अटरू फर्जी पट्टा आवंटन घोटाला: एसीबी कोर्ट ने भाजपा विधायक मदन दिलावर को किया बरी
वित्त वर्ष 1998-99 में हुआ था फर्जी पट्टा आवंटन घोटाला, दिलावर सहित 20 आरोपी दोषमुक्त

- कोर्ट ने ग्राम पंचायत सरपंच, सचिव और नाकेदार को सुनाई पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा,
- तीनों दोषियों पर लगाया 90 हजार रुपए का अर्थदण्ड, भूखण्ड आवण्टियों को हुई 3 साल के कठोर कारावास की सजा
TISMedia@Kota अटरू ग्राम पंचायत की चारागाह भूमि को आबादी में कन्वर्ट करवाने के बाद उस पर भूखण्ड काटकर नीलामी के जरिये बेचने के मामले में भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय कोटा (ACB Court Kota) ने भाजपा विधायक मदन दिलावर सहित 21 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। जबकि ग्राम पंचायत के तत्कालीन सरपंच, सचिव और नाकेदार को पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही इन पर 90 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। इसके साथ ही भूखंड आवंटियों को भी 3-3 साल की कठोर सजा सुनाई गई है।
सहायक निदेशक अभियोजन अशोक कुमार जोशी ने बताया कि साल 1998 में ग्राम पंचायत अटरू के सरपंच बृजमोहन सोनी ने पंचों के साथ मिलकर ग्राम पंचायत अटरू में स्थानीय लोगों के लिए आबादी की जमीन की जरूरत बताकर चारागाह की जमीन को हड़पने की साजिश रची थी। इसके लिए सरपंच ने तत्कालीन ग्राम सचिव राजेन्द्र कुमार, जितेन्द्र कुमार और नाकेदार कस्तूर चंद के साथ मिली भगत कर जमीन हड़पने की योजना बनाई।
अपनों को ही नीलाम कर दी जमीन
जमीन हड़पने की साजिश को अमल में लाने के लिए इन लोगों ने सबसे पहले अटरू पंचायत में चारागाह की जमीन को आबादी में कन्वर्ट करवाने के लिए प्रस्ताव भेजा। इस प्रस्ताव पर बारां के जिला कलेक्टर प्रस्तावित जमीन को कन्वर्ट करने के बाद नीलामी की विज्ञप्ति प्रकाशित करवा दी। इस पूरी प्रक्रिया में राजस्थान पंचायती राज नियमों की अवहेलना करते हुए कुल 26 व्यक्तियों को डीएलसी और मार्केट रेट से बेहद कम कीमतों पर भूखंड आवंटित कर पट्टे जारी कर दिए गए। पट्टे हासिल करने वाले लाभार्थी में ग्राम पंचायत सचिव और नाकेदारों की पत्नियां अनुसूइया, गीता, रमा और किरण भी शामिल थीं।
विधायक समेत 30 पर धोखाधड़ी का आरोप
पट्टे आवंटित होने के बाद जब घोटाले का खुलासा हुआ तो लोगों ने जिला कलेक्टर बारां को इस मामले की शिकायत की। शिकायत के आधार पर जब जांच करवाई गई तो पूरी नीलामी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई। जिसके बाद जिला कलेक्टर ने पट्टे निरस्त कर आवंटित जमीन को फिर से चारागाह भूमि में कन्वर्ट करने के आदेश जारी कर दिए। इतने पर भी मामला ठंडा नहीं पड़ा और विधायक मदन दिलावर समेत 30 लोगों के खिलाफ अटरू ग्राम पंचायत की जमीन को हड़पने, पद का दुरुपयोग करने, धोखाधड़ी और आपराधिक षडयंत्र रचने के आरोप लगा एसीबी में शिकायत दर्ज कराई गई।
विधायक के खिलाफ आरोप पत्र
एसीबी ने जांच में आरोपों को सही मानते हुए भाजपा विधायक मदन दिलावर सहित 30 लोगों को आरोपी बनाया और उनके खिलाफ कोटा की एसीबी कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान दो अभियुक्तों किरण एवं रामदयाल की मृत्यु हो गई। जिसके चलते उनके नाम अदालती कार्यवाही से हटा दिए गए। जमीन घोटाले की सुनवाई पूरी कर एसीबी कोर्ट के न्यायाधीश प्रमोद कुमार मलिक ने सोमवार को इस मामले में फैसला सुनाते हुए विधायक मदन दिलावर सहित 21 लोगों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। जबकि सरपंच, सचिव और नाकेदारों बृजमोहन सोनी, राजेन्द्र कुमार, जितेन्द्र कुमार एवं कस्तूरचंद को पांच-पांच साल कठोर कारावास एवं 90 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके साथ ही नीलामी के जरिए जमीनें हासिल करने वाले आवंटी अनूसूईया, गीता और रमा देवी को तीन तीन वर्ष के कठोर कारावास एवं 30,000 रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित करने का आदेश जारी कर दिया।