राजस्थान मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्र चला रहे थे NEET एग्जाम पास कराने वाला गैंग
असली छात्रों की जगह परीक्षा देने जाते थे मेडिकल कॉलेज के फर्स्ट ईयर स्टूडेंट

TISMedia@Kota मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने के लिए सॉल्वर बिठाने का खेल कोई और नहीं बल्कि, मेडिकल कॉलेजों के छात्र ही चला रहे थे। प्रताप नगर थाना पुलिस ने शनिवार शाम आठ डमी अभ्यर्थियों यानि सॉल्वर सहित दस लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें रविवार को कोर्ट में पेश कर 15 सितंबर तक रिमांड लिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि 8 में से 6 सॉल्वर राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) के ही मेडिकल छात्र हैं।
जयपुर से चल रहा था गैंग
थानाधिकारी प्रताप नगर बलबीर सिंह कस्वां ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में जयप्रकाश बेनीवाल व रविंद्र कुमार बीकानेर मेडिकल कॉलेज, राकेश कुमार गढ़वाल व देवांग कुमावत सीकर मेडिकल कॉलेज, हरीश चूरू मेडिकल कॉलेज और आशीष चौधरी नागौर मेडिकल कॉलेज में पढ़ता है। सभी छात्र मेडिकल प्रथम वर्ष के विद्यार्थी हैं। यह सभी कॉलेज आरयूएचएस से ही संबद्ध हैं। इसके अलावा बीकानेर वैटेनरी कॉलेज के छात्र शुभम मूंदडा और इंदौर के वैटेनरी कॉलेज के छात्र शंभूदयाल सैनी को भी गिरफ्तार किया गया है। इस गिरोह के मुख्य आरोपी अनिल व दो अन्य को अभी पुलिस तलाश कर रही है। पुलिस ने एक प्रिंटर भी बरामद किया है। जिसकी मदद से छात्रों के फोटो तैयार किए जाते थे।
जूनियर्स पर डालते हैं डोरे
नीट परीक्षा से एक दिन पहले पकड़े गए डमी अभ्यर्थियों ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि हमारी गैंग परीक्षा से एक साल पहले ही डमी अभ्यर्थियों की तलाश शुरू कर देती थी। इनमें ज्यादातर वह अभ्यार्थी होते थे जो किसी न किसी जूनियर के टच में रहते और पढ़ाई में कमजोर होते थे। नीट एग्जाम देने वाले अभ्यार्थी की जगह परीक्षा दिलाने के लिए मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहे कमजोर ब्रांच के छात्रों को परीक्षाओं में बिठाया जाता था।
गिरोह के मास्टरमाइंड अभी फरार
पुलिस ने बताया कि गिरोह के मास्टमाइंड अभी फरार हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम है जयपुर के प्रताप नगर में किराए का मकान लेकर रहने वाले अनिल का। यह खुद तो कभी नीट का एग्जाम पास नहीं कर पाया, लेकिन इसने कमजोर लड़कों की नब्ज पकड़ उन्हें डॉक्टर बनाने का ठेका लेना शुरू कर दिया। वहीं जयपुर के ही कालाडोरा में रहने वाला शार्दुल शर्मा इस गैंग का पूरा काम देखता था। सॉल्वर लाने-लेजाने से लेकर उनके रुकने और खाने पीने ही नहीं बल्कि पैसों के लेनदेन का सारा हिसाब इसी के पास रहता था। इस गैंग में हरीश नाम के व्यक्ति के भी जुड़े होने की बात की जा रही है, लेकिन इसके बारे में अभी तक पुलिस के पास कोई खास जानकारी ही नहीं है।
मेडिकल कॉलेज में मचा हड़कंप
मुन्ना भाई बनकर एमबीबीएस कराने का खुलासा होते ही आरयूएचएस में हड़कंप मचा है। नीट यूजी 2021 की परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रविवार के दिन भी मेडिकल कॉलेजों में क्लास लगाने का फरमान सुना डाला। इतना ही नहीं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्यों को एमबीबीएस में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की फेस-टू-फेस अटेंडेंस लगाने तक के निर्देश दिए थे। क्योंकि सॉल्वर गिरोह में मेडिकल प्रथम और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी ही पेपर सॉल्व करवाने के आरोप में पकड़े गए हैं। कोटा मेडिकल कॉलेज में तो प्रिंसिपल डॉक्टर विजय सरदाना ने स्टूडेंट के ऊपर मेंटर भी लगा दिए। कोटा मेडिकल काॅलेज में रविवार को सुबह 10 से दाेपहर 1 बजे तक स्टूडेंट्स की क्लास लगाई गई। कुल 39 स्टूडेंट एब्सेंट रहे। अब मेडिकल काॅलेज ने उनके पेरेंट्स से लिखित जवाब मांगा है। मेडिकल काॅलेज प्रिंसिपल डाॅ. विजय सरदाना ने बताया कि पहले बैच के 28 और दूसरे बैच के 11 स्टूडेंट एब्सेंट रहे।