सपा को तराई में भाजपा ने दी जबरदस्त पटकनी, मुख्यमंत्री का ख्वाब देख रहे अखिलेश के होश उड़े
जिला पंचायत चुनावों में सपा के प्रत्याशियों ने डाले हथियार, मतदान से पहले छोड़ी पार्टी

- पीलीभीत और शाहजहांपुर में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने पर्चा वापस लिया
- दोनों जिला पंचायतों में भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए जिला पंचायत अध्यक्ष
TISMedia@Bareilly: उत्तर प्रदेश की सत्ता हथियाने का ख्वाब देख रही समाजवादी पार्टी को जिला पंचायत चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने जमीन सुंघा दी है। आलम यह है कि 20 से ज्यादा जिलों में समाजवादी पार्टी को अपने जिलाध्यक्षों को पार्टी से बेदखल करना पड़ा है। वहीं तराई की बात करें तो भाजपा ने रातों रात समाजवादी पार्टी के जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों को ही तोड़ लिया। नतीजन, शाहजहांपुर और पीलीभीत में भाजपा ने बिना किसी विरोध के अपने प्रत्याशियों को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवा दिया। भाजपा की इस रणनीति ने यूपी का सीएम बनने का ख्वाब देख रहे सपा मुखिया के होश ही उड़ा दिए हैं।
बुजुर्ग नेताओं को दरकिनार करने का खामियाजा समाजवादी पार्टी को लगातार उठाना पड़ रहा है। आलम यह है कि पार्टी का मुखिया बनने के बाद अखिलेश यादव ने जिलों की कमान युवाओं को तो सौंप दी, लेकिन वह सियासत में इतने माहिर नहीं निकले के विरोधियों की चालों का जवाब देना तो दूर उनका सामना भी कर सकें। विधानसभा चुनाव का ट्रायल कहे जाने वाले जिला पंचायत चुनावों में अनुभव की इसी कमी के चलते समाजवादी पार्टी को मुंह की खानी पड़ी है।
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जिला पंचायत चुनाव में पस्त हुई पार्टी
विधानसभा चुनावों का ट्रायल कहे जा रहे जिला पंचायत चुनावों में समाजवादी पार्टी बुरी तरह पस्त हो गई। आलम यह रहा कि गोंडा जैसे जिले में सपा पार्टी प्रत्याशी का पर्चा तक दाखिल नहीं करवा सकी। श्रावस्ती जिले की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही। यहां भी सपा नेता जिला अध्यक्ष का प्रत्याशी तक नहीं ढ़ूंढ सकी। सिर्फ गोंड़ा और श्रावस्ती ही नहीं समाजवादी पार्टी झांसी, गोरखपुर, मुरादाबाद, आगरा, मऊ, गौतमबुद्धनगर, बलरामपुर, भदोही और ललितपुर जिलों में भी जिला पंचायत चुनावों के लिए अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों का पर्चा तक दाखिल नहीं करवा सकी। 11 जिलों में बुरी तरह भद पिटने के बाद खिसियाए सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इन जिलों के जिलाध्यक्षों को ही पदों से हटा दिया। हालांकि इतने के बाद भी सपा मुखिया उन्हें पार्टी के बाहर निकालने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
तराई में सपा चारों खाने चित्त
तराई के इलाके में समाजवादी पार्टी को भाजपा ने ऐसा धोबी पाट मारा कि उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने का ख्वाब देख रहा अखिलेश दल चारों खाने चित्त हो गया। रुहेलखंड के पीलीभीत जिले में समाजवादी पार्टी अपनी ही चाल में फंस गई। भारतीय जनता पार्टी के असंतुष्ट नेता स्वामी प्रवक्तानंद को जिला पंचायत अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया था। लेकिन, अचानक मंगलवार को प्रवक्तानंद ने अपना पर्चा वापस ले लिया। नतीजन, भाजपा नेता गुरभाग सिंह की पत्नी डॉ. दलजीत कौर निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित हो गई। शाहजहांपुर में भी सपा उम्मीदवार बीनू सिंह ने नाम वापस ले लिया और भाजपा प्रत्याशी को निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुन लिया गया। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली तस्वीर पीलीभीत की रही। वह इसलिए क्योंकि भाजपा के पुराने नेता रहे स्वामी प्रवक्तानंद को समाजवादी पार्टी ने अपने पाले में लेने का दावा किया था। अध्यक्ष चुनाव में उम्मीदवार न बनाए जाने को लेकर नाराज चल रहे स्वामी को सपा ने रातों रात नाटकीय घटनाक्रम के बीच पार्टी की सदस्यता दिलाकर उम्मीदवार बना दिया लेकिन नाम वापसी के आखिरी दिन प्रवक्तानंद पलटी मार गए और नाम वापस लेकर फिर अपने पुराने दल भाजपा के साथ हो लिए।
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सपा की हुई फजीहत
जिला पंचायत चुनावों के इस घटनाक्रम को लेकर सपा के स्थानीय नेताओं में पार्टी के जिला नेतृत्व के प्रति नाराजगी बढ़ा दी है और ये सवाल उठ रहे हैं कि स्थानीय नेताओं के अति-उत्साह में सपा को फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। समाजवादी पार्टी पीलीभीत के नेताओं के मुताबिक पार्टी के पास 12 सदस्य थे। कुछ निर्दलीय और दूसरे दलों के सदस्यों का भी समर्थन था। पार्टी के इस गणित के आधार पर ये संभावना जताई जा रही थी कि चुनाव में कड़ी टक्कर दे सकती है। लेकिन ये सारा खेल तब बिगड़ गया, जब सपा के उम्मीदवार ही मैदान छोड़कर चले गए। पार्टी के एक नेता कहते हैं कि इसमें उम्मीदवार का दोष शायद कम है। क्योंकि पार्टी उन्हें ये विश्वास दिलाने में असफल रही कि वह पूरी मजबूती के साथ लड़ाएगी। शक्तिप्रदर्शन का मुजाहिरा न होने पर ही प्रवक्तानंद वापस हुए हैं। हालांकि इसके दूसरे कारण भी बताए जा रहे हैं, जो विशुद्ध राजनीतिक हैं, और इसी से सपा परास्त हुई है। इस फजीहत के बाद समाजवादी पार्टी के यूपी में विधानसभा चुनाव जीतने के मंसूबे हिला कर रख दिए हैं।