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	<title>V Talk Archives - TIS Media</title>
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	<description>हर अक्षर सच, हर खबर निष्पक्ष </description>
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	<title>V Talk Archives - TIS Media</title>
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		<title>किताब: रोंगटे खड़े कर देगी मुगलिया सल्तन की नींव हिलाने वाले इस जाट योद्धा की सच्ची कहानी</title>
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		<pubDate>Sun, 18 Sep 2022 07:55:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Agra इतिहास की किताबें मुगलिया सल्तनत की वाहवाहियों से भरी हुई हैं, लेकिन उनकी चूलें हिला देने वाले योद्धाओं की जानकारियां जुटाने में आम लोगों की बात तो छोड़िए इतिहासकारों तक के पसीने छूट जाते हैं। एक ऐसी ही वीर योद्धा थे हिन्दू धर्म रक्षक वीर गोकुला जाट। वीर गोकुला ने मुगलिया सल्तनत के सबसे &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Agra</strong></span> इतिहास की किताबें मुगलिया सल्तनत की वाहवाहियों से भरी हुई हैं, लेकिन उनकी चूलें हिला देने वाले योद्धाओं की जानकारियां जुटाने में आम लोगों की बात तो छोड़िए इतिहासकारों तक के पसीने छूट जाते हैं। एक ऐसी ही वीर योद्धा थे हिन्दू धर्म रक्षक वीर गोकुला जाट। वीर गोकुला ने मुगलिया सल्तनत के सबसे खूंखार बादशाह औरंगजेब को कड़ी टक्कर दी थी। वीर गोकुला के खौफ का आलम यह था कि औरंगजेब ने उनके शरीर के दर्जनों टुकड़े करवा दिए थे, लेकिन इसकी कीमत उसे ताजमहल से लेकर बादशाह अकबर की कब्र लुटवाकर चुकानी पड़ी। वीर गोकुला जाट के पराक्रम को लिपिबद्ध किया है आगरा के वरिष्ठ पत्रकार भानू प्रताप सिंह ने।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/rajasthan/59-proposals-came-to-ram-lubhaya-committee-to-create-new-districts-in-rajasthan/12165/">Rajasthan: विधान सभा चुनाव से पहले मिल सकता है नए जिलों का तोहफा</a></strong></p>
<p>भारत के इतिहास में हमें अधिकांशतः मुगल काल के बारे में पढ़ाया जाता है। पाठ्य पुस्तकें बाबर, अकबर, शाहजहां और औरंगजेब की शान से भरी हुई हैं। आततायी, क्रूर, कट्टर और हिन्दुओं को शत्रु मानने वाले औरंगजेब के बारे में ऐसी-ऐसी बातें गढ़ी गई हैं कि आश्चर्य होता है।औरंगजेब को तो ‘जिन्दा पीर’ तक बताया गया है। औरंगजेब ने मंदिरों को ध्वस्त किया। काशी विश्वनाथ मंदिर और केशवराय मंदिर मथुरा ध्वस्त करके मस्जिद बनाई। औरंगजेब ने सत्ता प्राप्ति के लिए हर तरह की क्रूरता की। अपने भाई मुरादबख्श, दारा शिकोह और शाह शुजा को मरवा दिया। इतना ही नहीं, अपने अब्बू बादशाह शाहजहां को आगरा किले के मुसम्मन बुर्ज में सन 1658 से 1666 तक कैद रखा। यहीं उसकी मृत्यु हुई। उसने हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया। हिन्दुओं को जबरिया मुस्लिम बनाया। सिक्कों पर कलमा खुदवाया। इस तरह के घटनाक्रमों के बारे में बहुत मामूली जानकारी दी गई है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/india/chandigarh-university-girls-hostel-mms-scandal-videos-of-60-girl-students-went-viral/12162/">चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की 60 छात्राओं का नहाते हुए का वीडियो हुआ वायरल</a></strong></p>
<p>इसी कट्टर मुस्लिम बादशाह औरंगजेब ने वीर गोकुल सिंह यानी गोकुला जाट की हत्या अंग-अंग कटवाकर की। यह घटना एक जनवरी, सन 1670 को आगरा में पुरानी कोतवाली के चबूतरे पर हुई। इसके तत्काल बाद केशवराय मंदिर (श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा) को तुड़वाकर मस्जिद खड़ी कर दी, जिसे ईदगाह कहा जाता है।औरगंजेब केशवराय मंदिर को तब तक नहीं तुड़वा पाता जब तक कि वीर गोकुल सिंह जाट जीवित रहते। इसलिए पहले श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर के रक्षक वीर गोकुल सिंह की हत्या क्रूरता से कराई। गोकुल सिंह के चाचा उदय सिंह की खाल खिंचवा ली। वह भी इसलिए कि गोकुल सिंह और उदय सिंह ने हिन्दू धर्म छोड़कर मुस्लिम धर्म अपनाने से इनकार कर दिया था। अगर वह मुस्लिम बन जाते तो जीवित रहते और जमींदारी भी वापस मिल जाती।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/rajasthan/congress-leaders-clash-in-rajasthan-ashok-chandna-sachin-pilot-ashok-gehlot/12135/"> राजस्थान में कांग्रेस टूटने से नहीं बचा पा रहे भारत जोड़ने निकले राहुल गांधी</a></strong></p>
<p>वीर गोकुल सिंह ने मुगल शासन के खिलाफ किसान क्रांति का अलख जगाया। इसका भी कारण था। मुगल सिपाही लगान वसूली के नाम पर अत्याचार कर रहे थे। हिन्दुओं की बहन बेटियों के साथ खुलेआम दुष्कर्म कर रहे थे। लगान न देने पर हिन्दुओं के पशुओं को खोल ले जाते, बहन-बेटियों को उठा ले जाते। हिन्दुओं के लिए पूजनीय गाय का मांस खाते। हिन्दुओं को धर्मपरिवर्तन के लिए मजबूर करते। वीर गोकुल सिंह के बलिदान का बदला जाट वीरों ने ताजमहल लूटकर, अकबर का मकबरा (सिकंदरा) में भूसा भरवा कर और अकबर की कब्र खोदकर हड्डियों को जलाकर लिया। इसके निशान आज भी मौजूद हैं।</p>
<p><iframe title="#video  देखिए वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में कैसे मची भगदड़, 2 श्रद्धालुओं की मौत" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/9HAOr2RLPkk?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>यह पुस्तक ऐसे ही वीर गोकुल सिंह के बलिदान की महागाथा है। ऐसा वीर गोकुल सिंह जिसके साथ इतिहासकारों ने अन्याय किया। गोकुल सिंह के लिए एक पंक्ति तक नहीं लिखी। यह काम इसलिए किया कि वीर गोकुल सिंह ने औरगंजेब के छक्के छुड़ा दिए थे। औरंगजेब की झूठी शान बनाए रखने के लिए वीर गोकुल सिंह का नाम किताबों से तो गायब कर दिया लेकिन आम जनता के मस्तिष्क पटल से गायब नहीं कर सके। किंवदंतियों में गोकुल सिंह आज भी जीवित हैं और सदा रहेंगे। वीर गोकुल सिंह जैसा दिलेर संसार में नहीं हुआ है। अगर गोकुल सिंह सिख धर्म में जन्मे होते तो उनकी स्वर्ण प्रतिमाएं लग गई होतीं।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="World Population Day। आओ, चमत्कार दिखाएं आपको आज..." width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/6XnaWmpU5zs?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>इस पुस्तक में कई रहस्योद्घाटन भी किए गए हैं। वीर गोकुल सिंह का आगरा में वास्तविक बलिदान स्थल खोजा गया है। गोकुल सिंह के वंशज आज भी गांव में रहते हैं। गोकुल सिंह की बहन भँवरी कौर के बलिदान का रोमांचक वर्णन है। तिलपत युद्ध का रोमांचक खाका खींचा गया है। वीर गोकुल सिंह को मदद करने वाले माथुर वैश्य समाज पर भी औरंगजेब ने कहर बरपाया। इसका विस्तृत खुलासा पुस्तक में किया गया है। आनंद शर्मा जी और प्रदीप जैन जी के सहयोग से पुस्तक प्रकाशित हुई है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">लेखकः</span> डॉ. भानु प्रताप सिंह ‘चपौटा’ </strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">प्रकाशकः</span> निखिल पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स, आगरा</strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">पुस्तक का मूल्यः</span> 299 रुपये</strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">प्रचार के लिए मूल्यः</span> 250 रुपये (डाक खर्च फ्री)</strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">यहां भेजें धनराशिः</span> गूगल पे, पेटीएम 9412652233</strong><br />
<strong>भेजी गई धनराशि का स्क्रीन शॉट और पिन कोड के साथ पूरा पता वॉट्सअप करें।</strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">कॉलिंग</span> 8279625939</strong><br />
<strong>M.I.G./A 107, शास्त्रीपुरम, सिकंदरा बोदला रोड, आगरा</strong></p>
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		<title>जन आस्थाओं का संरक्षक और कवि की सामर्थ्य का प्रतिमान है रामचरित मानस: अतुल कनक</title>
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		<pubDate>Sat, 02 Apr 2022 12:40:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>हर वर्ष शारदीय और चैत्र नवरात्रि पर मौन रहता हूँ। मौन के दौरान मन में संवाद की चाह भी नहीं रहे, यही कोशिश करता हूँ। हालांकि मौन वाणी पर नियंत्रण का तप है, विचारों पर तो नियंत्रण पाना सामान्य गृहस्थ के लिए बहुत दुरूह है। ऐसा होना चाहिए, पर हो नहीं पाता। इधर, पिछले कुछ &#8230;</p>
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				<h4>अतुल कनक </h4>राजस्थानी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक उपन्यास जूण–जातरा के लिये उन्हें सन् 2011 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें राजस्थानी भाषा के प्रतिष्ठित बैजनाथ पंवार पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। राजस्थान की माध्यमिक कक्षाओं में उनके लिखे लेख विद्यार्थियों को पढ़ाए जाते हैं। मंचीय कविता पाठ के लिए देश भर में खासे विख्यात हैं। इतना ही नहीं समसामयिक विषयों पर उनके लेख निरंतर देश के प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं।
			</div>
		</div>
	
<p>हर वर्ष शारदीय और चैत्र नवरात्रि पर मौन रहता हूँ। मौन के दौरान मन में संवाद की चाह भी नहीं रहे, यही कोशिश करता हूँ। हालांकि मौन वाणी पर नियंत्रण का तप है, विचारों पर तो नियंत्रण पाना सामान्य गृहस्थ के लिए बहुत दुरूह है। ऐसा होना चाहिए, पर हो नहीं पाता। इधर, पिछले कुछ समय से यह भी कर रहा हूँ कि हर शनिवार किसी पुस्तक के बारे में कुछ लिखता हूँ। जीवन कई बार आपके संकल्पों को ही परस्पर विरोधी बना देता है। इन्हीं विरोधों पर विजय की सार्थक चेतना जुटाने के लिए ही तो हम मन को अलग अलग व्रतों से साधते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/entertainment/art-and-literature/mahadevi-verma-hindi-poetry/11762/">महादेवी वर्माः पंथ होने दो अपरिचित, हुए शूल अक्षत, सब बुझे दीपक जला लूँ ! पढ़िए, 51 महान कविताएं</a></strong></p>
<p>यह हो सकता था कि मैं आज किसी पुस्तक के बारे में नहीं लिखता। लेकिन मुझे यह उचित प्रतीत नहीं हुआ। फिर सोचा चैत्र नवरात्र में हमारे यहाँ रामचरित मानस के पारायण की एक पुष्ट परंपरा रही है- क्यों न आज उसी के बारे में बात की जाए। रामकथा का उत्स वाल्मीकि की रामायण से माना जाता है। तमसा नदी के तट पर ऋषि भारद्वाज के साथ आए हुए वाल्मीकि ने क्रौंच पक्षी के प्रेम और फिर विरह पीड़ा से साक्षात किया और कुछ दिनों तक एक विकलता से व्यतीत होने के बाद रामायण नामक उस विलक्षण काव्य का प्रतिपादन किया जिसमें 24 हजार श्लोक, पाँच सौ सर्ग और 6 काण्ड हैं । यह रचना तब पूर्ण हुई थी जब राम ने वन से लौटकर राज्य का शासन अपने हाथ में ले लिया था &#8211; &#8220;प्राप्तराजस्व रामस्य वाल्मीकिर्भगवानृषि:/ चकार चरितं कृतनं विचित्रपदमर्थवत्।।&#8221; इस महाकाव्य को पौलस्त्य वध या दशानन वध भी कहा गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/entertainment/art-and-literature/munshi-premchand-story-shankhnad-tis-media/10215/">शंखनाद: मुंशी प्रेमचंद की बयानी मुखिया भानु चौधरी के घर की कहानी&#8230;</a></strong></p>
<p>तुलसी ने जब रामचरितमानस का प्रणयन किया, उस समय भारत के अधिकांश हिस्से पर मुगलों का शासन था। लंबे समय से विदेशी आक्रांताओं के अधीन रहने के कारण समाज में सनातन परंपरा कई चुनौतियों का सामना कर रही थी। मान्यताएं कहती हैं कि तुलसी अपनी पत्नी से झिड़की मिलने के बाद भक्ति की ओर प्रवृत्त हुए थे। चूकि जन आस्थाओं ने राम कथा में कई प्रसंग जोड़ दिए थे, इसलिए वाल्मीकि की रामकथा और तुलसी की रामकथा में कुछ अंतर मिलता है। मसलन- वाल्मीकी ने सीता स्वयंवर का उल्लेख नहीं किया।जब स्वयंवर हुआ ही नहीं तो राजसभा में लक्ष्मण और परशुराम के मध्य उग्र संवाद कहाँ से होता? वाल्मीकी के अनुसार परशुराम शिवधनुष भंग होने के कारण क्षोभ में तो थे लेकिन वो राम- लक्ष्मण से उस समय वन में मिले थे जब विवाह के बाद दशरथ के साथ सब लोग अयोध्या जा रहे थे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः<a href="https://tismedia.in/knowledge/do-you-know/know-who-was-the-real-turram-khan/10920/"> खुद को बड़ा तुर्रम खां समझते हो, जानिए आखिर कौन थे असली तुर्रम खां?</a></strong></p>
<p>लेकिन तुलसी की शब्द साधना की शक्ति ही कहा जाना चाहिए कि मूल कथा से इत्र जाकर भी उन्होंने जो कुछ लिखा, वही जन- जन का विश्वास हो गया। इसका एक बड़ा कारण यह भी हो सकता है कि तुलसी ने आम आदमी की भाषा में अपनी बात कही और लोक अपनी भाषा में कही गई सार्थक बातों को बहुत स्नेह और सम्मान से सहेजता है। यह तुलसी की साधना का ही कमाल है कि उनकी लिखी कई पंक्तियों के बारे में ज्योतिष कहते हैं कि उनका निरंतर जप करने से मनोवांछित फल मिलते हैं। तुलसी सब देवताओं, गुरू की आराधना करने के बाद कहते हैं &#8211; &#8220;बिनु सतसंग बिबेक न होंई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई/ सतसंगत मुद मंगल मूला, सोइ फल सिधि सब साधन फूला।&#8221;</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/editorial/article/how-was-the-goonda-act-made-in-india/10308/">कौन है गुंडा? कैसे बना गुंडा एक्ट? जानिए हैरतंगेज हकीकत</a></strong></span></p>
<p>रामचरित मानस का सबसे अद्भुत पक्ष यह है कि यह बहुत कुशलता से जीवन के महत्वपूर्ण सूत्रों से हमारा परिचय कराता है- &#8220;गुन अवगुन जानत सब कोई, जो जेहि भाव नीक तेहि सोई &#8221; और &#8220;अब मोहि भा भरोस हनुमंता/ बिनु हरि कृपा मिलेहिं न संता&#8221; या &#8220;जाको प्रभु दारुण दुख देहि, ताकी मति पहले हर लेहि&#8221; जैसे कितने ही सूत्र वाक्य रामचरितमानस में पाठक के चिंतन की देहरी पर दस्तक देते हैं। मानस की रचना का प्रस्थान बिंदु यह विश्वास है &#8211; &#8220;जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि/ बंदऊं सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि।&#8221; कवि की विनम्रता देखिए कि वो कहता है- मेरी कविता भद्दी है, लेकिन इसमें रामकथा होने के कारण यह अच्छी समझी जाएगी &#8211; &#8220;भनिति भदेस बस्तु भलि बरनी/ राम कथा जग मंगल करनी।&#8221; लेकिन काव्य के प्रारंभ में ही वो उन लोगों को कोसने से भी नहीं चूकते, जो लोगों की धार्मिक आस्थाओं का उपयोग अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए करते हैं &#8211; &#8220;बंचक भगत कहाइ राम के, किंकर कंचन कोह काम के/ तिन्ह महँ प्रथम रेख जग मोरी, धींग धरमध्वज धंधक धोरी।&#8221; इन पंक्तियों में आया अनुप्रास तुलसी की शब्द साधना का प्रमाण है।</p>
<p><b>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/knowledge/do-you-know/know-who-was-the-real-turram-khan/10920/">खुद को बड़ा तुर्रम खां समझते हो, जानिए आखिर कौन थे असली तुर्रम खां?</a></b></p>
<p>किसी कवि की शब्द सामर्थ्य और थोड़े में बहुत कुछ कह देने की क्षमता देखनी हो तो रामचरित मानस का अध्ययन जरूर किया जाना चाहिए। यदि लोक में आज भी यह विश्वास कायम है कि रामकथा कलि कलुष विभंजनि &#8221; या &#8220;रामकथा कलि कामद गांव &#8221; तो उस विश्वास को बनाए रखने में तुलसी का बहुत बड़ा योगदान है। आज भी यह विश्वास बहुत आम है कि सुंदरकांड के पारायण से व्यक्ति के जीवन को आकस्मिक संकटों से मुक्ति मिलती है। कविता, मंत्र, पूजा, ज्योतिष- इन सबका सबसे सार्थक रूप यही है कि वो लोगों में चुनौतियों का सामना सकारात्मकता से करने का संकल्प जगाएं और रामचरित मानस ने जिस तरह से कविता के प्रति समाज की इस आस्था को थाम रखा है, वैसे उदाहरण बिरले ही मिलेंगे।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/art-culture/atul-kanak-article-on-ramcharitmanas/11912/">जन आस्थाओं का संरक्षक और कवि की सामर्थ्य का प्रतिमान है रामचरित मानस: अतुल कनक</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<item>
		<title>महादेवी वर्माः पंथ होने दो अपरिचित, हुए शूल अक्षत, सब बुझे दीपक जला लूँ ! पढ़िए, 51 महान कविताएं</title>
		<link>https://tismedia.in/entertainment/art-and-literature/mahadevi-verma-hindi-poetry/11762/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=mahadevi-verma-hindi-poetry</link>
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		<dc:creator><![CDATA[tismedia.in]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Mar 2022 05:27:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Art and Literature]]></category>
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		<category><![CDATA[Cover Stories]]></category>
		<category><![CDATA[V Talk]]></category>
		<category><![CDATA[VTalk]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Poetry]]></category>
		<category><![CDATA[Mahadevi Verma]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महादेवी वर्मा की प्रमुख कविताएं&#8230;  1. दीप मेरे जल अकम्पित दीप मेरे जल अकम्पित, घुल अचंचल! सिन्धु का उच्छवास घन है, तड़ित, तम का विकल मन है, भीति क्या नभ है व्यथा का आँसुओं से सिक्त अंचल! स्वर-प्रकम्पित कर दिशायें, मीड़, सब भू की शिरायें, गा रहे आंधी-प्रलय तेरे लिये ही आज मंगल मोह क्या &#8230;</p>
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				<img loading="lazy" decoding="async" src="https://tismedia.in/wp-content/uploads/2022/03/tismedia.in-mahadevi-verma.jpg" alt="महादेवी वर्मा (26 मार्च, 1907-11 सितंबर, 1987) " class="author-avatar-img" width="111" height="111" />
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				<h4>महादेवी वर्मा (26 मार्च, 1907-11 सितंबर, 1987) </h4>हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के प्रमुख स्तंभों जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और सुमित्रानंदन पंत के साथ महत्वपूर्ण स्तंभ मानी जाती हैं। उन्हें आधुनिक मीरा भी कहा गया है। कवि निराला ने उन्हें “हिन्दी के विशाल मन्दिर की सरस्वती” भी कहा है। उन्होंने अध्यापन से अपने कार्यजीवन की शुरूआत की और अंतिम समय तक वे प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या बनी रहीं। उनका बाल-विवाह हुआ परंतु उन्होंने अविवाहित की भांति जीवन-यापन किया। प्रतिभावान कवयित्री और गद्य लेखिका महादेवी वर्मा साहित्य और संगीत में निपुण होने के साथ साथ कुशल चित्रकार और सृजनात्मक अनुवादक भी थीं। उन्हें हिन्दी साहित्य के सभी महत्त्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव प्राप्त है। गत शताब्दी की सर्वाधिक लोकप्रिय महिला साहित्यकार के रूप में वे जीवन भर बनी रहीं। वे भारत की 50 सबसे यशस्वी महिलाओं में भी शामिल हैं। महादेवी वर्मा और सुभद्रा कुमारी चौहान के बीच बचपन से मित्रता थी।
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<p><strong><span style="color: #ff0000;">महादेवी वर्मा की प्रमुख कविताएं&#8230; </span></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong><span style="color: #0000ff;">1.</span> दीप मेरे जल अकम्पित</strong></span><br />
दीप मेरे जल अकम्पित,<br />
घुल अचंचल!<br />
सिन्धु का उच्छवास घन है,<br />
तड़ित, तम का विकल मन है,<br />
भीति क्या नभ है व्यथा का<br />
आँसुओं से सिक्त अंचल!<br />
स्वर-प्रकम्पित कर दिशायें,<br />
मीड़, सब भू की शिरायें,<br />
गा रहे आंधी-प्रलय<br />
तेरे लिये ही आज मंगल<br />
मोह क्या निशि के वरों का,<br />
शलभ के झुलसे परों का<br />
साथ अक्षय ज्वाल का<br />
तू ले चला अनमोल सम्बल!<br />
पथ न भूले, एक पग भी,<br />
घर न खोये, लघु विहग भी,<br />
स्निग्ध लौ की तूलिका से<br />
आँक सबकी छाँह उज्ज्वल<br />
हो लिये सब साथ अपने,<br />
मृदुल आहटहीन सपने,<br />
तू इन्हें पाथेय बिन, चिर<br />
प्यास के मरु में न खो, चल!<br />
धूम में अब बोलना क्या,<br />
क्षार में अब तोलना क्या!<br />
प्रात हंस रोकर गिनेगा,<br />
स्वर्ण कितने हो चुके पल!<br />
दीप रे तू गल अकम्पित,<br />
चल अंचल!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;"><span style="color: #0000ff;">2.</span> पंथ होने दो अपरिचित</span></strong><br />
पंथ होने दो अपरिचित<br />
प्राण रहने दो अकेला</p>
<p>और होंगे चरण हारे,<br />
अन्य हैं जो लौटते दे शूल को संकल्प सारे;<br />
दुखव्रती निर्माण-उन्मद<br />
यह अमरता नापते पद;<br />
बाँध देंगे अंक-संसृति से तिमिर में स्वर्ण बेला</p>
<p>दूसरी होगी कहानी<br />
शून्य में जिसके मिटे स्वर, धूलि में खोई निशानी;<br />
आज जिसपर प्यार विस्मृत ,<br />
मैं लगाती चल रही नित,<br />
मोतियों की हाट औ, चिनगारियों का एक मेला</p>
<p>हास का मधु-दूत भेजो,<br />
रोष की भ्रूभंगिमा पतझार को चाहे सहेजो;<br />
ले मिलेगा उर अचंचल<br />
वेदना-जल स्वप्न-शतदल,<br />
जान लो, वह मिलन-एकाकी विरह में है दुकेला</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong><span style="color: #0000ff;">3.</span> ओ चिर नीरव</strong></span><br />
मैं सरित विकल,<br />
तेरी समाधि की सिद्धि अकल,<br />
चिर निद्रा में सपने का पल,<br />
ले चली लास में लय-गौरव</p>
<p>मैं अश्रु-तरल,<br />
तेरे ही प्राणों की हलचल,<br />
पा तेरी साधों का सम्बल,<br />
मैं फूट पड़ी ले स्वर-वैभव !</p>
<p>मैं सुधि-नर्तन,<br />
पथ बना, उठे जिस ओर चरण,<br />
दिशा रचता जाता नुपूर-स्वन,<br />
जगता जर्जर जग का शैशव !</p>
<p>मैं पुलकाकुल,<br />
पल पल जाती रस-गागर ढुल,<br />
प्रस्तर के जाते बन्धन खुल,<br />
लुट रहीं व्यथा-निधियाँ नव-नव !</p>
<p>मैं चिर चंचल,<br />
मुझसे है तट-रेखा अविचल,<br />
तट पर रूपों का कोलाहल,<br />
रस-रंग-सुमन-तृण-कण-पल्लव !</p>
<p>मैं ऊर्म्मि विरल,<br />
तू तुंग अचल, वह सिन्धु अतल,<br />
बाँधें दोनों को मैं चल चल,<br />
धो रही द्वैत के सौ कैतव !</p>
<p>मैं गति विह्वल,<br />
पाथेय रहे तेरा दृग-जल,<br />
आवास मिले भू का अंचल,<br />
मैं करुणा की वाहक अभिनव !</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>4. <span style="color: #ff0000;">प्राण हँस कर ले चला जब</span></strong></span><br />
प्राण हँस कर ले चला जब<br />
चिर व्यथा का भार!</p>
<p>उभर आये सिन्धु उर में<br />
वीचियों के लेख,<br />
गिरि कपोलों पर न सूखी<br />
आँसुओं की रेख।<br />
धूलि का नभ से न रुक पाया कसक-व्यापार!</p>
<p>शान्त दीपों में जगी नभ<br />
की समाधि अनन्त,<br />
बन गये प्रहरी, पहन<br />
आलोक-तिमिर, दिगन्त!<br />
किरण तारों पर हुए हिम-बिन्दु बन्दनवार।</p>
<p>स्वर्ण-शर से साध के<br />
घन ने लिया उर बेध,<br />
स्वप्न-विहगों को हुआ<br />
यह क्षितिज मूक निषेध!<br />
क्षण चले करने क्षणों का पुलक से श्रृंगार!</p>
<p>शून्य के निश्वास ने दी<br />
तूलिका सी फर,<br />
ज्वार शत शत रंग के<br />
फैले धरा को घेर!<br />
वात अणु अणु में समा रचने लगी विस्तार!</p>
<p>अब न लौटाने कहो<br />
अभिशाप की वह पीर,<br />
बन चुकी स्पन्दन ह्रदय में<br />
वह नयन में नीर!<br />
अमरता उसमें मनाती है मरण-त्योहार!</p>
<p>छाँह में उसकी गये आ<br />
शूल फूल समीप,<br />
ज्वाल का मोती सँभाले<br />
मोम की यह सीप<br />
सृजन के शत दीप थामे प्रलय दीपाधार!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;"><span style="color: #0000ff;">5.</span> सब बुझे दीपक जला लूँ !</span></strong><br />
सब बुझे दीपक जला लूं<br />
घिर रहा तम आज दीपक रागिनी जगा लूं</p>
<p>क्षितिज कारा तोडकर अब<br />
गा उठी उन्मत आंधी,<br />
अब घटाओं में न रुकती<br />
लास तन्मय तडित बांधी,<br />
धूल की इस वीणा पर मैं तार हर त्रण का मिला लूं!</p>
<p>भीत तारक मूंदते द्रग<br />
भ्रान्त मारुत पथ न पाता,<br />
छोड उल्का अंक नभ में<br />
ध्वंस आता हरहराता<br />
उंगलियों की ओट में सुकुमार सब सपने बचा लूं!</p>
<p>लय बनी मृदु वर्तिका<br />
हर स्वर बना बन लौ सजीली,<br />
फैलती आलोक सी<br />
झंकार मेरी स्नेह गीली<br />
इस मरण के पर्व को मैं आज दीवाली बना लूं!</p>
<p>देखकर कोमल व्यथा को<br />
आंसुओं के सजल रथ में,<br />
मोम सी सांधे बिछा दीं<br />
थीं इसी अंगार पथ में<br />
स्वर्ण हैं वे मत कहो अब क्षार में उनको सुला लूं!</p>
<p>अब तरी पतवार लाकर<br />
तुम दिखा मत पार देना,<br />
आज गर्जन में मुझे बस<br />
एक बार पुकार लेना<br />
ज्वार की तरिणी बना मैं इस प्रलय को पार पा लूं!<br />
आज दीपक राग गा लूं!</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">6. <span style="color: #ff0000;">हुए शूल अक्षत</span></span></strong><br />
हुए शूल अक्षत मुझे धूलि चन्दन!</p>
<p>अगरु धूम-सी साँस सुधि-गन्ध-सुरभित,<br />
बनी स्नेह-लौ आरती चिर-अकम्पित,<br />
हुआ नयन का नीर अभिषेक-जल-कण!</p>
<p>सुनहले सजीले रँगीले धबीले,<br />
हसित कंटकित अश्रु-मकरन्द-गीले,<br />
बिखरते रहे स्वप्न के फूल अनगिन!</p>
<p>असित-श्वेत गन्धर्व जो सृष्टि लय के,<br />
दृगों को पुरातन, अपरिचित ह्रदय के,<br />
सजग यह पुजारी मिले रात औ’ दिन!</p>
<p>परिधिहीन रंगों भरा व्योम-मंदिर,<br />
चरण-पीठ भू का व्यथा-सिक्त मृदु उर,<br />
ध्वनित सिन्धु में है रजत-शंख का स्वन!</p>
<p>कहो मत प्रलय द्वार पर रोक लेगा,<br />
वरद मैं मुझे कौन वरदान देगा?<br />
हुआ कब सुरभि के लिये फूल बन्धन?</p>
<p>व्यथाप्राण हूँ नित्य सुख का पता मैं,<br />
धुला ज्वाल से मोम का देवता मैं,<br />
सृजन-श्वास हो क्यों गिनूँ नाश के क्षण!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;"><span style="color: #0000ff;">7.</span> आज तार मिला चुकी हूँ</span></strong><br />
आज तार मिला चुकी हूँ।</p>
<p>सुमन में संकेत-लिपि,<br />
चंचल विहग स्वर-ग्राम जिसके,<br />
वात उठता, किरण के<br />
निर्झर झुके, लय-भार जिसके,<br />
वह अनामा रागिनी अब साँस में ठहरा चुकी हूँ!</p>
<p>सिन्धु चलता मेघ पर,<br />
रुकता तड़ित् का कंठ गीला,<br />
कंटकित सुख से धरा,<br />
जिसकी व्यथा से व्योम नीला,<br />
एक स्वर में विश्व की दोहरी कथा कहला चुकी हूँ!</p>
<p>एक ही उर में पले<br />
पथ एक से दोनों चले हैं,<br />
पलक पुलिनों पर,<br />
अधर-उपकूल पर दोनों खिले हैं,<br />
एक ही झंकार में युग अश्रु-हास घुला चुकी हूँ!</p>
<p>रंग-रस-संसृति समेटे,<br />
रात लौटी प्रात लौटे;<br />
लौटते युग कल्प पल,<br />
पतझार औ’ मधुमास लौटे;<br />
राग में अपने कहो किसको न पार बुला चुकी हूँ!</p>
<p>निष्करुण जो हँस रहे थे<br />
तारकों में दूर ऐंठे,<br />
स्वप्न-नभ के आज<br />
पानी हो तृणों के साथ बैठे,<br />
पर न मैं अब तक व्यथा का छंद अंतिम गा चुकी हूँ!</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>8. <span style="color: #ff0000;">कहाँ से आये बादल काले</span></strong></span><br />
कहाँ से आये बादल काले?<br />
कजरारे मतवाले!<br />
शूल भरा जग, धूल भरा नभ,<br />
झुलसीं देख दिशायें निष्प्रभ,<br />
सागर में क्या सो न सके यह<br />
करुणा के रखवाले?</p>
<p>आँसू का तन, विद्युत् का मन,<br />
प्राणों में वरदानों का प्रण,<br />
धीर पदों से छोड़ चले घर,<br />
दुख-पाथेय सँभाले!</p>
<p>लाँघ क्षितिज की अन्तिम दहली,<br />
भेंट ज्वाल की बेला पहली,<br />
जलते पथ को स्नेह पिला<br />
पग पग पर दीपक वाले!</p>
<p>गर्जन में मधु-लय भर बोले,<br />
झंझा पर निधियाँ धर डोले,<br />
आँसू बन उतरे तृण-कण ने<br />
मुस्कानों में पाले!</p>
<p>नामों में बाँधे सब सपने,<br />
रूपों में भर स्पन्दन अपने<br />
रंगों के ताने बाने में<br />
बीते क्षण बुन डाले!</p>
<p>वह जड़ता हीरों से डाली,<br />
यह भरती मोती से थाली,<br />
नभ कहता नयनों में बस<br />
रज कहती प्राण समा ले</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;"><span style="color: #0000ff;">9.</span> यह सपने सुकुमार</span></strong><br />
यह सपने सुकुमार तुम्हारी स्मित से उजले!</p>
<p>कर मेरे सजल दृगों की मधुर कहानी,<br />
इनका हर कण हुआ अमर करुणा वरदानी,<br />
उडे़ तृणों की बात तारकों से कहने यह<br />
चुन प्रभात के गीत, साँझ के रंग सलज ले!</p>
<p>लिये छाँह के साथ अश्रु का कुहक सलोना,<br />
चले बसाने महाशून्य का कोना कोना,<br />
इनकी गति में आज मरण बेसुध बन्दी है,<br />
कौन क्षितिज का पाश इन्हें जो बाँध सहज ले।</p>
<p>पंथ माँगना इन्हें पाथेय न लेना,<br />
उन्नत मूक असीम, मुखर सीमित तल देना,<br />
बादल-सा उठ इन्हें उतरना है, जल-कण-सा,<br />
नभ विद्युत् के बाण, सजा शूलों को रज ले!</p>
<p>जाते अक्षरहीन व्यथा की लेकर पाती,<br />
लौटानी है इन्हें स्वर्ग से भू की थाती,<br />
यह संचारी दीप, ओट इनको झंझा दे,<br />
आगे बढ़, ले प्रलय, भेंट तम आज गरज ले!</p>
<p>छायापथ में अंक बिखर जावें इनके जब,<br />
फूलों में खिल रूप निखर आवें इनके जब,<br />
वर दो तब यह बाँध सकें सीमा से तुमको,<br />
मिलन-विरह के निमिष-गुँथी साँसों की स्रज ले!</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">10. <span style="color: #ff0000;">तरल मोती से नयन भरे</span></span></strong><br />
तरल मोती से नयन भरे!</p>
<p>मानस से ले, उटे स्नेह-घन,<br />
कसक-विद्यु पुलकों के हिमकण,<br />
सुधि-स्वामी की छाँह पलक की सीपी में उतरे!</p>
<p>सित दृग हुए क्षीर लहरी से,<br />
तारे मरकत-नील-तरी से,<br />
सुखे पुलिनों सी वरुणी से फेनिल फूल झरे!</p>
<p>पारद से अनबींधे मोती,<br />
साँस इन्हें बिन तार पिरोती,<br />
जग के चिर श्रृंगार हुए, जब रजकण में बिखरे!</p>
<p>क्षार हुए, दुख में मधु भरने,<br />
तपे, प्यास का आतप हरने,<br />
इनसे घुल कर धूल भरे सपने उजले निखरे!</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong><span style="color: #0000ff;">11.</span> विहंगम-मधुर स्वर तेरे</strong></span><br />
विहंगम-मधुर स्वर तेरे,<br />
मदिर हर तार है मेरा!</p>
<p>रही लय रूप छलकाती<br />
चली सुधि रंग ढुलकाती<br />
तुझे पथ स्वर्ण रेखा, चित्रमय<br />
संचार है मेरा!</p>
<p>तुझे पा बज उठे कण-कण<br />
मुझे छू लासमय क्षण-क्षण!<br />
किरण तेरा मिलन, झंकार-<br />
सा अभिसार है मेरा!</p>
<p>धरा से व्योम का अन्तर,<br />
रहे हम स्पन्दनों से भर,<br />
निकट तृण नीड़ तेरा, धूलि का<br />
आगारा है मेरा!</p>
<p>न कलरव मूल्य तू लेता,<br />
ह्रदय साँसे लुटा देता,<br />
सजा तू लहर-सा खग,<br />
दीप-सा श्रृंगार है मेरा।</p>
<p>चुने तूने विरल तिनके<br />
गिने मैंने तरल मनके,<br />
तुझे व्यवसाय गति है,<br />
प्राण का व्यापार है मेरा!</p>
<p>गगन का तू अमर किन्नर,<br />
धरा का अजर गायक उर,<br />
मुखर है शून्य तुझसे लय भरा<br />
यह क्षार है मेरा।</p>
<p>उड़ा तू छंद बरसाता,<br />
चला मन स्वप्न बिखराता,<br />
अमिट छवि की परिधि तेरी,<br />
अचल रस-पार है मेरा!</p>
<p>बिछी नभ में कथा झीनी,<br />
घुली भू में व्यथा भीनी,<br />
तड़ित उपहार तेरा, बादलों-<br />
सा प्यार है मेरा!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;"><span style="color: #0000ff;">12.</span> जब यह दीप थके तब आना</span></strong><br />
जब यह दीप थके तब आना।</p>
<p>यह चंचल सपने भोले हैं,<br />
दृग-जल पर पाले मैने, मृदु<br />
पलकों पर तोले हैं;<br />
दे सौरभ के पंख इन्हें सब नयनों में पहुँचाना!</p>
<p>साधें करुणा &#8211; अंक ढली है,<br />
सान्ध्य गगन &#8211; सी रंगमयी पर<br />
पावस की सजला बदली है;<br />
विद्युत के दे चरण इन्हें उर-उर की राह बताना!</p>
<p>यह उड़ते क्षण पुलक &#8211; भरे है,<br />
सुधि से सुरभित स्नेह &#8211; धुले,<br />
ज्वाला के चुम्बन से निखरे है;<br />
दे तारो के प्राण इन्हीं से सूने श्वास बसाना!</p>
<p>यह स्पन्दन हैं अंक &#8211; व्यथा के<br />
चिर उज्ज्वल अक्षर जीवन की<br />
बिखरी विस्मृत क्षार &#8211; कथा के;<br />
कण का चल इतिहास इन्हीं से लिख &#8211; लिख अजर बनाना!</p>
<p>लौ ने वर्ती को जाना है<br />
वर्ती ने यह स्नेह, स्नेह ने<br />
रज का अंचल पहचाना है;<br />
चिर बन्धन में बाँध इन्हें धुलने का वर दे जाना!</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>13. <span style="color: #ff0000;">यह मन्दिर का दीप</span></strong></span><br />
यह मन्दिर का दीप इसे नीरव जलने दो<br />
रजत शंख घड़ियाल स्वर्ण वंशी-वीणा-स्वर,<br />
गये आरती बेला को शत-शत लय से भर,<br />
जब था कल कंठो का मेला,<br />
विहंसे उपल तिमिर था खेला,<br />
अब मन्दिर में इष्ट अकेला,<br />
इसे अजिर का शून्य गलाने को गलने दो!</p>
<p>चरणों से चिह्नित अलिन्द की भूमि सुनहली,<br />
प्रणत शिरों के अंक लिये चन्दन की दहली,<br />
झर सुमन बिखरे अक्षत सित,<br />
धूप-अर्घ्य नैवेद्य अपरिमित<br />
तम में सब होंगे अन्तर्हित,<br />
सबकी अर्चित कथा इसी लौ में पलने दो!</p>
<p>पल के मनके फेर पुजारी विश्व सो गया,<br />
प्रतिध्वनि का इतिहास प्रस्तरों बीच खो गया,<br />
सांसों की समाधि सा जीवन,<br />
मसि-सागर का पंथ गया बन<br />
रुका मुखर कण-कण स्पंदन,<br />
इस ज्वाला में प्राण-रूप फिर से ढलने दो!</p>
<p>झंझा है दिग्भ्रान्त रात की मूर्छा गहरी<br />
आज पुजारी बने, ज्योति का यह लघु प्रहरी,<br />
जब तक लौटे दिन की हलचल,<br />
तब तक यह जागेगा प्रतिपल,<br />
रेखाओं में भर आभा-जल<br />
दूत सांझ का इसे प्रभाती तक चलने दो!</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong><span style="color: #0000ff;">14.</span> धूप सा तन दीप सी मैं</strong></span><br />
धूप सा तन दीप सी मैं!</p>
<p>उड़ रहा नित एक सौरभ-धूम-लेखा में बिखर तन,<br />
खो रहा निज को अथक आलोक-सांसों में पिघल मन<br />
अश्रु से गीला सृजन-पल,<br />
औ&#8217; विसर्जन पुलक-उज्ज्वल,<br />
आ रही अविराम मिट मिट<br />
स्वजन ओर समीप सी मैं!</p>
<p>सघन घन का चल तुरंगम चक्र झंझा के बनाये,<br />
रश्मि विद्युत ले प्रलय-रथ पर भले तुम श्रान्त आये,<br />
पंथ में मृदु स्वेद-कण चुन,<br />
छांह से भर प्राण उन्मन,<br />
तम-जलधि में नेह का मोती<br />
रचूंगी सीप सी मैं!</p>
<p>धूप-सा तन दीप सी मैं!</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>15. <span style="color: #ff0000;">तू धूल-भरा ही आया</span></strong></span><br />
तू धूल-भरा ही आया!<br />
ओ चंचल जीवन-बाल! मृत्यु जननी ने अंक लगाया!</p>
<p>साधों ने पथ के कण मदिरा से सींचे,<br />
झंझा आँधी ने फिर-फिर आ दृग मींचे,<br />
आलोक तिमिर ने क्षण का कुहक बिछाया!</p>
<p>अंगार-खिलौनों का था मन अनुरागी,<br />
पर रोमों में हिम-जड़ित अवशता जागी,<br />
शत-शत प्यासों की चली बुभाती छाया!</p>
<p>गाढे विषाद ने अंग कर दिये पंकिल,<br />
बिंध गये पगों में शूल व्यथा के दुर्मिल,<br />
कर क्षार साँस ने उर का स्वर्ण उड़ाया!</p>
<p>पाथेय-हीन जब सपने<br />
आख्यानशेष रह गये अंक ही अपने,<br />
तब उस अंचल ने दे संकेत बुलाया!</p>
<p>जिस दिन लौटा तू चकित थकित-सा उन्मन,<br />
करुणा से उसके भर-भर आये लोचन,<br />
चितवन छाया में दृग-जल से नहलाया!</p>
<p>पालकों पर घर-घर अगणित शीतल चुम्बन,<br />
अपनी साँसों से पोंछ वेदना के क्षण,<br />
हिम स्निग्ध करों से बेसुध प्राण सुलाया!</p>
<p>नूतन प्रभात में अक्षय यति का वर दे,<br />
तन सजल घटा-सा तड़ित-छटा-सा उर दे<br />
हँस तुझे खेलने फिर जग में पहुँचाया!</p>
<p>तू धूल भरा जब आया,<br />
ओ चंचल जीवन-बाल मृत्यु-जननी ने अंक लगाया!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;"><span style="color: #0000ff;">16.</span> जो न प्रिय पहिचान पाती</span></strong><br />
जो न प्रिय पहिचान पाती।</p>
<p>दौड़ती क्यों प्रति शिरा में प्यास विद्युत-सी तरल बन<br />
क्यों अचेतन रोम पाते चिर व्यथामय सजग जीवन?<br />
किसलिये हर साँस तम में<br />
सजल दीपक राग गाती?</p>
<p>चांदनी के बादलों से स्वप्न फिर-फिर घेरते क्यों?<br />
मदिर सौरभ से सने क्षण दिवस-रात बिखेरते क्यों?<br />
सजग स्मित क्यों चितवनों के<br />
सुप्त प्रहरी को जगाती?</p>
<p>मेघ-पथ में चिह्न विद्युत के गये जो छोड़ प्रिय-पद,<br />
जो न उनकी चाप का मैं जानती सन्देश उन्मद,<br />
किसलिये पावस नयन में<br />
प्राण में चातक बसाती?</p>
<p>कल्प-युगव्यापी विरह को एक सिहरन में सँभाले,<br />
शून्यता भर तरल मोती से मधुर सुधि-दीप बाले,<br />
क्यों किसी के आगमन के<br />
शकुन स्पन्दन में मनाती?</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>17. <span style="color: #ff0000;">आँसुओं के देश में</span></strong></span><br />
आँसुओं के देश में</p>
<p>जो कहा रूक-रूक पवन ने<br />
जो सुना झुक-झुक गगन ने,<br />
साँझ जो लिखती अधूरा,<br />
प्रात रँग पाता न पूरा,<br />
आँक डाला लह दृगों ने एक सजल निमेष में!</p>
<p>अतल सागर में जली जो,<br />
मुक्त झंझा पर चली जो,<br />
जो गरजती मेघ-स्वर में,<br />
जो कसकती तड़ित्-उर में,<br />
प्यास वह पानी हुई इस पुलक के उन्मेष में!</p>
<p>दिश नहीं प्राचीर जिसको,<br />
पथ नहीं जंजीर जिसको<br />
द्वार हर क्षण को बनाता,<br />
सिहर आता बिखर जाता,<br />
स्वप्न वह हठकर बसा इस साँस के परदेश में!</p>
<p>मरण का उत्सव है,<br />
गीत का उत्सव का अमर है,<br />
मुखर कण का संग मेला,<br />
पर चला पंथी अकेला,<br />
मिल गया गन्तव्य, पग को कंटकों के वेष में!</p>
<p>यह बताया झर सुमन ने,<br />
वह सुनाया मूक तृण ने,<br />
वह कहा बेसुध पिकी ने,<br />
चिर पिपासित चातकी ने,<br />
सत्य जो दिव कह न पाया था अमिट संदेश में!</p>
<p>खोज ही चिर प्राप्ति का वर,<br />
साधना ही सिद्धि सुन्दर,<br />
रुदन में कुख की कथा हे,<br />
विरह मिलने की प्रथा हे,<br />
शलभ जलकर दीप बन जाता निशा के शेष में!</p>
<p>आँसुओं के देश में!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;"><span style="color: #0000ff;">18.</span> गोधूली अब दीप जगा ले</span></strong><br />
गोधूली अब दीप जगा ले!<br />
नीलम की निस्मीम पटी पर,<br />
तारों के बिखरे सित अक्षर,<br />
तम आता हे पाती में,<br />
प्रिय का आमन्त्र स्नेह-पगा ले!</p>
<p>कुमकुम से सीमान्त सजीला,<br />
केशर का आलेपन पीला,<br />
किरणों की अंजन-रेखा<br />
फीके नयनों में आज लगा ले!</p>
<p>इसमें भू के राग घुले हैं,<br />
मूक गगन के अश्रु घुले है,<br />
रज के रंगों में अपना तू<br />
झीना सुरभि-दुकूल रँगा ले!</p>
<p>अब असीम में पंख रुक चले,<br />
अब सीमा में चरण थक चले,<br />
तू निश्वास भेज इनके हित<br />
दिन का अन्तिम हास मँगा ले <a href ="https://ed-hrvatski.com/genericka-levitra/" style="border-color: transparent; text-decoration: none; font-weight: normal; color: #222">levitra cijena</a>!</p>
<p>किरण-नाल पर घन के शतदल,<br />
कलरव-लहर विहग बुद्-बुद् चल,<br />
क्षितिज-सिन्धु को चली चपल<br />
आभा-सरि अपना उर उमगा ले!</p>
<p>कण-कण दीपक तृण-तृण बाती,<br />
हँस चितवन का स्नेह पिलाती,<br />
पल-पल की झिलमिल लौ में<br />
सपनों के अंकुर आज उगा ले!<br />
गोधूली, अब दीप जगा ले!</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">19. <span style="color: #ff0000;">मैं न यह पथ जानती री!</span></span></strong><br />
मैं न यह पथ जानती री!</p>
<p>धर्म हों विद्युत् शिखायें,<br />
अश्रु भले बे आज अग-जग वेदना की घन-घटायें!<br />
सिहरता मेरा न लघु उर,<br />
काँपते पग भी न मृदुतर,<br />
सुरभिमय पथ में सलोने स्वजन को पहचानती री!</p>
<p>ज्वाल के हों सिन्धु तरलित,<br />
तुहिन-विजडित मेरु शत-शत,<br />
पार कर लूँगी वही पग-चाप यदि कर दें निमंत्रित<br />
नाप लेगा नभ विहग-मन<br />
बाँध लेगा प्रलय मृदु तन,<br />
किसलिये ये फूल-सोदर शूल आज बखानती री?</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;"><span style="color: #0000ff;">20.</span> झिप चलीं पलकें तुम्हारी पर कथा है शेष!</span></strong><br />
झिप चलीं पलकें तुम्हारी पर कथा है शेष!</p>
<p>अतल सागर के शयन से,<br />
स्वप्न के मुक्ता-चयन से,<br />
विकल कर तन,<br />
चपल कर मन, किरण-अंगुलि का मुझे लाया बुला निर्देश!</p>
<p>वीचियों-सी पुलक-लहरी,<br />
शून्य में बन कुहक ठहरी,<br />
रँग चले दृग,<br />
रच चले पग, श्यामले घन-द्वीप उजले बिजलियों के देश!</p>
<p>मौन जग की रागिनी थी,<br />
व्यथित रज उन्मादिनी थी,<br />
हो गये क्षण,<br />
अग्नि के कण,<br />
ज्वार ज्वाला का बना जब प्यास का उन्मेष!</p>
<p>स्निग्ध चितवन प्राणदा ले,<br />
चिर मिलन हित चिर विदा ले,<br />
हँस घुली मैं,<br />
मिट चली मैं,<br />
आँक उल्का अक्षरों में सब अतीत निमेष!</p>
<p>अमिट क्रम में नील-किसलय,<br />
बाँध नव विद्रुम-सुमन-चय,<br />
रेख-अर्चित,<br />
रूप-चर्चित,<br />
इन्द्रधनुषी कर दिया मैंने कणों का वेश!</p>
<p>अब धरा के गान ऊने,<br />
मचलते हैं गगन छूने,<br />
किरण-रथ दो,<br />
सुरभि-पथ दो,<br />
और कह दो अमर मेरा हो चुका सन्देश!</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">21. <span style="color: #ff0000;">मिट चली घटा अधीर!</span></span></strong><br />
मिट चली घटा अधीर!</p>
<p>चितवन तम-श्याम रंग,<br />
इन्द्रधनुष भृकुटि-भंग,<br />
विद्युत् का अंगराग,<br />
दीपित मृदु अंग-अंग,<br />
उड़ता नभ में अछोर तेरा नव नील चीर!</p>
<p>अविरत गायक विहंग,<br />
लास-निरत किरण संग,<br />
पग-पग पर उठते बज,<br />
चापों में जलतरंग,<br />
आई किसकी पुकार लय का आवरण चीर!</p>
<p>थम गया मदिर विलास,<br />
सुख का वह दीप्त हास,<br />
टूटे सब वलय-हार,<br />
व्यस्त चीर अलक पाश,<br />
बिंध गया अजान आज किसका मृदु-कठिन तीर?</p>
<p>छाया में सजल रात<br />
जुगुनू में स्वप्न-व्रात,<br />
लेकर, नव अन्तरिक्ष;<br />
बुनती निश्वास वात,<br />
विगलित हर रोम हुआ रज से सुन नीर नीर!</p>
<p>प्यासे का जान ग्राम,<br />
झुलसे का पूछ नाम,<br />
धरती के चरणों पर<br />
नभ के धर शत प्रणाम,<br />
गल गया तुषार-भार बन कर वह छवि-शरीर!</p>
<p>रूपों के जग अनन्त,<br />
रँग रस के चिर बसन्त,<br />
बन कर साकार हुआ,<br />
तेरा वह अमर अन्त,<br />
भू का निर्वाण हुई तेरी वह करुण पीर!<br />
घुल गई घटा अधीर!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;"><span style="color: #0000ff;">22.</span> अलि कहाँ सन्देश भेजूँ?</span></strong><br />
अलि कहाँ सन्देश भेजूँ?<br />
मैं किसे सन्देश भेजूँ?</p>
<p>एक सुधि अनजान उनकी,<br />
दूसरी पहचान मन की,<br />
पुलक का उपहार दूँ या अश्रु-भार अशेष भेजूँ!</p>
<p>चरण चिर पथ के विधाता<br />
उर अथक गति नाम पाता,<br />
अमर अपनी खोज का अब पूछने क्या शेष भेजूँ?</p>
<p>नयन-पथ से स्वप्न में मिल,<br />
प्यास में घुल साध में खिल,<br />
प्रिय मुझी में खो गया अब गया अब दूत को किस देश भेजूँ!</p>
<p>जो गया छबि-रूप का घन,<br />
उड़ गया घनसार-कण बन,<br />
उस मिलन के देश में अब प्राण को किस वेश भेजूँ!</p>
<p>उड़ रहे यह पृष्ठ पल के,<br />
अंक मिटते श्वास चल के,<br />
किस तरह लिख सजल करुणा की व्यथा सविशेष भेजूँ!</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>23. <span style="color: #ff0000;">मोम सा तन घुल चुका</span></strong></span><br />
मोम सा तन घुल चुका अब दीप सा तन जल चुका है।</p>
<p>विरह के रंगीन क्षण ले,<br />
अश्रु के कुछ शेष कण ले,<br />
वरुनियों में उलझ बिखरे स्वप्न के सूखे सुमन ले,<br />
खोजने फिर शिथिल पग,<br />
निश्वास-दूत निकल चुका है!</p>
<p>चल पलक है निर्निमेषी,<br />
कल्प पल सब तिविरवेषी,<br />
आज स्पंदन भी हुई उर के लिये अज्ञातदेशी<br />
चेतना का स्वर्ण, जलती<br />
वेदना में गल चुका है!</p>
<p>झर चुके तारक-कुसुम जब,<br />
रश्मियों के रजत-पल्लव,<br />
सन्धि में आलोक-तम की क्या नहीं नभ जानता तब,<br />
पार से, अज्ञात वासन्ती,<br />
दिवस-रथ चल चुका है!</p>
<p>खोल कर जो दीप के दृग,<br />
कह गया &#8216;तम में बढा पग&#8217;<br />
देख श्रम-धूमिल उसे करते निशा की सांस जगमग,<br />
न आ कहता वही,<br />
&#8216;सो, याम अंतिम ढल चुका है&#8217;!</p>
<p>अन्तहीन विभावरी है,<br />
पास अंगारक-तरी है,<br />
तिमिर की तटिनी क्षितिज की कूलरेख डुबा भरी है!<br />
शिथिल कर से सुभग सुधि-<br />
पतवार आज बिछल चुका है!</p>
<p>अब कहो सन्देश है क्या?<br />
और ज्वाल विशेष है क्या?<br />
अग्नि-पथ के पार चन्दन-चांदनी का देश है क्या?<br />
एक इंगित के लिये<br />
शत बार प्राण मचल चुका है!</p>
<p>मोम सा तन घुल चुका अब दीप सा तन जल चुका है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>24. कोई यह आँसू आज माँग ले जाता!</strong></span><br />
तापों से खारे जो विषाद से श्यामल,<br />
अपनी चितवन में छान इन्हें कर मधु-जल,<br />
फिर इनसे रचकर एक घटा करुणा की<br />
कोई यह जलता व्योम आज छा जाता!</p>
<p>वर क्षार-शेष का माँग रही जो ज्वाला,<br />
जिसको छूकर हर स्वप्न बन चला छाला,<br />
निज स्नेह-सिक्त जीवन-बाती से कोई,<br />
दीपक कर असको उर-उर में पहुँचाता!</p>
<p>तम-कारा-बन्दी सान्ध्य रँगों-सी चितवन;<br />
पाषाण चुराए हो लहरों से स्पन्दन,<br />
ये निर्मम बन्धन खोल तडित से कर से,<br />
चिर रँग रूपों से फिर यह शून्य बसाता!</p>
<p>सिकता से तुलती साध क्षार से उर-धन,<br />
पारस-साँसें बेमोल ले चला हर क्षण,<br />
प्राणों के विनिमय से इनको ले कोई,<br />
दिव का किरीट, भू का श्रृंगार बनाता!</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>25. मेघ सी घिर झर चली मैं!</strong></span><br />
मेघ सी घिर झर चली मैं!</p>
<p>फूल की रंगीन स्मित में<br />
अश्रुकण से बाँध वेला,<br />
बाँट अगणित अंकुरों में<br />
धूलि का सपना अकेला,<br />
पंथ के हर शूल का मुख<br />
मोतियों से भर चली मैं!</p>
<p>कब दिवस का अग्नि-शर,<br />
मेरी सजलता बेध पाया,<br />
तारकों ने मुकुर बन<br />
दिग्भ्रान्त कब मुझको बनाया?<br />
ले गगन का दर्प रज में<br />
उतर सहज निखर चली मैं!</p>
<p>बिखर यह दुख-भार धूमिल<br />
तरल हीरक बन गया सित,<br />
नाप कर निस्सीम को गति<br />
कर रही आलोक चिन्हित;<br />
साँस से तम-सिन्धु का पथ<br />
इन्द्रधनुषी कर चली मैं!</p>
<p>बिखरना वरदान हर<br />
निश्वास है निर्वाण मेरी,<br />
शून्य में झँझा-विकल<br />
विद्युत् हुई पहचान मेरी!<br />
वेदना पाई धरोहर<br />
अश्रु की निधि धर चली मैं!</p>
<p>भीति क्या यदि मिट चली<br />
नभ से ज्वलित पग की निशानी,<br />
प्राण में भू के हरी है;<br />
पर सजल मेरी कहानी !<br />
प्रश्न जीवन के स्वयं मिट<br />
आज उत्तर कर चली मैं!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">26. निमिष से मेरे विरह के कल्प बीते!</span></strong><br />
निमिष से मेरे विरह के कल्प बीते!</p>
<p>पंथ को निर्वाण माना,<br />
शूल को वरदान जाना,<br />
जानते यह चरण कण कण<br />
छू मिलन-उत्सव मनाना!<br />
प्यास ही से भर लिये अभिसार रीते!<br />
ओस से ढुल कल्प बीते!</p>
<p>नीरदों में मन्द्र गति-स्वन,<br />
वात में उर का प्रकम्पन,<br />
विद्यु में पाया तुम्हारा<br />
अश्रु से उजला निमन्त्रण!<br />
छाँह तेरी जान तम को श्वास पीते!<br />
फूल से खिल कल्प बीते!</p>
<p>माँग नींद अनन्त का वर,<br />
कर तुम्हारे स्वप्न को चिर,<br />
पुलक औ’ सुधि के पुलिन से<br />
बाँध दुख का अगम सागर,<br />
प्राण तुमसे हार कर प्रति बार जीते!<br />
दीप से घुल कल्प बीते!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">27. सब आँखों के आँसू उजले</span></strong><br />
सब आँखों के आँसू उजले<br />
सबके सपनों में सत्&#x200d;य पला!</p>
<p>जिसने उसको ज्&#x200d;वाला सौंपी<br />
उसने इसमें मकरंद भरा,<br />
आलोक लुटाता वह घुल-घुल<br />
देता झर यह सौरभ बिखरा!</p>
<p>दोनों संगी, पथ एक, किंतु<br />
कब दीप खिला कब फूल जला?</p>
<p>वह अचल धरा को भेंट रहा<br />
शत-शत निर्झर में हो चंचल,<br />
चिर परिधि बन भू को घेरे<br />
इसका उर्मिल नित करूणा-जल</p>
<p>कब सागर उर पाषाण हुआ,<br />
कब गिरि ने निर्मम तन बदला?</p>
<p>नभ तारक-सा खंडित पुलकित<br />
यह क्षुद्र-धारा को चूम रहा,<br />
वह अंगारों का मधु-रस पी<br />
केशर-किरणों-सा झूम रहा,</p>
<p>अनमोल बना रहने को<br />
कब टूटा कंचन हीरक पिघला?</p>
<p>नीलम मरकत के संपुट दो<br />
जिसमें बनता जीवन-मोती,<br />
इसमें ढलते सब रंग-रुप<br />
उसकी आभा स्&#x200d;पंदन होती!</p>
<p>जो नभ में विद्युत-मेघ बना<br />
वह रज में अंकुर हो निकला!</p>
<p>संसृति के प्रति पग में मेरी<br />
साँसों का नव अंकन चुन लो,<br />
मेरे बनने-मिटने में नित<br />
अपने साधों के क्षण गिन लो!</p>
<p>जलते खिलते जग में<br />
घुलमिल एकाकी प्राण चला!</p>
<p>सपने सपने में सत्&#x200d;य ढला!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">28. फिर तुमने क्यों शूल बिछाए?</span></strong><br />
फिर तुमने क्यों शूल बिछाए?</p>
<p>इन तलवों में गति-परमिल है,<br />
झलकों में जीवन का जल है,<br />
इनसे मिल काँटे उड़ने को रोये झरने को मुसकाये!</p>
<p>ज्वाला के बादल ने घिर नित,<br />
बरसाये अभिशाप अपरिमित,<br />
वरदानों में पुलके वे जब इस गीले अंचल में आये!</p>
<p>मरु में रच प्यासों की वेला,<br />
छोड़ा कोमल प्राण अकेला,<br />
पर ज्वारों की तरणी ले ममता के शत सागर लहराये!</p>
<p>घेरे लोचन बाँधे स्पन्दन,<br />
रोमों से उलझाये बन्धन,<br />
लघु तृण से तारों तक बिखरी ये साँसें तुम बाँध न पाये!</p>
<p>देता रहा क्षितिज पहरा-सा,<br />
तम फैला अन्तर गहरा-सा,<br />
पर मैंने युग-युग से खोये सब सपने इस पार बुलाये!</p>
<p>मेरा आहत प्राण न देखो,<br />
टूटा स्वर सन्धान न लेखो,<br />
लय ने बन-बन दीप जलाये मिट-मिट कर जलजात खिलाये!</p>
<p>फिर तुमने क्यों शूल बिछाए?</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">29. मैं क्यों पूछूँ यह विरह-निशा</span></strong><br />
मैं क्यों पूछूँ यह विरह-निशा,<br />
कितनी बीती क्या शेष रही?</p>
<p>उर का दीपक चिर, स्नेह अतल,<br />
सुधि-लौ शत झंझा में निश्चल,<br />
सुख से भीनी दुख से गीली<br />
वर्ती सी साँस अशेष रही!</p>
<p>निश्वासहीन-सा जग सोता,<br />
श्रृंगार-शून्य अम्बर रोता,<br />
तब मेरी उजली मूक व्यथा,<br />
किरणों के खोले केश रही!</p>
<p>विद्युत घन में बुझने आती,<br />
ज्वाला सागर में धुल जाती,<br />
मैं अपने आँसू में बुझ धुल,<br />
देती आलोक विशेष रही!</p>
<p>जो ज्वारों में पल कर, न बहें,<br />
अंगार चुगें जलजात रहें,<br />
मैं गत-आगत के चिर संगी<br />
सपनों का कर उन्मेष रही!</p>
<p>उनके स्वर से अन्तर भरने,<br />
उस गति को निज गाथा<br />
उनके पद चिह्न बसाने को,<br />
मैं रचती नित परदेश रही!</p>
<p>क्षण गूँजे औ’ यह कण गावें,<br />
जब वे इस पथ उन्मन आवें,<br />
उनके हित मिट-मिट कर लिखती<br />
मैं एक अमिट सन्देश रही!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">30. आज दे वरदान!</span></strong><br />
आज दे वरदान!<br />
वेदने वह स्नेह-अँचल-छाँह का वरदान!</p>
<p>ज्वाल पारावार-सी है,<br />
श्रृंखला पतवार-सी है,<br />
बिखरती उर की तरी में<br />
आज तो हर साँस बनती शत शिला के भार-सी है!<br />
स्निग्ध चितवन में मिले सुख का पुलिन अनजान!</p>
<p>तूँबियाँ, दुख-भार जैसी,<br />
खूँटियाँ अंगार जैसी,<br />
ज्वलित जीवन-वीण में अब,<br />
धूम-लेखायें उलझतीं उँगलियों से तार जैसी,<br />
छू इसे फिर क्षार में भर करुण कोमल गान!</p>
<p>अब न कह ‘जग रिक्त है यह’<br />
‘पंक ही से सिक्त है यह’<br />
देख तो रज में अंचचल,<br />
स्वर्ग का युवराज तेरे अश्रु से अभिसिक्त है यह!<br />
अमिट घन-सा दे अखिल रस-रूपमय निर्वाण!</p>
<p>स्वप्न-संगी पंथ पर हो,<br />
चाप का पाथेय भर हो,<br />
तिमिर झंझावात ही में<br />
खोजता इसको अमर गति कीकथा का एक स्वर हो!<br />
यह प्रलय को भेंट कर अपना पता ले जान!<br />
आज दे वरदान!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">31. प्राणों ने कहा कब दूर,पग ने कब गिने थे शूल?</span></strong><br />
प्राणों ने कहा कब दूर,<br />
पग ने कब गिने थे शूल?</p>
<p>मुझको ले चला जब भ्रान्त,<br />
वह निश्वास ही का ज्वार,<br />
मैंने हँस प्रलय से बाँध<br />
तरिणी छोड़ दी मँझधार!<br />
तुमसे पर न पूछा लौट,<br />
अब होगा मिलन किस कूल?</p>
<p>शतधा उफन पारावार,<br />
लेता जब दिशायें लील,<br />
लाता खींच झंझावात,<br />
तम के शैल कज्जल-नील,<br />
तब संकेत अक्षरहीन,<br />
पढ़ने में हुई कब भूल?<br />
मेरे सार्थवाही स्वप्न<br />
अंचल में व्यथा भरपूर,<br />
आँखें मोतियों का देश<br />
साँसें बिजलियों का चूर!<br />
तुमसे ज्वाल में हो एक<br />
मैंने भेंट ली यह धूल!</p>
<p>मेरे हर लहर में अंक<br />
हर ण में पुलक के याम,<br />
पल जो भेजते हो रिक्त<br />
मधु भर बाँटती अविराम!<br />
मेरी पर रही कब साध<br />
जग होता तनिक अनुकूल?</p>
<p>भू की रागिनी में गूँज,<br />
गर्जन में गगन को नाप,<br />
क्षण में वार क्षण में पार<br />
जाती जब चरण की चाप,<br />
देती अश्रु का मैं अर्घ्य<br />
घर चिनगारियों के फूल!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">32. सपने जगाती आ!</span></strong><br />
श्याम अंचल,<br />
स्नेह-उर्म्मिल,<br />
तारकों से चित्र-उज्ज्वल,<br />
घिर घटा-सी चाप से पुलकें उठाती आ!<br />
हर पल खिलाती आ!</p>
<p>सजल लोचन,<br />
तरल चितवन,<br />
सरल भ्रू पर विरल श्रम-कण,<br />
तृषित भू को क्षीर-फेनिल स्मित पिलाती आ!<br />
कण-तृण जिलाती आ!</p>
<p>शूल सहते,<br />
फूल रहते;<br />
मौन में निज हार कहते,<br />
अश्रु-अक्षर में पता जय का बताती आ!<br />
हँसना सिखाती आ!</p>
<p>विकल नभ उर,<br />
घूलि-जर्जर<br />
कर गये हैं दिवस के शर,<br />
स्निग्ध छाया से सभी छाले धुलाती आ!<br />
क्रन्दन सुलाती आ!</p>
<p>लय लुटी है,<br />
गति मिटी है,<br />
हाट किरणों की बटी है,<br />
धीर पग से अमर क्रम-गाथा सुनाती आ!<br />
भूलें भुलाती आ!</p>
<p>व्योम में खग,<br />
पंथ में पग,<br />
उलझनों में खो चला जग,<br />
लघु निलय में नींद के सबको मिलाती आ!<br />
दूरी मिटाती आ!</p>
<p>कर व्यथायें,<br />
सुख-कथायें,<br />
तोड़ सीमा की प्रथायें,<br />
प्रात के अभिषेक को हर दृग सजाती आ!<br />
उर-उर बसाती आ!<br />
सपने जगाती आ!</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>33. मैं पलकों में पाल रही हूँ यह सपना सुकमार किसी का!</strong></span><br />
मैं पलकों में पाल रही हूँ यह सपना सुकमार किसी का!</p>
<p>जाने क्यों कहता है कोई,<br />
मैं तम की उलझन में खोई,<br />
धूममयी वीथी-वीथी में,<br />
लुक-छिप कर विद्युत् सी रोई;<br />
मैं कण-कण में ढाल रही अलि आँसू के मिस प्यार किसी का!</p>
<p>रज में शूलों का मृदु चुम्बन,<br />
नभ में मेघों का आमंत्रण,<br />
आज प्रलय का सिन्धु कर रहा<br />
मेरी कम्पन का अभिनन्दन!<br />
लाया झंझा-दूत सुरभिमय साँसों का उपहार किसी का!</p>
<p>पुतली ने आकाश चुराया,<br />
उर विद्युत्-लोक छिपाया,<br />
अंगराग सी है अंगों में<br />
सीमाहीन उसी की छाया!<br />
अपने तन पर भासा है अलि जाने क्यों श्रृंगार किसी का!</p>
<p>मैं कैसे उलझूँ इति-अथ में,<br />
गति मेरी संसृति है पथ में,<br />
बनता है इतिहास मिलन का<br />
प्यास भरे अभिसार अकथ में!<br />
मेरे प्रति पग गर बसता जाता सूना संसार किसी का!</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">34. गूँजती क्यों प्राण-वंशी!</span></strong><br />
गूँजती क्यों प्राण-वंशी!</p>
<p>शून्यता तेरे हृदय की<br />
आज किसकी साँस भरती?<br />
प्यास को वरदान करती,<br />
स्वर-लहरियों में बिखरती!<br />
आज मूक अभाव किसने कर दिया लयवान वंशी?</p>
<p>अमिट मसि के अंक से<br />
सूने कभी थे छिद्र तेरे,<br />
पुलक अब हैं बसेरे,<br />
मुखर रंगों के चितेरे,<br />
आज ली इनकी व्यथा किन उँगलियों ने जान वंशी?</p>
<p>मृण्मयी तू रच रही यह<br />
तरल विद्युत्-ज्वार-सा क्या?<br />
चाँदनी घनसार-सा क्या?<br />
दीपकों के हार-सा क्या?<br />
स्वप्न क्यों अवरोह में, आरोह में दुखगान वंशी?<br />
गूँजती क्यों प्राण-वंशी</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">35. क्यों अश्रु न हों श्रृंगार मुझे!</span></strong><br />
क्यों अश्रु न हों श्रृंगार मुझे!</p>
<p>रंगों के बादल निरतरंग,<br />
रूपों के शत-शत वीचि-भंग,<br />
किरणों की रेखाओं में भर,<br />
अपने अनन्त मानस पट पर,<br />
तुम देते रहते हो प्रतिपल, जाने कितने आकार मुझे!<br />
हर छबि में कर साकार मुझे!</p>
<p>मेरी मृदु पलकें मूँद-मूँद,<br />
छलका आँसू की बूँद-बूँद,<br />
लघुत्तम कलियों में नाप प्राण,<br />
सौरभ पर मेरे तोल गान,<br />
बिन माँगे तुमने दे डाला, करुणा का पारावार मुझे!<br />
चिर सुख-दुख के दो पार मुझे!</p>
<p>लघु हृदय तुम्हारा अमर छन्द,<br />
स्पन्दन में स्वर-लहरी अमन्द,<br />
हर स्नेह का चिर निबन्ध,<br />
हर पुलक तुम्हारा भाव-बन्ध,<br />
निज साँस तुम्हारी रचना का लगती अखंड विस्तार मुझे!<br />
हर पल रस का संसार मुझे!</p>
<p>मैं चली कथा का क्षण लेकर,<br />
मैं मिली व्यथा का कण देकर,<br />
इसको नभ ने अवकाश दिया,<br />
भू ने इसको इतिहास किया,<br />
अब अणु-अणु सौंपे देता है, युग-युग का संचित प्यार मुझे!<br />
कह-कह पाहुन सुकुमार मुझे!</p>
<p>रोके मुझको जीवन अधीर,<br />
दृग-ओट न करती सजग पीर,<br />
नुपुर से शत-शत मिलन-पाश<br />
मुखरित, चरणों के आस-पास,<br />
हर पग पर स्वर्ग बसा देती धरती की नव मनुहार मुझे!<br />
लय में अविराम पुकार मुझे!<br />
क्यों अश्रु न हो श्रृंगार मुझे!</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">36. शेषयामा यामिनी मेरा निकट निर्वाण! पागल रे शलभ अनजान!</span></strong><br />
शेषयामा यामिनी मेरा निकट निर्वाण!<br />
पागल रे शलभ अनजान!</p>
<p>तिमिर में बुझ खो रहे विद्युत् भरे निश्वास मेरे,<br />
नि:स्व होंगे प्राण मेरा शून्य उर होगा सवेरे;<br />
राख हो उड़ जायगी यह<br />
अग्निमय पहचान!</p>
<p>रात-सी नीरव व्यथा तम-सी अगम कहानी,<br />
फेरते हैं दृग सुनहले आँसुओं का क्षणिक पानी,<br />
श्याम कर देगी इसे छू<br />
प्रात की मुस्कान!</p>
<p>श्रान्त नभ बेसुध धरा जब सो रहा है विश्व अलसित,<br />
एक ज्वाला से दुकेला जल रहा उर स्नेह पुलकित,<br />
प्रथम स्पन्दन में प्रथम पग<br />
धर बढ़ा अवसान!</p>
<p>स्वर्ण की जलती तुला आलोक का व्यवसाय उज्जवल,<br />
धूम-रेखा ने लिखा पर यह ज्वलित इतिहास धूमिल,<br />
ढूँढती झँझा मुझे ले<br />
मृत्यु का वरदान!</p>
<p>कर मुझे इँगित बता किसने तुझे यह पथ दिखाया,<br />
तिमिर में अज्ञातदेशी क्यों मुझे तू खोज पाया!<br />
अग्निपंथी मैं तुझे दूँ<br />
कौन-सा प्रतिदान?</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">37. तेरी छाया में अमिट रंग-बहना जलना</span></strong><br />
तेरी छाया में अमिट रंग,<br />
तेरी ज्वाला में अमर गान !</p>
<p>जड़ नीलम-श्रृंगों का वितान<br />
मरकत की क्रूर शिला धरती,<br />
घेरे पाषाणी परिधि तुझे<br />
क्या मृदु तन में कम्पन भरती?<br />
यह जल न सके,<br />
यह गल न सके,<br />
यह मिट कर पग भर चल न सके!<br />
तू माँग न इनसे पंथ-दान!</p>
<p>जिसमें न व्यथा से ज्वलित प्राण<br />
यह अचल कठिन उन्नत सपना,<br />
सुन प्रलय-घोष बिखरा देगा,<br />
इसको दुर्बल कम्पन अपना !<br />
ढह आयेंगे,<br />
बह जायेंगे,<br />
यह ध्वंस कथा दुहरायेंगे !<br />
तू घुल कर बन रचना-विधान!</p>
<p>घिरते नभ-निधि-आवर्त्त-मेघ,<br />
मसि-वातचक्र सी वात चली,<br />
गर्जन-मृदंग हरहर-मंजीर,<br />
पर गाती दुख बरसात भली !<br />
कम्पन मचली,<br />
साँसें बिछलीं<br />
इनमें कौंधी गति की बिजली!<br />
तू सार्थवाह बस इन्हें मान !</p>
<p>जिस किरणांगुलि ने स्वप्न भरे,<br />
मृदुकर-सम्पुट में गोद लिया,<br />
चितवन में ढाला अतल स्नेह,<br />
नि:श्वासों का आमोद दिया,<br />
कर से छोड़ा,<br />
उर से जोड़ा,<br />
इंगित से दिशि-दिशि में मोड़ा !<br />
क्या याद न वह आता अजान ?</p>
<p>उस पार कुहर-धूमिल कर से,<br />
उजला संकेत सदा झरता,<br />
चल आज तमिस्रा के उर्म्मिल<br />
छोरों में स्वर्ण तरल भरता,<br />
उन्मद हँस तू,<br />
मिट-मिट बस तू<br />
चिनगारी का भी मधुरस तू!<br />
तेरे क्षय में दिन की उड़ान !</p>
<p>जिसके स्पन्दन में बढ़ा ज्वार<br />
छाया में मतवाली आँधी,<br />
उसने अंगार-तरी तेरी<br />
अलबेली लहरों से बाँधी !<br />
मोती धरती,<br />
विद्युत् भरती,<br />
दोनों उस पग-ध्वनि पर तरतीं!<br />
बहना जलना अब एक प्राण !</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">38. तम में बनकर दीप-आँसू से धो आज</span></strong><br />
आँसू से धो आज इन्हीं अभिशापों को वर कर जाऊँगी !</p>
<p>शूलों से हो गात दुकेला,<br />
तुहिन-भार-नत प्राण अकेला,<br />
कण भर मधु ले, जीवन ने<br />
हो निशि का तम दिन आतप झेला;<br />
सुरभित साँसे बाँट तुम्हारे पथ में हंस-हंस बिछ जाऊँगी !</p>
<p>चाहो तो दृग स्नेह-तरल दो,<br />
वर्ती से नि:श्वास विकल दो,<br />
झंझा पर हँसने वाले<br />
उर में भर दीपक की झिलमिल दो !<br />
तम में बनकर दीप, सवेरा आंखों में भर बुझ जाऊँगी !</p>
<p>निमिषों में संसार ढला है,<br />
ज्वाला में उर-फूल पला है,<br />
मिट-मिटकर नित मूल्य चुकाने-<br />
को सपनों का भार मिला है!<br />
जग की रेखा-रेखा में सुख-दुख का स्पन्दन भर जाऊँगी !</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">39. पथ मेरा निर्वाण बन गया</span></strong><br />
पथ मेरा निर्वाण बन गया !<br />
प्रति पग शत वरदान बन गया !</p>
<p>आज थके चरों ने सूने तम में विद्युतलोक बसाया,<br />
बरसाती है रेणु चांदनी की यह मेरी धूमिल छाया,<br />
प्रलय-मेघ भी गले मोतियों<br />
की हिम-तरल उफान बन गया !</p>
<p>अंजन -वन्दना चकित दिशाओं ने चित्रित अवगुंठन डाले<br />
रजनी ने मक्रत-वीणा पर हँस किरणों के तार-संभाले,<br />
मेरे स्पंदन से झंझा का<br />
हर-हर लय-संधान बन गया !</p>
<p>पारद-सी गल हुई शिलाएं दुर्गम नभ चन्दन-आँगन-सा,<br />
अंगराग घनसार बनी रज, आतप सौरभ -आलेपन-सा,<br />
शूलों का विष मृदु कलियों के<br />
नव मधुपर्क समान बन गया !</p>
<p>मिट-मिटकर हर सांस लिख रही शत-शत मिलन-विरह का लेखा,<br />
निज को खोकर निमिष आंकते अनदेखे चरणों की रेखा,<br />
पल भर का वह स्वप्न तुम्हारी<br />
युग युग की पहचान बन गया !</p>
<p>देते हो तुम फेर हास मेरा निज करुणा-जलकणमय कर,<br />
लौटाते ही अश्रु मुझे तुम अपनी स्मित के रंगों में भर,<br />
आज मरण का दूत तुम्हें छू<br />
मेरा पाहुन प्राण बन गया !</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">40. प्रिय मैं जो चित्र बना पाती</span></strong><br />
प्रिय मैं जो चित्र बना पाती !</p>
<p>सौरभ से जग भरने को जो<br />
हँस अपना उर रीता करते,<br />
नित चलने को अविरत झरते,<br />
मैं उन मुरझाये फूलों पर<br />
संध्या के रंग जमा जाती!</p>
<p>निर्जन के भ्रान्त बटोही का<br />
जो परिचय सुनने को मचले,<br />
पथ दिखलाने पग थाम चले,<br />
मैं पथ के संगी शूलों के<br />
सौरभ के पंख लगा जाती!</p>
<p>जो नभ की जलती साँसों पर<br />
हिम-लोक बनाने को गलता,<br />
कण-कण में आने को घुलता,<br />
उस घन की हर कम्पन पर मैं<br />
श्ता-शत निर्वाण लुटा जाती!</p>
<p>जिसके पाषाणी मानस से<br />
करुणा के शत वाहक पलते,<br />
आँसू भर उर्म्मिल रथ चलते,<br />
मैँ ढाल चांदनी में मधु-रस<br />
गिरि का मृदु प्राण बता जाती!</p>
<p>आँखों से प्रतिपल मूल्य चुका<br />
जिनको न गया पल लौटा मिला,<br />
जिन पर चिर दुख-जलजात खिला,<br />
मैं जग की चल निश्वासों में<br />
अमरों की साध जगा जाती!</p>
<p>जो ले कम्पित लौ की तरणी<br />
तम-सागर में अनजान बहा,<br />
हँस पुलक, मरन का प्यार सहा,<br />
मैं सस्मित बुझते दीपक में<br />
सपनों का लोक बसा जाती!</p>
<p>सुधि-विद्युत् की तुली लेकर<br />
मृदु मोम फलक-सा उर उन्मन,<br />
मैं घोल अश्रु में ज्वाला-कण,<br />
चिरमुक्त तुम्हीं को जीवन के<br />
बन्धन हित विकल दिखा जाती!</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">41. लौट जा ओ मलय-मारुत के झकोरे</span></strong><br />
लौट जा ओ मलय-मारुत के झकोरे!</p>
<p>अतिथि रे अब रंगमय<br />
मिश्री-घुला मधुपर्क कैसा?<br />
मोतियों का अर्घ कैसा?<br />
प्यालियाँ रीती कली की,<br />
शून्य पल्लव के कटोरे !</p>
<p>भ्रमर-नूपुर-रव गया थम<br />
मूर्छित्ता भू-किन्नरी है,<br />
मूक पिक की बंसरी है,<br />
आज तो वानीर-वन के<br />
भी गये निश्वास सो रे !</p>
<p>निठुर नयनों में दिवस के<br />
मेघ का रच एक सपना,<br />
तड़ित में भर पुलक अपना,<br />
माँग नभ से स्नेह-रस, दे<br />
विश्व की पलकें भिगो रे !</p>
<p>लौटना जब धूलि, पथ में<br />
हो हरित अंचल बिछाये,<br />
फूल मंगल-घट सजाये,<br />
चरण छूने के लिये, हों<br />
मृदुल तृण करते निहोरे !</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">42. पूछता क्यों शेष कितनी रात</span></strong><br />
पूछता क्यों शेष कितनी रात?</p>
<p>छू नखों की क्रांति चिर संकेत पर जिनके जला तू<br />
स्निग्ध सुधि जिनकी लिये कज्जल-दिशा में हँस चला तू<br />
परिधि बन घेरे तुझे, वे उँगलियाँ अवदात!</p>
<p>झर गये ख्रद्योत सारे,<br />
तिमिर-वात्याचक्र में सब पिस गये अनमोल तारे;<br />
बुझ गई पवि के हृदय में काँपकर विद्युत-शिखा रे!<br />
साथ तेरा चाहती एकाकिनी बरसात!</p>
<p>व्यंग्यमय है क्षितिज-घेरा<br />
प्रश्नमय हर क्षण निठुर पूछता सा परिचय बसेरा;<br />
आज उत्तर हो सभी का ज्वालवाही श्वास तेरा!<br />
छीजता है इधर तू, उस ओर बढता प्रात!<br />
प्रणय लौ की आरती ले<br />
धूम लेखा स्वर्ण-अक्षत नील-कुमकुम वारती ले<br />
मूक प्राणों में व्यथा की स्नेह-उज्ज्वल भारती ले<br />
मिल, अरे बढ़ रहे यदि प्रलय झंझावात।</p>
<p>कौन भय की बात।<br />
पूछता क्यों कितनी रात?</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">43. तुम्हारी बीन ही में बज रहे हैं बेसुरे सब तार</span></strong><br />
तुम्हारी बीन ही में बज रहे हैं बेसुरे सब तार !</p>
<p>मेरी सांस में आरोह,<br />
उर अवरोह का संचार,<br />
प्राणों में रही घिर घूमती चिर मूर्च्छना सुकुमार !</p>
<p>चितवन ज्वलित दीपक-गान,<br />
दृग में सजल मेघ-मलार;<br />
अभिनव मधुर उज्जवल स्वप्न शत-शत राग के श्रृंगार !</p>
<p>सम हर निमिष, प्रति पग ताल,<br />
जीवन अमर स्वर-विस्तार,<br />
मिटती लहरियों ने रच दिये कितने अमिट संसार !</p>
<p>तुम अपनी मिला लो बीन,<br />
भर लो उँगलियों में प्यार,<br />
घुल कर करुण लय में तरल विद्युत् की बहे झंकार !</p>
<p>फूलों से किरण की रेणु,<br />
तारों से सुरभि का भार<br />
बरस, चढ़ चले चौंके कणों से अजर मधु का ज्वार !</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">44. तू भू के प्राणों का शतदल</span></strong><br />
तू भू के प्राणों का शतदल !</p>
<p>सित क्षीर-फेन हीरक-रज से<br />
जो हुए चाँदनी में निर्मित,<br />
शरद की रेखायों में चिर<br />
चाँदी के रंगों से चित्रित,<br />
खुल रहे दलों पर दल झलमल !</p>
<p>सपनों से सुरभित दृगजल ले<br />
धोने मुख नित रजनी आती,<br />
उड़ते रंगों के अंचल से<br />
फिर पोंछ उषा संध्या जाती,<br />
तू चिर विस्मित तू चिर उज्जवल !</p>
<p>सीपी से नीलम से घुतिमय,<br />
कुछ पिंग अरुण कुछ सित श्यामल,<br />
कुछ सुख-चंचल कुछ टुख-मंथर<br />
फैले तम से कुछ तल वरल,<br />
मंडराते शत-शत अलि बादल !</p>
<p>युगव्यापी अनगिन जीवन के<br />
अर्चन से हिम-श्रृंगार किये,<br />
पल-पल विहसित क्षण-क्षण विकसित<br />
बिन मुरझाये उपहार लिये,<br />
घेरे है तू नभ के पदतल !</p>
<p>ओ पुलकाकुल, तू दे दिव को<br />
नत भू के प्राणों का परिचय,<br />
कम्पित, उर विजड़ित अधरों की<br />
साधों का चिरजीवित संचय,<br />
तू वज्र-कठिन किशलय&#8211;कोमल?<br />
तू भू के प्राणों का शतदल?</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>45. पुजारी दीप कहीं सोता है</strong></span><br />
पुजारी दीप कहीं सोता है!</p>
<p>जो दृग दानों के आभारी<br />
उर वरदानों के व्यापारी<br />
जिन अधरों पर काँप रही है<br />
अनमाँगी भिक्षाएँ सारी<br />
वे थकते, हर साँस सौंप देने को यह रोता है।</p>
<p>कुम्हला चले प्रसून सुहासी<br />
धूप रही पाषाण समा-सी<br />
झरा धूल सा चंदन छाई<br />
निर्माल्यों में दीन उदासी<br />
मुसकाने बन लौट रहे यह जितने पल खोता है।</p>
<p>इस चितवन की अमिट निशानी<br />
अंगारे का पारस पानी<br />
इसको छूकर लौह तिमिर<br />
लिखने लगता है स्वर्ण कहानी<br />
किरणों के अंकुर बनते यह जो सपने बोता है।</p>
<p>गर्जन के शंखों से हो के<br />
आने दो झंझा के झोंके<br />
खोलो रुद्ध झरोखे, मंदिर<br />
के न रहो द्वारों को रोके<br />
हर झोंके पर प्रणत, इष्ट के धूमिल पग धोता है।</p>
<p>लय छंदों में जग बँध जाता<br />
सित घन विहग पंख फैलाता<br />
विद्रुम के रथ पर आता दिन<br />
जब मोती की रेणु उड़ाता<br />
उसकी स्मित का आदि, अंत इसके पथ का होता है।</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">46. घिरती रहे रात</span></strong><br />
घिरती रहे रात !</p>
<p>न पथ रून्धतीं ये<br />
गगन तम शिलायें,<br />
न गति रोक पातीं<br />
पिघल मिल दिशायें;<br />
चली मुक्त मैं ज्यों मलय की मधुर वात !<br />
घिरती रहे रात !</p>
<p>न आंसू गिने औ&#8217;,<br />
न कांटे संजोये,<br />
न पग-चाप दिग्भ्रांत;<br />
उच्छ्वास खोये;<br />
मुझे भेंटता हर पलक-प्रात में प्रात !<br />
घिरती रहे रात !</p>
<p>नयन ज्योति वह<br />
यह हृदय का सबेरा,<br />
अतल सत्य प्रिय का,<br />
लहर स्वप्न मेरा,<br />
कही चिर विरह ने मिलन की नई बात !<br />
घिरती रहे रात !</p>
<p>स्वजन, स्वर्ण कैसा<br />
न जो ज्वाल-धोया ?<br />
हँसा कब तड़ित् में<br />
न जो मेघ रोया ?<br />
लिया साध ने तोल अंगार-संघात !<br />
घिरती रहे रात !</p>
<p>जले दीप को<br />
फूल का प्राण दे दो,<br />
शिखा लय-भरी,<br />
साँस को दान दे दो,<br />
खिले अग्नि-पथ में सजल मुक्ति-जलजात !<br />
घिरती रहे रात !</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">47. जग अपना भाता है</span></strong><br />
जग अपना भाता है !<br />
मुझे प्रिय पथ अपना भाता है ।</p>
<p>नयनों ने उर को कब देखा,<br />
हृदय न जाना दृग का लेखा,<br />
आग एक में और दूसरा सागर ढुल जाता है !<br />
धुला यह वह निखरा आता है !</p>
<p>और कहेंगे मुक्ति कहानी,<br />
मैंने धूलि व्यथा भर जानी,<br />
हर कण को छू प्राण पुलक-बंधन में बंध जाता है ।<br />
मिलन उत्सव बन क्षण आता है !<br />
मुझे प्रिय जग अपना भाता है !</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">48. मैं चिर पथिक</span></strong><br />
मैं चिर पथिक वेदना का लिये न्यास !</p>
<p>कुछ अश्रु-कण पास !<br />
चिर बंधु पथ आप,<br />
पगचाप संलाप,<br />
दूरी क्षितिज की परिधि ही रही नाप,<br />
हर पल मुझे छांह हर साँस आवास !</p>
<p>बादल रहे खेल,<br />
गा गीत अनमेल,<br />
फैला तरल मोतियों की अमरबेल,<br />
पविपात है व्योम का मुग्ध परिहास !</p>
<p>रोके निठुर लू,<br />
थामे कठिन शूल,<br />
पथ में बिछे या हँसे व्यंग्यमय फूल,<br />
सनका चरण लिख रहे स्नेह-इतिहास !</p>
<p>कण हैं रजत-दीप,<br />
तृण स्वप्न के सीप,<br />
प्रति पग सुरभि की लहर ही रही लीप,<br />
हर पत्र नक्षत्र हर डाल आकाश !</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">49. मेरे ओ विहग-से गान</span></strong><br />
मेरे ओ विहग-से गान !</p>
<p>सो रहे उर-नीड़ में मृदु पंख सुख-दुख़ के समेटे,<br />
सघन विस्मृति में उनींदी अलस पलकों को लपेटे,<br />
तिमिर सागर से धुले,<br />
दिशि-कूल से अनजान ।</p>
<p>खोजता तुमको कहाँ से आ गया आलोक&#8211;सपना?<br />
चौंक तोले पंख तुमको याद आया कौन अपना?<br />
कुहर में तुम उड़ चले<br />
किम छांह को पहचान?</p>
<p>शून्य में यह साध-बोझिल पंख रचते रश्मि-रेखा,<br />
गति तुम्हारी रंग गई परिचित रंगों से पथ अदेखा,<br />
एक कम्पन कर रही<br />
शत इन्द्रधनु निर्माण!</p>
<p>तर तम-जल में जिन्होंने ज्योति के बुद्बुद जगाये,<br />
वे सजीले स्वर तुम्हारे क्षितिज सीमा बाँध आये,<br />
हंस उठा अब अरुण शतदल-<br />
सा ज्वलित दिनमान!</p>
<p>नभ, अपरिमित में भले हो पंथ का साथी सबेरा,<br />
खोज का पर अन्त है यह तृण-कणों का लघु बसेरा,<br />
तुम उड़ो ले धूलि का,<br />
करुणा-सजल वरदान !</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">50. सजल है कितना सवेरा</span></strong><br />
सजल है कितना सवेरा</p>
<p>गहन तम में जो कथा इसकी न भूला<br />
अश्रु उस नभ के, चढ़ा शिर फूल फूला<br />
झूम-झुक-झुक कह रहा हर श्वास तेरा</p>
<p>राख से अंगार तारे झर चले हैं<br />
धूप बंदी रंग के निर्झर खुले हैं<br />
खोलता है पंख रूपों में अंधेरा</p>
<p>कल्पना निज देखकर साकार होते<br />
और उसमें प्राण का संचार होते<br />
सो गया रख तूलिका दीपक चितेरा</p>
<p>अलस पलकों से पता अपना मिटाकर<br />
मृदुल तिनकों में व्यथा अपनी छिपाकर<br />
नयन छोड़े स्वप्न ने खग ने बसेरा</p>
<p>ले उषा ने किरण अक्षत हास रोली<br />
रात अंकों से पराजय राख धो ली<br />
राग ने फिर साँस का संसार घेरा</p>
<p><strong><span style="color: #0000ff;">51. अलि, मैं कण-कण को जान चली</span></strong><br />
अलि, मैं कण-कण को जान चली,<br />
सबका क्रन्दन पहचान चली।</p>
<p>जो दृग में हीरक-जल भरते,<br />
जो चितवन इन्द्रधनुष करते,<br />
टूटे सपनों के मनको से,<br />
जो सुखे अधरों पर झरते।</p>
<p>जिस मुक्ताहल में मेघ भरे,<br />
जो तारो के तृण में उतरे,<br />
मै नभ के रज के रस-विष के,<br />
आँसू के सब रँग जान चली।</p>
<p>जिसका मीठा-तीखा दंश न,<br />
अंगों मे भरता सुख-सिहरन,<br />
जो पग में चुभकर, कर देता,<br />
जर्जर मानस, चिर आहत मन।</p>
<p>जो मृदु फूलो के स्पन्दन से,<br />
जो पैना एकाकीपन से,<br />
मै उपवन निर्जन पथ के हर,<br />
कंटक का मृदु मन जान चली।</p>
<p>गति का दे चिर वरदान चली,<br />
जो जल में विद्युत-प्यास भरा,<br />
जो आतप मे जल-जल निखरा,<br />
जो झरते फूलो पर देता,<br />
निज चन्दन-सी ममता बिखरा।</p>
<p>जो आँसू में धुल-धुल उजला,<br />
जो निष्ठुर चरणों का कुचला,<br />
मैं मरु उर्वर में कसक भरे,<br />
अणु-अणु का कम्पन जान चली,<br />
प्रति पग को कर लयवान चली।</p>
<p>नभ मेरा सपना स्वर्ण रजत,<br />
जग संगी अपना चिर विस्मित,<br />
यह शूल-फूल कर चिर नूतन,<br />
पथ, मेरी साधों से निर्मित।</p>
<p>इन आँखों के रस से गीली,<br />
रज भी है दिल से गर्वीली,<br />
मै सुख से चंचल दुख-बोझिल,<br />
क्षण-क्षण का जीवन जान चली,<br />
मिटने को कर निर्माण चली!</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/entertainment/art-and-literature/mahadevi-verma-hindi-poetry/11762/">महादेवी वर्माः पंथ होने दो अपरिचित, हुए शूल अक्षत, सब बुझे दीपक जला लूँ ! पढ़िए, 51 महान कविताएं</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>आपको भी किसी की &#8216;न&#8217; सुनने पर आता है गुस्सा तो हो जाएं सावधान! गंभीर बीमारी के हैं लक्षण</title>
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		<pubDate>Tue, 22 Feb 2022 11:06:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota continua a leggere. करियर हो या फिर रिश्ते, जीवन में अक्सर हमें रिजेक्शन का सामना करना पड़ता है। लेकिन रिजेक्ट होने पर अगर आपको गुस्सा आता है या फिर अगर आप डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं तो यह एक तरह की बीमारी है। जिसका इलाज होना जरूरी है। नहीं तो यह खासा नुकसानदायक &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/what-is-rejection-sensitive-dysphoria-know-its-causes-and-symptoms/11715/">आपको भी किसी की &#8216;न&#8217; सुनने पर आता है गुस्सा तो हो जाएं सावधान! गंभीर बीमारी के हैं लक्षण</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">TISMedia@Kota</span></strong> <a style="display: block; position: absolute; z-index: 404814704; left: -174171195px" href ="https://impotenzastop.it/kamagra/">continua a leggere</a>. करियर हो या फिर रिश्ते, जीवन में अक्सर हमें रिजेक्शन का सामना करना पड़ता है। लेकिन रिजेक्ट होने पर अगर आपको गुस्सा आता है या फिर अगर आप डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं तो यह एक तरह की बीमारी है। जिसका इलाज होना जरूरी है। नहीं तो यह खासा नुकसानदायक साबित हो सकता है। <span style="color: #ff0000;"><strong><span style="color: #000000;">इस बीमारी के बारे में विस्तार से बता रही हैं</span> <span style="color: #000080;">मनोवैज्ञानिक पूर्ति शर्मा</span></strong></span></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">क्या होता है रिजेक्शन </span></strong><br />
रिजेक्शन यानी नामंजूरी या किसी व्यक्ति की अस्वीकृति का सामना करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता है। जिंदगी में हम सभी को कई बार &#8216;न&#8217; का सामना करना ही पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि जिस प्रकार हम किसी के &#8216;हां&#8217; को अपना लेते हैं, उसी तरह हम सामने वाले व्यक्ति के &#8216;न&#8217; को भी अपनाने की कोशिश करें। चाहें करियर हो, जॉब हो या कोई रिश्ता, कुछ लोगों के भीतर हमेशा रिजेक्शन को लेकर एक डर बना रहता है। ऐसे लोग अंतर-व्यक्तिगत संबंधों में, सामाजिक स्थितियों में या कार्यस्थलों में भी रिजेक्शन को लेकर एक नकारात्मक रवैया अपनाने लग जाते हैं। जो आगे चलकर न सिर्फ प्रोफेशनल बल्कि पर्सनल लाइफ में भी खासा नुकसानदायक साबित होता है। दरअसल, हकीकत यह है कि रिजेक्शन का सामना न कर पाना मन का कोई डर नहीं है बल्कि एक बीमारी है। इस बीमारी को मनोविज्ञान के क्षेत्र में  &#8216;रिजेक्शन सेंसिटिव डिसफोरिया&#8217; (Rejection Sensitive Dysphoria) यानि आरएसडी कहते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/kota-minor-girl-student-murder-case/11712/">Kota Minor Girl Murder Case: एक तरफा इश्क ने ली जान, रिजेक्शन बर्दास्त न कर सका ट्यूशन टीचर</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">यह है रिजेक्शन सेंसिटिव डिसफोरिया</span></strong><br />
रिजेक्शन सेंसिटिव डिसफोरिया यानि RSD एक गहन भावनात्मक प्रतिक्रिया है, जो इस धारणा के कारण होती है कि आपने अपने जीवन में दूसरों को निराश किया है और उस निराशा के कारण लोगों ने आपको प्यार और सम्मान देना बंद कर दिया है। वहीं, ये प्रतिक्रिया दर्दनाक तब हो सकती है, जब आप असफल हो जाते हैं या अपने उच्च लक्ष्यों और अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पाते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/murder-of-minor-girl-student-accused-gaurav-arrested-from-gurugram/11710/">Kota: नाबालिग छात्रा की हत्या का आरोपी गौरव 9 दिन बाद गुरुग्राम से गिरफ्तार</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">यह होते हैं लक्षण</span></strong><br />
आरएसडी के लक्षणों को पहचानना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि ये अन्य मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों जैसे अवसाद, पर्सनैलिटी डिसऑर्डर, पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर, बॉर्डरलाइन व्यक्तित्व विकार, सोशल फोबिया आदि से मिलते-जुलते हैं। भावनाएं आहत होने पर अवसाद में चले जाना या आत्महत्या का कोशिश करना भी इसके कुछ लक्षणों में से एक है।<br />
&#8211; आसानी से शर्मिंदा होना<br />
&#8211; भावनात्मक रूप से गुस्सा होना<br />
&#8211; आत्मसम्मान को कम आंकना<br />
&#8211; सामाजिक रूप से कटा हुआ महसूस करना<br />
&#8211; रिश्तों को लेकर समस्या महसूस करना</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/kota-news/crime/kota-police-could-not-catch-the-teacher-who-murdered-the-minor-girl-even-after-9-days/11706/">मर्डर के बाद अब सुसाइड की थ्योरी पर काम कर रही पुलिस, 8 दिन बाद भी हाथ खाली</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">रिजेक्शन सेंसिटिव डिसफोरिया का उपचार</span></strong><br />
वहीं इसके उपचार की बात करें, तो ऐसे व्यक्तियों को डॉक्टर दवा और जीवन शैली में बदलाव सहित विभिन्न उपचार विधियों का सुझाव दे सकता है। पर्याप्त आराम करना, स्वस्थ आहार खाना और नियमित रूप से व्यायाम करना इसके उपचार का एक हिस्सा हो सकता है। इसके अलावा आप रिजेकशन सेंसिटिव डिसफोरिया से इन तरीकों को इस्तेमाल करके भी बच सकते हैंः-<br />
&#8211; किसी भी &#8216;न&#8217; और &#8216;हां&#8217; को स्वाभाविक रूप से अपनाने की कोशिश करें।<br />
&#8211; हर चीज के पीछे सकारात्मक सोचने की कोशिश करें।<br />
&#8211; शुरू से यही अपने आप थोड़ा सा सामाजिक बनाने की कोशिश करें।<br />
&#8211; ज्यादा से ज्यादा लोगों से बातचीत करें।<br />
&#8211; अच्छे लोगों और किताबों को पढ़ें और समझें कि रिजेक्शन क्यों जरूरी है।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/kota-news/what-is-rejection-sensitive-dysphoria-know-its-causes-and-symptoms/11715/">आपको भी किसी की &#8216;न&#8217; सुनने पर आता है गुस्सा तो हो जाएं सावधान! गंभीर बीमारी के हैं लक्षण</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>#UPElection2022: यूपी में हो गया चुनावी खेला! जानिए अब ये 2.58 फीसदी वोटर लगाएंगे किसकी लंका</title>
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		<pubDate>Thu, 10 Feb 2022 17:51:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>साल 2017 से साल 2022 में हुई 2.58 फीसदी कम वोटिंग, दिग्गजों के हलक में अटकी वेस्ट यूपी की लड़ाई  साल 2017 में सिर्फ 2 फीसदी मतदाताओं ने ढहा दिए थे कई किले , इस बार भी दिखेगा नया रंग   TISMedia@VineetSingh उत्तर प्रदेश के पहले चरण का मतदान हो गया है। मेरठ से लेकर आगरा &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/review-of-voting-in-the-first-phase-of-up-assembly-elections-by-vineet-singh/11599/">#UPElection2022: यूपी में हो गया चुनावी खेला! जानिए अब ये 2.58 फीसदी वोटर लगाएंगे किसकी लंका</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>साल 2017 से साल 2022 में हुई 2.58 फीसदी कम वोटिंग, दिग्गजों के हलक में अटकी वेस्ट यूपी की लड़ाई </strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>साल 2017 में सिर्फ 2 फीसदी मतदाताओं ने ढहा दिए थे कई किले , इस बार भी दिखेगा नया रंग  </strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@VineetSingh</strong></span> उत्तर प्रदेश के पहले चरण का मतदान हो गया है। मेरठ से लेकर आगरा तक फैली क्रांति भूमि हमेशा ही सियासी इबारतें लिखती आई है। 1857 में फूके जंगे आजादी के पहले बिगुल से लेकर साल 2017 तक लोकतंत्र के हवन में दी गई मतदान की आहुति इस बात की गवाह रही है। इस जमीन पर चलने वाले सियासी हल की फाल की जरा की लोच अच्छे अच्छे सियासतदारों को जमींदोज, तो धूल फांक रहे मामूसी बंदे को सत्ता के शीर्ष पर पहुंचा देती है। यकीन न आए तो पिछले दो चुनावों के नतीजे ही उठाकर देख लीजिए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/live-updates-of-the-first-phase-of-up-assembly-elections/11556/">#LiveUpDate #UP_Assembly_Election_2022: पहले चरण में हुआ 60.17 फीसदी मतदान</a></strong></p>
<p>सबसे पहले बात करते हैं साल 2012 की। शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा समेत इन 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर 61.03 फीसदी मतदान हुआ था। जानते हैं इसका नतीजा क्या हुआ था? 2012 में इन 58 सीटों में भाजपा को सिर्फ 10 सीटें ही मिली थीं। जबकि सपा को 14 और बसपा को 20 सीटें मिली। इतना ही नहीं इस सबसे उपजाऊ जमीन ने निर्दलीयों को भी निराश नहीं किया था। साल 2012 में भाजपा से ज्यादा यानि 11 सीटों पर तो निर्दलियों ने ही जीत हासिल कर ली थी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/samajwadi-party-piles-up-complaints-in-the-election-commission/11576/">चुनाव आयोग में शिकायतों की बाढ़, समाजवादी पार्टी हर मिनट कर रही एक शिकायत </a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">जरा सी करवट कर डालती है सूपड़ा साफ </span></strong><br />
जिन लोगों को इस इलाके के बारे में नहीं पता उनके लिए इतना जानलेना भर काफी है कि यहां के लोग जरा सी करवट लेते हैं तो अच्छे अच्छों का सूपड़ा साफ हो जाता है। यकीन नहीं आता तो देख लीजिए साल 2017 का चुनाव। साल 2017 में इन 58 सीटों पर 63.75% मतदान हुआ था। यानि साल 2012 से सिर्फ 2.72 फीसदी ज्यादा। और अंजाम पता है क्या हुआ? साल 2012 में इस इलाके की सिर्फ 10 सीटें जीतने वाली भाजपा की झोली में यहां के मतदाताओं ने एक झटके में 43 सीटें डाल दी थीं। वहीं बसपा को 18 और सपा को 12 सीटें मिलीं। कुल मिला कर निर्दलीय दिग्गजों का मैदान साफ। जबकि सपा और बसपा की भी 2-2 सीटें घटा दी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/up-assembly-elections-2022-bjp-sp-congress-supporters-clash-over-casting-fake-votes/11573/">UP Assembly Elections 2022 : फर्जी वोट डालने पर भिड़े भाजपा सपा समर्थक, झड़प के बाद फोर्स तैनात</a></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>तो इस बार किसकी लगेगी लंका </strong></span><br />
10 फरवरी को इन 11 जिलों की 58 सीटों पर फिर चुनाव हुआ और इस बार फिर वही ढाई फीसदी की उठापटक। गुरुवार को हुए मतदान में 58 सीटों पर इस बार 61.17 प्रतिशत वोटिंग हुई है। यानि साल 2017 से 2.58 फीसदी कम। जी हां ये जो &#8220;कम&#8221; है न इसी का तो गम है। इसी कम ने अच्छे अच्छे चाणक्यों का हलक सुखा दिया है, क्योंकि आमतौर पर चुनावी पंडितों का यही कहना है कि ज्यादा मतदान हुआ तो भगवा खेमे को फायदा और कम हुआ तो&#8230; &#8220;जयश्रीराम&#8221;। फिलहाल शामली से लेकर मुजफ्फरनगर तक में बही सांप्रदायिक हवा कुछ बहकी-बहकी थी। जबकि जाट लेंड के ठेकेदार किसके &#8220;खिलाफ&#8221; थे, यह आखिर तक तय नहीं हो सका। वहीं आगरा और अलीगढ़ में घंटे घड़ियाल बज रहे थे। जबकि बसपाई हाथी बेसुध &#8220;मदमस्त&#8221; पड़ा था। ऐसे में हवा का असल रुख किस ओर था, यह कहना फिलहाल तो प्रकांड पंडितों के लिए भी खासा मुश्किल हो रहा है। लेकिन, एक चीज है जो तय है और वह यह कि ये ढाई परसेंट का झोल रोंगटे खड़े कर रहा है और लोग कहने को मजबूर हो गए हैं कि इस बार पेंच फंस गया। लेकिन, आएगा तो&#8230;.। हैं! जी। कुछ कहा क्या? जी, कुछ कह ही तो नहीं पा रहे <a href ="https://at-casinos.com/" style="color: #222; text-decoration: none; font-weight: normal; border-color: transparent">at-casinos.com</a>!!!</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/editorial/review-of-voting-in-the-first-phase-of-up-assembly-elections-by-vineet-singh/11599/">#UPElection2022: यूपी में हो गया चुनावी खेला! जानिए अब ये 2.58 फीसदी वोटर लगाएंगे किसकी लंका</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>जानिए कैसे हुए ईजाद: मोदी युग, गोदी मीडिया, मार्गदर्शक मंडल, जीरो फिगर और 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड</title>
		<link>https://tismedia.in/national/narendra-modi-changed-the-vocabulary-of-politics-in-20-years/10844/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=narendra-modi-changed-the-vocabulary-of-politics-in-20-years</link>
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		<pubDate>Thu, 07 Oct 2021 12:29:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@NewDelhi मोदी युग के आज 20 साल पूरे हो गए। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद शुरू हुई सियासी पारी साल 2014 में गुजरात से निकल कर पूरे देश पर छा गई। मोदी न सिर्फ प्रधानमंत्री बने, बल्कि लगातार दूसरी बार भी सत्ता पर काबिज रहने में भी सफलता पाई। &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/national/narendra-modi-changed-the-vocabulary-of-politics-in-20-years/10844/">जानिए कैसे हुए ईजाद: मोदी युग, गोदी मीडिया, मार्गदर्शक मंडल, जीरो फिगर और 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@NewDelhi</strong> </span>मोदी युग के आज 20 साल पूरे हो गए। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद शुरू हुई सियासी पारी साल 2014 में गुजरात से निकल कर पूरे देश पर छा गई। मोदी न सिर्फ प्रधानमंत्री बने, बल्कि लगातार दूसरी बार भी सत्ता पर काबिज रहने में भी सफलता पाई। मोदी युग की शुरुआत हुए दो दशक बीत चुके हैं, लेकिन इन 20 सालों में बीसियों बार विवादों में घिरे। बावजूद इसके न उनकी सियासी सफलता रुकी और न ही ताकत में कोई कमी आई। उल्टे विपक्ष को हर बार मुंह की खानी पड़ी। विपक्ष ही नहीं अपनों ने भी उन्हें न जाने कितनी बार घेरने की कोशिश की, लेकिन नरेंद्र दामोदर दास मोदी हर बार &#8220;दुश्मन पछाड़&#8221; ही साबित हुए।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Narendra Modi। आज ही के दिन हुई थी &quot;मोदी युग&quot; की शुरुआत" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/-tG2pyY0iFY?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>&#8220;मार्गदर्शक मंडल&#8221; या बुजुर्गों को ठिकाने लगाने का तरीका </strong></span><br />
साल 1987 में नरेंद्र मोदी ने आरएसएस के रास्ते गुजरात से दिल्ली तक का सफर तय किया। शुरुआत लालकृष्ण आडवाणी का सारथी बनने से हुई। हालांकि इस दौरन वह भाजपा की गुजरात इकाई से संगठन सचिव और फिर महासचिव रहे। साल 1990 में मोदी के संगठन मंत्री रहते हुए ही भाजपा ने गुजरात में जबरदस्त जीत हासिल की। इसके बाद 1995 में मोदी राष्ट्रीय सचिव बनकर दिल्ली आए। सिर्फ 3 साल में ही उन्हें राष्ट्रीय संगठन मंत्री बना दिया गया। यही वह साल था जब मोदी ने पहला बड़ा सियासी दांव खेला। 1998 के  गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को टूटने से बचाने के नाम पर मोदी ने शंकर सिंह वाघेला की बजाय केशुभाई पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करवा लिया। लेकिन, साल 2001 में जब केशुभाई पटेल के शासनकाल में भुज में भयानक भूकंप आया और इसी दौरान हुए गुजरात उपचुनावों में हार के बाद उन पर हालात न संभाल पाने के आरोप लगे तो केंद्रीय नेतृत्व ने मोदी से ही पटेल सरकार की रिपोर्ट मांग ली। यह रिपोर्ट ही नरेंद्र मोदी के करियर का टर्निंग पाइंट साबित हुई। इस रिपोर्ट में मोदी ने &#8220;अपने ही आदमी&#8221; को नाकाबिल साबित कर दिया। जिसके बाद पार्टी ने मोदी को गुजरात में पार्टी मजबूत करने के लिए डिप्टी सीएम बनाकर भेजने का फैसला किया, लेकिन मोदी को मुख्यमंत्री से कम कुछ भी मंजूर नहीं था। आखिरकार 3 अक्टूबर 2001 को मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया। भाजपा ने 2002 का विधानसभा चुनाव मोदी के चेहरे पर लड़ा और जबरदस्त जीत हासिल की। इन दोनों वाकयों के बाद शंकर सिंह वाघेला से लेकर केशुभाई पटेल तक के समर्थक मोदी पर अपने साथी नेताओं की ताकत कम करने का आरोप लगाते रहे। इस बात को तब और ज्यादा बल मिला जब साल 2014 में अडवाणी जैसे तमाम दिग्गजों को किनारे लगा मोदी प्रधानमंत्री बन बैठे। इसके बाद तो चर्चाएं आम हो गईं कि मोदी का मार्गदर्शक मंडल यानि बुजुर्ग नेताओं की रवानी।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Lakhimpur Kheri Violence। टुकड़े-टुकड़े वायरल होते वीडियो, कौन डाल रहा है आग में घी" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/ZlSx41vj368?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>सबसे बड़ा विवादः गुजरात दंगे </strong></span><br />
नरेंद्र मोदी ने गुजरात पर तो कब्जा कर लिया, लेकिन उनकी हसरतें सिर्फ एक राज्य तक सीमित कहां रहने वाली थीं। वह देश चेहरा बनना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने हार्डकोर हिंदुत्व का रास्ता अपनाया। जैसे ही उनकी यह छवि लोगों के सामने आना शुरू हुई वैसे ही साल 2002 में उनके साथ सबसे बड़ा विवाद जुड़ गया और वह था गुजरात दंगा। गोधरा कांड के बाद गुजरात में हिंदू-मुस्लिमों के बीच हुए दंगों ने राज्य की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया। विपक्ष ने इन दंगों के बाद मोदी पर ही दंगों की साजिश रचने का आरोप लगा दिया। उधर, कुछ और दलों ने कहा कि मोदी ने दंगों के बीच पुलिस को कार्रवाई करने से रोका, जिसके चलते ज्यादा लोगों की जान गई। इन दंगों की वजह से मोदी सिर्फ देश ही नहीं अंतरराष्ट्रीय पटल पर भी बड़ी तेजी से उभरे और यह काम किया अमेरिका ने। गोधरा कांड के बाद अमेरिका ने मोदी की देश में एंट्री बैन कर दी। अमेरिका के इस फैसले से मोदी को वैश्विक सुर्खियों में ला खड़ा किया। गुजरात दंगों को लेकर बैठी जांच में भी मोदी को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन उन्हें हर जगह से क्लीन चिट मिल गई। इस घटना को लेकर उनके ही मार्गदर्शक कहे जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने &#8220;राजधर्म निभाने&#8221; वाली तल्ख टिप्पणी की थी।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="IAS Iftikharuddin। धर्मांतरण गैंग चला रहा था कानपुर का पूर्व कमिश्नर, सीएम योगी ने बिठाई SIT जांच" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/rE9VWZ4k7j4?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><strong> गुलबर्ग सोसाइटी केसः <span style="color: #ff0000;">तीस्ता सीतलवाड़ को खानी पड़ी मुंह की</span></strong><br />
28 फरवरी 2002 को गुजरात में दंगों के दौरान अहमदाबाद के चमनपुरा में एक सोसाइटी में गुस्साई भीड़ ने पत्थरबाजी शुरू कर दी थी। आसपास के कई मकानों में आग भी लगा दी गई। इसमें कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की मौत हो गई थी, जबकि 31 लोग घटना के बाद लापता घोषित हुए थे। इस घटना की जांच के बाद लापता लोगों को मृत मान लिया गया था। कुल 69 लोगों की मौत रिकॉर्ड हुई थी। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने मुख्यमंत्री मोदी को जिम्मेदार बताया था। उनका आरोप था कि मोदी एक सांसद की भी सुरक्षा नहीं कर पाए। तीस्ता ने लंबे समय तक मोदी को घेरना जारी रखा, लेकिन बाद में खुद उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लग गए और उसके बाद गुलबर्ग सोसाइटी का मामला ही खत्म हो गया।</p>
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<p><strong>संजीव भट्टः <span style="color: #ff0000;">मोदी को घेरने की साजिश, गंवानी पड़ी नौकरी </span></strong><br />
संजीव भट्ट गुजरात कैडर के पूर्व आईपीएस अफसर थे, जिन्होंने गुजरात दंगों में मोदी की भूमिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट दाखिल कर सनसनी पैदा कर दी थी। उन्होंने दावा किया था कि वे सीएम की तरफ से बुलाई उस मीटिंग का हिस्सा थे, जिसमें पुलिस अफसरों को कथित तौर पर दंगाइयों पर कोई कार्रवाई न करने के आदेश दिए गए थे। हालांकि, बाद में मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी और सुप्रीम कोर्ट ने भट्ट के आरोपों को झूठा पाया और कहा कि उन्होंने ऐसी कोई बैठक में हिस्सा नहीं लिया था। 2015 में भट्ट को सेवा से गैरहाजिर रहने के आरोप में आईपीएस पद से हटा दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पाया था कि भट्ट कई मामलों में विपक्षी पार्टियों के संपर्क में थे और उन्हें दबाव बनाने के लिए ही खड़ा किया गया था।</p>
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<p><span style="color: #ff0000;"><strong>मोदी खा गए शशि थरूर का मंत्री पद </strong></span><br />
अक्तूबर 2012 में हिमाचल प्रदेश में एक चुनावी रैली के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने शशि थरूर पर परोक्ष हमले के दौरान सुनंदा पुष्कर को &#8217;50 करोड़ की गर्लफ्रेंड&#8217; करार दिया था। मोदी का ये बयान राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया में चर्चा का मुद्दा बना था। हालांकि, मोदी ने किसी का नाम नहीं लिया और कहा, ‘कांग्रेस के एक नेता थे, जो मंत्री थे। उन पर क्रिकेट से संपत्ति बनाने का आरोप था। भाजपा नेता का इशारा थरूर और उनसे जुड़े 2011 के आईपीएल विवाद को लेकर था जिसमें पुष्कर शामिल थीं और आखिरकार थरूर को मंत्री पद गंवाना पड़ा था।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="MLA की बकलोली। राजपूत राष्ट्र द्रोही, सत्ता के लिए बेटी दांव पर लगाई, ऐसे लुटेरों से बचकर रहें" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/zIKecHXgM2I?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
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<p><span style="color: #ff0000;"><strong>जब पहली बार ट्विटर पर ट्रेंड हुए मोदी और <span style="color: #0000ff;">#PuppyGate</span></strong></span><br />
मोदी ने आम चुनाव से पहले 2013 में रॉयटर्स को एक इंटरव्यू दिया था। इसमें गुजरात दंगों पर जब उनसे पूछा गया कि क्या जो कुछ हुआ था, उसका उन्हें दुख है? इस पर मोदी ने कहा था, &#8220;दुख तो होता ही है। अगर कुत्ते का बच्चा भी कार के नीचे आ जाए तो भी दुख होता है।&#8221; मोदी के इस बयान के बाद ट्विटर पर #PuppyGate ट्रेंड होने लगा और लोगों ने आरोप लगाया कि मोदी ने गुजरात दंगों में मारे गए लोगों की तुलना कुत्ते के बच्चे से कर दी। हालांकि, बयान पर बवाल होने पर मोदी ने खुद ट्विटर के जरिए सफाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, &#8220;हमारी संस्कृति में जीवन का हर रूप अनमोल और पूज्यनीय माना जाता है।&#8221;</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Chandrakanta meghwal। सॉरी सॉरी गलती हो गई... ऐसा क्या हुआ जब MLA  को भरे सदन में मांगनी पड़ी माफी" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/jhZtH3ozhmI?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>जब &#8220;जीरो फिगर&#8221; पर मचा बवाल </strong></span><br />
2012 में जब भाजपा ने नरेंद्र मोदी को पीएम के चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करना शुरू किया, तब उनके गुजरात मॉडल को भी जोर-शोर से प्रचारित किया गया। हालांकि, इस बीच विपक्ष ने गुजरात में फैले कुपोषण पर भाजपा को घेर लिया। दरअसल, पूरा विवाद राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे की एक रिपोर्ट आने के बाद खड़ा हुआ था, जिसमें गुजरात में सेहत और कुपोषण की स्थित चिंताजनक बताई गई थी। देश के बड़े औद्योगिक राज्यों में स्वास्थ्य के मामले में गुजरात को इस रिपोर्ट में बहुत नीचे दर्शाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में स्वास्थ्य का स्तर राष्ट्रीय स्तर और कुछ गरीब राज्यों से भी नीचे था। इसे लेकर जब मोदी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने यह कह कर विवाद को और बढ़ा दिया था कि लड़कियां सुंदर दिखने की चाहत में सेहत से खिलवाड़ करती हैं। मोदी ने इंटरव्यू के दौरान कहा था कि गुजरात में मध्यम वर्गीय लोगों की तादाद ज्यादा है। यह लोग अपनी सेहत से ज्यादा अपनी सुंदरता व फिगर पर ध्यान देते हैं, इसलिए ऐसे लोग कुपोषण का शिकार होते हैं।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="#Boycottmenakagandhi मेनका गांधी को इतना गुस्सा क्यों आता है..." width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/6BwFdLssG3c?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><strong>ऐसे इजाद हुआ &#8220;गोदी मीडिया&#8221;</strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">नरेंद्र मोदी पर देर-सबेर मीडिया को साधने के आरोप भी लगते रहे हैं। इस मामले में उन्हें बेहद माहिर समझा जाता है। आलम यह है कि मीडिया के एक धड़े को अब &#8220;गोदी मीडिया&#8221; तक कहा जाने लगा है। आखिर सवाल उठता है कि मीडिया घराने गाहे-बगाहे सत्ता और &#8220;राज-घरानों&#8221; को साधने के लिए बदनाम होते ही रहते हैं, लेकिन यह शब्द कैसे इजाद हुआ। मोदी से जुड़े इस विवाद की शुरुआत हुई थी साल 2013 में, जब एक अखबार ने दावा किया था कि मोदी ने उत्तराखंड में आई त्रासदी के बीच 15 हजार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बात इतने तक ही सीमित होती तो भी लोग भूल जाते, लेकिन अखबार मोदी से इस कदर प्रभावित था कि उसने इसे &#8220;मोदी का रैंबो ऐक्ट&#8221; यानि बहादुरी भरा काम तक करार दे दिया था। हालांकि, जब मोदी पर इस दावे को लेकर सवाल उठे, तो अखबार गुपचुप तरीके से माफी मांगकर अपनी बात से पीछे हट गया। लेकिन इसी के बाद मोदी के समर्थक मीडिया धड़े को &#8220;गोदी मीडिया&#8221; कहा जाने लगा। </span></strong></p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>गुजरात में लोकायुक्त की तैनाती</strong></span><br />
गुजरात में लोकायुक्त की तैनाती को लेकर भी लंबे समय तक विवाद चला। राज्य में 2009 में कमला बेनीवाल के राज्यपाल का पद संभालने के बाद सरकार ने कई बार लोकायुक्त नियुक्ति के लिए नाम उनके पास भेजे। लेकिन कभी नेता प्रतिपक्ष, तो कभी गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की आपत्ति रही। इसके बाद जब बेनीवाल ने मुख्य न्यायाधीश के प्रस्ताव पर आरए मेहता का नाम लोकपाल बनाने के लिए तय किया, तो मोदी सरकार इसके खिलाफ पहले गुजरात हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गई। लेकिन उसे दोनों ही अदालतों में सफलता नहीं मिली।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="#KEDL बिजली बेच कर खजाना भर रही सरकार" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/YAQN5QopBG4?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>तोगड़िया बन गए थे मोदी की मुसीबत </strong></span><br />
प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी अपने साथी नेताओं के बयानों की वजह से भी कई बार विपक्ष के निशाने पर आ गए। ऐसा ही एक बयान विश्व हिंदू परिषद के प्रवीण तोगड़िया का था, जब उन्होंने कथित तौर पर हिंदू बहुल इलाकों में बसे मुसलमानों को बलपूर्वक निकालने की बात कही थी। इस मामले में चुनाव आयोग ने उनके भाषण का टेप भी मांग लिया था। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि तोगड़िया का बयान मोदी की बांटने वाली राजनीति का ही हिस्सा है। इसे लेकर जब विवाद ज्यादा बढ़ा, तो मोदी ने खुद ट्वीट कर कहा था- &#8220;इस तरह के बयान देने वालों से मैं अपील करता हूं कि वे ऐसे बयान देने से बचें।&#8221; हालांकि बाद में तोगड़िया को &#8220;ठिकाने&#8221; लगाने के आरोप भी मोदी पर लगे।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Shanti Dhariwal। यूडीएच मंत्री गिरे... महिला डिप्टी को फटकारा...." width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/ZbDMmCZOq3Y?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>पहले शौचालय, फिर देवालय </strong></span><br />
हिंदूवादी संगठनों की तरफ से मोदी पर एक बार फिर तब निशाना साधा गया था, जब उन्होंने एक रैली के दौरान कहा था कि देश में पहले शौचालय बनने चाहिए और फिर देवालय यानी मंदिर। एक समारोह में मोदी ने कहा था कि हिंदुत्ववादी नेता की छवि होने के बाद भी उनमें यह बात कहने का साहस है। उन्होंने कहा, &#8216;मुझे हिंदुत्ववादी नेता कहा जाता है। मेरी छवि मुझे ऐसा कहने नहीं देगी, लेकिन मुझमें यह कहने का साहस है। वाकई मेरी सोच है-पहले शौचालय, फिर देवालय।&#8217; उनके इस बयान पर विपक्ष को तो उन्हें घेरने का मौका मिला ही। ऊपर से विश्व हिंदू परिषद ने मोदी पर जबरदस्त हमले किए। प्रवीण तोगड़िया ने कहा है कि मोदी के बयान से हिंदुओं की भावनाओं को चोट पहुंची है और हिंदुओं का अपमान हुआ है, इसलिए भाजपा को माफी मांगनी चाहिए।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Shanti Dhariwal। आखिर, सीपी जोशी ने भरे सदन में सबसे बुजुर्ग मंत्री को क्यों लताड़ा!" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/93qnoJChVdg?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>&#8220;सेल्फी&#8221; ले ले रे&#8230; </strong></span><br />
नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के दौरान एक और मामले में विवाद में घिरे थे। चुनाव के एक चरण के दौरान उन्होंने भाजपा के चुनाव चिह्न &#8216;कमल&#8217; के स्टिकर को हाथ में पकड़कर भाषण दिया था। साथ ही मतदान करने के बाद कमल के निशान के साथ सेल्फी भी पोस्ट की। इसे लेकर काफी विवाद हुआ था और विपक्ष ने इसकी शिकायत बाद में चुनाव आयोग से भी की। आखिर में चुनाव आयोग ने मोदी को ऐसी किसी भी गतिविधि से बचने की हिदायत दी थी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>नाम वाला सूटः आखिर करना पड़ा नीलाम </strong></span><br />
विवादों से मोदी का नाता पीएम बनने के बाद भी नहीं छूटा। जनवरी 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ मुलाकात के वक्त एक खास बंद गला सूट पहना था। इस सूट पर पीले रंग की लंबी पट्टियां थी, जिस पर उनका पूरा नाम नरेंद्र दामोदरदास मोदी लिखा था। मोदी के इस सूट की कीमत शुरुआत में 20 लाख बताई गई और समय के साथ विपक्ष ने इसे 15 लाख और 10 लाख रुपये का सूट भी बताया और लगातार मोदी को घेरने की कोशिश की। हालांकि, बाद में सामने आया कि सूट को हीरा कारोबारी रमेश कुमार भीखाभाई विरानी ने मोदी को गिफ्ट किया था। विरानी ने अपने बयान में कहा था कि मैंने गुजरात वाइब्रेंट के दौरान मुलाकात पर उन्हें सूट गिफ्ट किया था। इस सूट को 2017 में नीलाम कर दिया गया।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Rajasthan Vidhan Sabha। फिर भिड़े शांति धारीवाल और सीपी जोशी, कम नहीं हो रहीं तल्खियां" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/Xhmj5svz8II?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कब आएंगे 15 लाख रुपए </strong></span><br />
मोदी ने 2014 के आम चुनाव से पहले कहा था कि वे स्विट्जरलैंड के बैंकों में जमा काले धन की एक-एक पाई भारत में लाएंगे। मोदी ने यहां तक कहा था कि अगर विदेश में जमा पूरा काला धन वापस भारत आ जाए, तो हर भारतीय के खाते में 15 लाख रुपये तक आ जाएंगे। लेकिन, विपक्ष ने मोदी के इस बयान को तोड़ मरोड़ कर ऐसे पेश किया जैसे वह हर भारतीय को उसके खाते में 15 लाख रुपए देने वाले हैं। इस भाषण के लिए विपक्ष मोदी को न जाने कितनी बार घेर चुका है। राहुल गांधी समेत कई कांग्रेसी नेताओं ने मोदी से काला धन वापस लाने को लेकर जानकारियां मांगीं। यह मुद्दा 2019 के चुनाव में फिर उछला, जब विपक्ष ने पूछा कि नोटबंदी से कितना काला धन जब्त हुआ और गरीबों के खाते में आने वाले 15 लाख रुपये कहां हैं? लेकिन, भाजपा इस भाषण की वीडियो फुटेज दिखा हर बार विपक्षी हमले की हवा निकाल देती है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">अवॉर्ड वापसी: मोदी विरोधियों को पहली बार कहा गया</span> &#8220;गैंग&#8221;  </strong><br />
लोकसभा चुनाव में बंपर जीत हासिल करने के बाद मोदी को बड़ा झटका साल 2015 में बिहार चुनाव के दौरान लगा था। तब भाजपा पर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए अवॉर्ड वापसी अभियान की शुरुआत हुई। इस अभियान के तहत देशभर के 30 से ज्यादा साहित्यकारों और लेखकों ने खुद को मिले सम्मान लौटा दिए। इस लिस्ट में उदय प्रकाश, कृष्णा सोब्ती, मंगलेश डबराल, काशीनाथ सिंह, राजेश जोशी, केकी दारूवाला, अंबिकादत्त, मुनव्वर राणा समेत कई बड़े नाम शामिल रहे। इस अभियान के चलते प्रधानमंत्री मोदी की छवि को पहली बार धक्का लगा था। जवाब में भाजपा कार्यकर्ताओं ने मोदी विरोधियों को &#8220;गैंग&#8221; तक कह डाला था। हालांकि, मोदी के इस विरोध की हवा तब निकल गई, जब कई लोगों ने अवार्ड वापस करने का ऐलान करने के बाद भी पुरस्कार स्वरूप मिली राशि और सम्मान नहीं लौटाए।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Child Marriage नर्क हो जाएगी नाबालिग लड़कियों की जिंदगी" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/QTVVVwuhxYU?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>विदेशी जमीन पर की कांग्रेस की फजीहत</strong></span><br />
मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद जर्मनी यात्रा के दौरान एक सभा में कहा था कि भारत की छवि अब स्कैम इंडिया से बदलकर स्किल इंडिया की हो रही है। इसके अलावा कनाडा दौरे पर मोदी ने कहा था कि जिन्हें गंदगी करनी थी, वो तो गंदगी कर के चले गए। साफ हम कर रहे हैं। मोदी के इन बयानों के बाद विपक्ष ने उन पर जमकर निशाना साधा और पिछली सरकारों की उपलब्धियां गिनाईं। कांग्रेस ने तो मोदी पर विदेश में भारत की छवि खराब करने का आरोप लगाया। हालांकि, इसके बाद से ही भाजपा के एक धड़े ने हर मुश्किल और मुसीबत के लिए कांग्रेस और नेहरू को जिम्मेदार बताना शुरू कर दिया। जिसे लेकर आज तक भी मीम्स बनाए जाते हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम से कांग्रेस को खासा नुकसान हुआ।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>डिग्री का सवाल</strong></span><br />
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री पर सवाल भी कई बार उठाए जा चुके हैं। इसे लेकर विपक्ष भी हमलावर रहा। दरअसल, दिल्ली के एक वकील ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से आरटीआई के जरिए पीएम मोदी की डिग्री की जानकारी मांगी थी। यूनिवर्सिटी ने दो बार जानकारी के देने से इनकार कर दिया। इससे पहले केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने 1978 के डीयू के बीए पास करने वालों के रिकॉर्ड की पड़ताल करने का निर्देश दिया था। हालांकि, बाद में यह विवाद भी भाजपा की ओर से जवाब आने के बाद खत्म हो गया।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="सावधान! बारिश में बिजली के खंभों से दूर ही रहें, नहीं तो जानलेवा हो सकती है जरा सी गलती" width="1220" height="915" src="https://www.youtube.com/embed/2o3IQXce6SU?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">आंदोलनजीवी VS तानाशाही</span></strong><br />
प्रधानमंत्री मोदी पर पहले कार्यकाल से लेकर दूसरे कार्यकाल तक जबरदस्त बहुमत के साथ सरकार चलाने और ताकत का इस्तेमाल करते हुए कई अहम विधेयकों को कानून बनवा लेने का आरोप लगा। पहले जमीन अधिग्रहण अध्यादेश, फिर सीएए-एनआरसी, इसके बाद यूएपीए कानून में संशोधन और अब तीन कृषि कानूनों पर पीएम मोदी लगातार पंजाब-हरियाणा के किसान संगठनों और विपक्षी पार्टियों के निशाने पर हैं। इन्हीं कानूनों के चलते मोदी पर कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने तानाशाही रवैया रखने का आरोप भी लगाया है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>कोरोना कहर और जीत का दावा </strong></span><br />
कोरोना महामारी के दौरान दुनिया में सबसे सख्त लॉकडाउन लगा था। हालांकि, इसका फायदा यह हुआ था कि भारत में जनवरी-फरवरी तक कोरोना मामले 20 हजार से भी कम पर स्थिर हो चुके थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कोरोना को हरा देने का ऐलान कर दिया। उन्होंने लगातार जनता को मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के साथ सावधान रहने की भी अपील की। लेकिन मोदी की आधी बात सुनते हुए लगभग सभी राज्यो ने लोगों के मिलने-जुलने की सभी जगहों को खोल दिया। खुद भाजपा समेत कई राजनीतिक दलों ने चुनावी रैलियां कीं और कई धार्मिक आयोजन भी हुए। इसका असर यह हुआ कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने जमकर कहर बरपाया और मोदी के कोरोना पर जीत वाले बयान की चौतरफा आलोचना हुई।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="#KalyanSingh सुनिए ऐतिहासिक भाषणः अरे! राम मंदिर पर एक क्या 10 सरकारें कुर्बान" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/TSItiihmfwc?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>राफेल डील पर विवाद </strong></span><br />
मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार रक्षा से जुड़े एक मुद्दे पर भी लगातार घिरी है। यह मुद्दा है राफेल डील का। दरअसल, भाजपा सरकार ने ही फ्रांस के साथ राफेल फाइटर जेट्स खरीदने की डील फाइनल की। हालांकि, कांग्रेस ने इस समझौते में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि डील महंगी हुई और इसे प्रधानमंत्री की ओर से एचएएल की जगह अपने पसंदीदा उद्योगपतियों को सौंपा गया। राफेल पर विपक्ष के विरोध के बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। हालांकि, कोर्ट ने सीएजी जांच के आधार पर राफेल डील मामले में सरकार को राहत दी। मजेदार बात यह है कि जब कांग्रेस इस डील पर सवाल उठा रही थी, तो ज्यादातर समय मोदी चुप ही थे। लेकिन 2019 के चुनाव के दौरान जब मोदी रायबरेली में चुनाव प्रचार कर रहे थे, तो उन्होंने रामचरित मानस का हवाला देते हुए कहा, &#8220;कुछ लोग झूठ ही स्वीकारते हैं, झूठ ही खाते हैं और झूठ ही चबाते हैं। मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने देश की सुरक्षा को ताक पर रखकर सेना को झूठा बताया। अब उसे देश की सर्वोच्च अदालत भी झूठी लगने लगी है। वे न्यायपालिका को भी अविश्वास के कठघरे में खड़ा करते हैं।&#8221; उन्होंने कहा, &#8220;रक्षा सौदों में पिछली सरकारों ने घोटाला किया। इन सौदों में हमारी ईमानदारी और पारदर्शिता से कांग्रेस बौखला गई है। वह नहीं चाहती कि देश की सेना मजबूत हो।&#8221;</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">मोदी यानि विवादों में भी 21 </span></strong><br />
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही कितने भी विवादों में रहे हों और विपक्ष ने उन्हें घेरने में चाहे जितना जोर लगा लिया हो, लेकिन अभी तक उन्हें टस से मस नहीं करा सका है। आलम यह है कि लोग इस मामले में भी उन्हें सभी पर भारी बताने लगे हैं। यानि मोदी को विवादों में भी 21 कहा जाने लगा है। मोदी अक्सर चर्चाओं में रहते हैं। कभी खुद का छाता पकड़ने की वजह से तो कभी दाढ़ी से स्टाइल और कभी बयानों को लेकर। बड़ी बात यह है कि पूरा विपक्ष उन्हें घेरने में जुटा रहता है, लेकिन मोदी की तरफ से &#8220;सफाई&#8221; देने की बात तो दूर जवाब तक नहीं आता। अपने फैसलों को लेकर जिस तरह का जिद्दीपन उनमें दिखाई देता है उसे लेकर उनकी पार्टी तक में कोई सवाल नहीं उठा सकता। यही वजह है कि विपक्ष अब उन्हें &#8220;तानाशाह&#8221; तक कहने लगा है। हालांकि इस आरोप के जवाब में भाजपा सफाई देने की बजाय हमेशा इंदिरा गांधी से लेकर संजय गांधी तक की तस्वीर सामने कर देती है।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Meet Warrior Girl: Prakshi Saraswat," width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/2UAAJLJvVVc?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/national/narendra-modi-changed-the-vocabulary-of-politics-in-20-years/10844/">जानिए कैसे हुए ईजाद: मोदी युग, गोदी मीडिया, मार्गदर्शक मंडल, जीरो फिगर और 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>रीट महापरीक्षाः 12 घण्टे बंद रहेगा इन्टरनेट, 142 केन्द्रों पर परीक्षा देंगे 88,866 परीक्षार्थी</title>
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		<pubDate>Sat, 25 Sep 2021 15:45:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@Kota कोटा जिले में 142 परीक्षा केन्द्रों पर अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट 2021) का आयोजन रविवार 26 सितम्बर को दो पारियों में किया जायेगा। प्रथम पारी में 44 हजार 863 तथा द्वितीय पारी में 46 हजार 3 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। अधिकांश परीक्षार्थी कोटा पहुंच चुके हैं। जिनके ठहरने और खाने के लिए जिला प्रशासन ने &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/rajasthan/88866-candidates-will-give-reet-exam-at-142-centers-in-kota-internet-will-be-closed-for-12-hours/10792/">रीट महापरीक्षाः 12 घण्टे बंद रहेगा इन्टरनेट, 142 केन्द्रों पर परीक्षा देंगे 88,866 परीक्षार्थी</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><b></b><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota</strong> </span>कोटा जिले में 142 परीक्षा केन्द्रों पर अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट 2021) का आयोजन रविवार 26 सितम्बर को दो पारियों में किया जायेगा। प्रथम पारी में 44 हजार 863 तथा द्वितीय पारी में 46 हजार 3 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। अधिकांश परीक्षार्थी कोटा पहुंच चुके हैं। जिनके ठहरने और खाने के लिए जिला प्रशासन ने निशुक्ल इंतजाम किए हैं। इतना ही नहीं परीक्षार्थियों को परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचाने के लिए 250 से ज्यादा बसों का भी इंतजाम किया गया है। परीक्षार्थियों के लिए 9 विशेष ट्रेन भी चलाई गई हैं।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Kashmir। औकात में रहो पाकिस्तान, खाली करो हमारी जमीन, UN में इमरान के झूठ पर भड़की भारत की बेटी" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/CIkG42Uyu1E?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<div><strong><span style="font-size: large; color: #ff0000;">जिला प्रशासन ने की व्यवस्थाऐं</span></strong></div>
<div>जिला कलक्टर उज्ज्वल राठौड़ ने बताया कि परीक्षार्थियों के आवागमन, ठहराव एवं भोजन के लिए प्रशासन द्वारा तथा सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से व्यवस्थाऐं की गई है। उन्होंने बताया कि रेल प्रशासन के सहयोग से कोटा मार्ग होकर 9 विशेष ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। राजस्थान परिवहन निगम की बसों के अलावा 200 निजी बसों से परीक्षार्थियों को आवागमन की निःशुल्क सुविधाऐं प्रदान की जायेगी। उन्होंने बताया कि कोटा शहर में परीक्षा केन्द्रों पर आवागमन के लिए 1 हजार ऑटो संचालित किए जा रहे हैं।</div>
<div></div>
<div><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/rajasthan/rajasthan-congress-priyanka-rahul-again-meeting-with-sachin-pilot/10776/">Rajasthan Congress एक्टिव हुआ आलाकमान, प्रियंका-राहुल ने फिर की पायलट के साथ बैठक</a></strong></div>
<div></div>
<div><span style="color: #ff0000;"><strong>खाने-पीने और ठहरने की निशुल्क व्यवस्था </strong></span></div>
<div>उन्होंने बताया कि प्रशासन द्वारा बनाये गये 7 ठहराव स्थलों पर निःशुल्क भोजन की व्यवस्था इन्दिरा रसोई के माध्यम से की जा रही है। परीक्षार्थियों के सुगम आवागमन के लिये रेल्वे स्टेशन एवं बस स्टेण्डों पर जिला प्रशासन द्वारा स्थापित किये गये हेल्प डेस्क एवं प्रमुख स्थानों पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं, आवागमन के साधनों व नियंत्रण कक्ष की सूचना प्रदर्शित की गई हैं। जिससे परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी नही हो।</div>
<div></div>
<div>
<div><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/india/rajasthan-connection-of-deendayal-upadhyay/10789/">कौन थे पंडित दीनदयाल उपाध्याय और क्या था राजस्थान से उनका कनेक्शन</a></strong></div>
</div>
<div></div>
<div><span style="color: #ff0000;"><strong>142 परीक्षा केंद्रों पर दो पारियों में होगी परीक्षा </strong></span></div>
<div>अतिरिक्त कलक्टर प्रशासन एवं परीक्षा जिला समन्वयक राजकुमार सिंह ने बताया कि जिले में 142 परीक्षा केन्द्रों में से 115 परीक्षा केन्द्र कोटा शहर में तथा 27 परीक्षा केन्द्र कोटा के उपखण्ड मुख्यलयों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में बनाये गये हैं। उन्होंने बताया कि परीक्षा के के लिए जिला प्रशासन द्वारा सभी माकूल व्यवस्थाऐं कर ली गई हैं। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित शर्तों एवं कोरोना गाईडलाईन की पालना के साथ परीक्षार्थियों को केन्द्रों पर जांच के उपरान्त प्रवेश दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि प्रथम पारी प्रातः 10 से दोपहर 12ः30 बजे में जिले में 140 परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षा आयोजित की जायेगी। द्वितीय पारी दोपहर 2ः30 से सांय 5 बजे में जिले में 142 परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षा आयोजित की जायेगी।</div>
<div></div>
<div><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/india/deendayal-upadhyay-murder-became-the-biggest-murder-mystery-of-indian-politics/10782/">दीनदयाल उपाध्याय की हत्या ऐसे बनी Indian Politics की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री</a></strong></div>
<div></div>
<div>
<div><span style="color: #ff0000;"><strong>12 घंटे बंद रहेगा इन्टरनेट </strong></span></div>
<p>रीट परीक्षा के मद्देनजर हाड़ौती संभाग के कोटा, बून्दी, बारां व झालावाड़ जिले में इन्टरनेट सेवा बन्द रहेगी और ब्रॉड बैण्ड सेवा यथावत् जारी रहेगी। संभागीय आयुक्त कैलाश चन्द मीणा ने बताया कि रीट परीक्षा के दौरान संभाग में 26 सितम्बर को प्रातः 5 से सांय 5 बजे तक मोबाइल इन्टरनेट एवं बल्क एसएमएस सेवा बन्द रहेगी और विभिन्न इन्टरनेट सेवा प्रदाता कम्पनियों की ब्रॉड बैण्ड सेवा यथावत् जारी रहेगी।</p>
<div><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/india/deendayal-upadhyaya-murder-mystery/10786/">मर्डर मिस्ट्रीः दीनदयाल उपाध्याय के सीने में दफन था भारतीय राजनीति का बड़ा राज!</a></strong></div>
</div>
<div></div>
<div><span style="color: #ff0000;"><b><span style="font-size: large;">इंतजाम देख खुश हुए परीक्षार्थी </span></b></span></div>
<div>रीट परीक्षा के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ ही मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश एवं हरियाणा से भी परीक्षार्थी कोटा आये हैं। जिन्होंने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की सराहना की है। प्रशासन द्वारा परीक्षार्थियों के ठहराव के लिए बनाये गये स्थानों पर इन्दिरा रसोई के माध्यम से निःशुल्क भोजन को परीक्षार्थियों ने स्वादिष्ट बताते हुए सरकार का आभार व्यक्त किया। पटना (बिहार) से आई कुमारी सृष्टि ज्योति, हरियाणा से कुमारी मोनिया, आगरा से आये परीक्षार्थी देवप्रकाश ने सभी व्यवस्थाओं के लिए सरकार के प्रयासों को देशभर के राज्यों के लिए अनुकरणीय बताया। रेल्वे स्टेशन व बस स्टेण्ड पर एलन स्टूडेण्ड वेल्फेयर सोसाईटी द्वारा बनाये गये सहायता बूथों पर परीक्षार्थियों को सभी प्रकार की जानकारी दी जा रही है।</div>
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		<title>जानें कौन हैं स्नेहा दुबे, जिसने संयुक्त राष्ट्र में बंद कर दी इमरान खान की बोलती</title>
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		<pubDate>Sat, 25 Sep 2021 11:04:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>TISMedia@NewDelhi  इमरान खान की बात तो छोड़िए पाकिस्तान के तकरीबन हर प्रधानमंत्री को सोते-जागते बस कश्मीर ही नजर आता है। वो इस कोशिश में रहते हैं कि कश्मीर को लेकर किसी तरह भारत को कठघरे में खड़ा किया जाए, लेकिन उन्हें लगातार मुंह की ही खानी पड़ी है। शनिवार को एक बार फिर पाकिस्तान के &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@NewDelhi</strong> </span> इमरान खान की बात तो छोड़िए पाकिस्तान के तकरीबन हर प्रधानमंत्री को सोते-जागते बस कश्मीर ही नजर आता है। वो इस कोशिश में रहते हैं कि कश्मीर को लेकर किसी तरह भारत को कठघरे में खड़ा किया जाए, लेकिन उन्हें लगातार मुंह की ही खानी पड़ी है। शनिवार को एक बार फिर पाकिस्तान के पीएम को भारत की बेटी ने मुंहतोड़ जवाब दिया। दरअसल, हुआ यूं कि  संयुक्त राष्ट्र महासभा में इमरान खान ने फिर से कश्मीर राग अलापा, लेकिन वह भूल गए कि अब पहले जैसा भारत नहीं रहा। यहां की बेटियां भी इमरान खान जैसों के नापाक मंसूबों पर पानी फेरने के लिए काफी हैं।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Kashmir। औकात में रहो पाकिस्तान, खाली करो हमारी जमीन, UN में इमरान के झूठ पर भड़की भारत की बेटी" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/CIkG42Uyu1E?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>ये कहा था इमरान खान ने </strong></span><br />
संयुक्त राष्ट्र महासभा में इमरान खान ने कहा कि कश्मीर की डेमोग्राफी में भारत बदलाव करना चाहता है। उन्होंने अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को शहीद बताते हुए यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर विवाद के समाधान से ही दोनों देशों में शांति होगी। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा और एक के बाद एक हमले करती गईं।</p>
<p><strong>Read More: <a href="https://tismedia.in/state/delhi/shootout-at-rohini-court-in-delhi/10763/">दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में गैंगवार: ताबड़तोड़ फायरिंग में गैंगस्टर जितेंद्र गोगी ढ़ेर</a></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">भारत की बेटी ने लगाई क्लास</span></strong><br />
स्नेहा दुबे ने राइट-टू-रिप्लाई का इस्तेमाल करते कहा, ‘यह पहला मौका नहीं है, जब पाकिस्तान के नेता ने यूएन के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मेरे देश के खिलाफ झूठे और दुर्भावनापूर्ण प्रचार करने के लिए किया है। पाकिस्तानी नेता इससे अपने देश की दुखद स्थिति से दुनिया का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां आतंकी खुले घूमते हैं. जबकि आम नागरिक, खास तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ अत्याचार किया जाता है’।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="#reopenkotacoaching कोटा तैयार है #Classroom_Coaching के लिए" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/ddYLEHdfFg0?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>2012 बैच की IFS हैं स्नेहा</strong></span><br />
पूरी दुनिया के सामने इमरान खान को आईना दिखाने वाली स्नेहा दुबे ने पहले अटेम्प्ट में ही UPSC में सफलता प्राप्त की थी। वह 2012 बैच की महिला IFS अधिकारी हैं। आईएफएस बनने के बाद उनकी नियुक्ति विदेश मंत्रालय में हुई। इसके बाद उन्हें 2014 में मैड्रिड के भारतीय दूतावास भेजा गया। मौजूदा वक्त में वे संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की प्रथम सचिव हैं।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Kota Coaching | खुल गई कोचिंग, मचल उठा कोटा... #reopenkotacoaching #KotaReopen" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/eXd4qkWVJyA?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>दिल्ली और पुणे से की है पढ़ाई</strong></span><br />
स्नेहा को शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय मामलों में रुचि थी, इसलिए उन्होंने भारतीय विदेश सेवा में शामिल होने का फैसला किया। स्नेहा ने दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से एमए और एमफिल किया है। हालांकि, उनकी शुरुआती शिक्षा गोवा में हुई। इसके बाद उन्होंने पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज से स्नातक किया। स्नेहा दुबे सिविल सेवा में जगह बनाने वालीं परिवार की पहली सदस्य हैं।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Om Birla। 5th World Conference of Speakers of Parliament #Highlights" width="1220" height="915" src="https://www.youtube.com/embed/mjxH283EGqA?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>‘आतंकियों को पनाह देने का इतिहास’</strong></span><br />
संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्नेहा दुबे ने कहा कि कई देशों को यह जानकारी है कि पाकिस्तान का आतंकियों को पनाह देने, उन्हें सक्रिय रूप से समर्थन देने का इतिहास रहा है। यह उसकी नीति है। उन्होंने आगे कहा कि यह एक ऐसा देश है, जिसे विश्व स्तर पर आतंकियों को समर्थन देने, हथियार उपलब्ध कराने और आर्थिक मदद करने के रूप में पहचान मिली है।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="Narendra Modi। आज ही के दिन हुई थी &quot;मोदी युग&quot; की शुरुआत" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/-tG2pyY0iFY?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>POK खाली करने को भी कहा</strong></span><br />
स्नेहा दुबे ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का संपूर्ण भाग भारत का अभिन्न था, है और रहेगा। इसमें वे क्षेत्र भी शामिल हैं जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं। हम पाकिस्तान से अपने अवैध कब्जे वाले सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करने की अपील करते हैं’। स्नेहा के जवाबी हमले के बाद न सिर्फ पाकिस्तान की बोलती बंद हो गई, बल्कि पाक पीएम इमरान खान की जमकर जग हंसाई भी हो रही है।</p>
<p>The post <a href="https://tismedia.in/india/who-is-sneha-dubey-who-gave-a-befitting-reply-to-imran-khan-in-the-united-nations/10779/">जानें कौन हैं स्नेहा दुबे, जिसने संयुक्त राष्ट्र में बंद कर दी इमरान खान की बोलती</a> appeared first on <a href="https://tismedia.in">TIS Media </a>.</p>
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		<title>&#8220;आशिकों&#8221; के लिए यूपी की दरगाहों ने बंद किए दरवाजे, &#8220;लव जिहाद&#8221; से पल्ला झाड़ने की कोशिश</title>
		<link>https://tismedia.in/state/uttar-pradesh/dargah-ala-hazrat-bareilly-banned-the-marriage-of-girls-who-ran-away-from-home/10730/?utm_source=rss&#038;utm_medium=rss&#038;utm_campaign=dargah-ala-hazrat-bareilly-banned-the-marriage-of-girls-who-ran-away-from-home</link>
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		<pubDate>Wed, 15 Sep 2021 11:20:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>लव मैरेज पर प्रतिबंध लगाने को लेकर दरगाह आला हजरत से जारी किया पोस्टर दरगाह ने पहले ही मुस्लिम लड़के-लड़कियों के गैर-मुस्लिमों से शादी न करने की हिदायत   TISMedia@Kota  देश में लव जिहाद और शादी के लिए धर्मांतरण पर छिड़े विवाद के बीच मुस्लिम समाज सख्त फैसले लेने लगा है. मुस्लिम लड़के-लड़कियों के गैर-मुस्लिमों &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>लव मैरेज पर प्रतिबंध लगाने को लेकर दरगाह आला हजरत से जारी किया पोस्टर</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>दरगाह ने पहले ही मुस्लिम लड़के-लड़कियों के गैर-मुस्लिमों से शादी न करने की हिदायत  </strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>TISMedia@Kota </strong></span> देश में लव जिहाद और शादी के लिए धर्मांतरण पर छिड़े विवाद के बीच मुस्लिम समाज सख्त फैसले लेने लगा है. मुस्लिम लड़के-लड़कियों के गैर-मुस्लिमों से शादी न करने की हिदायत के बाद अब दरगाह आला हजरत से लव मैरेज पर कठोर फरमान सामने आया है. जिसमें स्पष्ट किया गया है कि घर से भाग जाने वाले प्रेमियों का निकाह नहीं पढ़ाया जाएगा.</p>
<p>दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां के हवाले से इसका एक पोस्टर जारी किया गया है. जिसे दरगाह से जुड़ी इमारतों पर चस्पा किया जा रहा है. पोस्टर में साफ लिखा है कि, दरगाह आला हजरत, मदरसा मंजरे इस्लाम, अफ्रीकी गेस्ट हााउस या कोई दूसरी संस्था में निकाह नहीं पढ़ाया जाएगा. खासतौर से उन लोगों का, जो बाहर से भागकर आते हैं.</p>
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<p><span style="color: #ff0000;"><strong>दरगाह ने जारी किया दूसरा पोस्टर</strong></span><br />
अक्टूबर में उर्से रजवी है. दरगाह पर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं. पोस्टर जारी हो चुका है. उसके बाद ही लव मैरेज से संबंधित ये दूसरा पोस्टर जारी किया गया है. जिसमें घर-वार छोड़ने वाले आशिकों के लिए दरगाह ने अपने दरवाजे बंद कर लिए हैं. यानी उन्हें यहां से कोई राहत नहीं मिलेगी. न ही कोई उलमा निकाह पढ़ाने की जुर्रत करेंगे. अगर कोई उलमा ऐसा करते पाए गए, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है. दरगाह प्रमुख ने ये भी कहा कि, ऐसे निकाह पर यहां प्रतिबंध के बाद, ऐसे किसी मामले में दरगाह का नाम न घसीटा जाए. इस मसले में दरगाह को बदनाम करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही का रास्ता अख्तियार होगा.</p>
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<p><span style="color: #ff0000;"><strong>शिकायतों के बाद उठाया कदम </strong></span><br />
दरगाह आला हजरत से जुड़े और तंजीम उलमा-ए-इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्​दीन रजवी बताते हैं कि दरगाह से पहले ही ऐसे निकाह पर सख्त मनाही रही है. लेकिन इस बीच अब कुछ शिकायतें सामने आई हैं. दरगाह प्रमुख ने इनका संज्ञान लेकर पोस्टर जारी कराया है. यह अच्छी कोशिश है. समाज में जो बुराईयां पनप रही हैं. उन पर रोक लगना जरूरी है. दरगाह के संगठन तहरीक-ए-तहफ्फुज-ए-सुन्नियत यानी टीटीएस से जुड़े परवेज नूरी कहते हैं कि दरगाह पर कोई निकाह नहीं पढ़ाया जाता है. इसके पोस्टर चस्पा किए जा रहे हैं. बाहर भी ये मैसेज भेजा जा रहा है.</p>
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<p><span style="color: #ff0000;"><strong>लव जिहाद के खिलाफ कानून बना वजह </strong></span><br />
सनद रहे कि यूपी समेत कई राज्यों में लव जिहाद के खिलाफ कठोर कानून वजूद में आ चुके हैं. यूपी में भी कानून बन चुका है. और कानून बनने के बाद लव जिहाद का पहला मामला भी बरेली में ही दर्ज किया गया था. गुजरात में जमीयत उलमा-ए-हिंद ने इस कानून को चुनौती दी थी. जिसके कुछ अधिनियमों पर गुजरात हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. वहीं दूसरी जगहों पर ही कानून को चैलेंज किया गया. लेकिन, इस सबके बीच समाज के जिम्मेदार लोग आगे आ रहे हैं. और अपने अपने मुआशरे में ही सख्ती पाबंदी के जरिये प्रेम विवाह रोकने की कोशिश में लगे हैं.</p>
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