हाड़ौती की आवाज़ खामोश हुई, साहित्य का दीप बुझा

वरिष्ठ कवि एवं गीतकार दुर्गादान सिंह गौड़ को TIS मीडिया परिवार की विनम्र श्रद्धांजलि

कोटा l TIS मिडिया 

हाड़ौती की माटी, लोकसंस्कृति और जनभावनाओं को अपनी रचनाओं में स्वर देने वाले वरिष्ठ कवि एवं गीतकार दुर्गादान सिंह गौड़ का निधन हाड़ौती ही नहीं, बल्कि समूचे राजस्थानी साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके निधन के समाचार से साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े लोगों में गहरा शोक व्याप्त है।

दुर्गादान सिंह गौड़ हाड़ौती गीत परंपरा के उन सम्मानित रचनाकारों में रहे, जिन्होंने लोकभाषा को अपनी संवेदनशील लेखनी से साहित्य की प्रतिष्ठा प्रदान की। उनकी चर्चित कृति ‘पाणी में चांद घुळै छै’ ने हाड़ौती साहित्य में उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई। वहीं ‘गोरी गोरी गजबण’ जैसे गीतों ने उन्हें मंचीय लोकप्रियता के साथ जनमानस का प्रिय रचनाकार बनाया।

‘गोरी गोरी गजबण’ की स्मृति में…

गोरी-गोरी गजबण की छवि, हाड़ौती की धरती पर मुस्काए,

लोकगीतों की मीठी तान में, गौड़ जी आज भी याद आए।

माटी की खुशबू, लोक की बोली, उनके गीतों में बसती थी,

उनकी लेखनी की अमर ज्योति, पीढ़ियों तक यूं ही जलती रहे।

गौड़ की रचनाओं में हाड़ौती की माटी की महक, लोकजीवन की सहजता और अंचल की सांस्कृतिक आत्मा स्पष्ट दिखाई देती थी। उनके गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं थे, बल्कि हाड़ौती समाज की संवेदनाओं, परंपराओं और लोकभावना के जीवंत दस्तावेज थे।

उनकी साहित्यिक यात्रा ने हाड़ौती भाषा और लोक साहित्य को समृद्ध किया। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोकभाषा को मंच दिया और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी साहित्यिक विरासत छोड़ी, जिसे सदैव स्मरण किया जाएगा।

TIS मीडिया परिवार हाड़ौती के इस महान रचनाकार, साहित्यकार और गीतकार के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करता है। गौड़ जी भले ही हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी रचनाएं, उनके गीत और हाड़ौती के प्रति उनका समर्पण सदैव जीवित रहेगा।

हाड़ौती की साहित्यिक परंपरा में उनका योगदान लंबे समय तक स्मरण किया जाता रहेगा।

विनम्र श्रद्धांजलि।

शत-शत नमन। 🕯️💐🙏

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