फोन की घंटी बजते ही बैठ जाता है सीएम का दिल, 13 महीनों से उड़ी रातों की नींद
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पंचायत जनप्रतिनिधियों से साझे किए कोरोना के भयावह हालात

जयपुर. सर, अस्पतालों में जगह नहीं है, प्लीज एक बेड तो उपलब्ध करवा दीजिए, डॉक्टर बोलते हैं, किस मरीज को हटाकर बेड दें। जैसे-तैसे बेड मिल जाए तो ऑक्सीजन खत्म हो जाती है, फिर फोन घनघनाने लगते हैं, अस्पताल से सूचना मिलती है, गंभीर मरीज है, 2 घंटे की ऑक्सीजन बची है, अब ऑक्सीजन नहीं पहुंची तो उस मरीज का क्या होगा…, पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों के साथ हुई वीसी में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का दर्द फूट पड़ा।
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कोरोना के हालात बयां करते हुए गहलोत भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि माहामारी के इस दौर में ऐसे-ऐसे किस्से सामने आ रहे हैं कि रात को नींद तक नहीं आती। सिफारिशें आती हैं कि एक बेड दिलवा दीजिए। डॉक्टर कहते हैं किस मरीज को हटाकर बेड दें। परिजन मरीजों को लेकर भटक रहे, कहीं बेड नहीं मिला, कहीं बेड मिला तो ऑक्सीजन नहीं मिली। कुछ घंटे या दिन में युवाओं की मौत हो गई। ऐसी भयावह स्थिति की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
न ऑक्सीजन पैदा कर सकते और न ही इतनी दवा बना सकते
गहलोत ने कहा कि अभी तो 15-20 हजार मरीज ही अस्पताल पहुंचे हैं। कई जिलों में तो अस्पतालों में नए मरीजों को भर्ती करने के लिए जगह ही नहीं बची है। अस्पतालों में भी एक सीमा तक कोरोना से लड़ पाएंगे। यदि संक्रमितों की संख्या ऐसे ही बढ़ती गई तो उसके अनुसार न तो ऑक्सीजन पैदा कर पाएंगे और न ही इतनी दवाएं बना सकते हैं। माहामारी से लड़ते-लड़ते 13 से 15 महीने हो गए डॉक्टर्स व नर्सेज भी थक गए।
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ऑक्सीजन व दवाओं की कमी से मचा हाहाकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑक्सीजन व दवाओं की व्यवस्था केंद्र सरकार ने अपने हाथ में ले रखी है। ऑक्सीजन एवं दवाओं की कमी के कारण राज्य में हाहाकार मचा है। राज्य सरकार, सामाजिक संस्थाएं और भामाशाह मिलकर बड़े-बड़े अस्पताल तो खड़े कर लेंगे लेकिन ऑक्सीजन के बिना ये किस काम के? उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन, वैक्सीन व दवाएं केंद्र से मांग रहे हैं। पर्याप्त मात्रा में इनकी आपूर्ति होगी तो हालातों में बेहतर सुधार हो सकेगा। हम शिकायत नहीं कर रहे, बल्कि मांगने से ही काम चलेगा।
जहां भी पीडि़त देखो, तुरंत मदद करो
गहलोत ने जनप्रतिनिधियों व जनता से अपील की है कि संकट की इस घड़ी में मानवता का एक ही दुश्मन कोरोना है, जिससे हमें भिड़ जाना है। जहां भी पीडि़त देखों, तुरंत उसकी मदद करो, जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाओ।
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इटली में बुजुर्गों का इलाज बंद
गहलोत ने वीसी के जरिए जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि इटली में 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों का इलाज करना बंद कर दिया है। वे मरे तो मरें, युवा व बच्चे नहीं मरने चाहिए। यह स्थिति हमारे सामने आई तो कई तरह के विचार दिल में आए। भारत में बुजुर्गों का खास ख्याल रखा जाता है। हमारे यहां घर-जमीन, गहने बेचकर बुजुर्गों का इलाज कराते हैं। यह हमारी परम्परा है। इंग्लेंड ने चार-पांच महीने लॉकडाउन लगाया तब कोरोना पर काबू पाया जा सका।
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कोरोना की तीसरी-चौथी लहर बच्चों के लिए घातक
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में कोरोना की तीसरी-चौथी लहर के प्रकोप को लेकर बातें हो रही हैं। इन लहर को बच्चों के लिए घातक मानी जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कोविड की आगामी लहर बच्चों को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में हमें कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां जैसे मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना जैसे नियमों को हमारी दिनचर्या में शामिल करना होगा। दुनिया का कोई वैज्ञानिक नहीं जानता कि कल क्या होगा।