हेमंत बिस्वा सरमा: कांग्रेस छोड़ने का मिला तोहफा, बने असम के 14वें मुख्यमंत्री

TIS Media @guwahati. दोबारा असम का मुख्यमंत्री बनने की हसरत पाले बैठे असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल के हिस्से मायूसी आई है। उनकी जगह हेमंत बिस्वा सरमा को कांग्रेस छोड़ने का इनाम दे भाजपा ने असम का 14वां मुख्यमंत्री घोषित कर दिया है। गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज की छात्र राजनीति से सियासी पारी की शुरुआत करने वाले सरमा रविवार को विधायक दल का नेता चुना गया।
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असम विधानसभा की 126 सीटों में भाजपा के मित्र जोत गठबंधन ने 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि कांग्रेस के महा जोत गठबंधन के हिस्से में 50 सीटें आई थीं। कांग्रेस को कई सीटों पर काफी कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा। वहीं भाजपा गठबंधन की जीत का अंतर भी बेहद कम ही रहा।
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तोमर ने की घोषणा
चुनावी नतीजे आने के बाद से ही भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व असम की कमान मजबूत हाथों में देने की कोशिश में जुटा था। रविवार को जब विधायक दल की बैठक शुरू हुई तो हेमंत बिस्वा सरमा और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल एक साथ बैठक में पहुंचे थे। इसके कुछ देर बाद ही सर्वानंद के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिए जाने की सूचना सामने आई। तभी ये साफ हो गया था कि हेमंत बिस्वा सरमा ही अगले मुख्यमंत्री होंगे। कुछ देर बाद खुद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने असम विधानमंडल के नेता के रूप में हेमंत बिस्वा सरमा को विधायक दल का नेता घोषित किया।
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कांग्रेस छोड़ते ही बन गए सीएम
52 वर्षीय हेमंत बिस्वा सरमा असम में कांग्रेस का मजबूत चेहरा हुआ करते थे। साल 1996 से 2015 तक वे कांग्रेस में रहे। बिस्वा पहली बार 2001 में विधायक चुने गए थे। तब उन्होंने असोम गण परिषद के नेता भ्रिगी कुमार पुखन को पराजित किया था। करीब 19 साल तक खुद को कांग्रेस का सिपाही कहने वाले बिस्वा ने 2015 में अचानक अमित शाह से मुलाकात कर भाजपा का दामन थाम लिया। शाह ने उन्हें असम में चुनावी रणनीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी और शाह का यह दांव कारगर साबित हुआ। बिस्वा की रणनीति का ही परिणाम था कि भाजपा ने असम में जीत हासिल की और पहली बार सरकार बनाई, लेकिन मुख्यमंत्री सोनेवाल लोगों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। इसका नतीजा यह रहा कि 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को असम जीतने के लिए नाकों चने चबाने पड़े।