सरपंच को देख वैक्सीन लगवाने आगे आए ग्रामीण, 1000 फीट ऊंचा पहाड़ पार कर पहुंची मेडिकल टीम

TISMedia@अलवर. कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच पूरे देश में टीकाकरण अभियान पूरे जोर पर है। बुधवार को टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट सरिस्का के कोर एरिया में सबसे ऊंची पहाड़ी पर बसे क्रास्का गांव में वैक्सीनेशन किया गया। यह ना सिर्फ ग्रामीणों को कोरोना महामारी के संक्रमण से बचाएगा बल्की इस से टाइगर सहित अन्य वन्यजीवों को भी संक्रमण से दूर रखा जा सकेगा। वैक्सीनेशन टीम के 4 सदस्य माधोगड़ ग्राम पंचायत सरपंच पेमाराम के साथ जंगल में करीब 1000 फीट से अधिक ऊंचाई वाला पहाड़ पैदल ही पार कर गांव क्रास्का पहुंचे। शुरूआत में ग्रामीण वैक्सीन लगवाने पर आनाकानी कर रहे थे। लेकिन जब सरपंच को वैक्सीन लगवाता देखा तो वे सब भी तैयार हो गए।
READ MORE: एक ‘सरकंडे‘ की क्रांति: तराई के इलाके में गाढ़ा जैविक खेती का झंडा
यह था ग्रामीणों का कहना
मेडिकल टीम और सरपंच पेमाराम जब पहुंचे तो ग्रामीणों ने कहा कि खुद सरपंच पहाड़ चढ़कर आए है तो हम भी कोरोना महामारी के खिलाफ इस लड़ाई में साथ देंगे और टीकाकरण करवाएंगे। जानकारी के मुताबिक आपको बता दें कि इस गांव में अभी तक एक भी कोरोना पॉजिटिव नहीं सामने आया है। इसलिए ग्रामीणों को लगता है कि उनके यहां संक्रमण का खतरा नहीं है। इस वजह से ही वैक्सीन भी नहीं लगवाई थी।
60 लोगों का हुआ टीकाकरण
क्रास्का गाव का रास्ता सरिस्का के जंगल और पहाड़ के बीचोंबीच से जाता है। यह ग्राम पंचायत माधोगढ़ से करीब 20 कीलोमीटर की दूरी पर है। इस गांव में मेडिकल की कोई सुविधा नहीं है। किसी के भी बीमार होने पर उसे पहाड़ व जंगलो से नीचे लाना पड़ता है। यह पूरा गांव पशुपालन पर ही निर्भर है। उनके पशु जंगल में चरते है। जिनके दूध से इनकी आजीविका चलती है। क्रास्का गांव में करीब 100 से 150 लोग रहते है। जिन में से यहां 60 लोगों को वैक्सीन लगाई गई है।
जानवरों में संक्रमण का खतरा
गांव के लोगों का टीकाकरण की वजह यह भी है कि क्रास्का गांव के आसपास टाइगर और अन्य जीव का मूवमेंट रहता है। यदि गांव में किसी भी व्यक्ति को कोरोना होता है तो जानवरों में भी कोरोना संक्रमण के फैलने का खतरा हो सकता है।
READ MORE: अब अध्यात्म हुआ डिजिटलाइज, गीता परिवार के साथ ऑनलाइन कीजिए गीता पाठ, हवन और पूजन
2008 में वापस टाइगर का विस्थापन
2003 में सरिस्का पूरी तरह से टाइगरविहीन हो गया था। इसके बाद 2008 में सरिस्का में वापस टाइगर का विस्थापन शूरू किया गया। यहां टाइगर को धीरे-धीरे वापस आबाद किया गया। फिलहाल सरिस्का में 23 टाइगर और शावक हैं। जिन्हें देखने देश दुनिया के पर्यटक आने लगे है। सरकार ने यहां टाइगर के विस्थापन के लिए रणथम्भौर से पहला टाइगर सुल्तान शिफ्ट किया था।