योगी ने तोड़ी आजम खान की “रीढ़” जौहर यूनिवर्सिटी की 70 एकड़ जमीन पर यूपी सरकार का कब्जा
इलाहबाद हाईकोर्ट में सपा सांसद की याचिका खारिज होते ही जमीन पर किया प्रशासन ने कब्जा

- जौहर यूनिवर्सिटी थी सपा के दिग्गज नेता का ड्रीम प्रोजेक्ट, एमएमयू तक को दे डाली थी टक्कर
- विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से ही मुस्लिम राजनेताओं का एक बड़ा धड़ा भी हो गया था उनके खिलाफ
TISMedia@Rampur समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और रामपुर लोकसभा के सांसद सांसद आजम खान को बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर याचिका खारिज होते ही योगी सरकार ने रामपुर में स्थापित की गई आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की 70 एकड़ से ज्यादा जमीन पर योगी सरकार ने कब्जा कर लिया है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद आजम खान के खिलाफ एक दो नहीं बल्कि 100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए गए थे। जिनमें से एक उनकी यूनिवर्सिटी की जमीन का भी था।
समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान आजम खान ने रामपुर के ही स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मोहम्मद अली जौहर नाम पर मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण किया था, लेकिन उनके इस सपने को यूपी की सियासी हवा बदलते ही नजर लग गई। मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को साल 2005 में कुछ शर्तों के साथ विश्वविद्यालय का निर्माण करने के लिए यूपी सरकार ने जमीन दी थी। इन शर्तों का पालन नहीं करने का आरोप लगा योगी सरकार ने आजम खान से जमीन छीनने की कार्यवाही शुरू कर दी। इस कार्यवाही को रोकने और जमीन ट्रस्ट के पास ही रहने देने के लिए आजम खान ने इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसे कोर्ट ने अब आकर खारिज कर दिया।
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ट्रस्टी है आजम का पूरा परिवार
रामपुर में यूनिवर्सिटी बनाने के लिए आजम खान ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की स्थापना की थी। खुद आजम खान इस ट्रस्ट के अध्यक्ष बन गए, जबकि उनकी पत्नी डॉक्टर तजीन फातिमा ट्रस्ट की सचिव और बेटा अब्दुल्ला आजम खान ट्रस्ट सक्रिय सदस्य। जौहर यूनिवर्सिटी को आजम खान के परिवार का यही ट्रस्ट “मौलाना मुहम्मद अली जौहर ट्रस्ट” संचालित करता है और यह अल्पसंख्यक संस्थान है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2005 में जौहर ट्रस्ट को 12.50 एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदने की अनुमति दी थी, तब कुछ शर्तें भी लगाई थीं। ट्रस्ट ने तब कहा था कि वह गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दिलाएगी और चैरिटी का कार्य करेगी लेकिन आरोप है कि ट्रस्ट ने इन शर्तों की पालना नहीं की।
किस नियम के तहत हुई कार्यवाही
जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ भी तमाम कार्रवाई शुरू की गई थीं. इन्हीं में एक कार्यवाही जमींदारी उन्मूलन अधिनियम 1950 के सीलिंग के नियम के अंतर्गत, जिसमें कोई भी व्यक्ति, परिवार या संस्था साढ़े 12 एकड़ से अधिक जमीन बिना प्रदेश सरकार की अनुमति के नहीं रख सकता है. इसी नियम के अंतर्गत प्रशासन ने जौहर यूनिवर्सिटी पर अपनी आंख टेड़ी कर ली और यह मानते हुए के साढ़े 12 एकड़ से अधिक भूमि रखने हेतु जौहर यूनिवर्सिटी को दी गई है।
बीजेपी नेता ने की थी शिकायत
जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के काम काज पर तय नियमों की पालना न करने का आरोप लगाते हुए बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसकी शिकायत की थी। बीजेपी नेता की शिकायत पर यूपी सरकार ने जांच बिठा दी। जांच रामपुर जिला प्रशासन को सौंपी गई। जिसमें शर्तों के उल्लंघन की बात सही पाई। जौहर ट्रस्ट को हर वर्ष एक अप्रैल को जिलाधिकारी को प्रगति रिपोर्ट देनी होती है, लेकिन इस बीच ट्रस्ट ने कोई रिपोर्ट नहीं दी। ट्रस्ट के नाम पर खरीदी गई जमीनों की खरीद-फरोख्त में भी नियमों का उल्लंघन किया गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद रामपुर के अपर जिला अधिकारी प्रशासन ने ट्रस्ट और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ अदालत में मुकदमा दर्ज कराया। जिसे वैमनस्य की कार्यवाही बताते हुए आजम खान ने इलाहबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
जमीन को लेकर है विवाद
आजम खान की यूनिवर्सिटी की जमीन पर आरोप लगा था कि शत्रु संपत्ति को वक्फ की संपत्ति बताकर कब्जा किया गया है। चकरोड की जमीन की अदला-बदली करने में भी अनियमितता मिली। इसी तरह कोसी नदी क्षेत्र की जमीन का आवंटन गलत तरीके से कराया। इसके अलावा अनुसूचित जाति के लोगों की 101 बीघा जमीन बिना अनुमति के खरीद ली गई थी। जिला शासकीय अधिवक्ता अजय तिवारी ने कोर्ट को बताया था कि अनुसूचित जाति के लोगों की 12.50 एकड़ जमीन बिना अनुमति के खरीदी गई थी। इस कारण योगी सरकार ने पहले ही इस पर कब्जा कर लिया था। इसी तरह 26 किसानों की भी करीब तीन एकड़ जमीन पर कब्जा था, जिसे सरकार ने उनकी जमीन पर भी प्रशासन की मदद से कब्जा वापस दिला दिया था।
अब यूनिवर्सिटी को नियंत्रण में लेगी सरकार
जौहर यूनिवर्सिटी के पास करीब 265 एकड़ जमीन थी लेकिन, अब 12.50 एकड़ ही बची है। यह जमीन भी यूनिवर्सिटी परिसर से बाहर बताई जा रही है। यह जमीन ट्रस्ट ने सबसे पहले खरीदी थी, इसलिए इसे ट्रस्ट के कब्जे में छोड़ा गया है। बाकी जमीन सरकार के कब्जे में आ गई है। यूनिवर्सिटी के पास महज 12.50 एकड़ जमीन बची है, जबकि नियमानुसार 50 एकड़ चाहिए। ऐसे में जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना के नियमों का आधार ही खत्म हो जाता है, लेकिन विश्वविद्यालय को बंद करने के बजाय यूपी सरकार इसका खुद संचालन करने की कोशिश में जुटी है और इसके लिए बकायदा योगी सरकार जौहर यूनिवर्सिटी को अपने नियंत्रण में करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए बकायदा प्रशासन ने सरकार को एक रिपोर्ट भी भेजी है। इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद जौहर यूनिवर्सिटी पर सरकार के कब्जे का रास्ता साफ हो गया है।