“आसमान भी राजनीति से अछूता नहीं”
युद्ध और तनाव के कारणयूक्रेन और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में हवाई क्षेत्र बंद होने से वैश्विक उड़ान मार्ग बदल गए हैंजिससे यात्रा का समय लंबा हो गया है और परिचालन लागत (ईंधनसुरक्षा) बढ़ गई है।

कीव/तेहरान/तेल अवीव/दुबई/दोहा/नई दिल्ली।
दुनिया का आसमान कभी सीमाओं से परे जुड़ाव का प्रतीक माना जाता था। हवाई जहाज़ बादलों के ऊपर से गुजरते हुए देशों, संस्कृतियों और अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ते थे। लेकिन आज वही आसमान भू-राजनीतिक तनाव का आईना बन गया है।
यूक्रेन में जारी युद्ध, रूस और पश्चिमी देशों के बीच टकराव, तथा मिडिल ईस्ट में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय विमानन व्यवस्था को असाधारण संकट में डाल दिया है। यूरोप–एशिया और एशिया–अमेरिका को जोड़ने वाले कई प्रमुख हवाई मार्ग बंद हैं या इतने जोखिमपूर्ण हो चुके हैं कि एयरलाइंस उन्हें टाल रही हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अंतरमहाद्वीपीय उड़ानों के पारंपरिक मार्गों का बड़ा हिस्सा अब या तो अवरुद्ध है या लंबा वैकल्पिक रास्ता लेने को मजबूर है। इसका असर सिर्फ यात्रियों की जेब पर नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है।
युद्ध की छाया में बंद आसमान
फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन का हवाई क्षेत्र नागरिक उड़ानों के लिए पूरी तरह बंद है। युद्ध से पहले लंदन, पेरिस, फ्रैंकफर्ट जैसे शहरों से एशिया जाने वाली उड़ानें यूक्रेन और रूस के ऊपर से होकर सबसे छोटा मार्ग अपनाती थीं।
आज वही विमान पोलैंड, रोमानिया या तुर्की की ओर मुड़कर लंबा चक्कर लगाते हैं। परिणाम—उड़ान समय में 1 से 3 घंटे तक की बढ़ोतरी। हर अतिरिक्त घंटा एयरलाइंस के लिए ईंधन, क्रू और रखरखाव खर्च में भारी इजाफा करता है।
बीमा कंपनियों ने युद्ध-क्षेत्र के ऊपर उड़ान भरने के जोखिम को देखते हुए प्रीमियम बढ़ा दिए हैं। एक वरिष्ठ एविएशन विश्लेषक कहते हैं, “आसमान अब सिर्फ एयर ट्रैफिक कंट्रोल का विषय नहीं, बल्कि कूटनीतिक समीकरणों का हिस्सा बन चुका है।”
साइबेरियन रूट: बंद हुआ उत्तरी शॉर्टकट
रूस और यूरोपीय संघ के बीच प्रतिबंधों ने विमानन क्षेत्र को गहराई से प्रभावित किया है। पहले यूरोप से जापान और दक्षिण कोरिया जाने वाली उड़ानें साइबेरिया के ऊपर से गुजरती थीं—यह सबसे छोटा और ईंधन-कुशल मार्ग था।
लेकिन रूसी एयरस्पेस पश्चिमी एयरलाइंस के लिए बंद होने के बाद उन्हें काकेशस और मध्य एशिया के ऊपर से घूमकर जाना पड़ रहा है। इससे 2 से 4 घंटे अतिरिक्त समय लग रहा है।
कार्गो उड़ानों पर इसका असर और भी ज्यादा है। दवाइयों, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो पार्ट्स जैसे समय-संवेदनशील माल की डिलीवरी में देरी हो रही है। लागत बढ़ने से कई कंपनियां हवाई परिवहन की जगह समुद्री मार्ग का सहारा लेने पर विचार कर रही हैं।
दक्षिणी मार्ग पर नई चिंता
यूरोप से भारत और दक्षिण एशिया की उड़ानें अब तुर्की और ईरान के ऊपर से होकर आती हैं। लेकिन ईरान और इज़रायल के बीच बढ़ते तनाव ने इस साउदर्न कॉरिडोर को भी अस्थिर बना दिया है।
यदि क्षेत्रीय संघर्ष और गहराता है तो एयरलाइंस को अरब सागर के ऊपर और लंबा समुद्री मार्ग अपनाना पड़ सकता है। इससे उड़ान समय और लागत दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
एयरलाइन उद्योग के सूत्रों के अनुसार, “हर वैकल्पिक मार्ग का मतलब है अधिक ईंधन, अधिक क्रू घंटे और अधिक रखरखाव खर्च।”
खाड़ी के हब: दबाव में ट्रांजिट नेटवर्क
दुबई और दोहा वैश्विक ट्रांजिट नेटवर्क के प्रमुख स्तंभ हैं। भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली हजारों उड़ानें इन हब के जरिए संचालित होती हैं।
हालांकि संयुक्त अरब अमीरात और कतर का हवाई क्षेत्र अभी खुला है, लेकिन उच्च सुरक्षा अलर्ट पर है। किसी भी अप्रत्याशित सैन्य घटना का असर तुरंत वैश्विक ट्रांजिट व्यवस्था पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि खाड़ी क्षेत्र अस्थिर हुआ, तो एशिया–यूरोप यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग बेहद सीमित रह जाएंगे।
350 भारतीय उड़ानें रद्द, खाड़ी सेवाओं पर रोक
मिडिल ईस्ट में हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रम के चलते 1 मार्च 2026 को भारतीय घरेलू वाहकों की कुल 350 उड़ानें रद्द कर दी गईं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी उड़ान की स्थिति एयरलाइंस से जांचें।
इसी बीच एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के लिए आने-जाने वाली उड़ानों पर रोक 2 मार्च 2026 को 23:59 बजे IST (18:29 UTC) तक बढ़ा दी है।
एयरलाइन के प्रवक्ता के अनुसार, जिन यात्रियों ने 5 मार्च 2026 तक की यात्रा 28 फरवरी 2026 तक बुक की थी, उन्हें बिना किसी तारीख बदलने की फीस के रीशेड्यूल या पूरा रिफंड लेने का विकल्प दिया जा रहा है।
यह फैसला खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात को देखते हुए एहतियात के तौर पर लिया गया है।
यात्रियों की जेब पर असर हवाई मार्गों में बदलाव का सीधा असर टिकट कीमतों पर दिख रहा है। उड़ान समय में 1–4 घंटे तक की वृद्धि ईंधन लागत में इजाफा बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी कार्गो दरों में वृद्धि यात्रियों के लिए महंगी टिकटें
अंतरराष्ट्रीय विमानन उद्योग पहले ही महामारी के झटके से उबरने की कोशिश कर रहा था। अब युद्ध और क्षेत्रीय तनाव ने उसे नई आर्थिक चुनौतियों में डाल दिया है।
कुछ एयरलाइंस ने लंबी दूरी की उड़ानों पर ‘फ्यूल सरचार्ज’ बढ़ा दिया है। वहीं बिजनेस ट्रैवल में कमी और वर्चुअल मीटिंग्स के बढ़ते चलन ने मांग के स्वरूप को भी बदल दिया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव हवाई यात्रा सिर्फ यात्रियों को नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार को भी जोड़ती है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और ताजे खाद्य पदार्थों की तेज़ डिलीवरी के लिए एयर कार्गो अहम है।जब मार्ग लंबा होता है, तो डिलीवरी धीमी और महंगी हो जाती है। इसका असर सप्लाई चेन और खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है।अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबी चली तो वैश्विक व्यापार की लागत संरचना में स्थायी बदलाव आ सकता है।


