गरमाई सियासत! महिपाल सिंह मकराना का बड़ा ऐलान, सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम
- एक करोड़ मुआवजा और न्यायिक जांच की मांग

जयपुर में सवर्ण न्याय यात्रा के दौरान हुए विवाद के बाद श्री राजपूत करणी सेना ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए पुलिस कार्रवाई की जांच, मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग रखी है.
करणी सेना का आरोप है कि शांतिपूर्ण यात्रा के दौरान पुलिस कार्रवाई की वजह से एक कार्यकर्ता की मौत हुई, जबकि पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है.
सवर्ण न्याय यात्रा के बाद बढ़ा विवाद
जयपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि सवर्ण न्याय यात्रा 24 दिनों तक करीब 800 किलोमीटर का सफर तय करते हुए पूरी तरह शांतिपूर्वक चली. उनका आरोप है कि जयपुर पहुंचने पर कालवाड़ पुलिया के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर यात्रा रोक दी. इसके बाद प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया और लाठीचार्ज भी किया गया. उनका दावा है कि इसी दौरान उनके साथी देवराज सिंह की तबीयत बिगड़ी और बाद में उनकी मौत हो गई.
7 दिन का अल्टीमेटम
करणी सेना ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं. इनमें वाटर कैनन चलाने वाले पुलिस अधिकारियों को निलंबित करना, मृतक देवराज सिंह के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देना और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना शामिल है. मकराना ने साफ कहा कि अगर 7 दिन के भीतर इन मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा.
एक करोड़ मुआवजा और न्यायिक जांच की मांग
देवराज सिंह की मौत के बाद संगठन ने पुलिस कार्रवाई को जिम्मेदार बताते हुए मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग भी की है. करणी सेना ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कदम उठाने की मांग की है. संगठन का कहना है कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन प्रशासन ने बल प्रयोग किया.
निकाय और पंचायत चुनाव में विरोध का ऐलान
करणी सेना ने घोषणा की है कि यूजीसी से जुड़े नए नियमों के विरोध में अब पूरे राजस्थान में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा. साथ ही आगामी नगर निगम और पंचायत चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों का विरोध किया जाएगा. मकराना ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक समाज का नहीं, बल्कि विभिन्न वर्गों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा.
पुलिस ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर जयपुर पुलिस ने करणी सेना के आरोपों को खारिज किया है. पुलिस का कहना है कि रैली को केवल कलेक्ट्रेट तक की अनुमति दी गई थी, लेकिन कुछ लोग तय सीमा से आगे बढ़ने लगे. ऐसे में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीमित बल का इस्तेमाल किया गया. पुलिस के अनुसार शुरुआती जानकारी में देवराज सिंह की मौत का कारण प्रदर्शन के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ना सामने आया है. मामले की जांच जारी है. देवराज सिंह डीडवाना-कुचामन जिले के पलाड़ा गांव के रहने वाले थे और ओबीसी समाज से आते थे.







