खुद बचाएं अपनी जान! कोटा के अस्पतालों में एक भी ऑक्सीजन बेड खाली नहीं है, व्यवस्था हुई पंगु

  • कोटा के अस्पतालों में 1084 ऑक्सीजन, आईसीयू और वेल्टिनेटर बेड
  • सिर्फ दो बेड खाली, बाकी सभी पर भर्ती हैं गंभीर मरीज, हालात हुए बेहद खराब

कोटा. कोरोना के कहर के बीच सबसे बुरी खबर यह है कि यदि आप कोरोना की चपेट में आ जाते हैं और हालत गंभीर हो जाती है तो आपको कोटा के अस्पतालों में जगह नहीं मिलने वाली, क्योंकि किसी भी अस्पताल में एक भी बेड खाली नहीं है। व्यवस्था पूरी तरह पंगु हो चुकी है। जिसके चलते सभी अस्पतालों ने नए मर्जी भर्ती कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। आलम यह है कि कोटा के 1084 ऑक्सीजन बेड में से सिर्फ 2 बेड ही खाली बचे हैं।

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ऑक्सीजन बेड हुए फुल
कोटा में संक्रमण के हालात दिनों दिन भयावह होते जा रहे हैं। आलम यह है कि खबर लिखे जाने तक कोटा के किसी भी अस्पताल में एक भी ऑक्सीजन बेड खाली नहीं है। दिन भर अस्पतालों के चक्कर काट रहे कोविड मरीजों और उनके परिजनों के दावे तो छोड़िए कोरोना मरीजों के लिए अस्पतालों में खाली बेड की लाइव अपडेट करने वाले राजस्थान सरकार के कोविड पोर्टल https://covidinfo.rajasthan.gov.in/COVID19HOSPITALBEDSSTATUSSTATE.aspx के मुताबिक कोटा में सिर्फ 755 ऑक्सीजन बेड मौजूद हैं, लेकिन इनमें से एक भी बेड खाली नहीं है। जबकि बिना वेल्टिनेटर वाले 201 आईसीयू बेड में से 200 बेड फुल हैं। वहीं वेल्टिनेटर वाले 128 बेड में से सिर्फ एक ही बेड खाली है। ऐसे में ऑक्सीजन के लिए भाग रहे मरीजों को कोटा के अस्पतालों ने भर्ती करने से साफ इन्कार कर दिया है। जिसके चलते बुधवार को कोटा के हालात बेहद संवेदनशील हो गए।

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सांसें उखड़ें तो खुद करें इंतजाम
कोविड मरीज व उनके परिजन दिनभर शहर के अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें बेड नहीं मिल रहा। डडवाड़ा निवासी 36 वर्षीय राहुल गडकरी के साथ ऐसा ही हुआ। एक सप्ताह पहले कोरोना पॉजिटिव होने के बाद से राहुल होम आइसोलेट थे। मंगलवार रात उनकी सांसें उखड़ने लगी तो परिजन रात को ही उन्हें शहर के 5 प्राइवेट अस्पतालों में ही नहीं एमबीएस और न्यू मेडिकल कॉलेज तक लेकर गए। लेकिन, सभी जगह एक ही जवाब मिला कि “ऑक्सीजन बेड” खाली नहीं है। कहीं से कोई मदद न मिलती देख राहुल के छोटे भाई रोहित ने मंगलवार सुबह राजस्थान सरकार के हेल्पलाइन नंबर 181 पर भी फोन कर मदद मांगी, लेकिन यहां से भी उसे बुधवार सुबह तक सिर्फ आश्वासन ही मिला।

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काम नहीं आ रहे कॉन्सेंट्रेटर
चिकित्सा विभाग के अफसरों और एमबीएस हॉस्पीटल के चिकित्सकों ने मरीजों की उखड़ती सांसें बचाने के लिए शहर भर के लोगों से ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर देने की अपील की थी। जिसके बाद खुद एमबीएस प्रशासन ने 200 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर का ऑर्डर जारी कर दिया। वहीं समाज सेवी संगठन भी बड़ी तेजी से मदद करने के लिए आगे आए, लेकिन हालात यह हैं कि यह ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर किसी काम नहीं आ रहे। न्यू मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. सीएस सुशील ने बताया कि हमारे यहां एनआईवी पर करीब 60 मरीज हैं, इन मरीजों को ही एक दिन में करीब 1000 सिलेंडर चाहिए। सबसे ज्यादा ऑक्सीजन इन्हीं मरीजों में कंज्यूम हो रही है, क्योंकि इनमें से ज्यादा मरीज 50 से 60 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन पर है। ऐसे में ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर प्रति मिनट सिर्फ 10 लीटर ऑक्सीजन तैयार कर पाता है। जो गंभीर मरीजों के लिए किसी भी सूरत में उपयोगी नहीं है और अस्पतालों में इस समय बेहद गंभीर मरीज ही आ रहे हैं।

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