों को पुरस्कार बर्दास्त नहीं </span></strong><br />
धारीवाल ने कहा, ‘‘मैंने विधायकों का रोष सुना, उनकी बातें तीन घंटे तक सुनी। वो क्या चाहते हैं यह सुना। वो यह चाहते हैं कि अगर मुख्यमंत्री ही बनाना है तो कांग्रेस का निष्ठावान आदमी जो 2020 में राज्य में राजनीतिक संकट के दौरान साथ रहा, 102 विधायक जो होटलों में 34 दिन तक साथ रहे थे, उनमें से बनाया जाना चाहिए।’’ उन्होंने यह भी कहा, ‘‘राजस्थान का मुख्यमंत्री वही होगा जिसके लिए सोनिया जी कहेंगी, सोनिया जी का हुक्म माना जाएगा। कोई चुनौती नहीं दे सकता सोनिया जी के हुक्म को।’’ धारीवाल ने कहा कि गद्दारी करने वालों को पुरस्कार दिया जा रहा है जिसे यहां का विधायक कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।</p>
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<p><strong><span style="color: #ff0000;">अब जो होगा देखा जाएगा </span></strong><br />
धारीवाल ने कहा, ‘‘विधायकों की बैठक कोई आयोजित बैठक नहीं थी, विधायक एक-एक कर आते गए और अपनी बात सुनते सुनाते गए। आखिर 92 विधायक इकट्ठे हुए और इकट्ठे होकर उनकी बात सुनने में समय तो लगता है।’’ यह पूछे जाने पर कि वह विधायक दल की बैठक में क्यों नहीं गए, उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए नहीं गए क्योंकि विधायक यहां मेरे पास आने वाले थे। टेलीफोन आ रहे थे कि पहले हमारी बात सुनो उसके बाद बैठक में चलेंगे।’’ इस प्रश्न पर कि अगर आप पर कार्यवाही होती है, आपको नोटिस दिया जाता है तो वह जवाब में क्या कहेंगे, धारीवाल ने कहा कि काल्पनिक सवाल सवाल मत पूछिए। आने दीजिए जो कुछ होगा वो दिख जाएगा।&#8221;</p>
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<p><strong><span style="color: #ff0000;">यह थी विवाद की वजह </span></strong><br />
कांग्रेस विधायक दल की बैठक रविवार रात मुख्यमंत्री निवास पर होनी थी लेकिन गहलोत के वफादार अनेक विधायक इसमें नहीं आए। इन विधायकों ने संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के बंगले पर बैठक की और फिर वहां से विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी से मिलने गए और उन्हें अपने इस्तीफे सौंप दिए। विधायक दल की बैठक के लिए जयपुर आए पार्टी पर्यवेक्षक माकन एवं मल्लिकार्जुन खड़गे मुख्यमंत्री निवास पर विधायकों का इंतजार करते रहे और विधायक दल की बैठक नहीं हुई।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/dhariwal-accuses-maken-of-being-involved-in-conspiracy-to-remove-gehlot/12333/">धारीवाल का माकन पर साजिश का आरोप, पायलट के साथ रचा गहलोत को हटाने का षड्यंत्र</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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